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	<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि धर्म की कठिन साधना श्रावक धर्म की सरल राह है मोक्ष मार्ग : मुनि श्री प्रमाणसागरजी ने झारखंड में दी मंगल देशना </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 16:30:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;  रांची। झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। <span style="color: #ff0000">रांची से पढ़िए, राज कुमार जैन अजमेरा और विजय जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> रांची।</strong> झारखंड की राजधानी में इन दिनों बिरसा मुंडा पार्क मे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहा है। पांचवें दिवस केवल ज्ञान कल्याणक के अवसर पर समवसरण में गणधर पीठ से प्रवचन देते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि आत्मकल्याण और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को मुनि धर्म का पालन करने का प्रयास करना चाहिए, जो व्यक्ति मुनि धर्म का पालन करने में असमर्थ हैं, उनके लिए जैन धर्म में श्रावक धर्म की सुव्यवस्थित परंपरा का विधान किया गया है। मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में बताया कि जैन मुनि 28 मूलगुणों का पालन करते हुए तेरह प्रकार के चारित्र को अंगीकार करते हैं। ये अट्ठाईस मूलगुण ही मुनिव्रत की आधारशिला हैं, जिनके बल पर मुनि कठोर साधना में स्थिर रहकर मोक्ष मार्ग को प्रशस्त करते हैं तथा अपने चारित्र की दृढ़ता बनाए रखते हैं,उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए मुनि व्रत धारण करना संभव नहीं है, इसलिए गृहस्थों के लिए श्रावक धर्म का मार्ग बताया गया है। श्रावक धर्म को तीन प्रमुख श्रेणियों—पाक्षिक, नैष्ठिक और साधक—में विभाजित किया गया है। पाक्षिक श्रावक वे होते हैं जो जिनमत में श्रद्धा रखते हुए कुलाचार का पालन करते हैं, देव-गुरु-धर्म की उपासना करते हैं तथा रात्रि भोजन का त्याग करते हैं। इसके बाद नैष्ठिक श्रावक अधिक निष्ठा के साथ धर्म का पालन करते हैं, जिनके जीवन में ग्यारह प्रतिमाओं का क्रमिक विकास होता है, जो आध्यात्मिक उन्नति की सीढ़ियाँ मानी जाती हैं। मुनि श्री ने कहा कि साधक श्रावक उच्च आध्यात्मिक स्तर पर पहुंचकर संसार, शरीर और भोगों से विरक्त हो जाते हैं तथा पंच गुरु की शरण स्वीकार करते हैं। वे क्रमशः व्रतों और गुणों में वृद्धि करते हुए अंततः संलेखना (समाधि मरण) के माध्यम से शांतिपूर्वक देह का त्याग करते हैं,मुनि श्री ने कहा कि श्रावक अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार पाक्षिक से नैष्ठिक और आगे साधक अवस्था की ओर अग्रसर हो सकता है,जीवन भर कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए अंत में संलेखना द्वारा देह का परित्याग करना ही जीवन का वास्तविक सार है।</p>
<p>जैन धर्म की यह महान परंपरा स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर धर्म का पालन करते हुए आत्मशुद्धि के मार्ग पर अग्रसर होकर मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।</p>
<p><strong>मुनि श्री संधान सागरजी महाराज ने किया उत्कृष्ट कैशलोंच</strong></p>
<p>आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी के शिष्य एवं मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज के प्रभावक संघस्थ तपस्वी मुनि श्री संधान सागर महाराज ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव के चतुर्थ दिवस तप कल्याणक के अवसर पर बिरसा मुंडा फन पार्क के प्राकृतिक वातावरण में अद्वितीय तप का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सिर, दाढ़ी और मूंछों के केशों को स्वयं अपने हाथों से राख के सहारे उखाड़कर उत्कृष्ट कैशलोच किया। मुनिसंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनि श्री प्रत्येक दो माह में इस प्रकार का कठोर कैशलोच करते हैं। इस अद्भुत तपस्या को देखने के लिए पंचकल्याणक स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। व्यस्त कार्यक्रम और भीड़भाड़ के बावजूद मुनि श्री प्रतिदिन अपर बाजार स्थित श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं रातू रोड स्थित बासुपूज्य जिनालय के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जो उनकी अटूट साधना और अनुशासन का प्रतीक है।</p>
<p><strong>कैवल्यज्ञान कल्याणक पर गूंजा शंखनाद </strong></p>
<p>पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिवस कैवल्य ज्ञान कल्याणक की भव्य पूजा हुई। प्रातःकाल मुनि वृषभ सागर महाराज की आहार चर्या के पश्चात दिन में भगवान के कैवल्यज्ञान से संबंधित समस्त क्रियाएं मुनिसंघ द्वारा शंखध्वनि के साथ संपन्न कराई गईं। समवसरण सभा में गणधर परमेष्ठी के रूप में मुनि श्री प्रमाणसागर जी, मुनि श्री संधान सागर जी महाराज एवं भावी मुनि श्री समादर सागर जी महाराज सहित ब्रह्मचर्य धारण करने वाले साधकों एवं प्रतिष्ठाचार्यों ने मुनि श्री से धार्मिक शंकाओं को रखा जिसे मुनि श्री ने तत्क्षण गूढ़ प्रश्नों के उत्तर देकर सभी को संतुष्ट किया।</p>
<p><strong>6 अप्रैल को मोक्ष कल्याणक, फिर सम्मेदशिखर जी की ओर मंगलविहार</strong></p>
<p>महामहोत्सव के अंतिम दिवस 6 अप्रैल को प्रातः बेला में भगवान के मोक्ष कल्याणक की पूजा संपन्न होगी। इसके उपरांत मुनिसंघ का मंगलविहार पावन तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर जी की ओर प्रारंभ होगा। इस मंगलविहार में शामिल होने हेतु रांची ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>सम्मेदशिखर में ऐतिहासिक जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव</strong></p>
