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	<title>मुनिसंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनिसंघ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सुख में सुमिरन जो करे दुख काए होय : मुनि सुधासागर अभिनंदनोदय तीर्थ में मुनिसंघ ने दी श्रावकों को सीख </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 13:27:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र ललितपुर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि पर के आलम्बन के बिना व्यक्ति जी नहीं सकता और इसको छोडे बगैर कल्याण नहीं है। जीवन में अपने मन को प्रसन्न रखो सौभाग्य मानो कि हम अपने मन को दुखी नहीं करेंगे और अच्छा सोचेंगे। मुनि श्री ने जीवन को धर्म से जोडने की प्रेरणा देते हुए कहा अपना समय व्यर्थ मत गवाओ प्रभु की भक्ति स्वाध्याय से जुडने से जीवन में शान्ति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। मुनि श्री ने कहा जैन दर्शन कहता है कि यह मनुष्य जन्म तुम्हें कई जन्मों के पुण्य से मिला है इसका उपयोग करो बुरे कार्यों पर न तो सोचो और न ही करो। धर्म ही सद आचरण और अच्छे बुरे की पहिचान देता है। उन्होंने कहा प्रकृत्ति माँ है बह गलत वस्तु का निर्माण नहीं करती हर वस्तुत में गुण है इसलिए पहचानो और प्रभु चरणों से जुड़ो प्रभु के सुमरन में ही कल्याण है। सुख के दिन गलत कार्य में मत गंवाओ, प्रभु चरणों में बने रहो और गलत कार्यों से बचो इससे जीवन में संस्कार आएंगे और भविष्य सुधरेगा।</p>
<p><strong>भक्तिपूर्वक मुनि श्री को आहारदान दिया</strong></p>
<p>धर्म सभा के शुभारम्भ में मुनि श्री सुधासागर महाराज का पाद प्रक्षालन जैन पंचायत के साथ शान्तोदय, देवोदय एवं सतोदय तीर्थ के पदाधिकारियों द्वारा किया गया। महिला मण्डल द्वारा संगीतमय मुनि श्री की पूजन हुई जिसमें भक्तिपूर्वक अर्घ्य समर्पित किए गए। धर्मसभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस द्वारा किया गया। मुनि श्री के ससंघ अभिनंदनोदय तीर्थ में विराजमान रहने से अपूर्व धर्म प्रभावना हो रही है। मुनि श्री की आहारचर्या में समूचा प्रांगण जयकारों से गूंज उठता है। आज आहारचर्या का पुण्यार्जन सोमचंद संजीव जैन लकी परिवार को मिला। जिन्होंने भक्तिपूर्वक मुनि श्री को आहारदान दिया और गाजे बाजे के साथ अपने आवास से अभिनंदनोदय तीर्थ मुनि श्री को लेकर आए। सायंकाल जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम आलोक जैन शास्त्री के संयोजन में हुआ। जिसमें अनेकों श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर महाराज द्वारा पाया।नजिसमें उन्होने श्रावकों को धर्म से जुडने एवं समाजिक कार्यों में सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहे मौजूद</strong></p>
<p>धर्मसभा में प्रमुख रूप से जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, सीए सौरभ जैन, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक दैलवारा, धार्मिक अयोजन संयोजक प्रतीक इमलिया, राकेश जैन रिंकू, श्रेष्ठी शीलचंद अनौरा, राजेन्द्र जैन थनवारा, अक्षय अलया मीडिया प्रभारी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट,नरेंद्र जैन छोटे पहलवान, जिनेन्द्र जैन डिस्को, वैभव जैन टिन्ना, स्वदेश गोयल, सौरभ जैन पीलू, रिंकू जैन पाय, अंकुर जैन मोहनमावा, प्रमुख रूप से मौजूद रहे। मंगलवार को प्रातःकाल मुनिश्रीवसुधासागरजी महाराज ने ससंघ नगर में निर्माणाधीन भगवान महावीर नेत्र चिकित्सालय एवं गांधीनगर स्थित आदिनाथ जैन मंदिर पहुंचे, जहां व्यवस्थाओं को देखा और मार्गदर्शन किया।</p>
