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	<title>मुनिश्री सुधासागरजी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीर्थों और मुनिश्री सुधासागरजी के दर्शन भक्ति का अपार उत्साह : शुभोदय पुण्योदय तीर्थ के दर्शन कर कृतार्थ हुए श्रद्धालु  </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 08:38:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[रविवार को देवी अहिल्या की नगरी से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन जहां श्रमण निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी को चातुर्मास इंदौर में करने का निवेदन प्रस्तुत करने गए दल में हजारों की तादाद में इंदौर दिगंबर समाज के लोग पहुंचे। पांडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब तो नजर आ ही रहा था। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>रविवार को देवी अहिल्या की नगरी से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन जहां श्रमण निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी को चातुर्मास इंदौर में करने का निवेदन प्रस्तुत करने गए दल में हजारों की तादाद में इंदौर दिगंबर समाज के लोग पहुंचे। पांडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब तो नजर आ ही रहा था। मुनिश्री सुधासागर जी से आशीर्वाद लेने, चरण वंदना करने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। इससे पूर्व इंदौर से रवाना होने के बाद बस में भक्ति, आराधना दौर रहा। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> रविवार को देवी अहिल्या की नगरी से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन जहां श्रमण निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी को चातुर्मास इंदौर में करने का निवेदन प्रस्तुत करने गए दल में हजारों की तादाद में इंदौर दिगंबर समाज के लोग पहुंचे। पांडाल में श्रद्धालुओं का सैलाब तो नजर आ ही रहा था। मुनिश्री सुधासागर जी से आशीर्वाद लेने, चरण वंदना करने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। इससे पूर्व इंदौर से रवाना होने के बाद बस में भक्ति, आराधना दौर रहा। प्रातःकालीन भक्ति करते हुए पंचबालयति मंदिर के ब्रह्माचारी सुरेश भैया के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा को आरंभ किया। गुना पहुंचने से पहले बीनागंज में शुभोदय तीर्थ सभी ने श्री जी के दर्शन किए। साथ ही यहां विराजमान मुनिश्री महाराज की आहार चर्या के दर्शन का पुण्य अर्जित किया। गुना पहुंचने के बाद मुनिश्री सुधासागर जी के दर्शन, चरणवंदना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां बजरंगगढ़ स्थित पुण्योदय तीर्थ जाकर भगवान का दर्शन किए। सभी ने वहां दर्शन कर पुण्यलाभ अर्जित किया। गुना में विराजित मुनिश्री सुधासागर जी के दर्शन और पूजन के लिए प्रतिदिन मप्र, राजस्थान से बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण अपने यहां चातुर्मास करने का निवेदन लेकर पहुंच रहे हैं।</p>
<p><strong>जयकारों से गूंजता रहा पूरा परिसर</strong></p>
<p>इंदौर के सभी 140 मंदिरों के प्रतिनिधियों के साथ दिगंबर जैन सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा, कार्याध्यक्ष नवीन गोधा, महामंत्री हर्ष जैन, संगठन मंत्री विजय पाटोदी आदि पदाधिकारियों के आह्ावन पर बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। पुरुषों के साथ महिलाओं की संख्या और उत्साह भी अपार था। पचरंगी ध्वज, गुरुदेव की तस्वीरों वाली तख्तियों ने गुना में पांडाल को भक्ति से परिपूर्ण कर दिया। अपरान्ह तीन बजे के बाद जब मुनिश्री सुधासागर जी पांडाल के मंच पर विराजमान हुए। गुरुदेव इंदौर पधारो हमको तारो का जयघोष दिनभर गूंजता रहा। यहां गुरुदेव का पूजन, पाद प्रक्षालन करने के लिए उत्साह रहा।</p>
<p><strong>इंदौर के श्रद्धालुओं पर आधारित था शंका समाधान कार्यक्रम</strong></p>
