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	<title>मुनिश्री सुधासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री सुधासागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनि श्री ने बोला सबसे बड़ा पापी वो‌ है जिसकी योग्यता ही नष्ट हो : सिद्ध क्षेत्र की माटी को कलशों में भर कर किया स्थापित  </title>
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		<pubDate>Sun, 31 May 2026 14:15:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[योग्यता को नष्ट करने वाला जन्म-जन्म का पापी होता है। संसार का सबसे बड़ा पापी वो‌ है। जीवन में कभी योग्यता को नष्ट मत होने देना। यह उद्गार पारस धाम शाढ़ौरा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। शाढ़ौरा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; शाढ़ौरा। योग्यता को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>योग्यता को नष्ट करने वाला जन्म-जन्म का पापी होता है। संसार का सबसे बड़ा पापी वो‌ है। जीवन में कभी योग्यता को नष्ट मत होने देना। यह उद्गार पारस धाम शाढ़ौरा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">शाढ़ौरा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>शाढ़ौरा।</strong> योग्यता को नष्ट करने वाला जन्म-जन्म का पापी होता है। संसार का सबसे बड़ा पापी वो‌ है। जीवन में कभी योग्यता को नष्ट मत होने देना। यह उद्गार पारस धाम शाढ़ौरा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चाहे कितना ही कष्ट उठाना पड़े। आप भी राष्ट्रपति बन सकते हैं। आपके अंदर योग्यता है। इसको बनाए रखना जिंदगी में भले आप राष्ट्रपति ना बन पाए। सब राष्ट्रपति बन भी नहीं पाएंगे। पर योग्यता को बनाए रखें दूसरा राष्ट्रद्रोह का काम जीवन में कभी मत करना। योग्यता को नष्ट मत करना। मुनि श्री ने कहा कि जिंदगी में किसी के अभिशाप से मत घबराना। बस इतना कर लेना कि अपने ही बेटे का अभिशाप मत करना तुम्हारी पत्नी ही तुम को‌ आयोग्य घोषित कर दें तुम देशद्रोही मत बन जाना भीख मांग लेना लेकिन, देशद्रोही कभी बनने मत बनना संसार में सबसे गंदा काम अपने ही देश से द्रोह करना है। ऐसे व्यक्ति को कभी माफी नहीं मिलती।</p>
<p><strong>आपको अन्नपूर्णा की सिद्धि के साथ ही संग्रहणी की बीमारी नहीं होगी</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि आप लोग प्रसाद चढ़ाते हैं। कहने में आ रहा है। भगवान को भोग लगा रहे हैं। समा मानी कर रहे हैं जबकि, उसमें नारियल की एक चिट्ठी चढ़ाकर सब कुछ भक्तों में प्रसाद के रूप में बांट देते हैं। ये हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है। यदि आप भोजन करने के पहले ऐसा करते हैं तो आपको अन्नपूर्णा की सिद्धि के साथ ही संग्रहणी की बीमारी नहीं होगी। इसके लिए जो घर के पूज्य पुरुष है। सबसे पहले भोजन करेंगे। इसके बाद सभी ग्रहण करेंगे। इससे इतनी सिद्धि होती कि कितने ही लोग आ जाए कमी नहीं होगी। यहां तो द्रौपदी करती थी। बताते हैं उसके पास एक कटोरा था। वह उसमें से कितने ही लोग आ जाए उनको खिलाती चली जाती थी। सबसे आखिरी में वह भोजन करती थी। ये सब सिद्धियां आपको भी हो सकती है।</p>
<p><strong>आज के दूषित वातावरण से हम बच नहीं पा रहे</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि दुःख हमें दो कारण से आता है। बाहरी कारण दूसरा अंतरंग कारण आज वातावरण दूषित हो रहा है इससे हम नहीं बच पा रहे। दूसरा अंतरंग कारण है। जिसे आप संभाल सकते हैं। सुबह उठते ही आपके मुख से कुछ शुभ निकले। वह भगवान का नाम ले ऊं नमः सिद्धेभया बोलकर अपने मुंह से खोलें। पहले राजाओ के यहां मंगल गीत गाए जाते थे। उठते ही शुभ शब्द उसे सुनाये जाते थे। ये सब सगुन है, जो हमारे जीवन में मंगल को प्रवेश दिलाते हैं। एक महिला भरा कलश लेकर निकल रही है। इतने में ही आपका शगुन हो गया ऐसे कितने लोगों का शगुन हो जाता है और वह सभी को दिखता भी है। वहीं एक बिल्ली आपके रास्ते से निकले ना जाने कितने लोगों का अपशगुन कर देगी। वह पाप के उदय का संकेत है। बस अव आपको संभल जाना चाहिए ये संकेत ही काफी होते हैं।</p>
<p><strong>तीर्थ की माटी से बन रहा है पारसनाथ तीर्थ धाम</strong></p>
<p>इसके पहले मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज जिस भूमि पर हम बैठे हैं। आज से यह पारस धाम होने जा रही है। इस भूमि पर मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी से लाई गई मिट्टी को कलशों में भर कर स्थापित किया जाना है। सौभाग्यशाली परिवार में आर्यिका मुदितमति माता जी के परिवार जन महेश कुमार मनोज कुमार चौवी को मुख्य कलश, वहीं जैन समाज अध्यक्ष डॉ.भरत जैन मुनि श्री निकंलक सागर जी महाराज के परिजन सुदीप जैन, संदीप जैन हलवाई भीलवाड़ा परिवार, राकेश जैन, अनिल बांझल सहित अन्य सैकड़ों भक्त ने कलश विराजित किए। जिनका सम्मान कमेटी अध्यक्ष डॉ. भरत जैन, मंत्री दिनेश टरका, कोषाध्यक्ष राकेश हलवाई ने किया।</p>
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		<title>अशोक नगर के भक्तों ने किए मुनिश्री सुधासागर जी को श्रीफल भेंट : महापूजन कर नगर पधारने का किया निवेदन  </title>
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		<pubDate>Mon, 18 May 2026 06:46:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला मैदान बहादुरपुर में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोक नगर। मेरा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला मैदान बहादुरपुर में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला मैदान बहादुरपुर में धर्मसभा में मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज मुझे आप मंदिर से उठाकर रामलीला मंच पर लाए हैं। सभी लाभ लेना चाहते हैं। सौभाग्य से आप महापुरुषांे की कर्मभूमि भारत में जन्मे हैं। जहां आप भगवान से अपने सुख की कामना करते हैं। तीन लोक के नाथ से भी आप अपने लिए सुख चाह रहे हैं। थोड़ा दुःख आया तो रोना शुरू कर देते हैं। हमारी संस्कृति भूखे उठाती है लेकिन, पेटभर कर ही सुलाती है। मुझे सुखी होना चाहिए, इसमें कोई दिक्कत नहीं है होना ही चाहिए। इसके साथ एक भावना और जोड़ दो दूसरे भी सुखी रहें।</p>
