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	<title>मुनिश्री &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनिश्री &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>साधु के अनादर या पद के दुरुपयोग का विरोध : कुछ ट्रस्टियों पर लगे हैं गंभीर आरोप </title>
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		<pubDate>Sat, 16 May 2026 08:17:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य पट्टाचार्य के शिष्य मुनिश्री के भक्त परिवार में कुछ ट्रस्टियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराज़गी व्यक्त की जा रही है। मुनिश्री ने वाशिम में चातुर्मास एवं दो पंचकल्याणक गजरथ महोत्सवों के माध्यम से अनेक श्रद्धालुओं को जैन धर्म, अभिषेक, पूजन एवं दान के लिए प्रेरित किया। वाशिम से पढ़िए, प्रशांत गड़ेकर की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य पट्टाचार्य के शिष्य मुनिश्री के भक्त परिवार में कुछ ट्रस्टियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराज़गी व्यक्त की जा रही है। मुनिश्री ने वाशिम में चातुर्मास एवं दो पंचकल्याणक गजरथ महोत्सवों के माध्यम से अनेक श्रद्धालुओं को जैन धर्म, अभिषेक, पूजन एवं दान के लिए प्रेरित किया। <span style="color: #ff0000">वाशिम से पढ़िए, प्रशांत गड़ेकर की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> वाशिम।</strong> आचार्य पट्टाचार्य के शिष्य मुनिश्री के भक्त परिवार में कुछ ट्रस्टियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारी नाराज़गी व्यक्त की जा रही है। मुनिश्री ने वाशिम में चातुर्मास एवं दो पंचकल्याणक गजरथ महोत्सवों के माध्यम से अनेक श्रद्धालुओं को जैन धर्म, अभिषेक, पूजन एवं दान के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2026 में शिरपुर जैन मंदिर में दो घंटे के लिये सामायिक साधना के लिए कक्ष उपलब्ध कराने में वाशिम के मुख्य प्रवक्ता एवं सचिव ने साधक बाधक चर्चा कर टालमटोल किए जाने का आरोप गुरु भक्तों ने लगाया। णमो लोए सव्व साहूणं जैसे जैन सिद्धांतों को भूलकर कुछ ट्रस्टी विवाद उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसा मत व्यक्त किया गया। वर्ष 1970 के पंचकल्याणक महोत्सव के इतिहास में गलत जानकारी प्रस्तुत करने, दिवंगत व्यक्तियों को जीवित दर्शाने तथा पूजनीय संतों के नामों को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप लगाए गए। तो 2019 के पंचकल्याणक महोत्सव में दिए गए आश्वासन की पूर्ति आज तक नहीं की। इस संबंध में वाशिम शहर पुलिस स्टेशन एवं धर्मादाय न्यास कार्यालय में शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। मंदिर के आर्थिक कार्यों में पारदर्शिता की कमी, सीसीटीवी बंद रखना, स्वयं का सम्मान समारोह करना तथा समाज के धन के दुरुपयोग जैसे आरोप भी लगाए गए। गुरुदेव के आशीर्वाद से प्राप्त अक्षय पात्र पर नाम बदलने का प्रयास किए जाने का दावा भी भक्तों ने किया। जैन समाज में एकता बनाए रखते हुए साधु-संतों का सम्मान कायम रखने की मांग समाजबंधुओं द्वारा की जा रही है। यह भूमिका प्रशांत गडेकर ने व्यक्त की।</p>
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		<title>श्री सिद्धचक्र विधान में रविवार को 64 अर्घ्य से होगा पूजन: सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में धर्मलाभ ले रहे गुरु भक्त </title>
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		<pubDate>Sat, 05 Jul 2025 11:57:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। इस अवसर पर मुनिश्री विलोकसागर जी का उद्बोधन हुआ।<span style="color: #ff0000"> मुरैना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> हम अपने इष्ट को पूजते तो हैं, उनकी भक्ति तो करते हैं, उनकी जय जयकार तो बोलते हैं लेकिन, उनको हृदय से स्वीकार नहीं करते, उनके बताए हुए सिद्धांतों का पालन नहीं करते, उनके बताए गए मार्ग पर नहीं चलते। इसी प्रकार आप साधु को तो पूजते हैं लेकिन, साधु के बताए हुए मार्ग को स्वीकार नहीं करते। यह उद्गार जैन संत मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र विधान के तीसरे दिन बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जैन साधु भगवान महावीर की उपासना करते हुए उन्हें जीने का प्रयास करते हैं, उनके बताए हुए मार्ग पर चलते हैं, उनके सिद्धांतों का पूर्णतः पालन करते हैं। जैन साधु आहार भी लेते हैं तो इसलिए लेते हैं ताकि उनकी साधना चलती रहे। यदि उनका आहार भी साधना में बाधक बनता है तो वे आहार का भी त्याग कर देते हैं। जैन साधु केवल उसी व्यक्ति के हाथ से या उसी व्यक्ति के घर आहार लेते हैं जो भगवान महावीर के सिद्धांतों का पालन करता है। जिसके मन और विचारों में अहिंसा है, जो पाप कर्मों से दूर रहता है, सप्त व्यसनों का उपयोग नहीं करता है।</p>
