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	<title>मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर में दीक्षा महोत्सव का ऐतिहासिक क्षण : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने प्रदान की तीन निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Apr 2026 11:44:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। गिरीडीह से पढ़िए, यह खबर&#8230; गिरीडीह। तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। <span style="color: #ff0000">गिरीडीह से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गिरीडीह।</strong> तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पावन वंदनीय भूमि पर शनिवार, 18 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने भव्य धार्मिक वातावरण में तीन मोक्ष मार्ग के पथिक साधकों को निर्ग्रंथ जैनेश्वरी मुनि दीक्षा प्रदान की। इस दीक्षा समारोह में ब्र. सारांश भैया मुनि श्री 108 सारसागर महाराज, क्षुल्लक समादर सागर मुनि श्री 108 समादरसागर महाराज तथा बाल ब्रह्मचारी रुपेश भैया मुनि श्री 108 रुपसागर महाराज बने। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि दीक्षा प्रदान करने के बाद मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नवदीक्षित मुनिराजों को संबोधित करते हुए कहा कि साधु बनने के बाद संसार के आकर्षण और विकार स्मरण आ सकते हैं, किंतु साधु का लक्ष्य इन सबसे ऊपर उठकर आत्मशुद्धि करना है। उन्होंने कहा कि मुनि बनने के बाद लोग पूजा करें, प्रशंसा करें, सम्मान दें या आलोचना करें-यह उनके भाव हैं, परंतु साधु का मार्ग इन सबसे परे होता है। ‘मैं साधु बना हूँ न पूजा पाने के लिए, न समाज से संरक्षण पाने के लिए, बल्कि अपने जीवन को पवित्र बनाने और मोक्ष-पथ को साधने के लिए।’</p>
<p><strong>एक अच्छा शिष्य अपने जीवन को गुरु के हाथों में रखता है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने भगवान महावीर से लेकर आचार्य कुंदकुंद तथा आचार्य विद्यासागर महाराज की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि साधु का लक्ष्य अपने अंतर्मन को निर्मल करना है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कोई नया कार्य नहीं किया, बल्कि वही जिम्मेदारी निभाई है, जो आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी ने सन् 2019 में नेमावर में सौंपी थी। दीक्षा से पूर्व इन युवाओं ने आचार्य गुरुदेव से ब्रह्मचर्य व्रत लिया और वर्ष 2020 से सतत साधना में रत रहकर अपने जीवन को तप एवं संयम से तपाया तथा दीक्षा के योग्य बने। मुनि श्री ने कहा कि साधु का आधार लोगों की प्रशंसा नहीं, बल्कि 28 मूलगुणों की रक्षा और पंचाचार का पालन है। एक अच्छा शिष्य अपने जीवन को गुरु के हाथों में बंसी के समान रख देता है-जहां से जो स्वर निकले वही उसकी साधना बन जाती है। उन्होंने समाज को संबोधित करते हुए कहा कि साधुओं का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उनकी मर्यादा की रक्षा से होता है। साधु-संतों का निर्वाह करना समाज की जिम्मेदारी है। सेवा, विनय और साधना में सहयोग से ही धर्म का वातावरण सशक्त बनता है।</p>
<p><strong>दीक्षा पूर्व नवदीक्षार्थियों ने अपने भाव रखे</strong></p>
<p>गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 20 तीर्थंकरों की मोक्ष नगरी श्री सम्मेदशिखर में यह जैनेश्वरी दीक्षा विशेष ऐतिहासिक रही, क्योंकि एक मुनिराज द्वारा भावी मुनिराज को दीक्षा प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि यह कोई नई परंपरा नहीं है, इतिहास में इसके अनेक उदाहरण हैं। आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने भी मुनि विद्यासागर महाराज को मुनि अवस्था में ही दीक्षा प्रदान की थी। दीक्षा पूर्व नवदीक्षार्थियों ने अपने भाव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के समक्ष रखे। मुनि श्री ने परिवारजनों, उपस्थित मुनिराजों, आर्यिका संघ, समस्त त्यागी वृत्तियों, विद्वानों एवं समाज के गणमान्य लोगों की अनुमति के पश्चात धार्मिक विधि-विधानों के साथ पंचमुष्टि केशलोंच एवं पंचगुरु भक्ति के साथ दीक्षा संस्कार संपन्न कराए। वस्त्र त्याग का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण एवं पावन रहा। नवदीक्षित मुनिराजों को पिच्छिका, शास्त्र तथा शुद्धि हेतु कमंडल गुरुभक्त परिवारों द्वारा भेंट किए गए।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु भक्ति की</strong></p>