<p><strong>तुम अपने साथ कितने लोगों के लिए जोड़ सकते हैं</strong></p>
<p>इस दौरान मुनिश्री ने कहा कि तुम अपनों के साथ कितनों को और जोड सकते हो। तुम कितनों को सुखी कर सकते हो। मैंने पहले कहा कि तुम कितने लोगों के लिए सुख के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। सुखी हो आप लोग को महाराज से लाभ है और कितनों लोगों को महाराज जी का आशीर्वाद मिले। परिवार को सुख मिले ऐसी प्रार्थना करने वाले ही मनुष्य जन्म को प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>जो दुसरों को दुख देकर अपने सुख की कामना ठीक नहीं</strong></p>
<p>जो दुसरो को दुखी करके अपनो को और अपने परिवार को सुख चाहते हैं। वे सुखी नहीं हो सकते। कड़वा सच तो ये है कि ऐसे लोग तिर्यच अर्थात पशु पर्याय में चले जाते हैं। अपनों से प्यार करना पशुओं के लक्षण है। यदि तुम्हारे मन ये लक्षण दिखे तो मानकर चलना कि आप मरकर पशु योनि में जाएंगे, ये कड़वा सच है। तीसरा व्यक्ति वह है जो अपनो से बाहर हटकर पड़ोसी को सुखी करने का भाव करें जो मेरे नगर के लोग को मेरा देश के लोग के सुख की कामना करे, मेरा जिला मेरा मोहल्ला सुखी रहे आज मैं उनकी बात कर रहा हूं। जिनसे मेरे खून का संबंध नहीं है फिर भी मैं उनके सुख की कामना करता हूं। अपने पड़ोसी को भी आशीर्वाद मिले। इस मोहल्ले में किसी की आंख में आंसू ना आए। अपने नगर की तरफ से फरियाद करना नगर और पड़ोसी को सुखी करने की प्रार्थना करने वाले जीते जी देवता कहलाते हैं और और ये मरकर देव पर्याय को प्राप्त करते हैं।</p>
<p><strong>हम सब की भावना गुरु चरण अशोक नगर में पड़ें</strong></p>
<p>इसके पहले धर्मसभा में मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज अशोक नगर जिला जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई के नेतृत्व में सैकड़ों भक्तों को लेकर इस भावना से महा पूजन करने आए हैं कि मुनिश्री सुधा सागर जी के चरण अशोक नगर की ओर बढ़ चलें। इसके बाद जैन समाज के मंत्री शैलेंद्र श्रागर के मधुर भजनों के साथ महापूजन हुआ। इसमें स्थापना अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन, टींगू मिल सहित अन्य भक्तों ने की। इसके साथ ही सभी भक्तों ने पूजन कर महा अर्घ्य समर्पित करते हुए अशोक नगर आगमन की भावना रखते हुए श्रीफल भेंट किए।</p>
<p><strong>अशोक नगर जैन समाज ने श्रीफल भेंट किया </strong></p>
<p>आहार चर्या के बाद अशोक नगर जैन समाज ने नगर आगमन की भावना करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ को श्री फल भेंट किए जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि हम सब की इच्छा है कि अशोक नगर में श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर के तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर के शिविर का भव्य आयोजन हो, ये सौभाग्य अशोक नगर को मिले। इस दौरान जैन समाज के मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने भजनों की प्रस्तुति देते हुए कहा कि हम सब को पुनः सौभाग्य मिले। इस दौरान उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक उमेश सिंघई, संयोजक मनोज रन्नौद, मनीष सिंघई, श्रेयांस घैला, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगलदीप, मंत्री शैलेंद्र दददा, मंत्री राजेंद्र हलवाई, पूर्व महामंत्री विपिन सिंघई, हेमंत टडैया, जैन सोशल ग्रुप ( सास्वत), जैन युवा वर्ग समन्वय ग्रुप, अरिहंत गुप, जैन मिलन, भक्तामर मंडल गांव मंदिर, पार्श्वनाथ जैन मिलन, विद्या सुघामय सेवा संगठन सहित सभी महिला मंडल ने श्रीफल भेंट किए।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागर जी से मंदिर निर्माण पर चर्चा: श्री अजितनाथ धाम मंदिर निर्माण को मिली नई गति    </title>
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		<pubDate>Sat, 02 May 2026 07:21:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री अजितनाथ धाम जैन मंदिर निर्माण कमेटी महरौनी के सदस्यों ने मुंगावली पहुंचकर मुनिश्री सुधासागर जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर निर्माण कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230; महरौनी (ललितपुर)। श्री अजितनाथ धाम जैन मंदिर निर्माण कमेटी महरौनी के सदस्यों ने मुंगावली पहुंचकर मुनिश्री सुधासागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री अजितनाथ धाम जैन मंदिर निर्माण कमेटी महरौनी के सदस्यों ने मुंगावली पहुंचकर मुनिश्री सुधासागर जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर निर्माण कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>महरौनी (ललितपुर)।</strong> श्री अजितनाथ धाम जैन मंदिर निर्माण कमेटी महरौनी के सदस्यों ने मुंगावली पहुंचकर मुनिश्री सुधासागर जी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर निर्माण कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। निर्माण कमेटी के प्रतिनिधियों ने राजस्थान के पत्थर ठेकेदार के साथ मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की तथा निर्माण कार्य को शीघ्र पूर्ण करने के लिए आपसी सहमति से एग्रीमेंट भी किया। इस अवसर पर मुनिश्री के समक्ष मंदिर निर्माण की वर्तमान स्थिति रखी गई, जिस पर उन्होंने मार्गदर्शन देते हुए कार्य को गति देने का आशीर्वाद प्रदान किया। मुनिश्री सुधा सागरजी के दिशा-निर्देश से उत्साहित कमेटी सदस्यों ने मंदिर निर्माण को समयबद्ध एवं भव्य रूप में पूर्ण करने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर दिगम्बर जैन पंचायत अध्यक्ष पवन मोदी, प्रशांत सिंघई (बंटी), प्रवीण सिंघई, पंकज सिंघई, सुनील डेवडिया उपस्थित रहे।</p>
