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	<title>मुनि श्री प्रमाण सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनि श्री प्रमाण सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जबलपुर जैन समाज का प्रेरणादायक ऐतिहासिक निर्णय : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने समाज को धर्म संस्कृति सुरक्षा की सीख दी  </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 10:58:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय समाज हित में लिए गए। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय समाज हित में लिए गए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय समाज हित में लिए गए। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि अल्प समय के लिए संस्कार धानी में मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपनी मंगल देशना में समाज को संबोधित करते हुए समाज को धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए समाज जन को सीख दी और प्रतिज्ञा दिलाई। मल्टी कॉशन होटल एवं रात्रि में होने वाली शादियों में समाज सम्मिलित नहीं होगी। मुनि श्री प्रमाण सागर जी की प्रेरणा एवं सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पंचायत सभा ने भारत वर्षीय जैन समाज के लिए प्रेरणादायक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया।</p>
<p><strong>श्री दिगंबर जैन पंचायत सभा ने लिए यह प्रस्ताव </strong></p>
<p>जिस स्थान पर मांसाहारी एवं शाकाहारी भोजन एक ही परिसर में बनता हो एवं किचन अलग-अलग हो या बिल्डिंग अलग-अलग हो ऐसे मल्टी कॉशन होटल जैन समाज वैवाहिक पारिवारिक आयोजन नहीं करेगी। संपूर्ण वैवाहिक कार्यक्रम दिन में ही किए जाएंगे, सूर्यास्त के बाद भोज नहीं दिया जाएगा। महिला संगीत के स्थान पर भक्ति संगीत किया जाएगा या पारंपरिक गीतों का कार्यक्रम किया जाएगा। महिला संगीत के लिए कोरियोग्राफर नहीं बुलाए जाएंगे। समाज उन्ही वैवाहिक परिसरों में अपने आयोजन करेगी। जिन्हें श्री दिगंबर जैन पंचायत सभा द्वारा पूर्ण शाकाहारी का प्रमाण पत्र दिया गया हो। इसकी जानकारी विवाह स्थल वालों से अवश्य प्राप्त करें। विशेष- रात्रि शादी एवं मल्टी कॉशन वाले परिसर में होने वाली शादियों में समाज सम्मिलित नहीं होगी।</p>
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		<title>जैन समाज जबलपुर का दूरदर्शी प्रेरणादायक संकल्प: मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने दिन में विवाह एवं दिन में ही भोज करवाने की प्रतिज्ञा दिलवाई  </title>
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		<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 15:15:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संस्कार धानी जबलपुर जैन समाज का यह निर्णय भारत वर्षीय जैन समाज के लिए सचमुच अनुकरणीय है। जबलपुर में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने समाज जन को प्रतिज्ञा दिलाते हुए कहा कि दिन में विवाह एवं दिन में ही भोज का आयोजन यह पहल न केवल ऊर्जा-संरक्षण और पर्यावरण-संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण है। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संस्कार धानी जबलपुर जैन समाज का यह निर्णय भारत वर्षीय जैन समाज के लिए सचमुच अनुकरणीय है। जबलपुर में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने समाज जन को प्रतिज्ञा दिलाते हुए कहा कि दिन में विवाह एवं दिन में ही भोज का आयोजन यह पहल न केवल ऊर्जा-संरक्षण और पर्यावरण-संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण है। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> संस्कार धानी जबलपुर जैन समाज का यह निर्णय भारत वर्षीय जैन समाज के लिए सचमुच अनुकरणीय है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि जबलपुर नगर में विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने अपनी मंगल देशना में समाज को संबोधित करते हुए समाज जन को प्रतिज्ञा दिलाते हुए कहा कि दिन में विवाह एवं दिन में ही भोज का आयोजन यह पहल न केवल ऊर्जा-संरक्षण और पर्यावरण-संवेदनशीलता का सुंदर उदाहरण है, बल्कि सादगी, स्वास्थ्य और संयम पूर्ण जैन जीवनशैली को भी सशक्त करती है। नॉन-वेज होटल एवं रिसॉर्ट में विवाह न करने का संकल्प जैन समाज के शुद्ध शाकाहारी मूल्यों को मजबूती देता है और आने वाली पीढ़ी को सही संस्कारों की दिशा दिखाता है। साथ ही, इस अवसर पर जबलपुर समाज द्वारा अत्याधुनिक मैरिज गार्डन विकसित करने का विचार भी अत्यंत प्रशंसनीय है। यह सुविधा, संस्कार और आत्मसम्मान का उत्तम संगम होगा। विश्व जैन संगठन राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मयंक जैन, राजेश जैन दद्दू ने कहा कि भारत वर्षीय जैन समाज भी यदि इस प्रेरक पहल को अपनाए तो यह एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।</p>
<p><strong>जैन परिवारों को विशेष छूट एवं रियायती दरों पर सुविधाएं उपलब्ध हों </strong></p>
<p>एक व्यावहारिक सुझाव यह है कि इंदौर जैन समाज शुद्ध शाकाहारी होटल, मैरिज गार्डन एवं रिसॉर्ट्स के साथ समझौता एमओयू करंे, ताकि समाज में होने वाले विवाह एवं आयोजनों के लिए जैन परिवारों को विशेष छूट एवं रियायती दरों पर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इससे संस्कारों की रक्षा के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी सुनिश्चित होगा। ऐसी पहल समाज को संस्कारवान, पर्यावरण-अनुकूल और संगठित बनाने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।</p>