<p>प्रातःकाल नवदीक्षार्थी मुनिराजों की बग्गी में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक गुरु भक्ति की। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधोरा एवं अभय आदित्य ने किया। संघस्थ मुनि श्री संधान सागरजी ने नवदीक्षित मुनिराजों का जीवन परिचय प्रभावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का ध्वजारोहण देश के भामाशाह अशोक पाटनी एवं सुशीला पाटनी (आरके मार्बल) द्वारा किया गया। दयोदय महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमचंद प्रेमी, दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष गजेंद्र जैन पाटनी (कुनकुरी) सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>इन प्रदेशों के इन शहरों से आए श्रद्धालु</strong></p>
<p>इस अवसर पर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि से तथा बेंगलुरु, दिल्ली, मुम्बई, इंदौर, दुर्गापुर, गोहाटी, सतना, फिरोजाबाद, औरंगाबाद, भोपाल, सागर, आगरा, कोलकाता, ग्वालियर, कन्नौज, जयपुर, बगसरिया, रतलाम, अहमदाबाद, कटनी, रांची, शामली, किशनगढ़ (राजस्थान), बांसा, अलवर, गन्नौर, जबलपुर, गुड़गांव, कोडरमा, ईसरी, हजारीबाग, गया, धूलियान, कोटा, विदिशा, पुणे, गाजियाबाद, लुधियाना, गोमिया, साड़म, चिरमरी, बुढार, राहतगढ़, खातेगांव, सिलवानी, वाराणसी, मुगलसराय से श्रद्धालु उपस्थित रहे। विदेशों से ह्यूस्टन (अमेरिका), बैंकॉक और सिंगापुर से भी श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।</p>
<p>सायंकाल 4 से 5 बजे तक शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने अपने प्रश्न रखे और गुरुदेव से समाधान प्राप्त किया। समारोह में अपार जनसमूह की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक उत्साह और भक्ति से ओतप्रोत बना दिया।</p>
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		<title>जैन तीर्थ सम्मेदशिखर जी में गूंजेगा वैराग्य का महापर्व : 18 अप्रैल को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महमहोत्सव </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 13:57:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म की तपस्या, त्याग और संयम की महान परंपरा को साकार करने वाला ऐतिहासिक क्षण अब समीप है। विश्व विख्यात जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर 18 अप्रैल को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महामहोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। सम्मेदशिखर जी से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230; श्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म की तपस्या, त्याग और संयम की महान परंपरा को साकार करने वाला ऐतिहासिक क्षण अब समीप है। विश्व विख्यात जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर 18 अप्रैल को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महामहोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">सम्मेदशिखर जी से पढ़िए, राजकुमार जैन अजमेरा की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>श्री सम्मेदशिखर जी/(गिरीडीह)।