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		<title>जब वैराग्य का मार्ग चुने तो वापस न लौटे: विदिशा में मुनिश्री के प्रवचनों से समाजजनों को मिल रही मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Tue, 20 Jan 2026 10:08:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। बेटा जब वैराग्य की ओर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> बेटा जब वैराग्य की ओर बढ़ जाता है तो प्रत्येक माता-पिता की इच्छा रहती है कि उसके कदम वापस न हों। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने सम्यक् दर्शन के 8 अंगों में से उपगुहन और स्थिरीकरण अंग पर व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि राजगृही नगरी में राजा श्रैणिक और महारानी चेलना के पुत्र राजा वारिसेन को वैराग्य होता है और वह राजमहल के साथ अपनी बत्तीस सुंदर रानियों को छोड़कर वन की ओर प्रस्थान कर जाते हैं। समय बीतता है एक दिन मुनिराज वारिसेन का पुनः राजगृही नगरी में आगमन होता है और वह आहारचर्या के लिए निकलते हैं। वह बढ़े चले जा रहे है और उनका पड़गाहन अपने बाल सखा मित्र पुष्पडाल, जिसके विवाह को अभी एक ही दिन हुआ था, वहां होता है। उसकी पत्नी एकांक्षी थी। आहारचर्या के उपरांत पुष्पडाल मुनिराज का कमंडल अपने हाथ में लिए वन की ओर छोड़ने जाते हैं।</p>
<p><strong>पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं</strong></p>
<p>रास्ते में वारिसेन अपने मित्र को संसार की असारता का वर्णन से ओतप्रोत कथानक सुनाते हैं। जिससे प्रभावित होकर पुष्पडाल भी वन में ही दीक्षा ले लेते हैं। धीरे-धीरे 12 वर्ष बीत जाते हैं लेकिन, उनके मन में पत्नी के प्रति राग की कणिका विद्यमान रहती है। जिसे गुरु वारिसेन मुनिराज ताड़ लेते हैं और उनके स्थितिकरण के लिये वह राजागृही में राजा श्रैणिक और माता चेलना को संदेश भेजते हैं कि मैं राजमहल की ओर आ रहा हूं। आप सभी रानिओं को अच्छे से तैयार करके महल में हम दोनों मुनिराजों का पड़गाहन करें। यह संदेश सुनकर राजा श्रैणिक और माता चेलना के मन में संशय होता है कि कंही उनका बेटा मोक्षमार्ग से पथ भ्रष्ट तो नहीं हो गया? मन में उठते प्रश्नों के साथ दो चौकी लगाते हैं।</p>
<p><strong>नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है</strong></p>
<p>पूरा राजमहल दोनों मुनिराज का पड़गाहन करता है और नवधाभक्ति के साथ उनसे बैठने का अनुरोध करते हैं। मुनिराज वारिसेन जैसे ही काष्ट की चौकी पर बैठते हैं तो माता चेलना के मन में जो प्रश्न उठ रहे थे, उसका समाधान मिल जाता है। दूसरी स्वर्ण की चौकी पर साथी मुनिराज पुष्पडाल को इशारा किया और वह उस चौकी पर बैठते हैं नवधाभक्ति के साथ दोनों मुनिराजों का आहार होता है। सभी 32 रानियां एवं राजा श्रैणिक एवं रानी चेलना भी आहार देती है और आहार के उपरांत दोनों मुनिराज वापस लौटते हैं। इस पूरी घटना से पुष्पडाल मन ही मन सोचते है कि वारिसेन ने उन 32 रानियों की ओर एक नजर उठाकर भी नहीं देखा, वह समझ जाते हैं कि गुरु ने यह नाटक क्यों रचा? मेरे मन में जो अपनी पत्नी के प्रति राग की कणिका थी। उसका स्थितिकरण करने के लिये ही मेरे गुर यहां पर मुझे लेकर आए हैं और उनके मन में जो राग की कणिका आई थी वह समाप्त हो जाती है।</p>
<p><strong>तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसे बेटी को विदा करते समय प्रत्येक माता-पिता की यह भावना रहती है कि वह अपने घर-संसार में सुखी रहे। इसीलिए जब वह बेटी को विदा करता है तो वह कहता है कि अब तुम इस घर की ओर मत देखना, अब तुम्हारा घर तुम्हारी ससुराल है और सास-ससुर ही तुम्हारे माता-पिता हैं। उसी प्रकार जब बेटा वैराग्य की ओर जाता है तो माता-पिता उसे खूब समझाते हैं, फिर भी बेटा यदि नहीं मानता तो वह एक ही संदेश देते है कि अब तुम उसी मार्ग में रहना वापस मत आना।</p>
