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	<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव की तिथि को लेकर उपजे भ्रम का निवारण : सरकार के सहयोग के लिए &#8216;विश्व जैन संगठन&#8217; एवं &#8216;राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ&#8217; ने माना आभार  </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 13:30:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इस वर्ष पूरे देश में 30 मार्च को मनाया जाएगा। चूँकि सरकारी कैलेंडर में तिथि भ्रम के कारण 31 मार्च का उल्लेख था। इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230; इंदौर। भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इस वर्ष पूरे देश में 30 मार्च को मनाया जाएगा। चूँकि सरकारी कैलेंडर में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इस वर्ष पूरे देश में 30 मार्च को मनाया जाएगा। चूँकि सरकारी कैलेंडर में तिथि भ्रम के कारण 31 मार्च का उल्लेख था। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान महावीर का जन्म कल्याणक महोत्सव इस वर्ष पूरे देश में 30 मार्च को मनाया जाएगा। चूँकि सरकारी कैलेंडर में तिथि भ्रम के कारण 31 मार्च का उल्लेख था, जिसे लेकर जैन समाज में दुविधा की स्थिति बनी हुई थी। इस संबंध में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज, मुनि श्री सुधासागर जी महाराज एवं मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज द्वारा दिए गए शास्त्रोक्त मार्गदर्शन के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को ही सूर्योदय के बाद पूर्ण रूप से विद्यमान है। विश्व जैन संगठन और राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ इंदौर के अध्यक्ष मयंक जैन एवं राजेश जैन दद्दू ने कहा कि इस विषय में राज्य सरकार के सकारात्मक रुख और शासन-प्रशासन द्वारा जैन समाज की धार्मिक भावनाओं व ज्योतिषीय गणना को सम्मान देने के लिए मुख्यमंत्री जी एवं संबंधित विभागों का हृदय से आभार व्यक्त करता है।</p>
<p>दद्दू एवं संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन द्वारा जैन आगम और पंचांग की शुद्धता को स्वीकार करना हमारी धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं। 30 मार्च को ही संपूर्ण विश्व में भगवान महावीर का जन्म कल्याणक उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। हम समस्त दिगंबर एवं श्वेतांबर जैन समाज से अपील करते हैं कि मुनिसंघों के निर्देशानुसार एकता के साथ इस महोत्सव को सफल बनाएं और भगवान महावीर के सिद्धांत जियो और जीने दो एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।</p>
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		<title>णमोकार महामंत्र गुणवाचक है इसका कोई देवता नहीं: मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने णमोकार महामंत्र की शक्तियों से कराया परिचय  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 09:21:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। भोपाल से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो। वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यह उद्गार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है। दुनिया में जितने भी मंत्र है। उसमें उनका कोई न कोई आराध्य देव है, लेकिन णमोकार महामंत्र ही एक ऐसा मंत्र है जिसका कोई देवता नहीं। इसके पांचों पद अरहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय एवं साधू हैं, जो व्यक्ति वाचक नहीं, गुणवाचक हैं। इसमें कोई बीजाक्षर नहीं है। यह अनादि सिद्धमंत्र है, इसे सिद्ध करने की भी आवश्यकता नहीं। मात्र आपको जपने की देरी है। यह शांति प्रदाता, पौष्टिक मंत्र है। इस मंत्र के जपने से किसी का अहित नहीं हो सकता। यह मंत्र कभी भी मारन उच्चाटन, विद्वेष में काम नहीं करता। हां यदि कोई आपके ऊपर मूठ या मारण विद्या का उपयोग करता है तो उससे आपका बचाव करता है।</p>
<p><strong>मारक विद्या को भी बेअसर करने की क्षमता है णमोकार मंत्र में</strong></p>
<p>उन्होंने एक सत्य घटना सुनाते हुए कहा कि एक बार कोई जैन पंडित रेल्वे में सफर कर रहे थे। उसी ट्रेन में मारक विद्या में सिद्ध बाबा भी सफर कर रहे थे। उन्होंने सभी यात्रियों को डराया तथा धमकाया। सभी उनके वश में आ गए लेकिन, जो जैन पंडित ने उनकी बात नहीं मानी। जिससे उन्होंने क्रोधित होकर उनपर मारक विद्या का उपयोग किया पंडित जी मन ही मन णमोकार महामंत्र का स्मरण कर रहे थे। उन पर उस मारक विद्या का कोई असर नहीं हुआ। हां, वह बाबा जरूर पसीना-पसीना हो गया। थोड़ी देर बाद वह उठा और वाशरुम गया, जब वह नहीं लौटा तो देखा वह बाथरूम में ही ढेर पड़ा था। कहते है कि मारक विद्या एक बार जब निकल जाती है तो वह यदि सामने वाले के प्राण न पाए तो जिसने उस विद्या का उपयोग किया है उसी के प्राण ले लेती है।</p>
<p><strong>4 से 12 अक्टूबर तक श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान </strong></p>