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		<title>जो णमोकार महामंत्र जप ले उसका उद्धार होता है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी का कुंडलपुर से हुआ विहार </title>
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		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 16:21:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। कुंडलपुर (दमोह)से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर (दमोह)। विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर (दमोह)से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> विश्व विख्यात सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में पूज्य बाबा के दर्शनार्थ एवं यहां विराजित मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ का सानिध्य पाने देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्तों का यहां में आना निरंतर जारी है। प्रचार मंत्री जयकुमार जलज ने बताया कि आज भी पूज्य बड़े बाबा के चरणों में अभिषेक करने श्रद्धालु भक्तों का ताता लगा रहा। मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने पूज्य बड़े बाबा की पावन नगरी, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की साधना स्थली में संत निवास के सामने प्रकृति की सुंदर छटा युक्त प्रांगण में बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालु भक्तों की शंकाओं का समाधान देते हुए कहा कि बार-बार व्रत की भावना भाना चाहिए, व्रत का स्मरण सदैव करना चाहिए। एक ब्रह्मचारिणी दीदी ने शंका रखी कि मुनि श्री आपने बड़े बाबा की इतनी एनर्जी कैसे पाई। मुनिश्री ने समाधान देते हुए कहा अपने आप को बड़े बाबा के चरणों में अर्पित कर दिया, वहां जो बरस रहा था आत्मसात कर लिया। णमोकार मंत्र के विषय में की गई शंका का समाधान करते हुए मुनि श्री ने कहा यह स्वयं सिद्ध मंत्र है। सिद्ध नहीं करना पड़ता, मंत्र जपना होता है ।जप लिया तो काम बन गया। इसमें कोई भी बीजाक्षर नहीं सीधा-साधा मंत्र है। इसे सीधा पढ़ो या उल्टा पढ़ो जैसे पढ़ना हो पढ़ो किसी भी स्थिति में पढ़ो मारण उच्चारण में इसका कोई प्रयोग नहीं।</p>
<p><strong>एक बार मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय</strong></p>
<p>इस मंत्र के एक अक्षर पढ़ने से 60 सागर के कर्म का क्षय होता। एक बार णमोकर मंत्र जपने से 500 सागर के कर्म का क्षय हो जाता है। जो णमोकर मंत्र जप ले उसका उद्धार होता है। एक और ब्रह्मचारिणी दीदी ने मुनि श्री से निवेदन किया कि गुरुदेव कुंडलपुर आकर आपको इतना तो समय देना चाहिए। जिससे हम सारी बहनें संतुष्ट हो सके। मुनि श्री उपस्थित जनसमूह से ही पूछ बैठे। यह लोग क्या कभी संतुष्ट हो जाएंगे। मुनिश्री ने कहा कभी संतुष्ट होना नहीं। मुनि श्री ने बताया कि गुरुदेव ने कहा था लोगों को संतुष्ट करने कभी मत जाओ। उनकी प्यास जगाने जाओ। धर्म क्षेत्र में धर्म हेतु निष्ठा आवश्यक है धर्म भावना जगाओ। निष्ठा गहरी कीजिए बच्चों में भी कर्तव्य बोध जगाइए।</p>
<p><strong>मुनिश्री का विहार बांदकपुर की ओर</strong></p>
<p>पांच दिवसीय बड़े बाबा के चरणों में प्रवास के उपरांत मुनि श्री संघ का विहार बांदकपुर की ओर हो गया। रात्रि विश्राम देव डोगड़ा ग्राम में हो रहा। संभवतः मुनि श्री संस्कारधानी जबलपुर की ओर बढ़ रहे हैं। जहां 108 मंडलीय सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है।</p>
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		<title>बड़े बाबा के अभिषेक के लिए उमड़ा जन सैलाब: नववर्ष पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कराया भावना योग </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:46:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर बड़े बाबा की पावन नगरी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नववर्ष 2026 की शुरुआत पूज्य बड़े बाबा के चरणों में करने भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। अभिषेक करने के लिए हजारों हजार श्रद्धालु भक्तों की लंबी कतार लगी। कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर बड़े बाबा की पावन नगरी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नववर्ष 2026 की शुरुआत पूज्य बड़े बाबा के चरणों में करने भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। अभिषेक करने के लिए हजारों हजार श्रद्धालु भक्तों की लंबी कतार लगी। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह</strong>। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर बड़े बाबा की पावन नगरी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की तपस्थली में नववर्ष 2026 की शुरुआत पूज्य बड़े बाबा के चरणों में करने भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। अभिषेक करने के लिए हजारों हजार श्रद्धालु भक्तों की लंबी कतार लगी। कई घंटे बड़े बाबा का अभिषेक कार्यक्रम चला। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने नए वर्ष का शुभारंभ भावना योग शिविर के साथ किया। मुनिश्री ने कहा कि नया साल है इसलिए हर्ष है। आज हम बड़े बाबा के दरबार में बैठे हैं। जहां का कण-कण आचार्य श्री की साधना से सिंचित है।</p>