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		<title>बालाबेहट अतिशय क्षेत्र सूर्याेदय में बनेगा अतिभव्य जिनालय: मुनिश्री सुधासागर जी के सानिध्य में नवीन जिनालय एवं संतशाला का हुआ शिलान्यास </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Apr 2026 18:21:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुंदेलखंड के आंचल में सौर नदी के तट पर सामलिया पारसनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बालावेहट में मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ के ससंघ सानिध्य में नवीन जैन मंदिर एवं संतशाला की आधारशिला रखी गई। प्राचीन मंदिर में मुनि श्री सुधासागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्र के विकास के लिए क्षेत्र का नाम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बुंदेलखंड के आंचल में सौर नदी के तट पर सामलिया पारसनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बालावेहट में मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ के ससंघ सानिध्य में नवीन जैन मंदिर एवं संतशाला की आधारशिला रखी गई। प्राचीन मंदिर में मुनि श्री सुधासागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्र के विकास के लिए क्षेत्र का नाम श्री सामलिया पारसनाथ सूर्याेदय अतिशय क्षेत्र बालाबेहट घोषित किया और क्षेत्र पर त्रिकाल चौबीसी मंदिर, मूलनायक मंदिर, संतशाला एवं धर्मशाला आदि के निर्माण की योजना समाज को दी। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> बुंदेलखंड के आंचल में सौर नदी के तट पर सामलिया पारसनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बालावेहट में मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ के ससंघ सानिध्य में नवीन जैन मंदिर एवं संतशाला की आधारशिला रखी गई। नवीन मंदिर का शिलान्यास विधिपूर्वक पंडित गजेंद्र शास्त्री ने पुण्यार्जक समाज श्रेष्ठी सिंघई, राजेंद्र कुमार अंकित राजकल्प थनवारा परिवार ने करवाया। प्राचीन मंदिर में मुनि श्री सुधासागर जी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्र के विकास के लिए क्षेत्र का नाम श्री सामलिया पारसनाथ सूर्याेदय अतिशय क्षेत्र बालाबेहट घोषित किया और क्षेत्र पर त्रिकाल चौबीसी मंदिर, मूलनायक मंदिर, संतशाला एवं धर्मशाला आदि के निर्माण की योजना समाज को दी।</p>
<p>मूलनायक मंदिर निर्माण एवं बड़े बाबा की मूर्ति स्थापना के लिए सिंघई राजेंद्र कुमार थनवारा, त्रिकाल चौबीसी मंदिर लिए पुण्यार्जकों ने घोषणा की एवं संत शाला के निर्माण के लिए कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, अखिलेश अनौरा परिवार ने संकल्प किया। धर्मशाला कमरे के लिए सुरेशचंद, आकाश जैन गैस, महामंत्री दिगंबर जैन समाज ललितपुर ,संदीप जैन अहमदाबाद,शीलचंद राजकुमार गुगरवारा ने पुण्यार्जन किया। क्षेत्र के विकास के लिए संरक्षक सदस्य, परम संरक्षक, शिरोमणि संरक्षक एवं परम शिरोमणि संरक्षक आदि चयनित किए गए। क्षेत्र के महामहिम सिंघई कुंबन अंकित, समस्त राजकल्प थनवारा परिवार घोषित किए गए जबकि, सायंकालीन आरती का श्रीजी अनौरा परिवार ने की।</p>
<p>कार्यक्रम में बीना, खुरई, मालथौन खिमलाशा, बेसरा, बसहारी, भरछा, भानगढ़, निवारी, ललितपुर, पाली सभी निकटवर्ती जैन समाज के श्रेष्ठीजन उपस्थित थे। जिज्ञासा समाधान का संचालन आलोक जैन शास्त्री ने किया। गौरतलब रहे प्रातः काल सूर्याेदय की शुभ बेला में मुनि श्री की अगवानी ग्राम वासियों ने भव्यता के साथ की। मुनिश्री नवीन मंदिर स्थल पर पहुंचे जहाँ सभी को पूज्य श्री का आशीर्वाद मिला। व्यवस्थाओं में क्षेत्र के पदाधिकारी मुकेश सराफ उपाध्यक्ष, महामंत्री जिनेंद्र गंगचारी, संजय जैन, नारायण दादा, प्रकाश चौधरी, दीपू चौधरी, पंकज मालगुजार, प्रंशात गुरहा, पंकज रानू, स्वतंत्र जैन, महेंद्र जैन, योगेश कठरया, संजय वेशरा, सुबोध सतभैया,राजेंद्र जैन, मोनू भरछा, सुरेंद्र प्रदीप सम्यक जसंजीव पुष्कर अनौरा,राजेश राजू कुम्हैड़ी, अंशुल नयाखेड़ा, राजकुमार राजू सम्यकअनौरा, आयुष जैन, संजीव जैन, कुलदीप जैन पप्पू जैन आदि सभी का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालनमहामंत्री अभिषेक जैन अनौरा ने किया।</p>
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		<title>तीर्थाे से सिर्फ सामाजिक संबंध, इसे कुटुंबी संबंध बनाएं: मुनिश्री सुधासागर जी ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को किया संबोधित  </title>
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		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 08:43:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थ क्षेत्र कमेटियों की अगवानी से दर्शनोदय तीर्थ प्रसन्न है। तीर्थरक्षक हुकम काका को दिया तीर्थ सेनानी का दर्शनोदय कमेटी ने सम्मान किया। मुनिश्री सुधासागर जी ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को संबोधित किया। थूवोन जी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;  थूवोनजी। आज धर्म से सामाजिक संबंध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थ क्षेत्र कमेटियों की अगवानी से दर्शनोदय तीर्थ प्रसन्न है। तीर्थरक्षक हुकम काका को दिया तीर्थ सेनानी का दर्शनोदय कमेटी ने सम्मान किया। मुनिश्री सुधासागर जी ने दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">थूवोन जी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> थूवोनजी।</strong> आज धर्म से सामाजिक संबंध रह गया है। समाजिक संबंधों में आपको ज्यादा कुछ नहीं मिलता। आप समाजिक कार्यों में कोई जिम्मेदारी नहीं निभाते, हर व्यक्ति कहता है कि तीर्थ हमारे हम जैन हैं। ये हमारे गुरु हैं, जब हमारे सामाजिक संबंध होगा तो आप कहेंगे क्या करें मंदिर में पानी चू रहा है। तीर्थ क्षेत्र पर अतिक्रमण हो रहा है, एक तीर्थ क्षेत्र लूट रहा है। एक तीर्थ क्षेत्र पर संकट आ रहा है तो हमें समाज की तरह नहीं कुटुम्ब की तरह मिलकर साथ देना चाहिए। यह उद्गार दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तब कहीं जाकर तीर्थ क्षेत्र सुरक्षित हो सकेंगे। इस कलिकाल में एकता में ही बल है और आचार्याे ने 2 हजार साल पहले लिखा भी है। कलऊ एकता बलाऊ इस कलिकाल में एकता ही बल है। वंदे भरत भारत्म इन सूत्रों को लेकर हम आगे चलें।</p>