<p>कार्यक्रम के बाद शंका समाधान कार्यक्रम पूरा इंदौर से पधारे श्रद्धालुओं पर केंद्रित किया गया। मुनिश्री ने इंदौर गुना पहुंचे जैन श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया। सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा ने भी शंका समाधान कार्यक्रम में अपनी जिज्ञासा मुनिश्री के समक्ष प्रस्तुत की। इसके अलावा नवीन गोधा, राजेश जैन दद्दू के अलावा सामाजिक संसद की महिला मंडल अध्यक्ष साधना दगड़े सहित महिलाओं की जिज्ञासा का भी समाधान मुनिश्री ने प्रस्तुत किया। यह अवसर इंदौर के लिए गौरव का क्षण बन गया। यहां एक बात और खास रही कि गुना दिगंबर जैन समाज के अखिलेश जैन सहित उनकी पूरी टीम ने यहां आने वाले यात्रियों के लिए जो वात्सल्य भोज की व्यवस्था रखी। सुबह और शाम को हुए वात्सल्य भोज में त्यागी व्रतीयों के लिए पृथक से व्यवस्था रखी गई। इंदौर से पहुंचे सभी समाजजनों ने गुना दिगंबर जैन मंदिर समिति के पदाधिकारियों और भोजन पुण्यार्जकों का आभार जताया।</p>
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		<title>पत्रकार समाज का दर्पण है मीडिया का है बड़ा दायित्व : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में जैन समाज ने किया पत्रकारों का सम्मान  </title>
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		<pubDate>Thu, 28 May 2026 12:51:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पत्रकार समाज का दर्पण है, सबसे के प्रति मीडिया का बहुत बड़ा दायित्व है। जहां तक पत्रकार की बात है। सन 1988 से अशोक नगर का मीडिया सबसे आगे रहा। यह उद्गार आदिश्वर धाम सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। अशोक नगर से पढ़िए, राजीव सिंघई [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पत्रकार समाज का दर्पण है, सबसे के प्रति मीडिया का बहुत बड़ा दायित्व है। जहां तक पत्रकार की बात है। सन 1988 से अशोक नगर का मीडिया सबसे आगे रहा। यह उद्गार आदिश्वर धाम सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोक नगर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> पत्रकार समाज का दर्पण है, सबसे के प्रति मीडिया का बहुत बड़ा दायित्व है। जहां तक पत्रकार की बात है। सन 1988 से अशोक नगर का मीडिया सबसे आगे रहा। यह उद्गार आदिश्वर धाम सुभाषगंज मैदान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अभी पत्रकार की ओर से प्रश्न आया तो जब दोनों पक्ष आकार समर्पित हो जाए तो मैं समय दे सकता हूं। गुरु कानून नहीं है, गुरु श्रद्धा में होते हैं। पचास प्रतिशत केस सिर्फ परेशान करने की नियत से होते हैं। नीम ना मीठे होय ताहे खाओ घी गुड़ से चिंता मत करना कर्म सजा देता है। समय भले लग जाए। आपका विचार बहुत अच्छा क्षमा वाणी पर वास्तविक रूप जब सही होगा। जब आप इसको घरों में अपनाते हुए इसको जीवन में लाएंगे। उन्होंने कहा कि पत्रकार भले तीखी खबरों को प्राथमिकता दें लेकिन, हानि और लाभ देखा जाता है आपकी एक खबर छप गई, जिससे समाज में आक्रोश आ जाए। अशांति फैल जाए, ऐसी खबर को संभाल कर प्रकाशन में भेजना चाहिए।</p>
<p><strong>पत्रकारिता का उद्देश्य खबरों में दिखना चाहिए</strong></p>
<p>मुनिश्री कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य समाज के चौथे स्तंभ के रूप में है तो वह खबरों में भी दिखना चाहिए। पत्रकार समाज का एक दर्पण है। सुबह उठकर हर व्यक्ति पेपर पड़ता है। हमारे शास्त्रों को कम आपके अखबारों को सुबह से जनता पढ़ने लग जाती है। इसका महत्व भी पत्रकारों समझना चाहिए। आपका भी बहुत बड़ा दायित्व है। हर खबर पर पत्रकारों की पैनी नजर होना ही चाहिए। आज सोशल मीडिया में भ्रामक खबरें ज्यादा चल रही है। बाटसेव पर कोई भी कुछ भी लिख रहा है। उसके प्रति उत्तरदाई कोई नहीं है, निकालने वाले मज़े ले रहे हैं। कल जब यही स्थिति उनके ऊपर आएगी तो सहन नहीं कर पाएंगे। सबसे पहले पढ़ने वालों को भी संयम रखना चाहिए और संयम से उसका उत्तर देना चाहिए।</p>
<p><strong>मीडिया जगत को जैन समाज ने किया सम्मानित</strong></p>