<p>मुनि श्री ने णमोकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए कहा कि यह मंत्र को किसी भी समय किसी भी अवस्था में तथा किसी भी क्रम में जाप दे सकते है। कहीं भी पढ़ सकते हैं। यह आनपूर्वी नहीं है। इसको शब्द रूप में अर्थात अकेले अ.सि.आ.उ.सा. का उच्चारण करने से भी णमोकार महामंत्र का उच्चारण हो जाता है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि आगामी 4 से 12 अक्टूबर तक संस्कृत भाषा में लिपिबद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना मुनि श्री के मुखारबिंद से प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध बीजाक्षरों से युक्त मंत्रों के साथ प्रारंभ होगी। जिसकी संपूर्ण तैयारियां हो चुकी है। जिसमें संपूर्ण भारत के श्रावक श्रेष्ठी भाग लेंगे एवं इस चातुर्मास की यह वृहद आखरी पूजा होगी। विधानाचार्य बाल ब्र.अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी रहेंगे।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी : पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव 2 से 7 दिसंबर तक होगा </title>
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		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 13:29:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंबर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंबर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज की ससंघ मंगल अगवानी 30 नवम्वर शनिवार को प्रातः 7.30 बजे संविद नगर कनाड़िया रोड़ से होगी। आगामी 2 दिसंबर से 7 दिसंम्वर तक गोकुल नगर दिगंबर जैन मंदिर के जिनबिम्वों के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य भावनायोग प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य अभय भैया, नितिन भैया, अनिल भैया के निर्देशन में श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर के पास वैभव नगर में धर्म प्रभावना समिति के नवरत्न परिवार के साथ संपन्न होने जा रहा है। जिसका मुख्य संयोजक हर्ष जैन महामंत्री धर्मप्रभावना समिति को बनाया गया है।</p>
<p><strong>2 दिसंबर सुबह 7 बजे निकलेगी घटयात्रा</strong></p>
<p>2 दिसंबर को प्रातः7 बजे घटयात्रा श्रीजी की शोभायात्रा के साथ गोयलनगर जिनालय से प्रारंभ होकर कार्यक्रम स्थल वैभवनगर तक आएगी। यंहा पर ध्वजारोहण तथा मंडप उदघाटन, मंडप शुद्धि होकर सकलीकरण एवं इंद्र प्रतिष्ठा होगी। दोपहर 1 बजे से याज्ञमंडल विधान एवं हवन होगा एवं रात्रि 8.30 बजे से सौधर्म इंद्र का दरबार लगेगा। जिसमें तत्वचर्चा, कुबेर द्वारा रत्नवृष्टी माता के सोलह स्वप्नअष्ठ कुमारी देवियों द्वारा माता की सेवा आदि दृश्य दिखाऐ जाऐंगे।</p>
<p><strong>सभी धर्म श्रद्धालुओं से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में पधारने का किया अनुरोध</strong></p>
<p>3 दिसंबर को गर्भ कल्याणक उत्तरार्ध एवं 4 दिसंबर को जन्म कल्याणक की क्रियायें संपन्न होंगी। 5 दिसंबर को तप कल्याणक एवं 6 दिसंबर को ज्ञान कल्याणक एवं 7 दिसंबर को मोक्षकल्याणक मनाया जाएगा। धर्मप्रभावना समिति के सभी नवरत्न भरतमोदी, मुकेश पाटौदी, नवीनगोधा, अशोक डोसी, हर्ष जैन, रमेश निर्वाणा, सुनील विलाला, योगेंद्र सेठी, धर्मेन्द्र जैन सहित सकल दिगंबर जैन समाज इंदौर सभी धर्म श्रद्धालुओं से निवेदन करती है कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव कार्यक्रम में पधार कर पुण्यलाभ अर्जित करें।</p>
<p><strong>उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है &#8211; मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी</strong></p>
<p>मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज जी ने नेमीनगर दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुये चार बातें- आसक्ति, अत्यासक्ति, अनासक्ति और विरक्ति पर चर्चा करते हुये कहा कि &#8220;वस्तु, व्यक्ति, धन संपत्ति अथवा देहआकर्षण के प्रति लगाव ही आसक्ति और अनासक्ति को जन्म देता है और वह दुःख प्रदान करता है। मुनि श्री ने कहा कि सबसे ज्यादा हमारा आकर्षण देह के प्रति होता है &#8220;पहले तो माता बहनें ही ब्यूटी पार्लर जाती थीं लेकिन आजकल तो पुरुष भी जाने लगे हैं&#8221; मुनि श्री ने कहा कि अपने शरीर के प्रति जागरूकता रखो लेकिन उसके प्रति इतने आसक्त मत हो जाओ कि देह के पीछे उस विदेही को ही भूल जाओ। उन्होंने कहा कि शरीर एक साधन है, विवेकहीन मनुष्य इस शरीर के माध्यम से जंहा संसार को पुष्ट करते हैं वहीं विवेकवान पुरुष इस शरीर के माध्यम से अपनी आत्मा को पुष्ट करते हैं। जो व्यक्ति संसार, शरीर और भोगों की वास्तविकता को समझता है वह इसमें रमता नहीं, उसे शरीर की क्षणभंगुरता का अहसास होता है और वह वैराग्य को धारण कर अपने जीवन का उद्धार कर लेता है। जो इसमें उलझा रहता है वह अपने संसार को और बढाता है।&#8221; मुनि श्री ने कहा कि पुरानी पीढ़ी में पैसा को जोड़ने की कला थी। वह अनावश्यक खर्च नहीं करते थे। वहीं नयी पीढ़ी में धन की कमी तो है नहीं, खूब कमाते हैं और सब कुछ भोगों में खर्च कर देते हैं। भोगासक्ति की इस आदत से पिज्जा, बर्गर आदि फास्ट फूड और तरह-तरह की वस्तुऐं आनलाईन मंगा लेते हैं तथा बीमारियों से घिरे रहते हैं। वर्तमान समय में उपभोक्तावादी सोच ने आज सभी संबंधों को भी समाप्त कर दिया है तथा व्यक्ति देह आकर्षण में उलझ कर रह गया है। धर्म प्रभावना समिति के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया दोपहर 1.30 बजे मुनिसंघ गुमास्ता नगर, सुदामा नगर इंद्रलोक आदि कालोनियों के जिनालयों के दर्शन करने गये। सांयकाल का शंका समाधान एवं रात्रि विश्राम नेमीनगर में ही हुआ।</p>
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