<p>मुनिसंघ 15 अप्रैल को श्री सम्मेदशिखर जी में मंगल प्रवेश करेगा।16 एवं 17 अप्रैल को विभिन्न धार्मिक विधान एवं मांगलिक कार्यक्रम होंगे जबकि, 18 अप्रैल को गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज द्वारा पहली बार सम्मेदशिखर तीर्थराज पर जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की जाएगी। इस भव्य अवसर पर झारखण्ड़,मध्यप्रदेश, पश्चिमबंगाल,महाराष्ट्र, गुजरात एवं राजस्थान सहित पूरे देश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था</strong></p>
<p>गुणायतन परिवार द्वारा 17, 18 और 19 अप्रैल को तीन दिवसीय विशेष व्यवस्था की गई है। जिसमें सभी श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं शुद्ध भोजन की उत्तम व्यवस्था रहेगी।गुणायतन परिवार के पदाधिकारियों ने देशभर के श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि इस ऐतिहासिक एवं दुर्लभ दीक्षा महोत्सव के साक्षी बनने हेतु अवश्य पधारें एवं पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
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		<title>मंत्र हमारे जीवन में कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है : सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में वृहद महा शांतिधारा में मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने दी देशना </title>
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		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:31:17 +0000</pubDate>
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<p><strong>सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पूर्णमासी के अवसर पर वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर</strong>। सिद्धक्षेत्र कुण्डलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में पूर्णमासी के अवसर पर वृहद शांतिधारा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रेष्ठी संजय डॉ. मनीषा मेहुल सिंघई रतनचंद श्रद्धा जैन परिवार यूएसए, आलोक प्रियंका ऐरा सतीश जैन परिवार इतवारी नागपुर, ललितेश मुकेश नितिन अंकित जैन परिवार फिरोजाबाद ,पंकज अतिशय यश जैन मुरादाबाद ,अनुराग जिनेश कुमार सोधिया गढ़ाकोटा ने प्राप्त किया। मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने वृहद शांतिधारा का वाचन किया। इस अवसर पर मुनि श्री ने वृहद शांतिधारा का महत्व बतलाते हुए कहा कि जब कभी भी हमारा मन अशांत होता है तो अरिष्ट निवारक इन वृहद शांतिमंत्रों का प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऋद्धि मंत्रों का जाप जीवन में शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा को स्थापित कर वातावरण को शांत और पवित्र बनाता है, जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उत्थान में सहायक सिद्ध होता है। इन मंत्रों के जाप से अशुभ कर्म नष्ट हो जाते हैं जो समाज में आध्यात्मिक शुद्धि और एकता की ओर अग्रसर करता है तथा व्यक्तिगत रुप से सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने में मदद करता है। शांति मंत्रों की तरंगें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं तथा यह माना जाता है कि शांतिमंत्रों के नियमित प्रयोग से बीमारियां दूर हो जाती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। प्रचारमंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि आज प्रातः 9 से 10 बजे तक 55 मिनट की यह वृहद शांतिधारा मुनि श्री के मुखारविंद से हुई।</p>
<p><strong>मै कौन हूं ? मेरा स्वरूप क्या है? </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मंत्रों की एकाग्रता से सांसारिक चिंताओं से दूर होकर आत्मा के शुद्ध स्वरूप पर ध्यान केंद्रित हो जाता है। आत्मज्ञान ही हमारे जीवन के उत्कर्ष का आधार है। आत्मा को जाने बिना कभी भी कल्याण नहीं हो सकता। जिसको एक बार आत्मज्ञान हो जाता है। उसकी प्रवृत्ति में स्वाभाविक सहजता आ जाती है। मै कौन हूं ? मेरा स्वरूप क्या है? मेरा गुणधर्म क्या है? मेरा स्वभाव क्या है? जो इस बात को समझ लेता है। उसका भ्रम टूटता है। वृह्म के बोध से ही मर्म का निवारण होता है।</p>
<p><strong>यह काम भोग शरीर की खाज खुजाने के समान </strong></p>
<p>भ्रम टूटने से ही मर्म की उपलब्धि और कर्म का निवारण होता है,आचार्य कुंदकुंद देव कहते है कि मैं कौन हूं ? जिस दिन जीवन की यह सच्चाई को जान लोगे, तो तुम्हारा सारा व्यामोह दूर होकर जीवन की दशा और दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि क्षण मात्र के सुख के पीछे अपने संपूर्ण जीवन और अपनी संपूर्ण शक्ति को इस ‘काम भोग’ की लालसा में लगा देते हो। मुनि श्री ने कहा कि अब भी संभल जाओ? यह काम भोग शरीर की खाज खुजाने के समान है। उसको खुजलाने में सुख नहीं मिलता उस पर मलहम लगाने में ही सार है। उसी प्रकार जिसको आत्मज्ञान हो जाता है,वह काम भोग की खुजली को खुजलाता नहीं उस खाज पर तत्वज्ञान की मलहम लगाकर उसे स्थाई रुप से ठीक करता है।</p>
<p><strong>शंका समाधान का आयोजन हुआ</strong></p>