<p>मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित पंचायत कमेटी ने अशोक नगर पत्रकारों को मंच से स्मृति चिन्ह पीत वस्त्र श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। इस दौरान पत्रकार अरविंद कचनार पत्रिका, सचिन शर्मा, शंटू भइया नईदुनिया, मनोज जैन हरिभूमि, राजकुमार शर्मा दैनिक भास्कर, गुरविंदर सिंह, राजकुमार, संतोष सोनी, राजकुमार नामदेव, राजेंद्र रजक, अखलेश, जागरण नीरज इंटिरियर, सौरव सिन्नी, संतोष डिक्स मनोज कलाकार, पवन पत्रकार, दिनेश कुमार, हेमंत टडैया सहित अन्य प्रमुख जन विशेष रूप से उपस्थित थे। इस दौरान मंत्री शैलेंद्र श्रागर ने कहा कि हमारे सभी पत्रकार साथियों ने बहुत ही सुंदर खबरों का प्रकाशन किया। आप बहुत आभार। आप हमेशा सहयोग करते हैं और अच्छी बातों को जन जन तक पहुंचाते हैं।</p>
<p><strong>29 मई को होगा नवीन वेदी का शिलान्यास के साथ मुहूर्त</strong></p>
<p>इसके पहले जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि मुनि श्री सुधासागरजी की अशोक नगर यात्रा की निशानी हमें मिलने जा रही है। इस बार श्री शांति सागर त्रिकाल चौबीस के तीसरे खंड पर वेदी शिलान्यास के साथ मुहूर्त अषि मसि कृषि का संदेश देने वाले भगवान श्री आदिनाथ स्वामी की भव्य पद्मासन प्रतिमा विराजमान होगी। जिसका सौभाग्य नेमीचंद, आनंद कुमार, नवीन कुमार ठेकेदार परिवार को मिलने जा रहा। इनका सम्मान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई सहित अन्य प्रमुख जनों ने स्मृति चिन्ह भेंटकर किया।</p>
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		<title>मुनिश्री सुधासागरजी की अगवानी में भक्तों का उमड़ा सैलाब : संत सुधा सागर मार्ग का हुआ लोकार्पण </title>
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		<pubDate>Sat, 23 May 2026 07:33:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोक नगर। पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर के बाहर पूर्व मंत्री राव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर</strong>। पांच माह पूर्व नगर में भव्य चातुर्मास कर आज जब मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ 18 पिच्छिका के साथ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। नगर के बाहर पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्रसिंह यादव, पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी, नगर पालिका अध्यक्ष नीरज मनोरिया, जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री शैलेन्द्र और विजय धुर्रा सहित अन्य प्रमुखजनों ने श्रीफल भेंटकर सभी मंडलों के साथ अगवानी की। भव्य अगवानी में कलेक्टर साकेत मालवीय, जिला पंचायत सीईओ राजेश सी कुमार, विश्व हिन्दू परिषद के दीपक मिश्रा सहित अन्य प्रमुखजनों ने पाद प्रक्षालन कर आरती उतारी। यह भव्य शोभायात्रा विदेशा रोड, त्रिदेव चौराहा, तारा सदन, एचडीएफसी चौराहा, पुराना बस स्टैंड, गांधी पार्क होते हुए भगवान महावीर मार्ग, विद्यासागर द्वार होते हुए सुभाषगंज पहुंची। यहां धर्मसभा हुई।</p>
<p><strong>पूरा शहर मुनि श्री की अगवानी में उमड़ा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि पांच माह बाद मुनिश्री के आगमन पर पूरा शहर उमड़ पड़ा। शासन प्रशासन ने बहुत सुंदर व्यावस्था बनाई। हम सबके लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक है। पूर्व मंत्री राव ब्रजेन्द्रसिंह यादव, पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी, नपा अध्यक्ष नीरज मनोरिया के आतिथ्य में संत सुधा सागर मार्ग का लोकार्पण समारोह हुआ। अध्यक्ष राकेश कांसल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू, महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुखजनों ने मुनि श्री से ग्रीष्म काल वाचना के लिए श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। इस दौरान मंत्री शैलेन्द्र श्रागर ने कहा कि हमारे पुण्य के उदय से हमें इस भीषण गर्मी में भी आपके चरण सान्निध्य का सौभाग्य मिला। इसका अधिकतम उपयोग करना है।</p>