</strong> जैन धर्म की तपस्या, त्याग और संयम की महान परंपरा को साकार करने वाला ऐतिहासिक क्षण अब समीप है। विश्व विख्यात जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर 18 अप्रैल को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महामहोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। यह महोत्सव आचार्य श्री विद्यासागर जी के परम प्रभावक शिष्य एवं गुणायतन प्रणेता झारखंड में जन्मे मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण, वैराग्य और मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करने वाला दिव्य आध्यात्मिक पर्व है। दीक्षा के इस महाक्षण में साधक सांसारिक मोह-माया, परिवार, धन-संपत्ति और भौतिक सुखों का त्याग कर पूर्ण संयम, अनुशासन और धर्ममय जीवन का व्रत ग्रहण करेंगे। यह दृश्य न केवल भावुक होता है, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के अंतर्मन को झकझोर कर उन्हें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p><strong>15 अप्रैल को होगा मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>महोत्सव की शुरुआत 15 अप्रैल को प्रातःकाल गुणायतन में मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश से होगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी, जो पूरे आयोजन का आध्यात्मिक प्रारंभ होगा।</p>
<p><strong>तीन दिन तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार द्वारा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 17 से 19 अप्रैल तक तीन दिनों की निःशुल्क आवास एवं भोजन व्यवस्था की गई है। यह सेवा भाव और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है, जिससे हजारों श्रद्धालु सहज रूप से इस महोत्सव में सहभागी बन सकेंगे।</p>
<p><strong>रांची में चल रहा पंचकल्याणक महोत्सव</strong></p>
<p>गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि वर्तमान में मुनि श्री अपने संघ सहित रांची में विराजमान हैं, जहाँ 1 से 6 अप्रैल तक बिरसा मुंडा फन पार्क में 1008 जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मुनि श्री प्रमाण सागर जी मुनिराज के सानिध्य में भव्य रूप से आयोजित हो रहा है। इस आयोजन में भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणकों का जीवंत चित्रण श्रद्धालुओं को धर्म के गूढ़ सिद्धांतों से जोड़ रहा है।</p>
<p>इस महोत्सव के उपरांत मुनि ससंघ मंगल विहार जैन तीर्थ श्री सम्मेदशिखर जी की ओर होगा मंगल विहार यात्रा भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक होगी, जिसमें वे दर्शन, वंदना और सेवा का पुण्य अर्जित करेंगे, कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा वीरेंद्र जैन छाबड़ा कोडरमा ने बताते हुए कहा कि 15 अप्रैल को गुणायतन में मुनिसंघ का मंगल प्रवेश एवं अगवानी होगी,जिसकी तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है।16 अप्रैल को विशेष विधान एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान होंगे।</p>
<p>17 अप्रैल साधकों की अंतिम तैयारियाँ, आध्यात्मिक प्रवचन एवं तप-आराधना,18 अप्रैल आचार्य आज्ञानुसार भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह</p>
<p><strong>त्याग और वैराग्य का ऐसा अद्वितीय उदाहरण</strong></p>
<p>दीक्षा का दृश्य: त्याग और वैराग्य का चरम दृश्य अत्यंत मार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत होता है, जब साधक अपने परिजनों से विदा लेकर गुरु चरणों में समर्पित होते हैं, वह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए भाव-विभोर कर देने वाला होता है। यह त्याग और वैराग्य का ऐसा अद्वितीय उदाहरण होता है, जो जीवन के वास्तविक उद्देश्य—आत्मकल्याण और मोक्ष—की ओर प्रेरित करता है। ऐतिहासिक महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, गुरु भक्त एवं धर्मप्रेमी सम्मिलित होंगे। विशाल पंडाल, सुव्यवस्थित प्रबंधन, प्रवचनों की श्रृंखला, भक्ति कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करेंगे।</p>