<p><strong>हुकम काका को प्रदान किया तीर्थ सेनानी सम्मान </strong></p>
<p>इसके पहले तीर्थ क्षेत्र के प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि आज भारत वर्ष की 20 कमेटी तीर्थ सम्मेलन में भाग ले रही हैं। हम सब का सौभाग्य है कि हमें मुनि पुंगवश्री सुधासागरजी महाराज का सतत् मार्ग दर्शन मिल रहा है। इस दौरान चंद्रोदय तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष हुकुम काका को तीर्थ सेनानी सम्मान से दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी कमेटी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल उपाध्यक्ष धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव श्रागर, धर्मेंद्र रोकड़िया, संजीव जैन, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल, दीप मंत्री शैलेंद्र दददा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद आदि ने सम्मानित किया और उन्हें शॉल, श्रीफल पीत वस्त्र, पगड़ी माला भेंट की।</p>
<p><strong>जिसका जन्म हुआ है उसे जाना पड़ेगा </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य पर्याय भी धोखा दे सकता है। ये पर्याय भी मिटेगा। इसलिए ये दुर्लभ मानव जन्म मिला है तो कुछ ऐसा करो कि ये जन्म मरण का चक्कर ही समाप्त हो जाए। ये पर्याय भी तो मिटाना ही है, जो उत्पन्न हुआ वह जाएगा। जिस जिसका जन्म हुआ है तो वह एक दिन मरेगा। मरण कोई बीमारी नहीं है ना कोई बीमारी से मरता। ये तो आपकी पर्याय की पूर्णता का संकेत है। इस बात को तो आप भी जानते हैं कि मृत्यु तो निश्चित है, इसलिए भगवान पर्यायों को अपने ज्ञान का विषय बनाते ही नहीं हैं।</p>
<p><strong>जहां आंख उठाएं वह सब मेरे हो जाएं </strong></p>
<p>मुनिश्री ने आगे कहा कि जहां आंख उठाएं सब मेरी जमीन हो, जहां मैं देखूं सबकुछ मेरा हा।े ऐसा हो सकता है, ऐसा भी हो सकता है। आप मित्र बनना चाहते हैं। संसार में जितने जीव हैं, वे सारे मेरे मित्र हैं। सारा संसार मेरा है और सारी दुनिया से रिलेशन सिप बनाएं। सारा संसार मेरा दोस्त । सारा सांसार मेरा कुटुम्ब है। राग को गाढ़ा करो। जितना बढ़ा सको बढ़ाओ। अपने कुटुम्ब से, परिवार से सबसे ज्यादा राग होता है। जैसे अपने कुटुम्ब में दुःख को देखकर आंख में आंसू आ जाते है। ऐसे ही संसार में किसी को भी दुःख आ जाए तो आपकी आंख में आंसू आ जाए।</p>
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		<title>थूवोनजी में होगा भव्य शिलान्यास समारोह: मुनिश्री सुधासागर जी के मंगल सान्निध्य में नवीन जिनालयों की रखी जाएगी आधारशिला  </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 13:49:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में गरीब बने रहो, लेकिन भगवान के द्वार पर अमीरी दिखाना। उन्होंने समझाया कि यदि अमीरी दिखानी है तो वह केवल भगवान के सामने दिखाओ। दुनिया में गरीब बनकर रहो, परंतु प्रभु के दर पर अमीर बनकर जाओ। प्रभु अंतर्यामी हैं, वे सब कुछ जानते हैं। थूवोनजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में गरीब बने रहो, लेकिन भगवान के द्वार पर अमीरी दिखाना। उन्होंने समझाया कि यदि अमीरी दिखानी है तो वह केवल भगवान के सामने दिखाओ। दुनिया में गरीब बनकर रहो, परंतु प्रभु के दर पर अमीर बनकर जाओ। प्रभु अंतर्यामी हैं, वे सब कुछ जानते हैं। <span style="color: #ff0000">थूवोनजी से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>थूवोनजी।</strong> मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि दुनिया में गरीब बने रहो, लेकिन भगवान के द्वार पर अमीरी दिखाना। उन्होंने समझाया कि यदि अमीरी दिखानी है तो वह केवल भगवान के सामने दिखाओ। दुनिया में गरीब बनकर रहो, परंतु प्रभु के दर पर अमीर बनकर जाओ। प्रभु अंतर्यामी हैं, वे सब कुछ जानते हैं। यदि संसार के सामने अमीरी दिखाई तो लुट जाओगे और यदि पड़ोसी को अमीरी दिखाई तो सबसे पहले वही शत्रु बन जाएगा। इसलिए पड़ोसी के सामने गरीब बने रहो, उसे केवल ऊपर-ऊपर की जानकारी हो पर भीतर की समृद्धि केवल प्रभु को ज्ञात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम भगवान के समक्ष अमीर बनकर जाते हैं, तो भले ही वास्तव में अमीर न हों, एक दिन ऐसा अवश्य आता है जब हम अमीर बन जाते हैं कृ यही अमीरी पाने की सबसे सरल विधि है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-94243" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034.jpg" alt="" width="1045" height="1151" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034.jpg 1045w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034-272x300.jpg 272w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034-930x1024.jpg 930w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034-768x846.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251111-WA0034-990x1090.jpg 990w" sizes="(max-width: 1045px) 100vw, 1045px" />16 नवंबर को होगा नवीन जिनालयों का शिलान्यास</strong></p>