<p>इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री संधानसागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक जी एवं ब्रह्मचारी भैया, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी, सदस्य बड़ी में संख्या देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे। आज भी श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन एवं आहारचर्या में भाग लेकर जीवन कृतार्थ किया। शंका समाधान का भी आयोजन हुआ। भक्तामर दीप अर्चना और पूज्य बड़े बाबा की महाआरती हुई।</p>
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		<title>सभी धर्मध्यान करें धर्म श्रद्धालु बनकर जीवन जिएं :  3 जनवरी को मुनि श्री प्रमाणसागर जी के सानिध्य में होंगे कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 05:36:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में विविध धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त भाग ले रहे हैं। कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर (दमोह)। सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में विविध धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त भाग ले रहे हैं। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर (दमोह)।</strong> सिद्धक्षेत्र कुंडलपुर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ससंघ सानिध्य में विविध धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त भाग ले रहे हैं। कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी प्रचार मंत्री जयकुमार जैन जलज ने बताया कि इस अवसर पर प्रातः भक्तामर महामंडल विधान, पूज्य बड़े बाबा का अभिषेक, रिद्धिमंत्र, शांतिधारा, पूजन, विधान हुआ। मुनि श्री प्रमाण सागर जी के मुखारविंद से शांतिधारा का वाचन किया गया। इस अवसर पर शांतिधारा करने का सौभाग्य तरुण सराफ, निर्मल कुमार, चंद्रकुमार सराफ, ललित सराफ, कुंवरसेन सराफ, मोदी ज्वैलर्स दमोह, चक्रेश पीयूष जैन फिरोजाबाद, अक्षत अर्चना ताराचंद पदमश्री बेनाडा परिवार कोलकाता, मानकचंद, कपूरचंद कोठारी आष्टा, अनिल महावीरप्रसाद जैन मुंबई, श्रीधर श्रीपाल सचिन जैन बेलगांव कर्नाटक, रितेश जैन ललितपुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अभिषेक कर जीवन को धन्य किया। शुक्रवार को मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज की आहारचर्या कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ परिवार के चौके में हुई।</p>
<p><strong>हर बुराई में अच्छाई देखो</strong></p>
<p>बहुचर्चित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री ने श्रद्धालु भक्तों की शंका का समाधान करते हुए कहा कि दुख सहने की आदत अपने भीतर जगाओ। जिसे सुख में जीने की आदत है वह दुख आने पर घबरा जाता है। बुराई में अच्छाई देखो आपदा में अवसर देखने की कोशिश करो। हर बुराई में अच्छाई देखो। मनुष्य के जीवन में बुरा से बुरा क्या हो सकता है। उस उम्मीद और संकल्प को खो देना ही सबसे बुरा है। अपनी उम्मीद को मत खोओ। मन में आशा का दीप जला के रखो। एक जिज्ञासु की शंका का समाधान करते हुए कहा कि धुआं उड़ाना बंद करो तय करो हम धुआं नहीं उड़ाएंगे। हम धुआं को फूंक नहीं मारेंगे। सुगंध फैलाने संकल्पित हो। सभी धर्मध्यान करें धर्म श्रद्धालु बनकर जीवन जिएं गंदगी नहीं फैलाना है। जिन शासन की धर्म ध्वजा को फहराएं।</p>
<p><strong>दान घटिया चीज का नहीं होता</strong></p>
<p>कन्यादान क्या होता है? इस प्रश्न पर मुनि श्री ने कहा कि पुराने जमाने में वर पक्ष वधु पक्ष से संपर्क करता था विवाह हेतु। हमारा वंश कैसे बढ़ेगा। अनुरोध लेकर जाता था वधु पक्ष के पास। वधु पक्ष अपने जिगर का टुकड़ा दे रहा यह कन्यादान दे रहा है, धन पैसा का दान नहीं वंश दिया इसको कन्यादान कहते। दान घटिया चीज का नहीं होता, घटिया लोग दान नहीं कर पाते। जिनकी सोच सर्वोच्च होती वे दान कर पाते हैं। हर गांव, शहर नए शहर की ओर बढ़ रहा है भगवान को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। कार्य योजना बनाकर उन सारे मंदिरों की व्यवस्था होना चाहिए ।देश की तीर्थ क्षेत्र कमेटियों को उन्होंने धर्म प्रभावना और प्रबंधन फंड बनाकर यात्रियों को सुविधा देने हेतु खर्च की व्यवस्था करने संकेत सुझाव दिया।</p>
<p><strong> मुनि श्री के मुखारविंद से शांतिधारा</strong></p>
<p>3 जनवरी को प्रातः कुंडलपुर में पूज्य बड़े बाबा के श्री चरणों में पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज के मुखारविंद से लगभग 1 घंटा चलने वाली महाशांति धारा सहस्त्र नामांकित बीजाक्षर मंत्रों के साथ की जाएगी। शंका समाधान का भी कार्यक्रम होगा। नववर्ष मनाने अभी भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त कुण्डलपुर पहुंच रहे हैं और पूज्य बड़े बाबा के दर्शन, अभिषेक,परम पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर जी ससंघ मुनिराजों के दर्शन लाभ सानिध्य प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी सदस्यों की उपस्थिति रही।</p>