<p>जीवन को हर्ष मय बनाना चाहते हैं तो कुछ नया जोड़े। नया वर्ष आया है आप सबके मन में कुछ नया करने का भाव है। घर में जब नया फर्नीचर लाते हैं तो पुराना कबाड़ बाहर करते हैं। आज मैं चार बातें द्वारा आपसे साक्षात्कार करूंगा। समीक्षा, संवेदना, संकल्प, साधना। सबसे पहले अपनी समीक्षा करें अंदर कचरा कूड़ा भरा है, उसमें यदि इत्र भी डालोगे तो खुशबू नहीं आएगी। बीते वर्ष में मैंने क्या गलत किया उसकी सफाई कीजिए, प्रतिक्रमण करें। जिसने मेरे साथ बुरा किया उसे क्षमा करें। जिसके साथ मैंने बुरा किया उसका प्रायश्चित करें। नकारात्मकता हावी होगी हम अपने जीवन को रचनात्मकता नहीं दे सकेंगे। सारा बोझ उतारिए।</p>
<p><strong>आत्म समीक्षा करें अपने दुर्गुण दूर करना है </strong></p>
<p>मुनि श्री ने एक कथानक सुनाते हुए बताया कि गुरु ने एक थैला पकड़ाया,उसमें आलू भर दिया। शिष्य से कहा कि अपने साथ रखो 15 दिन। 2 दिन में आलू सड़ने लगा। शिष्य ने कहा कि इसमें बदबू आने लगी है। गुरु ने कहा तू थैली की बदबू सह नहीं सकता। अपने अंदर की बदबू को निकालो। हम दूसरे की समीक्षा खूब करें अपनी समीक्षा नहीं करते। आत्म समीक्षा करें अपने दुर्गुण दूर करना है यह दृष्टिकोण अंतरंग में परिवर्तन होता है संकल्प के साथ।</p>
<p><strong>संकल्प एक छोटी सी शुरुआत है जीवन का आधार बनेगी</strong></p>
<p>इस वर्ष में अपनी वाणी में मधुरता लाओ, व्यवहार में विनम्रता ,आचरण में सादगी लायें ।जीवन में बदलाव चाहिए छोटे-छोटे संकल्प भी संकल्प सिद्धि का आधार है। उस उम्मीद और संकल्प को छोड़ देना जो हमारा बुरा कर सकता है। एक संकल्प लीजिए मुझे अच्छा बनना है अच्छा बनने का भाव जगाइए। अच्छा बनने का संकल्प एक छोटी सी शुरुआत है जीवन का आधार बनेगी। तीसरा संवेदना का भाव होना चाहिए, अंदर की संवेदना जगना चाहिए। संवेदनहीन मनुष्य के जीवन में धर्म का अंकुर नहीं होता एक दूसरे की पीड़ा को समझने की कोशिश करिए। चौथी बात साधना अपने धर्माचार्य को साधना बनाएं।</p>
<p><strong>जो करना है अभी करो बीता हुआ कल कैसा है</strong></p>
<p>धर्म को साधना बना लेते तो धर्म हमारे विचार व्यवहार में प्रतिबिंम्बित होता है ।देखते हैं कि लोग आपस में एक दूसरे के मध्य उलझ रहे। हमें अपने भीतर एक साधक को जन्म देने का प्रयास करना चाहिए जीवन में एक नई चमक पैदा होगी। आज हम सब बड़े बाबा के चरणों में अर्घ समर्पित करने एकत्र हुए हैं ।प्रभु मेरे जीवन में श्रद्धा हो, संवेदना हो ,समझ हो, मर्यादा हो ऐसा कुछ किया तो नया होगा ।नया करने से नया होता। जो करना है अभी करो बीता हुआ कल कैसा है, निरस्त चेक जैसा है ।भुना लो जितना भुना सको। कितने दिन कितने पल बीत गए। एक दिन में 24 घंटे, घंटे में मिनट कितने, सेकंड होते है। 86400 सेकंड मिले हैं। चाहे गप गोष्ठी में बर्बाद कर दें या इस वर्ष में कुछ नया करने की प्रेरणा लें। दोपहर में शंका समाधान का कार्यक्रम आयोजित हुआ। जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने अपनी अपनी शंकाओं का समाधान पाया। 2 जनवरी प्रातः बड़े बाबा के श्री चरणों में मुनि श्री का मंगल प्रवचन हुआ। दोपहर में शंका समाधान का कार्यक्रम किया गया।</p>
<p><strong>भजन संध्या में गूंजे बड़े बाबा के जयकारे </strong></p>
<p>नए वर्ष की पूर्व संध्या पर बड़े बाबा मंदिर परिसर में बने भव्य पंडाल में एक शाम बड़े बाबा के नाम भक्ति संध्या में देश के विभिन्न अंचलों से आए श्रद्धालु भक्त देर रात तक भक्ति गीतों की सुमधुर प्रस्तुति पर झूमते नाचते बड़े बाबा की भक्ति कर आनंद लेते रहे। जहां एक और भजन गायिका प्रियांशी जैन ने ‘बना लो मन को मंदिर सा तभी भगवान आएंगे’ गीत से मंगलाचरण किया। ‘बड़े बाबा मेरे आदिनाथ मैं तेरी भक्ति करूं दिन रात शरण मोह रख लीजे’ भजन की सुंदर प्रस्तुति की। गायक नीलेश जैन बुढार ने ‘णमोकार णमोकार महामंत्र णमोकार’ भजन गीत, एक बार दरश जो पाये इनका ही हो जाए, बड़े बाबा के चरणों छत्र चढ़ाने आया हूं ,बाबा कुंडलपुर वाले हम सबके रखवाले, खबर मोरी लय रइयो कुंडल गिरी के बड़े बाबा आदि भजन गीतों से उपस्थित जनसमूह को भक्ति के रंग में डुबाये रखा। पूज्य बड़े बाबा की महाआरती में अपार जन समूह उमड़ पड़ा और देर रात तक बड़े बाबा के जयकारे गूंजते रहे। इस अवसर पर हटा विधायक उमादेवी खटीक ,अशोक गंगवाल जयपुर, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्र कुमार सराफ,महामंत्री आर के जैन सहित कमेटी पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही।</p>
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		<title>विवेकपूर्ण निर्णय जोड़ते हैं, अविवेकपूर्ण निर्णय विभाजित करते हैं : जीवन की प्रगति का आधार विश्वास और विवेक-मुनि श्री प्रमाण सागर जी </title>