<p>प्रचार मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि वर्षों की प्रतीक्षा और सतत प्रयासों के बाद मध्य भारत के सबसे बड़े तीर्थ क्षेत्र श्री दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी में भव्य पाषाण निर्मित पंचमुखी विशाल जिनालयों एवं सिंहद्वार के साथ-साथ श्री नंदीश्वर दीप के बावन जिनालयों का शिलान्यास 16 नवंबर को मुनिश्री सुधासागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में होगा। इस अवसर पर उनके साथ क्षुल्लक श्री गंभीर सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री विदेह सागर जी महाराज ससंघ एवं बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया भी उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन गुरुदेव के निर्देशन में पूरे विधि-विधान के साथ होगा। शिलान्यास का सौभाग्य पूर्व निर्धारित पुण्यशाली परिवार को प्राप्त होगा। इस अवसर पर सभी श्रद्धालु अपने परिवार, मित्रों सहित तीर्थ क्षेत्र पहुँचकर धर्म की प्रभावना में सहभागी बनने का आग्रह किया गया है।</p>
<p><strong>तीर्थ कमेटी की अपील</strong></p>
<p>दर्शनोदय तीर्थ थूवोनजी के अध्यक्ष अशोक जैन टींगू मिल, उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र रोकड़िया, महामंत्री मनोज भैसरवास, कोषाध्यक्ष प्रमोद मंगल दीप, मंत्री शैलेंद्र दद्दा, राजेंद्र हलवाई, प्रदीप रानी जैन, अनिल बंसल, डॉ. जितेंद्र जैन, प्रचार मंत्री विजय धुर्रा, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर अक्षय अमरोद, समाज अध्यक्ष राकेश कासंल तथा महामंत्री राकेश अमरोद सहित सभी पदाधिकारियों ने जन-जन से उपस्थिति का निवेदन किया है।</p>
<p><strong>सृष्टि नहीं, दृष्टि बदलनी है </strong></p>
<p>मुनिश्री सुधासागर जी ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा सृष्टि नहीं, दृष्टि बदलनी है। हमारी उम्मीद है कि दुनिया सुधर जाएगी। उन्होंने बताया कि दुनिया को अपने हिसाब से बदलने का प्रयास व्यर्थ है। जो व्यक्ति स्वयं को बदल लेता है, वही सच्चा सुधारक है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि गुटखा-तंबाकू छोड़ने की बात करने से लोग उल्टा उसका सेवन करने लगते हैं। इसलिए दूसरों को सुधारने की बजाय स्वयं की दृष्टि सुधारो। संसार में जो वायरस फैलते हैं, उन्हें तो नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन जो बीमारी भीतर से उत्पन्न होती है। उसे समाप्त करना कठिन होता है।</p>
<p><strong>अपने गुणों को ढंककर रखो</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि धर्मशास्त्रों में लिखा है कि दूसरों की बुराइयां मत देखो और अपने गुणों को छिपाओ। हमें एक छोटी-सी सफलता मिल जाए तो हम अत्यधिक उल्लसित हो जाते हैं, परंतु विवेकवान व्यक्ति अपनी सफलता और गुणों को कभी प्रकट नहीं करता। जैसे धनवान व्यक्ति अपने धन को छिपाकर रखता है ताकि वह सुरक्षित रहे, वैसे ही अपने गुणों को भी विनम्रता से ढाँकना चाहिए। उन्होंने हंसते हुए कहा कि दुश्मन को अमीरी मत दिखाना, रिश्तेदारों को अमीरी मत दिखाना, सरकार को अमीरी मत दिखाना, और पत्नी को अमीरी मत दिखाना वरना वो तुरंत पर्ची पकड़ा देंगी।</p>
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		<title>नौगामा जैन समाज ने मुनिश्री सुधासागर जी को किया श्रीफल भेंट: वागड़ आगमन का जैन समाज ने किया निवेदन, सुखोदय तीर्थ क्षेत्र की नई प्रतिमा बनने की चर्चा की </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Oct 2025 08:07:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सुखोदय तीर्थ क्षेत्र के सदस्यों ने अशोकनगर पहुंच कर प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर के सान्निध्य में मुनि श्री सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट कर सुखोदय तीर्थ की प्रतिमा के लिए शिला मिलने की जानकारी देते हुए बताया कि शिला मिलने के साथ वागड़ के सबसे बड़े सुखोदय के भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सुखोदय तीर्थ क्षेत्र के सदस्यों ने अशोकनगर पहुंच कर प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर के सान्निध्य में मुनि श्री सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट कर सुखोदय तीर्थ की प्रतिमा के लिए शिला मिलने की जानकारी देते हुए बताया कि शिला मिलने के साथ वागड़ के सबसे बड़े सुखोदय के भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा आकार लेने लगी है। <span style="color: #ff0000">नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नौगामा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज को नौगामा जैन समाज ने सुखदेव तीर्थ वागड़ आगमन के लिए श्रीफल भेंट किया। सुखोदय तीर्थ क्षेत्र के सदस्यों ने अशोकनगर पहुंच कर प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश अशोकनगर के सान्निध्य में मुनि श्री सुधा सागरजी महाराज को श्रीफल भेंट कर सुखोदय तीर्थ की प्रतिमा के लिए शिला मिलने की जानकारी देते हुए बताया कि शिला मिलने के साथ वागड़ के सबसे बड़े सुखोदय के भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा आकार लेने लगी है। शिल्पी दिन रात कार्यकर एक सुंदर प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं तथा सुखोदय तीर्थ क्षेत्र पर निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। बस गुरुदेव श्री सुधा सागरजी महाराज आपके आगमन को नौगामा, बड़ोदिया, अरथुना, परतापुर आंजना, तलवाड़ा, सेनावासा, घाटोल,बांसवाड़ा, आनंदपुरी जैन समाज सहित पूरा वागड़ पलक पांवड़े बिछाए बैठा है। सुखोदय तीर्थ नौगामा की भावना को सुनकर मुनिश्री ने सभी को दोनों हाथों से आशीर्वाद दिया। इस दौरान तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्यों ने बताया कि पूर्ण आकार लेने के साथ ही भगवान श्री मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा लगभग जनवरी 2026 तक सुखोदय तीर्थ क्षेत्र पर आ जाएगी तथा भव्य आयोजन के साथ प्रतिमा मूल वेदी पर स्थापित की जाएगी।</p>