<p><strong>अपने बच्चों को संस्कारित करना होगा</strong><br />
मुनिश्री का कहना है कि जो व्यक्ति या परिवार श्रद्धा पूर्वक शुद्ध भोजन तैयार करता है, जिसकी भावनाएं पवित्र हैं, जिसके मन में यह भाव होता है कि साधु के आहार से मेरा कल्याण होगा और साधु की साधना में सहायक होगा। ऐसे ही परिवारों में साधु आहार लेता है। साधु के मन में भी यह भाव होता है कि चरित्रवान व्यक्ति के यहां आहार होगा तो हमारी साधना भी बाधित नहीं होगी। कदाचित भूलवश व्यसनी व्यक्ति के यहां अथवा पाप प्रवृति के व्यक्ति के यहां आहार होता है तो साधु अन्तराय कर देते हैं, उपवास कर लेते हैं। इस श्रमण परम्परा को जीवंत बनाए रखने के लिए अपने बच्चों को संस्कारित करना होगा। हमारी संस्कृति तभी जीवित रह सकती है, तब हमारी आने वाली पीढ़ी संस्कारवान होगी।</p>
<p><strong>रविवार को 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे</strong><br />
बड़े जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना के भक्तिमय अनुष्ठान में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी (मुरैना वाले) ने विधान की पूजन कराते हुए एक-एक श्लोक का अर्थ सरलता के साथ समझाया। सिद्धों की आराधना करते हुए तीसरे दिन 32 अर्घ्य समर्पित किए गए। रविवार को चौथे दिन 64 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। विधान पूजन से पूर्व भगवान पार्श्वनाथ का जलाभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन मंत्री विनोद जैन, नेमीचंद जैन बर्तन वाले, प्रकाशचंद दही, निर्मल जैन भंडारी, दर्शनलाल लोहिया, मनोज जैन नायक ने किया। मंचासीन मुनिराजों का पाद प्रक्षालन सौधर्म इंद्र पवनकुमार सिद्धार्थ जैन एवं शास्त्र भेंट श्रावक श्रेष्ठियों ने किया।</p>
<p><strong>विधान कराने से कोढ़ हुआ था ठीक </strong><br />
श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान सर्व प्रथम मैना सुंदरी ने किया था। मैना सुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। एक जैन मुनिराज ने मैना सुंदरी को बताया कि यदि तुम अपने पति का कोढ़ ठीक करना चाहती हो तो भक्ति एवं श्रद्धा के साथ श्री सिद्धचक्र विधान करो। मुनिराज ने बताया कि मैना सुंदरी ने विधान किया। विधान के दौरान श्री जिनेंद्र प्रभु का अभिषेक कोढ़ पर लगाया गया। उससे उसके पति का कोढ़ ठीक हो गया। तभी से श्री सिद्धचक्र विधान का महत्व बढ़ गया और सभी लोग इस विधान को करने के लिए लालायित रहते हैं।</p>
<p><strong>प्रतिदिन शाम को होती है महाआरती</strong><br />
शुक्रवार शाम की महाआरती नरेंद्रकुमार कुलभूषण जैन सदर बाजार के निज निवास से गाजे-बाजे के साथ घोड़ा बग्गी में बड़े जैन मंदिर पहुंची। शनिवार की महाआरती सौधर्म इंद्र पवनकुमार सिद्धार्थ जैन के निज निवास से बड़े जैन मंदिर पहुंची। महाआरती में अत्यंत भक्ति भाव से मंगलगीत एवं जय जय कार करते हुए साधर्मी बंधु अपनी खुशी को व्यक्त कर रहे थे। बड़े जैन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ, श्री पंच परमेष्ठी की आरती की गई। तत्पश्चात जैन भजनों पर गुरु भक्ति करते हुए सभी ने नृत्य किया। रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।</p>