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		<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:29:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःप्रवचन सभा में कहा कि जीवन की प्रगति का आधार विश्वास है और विवेक जीवन की दिशा को तय करता है। उन्होंने समझाया कि विवेकहीन व्यक्ति का आचरण अंधे के हाथ में रस्सी भांजने के समान होता है, जो एक ओर तो रस्सी को खींचता है और दूसरी ओर उसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःप्रवचन सभा में कहा कि जीवन की प्रगति का आधार विश्वास है और विवेक जीवन की दिशा को तय करता है। उन्होंने समझाया कि विवेकहीन व्यक्ति का आचरण अंधे के हाथ में रस्सी भांजने के समान होता है, जो एक ओर तो रस्सी को खींचता है और दूसरी ओर उसे बिगाड़ देता है। विवेक के अभाव में बने-बनाए काम भी विगड़ सकते हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन विद्यावाणी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>तड़ा।</strong> मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रातःप्रवचन सभा में कहा कि जीवन की प्रगति का आधार विश्वास है और विवेक जीवन की दिशा को तय करता है। उन्होंने समझाया कि विवेकहीन व्यक्ति का आचरण अंधे के हाथ में रस्सी भांजने के समान होता है, जो एक ओर तो रस्सी को खींचता है और दूसरी ओर उसे बिगाड़ देता है। विवेक के अभाव में बने-बनाए काम भी विगड़ सकते हैं।</p>
<p><strong>कर्तव्य, आहार, व्यवहार और आत्मविवेक</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि कर्तव्य, आहार, व्यवहार और आत्मविवेक के चारों स्तरों पर हमें विवेक संपन्न होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जरूरी नहीं कि जो विद्वान हो वह विवेकी हो, और जो अनपढ़ है वह अविवेकी हो। दुनिया में ऐसे कई लोग हुए हैं जो अनपढ़ होने के बावजूद विवेकपूर्ण कार्य कर गए, और ऐसे भी हैं जो पढ़े-लिखे होने के बावजूद विवेकहीन जीवन जीते हैं।</p>
<p><strong>विवेकपूर्ण जीवन और परिणाम</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि विवेक संपन्न व्यक्ति हर कार्य को सोच-समझकर संपन्न करता है। यदि कार्य से पूर्व विचार किया जाए तो वह कभी विफल नहीं होता। जहां विवेक काम करता है, वहां कोई अवांक्षित गतिविधि नहीं होती। अविवेकी हमेशा पछताता है, जबकि विवेकी यश और सम्मान प्राप्त करता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चा गलती करता है तो उसे नजरअंदाज किया जा सकता है क्योंकि अभी उसके पास विवेक नहीं है। लेकिन वही गलती बड़ा व्यक्ति करे तो समाज उसे स्वीकार नहीं करता। उन्होंने बताया कि पढ़े-लिखे लोगों में अपने पढ़े-लिखे होने का अभिमान जाग सकता है, लेकिन यह जीवन के मर्म को समझने में बाधा बनता है।</p>
<p><strong>मूढ़ और विवेकहीन व्यक्ति</strong></p>
<p>मुनि श्री ने मूढ़ व्यक्ति की परिभाषा बताते हुए कहा कि जो अपने कर्तव्य और अपने हित-अहित का ध्यान नहीं रखता, वह मूढ़ है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि गुटका और तम्बाकू पर स्पष्ट चेतावनी लिखी होती है कि इसके सेवन से कैंसर होता है। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे लोग जब जानकर भी इनका सेवन करते हैं, तो वे अपने विवेक को नजरअंदाज कर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।</p>
<p><strong>विवेक और परिवार</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि अपने कर्तव्य का ध्यान रखकर निष्ठापूर्वक कार्य करने वाला व्यक्ति हजारों को एकजुट कर सकता है, जबकि अविवेकपूर्ण निर्णय परिवार और समूह को विभाजित कर देते हैं। उन्होंने बताया कि आग्रह, आसक्ति और आवेग से भरा व्यक्ति कभी सही निर्णय नहीं ले सकता। मुनि श्री ने परिवार और समूह में कार्य करने के लिए विवेक की आवश्यकता बताई। कई बार अच्छी बातों को भी पचाना पड़ता है। यदि कोई बात आपको अच्छी न लगे तो तुरंत प्रतिक्रिया न दें, क्योंकि जल्दबाजी में दी गई प्रतिक्रिया और भी गलत परिणाम ला सकती है।</p>
<p><strong>कहानियों से समझाया विवेक</strong></p>
<p>मुनि श्री ने नेवला और सांप की कहानी सुनाई, जिसमें हड़बड़ी में मां अपने रक्षक नेवला को मार देती है और बाद में पछताती है। उन्होंने खरगोश और शेर की कहानी भी सुनाई, जिसमें खरगोश अपनी चतुराई से शेर को कुएँ के पास ले जाता है और शेर को अपनी परछाई को असली समझ कर डर जाता है। इस प्रकार विवेक से खरगोश अपने प्राण और अन्य जानवरों के प्राण भी बचा लेता है।</p>
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		<title>राहतगढ़ में पंच कल्याणक महा महोत्सव 27 नवंबर से : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने सफलता के लिए सार्थकता और नैतिकता जरूरी बताई  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 11:07:39 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी।</strong> मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन में कहा कि जीवन का सवाल सफलता का नहीं, बल्कि सार्थकता का होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में लोग सफलता के पीछे इतने अंधे हो गए हैं कि जीवन की सार्थकता और नैतिकता को ही खो बैठे हैं। मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सबसे पहले अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने दायित्वों को सही ढंग से निभाता है, तभी जीवन सार्थक होता है। उन्होंने पिता के कर्तव्यों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब आप पिता बनते हैं, तो आपके ऊपर बहुत-सी जिम्मेदारियां आ जाती हैं। बच्चों को संस्कारित बनाना, उन्हें उत्तम शिक्षा दिलाना और सेवा-भाव जगाना यही सच्चे पिता का धर्म है।</p>