<p><strong>इन समाजजनों ने महाराज श्री को श्रीफल भेंट किया </strong></p>
<p>नौगामा दिगंबर जैन समाज की ओर से जीतमल शांतिलाल, विधानाचार्य रमेशचंद्र गांधी, सुभाष नानावटी, विपुल पंचोली, सुरेश गांधी, प्रकाश जैन, दिनेश गांधी, वास्तुकार श्रीपाल नानावटी, रमलाल गांधी, नरेश जैन, दिनेश गांधी, जयंतीलाल गांधी, सुरेश पंचोरी, केसरीमल पंचोली आदि अशोकनगर में महाराज श्री को श्रीफल भेंट किया।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है: त्रि-दिवासीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्वान  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Sep 2025 13:18:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सारा विश्व युद्ध की कगार पर है तब ये संत मानवता के विकास के लिए चिंतन कर रहे हैं। आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगल और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। राष्ट्रीय खुला अधिवेशन के लिए देशभर के विद्वानों का नगर में इंतजार है। विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण शिरोमणि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सारा विश्व युद्ध की कगार पर है तब ये संत मानवता के विकास के लिए चिंतन कर रहे हैं। आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगल और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है। राष्ट्रीय खुला अधिवेशन के लिए देशभर के विद्वानों का नगर में इंतजार है। विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण शिरोमणि की उपाधि से मुनि श्री को विभूषित किया। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ने के सान्निध्य में चल रही त्रि-दिवासीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्वान के बीच आज छत्रपति शाहू जी यूनिवर्सिटी कानपुर के कुलपति प्रो. विनयकुमार पाठक के मुख्य आतिथ्य में सम्मान समारोह दिगंबर जैन पंचायत कमेटी द्वारा अखिल भारतीय विद्वत परिषद के संयोजन में सुभाष गंज मैदान में किया गया। इस दौरान विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज को श्रमण शिरोमणि पदवी से जन समूह की जय जयकार के बीच विभूषित किया गया।</p>
<p><strong>प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है</strong></p>
<p>इस दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि आज तीर्थाे की पवित्रता नष्ट हो रही है। सब जगह भौतिकता की चकाचौंध का प्रभाव दिखाई दे रहा है। भौतिकता कोई बुरी चीज नहीं है लेकिन, जब उसका मानवीय पक्ष ही प्रभावित होने लगे तो विचार करना होगा। आज आधुनिकता की आड़ में जंगल और तीर्थ उजड़ रहे हैं। प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है क्योंकि, प्रकृति जव अपना रूप बदलती है तो उसे सहन करना सभी के लिए मुश्किल होता है। मां एक चाकलेट देकर काम करती थी। हमारे विद्वान पहले काम करते हैं। बाद में चाकलेट मिलती है। अभी कुलपति प्रोफंेसर पाठक कह रहे थे कि चाकलेट की बात यहां की चाकलेट विद्वानों को भले बाद में मिले लेकिन, उनका कार्य सभी को दिखता है। पाठक पुराने भक्तो में हैं। जब कोटा में चातुर्मास चल रहा था और वहां भगवान महावीर यूनिवर्सिटी में किसी कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि यहां महावीर स्वामी के नाम के अनुसार कुछ तो होना चाहिए, जिससे लगे कि हम महावीर यूनिवर्सिटी में आए हैं। वस्तुत ये ही तो प्रगतिवादी सोच है जो आपको औरों से अलग करता है। वे राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।</p>
<p><strong>सगा भाई भी साथ छोड़ सकता है ये इतिहास ने बताया </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि हम लोग आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के साथ तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी की वंदना करने गये थे। आचार्य श्री ने कहा कि संघ कमंडल यही रख दें। पर्वत राज पवित्र हैं। कोई ऊपर लघुशंका नहीं जायेगा। आज आधुनिकता के कारण क्षेत्र उजड़ रहे हैं। जंगलों के साथ तीर्थ क्षेत्रा को बचाओ। सरकार करोड़ों रुपए देना चाहती हैं। हमें पर्यटन क्षेत्र नहीं बनाना है। तीर्थ क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने से रोकिये। सम्मेद शिखर जी आज बहुत ख़तरे में है। वह आधुनिकता हावी हो रही है। आधुनिकता की आड़ में जंगलों और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है इस रोकना होगा।</p>
<p><strong>सबसे अधिक उपसर्ग भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी पर हुए</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सबसे अधिक उपसर्ग भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी पर हुए। उनका सगा भाई दुश्मन बन गया। एकतरफा दस भव तक बैर चलता रहा। पार्श्वनाथ पर तपस्या करते हुए ज्योतिष देव ने उपसर्ग किया। कोई तीर्थंकर पर इतना उपसर्ग नहीं हुआ। जितना पार्श्वनाथ पर हुआ ज्योतिष देव बढ़ा होता है। धर्णेंद्र पद्मावती छोटे देव था। वह उन्हें रोक नहीं सकता था तब भी उसने क्या किया जैसे आप लोग जव कोई बड़ा आदमी किसी को मारता है तो आप क्या करते हैं बचा सकते हैं। वैसे ही छोटा देव अपनी विधि से बचा ले गया। उसी समय उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई और फिर कमठ को भी संबोधन मिला और वह भी प्रभु की शरण में पहुंच गया तो ये कथाएं हमें बता रही है कि आप चिंता मत करो। कितना ही कष्ट आये सब कुछ समाप्त हो जाएगा।</p>
<p><strong>विद्या सुधा सागर विद्या पीठ की स्थापना की</strong></p>
