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	<title>मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : पिता के वचनों को निभाने वन गए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम &#8211; मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 05:37:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ महापुरुषों ने सदैव मानवता और जगत कल्याण का मार्ग दिखाया है। साधु-संत हमेशा समाज के हित और कल्याण की ही बात करते हैं। उनके वचनों में सदैव मंगल और कल्याण की भावना निहित रहती है। उक्त उद्गार मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने सुभाष गंज में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> महापुरुषों ने सदैव मानवता और जगत कल्याण का मार्ग दिखाया है। साधु-संत हमेशा समाज के हित और कल्याण की ही बात करते हैं। उनके वचनों में सदैव मंगल और कल्याण की भावना निहित रहती है। उक्त उद्गार मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने सुभाष गंज में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> महापुरुषों ने सदैव मानवता और जगत कल्याण का मार्ग दिखाया है। साधु-संत हमेशा समाज के हित और कल्याण की ही बात करते हैं। उनके वचनों में सदैव मंगल और कल्याण की भावना निहित रहती है। उक्त उद्गार मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने सुभाष गंज में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।</p>
<p><strong>साधु-संतों के वचनों में होता है कल्याण का संदेश</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि साधु-संत सदैव आनंद में रहते हैं और दूसरों को भी शांति एवं सुख का मार्ग दिखाते हैं। यदि मनुष्य अपनी इंद्रियों को संयमित कर ले और जीवन में सरलता अपनाए, तो उसे भी सच्चे आनंद की अनुभूति हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस संसार में हर व्यक्ति सामान्य रूप से जन्म लेता है, लेकिन जो व्यक्ति तप, त्याग और सद्गुणों के माध्यम से अपने भीतर के दिव्य स्वरूप को जागृत करता है, वही महान बनकर समाज की आस्था का केंद्र बन जाता है।</p>
<p><strong>श्रीराम के जीवन से मिलती है प्रेरणा</strong></p>
<p>मुनि श्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता के वचनों की मर्यादा रखने के लिए राजपाट, सुख-सुविधाएं और परिवार का त्याग कर वनवास स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ नहीं चाहते थे कि श्रीराम वन जाएं, वे उन्हें राजसिंहासन पर देखना चाहते थे, लेकिन श्रीराम ने पिता के सम्मान और वचन की मर्यादा को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि उन्हें “मर्यादा पुरुषोत्तम” कहा गया।</p>
<p><strong>आदर्शों को अपनाने से मिलेगा जीवन का उद्धार</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि हम श्रीराम के आदर्शों की चर्चा तो बहुत करते हैं, लेकिन यदि उनके जीवन का एक भी आदर्श अपने जीवन में उतार लें, तो हम इस संसार रूपी भवसागर से पार हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि महान संतों और विभूतियों के सान्निध्य में जाने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता एवं सद्भावना का संचार होता है। जब किसी व्यक्ति के व्यवहार, वाणी और दृष्टि में दया, करुणा और प्रेम झलकने लगता है, तब वह व्यक्ति धीरे-धीरे परमात्मा पद की ओर अग्रसर हो जाता है।</p>
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		<title>नगर में भव्य मंगल प्रवेश : सुख होने पर भी मन नहीं लगता, क्योंकि आप सुख की गहराई को पहचान नहीं रहे-मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 06:45:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; अशोक [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य एवं दया भावना गौ चिकित्सालय के प्रेरक मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी से पदविहार करते हुए अशोक नगर पहुंचे। थूवोनजी रोड स्थित नवीन बस स्टैंड पर श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, विपिन सिंघई, सुलभ अखाई, हेमंत टडैया, सचिन एन.एस., टिकट जैन सहित अन्य प्रमुख जनों ने मुनिश्री की अगवानी की। इसके पश्चात मुनिश्री को बैंड-बाजे के साथ पार्श्वनाथ मंदिर ले जाया गया, जहाँ महिला मंडलों ने कलशों से उनका स्वागत किया।</p>
<p><strong>पार्श्वनाथ मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के तत्वावधान में पार्श्वनाथ मंदिर से मुनिश्री का भव्य मंगल प्रवेश शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। शोभायात्रा में सबसे आगे श्री विद्यासागर सर्वोदय पाठशाला के बच्चे धर्म ध्वजा लेकर चल रहे थे। उनके पीछे युवा मंडल द्वारा दिव्य घोष वादन किया जा रहा था, तथा युवा वर्ग जय-जयकार के नारे लगाते हुए चल रहा था। यह शोभायात्रा पछाड़ीखेड़ा रोड, एफ.ओ.वी. पुल, गांधी पार्क, भगवान महावीर मार्ग, आचार्य श्री विद्यासागर द्वार होते हुए सुभाष गंज पहुँची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पाद-प्रक्षालन, आरती एवं पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।</p>
<p><strong>आदिश्वर धाम में धर्मसभा एवं महाशांति धारा</strong></p>