<p><strong>श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता</strong></p>
<p>एक प्रश्न के उत्तर में मुनि श्री ने कहा सरलता को समझने के लिए व्यक्ति का भीतर और बाहर दोनों से सरल होना आवश्यक है। जिसका जीवन खुली किताब की तरह होता है, उसे पढ़ने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने श्रद्धा और समर्पण के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रद्धा की आंख में कोई प्रश्न नहीं होता, बल्कि वह समर्पण के भाव से भरकर काम को त्वरित गति से करती है। युवाओं को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि जीवन को सार्थक बनाने के लिए पहले लक्ष्य बनाओ, फिर पुरुषार्थ जगाओ, और पुरुषार्थ में कभी कमी मत आने दो। हमारा पुरुषार्थ तभी फलता है जब हम उसे पूरी शक्ति और निष्ठा से करते हैं।</p>
<p><strong>गुरु को हृदय में स्थान दो, सदा तुम्हारे साथ रहेंगे</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ इन दिनों अवधपुरी में विराजमान हैं। 27 नवंबर से राहतगढ़ में श्री 1008 भगवान जिनेंद्र के पंच कल्याणक महा महोत्सव का आयोजन ससंघ सान्निध्य में होगा। जिसके लिए शीघ्र ही मुनिसंघ का विहार राहतगढ़ की ओर संभावित है। गुरुकुलम् के 180 छात्र मुनि श्री के सान्निध्य में रह रहे हैं, उनके संभावित विहार से भावुक दिखाई दिए। मुनि श्री ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु से राग होना अच्छा है, लेकिन मोह नहीं होना चाहिए। साधु आपके पास कुछ समय के लिए आते हैं, फिर उन्हें आगे बढ़ना ही होता है। गुरु को हृदय में स्थान दो, तो वे सदा तुम्हारे साथ रहेंगे। उन्होंने सभी छात्रों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने गुरुकुल तथा गुरुदेव की मान-मर्यादा का सदैव ध्यान रखें।</p>
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		<title>संयम हमारे जीवन के रूपांतरण का आधार है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने उत्तम संयम धर्म की परत-दर परत व्याख्या की  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:10:20 +0000</pubDate>
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<p><strong>दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों से कहा कि संयम का संबंध केवल प्रवृत्ति और शालीनता से नहीं, बल्कि मनोवृत्ति के परिष्कार से है। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों से कहा कि संयम का संबंध केवल प्रवृत्ति और शालीनता से नहीं, बल्कि मनोवृत्ति के परिष्कार से है। उन्होंने कहा कि यदि इन दस दिनों में प्रत्येक साधक अपने भीतर के संयम को जगा लें तो जीवन भर उसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। संयम जीवन का रूपांतरण ही नहीं करता, बल्कि वह जीवन का सुरक्षा कवच और चेतना के निखार का मूल है। मुनि श्री ने भाव, विचार, वाणी और व्यवहार-इन चारों में संयम की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा-यदि भावों में शुद्धि, विचारों पर नियंत्रण, वाणी में लगाम और व्यवहार में संतुलन होगा तो हम संयम के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे।</p>
<p><strong>भावनायोग मन तथा विचारों की शुद्धि का प्रमुख साधन</strong></p>
<p>मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बताया कि सामान्य व्यक्ति के मन में प्रतिदिन लगभग साठ हजार विचार आते हैं, जिनमें से उपयोगी विचार बहुत कम होते हैं। विचार मन से उत्पन्न होते हैं और भावनायोग मन तथा विचारों की शुद्धि का प्रमुख साधन है। मुनि श्री ने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वे अपने विचारों के प्रहरी बनें और उन पर नियंत्रण रखें, क्योंकि भावों का अनुशासन ही भावों का संयम है।</p>
<p><strong>संयमी व्यक्ति इच्छाओं का गुलाम नहीं होता</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि संयम से आत्मबल का निर्माण होता है। संयमी व्यक्ति इच्छाओं का गुलाम नहीं होता, बल्कि उनका स्वामी बन जाता है। आज जब पूरी दुनिया भोगवाद की अंधी दौड़ में लगी हुई है, तब जैन धर्म का ष्उत्तम संयमष् जीवन को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। इच्छाओं पर नियंत्रण ही सच्चे आत्मबल, शांति और आनंद की प्राप्ति का मार्ग है।</p>
<p><strong>सभी संयमियों का सम्मान किया </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि उत्तम संयम दिवस पर उन सभी संयमियों का सम्मान किया गया। जिन्होंने पांच उपवास पूर्ण किए हैं। वहीं, सात और दस उपवास का संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>दशलक्षण विधान भक्ति भाव से हुआ</strong></p>
<p>प्रातः 5.30 बजे भावनायोग के पश्चात श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके उपरांत नित्य नियम पूजन एवं पर्व पूजन के साथ दशलक्षण विधान भक्ति भाव से हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन रहे। संचालन बाल ब्र. अशोक भैया लिधौरा ने किया।</p>
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		<title>अनीति करना और अनीति को सहना दोनों ही पाप है: मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कृष्ण के चरित्र के माध्यम से जीवन के सार बताए  </title>