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		<title>नैनागिरि कमेटी ने मुनि श्री प्रमाणसागर जी से आशीर्वाद लिया: मुनिश्री को श्रीफल भेंटकर नैनागिरि तीर्थ पधारने का किया निवेदन    </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Nov 2025 14:11:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि कमेटी ने रविवार को सागर जिले के राहतगढ़ में होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के लिए विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं ससंघ को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश-राजेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। तहसील अंतर्गत सुविख्यात श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि कमेटी ने रविवार को सागर जिले के राहतगढ़ में होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के लिए विराजमान मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं ससंघ को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश-राजेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> तहसील अंतर्गत सुविख्यात श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि कमेटी ने रविवार को सागर जिले के राहतगढ़ में होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव के लिए विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य गुणायतन एवं शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज एवं ससंघ को श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>नैनागिरि कमेटी ने गुरुदेव के श्रीचरणों में श्रीफल अर्पित करते हुए नैनागिरि क्षेत्र की विविध गतिविधियों के बारे में बताया और ससंघ नैनागिरि तीर्थ पर पधारने के लिए निवेदन किया और भोपाल के मंगल चातुर्मास दौरान पूज्य गुरुदेव द्वारा नैनागिरि की पावन भूमि परिसर में मिनी गुणायतन बनाने के तहत विविध रूपरेखा की स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसके प्रति कोटि-कोटि साधुवाद आभार जताया।</p>
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		<title>गुरु भाइओं का मंगल मिलन शीतलधाम में : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल प्रवेश दोपहर तीन बजे    </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Nov 2025 11:55:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई। विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;  विदिशा। शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> शंका समाधान एवं गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागरजी ससंघ का मंगल विहार विदिशा की ओर चल रहा है। मुनिसंघ की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवान गंज में संपन्न हुई एवं शंका समाधान तथा रात्रि विश्राम पारस गार्डन सलामतपुर में होकर रविवार को प्रातः प्रवचन सांची दिगंबर जैन मंदिर में प्रातः8:30 बजे हुए। आहार चर्या उपरांत दोपहर एक बजे सांची से मंगल विहार होकर तीन बजे ईदगाह चौराहे से सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा मंगल अगवानी की जाएगी। मुनिसंघ शीतलधाम पर पहुंचेंगे एवं विदिशा नगर में विराजमान</p>
<p>मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ससंघ के साथ गुरु भाईओं का मंगल मिलन होगा। सांयकालीन विश्वप्रसिद्ध शंकासमाधान 6:20 से 7.15 बजे तक शीतलधाम पर होगा।</p>
<p><strong>हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं</strong></p>
<p>इधर, ज्ञानोदय तीर्थ दीवानगंज में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि जीवन उन्हीं का ऊंचा उठता है,जो अपने आपको आगे बढ़ाने के लिये संघर्ष करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने आपसे प्रश्न करो मैं कौन हूं, मेरा क्या है? मैं क्या कर रहा हूं? और मुझे क्या करना चाहिये? उन्होंने कहा कि हमें अपने आत्मस्वरूप का ज्ञान और बोध ही नहीं है। इसलिये जो मैं हूं इसे जानते नहीं, बहुत थोड़े से लोग है, जो अपने जीवन और जीवन के मर्म को पहचानते हैं।</p>
<p><strong>यह शरीर एक चोले के समान है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आचार्य कुंद-कुंद स्वामी कहते है कि मैं एक शुद्ध चेतन आत्मा हूं, यह शरीर एक चोले के समान है। यह जो परिचय दिया जा रहा है, वह मैं नहीं वह संसार को भटकाने वाला है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे व्यक्ति नशे की हालत में होता है तो उसे कोई सुधबुध नहीं रहती। उससे भी खराब नशा मोह का होता है, जिसमें मनुष्य अपनी सुधबुध भूल जाता है।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी का विदिशा में मंगल प्रवेश 16 नवंबर को : रविवार को आहारचर्या सांची दिगंबर जैन मंदिर में होगी </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 05:49:42 +0000</pubDate>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य विद्या प्रमाण गुरुकुलम के जनक गुणायतन शंका समाधान के प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने राजधानी भोपाल में 8 माह तक लगातार प्रवास कर तथा भोपाल को एक नई सौगात विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के रूप में देकर विदिशा की ओर मंगल विहार किया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य विद्या प्रमाण गुरुकुलम के जनक गुणायतन शंका समाधान के प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने राजधानी भोपाल में 8 माह तक लगातार प्रवास कर तथा भोपाल को एक नई सौगात विद्या प्रमाण गुरुकुलम् के रूप में देकर विदिशा की ओर मंगल विहार किया। सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री का संघ सहित रात्रि विश्राम सूखी सिंवनिया में होगा एवं 15 नवंबर शनिवार की आहार चर्या ज्ञानोदय तीर्थ दीवानगंज में होगी तथा 16 नवंबर को आहारचर्या सांची दिगंबर जैन मंदिर में होकर दोपहर पश्चात विदिशा नगर में मंगल प्रवेश होगा।</p>