<p>शोभायात्रा आदिश्वर धाम, सुभाष गंज पहुँचकर धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। मुनिश्री के सान्निध्य में जगत कल्याण की कामना से महाशांति धारा का आयोजन किया गया, जिसका सौभाग्य विजय धुर्रा परिवार—ओमप्रकाश, देवेंद्र कुमार, पवन कुमार धुर्रा, राजेश कासल सहित अन्य श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ। मुनिश्री के पाद-प्रक्षालन का सौभाग्य जैन समाज के मंत्री चक्रवर्ती राकेश कुमार एवं विवेक कुमार अमरोद को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>महावीर जन्म जयंती तक घर-घर गूंजेंगे भजन</strong></p>
<p>इस अवसर पर जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि परम पूज्य मुनिश्री झांसी (उत्तर प्रदेश) से पदविहार करते हुए अशोक नगर पधारे हैं। वर्तमान में भगवान आदिनाथ से लेकर अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती तक का मंगलमय वातावरण घर-घर में भजनों के रूप में गूंज रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी 30 तारीख को भगवान महावीर जन्म जयंती समारोह परम पूज्य मुनिश्री के सान्निध्य में मनाया जाएगा।</p>
<p><strong>नियमित धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने जानकारी दी कि अब प्रतिदिन प्रातः 8 बजे अभिषेक एवं महाशांति धारा का आयोजन होगा तथा उसके पश्चात मुनिश्री के मंगल प्रवचन होंगे। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान जैन समाज के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय के.टी., संयोजक पार्श्वनाथ मंदिर मनोज रन्नौद, संयोजक गंज उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, विपिन सिंघई, टिंकल जैन, सुलभ अखाई, सचिन एन.एस., सौरव जैन, निर्मल मिर्ची, हेमंत टडैया, रवि ट्रेडिंग, विनोद मोदी, सौरव वाझल सहित अनेक प्रमुख जनों ने श्रीफल भेंट कर ग्रीष्मकालीन वाचन का निवेदन किया।</p>
<p><strong>मुनिश्री का संदेश: आत्मपरिवर्तन ही सच्चा मार्ग</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज ने कहा कि जब तक हमारे कर्म नहीं बदलेंगे, तब तक हम स्वयं नहीं बदल सकते। उन्होंने कहा कि हमारे सामने भी भगवान प्रत्यक्ष नहीं आए, लेकिन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज एवं मुनि श्री सुधासागर जी महाराज का सान्निध्य मिला और उसी के प्रभाव से जीवन में परिवर्तन संभव हुआ। उन्होंने कहा कि आज जो कुछ भी हम हैं, वह गुरुओं के आशीर्वाद का ही परिणाम है और यही आशीर्वाद वे सभी श्रद्धालुओं को देते हैं कि वे भी अपने जीवन में सच्चे सुख की अनुभूति करें।</p>
<p><strong>अशोक नगर के चातुर्मास की महिमा का किया स्मरण</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि अशोक नगर में मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज का भव्य चातुर्मास हुआ था, जो यहां के श्रद्धालुओं के वर्षों के समर्पण और साधना का परिणाम था। उन्होंने कहा कि उस चातुर्मास की महक आज भी इस नगर की फिजाओं में व्याप्त है और यह यहां के धर्मप्रेम का प्रतीक है।</p>
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		<title>मुनि श्री विराट सागर जी एवं मुनि श्री अविचल सागर जी का कुंडलपुर से विहार कुंडलपुर से पटेरा होते हुए बरखेड़ा ग्राम में होगा रात्रि विश्राम </title>
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		<pubDate>Thu, 02 May 2024 06:18:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर की पावन धरा पर युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्यों का समागम निरंतर प्राप्त हो रहा है ।श्रद्धालु भक्त मुनि संघों आर्यिका संघों के दर्शन लाभ ले रहे हैं एवं आहारचर्या में भाग लेकर आहार दान कर पुण्य -अर्जन कर रहे हैं।पढि़ए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर की पावन धरा पर युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्यों का समागम निरंतर प्राप्त हो रहा है ।श्रद्धालु भक्त मुनि संघों आर्यिका संघों के दर्शन लाभ ले रहे हैं एवं आहारचर्या में भाग लेकर आहार दान कर पुण्य -अर्जन कर रहे हैं।<span style="color: #ff0000">पढि़ए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर।</strong> सुप्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र ,जैन तीर्थ कुंडलपुर की पावन धरा पर युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्यों का समागम निरंतर प्राप्त हो रहा है ।श्रद्धालु भक्त मुनि संघों आर्यिका संघों के दर्शन लाभ ले रहे हैं एवं आहारचर्या में भाग लेकर आहार दान कर पुण्य -अर्जन कर रहे हैं। प्रतिदिन श्रद्धालु भक्त बड़ी संख्या में कुंडलपुर के बड़े बाबा के दर्शन ,अभिषेक कर पुण्य- संचय कर रहे हैं ।आचार्य पद पदारोहण अनुष्ठान महोत्सव 16 अप्रैल को सानंद संपन्न होने के बाद ,भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पश्चात कुंडलपुर से मुनि संघों का विहार का क्रम निरंतर जारी है।</p>
<p>1 मई 2024 को प्रातः बेला में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से मुनि श्री विराट सागर जी महाराज ,मुनि श्री निस्संग सागर जी महाराज का मंगल विहार कुंडलपुर से पटेरा की ओर हुआ ।मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज का मंगल विहार कुंडलपुर से पटेरा होते हुए बरखेड़ा ग्राम में रात्रि विश्राम होगा।</p>
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