<p><strong>मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने की प्रेरणा देने वाला दिव्य अवसर</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार की ओर से सीईओ. सुभाष जैन एवं मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र जैन छाबड़ा ने आमंत्रण देते हुए समस्त श्रद्धालुओं से विनम्र अपील करते हुये कहा कि अपने परिवार सहित इस दिव्य महोत्सव में सहभागी बनें और शास्वत सिद्धक्षेत्र की वंदना एवं मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त करें, यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मजागृति, संयम, त्याग और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने की प्रेरणा देने वाला दिव्य अवसर है, जो जैन समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित होगा आपके आगमन की पूर्व सूचना देना आवश्यक है, जिससे आपकी संपूर्ण व्यवस्था की जा सके।</p>
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		<title>15 अप्रैल तक मुनि श्री की हो सकती है मंगल अगवानी : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में होगा सिद्धचक्र महामंडल विधान </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Mar 2026 07:54:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक एवं शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज का 15 अप्रैल तक श्री सम्मेदशिखर तीर्थ पर भव्य मंगल अगवानी होना संभावित है। इसके पूर्व मुनिश्री का मंगल प्रवेश झारखंड की राजधानी रांची में दिनांक 27–28 मार्च [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक एवं शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज का 15 अप्रैल तक श्री सम्मेदशिखर तीर्थ पर भव्य मंगल अगवानी होना संभावित है। इसके पूर्व मुनिश्री का मंगल प्रवेश झारखंड की राजधानी रांची में दिनांक 27–28 मार्च के आसपास संभावित है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>गिरीडीह।</strong> संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, गुणायतन प्रणेता, भावना योग प्रवर्तक एवं शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज का 15 अप्रैल तक श्री सम्मेदशिखर तीर्थ पर भव्य मंगल अगवानी होना संभावित है। इसके पूर्व मुनिश्री का मंगल प्रवेश झारखंड की राजधानी रांची में दिनांक 27–28 मार्च के आसपास संभावित है। 30 मार्च को 1008 भगवान महावीर स्वामी का जन्म कल्याणक संपूर्ण देश में मनाया जाएगा। इसी पावन दिवस पर मध्यप्रदेश के सोनागिर तीर्थ क्षेत्र में सन् 1988 में मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज की दीक्षा आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के करकमलों से हुई थी। इसी उपलक्ष्य में रांची में 1 अप्रैल से 6 अप्रैल तक पंचकल्याणक महोत्सव प्रारंभ होने जा रहा है। इससे पूर्व मुनिश्री का दीक्षा दिवस अत्यंत धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। पंचकल्याणक के उपरांत मुनिसंघ का मंगल विहार विश्वप्रसिद्ध जैन तीर्थ श्री सम्मेदशिखर जी की ओर होगा। यहां भव्यातिभव्य रूप से बन रहे गुणायतन तीर्थ क्षेत्र में तीर्थ क्षेत्र कमेटी, श्री सम्मेदशिखर तीर्थ क्षेत्र कमेटी तथा मधुवन जैन समाज द्वारा मुनिसंघ की भव्य एवं मंगलमय अगवानी की जाएगी। आगामी चातुर्मास प्रारंभ होने से पूर्व आषाढ़ की अष्टान्हिका में दिनांक 21 जुलाई से 29 जुलाई 2026 तक श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जाएगा, जो संस्कृत भाषा में निबद्ध है। यह विधान गुरुदेव के ससंघ सान्निध्य में संपन्न होगा, जिसमें देश-विदेश के श्रावकों द्वारा मंडल बुक कराए जा रहे हैं। यदि आप भी तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी में अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ इस महिमामंडित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान को करना चाहते हैं अथवा स्वयं इसमें सम्मिलित होना चाहते हैं, तो कृपया नीचे दिए गए संपर्क नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>संपर्क सूत्र:</strong></p>
<p>7543076063</p>
<p>7543092163</p>
<p>9934050345</p>
<p>7543018668</p>
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		<title>हृदय में गुरु भक्ति तथा आचरण में गुरु के आदर्श दिखना चाहिए : मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने करवाई शरद पूर्णिमा पर विशेष शांतिधारा  </title>