<p><strong>यह इस धरती का ही कोई सुयोग्य था&#8230;</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया भोपाल के लोग गुरु विछोह की वेदना को महसूस कर रहे हैं। वहीं विदिशा नगर वासियों में अपार उत्साह है अपने गुरुदेव की मंगल अगवानी का। श्री दिगंबर जैन शीतलविहार न्यास श्री सकल दिगंबर जैन समाज एवं मुनि सेवक संघ के सभी सदस्यों में उत्साह का वातावरण है। इधर, जब विद्यासागर विज्ञान संस्थान एवं विद्याप्रमाण गुरुकुलम् के पदाधिकारियों एवं स्कूल के नन्हे मुन्ने बालकों ने सजल नेत्रों से भावभीनी विदाई दी। तब मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि यह इस धरती का ही कोई सुयोग्य था कि 1995 के बाद जब यहां आना हुआ तो इसका अभयोदय काल आ गया और हम निमित्त बन गए।</p>
<p><strong>अंकुरण के उपरांत अब जिम्मेदारी और ज्यादा है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने अपने गुरु आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को याद करते हुए कहा कि उन्हीं की प्रेरणा से गुरुकुलम् का यह स्वरूप निखर कर आया है। मुनि श्री ने सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते कहा कि भावना से ऊपर उठकर कर्तव्य बोध के साथ कार्य करना चाहिए। अब आप लोगों के ऊपर यह एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और बढ़ गई है। खेत में बीज बोया गया उसका अंकुरण हो गया है। अंकुरण के उपरांत अब जिम्मेदारी और ज्यादा है, खरपतवार से उस अंकुरण को बचाने की तथा समय-समय पर खाद-पानी देकर इसे पुष्ट करने की। उन्होंने कहा कि विगत दिनों आप लोगों ने जो कुछ सीखा और समझा और ग्रहण किया। अब उन सबके प्रयोग करने का समय आ गया है। उसमें सभी को मिल जुलकर के फलवान बनाना है।</p>
<p><strong>निश्चित शुरुआत में कठनाइयां ज्यादा आती हैं</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मुझे इस बात की बेहद प्रसन्नता है कि गुरुकुलम् हमारी कल्पना के अनुरूप आकार ले रहा है तथा आने वाले दिनों में एक वृहद स्वरूप प्राप्त करेगा तथा ये नन्हे मुन्ने बच्चों के भविष्य को संवरेगा। उन्होंने कहा कि यह इन बच्चों का पहला साल है और निश्चित शुरुआत में कठनाइयां ज्यादा आती हैं। गुरुदेव ने मूक माटी लिखा है कि कितना भी कुशल पाक शास्त्री हो उसकी पहली रोटी कच्ची हो ही जाती है। उन्होंने कहा कि यह भले ही यह पहली रोटी है लेकिन, तवा गरम है और अब दनादन रोटियां सिकेंगी और सभी रोटियां फूली-फूली होगी, जो सभी के हृदय को और और आल्हादित करेगी।</p>
<p><strong>आपसी तालमेल को बनाए रखें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हम जो छोड़कर जा रहे हैं। उसे आप सभी लोग मिलकर और बड़ा कीजिए। उन्होंने भोपाल गुरुकुलम् की पूरी टीम को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों की आपस की एकता सदभाव और समन्वय बना रहना चाहिए। आपसी तालमेल को बनाए रखें तथा गुरुकुलम के नाम पर सभी अपना ईगो को गुरु चरणों में रखकर इस कार्य को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि आप सभी का एक ही संकल्प रखें कि हमें अपने इस मिशन को आगे बढ़ाना है।</p>
<p><strong> जितना सानिध्य मिला है, उसमें संतोष करो</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हमें आप सभी लोगों की भावना और भक्ति में कोई संशय नहीं है। आप लोगों को जितना सानिध्य मिला है, उसमें संतोष करो अब और रुकना संभव नहीं है। आप सभी जानते है कि जैन मुनियों का जीवन शास्त्रों से बंधा हुआ होता है तथा शास्त्रों की आज्ञानुसार ही जीवन आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि दूरी मन की होती है,बाहर की नहीं, आप सभी लोग तो मन से इतने निकट आ चुके हो कि हमें अपने से कहीं दूर जाने ही नहीं दोगे इस अवसर पर महामंत्री अनुभव सराफ ने कहा कि आपने आशीर्वाद दिया और हम लोग इकट्ठे हुए और उसे गुरुकुलम् परिवार का रूप मिला। गुरुदेव अभी तक तो आप थे लेकिन, अब वह समय आ गया है कि हमें आपके बिना इसे आगे बढ़ाना होगा।</p>
<p><strong>टीम भावना के साथ काम करने की भावना व्यक्त की</strong></p>
<p>8 माह का समय कब निकल गया पता ही नहीं चला। उन्होंने गुरुकुलम् परिवार की भावना को सजल नेत्रों से व्यक्त करते हुए कहा कि आप हम सभी को ऐसा आशीर्वाद प्रदान करें कि हम सभी आपकी भावना में खरे उतरें। इस अवसर पर सुरेश जैन आइएएस, राजेश जैन, विनीत गोधा, सैज के प्रशांत जैन, नरेन्द्र जैन टोंग्या, रचना पारख आदि सभी टीम सदस्यों ने टीम भावना के साथ काम करने की भावना व्यक्त की तथा कहा कि हम आपकी भावनाओं पर खरे उतरेंगे।</p>
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		<title>भोग विलास जीवन का साध्य नहीं, त्याग संयम जीवन का ध्येय हो: मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने त्याग और संयम को प्रवचन में किया विश्लेषित  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/luxury_is_not_the_goal_of_life_sacrifice_and_restraint_should_be_the_aim_of_life/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 09:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दुनियादारी में तो हम नित्य प्रतिदिन उलझे रहते है, भगवान की शरण में आने का मौका बहूत कम मिलता है। यह बात मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने अवधपुरी में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन धर्म सभा में कही। अवधपुरी भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230; अवधपुरी (भोपाल)। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ के सानिध्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दुनियादारी में तो हम नित्य प्रतिदिन उलझे रहते है, भगवान की शरण में आने का मौका बहूत कम मिलता है। यह बात मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने अवधपुरी में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन धर्म सभा में कही। <span style="color: #ff0000">अवधपुरी भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अवधपुरी (भोपाल)।