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		<title>विश्व शांति की बात सब करते पर वास्तविक शांति है कहां : आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में धर्मसभा में दिए उपदेश </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Apr 2025 12:45:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में स्मृतिनगर से विहार कर पहुंचे। यहां पर जैन समाज के श्रद्धालुओं को संबोधित किया। धर्मसभा में आत्म ज्ञान और आत्म कल्याण के लिए नैतिक मार्ग बताए। मुनिश्री आर्यिका माताजी ने भी संबोधन दिया। इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230; इंदौर। विश्व शांति की बातें करने वाले सभी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विशद सागर जी ने समर्थ सिटी में स्मृतिनगर से विहार कर पहुंचे। यहां पर जैन समाज के श्रद्धालुओं को संबोधित किया। धर्मसभा में आत्म ज्ञान और आत्म कल्याण के लिए नैतिक मार्ग बताए। मुनिश्री आर्यिका माताजी ने भी संबोधन दिया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> विश्व शांति की बातें करने वाले सभी देशों को यह देखना चाहिए कि क्या उनके देश में शांति है। देश में नहीं तो क्या उनके प्रदेश में शांति है। प्रदेश में नहीं तो कम से कम उनके संभाग, जिले या नगर में शांति है? नगर में नहीं तो कम से कम मोहल्ले में तो शांति है? मोहल्ले को छोड़ो क्या सिर्फ आपके अपने परिवार में शांति है? क्या सिर्फ दोनों पति-पत्नी के बीच शांति है? अरे सबकी छोड़ो और सिर्फ यह देखो कि क्या आप स्वयं पूरी तरह से शांति से जी पा रहे हों? आपका जबाब नहीं में ही होगा। आचार्य श्री ने हमारे जीवन को उपस्थित करते हुए कहा कि विश्व शांति की स्थापना करने के पहले भगवान तीर्थंकरों और ऋषि मुनियों के आत्म शांति के मार्ग को अपनाना पड़ेगा।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-79734" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018.jpg" alt="" width="1201" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018.jpg 1201w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018-769x1024.jpg 769w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018-768x1023.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018-1153x1536.jpg 1153w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/04/IMG-20250424-WA0018-990x1319.jpg 990w" sizes="(max-width: 1201px) 100vw, 1201px" />जब हर व्यक्ति सिर्फ अपने राग द्वेष स्वार्थ को तिलांजलि देकर आत्म शांति का सच्चा मार्ग अपनाने का थोड़ा सा भी प्रयास करेगा तो विश्व शांति अपने आप स्थापित हो जाएगी। इसी प्रकार हमारे सभी कार्य रूढ़िवादी और झूठे से है। हम मंदिर भी जाते हैं तो पूजा करने नहीं भगवान से मांगने जाते हैं। वहीं हम कहते हैं कि मंदिर में हम भगवान के दर्शन करने जाते परन्तु, जिस दिन आपने भगवान रूपी दर्पण में अपने आत्मा में विराजमान भगवान के दर्शन कर लिए तो आपको मानव जीवन सफल हो जाएगा। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि आचार्य श्री के साथ ही मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी ने भी अपना उद्बोधन दिया।</p>
<p>आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज ससंघ (8 पिच्छी) एवं आर्यिका विर्मया श्री, आर्यिका विसंयोजना श्री माता जी ससंघ का मंगल आगमन बुधवार को स्मृति नगर से समर्थ सिटी में हुआ। समाज जनों को आचार्य संघ वैय्यावृत्ति सेवा श्रुसुशा करने का पूर्ण लाभ मिल रहा है। मुनि संघ को आहार दान देने का सौभाग्य आभा दीदी, अनूप गोल्डी भाई, राजीव बंडी, अंशुल जैन, अभिनेष जैन, नीरज जैन एवं पूनम धर्मेंद्र जी परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>गुरु का पोज होता है पोजीशन भक्त की होती है - मुनिपुंगव सुधासागर महाराज: मुनिश्री के मंगल आगमन से नगरी में उत्साह ,हर कोई दर्शन को आतुर  </title>
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		<pubDate>Sat, 18 Mar 2023 12:09:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुरू का पोज होता है पोजिशन भक्त की होती है, गुरू तभी खुश होता है जब उसके भक्त की पोजिशन बनती है। अच्छी पोजिशन बनानें के लिए अच्छा पोज चाहिए, एक महाशक्ति की आवश्यकता है महान पुण्य की आवश्यकता है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230; महरौनी ( ललितपुर)। आध्यात्म जगत के सूर्य कहे जाने वाले [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुरू का पोज होता है पोजिशन भक्त की होती है, गुरू तभी खुश होता है जब उसके भक्त की पोजिशन बनती है। अच्छी पोजिशन बनानें के लिए अच्छा पोज चाहिए, एक महाशक्ति की आवश्यकता है महान पुण्य की आवश्यकता है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>महरौनी ( ललितपुर)।</strong> आध्यात्म जगत के सूर्य कहे जाने वाले आचार्य भगवन् विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर जी महाराज और क्षुल्लक गम्भीर सागर जी महाराज का मंगल आगमन जैसे ही उत्तर प्रदेश की सीमा में हुआ भक्तजनों के चेहरों पर खुशियां ही खुशियां छा गई। टीकमगढ़ रोड स्थित श्री सुधासागर वेयर हाउस टोल प्लाजा मे रात्रि विश्राम के बाद शनिवार की सुबह 6 बजे मुनिश्री सुधासागर का मंगल विहार महरौनी की ओर हुआ।</p>