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		<pubDate>Tue, 07 Oct 2025 12:08:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। भोपाल से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चतुर्थ दिवस श्री गणधर वलय विधान के 64 ऋद्धि मंत्रों से युक्त मंत्र मुनि श्री के मुखारविंद से समर्पित किए गए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातःकालीन बेला में शरदपूर्णिमा के विशेष अवसर पर 55 मिनट की विशेष शांतिधारा भगवान के श्री मस्तक पर की गई। इस अवसर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने जैन श्रावक के रूप में भाग लिया। इसी के साथ विदिशा से समग्र पाठशालाओं से लगभग 120 बच्चे एवं शिक्षक तथा शिक्षिकाएं भी पहुंची तथा मुनि श्री से आशीर्वाद लिया। संपूर्ण भोपाल नगर में वाहनों के माध्यम से धर्म की प्रभावना करते हुए विद्योदय के कार्यकर्ता विधान के मध्य मुनि श्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे। उनको संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि गुरुदेव के पक्के अनुयायी बनो हृदय में गुरु भक्ति तथा आचरण में गुरु के आदर्श दिखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने कभी भौतिक और सांसारिक जन्मदिन को मनाने के लिये प्रोत्साहित नहीं किया। उन्होंने हमेशा दीक्षा दिवस मनाने की प्रेरणा दी क्योंकि, एक मुनि का जन्म ही दीक्षा के उपरांत होता है। इसलिये मैं भी कभी सांसारिक जन्म दिवस मनाने को प्रोत्साहित नहीं करता। आप लोगों ने इस बहाने गुरुदेव को याद किया तो उसमें कोई हांनि नहीं है। गुरुदेव ने जो आदर्श और प्रेरणा हम लोगों को दी। वह विचार,और उनके मार्गदर्शन को जन जन में फैलाएं तथा उनक ेआचरण को अपने जीवन में साकार करें।</p>
<p>उन्होंने विद्योदय का अर्थ बताते हुए कहा कि विद्या का उदय अर्थात आप सभी के जीवन में ष्विद्या का प्रकाश फैले और इसी प्रकार आप सभी गुरु की भक्ति करते रहे। इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्र.अशोक भैया, ब्र.अभय भैया, सहायक अमित वास्तु,ने किया। इस अवसर पर विद्याप्रमाण गुरुकुलम् टीम सहित दि. जैन पंचायत भोपाल के समस्त पदाधिकारी उपस्थित थे।</p>
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		<title>48 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ: अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आराधना में लिया भाग  </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Oct 2025 15:09:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में श्री 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान (संस्कृत बीजाक्षरों युक्त) का शुभारंभ हुआ। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; भोपाल। आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में श्री 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान (संस्कृत बीजाक्षरों युक्त) का शुभारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में श्री 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान (संस्कृत बीजाक्षरों युक्त) का शुभारंभ हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6 बजे मुनि संघ के सान्निध्य में घटयात्रा के साथ हुई। सभी महिलाएं इंद्राणिओं की विशेष वेशभूषा में सिर पर चांदी तथा अन्य धातु के मंगलकलश धारण कर चल रही थीं। वही पुरुषवर्ग भी विशेष वस्त्रों से सुसज्जित होकर धर्म ध्वजा को धारण कर चल रहे थे। समूचे अवधपुरी का वातावरण सूर्य की प्रथम रश्मि से ही धर्ममय हो गया। घटयात्रा वापस आयोजन स्थल पर वापस आई एवं कत्थावाला परिवार कानपुर द्वारा ध्वजारोहण संपन्न हुआ। इसके बाद मंडप उदघाटन एवं सकली करण की क्रियाएं संपन्न हुई। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् जिनालय से जब चातुर्मास चकृवर्ती तथा चातुर्मास के नवरत्न एवं मंडलों के पुण्यार्जक अपने सिर पर श्री जी को विराजमान कर पांडाल की ओर आगे बढ़ रहे थे तो उनके साथ चल रहे श्रावक प्रभु की जयजयकार कर रहे थे एवं इंद्राणियां मंगलकलश धारण कर मंगल गीत गाते हुए चल रही थीं। अवधपुरी का यह दृश्य किसी स्वर्गलोक जैसा शोभायमान हो रहा था।</p>