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		<pubDate>Tue, 19 Aug 2025 05:57:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस धरा पर कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनका जन्म तो साधारण होता है, लेकिन उनका जीवन असाधारण होता है, वह व्यक्ति की तरह जन्म तो लेते है लेकिन, व्यक्तित्व बनकर जीते हैं और विभूति की तरह इस दुनिया से विदा लेकर अमर हो जाते हैं। ऐसी ही विभूतियों को कभी हम श्रीराम, कभी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस धरा पर कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनका जन्म तो साधारण होता है, लेकिन उनका जीवन असाधारण होता है, वह व्यक्ति की तरह जन्म तो लेते है लेकिन, व्यक्तित्व बनकर जीते हैं और विभूति की तरह इस दुनिया से विदा लेकर अमर हो जाते हैं। ऐसी ही विभूतियों को कभी हम श्रीराम, कभी श्रीकृष्ण, कभी ऋषभदेव तो कभी महावीर कहते हैं। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल(अवधपुरी)</strong>। इस धरा पर कुछ ऐसे लोग भी होते है जिनका जन्म तो साधारण होता है, लेकिन उनका जीवन असाधारण होता है, वह व्यक्ति की तरह जन्म तो लेते है लेकिन, व्यक्तित्व बनकर जीते हैं और विभूति की तरह इस दुनिया से विदा लेकर अमर हो जाते हैं। ऐसी ही विभूतियों को कभी हम श्रीराम, कभी श्रीकृष्ण, कभी ऋषभदेव तो कभी महावीर कहते हैं। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रातःकालीन प्रवचन के दौरान व्यक्त किए। उन्होंने नारायण श्रीकृष्ण के बाल क्रिया से लेकर राजपाट तक की विभिन्न कथाओं के माध्यम से चरित्र चित्रण किया और कहा कि मैं उस कथा की ओर नहीं जाना चाहता लेकिन, कथा के माध्यम से जो मुझे चिंतन मिला है।</p>
<p>उसे व्यक्त कर रहा हूं। हम लोग महापुरुषों की पूजा तो करते हैं लेकिन, उनके आदर्शों का अनुसरण नहीं करते। यदि उनके आदर्शों का अनुसरण करें तो कठनाइयों में धैर्य, निर्णय में विवेक और कर्म में निष्ठा जाग्रत होती है। यदि उनके आदर्शों पर चलें तो एक दिन हम भी उनके अनुसार बन सकते है। इसलिए उनका अनुष्मरण नहीं अनुकरण करो। पूजा नहीं उनके आदर्शों को स्वीकार करो।</p>
<p><strong>&#8230;परिवार से भी युद्ध करना पड़े तो कभी पीछे मत हटो</strong></p>
<p>मुनि श्री ने श्रीकृष्ण दो रूप का वर्णन किया। जिसमें प्रेम की अभिव्यक्ति करते हुए मुरलीधर श्रीकृष्ण के रूप में हैं तो दूसरे में चक्रधारी श्री कृष्ण के रुप में गहरा संदेश दे रहे हैं कि ‘न्याय और नीति के लिए यदि परिवार से भी युद्ध करना पड़े तो कभी पीछे मत हटो। मुनि श्री ने उनके जन्म की विषम परिस्थितियों की विवेचना करते हुए कहा कि जन्मा बालक जो अपनी मां का दूध भी नहीं पी पाया और उसे छोड़ कर नंदगांव में ग्वाल बालों के साथ पले और बड़े हुए। उन्होंने कभी राजकुल का अभिमान नहीं किया तथा ग्वालों के साथ गाय चराने में भी आनंद लिया। उनके इस आदर्श से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। वह थे नारायण श्रीकृष्ण लेकिन, ग्वालों के साथ ग्वाल बालक बन कर रहे।</p>
<p><strong>बांसुरी बिना बुलाए कुछ नहीं बोलती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि महान आत्माओं की यही विशेषता होती है वह सबको आत्मसात कर अपने समान बना लेते हैं। यह उनके सहज प्रेम और आदर्श को दिखलाता है। उन्होंने मुरली मनोहर की विशेषता बताते हुए कहा कि गोपियां उनकी बांसुरी से बड़ी प्रभावित रहती थी। यह भीतर से खाली, अपने अंदर कुछ नहीं रखती तथा बिना गांठ वाली है। बिना बुलाए कुछ नहीं बोलती। जब भी बोलती मीठा ही बोलती है। इसलिए इसे में हमेशा अपने पास रखता हूं। सच्चे अर्थों में ऐसा भाव जिसके मन में होता है। वही प्रेम को अभिव्यक्ति देता है। क्या हमारे जीवन में भी वैसा माधुर्य वैसी सरलता आ सकती है? यदि श्रीकृष्ण के यह गुण हमारे अंदर आ जाएं तो हमारा जीवन धन्य धन्य हो सकता है।</p>
<p><strong>आजकल तो सगे भाइयों में भी यदि ऐसी असमानता हो तो मुंह फेर लेते हैं</strong></p>
<p>मुनि श्री ने सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक ही आश्रम में पले और बड़े हुए लेकिन, एक राजा बना तो दूसरा फकीर। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने मित्र से मिलने बड़े ही संकोच के साथ जाते हैं लेकिन, जिस प्रकार उनका स्वागत होता है। यह आप सभी जानते है कि कैसे राजा श्रीकृष्ण ने अपने फकीर मित्र को अपने सिंहासन पर बैठाकर उनके चरण धुलाए थे। जिसे देखकर सभी रानियां एवं राज्य दरबारी आश्चर्य चकित थे। उनका यह दृश्य अमीर गरीब की खाई को मिटाते हुए प्रेम और मधुरता को दर्शाता है। मुनि श्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल तो सगे भाइयों में भी यदि ऐसी असमानता हो तो वह एक दूसरे से मूंह फेर लेते है? उन्होंने कहा कि बातें तो हम बहुत बड़ी-बड़ी करते है लेकिन, जब रिस्ते निभाने का मौका आता है तो पैसा प्रतिष्ठा और स्टेटर्स आड़े आ जाता है।</p>
<p>रिश्ते तब निभते हैं, जब भावनात्मक लगाव और वास्तविक प्रेम होता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई अनीति, अन्याय को कर रहा है तो उसे बिल्कुल बर्दाश्त मत करो। अनीति करना जितना पाप है अनीति को सहना भी उतना ही बड़ा पाप है। नारायण श्रीकृष्ण ने कभी अनीति और अन्याय का साथ नहीं दिया और न ही उसके आगे कभी झुके, युद्ध में अर्जुन को आगे किया और स्वयं सारथी बन गए। उन्होंने कहा कि आजकल की भाषा में सारथी मतलब ड्राइवर। क्या आप लोग ऐसा कर सकते हो? जीवन की परिपूर्णता का संदेश देते हुए कहा कि हमारे अंदर की जो विवेक पूर्ण बुिद्ध है वही हमारे अंदर का कृष्ण है और जो बुराइयां है वह कालिया नाग और पूतना जैसी राक्षसी प्रवृत्ति है तो अपने अंदर के बुद्धि और विवेक को जगाइए तथा अपने अंदर से काम क्रोध मान माया और लोभ की प्रवृत्ति को भगाइए। 19 अगस्त से मुनि श्री की प्रवचन प्रातः8.30 बजे से ही रहेंगे।</p>