<p><strong>सिर पर कलश रख महिलाओं ने गाए मंगलगीत </strong></p>
<p>ग्राम खिरिया नाका और ग्राम निवारी में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और पुरुष दर्शन के लिए उमड़े और उन्होंने मुनिश्री का पाद प्रच्छालन कर आशीर्वाद लिया। महिलाएं आगवानी के लिए सिर पर कलश रखकर मंगल गीत गा रही थी। आनंदपुर ट्रस्ट अंखड धाम आश्रम के महात्मा अघटयुक्ति आनंद और अखंड धाम के सेवादारों ने मुनिश्री की मंगल आगवानी की और आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>भक्तों ने किया पाद प्रच्छालन, उतारी आरती </strong></p>
<p>विद्यासागर दाल मिल पर बड़ी संख्या में महिलाओं और पुरूषो ने आकर मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ की मंगल आगवानी की। फिर एक भव्य शोभायात्रा के रूप में मुनि संघ नगर की ओर बढ़ चला। द्वार द्वार पर भक्तजनों ने पाद प्रच्छालन और आरती उतारकर आशीर्वाद लिया,नगर में हर व्यक्ति मुनिश्री के दर्शन को लालयित दिखा। पहले मुनिश्री ने श्री अजितनाथ बड़ा जैन मंदिर जाकर मूलनायक भगवान अजितनाथ के दर्शन किए उसके बाद शोभायात्रा नगर के गांधी चौक, इंदिरा चौराहे होते हुए श्री पार्श्वनाथ यशोदय तीर्थ पहुंची जहां दिगम्बर जैन कमेटी और यशोदय तीर्थ कमेटी ने पाद प्रच्छालन कर अगवानी की।</p>
<p><strong>नगर को रंगोली से सजाया </strong></p>
<p>आपको बता दें कि मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आगमन के लिए नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। सारे नगर में नगर पंचायत की ओर से साफ सफाई कराई गई और युवाओं ने पूरे नगर को रंगोली और रंग-बिरंगी पट्टियों से सजा दिया था।</p>
<p><strong>अच्छी पोजिशन के लिए चाहिए अच्छा पोज </strong></p>
<p>मुनिश्री सुधासागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सूर्य अपनी रोशनी का उपयोग स्वयं नहीं करता ,नदी अपना जल स्वयं नहीं पीती ,वृक्ष अपने फल नहीं खाता इसी प्रकार संतो की विभूति होती है वह श्रावकों के लिए होती हैं। गुरु का पोज होता है पोजिशन भक्त की होती है, गुरु तभी खुश होता है जब उसके भक्त की पोजिशन बनती है। अच्छी पोजिशन बनानें के लिए अच्छा पोज चाहिए, एक महाशक्ति की आवश्यकता है महान पुण्य की आवश्यकता है।</p>
<p><strong>महरौनी को बनाएं यशोदय तीर्थ </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि अभी मौका है महरौनी की पोजीशन बनाने की इसके लिए भव्य यशोदय तीर्थ बना दो। कार्यक्रम के पूर्व मुनिश्री का पाद पच्छालन करने का सौभाग्य चक्रेश प्रमोद चौधरी को प्राप्त हुआ । मुनिश्री सुधासागर जी की आहारचर्या चक्रेश चौधरी और क्षुल्लक गम्भीर सागर की आहारचर्या का सौभाग्य रतन चंद्र डोगरया महेन्द्र पठावाले को प्राप्त हुआ। संचालन ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश और अमित शास्त्री जबलपुर ने किया। इस मौके पर अध्यक्ष कोमल चंद्र सिंघई, ललितपुर जैन समाज अध्यक्ष अनिल अंचल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह, प्रेमनारायण सोनी एडवोकेट ,श्री अनौरा, राजेंद्र जैन थनवारा, राजेंद्र चौधरी टीकमगढ़,राजा कारी, यशोदय तीर्थ अध्यक्ष राजा चौधरी,गौरव अध्यक्ष प्रशांत सिंघई वंटी, प्रमोद सिंघई,राजू नुना , अनिल मिठया, मुकेश सराफ, निशांत जैन, ओमप्रकाश भदौरा,कमल, दुष्यंत बड़ोनिया, डॉ. हरगोविंद राय ,पवन मोदी,अनिल बड़ोनिया,रमेश सिंह परिहार,भोले दुबे,सौरभ राजा ,रवि राजा , पुनीत पटवा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे। वहीं कोतवाली प्रभारी प्रमोद कुमार और नगर इंचार्ज विनीत सिंह दल-बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।</p>
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