<p><strong>सिद्ध परमात्माओं की वृहद स्तुति करने वाला विधान है</strong></p>
<p>विधानाचार्य एवं संगीतकार की स्वरलहरियों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। पांडुक शिला पर अभिषेक विधि को संपन्न कराया गया एवं मुनि श्री के मुखारबिंद से विश्व में शांति स्थापित हो कि मंगलभावना से शांतिधारा हुई। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की महिमा को सुनाते हुए कहा यह सर्व विधानों में श्रेष्ठतम सभी प्रकार की विघ्न बाधा को दूर करने वाला तथा विशुद्धि को बढ़ाने वाला सभी सिद्ध परमात्माओं की वृहद स्तुति करने वाला विधान है। उन्होंने कहा कि यहां पर श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की स्थापना मूल बीजाक्षरों से युक्त मंत्र एवं ‘अ‘ से लेकर ‘ह’ तक सभी अक्षरों के साथ की गई है,जो इस बात का प्रतीक है।,लोक में जितने भी मंत्र है उन सभी मंत्रों के बीज यंहा इस मंडल में मौजूद है। उन सभी मंत्रों की आराधना इन आठ दिनों में यहां पर संपन्न होगी।</p>
<p><strong>आपकी अंतरंग की शुद्धि होगी, जो कि कर्म निर्जरा का साक्षात कारण बनेगा </strong></p>
<p>मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने कहा कि विश्व की वह समस्त शक्तियां यहां पर प्रतिष्ठापित होंगी। मुनि श्री ने कहा विधान में प्रतिदिन पूजन, जाप्यानुष्ठान,और हवन तीनों होते हैं। इसमें से यदि कोई एक भी कम है तो वह विधान नहीं केवल पूजन कहलाएगी। उन्होंने कहा कि आप लोग जितनी अधिक भाव विशुद्धि रखेंगे। उतनी ही आपकी अंतरंग की शुद्धि होगी, जो कि कर्म निर्जरा का साक्षात कारण बनेगा तथा उनके जीवन में धर्मानुराग बड़ने से परिवर्तन आऐगा एवं दुःख दारिद्र नष्ट होकर सभी प्रकार की विघ्न बाधाएं नष्ट होंगी।</p>
<p><strong>आप अपनी शुद्धि का ध्यान रखते हुए विशुद्धि को बढ़ाइए</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि अब यह मात्र साधारण पांडाल नहीं है। यह एक समवसरण का रूप ले चुका है। 48 जिनबिंब विराजमान हैं। यहां की ऊर्जा अनंतगुना बढ़ चुकी है तथा जैसे-जैसे प्रभु भक्ति आगे बढ़ेगी। यहां की ऊर्जा भी अनंतगुणा बढ़ती जाएगी। आप सभी साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्थापना नियोग से सौधर्म इंद्र एवं इंद्राणिओं के रुप में हैं। आपके साथ चतुर निकाय के देव भी प्रभु की भक्ति कर रहे हैं। आप अपनी शुद्धि का ध्यान रखते हुए विशुद्धि को बढ़ाइए। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को अनुशासन एवं शुद्धि का विशेष निर्देश देते हुए कहा कि पांडाल में किसी भी प्रकार की अशुद्धि नहीं रहना चाहिए। यदि यहां पर अशुद्धि होगी तो वह संकलेष का कारण बनेगा और उससे उल्टा कर्म वंध होगा। इसलिये सभी लोग भाव विशुद्धि के साथ अंतरंग की शुद्धि को बनाये रखें। इस अवसर पर समस्त क्षुल्लक मंचासीन रहे।</p>
<p><strong>प्रतिदिन अभिषेक और शांतिधारा होगी </strong></p>
<p>कार्यक्रम का संचालन विधानाचार्य अभय भैया एवं सहायक अमित वास्तु इंदौर ने किया। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया प्रतिदिन प्रात 6 बजे मंगलाष्टक के साथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा प्रारंभ होगी। इसके बाद महा पूजा एवं मध्य में 8.30 से 9.20 बजे तक मुनि श्री का मांगलिक उदबोधन एवं विधान प्रारंभ होगा तथा प्रतिदिन 11 बजे तक समापन होगा। सांयकाल 6. 20 से शंकासमाधान एवं 7.30 से मंगल आरती होगी। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एवं विद्यासागर प्रवंधकीय संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने भोपाल जैन समाज से सभी धार्मिक क्रिआओं में भाग लेने की अपील की है।</p>