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		<title>संस्कृति का दस्तावेज होगा जिनालय जो युगों-युगों तक जीवंत रहेगा-मुनिश्री प्रमाण सागरजीः सर्वतोभद्र एवं सहस्त्रकूट जिनालय के शिलान्यास में दो मुनियों का मिलन रहा ऐतिहासिक </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Dec 2024 06:54:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रेवती रेंज में बनने वाले सर्वतोभद्र एवं सहस्त्रकूट जिनालय के शिलान्यास कार्यक्रम में दो मुनियों का मिलन हुआ। यहां पर मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ससंघ और मुनिश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ विराजित थे। कार्यक्रम में पुण्यार्जक परिवारों के साथ जैन समाज के लोग इस अमृत बेला के साक्षी भी बने। पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रेवती रेंज में बनने वाले सर्वतोभद्र एवं सहस्त्रकूट जिनालय के शिलान्यास कार्यक्रम में दो मुनियों का मिलन हुआ। यहां पर मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ससंघ और मुनिश्री विनम्रसागर जी महाराज ससंघ विराजित थे। कार्यक्रम में पुण्यार्जक परिवारों के साथ जैन समाज के लोग इस अमृत बेला के साक्षी भी बने। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong> इंदौर।</strong> मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ने रेवती रेंज में बनने वाले सर्वतोभद्र एवं सहस्त्रकूट जिनालय के शिलान्यास समारोह में कहा कि लोग पूछते है कि इतने अधिक मंदिर हैं तो और मंदिरों की क्या आवश्यकता है? उसके जबाब में मुनिश्री ने कहा कि जिन शासन की प्रभावना युगों-युगों से होती आई है और युगों-युगों तक होती रहेगी। आचार्य गुरुदेव ने अकेले मंदिर की ही प्रस्तावना नहीं रखी। सबसे पहले यहां पर प्रतिभा स्थली के रूप में विशाल शिक्षा केंद्र स्थापित किया। मुनिश्री ने सहस्त्रकूट जिनालय के पुण्यार्जक बीड़ीवाला परिवार के नरेंद्र पप्पाजी, आजाद जी, डॉ. अशोक, डॉ. राकेश जैन, डॉ.दीपक जैन एवं राजीव जैन के साथ उन सभी पुण्यार्जक परिवारों को भी आशीर्वाद दिया। जिन्होंने जिनालय निर्माण में सहयोग दिया है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71086" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0021.jpg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0021.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0021-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0021-768x1024.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" />छोटा सा दान भव्य जिनालय को देगा आकार</strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनिश्री विनम्रसागर महाराज ने कहा कि इंदौर शहर में लगभग 10 हजार घरों का समाज है। आचार्य गुरुदेव ने सभी को बहूत कुछ दिया है और उनकी भावना थी। यहां पाषाण का लगभग 216 फीट ऊंचा जिनालय बने बीड़ीवाला परिवार के साथ यदि 3 सौ परिवार प्रतिवर्ष छोटी सी राशि से भी दान की शुरुआत करेंगे तो यह भव्य जिनालय लगभग 10 वर्षों में बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि शिलान्यास का यह अवसर बहूत ही पुण्य से मिलता है। लगभग 3 हजार वर्षों तक यह मंदिर सुरक्षित रहेगा।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71084" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018.jpg" alt="" width="1280" height="851" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-1024x681.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-768x511.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0018-990x658.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />पुण्यार्जक परिवारों ने किया शिलान्यास</strong></p>
<p>प्रवचन के बाद मुनि संघ के सानिध्य में शिलान्यास विधि प्रतिष्ठाचार्य अनिल भैया, अशोक भैया, अभय भैया के निर्देशन में की गई। सबसे पहले मूल शिलान्यास बीड़ीवाला परिवार ने किया। उसके बाद अन्य पुण्यार्जक परिवारों ने शिलान्यास किया। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेग सागरजी महाराज, मुनिश्री निस्वार्थ सागरजी महाराज, मुनिश्री निसर्ग सागरजी महाराज, मुनिश्री संधान सागरजी महाराज एवं संघस्थ सभी क्षुल्लक जी सहित आर्यिका दुर्लभमति माताजी उपस्थित थीं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-71083" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020.jpg" alt="" width="1186" height="844" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020.jpg 1186w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020-300x213.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020-1024x729.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020-768x547.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/12/IMG-20241216-WA0020-990x705.jpg 990w" sizes="(max-width: 1186px) 100vw, 1186px" />इनकी उपस्थिति रही गरिमामयी</strong></p>