</strong> मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में शनिवार को श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिवस भगवान के अभिषेक एवं शांतिधारा सिद्धभक्ति से हुई। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि विधानाचार्य एवं संगीतकार की मधुरस्वर में भक्ति गीत ‘कमाल हो गया, जी कमाल हो गया गुरु प्रमाण की वाणी से भोपाल में धमाल हो गया’ सभी श्रावक एवं श्राविकाओं ने भक्ति भाव के साथ भगवान के समवशरण में विराजमान 48 मंडलीय जिनेंद्र प्रभु के समक्ष नाचते-गाते झूमते हुए सामुहिक नृत्य प्रस्तुत किए। मुनिद्वय तथा सभी क्षुल्लक महाराज ने दोपहर डेढ़ बजे तक भगवान के 1008 सहस्त्रनामों का उल्लेख करते हुए सभी 1024 अर्घ्य समर्पित किए। इस अवसर पर मुनिश्री ने कहा कि भगवान का नाम जब-जब स्मरण में आता है तो मन मयूर की तरह नाच उठता है।</p>
<p><strong>हृदयकमल का खिल जाना, भक्ति की अभिव्यक्ति का श्रेष्ठतम स्वरूप</strong></p>
<p>हृदय कमल खिल उठता है-उन्होंने आचार्य मानतुंग स्वामी के भक्तामर स्तोत्र की गाथा प्रस्तुत करते हुए कहा कि ‘आस्तां तव स्तवन-मस्त -समस्त-दोष,त्वत्संकथाऽपि जगतां दुरितानि हन्ति,दूरे सहस्रकिरणरू कुरुते प्रभैव, पद्माकरेषु जल जानि विकास भांजि’ अर्थात भगवन् आपका दोष रहित स्तवन तो बहूत दूर की बात है, आपका नाम लेने मात्र से जगत के सभी जीवों के पाप नष्ट हो जाते हैं। जैसे सूर्य की किरणें आते ही सारे जगत में प्रकाश उत्पन्न हो जाता है तथा तालाब में कमल खिल जाते है। उसी प्रकार आपके नाम स्मरण मात्र से हृदयकमल का खिल जाना, भक्ति की अभिव्यक्ति का श्रेष्ठतम स्वरूप है।</p>
<p><strong>&#8230;आपके दोनों चरण कमल मेरे हृदय में समाहित हों </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा विधान का भले ही आज समापन हो जाए लेकिन, प्रभु से यह प्राथना करो कि जीवन का एक-एक पल आपकी भक्ति और आराधना में बीते। उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति करने के लिये बहुत कम मौके मिलते हैं। दुनियादारी में तो हम नित्य प्रतिदिन उलझे रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह जन्म जन्म के संस्कार है कि प्रभु की शरण में आने के बाद भी हमारा मन इधर उधर डोलता है। उन्होंने कहा कि प्रभु से प्रार्थना करो कि भगवन बस इतनी सी कृपा कर दो कि मेरा मन आपके चरणों में लग जाए और आपके दोनों चरण कमल मेरे हृदय में समाहित हों और यदि ऐसा सम्भव न हो तो मेरा हृदय आपके चरण कमलों में हो समाहित हो जाए।</p>
<p><strong>&#8230;.आपकी दशा और दिशा दोनों बदल जाएंगी </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि यह भाव आपके अंतरंग में जग गया तो आपकी दशा और दिशा दोनों बदल जाएंगी और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो जाओगे। मुनि श्री ने कहा कि भोग विलास जीवन का साध्य नहीं है त्याग संयम हमारे जीवन का ध्येय होना चाहिए। भक्ति आलंबनीय नहीं है,भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाकर मोक्ष मार्ग की ओर आगे बढ़ो। यही मेरा सभी को आशीर्वाद है। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज ने मंत्रोच्चारण के साथ विधान समापन की क्रियाएं की।</p>
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		<title>भोग आकांक्षा की चाहत जीवन को बर्बाद करती है : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान प्रकट किए प्रभावी विचार  </title>
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		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 12:42:17 +0000</pubDate>
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<p><strong>जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे भगवान की भक्ति और अर्घ्य उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। विधान के पांचवे दिवस 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। तथा गुरुवार को 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)।</strong> जैसे-जैसे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का क्रम आगे बढ़ रहा है। वैसे-वैसे भगवान की भक्ति और अर्घ्य उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे हैं। विधान के पांचवे दिवस 128 अर्घ्य चढ़ाए गए। तथा गुरुवार को 256 अर्घ्य चढ़ाए जाएंगे। इसी प्रकार 512 तथा भगवान के सहस्त्र नाम के साथ 1024 अर्घ्य समर्पित होकर रविवार को विधान का समापन होगा। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि जिसके हृदय में सम्यक्त्व का प्रकाश उदघाटित होता है वह तो मौका देखता है और भगवान की भक्ति में रम जाता है। उन्होंने सम्यक दृष्टि, धर्मी और अधर्मी तीनों में अंतर स्पस्ट करते हुए कहा कि धर्मी धर्म के लिये मौका देखता है, जबकि अधर्मी आए हुए मौका को छोड़ता है। एक सम्यक् दृष्टि संसार में कर्तव्य भाव से रहता लेकिन, उसमें रमता नहीं। भोगों से उदासीन होकर देव शास्त्र और गुरु की शरण को स्वीकार करते हुए एक ही भावना भाता है कि हे प्रभु में दुनिया में कहीं भी रहूं मेरी दृष्टि आपके चरणों की ओर रहे।</p>
<p><strong>जिसके</strong> अंदर विवेक नहीं है वह पूतना रूपी पंचेन्द्रिय की वासना से ग्रस्त</p>