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		<title>जीवन को खुशहाल बनाना है तो आग्रहपूर्ण प्रवृत्ति त्यागेंः पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों एवं भगवान के माता-पिता की गोद भराई होगी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/if_you_want_to_make_your_life_happy_then_give_up_your_insistent_attitude/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Nov 2024 09:41:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन को सुखी बनाना है तो आग्रह पूर्ण प्रवृत्ति को त्यागना होगा। दिगंबर जैन समाज के लोगों को यह उपदेश मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नेमीनगर में प्रातःकालीन धर्म सभा में दिए। इंदौर से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर&#8230; इंदौर। पहले परिवार में दादा-दादी चाचा-चाची हुआ करते थे और यदि कोई बात होती [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन को सुखी बनाना है तो आग्रह पूर्ण प्रवृत्ति को त्यागना होगा। दिगंबर जैन समाज के लोगों को यह उपदेश मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नेमीनगर में प्रातःकालीन धर्म सभा में दिए। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> पहले परिवार में दादा-दादी चाचा-चाची हुआ करते थे और यदि कोई बात होती थी तो वह संभाल लिया करते थे। आजकल तो छोटी-छोटी बातों पर व्यक्ति आग्रह कर अड़ जाता है और दुराग्रह पैदा हो जाते हैं। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने नेमीनगर में प्रातःकालीन धर्म सभा में यह प्रबोधन दिया। उन्होंने विनोद पूर्ण लहजे में एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि घर में पति-पत्नी थे और अपनी भविष्य की संतान के विषय में सोच रहे थे। पत्नी की इच्छा डाक्टर बनाने की थी जबकि, पति उसे वैज्ञानिक बनाना चाहता था। पत्नी कहती मैं नौ माह तक अपनी संतान को अपने पेट में रखूंगी मैं उसकी मां हूं, उसे डॉक्टर ही बनाऊंगी और पिता कहता कि आजकल गली-गली में डाक्टर हैं। मैं अपने बेटे को वैज्ञानिक ही बनाऊंगा। दोनों अपनी जिद पर अड़ गए और बात तू-तू मैं-मैं पर पहुंचकर तलाक तक पहुंच गई। जज समझदार था उसने मामले की तह में जाते हुए कहा कि आप बेटे को बुलाइए। बेटा क्या बनना चाहता है? तो पति-पत्नी दोनों एक साथ बोले कि अभी बेटा हुआ ही कहां है? जज के सामने उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।</p>
<p><strong>हठाग्रही प्रवत्ति को रोकें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि बात हंसने की नही आप लोगों की हठाग्रही प्रवत्ति के कारण  छोटी-छोटी बातों पर ही उलझ पड़ते है, जिनका कोई सिर पैर नहीं होता कभी बच्चों की डिरेस को लेकर तो कभी अन्य छोटी-छोटी बातों पर बच्चों के सामने ही माता-पिता आपस में उलझ पड़ते हैं। मुनिश्री ने कहा कि हठाग्रही नहीं बनिए। खुद को मनाना सीखिये। मन में खिन्नता मत लाइए। अपनी बात को इस प्रकार से रखो कि सामने वाला मान जाए तो ठीक नहीं माने तो ठीक। अपनी बात को थोपिये मत।</p>
<p><strong>धर्म के मर्म को समझिए</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मैं रोज आपको कहता हूं, आप लोग हमारी बात को सुनते ही नहीं फिर भी हम कर्तव्य मानकर कहते रहते हैं। आप लोग मान जाओ तो ठीक और नहीं मानो तो ठीक। यदि हम अपने आग्रह में लग जाएंगे तो मन में क्षोभ और क्लेश भी उत्पन्न होगा। यही स्थिति समाज, परिवार रिश्तेदारी और मित्रों के बीच में उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा धर्म के मर्म को समझिए। अपने जीवन को ऐसा बनाओ कि वह सबमें रम सके। सबको अपना बना सके, यह तभी हो सकता है, जब हम अपनी बात पर अड़ना बंद कर देंगे। सास ने बहू से कुछ कहा और बहू ने बात नहीं मानी बस इसी बात को लेकर ही घर में अशांति का माहौल बन जाता है।</p>
<p><strong>बच्चों पर जबरन बोझ न डालें</strong></p>