<p><strong>ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज कहते है कि ‘सम्यक् दर्शन’ को सुरक्षित रखने के लिए कोई बहुत बड़ा पहाड़ नहीं तोडना पड़ता। यदि आपने दूसरों के दोषों पर मौन रखना शुरु कर दिया तो आप 101 प्रतिशत पास हो जाओगे। गुरुदेव हमेशा कहा करते थे कि आप लोगों को मोक्षमार्ग में मोक्षमार्गी की नकल करने की पूरी छूट है। ध्यान रखना आपको अपना पेपर बनाना है और स्वयं ही उसमें उत्तर लिखना है तथा खुद ही उसे चेक करके नंबर देना है। इस कार्य में पूरी ईमानदारी होना चाहिए। याद रखना कि कोई भी विद्यार्थी फेल नहीं होना चाहिए। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया मुनिसंघ स्टेशन जैन मंदिर में विराजमान हैं। प्रातः 8.45 से प्रवचन के बाद प्रश्नमंच कार्यक्रम होता है। सही उत्तर देने वालों को तुरंत पुरस्कार दिया जाता है।</p>
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		<title>नैनवां में मुनिश्री आदित्य सागर जी का मंगल प्रवेश: दूर-दूर से आए मुनि भक्त उमड़े </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 11:37:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नैनवां में बुधवार सुबह 7 बजे की संपूर्ण दिगंबर जैन समाज ने गाजे-बाजे और जय घोष से कृष्ण मैरिज गार्डन में मुनि श्री आदित्य सागर जी संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर पुष्प वर्षा की गई। महाराज श्री संघ सहित शहीद भगतसिंह सर्किल होते हुए शांति वीर धर्मस्थल पहुंचे। जहां पर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नैनवां में बुधवार सुबह 7 बजे की संपूर्ण दिगंबर जैन समाज ने गाजे-बाजे और जय घोष से कृष्ण मैरिज गार्डन में मुनि श्री आदित्य सागर जी संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर पुष्प वर्षा की गई। महाराज श्री संघ सहित शहीद भगतसिंह सर्किल होते हुए शांति वीर धर्मस्थल पहुंचे। जहां पर मुनिसंघ ने जिनालय के दर्शन किए। अग्रवाल बड़े मंदिर में धर्मसभा हुई। <span style="color: #ff0000">नैनवा से पढ़िए, अभिषेक जैन लुहाड़िया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनवां।</strong> नगर में बुधवार सुबह 7 बजे की संपूर्ण दिगंबर जैन समाज की ओर से अपार महिला मंडलों पुरुषों ने गाजे-बाजे और जय घोष से कृष्ण मैरिज गार्डन में मुनि श्री आदित्य सागर जी संघ की अगवानी की। जगह-जगह मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन कर पुष्प वर्षा की गई। महाराज श्री संघ सहित शहीद भगतसिंह सर्किल होते हुए शांति वीर धर्मस्थल पहुंचे। जहां पर मुनिसंघ ने जिनालय के दर्शन किए। अग्रवाल बड़े मंदिर में धर्मसभा हुई। धर्म सभा से पूर्व भगवान महावीर के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित संघ के संघपति विकास सिटी भीलवाड़ा, जयपुर और ग्वालियर से आए भक्तों ने किया। इसके बाद उनका स्वागत सम्मान वर्षा योग समिति अध्यक्ष कमल कुमार मारवाड़ा, विनोद बरमूडा और प्रमोद जैन आदि ने किया। मुनिश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य मोहनलाल कमलकुमार जैन मारवाड़ा को प्राप्त हुआ। शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य बाबूलाल हितेश कुमार जैन बरमूडा परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में मंगलाचरण की प्रस्तुति अमीषी जैन अवनी जैन ने नृत्य के रूप में दी।</p>
<p><strong>गुरु की निंदा करने वाला दुःखी रहता है </strong><br />