<p>उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि पूतना ने नंदगांव के बच्चों को आकर्षित करने के लिए अपना आकृषण स्वरुप बनाया। जिससे बच्चे आकृषित होकर उसके आंचल में दुग्धपान करने हेतु चले गए और वह सभी मूर्क्षा को प्राप्त हुए लेकिन, बाल रूप के श्रीकृष्ण पूतना के उन मनोभावों को समझ गये और उन्होंने पूतना का ही काम तमाम कर दिया। इस दृष्टि से जब में तत्व का चिंतन करता हूं तो पाता हूं कि जिसके अंदर विवेक नहीं है। वह पूतना रूपी पंचेन्द्रिय की वासना से आकर्षित भोग आकांक्षा को ही अपनी शरण मान लेता है तथा वह अपने जीवन का सर्वनाश करता है तथा जिसके अंदर विवेक रूपी श्रीकृष्ण प्रकट हो जाते हैं। वह भोग आकांक्षा रूपी पूतना को नष्ट कर संसार से पार हो जाता है।</p>
<p><strong>भगवान</strong> के प्रति उमड़ने वाली भक्ति ही सम्यक् दर्शन का हेतु</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि विषयों में रमने वाले लोग बहुत हैं लेकिन, विषयों से हटकर भगवान की भक्ति करने वाले लोग विरले होते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया का आकर्षण बहुत तीव्र होता है,जो हमें विषय भोगों की ओर आकर्षित करता है, लेकिन जिन्हें परम पुण्य का शुभ संयोग मिलता है। वह अपने एक एक पल को भगवान की भक्ति में लगाता है। आचार्य कुंद कुंद कहते है कि अरिहंत भगवान के प्रति उमड़ने वाली भक्ति ही सम्यक् दर्शन का हेतु है। यदि वह भक्ति आपके अंदर प्रकट हो गई तो समझना बेड़ा पार हो गया। इस अवसर पर मुनि श्रीसंधानसागरजी महाराज सहित क्षुल्लक श्री आदर सागर जी, क्षुल्लक श्री समादरसागर जी, क्षुल्लक श्री चिद्रूप सागर जी, क्षुल्लक श्री स्वरुप सागर, क्षुल्लक श्री सुभग सागर महाराज सहित समस्त संघस्थ ब्रह्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विधानाचार्य ब्र.अशोकभैया ब्र.अभयभैया ने किया एवं विधान में सहयोग अमित वास्तु इंदौर एवं पंडित सुदर्शन पिंडरई ने किया।</p>
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		<title>यहां कोई भी कार्य बिना पुरुषार्थ के सफल नहीं होता : मुनि श्री प्रमाणसागर जी के सान्निध्य में होगा सिद्ध चक्र महामंडल विधान </title>
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		<pubDate>Wed, 01 Oct 2025 10:31:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[4 से 12 अक्टूबर तक आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में होगा। भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;.  भोपाल (अवधपुरी)। 4 से 12 अक्टूबर तक आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>4 से 12 अक्टूबर तक आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में होगा। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;.</span></strong></p>
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<p><strong> भोपाल (अवधपुरी)।</strong> 4 से 12 अक्टूबर तक आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज एवं मुनि श्री संधानसागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में होगा। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 4 अक्टूबर को प्रातः घटयात्रा मुनिसंघ के सानिध्य में कार्यक्रम स्थल पर ध्वजारोहण मंडप उदघाटन एवं सकली करण की क्रियाएं होंगी। प्रतिदिन प्रातः6:30 बजे से भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा तत्पश्चात नित्यनियम पूजन एवं मुनि श्री के प्रवचन होकर 11 बजे तक विधान होगा।</p>
<p>मुनि श्री ने प्रातः धर्म सभा में णमोकार महामंत्र को ध्याओ के संदर्भ में विभिन्न तरीकों से ध्यान कराया तथा णमोकार महामंत्र का महत्व बताते हुए कहा कि यह पाप विनाशक, विघ्नविनाशक है तथा समस्त द्वादशांग जिनवाणी का सार एवं मुक्ति का आधार है। उन्होंने महामंत्र के चार चरण जप,ध्यान,साधना,और आराधना को बताते हुये कहा यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा आधार, अशुभ को टालने वाला तथा समस्त अमंगल को हरने वाला है।</p>
<p><strong>मंत्र जपी बनो मंत्र जीवी नहीं</strong></p>
<p>उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि इस महामंत्र का प्रयोग दुनियादारी, प्रसिद्धि,गोरखधंधा तथा व्यापार व्यवसाय के लिये मत कीजिये। यह कर्मभूमि है,लोक जीवन के कार्य तो अपने पुरूषार्थ से ही करना चाहिये। उन्होंने कहा कि &#8220;मंत्र जपी बनो मंत्र जीवी नहीं&#8221; मंत्र की आराधना और साधना जन्म जरा मृत्यु से मुक्ती के लिये होना चाहिये। उन्होंने कहा कि किसान बीज इसलिये बोता है कि उसकी अच्छी फसल आ जाये। घासफूस तो फसल के साथ अपने आप आती है। उसी प्रकार मंत्रों की आराधना आत्मबोध के लिये होना चाहिये। यह सांसारिक वैभव तो मंत्रों की साधना आराधना करने से अनायास आ जाते हैं। अंतर्मन में हमारी दृष्टि सांसारिकता की ओर न जाकर मुक्ति की ओर चली गई तो कायापलट हो जाएगी। मुनि श्री ने विद्याधरों की बात करते हुये कहा कि जिनके पास जन्म से ही अनेक विद्याएं होती है,और बहुत सी विद्याएं वह सिद्ध भी करते हैं। वह भी भूमि गौचरी मनुष्यों से पीछे है,क्योंकि &#8220;विद्याओं के बल पर जीने वालों का कल्याण नहीं होता,&#8221;आत्मविद्या&#8221; में डूबने वाले ही अपना कल्याण कर पाते है।</p>
<p><strong>संकल्प पूर्वक जाप करें</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि सबसे पहले संकल्प पूर्वक जाप करने का अभ्यास करो। उसमें अपनी रुचि बढ़ाकर आराधना बना लीजिये। जिससे वह आपकी साधना बन जाये। मुनि श्री ने ध्यान करने की चार विधियाँ बताते हुए कहा कि जब जाप में ध्यान लग जाएगा तो वह आपकी श्वांस श्वांस में समा जाएगा और आपकी साधना पूर्ण हो जाएगी। संचालन अमित वास्तु ने किया।</p>