<p>राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति विनयकुमार पाठक ने कहा कि जो हम लोगों ने आपके अशोकनगर पर लिखी गई कृति का विमोचन किया तो हम कहना चाहते हैं कि ये ऐसे संत हैं जिनकी कोई नगर समाज ही नहीं बल्कि संपूर्ण सृष्टि अगवानी करती है। मां जिस प्रकार से बच्चों का पालन करती है। वैसे ही गुरुदेव हमारे जीवन को संभालते हैं। गुरुदेव के चरणों की रज पाने हर मानव लालयित रहता है। जीवन में संतों का स्थान सबसे श्रेष्ठ होता है और जब संतश्री जैसी विभूति हमारे सामने बैठे हो तो मैं अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ पलों को जी रहा हूं। तुलसीदास जी लिखते है कि संतश्री हमारे मुख को देख ले तो जन्मों के पातक कट जाते हैं। जब मैं कोटा था और भगवान महावीर विश्व विद्यालय में गया। मेरी भावना थी कि महावीर स्वामी का प्रतीक चिन्ह होना चाहिए और मैंने निवेदन किया। उनकी कृपा हुई आपके आशीर्वाद से हमने जैन पीठ में विद्या सुधा सागर विद्या पीठ की स्थापना की।</p>
<p><strong>आपका पथ प्रदर्शन करना सबसे महत्वपूर्ण है</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि मुझे सबसे महत्वपूर्ण बात लग रही है आज सारा विश्व, युद्ध की कगार पर पहुंच गया है। भौतिक चकाचौंध से परेशान हैं ऐसे समय में आपका पथ प्रदर्शक बहुत जरूरी है। आज का युवा बहुत परेशान है। आज के युवा तकनीकी का बहुत प्रयोग कर रहे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे दौर में जैन वांग्यमय को जानने की आवश्यकता है। इन युवाओं को एआई जैसी तकनीकी के जाल से मुक्त कर हमारे संस्कारों को पुनः स्थापित करें। हम लोग डिजिटल फॉर्म पर करें। आपकी कृपा होगी तो हम कानपुर विश्व विद्यालय के माध्यम से मानव कल्याण के लिए कुछ कर पाये इस दिशा में बहुत तेजी से काम करना होगा। कबीर ने कहा कि गुरु को चाहिए कि शिष्य से कछु ना ले और शिष्य को चाहिए वह गुरु को सब कुछ दे।हम भी तो यही करने आज यहां आयें है ये ऐसे संत हैं। जिनके अंदर इंजीनियर भी है डॉक्टर भी है और कृपा बरसाने वाली सहजता सरलता तो भरी हुई है।</p>
<p><strong>विद्वानों का सम्मान समाज जनों के श्रेष्ठीजनों ने किया</strong></p>
<p>विद्वत संगोष्ठी के दौरान श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी एवं राजेंद्र जैन मैमोरियल ट्रस्ट सूरज दारा कुलपति विनयकुमार पाठक को इस वर्ष के संत सुधा सागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें एक लाख रुपए की सम्मान निधि प्रस्तुति पत्र साल श्रीफल ट्रस्ट के ज्ञानेंद्र गदिया, सूरज जैन, समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, मंत्री विजय धुर्रा, संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास ने सम्मान किया। इस दौरान राष्ट्रीय विद्वत परिषद के पूर्व महामंत्री कर्मयोगी सुरेन्द्र भारती को भी विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान जयकुमार मुजफ्फरनगर, प्राचार्य डॉ. अशोक लाडनूं सुजानगढ़ महामंत्री डॉ. विजय कुमार दिल्ली डॉ. किरण प्रकाश सहित अन्य प्रमुख विद्वानों सहित सभी को सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>’विद्वत सम्मेलन में जैन दर्शन के मनीषी पहुंचे, </strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य तीस सितंबर को अखिल भारतीय विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जैन दर्शन के प्रकांड विद्वानों की उपस्थिति से अशोक नगर जिला गौरवान्वित हुआ। जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन मंत्री, शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा संजीव भारल्लिय, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, मिल महामंत्री मनोज भैसरवास उपस्थित रहे।</p>
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		<title>पुण्यवान को पीछे मत बैठाना, कभी पीठ मत दिखाना: मुनिश्री सुधासागर जी ने धर्मसभा में पुण्य कर्म के बारे में समझाया  </title>
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		<pubDate>Tue, 15 Jul 2025 14:05:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री सुधासागर जी ने यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब जब व्यक्ति पर का घात करेगा। उसके पुण्य का उदय होगा, तभी परघात कर सकता है, चाहे मन-वचन-काय से दूसरों का घात करें, चाहे कृत-कारित-अनुमोदना से करें। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; अशोकनगर। मुनिश्री सुधासागर जी ने यहां [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री सुधासागर जी ने यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब जब व्यक्ति पर का घात करेगा। उसके पुण्य का उदय होगा, तभी परघात कर सकता है, चाहे मन-वचन-काय से दूसरों का घात करें, चाहे कृत-कारित-अनुमोदना से करें। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर</strong>। मुनिश्री सुधासागर जी ने यहां धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब जब व्यक्ति पर का घात करेगा। उसके पुण्य का उदय होगा, तभी परघात कर सकता है, चाहे मन-वचन-काय से दूसरों का घात करें, चाहे कृत-कारित-अनुमोदना से करें। जब भी व्यक्ति दूसरे का नाश करेगा, उस नाश के लिए पुण्य का उदय चाहिए। उन्होंने कहा कि पुण्यकर्म के उदय के बिना व्यक्ति दूसरों को दुख नहीं दे सकता। यदि कोई व्यक्ति किसी का बुरा सोच रहा है, गाली दे रहा है, थप्पड़ मार रहा है तो उसके पुण्य का उदय है। हा ये बात अलग है जब जब व्यक्ति पुण्य के उदय को भोक्ता है तो उसे पापकर्म का बंध होता है। जैनाचार्यों ने कहा-पुण्य के उदय से डरों, सबसे ज्यादा दुर्गति कराने वाला है पुण्य। देवताओं के पुण्य का उदय होता है तो मरकर वे एकेंद्रीय बन जाते हैं। अपनी जिंदगी में कभी पुण्य का उदय आवे उस समय तुम्हें सावधान रहना है, अच्छे दिन तुम्हें सावधानी से गुजारना है क्योंकि सारा संसार पुण्य के उदय में पाप करता है।</p>
<p><strong>जिंदगी भर का किया हुआ पुण्य भस्म हो जाएगा</strong></p>