वर्षा योग समिति प्रचार मंत्री महावीर कुमार सरावगी ने बताया कि मुनि श्री आदित्य सागरजी ने कहा कि आज का मनुष्य संसार में बहुत दुःखी है जबकि, सुख-दुःख उसकी आत्मा में है। दूसरों के शब्दों और भाषा बोलने से दुःखी होना दुःख नहीं है। उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु सदैव ही भक्त को अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। गुरु की प्रशंसा करना अच्छा गुण है। गुरु की निंदा करना बुरा कर्म है। मुनिश्री ने बंद पिंजरे में तोते का उदाहरण देते हुए बताया कि एक तोता पिंजरे में बंद है। वह आजाद होना चाहता है। सदैव राम-राम बोलता है। फिर भी उसे स्वतंत्रता का मार्ग नहीं मिल रहा है। तोते ने कुछ समय के लिए अपने आप को अचेत मरण अवस्था में पिंजरे में कर लिया। तोते के मालिक ने देखा तोता किस प्रकार हो रहा है, इसे बाहर निकाल कर देखना चाहिए। पिंजरे का गेट खोला उसे निकाला और तोता राम-राम करते हुए उड़ गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री ने नैनवा की तुलना स्वस्तिधाम से की </strong><br />
मुनिश्री ने नैनवा के जिनालय के दर्शन कर बताया कि नैनवा के मंदिर सुंदर प्रतिमा स्वस्ति धाम से कम नहीं है। बहुत बड़ा यहां जैन समाज है। बहुत सुंदर जिनालय है। लोगों की भीड़ को देखकर ऐसा लगा सचमुच ही नैनवा एक धर्म नगरी है। मुनिश्री आदित्य सागरजी का आहार का सौभाग्य मोहनलाल कमलकुमार मारवाड़ा, सुमतिप्रकाश अशोककुमार मोडिका, जयकुमार अनिल कुमार जैन जहाजपुर वाले वालों ने 1 दिन में ऐसा सौभाग्य प्राप्त किया। धर्मसभा में राजधानी जयपुर, कोटा, ग्वालियर, एमपी, यूपी, केकड़ी, बूंदी, गोठड़ा, जजावर, बासी, दुगारी, रानीपुर नगर फोर्ट, पलाइर्, उनियारा आदि स्थानों के मुनि भक्तों ने धर्म का लाभ प्राप्त किया। सायंकाल 5.30 बजे अग्रवाल जैन मंदिर से मुनि का बिहार नगर फोर्ड के लिए होगा। धर्मसभा का संचालन पं नरेंद्र शास्त्री और मोहन जैन मारवाड़ा ने किया।</p>
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		<title>उप-मुख्यमंत्री पंचकल्याणक महोत्सव में सम्मिलित होंगेः वसुनंदीजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे राजेन्द्र शुक्ल </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Feb 2025 09:12:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थ क्षेत्र कमेटी के संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि सिहोनियाजी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर जैन आचार्य वसुनंदीजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री आज एक दिवसीय दौरे पर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी आ रहे है। पढ़िए अंबाह से अजय जैन की यह पूरी खबर&#8230; अंबाह। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थ क्षेत्र कमेटी के संरक्षक जिनेश जैन ने बताया कि सिहोनियाजी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर जैन आचार्य वसुनंदीजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री आज एक दिवसीय दौरे पर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी आ रहे है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अंबाह से अजय जैन की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अंबाह।</strong> प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री आज एक दिवसीय दौरे पर जैन अतिशय तीर्थ क्षेत्र सिहोनियाजी आ रहे है। तीर्थ क्षेत्र कमेटी के संरक्षक ने बताया कि सिहोनियाजी में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के समापन अवसर पर भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर जैन आचार्य वसुनंदीजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एवं भगवान शांतिनाथ के दर्शन हेतु मध्य प्रदेश शासन के उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल आज सोमवार को दोपहर 12.00 बजे आयोजन स्थल पर पधारेंगे। जहां पर वह पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कार्यक्रम सहित विश्व शांति महायज्ञ में सम्मिलित होंगे। इस दौरान वह मुनिसंघ का आशीर्वाद भी प्राप्त करेंगे। जिनेश जैन ने समाजजनों से आयोजन में पधारने की अपील की है।</p>
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