<p>मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज ने कहा कि आजकल कम पढे़ लोग सुख शांति से रहते है। ज्यादा पढ़े-लिखे लोग ज्यादा कन्फयूज हो रहे है। बच्चे पहले भी पढ़ते थे और 60 प्रतिशत अंक लाकर बच्चे तथा मां-बाप दोनों खुश रहते थे। अपना व्यापार कृषि आदि कर खुशी-खुशी पूरा परिवार एक साथ रहता था। आज 95 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी बच्चे रोते-रोते घर आते हैं। उसका कारण है कि बच्चों के ऊपर आपने टॉप करने की मानसिकता बना रखी है। थोड़े से कम नंबर आने पर ही वह डिप्रेशन के शिकार हो जाते है। उन्होंने कहा कि बेटा और बेटियों को पढ़ाई के साथ ही व्यव्हारिक ज्ञान भी दीजिए। जिससे उनके अंदर सहनशीलता आए। यदि वह 70 प्रतिशत या कम नंबर भी लाए तो उनका हौसला बढ़ाइये। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन थे।</p>
<p><strong>श्रीफल भेंट कर मुनिश्री से आग्रह किया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आज की धर्म सभा में छत्रपति नगर समाज के अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, विपुल बाझल, कमल जैन चैलेंजर, श्रुत जैन, वीरेंद्र जैन, राकेश नायक आदि समाज जन उपस्थित हुए और छत्रपति नगर में परम पुज्य मुनि संसघ का मंगल प्रवेश एवं नवनिर्मित मान स्तंभ में वेदी प्रतिष्ठा मुनिससंघ के सानिध्य में हो। यह पुनीत भावना के साथ श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि संसघ ने आहार चर्या के बाद दोपहर में डेढ़ बजे उदासीन आश्रम कंचनबाग की ओर प्रस्थान किया। सांयकाल पौने 6 से बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम एवं रात में गोकुल नगर के पंचकल्याणक महोत्सव के प्रमुख पात्रों एवं भगवान के माता-पिता की गोद भराई भी शुक्रवार को होगी। विश्राम यहीं पर होगा।</p>
<p><strong>कनाड़िया रोड पर होगी मुनिश्री की अगवानी </strong></p>
<p>30 नवंबर शनिवार को मुनिसंघ प्रातःसाढे़ 6 बजे वैभवनगर की ओर प्रस्थान करेंगे। मंगल अगवानी साढ़े 7 बजे संविद नगर कनाडिया रोड़ पर की जाएगी। पंचकल्याणक महा महोत्सव समिति के संयोजक हर्ष तृप्ति जैन धर्मप्रभावना समिति के अध्यक्ष अशोक रानी डोसी, नवीन आनंद गोधा सहित समस्त पदाधिकारियों ने सकल दिगंबर जैन समाज से आग्रह किया है कि मुनिसंघ की मंगल अगवानी कर पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
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		<title>पंचकल्याणक महा महोत्सव के लिए भूमि शुद्धि कीः गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां प्रारंभ  </title>
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		<pubDate>Fri, 22 Nov 2024 13:10:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगामी 2 से 7 दिसंबर तक आयोजित होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए वैभव नगर दिगंबर जैन मंदिर इंदौर के सामने नमो खेल परिसर में भूमि शुद्धि का कार्यक्रम किया गया। मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में यह प्रतिष्ठापूर्ण कार्यक्रम 2 दिसंबर से होने जा रहा है। पढ़िए इंदौर से यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आगामी 2 से 7 दिसंबर तक आयोजित होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए वैभव नगर दिगंबर जैन मंदिर इंदौर के सामने नमो खेल परिसर में भूमि शुद्धि का कार्यक्रम किया गया। मुनिश्री प्रमाण सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में यह प्रतिष्ठापूर्ण कार्यक्रम 2 दिसंबर से होने जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेग सागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आगामी 2 से 7 दिसंबर तक आयोजित होने वाले पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए वैभव नगर दिगंबर जैन मंदिर इंदौर के सामने नमो खेल परिसर में मुनि श्री के आशीर्वाद से बाल ब्र. अभय भैया जी एवं अमित वास्तु द्वारा मंत्रोच्चारण के साथ भूमि शुद्धि की गई। साथ ही इस भव्य आयोजन को लेकर तैयारियों में जैन समाज पूरे मनोयोग से जुटा हुआ है। तैयारियों को अंतिम रूप दिए जाने के लिए चर्चाओं का दौर भी जारी है।</p>
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