<p><strong>धर्म ना आकाश से आता ना पाताल से</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी ने कहा कि धर्म ना आकाश से आता है। ना पाताल से, धर्म ना पूर्व से, ना पश्चिम से, धर्म धर्मात्माओं की आत्मा से प्रकट होता है। लोग धर्म को दुनिया में खोजते हैं। भूल जाते हैं हिरण के समान हिरण कस्तूरी को पाने के लिए दुनिया में भटकता रहता है। उसे मालूम नहीं रहता कि कस्तूरी तो उसकी नाभि में है। ऐसे ही लोग दुनिया में भटकते रहते हैं धर्म पाने के लिए, उन्हें पता ही नहीं रहता कि धर्म तुम्हारे भीतर से ही प्रकट होगा। धर्म भक्तों के हृदय में उमड़ता है। धन मालिक नहीं होता धनी मालिक होते हैं। ऐसे ही भक्त ही धर्मात्मा होता है। धर्म बड़ा नहीं होता धर्मात्मा बड़ा होता है। जिसके के अंदर धर्म उमड़ जाए। वहीं धर्मात्मा होता है। अगवानी कराईं नहीं जाती अगवानी हो जाती है। भक्तों को बुलाया नहीं जाता भक्त आते हैं। शुरू से ही पता चल गया था, जज्जी अपने घर व्यापक तैयारी के साथ ले गया। तब ही हमने अपने पैरों को कह दिया था तैयार रहना है। इस बार की अगवानी के लिए पैर तैयार रहे। चातुर्मास की अगवानी में असाढ़ था। उस समय तो बादलों ने मेहरबानी की थी, आज कोई मेहरबानी करने वाला नहीं है। आज सूरज भी ऊपर चढ़ा है। ये ज्येष्ठ की अगवानी है। भक्तो का उत्साह शिखर पर था। मुनि श्री ने कहा कि पिछले बार पुलिस वाले सादे रस्से लाए थे। इस बार तो बने बनाए जबरदस्त रस्से बांधकर लाए थे। फिर भी जनता नहीं संभल रही थी। यही तो मौके होते हैं। जिंदगी के ये भक्तों का उत्साह और उमंग थी, जो उपकारी के प्रति लेकर आए थे। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति धर्म तो हमेशा करता है। व्यक्ति महोत्सव कभी कभी करता है। भक्ति तो हमेशा करता है ऐसी भक्ति कभी-कभी होती है। जिंदगी में यही तो मौके आते है। यही स्मृति बन जाती है। यही चर्चा का विषय बन जाते हैं।</p>
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		<title>जिंदगी को नैगलेक्ट मत करो जिंदगी को अच्छे से जिओ: धर्म सभा के साथ मुंगावली में चल रहा है जिज्ञासा समाधान </title>
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		<pubDate>Fri, 24 Apr 2026 13:29:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हमें जो प्रकृति से मिला है उसका स्वागत करना है। इस जिंदगी को गुजारो मत जिंदगी को नैगलेक्ट मत करो। यह उद्गार मुनिश्री सुधा सागर सभागार में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुंगावली। हमें जो प्रकृति से मिला है उसका स्वागत करना है। इस जिंदगी को गुजारो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हमें जो प्रकृति से मिला है उसका स्वागत करना है। इस जिंदगी को गुजारो मत जिंदगी को नैगलेक्ट मत करो। यह उद्गार मुनिश्री सुधा सागर सभागार में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुंगावली।</strong> हमें जो प्रकृति से मिला है उसका स्वागत करना है। इस जिंदगी को गुजारो मत जिंदगी को नैगलेक्ट मत करो। यह उद्गार मुनिश्री सुधा सागर सभागार में धर्मसभा में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिंदगी मिली है तो इसको अच्छी तरह से जीना सीखो। कितने लोग अपनी खुद की जिंदगी को कोसते हैं। ऐसे है ही निगोद आदि की यात्रा करते हैं। एक सांस में आठ-दस बार मरते हैं। आपको जो भी जिंदगी मिली है। इसका हमेशा वैलकम करना कुदरत ने आपको जिंदगी दी तो है इतना और भी कह देना कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं जो मुझे मनुष्य की पर्याय मिली प्रभु का धन्यवाद करो। जैसे ही तुमने वेलकम किया फिर देखना आपका विकास होना शुरू हो जाएगा। इसलिए प्रकृति ने जो तुम्हारे लिए दिया है, उसमें ख़ुश रहना है।</p>