<p>पुण्यवान को कभी पीछे मत बैठाना, किसी भी क्षेत्र में, धर्म के क्षेत्र में यदि तुमसे बड़ा है उसको कभी पीठ मत दिखाना, तुम पहले से आकर बैठ गए तो उसके आते ही खड़े हो जाना, तुम पीछे हो जाना क्योंकि वह धर्म में तुमसे आगे है। जो तुमसे धर्म में अधिक है, यदि जान करके तुमने उसको पीछे बैठाला, पीठ दिखाई, उसके आते ही खड़े नहीं हुए, वेलकम नहीं किया तो उसी क्षण जिंदगी भर का किया हुआ पुण्य भस्म हो जाएगा। मात्र एक क्षण के लिए तुमने तुमसे बड़े धर्मात्मा का अनादर किया है। तुमसे अधिक व्रती है, गुणवान है, तपस्वी है। धर्मात्मा यदि दूर से दिख जाए तो आंखों से विनय चालू कर दो, जहाँ से दिख जाए वहीं से तुरन्त खड़े होकर आंखों से विनय चालू करना है, नेत्र विनय, नेत्र प्रणाम, भले वो एक कि.मी. दूर क्यों न हो।</p>
<p><strong>जिसके पास जो दुर्गुण हो, उसको छोड़ने की विधि बता रहा हूँ</strong></p>
<p>एक मिनट भी पहले जिसकी दीक्षा हुई है वो सब तुमसे बड़े में आएंगे, जो इसमे प्रमाद करता है, वह अपनी सारी शक्तियों को खो देता है और जैसे ही तुमने ये चालू किया, जो चीज उसके पास है तुम्हारे पास नहीं है, जब तक वो यहाँ तक आया, तब तक तुम्हारा भंडारा भर जाएगा, एक दिन तुम भी उस जैसे बन जाओगे क्योंकि आपने उसका वेलकम किया। आप गुटखा खाते हैं, दूसरा नहीं खाता है, यदि वह आपके पीछे बैठा हो तो थोड़ा उठ करके आगे कर लेना, तुम पीछे हो जाना, एक दिन तुम्हारा गुटखा खाना छोड़ जाएगा। जिसके पास जो दुर्गुण हो, उसको छोड़ने की विधि बता रहा हूँ।</p>
<p><strong>भगवान के सामने बुलावे का इंतजार करते हैं</strong></p>
<p>दो स्थानों पर कभी बुलावे का इंतजार मत करना, कभी मान मत करना, मुझे तो बुलाया ही नहीं गया, पूछा ही नहीं गया, मैं कैसे जाऊँ। एक तो जब पंचपरमेष्ठी के पास जाने की बात हो, उनके प्रवचन, उनके दर्शन की बात हो, भगवान अथवा गुरु की बात हो। कभी ऐसा भाव आ गया तो ऐसा कर्म का बंध होगा कि तुम ऐसे कुलहीन परिवार में जन्मोंगे, जहाँ कुलाचार भी नहीं होगा। नीच कुल में कौन जन्मता है, ये वही लोग हैं जो बड़े लोगों के सामने, भगवान के सामने बुलावे का इंतजार करते हैं। महाराज की सेवा इसलिए मत करना कि मैं पदाधिकारी हूँ, जब भी गुरु के पास जो श्रावक बनकर जाना। अध्यक्ष मैं व्यवस्थाओं के लिए हूँ, भगवान या गुरु के चरणों मे सेवक बनकर जाना। दान में किसी के कहने का इंतजार मत करना, दान जब स्वयं अंतरात्मा से बोले, कोई कहे या ना कहे मुझे तो मंदिर बनाना है, बिना कहे अंदर से आओ। दूसरा घर में माँ-बाप हैं कभी उनके बुलावे का इंतजार मत करना, वे गृहस्थ में पूज्य है।</p>
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		<title>गुरु, भगवान और माता-पिता के पास देने के लिए जाएं : मुनिश्री सुधासागर जी ने धर्म और विवेक आधारित जीवन की परिभाषा प्रस्तुत की </title>
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		<pubDate>Mon, 14 Jul 2025 04:32:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि सुधासागर जी ने अशोकनगर में गुरु भक्तों को धर्मसभा के माध्यम से जीवन की परिभाषा समझा रहे हैं। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जयकारों के साथ भावविभोर वातावरण बना रहा। अशोकनगर से राजीव सिंघई मोनू, शुभम जैन की खबर&#8230; अशोक नगर। चातुर्मासिक प्रवचनमाला के अंतर्गत रविवार को दिए गए प्रभावशाली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि सुधासागर जी ने अशोकनगर में गुरु भक्तों को धर्मसभा के माध्यम से जीवन की परिभाषा समझा रहे हैं। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और जयकारों के साथ भावविभोर वातावरण बना रहा। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से राजीव सिंघई मोनू, शुभम जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर</strong>। चातुर्मासिक प्रवचनमाला के अंतर्गत रविवार को दिए गए प्रभावशाली प्रवचन में मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्म और विवेक पर आधारित जीवन की गहरी परिभाषा प्रस्तुत की। महाराजश्री ने कहा कि गुरु, भगवान और माता-पिता के पास कुछ लेने के लिए नहीं, कुछ देने के लिए जाना चाहिए। उन्होंने समझाया कि सच्चा साधक वही है, जो कमाई को सेवा और धर्म में लगाता है। मंदिर निर्माण, चातुर्मास कलश स्थापना जैसे कार्यों में सहभागी बनना आत्मिक उन्नति का मार्ग है।</p>
<p><strong>साधु का आहार नहीं, श्रावक का पुण्य है प्रधान</strong></p>
<p>महाराजश्री ने कहा कि साधु यदि स्वयं का भोजन करने लगे तो भक्तों का भंडार और देश की आध्यात्मिक ऊर्जा समाप्त हो जाएगी। भगवान महावीर ने अपने शिष्यों से कहा कि आहार का उद्देश्य पेट नहीं, श्रावक के घर को पवित्र करना है। उन्होंने तीर्थंकर ऋषभदेव के उदाहरण से बताया कि गन्ने का रस लेना ‘दान’ का माध्यम था, भोग का नहीं।</p>
<p><strong>धन जोड़ा, भोगा नहीं बना धौ का पेड़</strong></p>
<p>महाराजश्री ने ऐसे लोगों को सावधान किया जो दिन-रात धन जोड़ते हैं, पर उसे न स्वयं के, न परिवार, न धर्म के काम लाते हैं। ऐसे लोग अगले जन्म में &#8216;धौ का पेड़&#8217; बनते हैं, जिसकी जड़ें पानी की ओर नहीं, धन की ओर जाती हैं। उन्होंने चींटी का उदाहरण देते हुए कहा कि जो संग्रह करता है पर उपयोग नहीं, वह सेठ मरकर चींटी बनता है।</p>
<p><strong> पाप कार्य में धन? लक्ष्मी भी देती है शाप</strong></p>
<p>भोग-विलास और पाप में लगाए गए धन पर चेताते हुए कहा गया लक्ष्मी कहेगी — मैं तुझे दानी समझकर आई थी, तू मुझे पाप में ले गया। उन्होंने जीवन की समस्याओं में भी ‘काय के लिए कमाया’ जैसे भाव न लाने की सलाह दी।</p>
<p><strong>जिसके पास ज्ञान है, वह धन को धर्म में लगाए</strong></p>
<p>मैं वह भाग्यवान हूँ कि खर्च के बाद भी पैसा बच रहा है। यह भाव यदि आता है, तो वही साधारण पुण्य नहीं है। महाराजश्री ने कल्पवृक्ष विधान, मंदिर निर्माण, आहार दान जैसे पुण्य कार्यों में हिस्सा लेने का आग्रह किया।</p>
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