<p>संचालन ब्रह्मचारी अशोक भैया एवं दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट रेवती रेंज के सचिव सचिन जैन उद्योगपति ने किया। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि कार्यक्रम में दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट अध्यक्ष नरेंद्र पप्पाजी, मनीष नायक, राकेश चेतक, सुनील जैन केएस सहित सभी पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे। सांयकालीन शंका समाधान कार्यक्रम रेवती रेंज में ही किया गया।</p>
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		<title>निकाली गई भव्य शोभायात्रा : रथावर्तन महोत्सव के माध्यम से इंदौर जैन समाज ने विश्व रिकॉर्ड बनाया </title>
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		<pubDate>Sat, 16 Nov 2024 05:30:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर महानगर के इतिहास में पहली बार, प्रमाणिक संत एवं शंका समाधान प्रवर्तक मुनि श्री प्रमाण सागर जी के सानिध्य में, 7 नवंबर से विजयनगर चौराहे पर निर्मित भव्य पंडाल में चल रहे संस्कृत भाषा में बीजाक्षर मंत्रों के साथ 108 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर महानगर के इतिहास में पहली बार, प्रमाणिक संत एवं शंका समाधान प्रवर्तक मुनि श्री प्रमाण सागर जी के सानिध्य में, 7 नवंबर से विजयनगर चौराहे पर निर्मित भव्य पंडाल में चल रहे संस्कृत भाषा में बीजाक्षर मंत्रों के साथ 108 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> इंदौर महानगर के इतिहास में पहली बार, प्रमाणिक संत एवं शंका समाधान प्रवर्तक मुनि श्री प्रमाण सागर जी के सानिध्य में, 7 नवंबर से विजयनगर चौराहे पर निर्मित भव्य पंडाल में चल रहे संस्कृत भाषा में बीजाक्षर मंत्रों के साथ 108 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। इस अवसर पर शुक्रवार, 15 नवंबर को प्रातः 7:00 बजे से 108 स्वर्ण, रजत और काष्ठ निर्मित सुदर्शनीय रथों पर श्री जी विराजमान कर एक 2 किलोमीटर लंबी भव्य शोभा यात्रा निकाली गई।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69872" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0008.jpg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0008.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0008-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0008-768x1024.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" />शोभा यात्रा का मार्ग और आयोजन</strong></p>
<p>शोभायात्रा विजयनगर स्क्वायर से प्रारंभ होकर, एलआईजी चौराहा, पाटनीपुरा और आस्था टॉकीज के सामने से होते हुए 5 घंटे के भ्रमण के बाद पुनः विधान स्थल विजयनगर चौराहे पर पहुंची, जहां इसका समापन हुआ। शोभा यात्रा में सम्मिलित रथों में विधान पुण्यार्जक श्रीजी को रथ की वेदी में विराजमान कर सारथी बनकर बैठे। इस दौरान भजन मंडलियां भजन गाते हुए, लोक नृत्य कलाकार नृत्य प्रस्तुत करते हुए और संगीतकार, बैंड-बाजे और विभिन्न शहरों से आए दिव्य घोष की सुमधुर ध्वनियों से वातावरण गूंज रहा था। हजारों की संख्या में समाजजन शोभा यात्रा में भाग लेते हुए भक्ति में मग्न थे। शोभा यात्रा में मुनि संघ के साथ हजारों महिला, पुरुष, बच्चे, त्यागी व्रति, ब्रह्मचारी, सोशल ग्रुप, महिला मंडल, नगर में स्थापित जैन मंदिरों के पदाधिकारीगण और समाजजन भी पैदल चलते हुए सम्मिलित हुए। इस भव्य शोभायात्रा में आर के मार्बल ग्रुप के अशोक पाटनी परिवार ने स्वर्ण रथ में विराजमान होकर शोभा यात्रा में भाग लिया। इंदौर नगर के प्रतिष्ठित कासलीवाल परिवार को इस शोभायात्रा के स्वर्ण रथ का सारथी बनने का गौरव प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69874" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0007.jpg" alt="" width="869" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0007.jpg 869w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0007-204x300.jpg 204w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0007-695x1024.jpg 695w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241116-WA0007-768x1131.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 869px) 100vw, 869px" />स्वागत और सम्मान</strong></p>
<p>शोभा यात्रा के मार्ग में विभिन्न समाज संगठनों द्वारा स्वागत मंच बनाए गए थे, जहां परम पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी का पाद प्रक्षालन कर आरती की गई। इस ऐतिहासिक शोभा यात्रा को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करने के लिए उनकी निरीक्षण टीम भी उपस्थित थी।</p>
<p><strong>ये भी रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस ऐतिहासिक आयोजन में मध्य प्रदेश शासन के मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, तुलसी सिलावट, पार्षद राजीव जैन, समाज श्रेष्ठी अशोक पाटनी, आदित्य कासलीवाल, अमित कासलीवाल, अशोक डोसी, आनंद नवीन गोधा, भरत मोदी, मुकेश पाटोदी, डॉ. जैनेन्द्र जैन, राजकुमार पाटौदी, सुशील पांड्या, राजेंद्र सोनी, राकेश विनायका, जेनेश झांझरी, मनोज बाकलीवाल सहित अनेक समाजजन सम्मिलित हुए।</p>
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