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		<title>अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने जीवन को बदलने की राह बताईं </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:36:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने जीवन को खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल(अवधपुरी)</strong>। कमाई चवन्नी और खर्चा रुपैया और कर्जा लाख का बताओ उस आदमी का क्या होगा? प्रश्न करते हुए मुनि श्री से पूछा तो जबाव मिला- बंटाधार। उन्होंने कहा कि अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए।</p>
<p>यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने जीवन को खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि ‘जीवन में बदलाव ही हमारे जीवन की शाश्वत उपलव्धि होगी’। मुनि श्री ने कहा कि जो लोग पुण्य के फल में मौजमस्ती और भोग विलास करते हैं। वह अपने पुण्य की पूंजी को गंवा रहे हैं। ऊपर से पाप का कर्जा बड़ा रहे हैं तो उनका बंटाधार तो होंना ही है। यदि बंटाधार से बचना चाहते हो ता ेअपनी पुण्य रूपी संपत्ति को बचाइए।</p>
<p><strong>पुण्य के फल से जीवन में अनुकूलताएं बनी रहती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब खर्च अधिक होता है तो व्यक्ति अपनी आय बढ़ाने की कोशिश करता है। पुण्य के भोग में पुण्य खर्चा ज्यादा हो रहा है तो पुण्य को उपार्जित भी करो। मुनि श्री ने कहा कि कम से कम इतना तो करो कि जितना पुण्य संचित कर लाया था, उतना पुण्य बना रहे।। जिससे बेलेंस सीट ठीकठाक बनी रहे। उन्होंने कहा कि पुण्य के फल को चाहते हो तो पुण्य कमाने का जब भी मौका मिले पुण्य कमाते रहना। पुण्य के फल से आपके जीवन में सभी अनुकूलताएं बनी रहती हैं। मुनि श्री ने कहा कि पुण्य की क्रिआओं में लगे रहोगे तो पाप करने से बचोगे। मुनि श्री ने कहा कि अभी तक आप लोग करते क्या हो? सुबह उठने से लेकर रात्री में सोने तक सिर्फ षठकाय जीवों की हिंसा ही तो करते हो। प्रातः घर की साफ सफाई से लेकर स्नानादि नित्यक्रिया तक उसके पश्चात भोजन बनाने तथा वाहन आदि चलाने, व्यापार तथा नौकरी करने में षठकाय जीवों की हिंसा ही होती है और उस हिंसा से पाप ही हांसिल होता है। अब बताओ आपकी बेलेंस सीट किधर है।</p>
<p><strong>दुःख के समय में भगवान को याद करना अच्छी बात</strong></p>
<p>मुनि श्री ने पुण्य की कमाई के साधन बताते हुए कहा कि जिनमंदिर के दर्शन, णमोकार महामंत्र का जाप, व्रत, उपवास, पूजा पाठ गुरु के उपदेश सुनने सो थोड़ा सा पुण्य एकत्रित हो जाता है, लेकिन कितने लोग हैं, जो ब्रहम मुहूर्त में उठकर सुबह भगवान का नाम लेते हैं? हां जब थोड़ी बहुत प्रतिकूलता या मुसीबत आई तो आपके मुख से भगवान का नाम निकलने लगता है और आप लोग भजन भी गाते हो। दुःख के दिनों में वह मेरे काम आते हैं या भगवान पारसनाथ से गुहार लगाते हो मेटो मेटो जी संकट हमारा। मुनि श्री ने कहा कि दुःख के समय में भगवान को याद करना अच्छी बात है, करना भी चाहिए लेकिन, इस आशा से प्रभु की भक्ति करो कि हे प्रभु मेरे दुःख भले ही कम न हो लेकिन, इन दुःखों से में घबऱाऊ नहीं मेरे अंदर इतनी समता प्रदान कर देना। जिससे मैं उन कष्टों को सह सकूं। मुनि श्री ने कहा कि पुण्य करते समय पुण्य के फल की चाह मिट गई। उसी दिन से तुम्हारा जीवन पुण्यमयी हो जाएगा। भगवान पारसनाथ पर संकट आया तो उन्होंने उस उपसर्ग को समता पूर्वक सहा और वह पुण्यमयी हो गए।</p>
<p><strong>पुण्य की क्रिया उपादेय है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि दुःख के दिनों में तुम भगवान को याद करते हो और सुख के दिनों में भूल जाते हो जो सुख के दिनों में भगवान को याद रखता है। वह कभी दुःखी नहीं होता। मुनि श्री ने कहा कि जब भी पुण्य का निमित्त आए तो सबसे पहले मैं और जब पाप का निमित्त मिले तो अपने आपको सबके पीछे कर लेना संत कहते है कि पुण्य का फल हेय है। पुण्य की क्रिया उपादेय है। पुण्य को चाहो अच्छी बात है लेकिन, पुण्य के फल को नहीं चाहना। पुण्य के फल में कभी बुद्धि उल्टी भी चल सकती है और वह उस पुण्य को भोगों में लगाकर दुर्गति का पात्र बन सकता है, इसलिये पुण्य के फल की चाह मत करो। पुण्य के फल को हेय मानोगे और पुण्य की क्रिया को उपादेय मानोगे तो आप सच्चे सम्यक् दृष्टि बनकर अपने जीवन पुण्यमयी बनालोगे।</p>
<p><strong>श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान 4 अक्टूबर से</strong></p>
<p>आगामी 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मुनिसंघ के सान्निध्य में श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान जो कि संस्कृत में मुनि श्री के मुखारविंद से होगा यह पुण्य कमाने का श्रेष्ठ अवसर है। जिसको भी इसमें भाग लेना है। वह अपने परिवार के साथ एक मंडल की बुकिंग करा सकता है। स्थान सीमित है, पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इस चातुर्मास में पुण्य कमाने का यह अंतिम अवसर सभी के सामने है। रविवार को मुनिसंघ के सानिध्य में दोपहर1.30 बजे से भोपाल जैन समाज द्वारा श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में वृहद क्षमावाणी पर्व का आयोजन है। कार्यक्रम उपरांत सभी की भोजन व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में सभी जैन समाज बंधुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।</p>
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