<p>भगवान से भी ज्यादा ताकत भगवान की मूर्ति में होती है</p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि भगवान से भी ज्यादा ताकत भगवान की मूर्ति में होती है। साक्षात भगवान से भले आप को कुछ ना मिले लेकिन, श्रद्धा से अपनी भक्ति अंतरआत्मा की आवाज पर आपने जो मूर्ति बैठाई है, वह आपको सबकुछ दे सकती है, जिस कार्य में आपका कोई योगदान ना हो उससे कुछ भी पाने की कोशिश मत करना। किसी पेड़ से आप एनर्जी चाहते हो तो आपने कभी उसे पानी दिया है, उसके बारे में सोचा है। किसान को सूखी रोटी बहुत ताकत देती है। वहीं रोटी आपका घी दूध से मान मलिदा बनाकर भी खाए तो भी वह व्यक्ति की भूख मिटाने का ही काम करेगी, आपको दुआएं नहीं दे सकती।</p>
<p><strong> हर व्यक्ति सर्व प्रसिद्ध होना चाहता है </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा हर व्यक्ति प्रसिद्ध होना चाहता है। सारी दुनिया का मैं स्वामी बनना चाहता है। अपनी हुकूमत सारी दुनिया पर चलना चाहता है। यहां तक कि सारी दुनिया भगवान का बाप बनना चाहती है। इसके लिए पैसे भी देने को तैयार है। भगवान बनने में कोई पैसा नहीं लगता। फोकट में ही बन जाएंगे। भगवान के माता-पिता की पूछ उनके रहने तक ही है। आप स्वयं ही समझ सकते हैं कि जब तक तीर्थंकर प्रभु घर में थे तब तक ही उनकी बखत थी, जो सौधर्म इन्द्र सैकड़ों बार अयोध्या आया। वहीं सौधर्म इन्द्र क्या कोई भी देवता दीक्षा के बाद एक भी माता-पिता की खबर नहीं लेता फिर भी हर व्यक्ति भगवान के माता-पिता बनने को तैयार हैं। भगवान की पूजा तीन लोक में तीनों काल में हो रही है। इतने व्यापक हो गए कि जनता ने उनकी मूर्ति बना ली हमने कहा था कि भगवान तो चले गए ओरिजनल भगवान की ताकत तो एक थी लेकिन, भक्तों के भगवान कितने हैं। हर प्रतिमा का अतिशय अलग-अलग होता है, हर मूर्ति की ताकत अलग-अलग है मूर्तियां भक्तों की श्रद्धा से बनी है।</p>
<p><strong>मुंगावली के व्यक्ति को कोई ठग नहीं सकता</strong></p>
<p>मुनिश्री सुधासागर जी ने कहा कि ये राज दरबार में चर्चा के दौरान घोषणा हुई कि जो भी व्यक्ति पांच सौ रुपए से इस हांल को भरेगा, उसे राज दरबार में मंत्री बनाया जाएगा। उस सभा में मुंगावली का व्यक्ति भी था। उसे पांच सौ रुपए मिले, वह कहता है पांच सौ रुपए में हाल भरता है क्या? वह रुपए लेकर घर आ गया। मुंगावली के व्यक्ति को कोई ठग सकता है ? अशोक नगर का तो और भी होशियार है। काश्मीर से कन्याकुमारी तक सारा भारत एक है। सब एक हैं, दूसरे ने नपा के कचड़े से भर दिया। तीसरा व्यक्ति गया राजा साहब को माला पहनाकर स्वागत करता है कहता है कि अतिथि का सत्कार करना हमारी परंपरा है और उन्हें हाल की ओर पधारने का निवेदन करता है। इस बीच वह उस हाल में पांच दीप प्रज्वलित कर अगरवत्ती से उस हाल को प्रकाशित कर सुगंधित कर देता है। बस इतना ही तो करना है, अपनी जिंदगी को प्रकाश और सुगंध से भर दो।</p>
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		<title>नवनिर्मित हो रहे जिनालय में तिलकदान के साथ प्रभु हुए विराजित : अशोक नगर जैन समाज प्रतिनिधि मंडल ने मुनिश्री ससंध को श्रीफल किए भेंट   </title>
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		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 08:48:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230; मुंगावली। गृहस्थ जीवन में रहते [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> गृहस्थ जीवन में रहते हुए व्यक्ति जीवन यापन के संसाधनों को जुटाने में इतना व्यस्त हो जाता है कि सब कुछ भूल जाता है। उसे अपने स्वरूप का, जगत का ज्ञान ही नहीं रहता। यह उद्गार सुधा सागर सभागार में मुनिश्री सुधासागरजी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यहां तक कि जीव आत्मा को अपने दुःख का भी भान नहीं रहता। जब कभी सौभाग्य से सदगुरु का समागम मिलता है, तब उसे समझ में आता है कि मैं कहां उलझ गया और अब उलझन सुलझने का नाम ही नहीं ले रही। मुनिश्री ने कहा कि उसी भूल को सुधारने का मौका हमें इस दुर्लभ मनुष्य जन्म में मिला है। इसे हाथ से नहीं निकलने देना। जगत की भलाई के लिए जो कुछ भी बन पड़े करते चले जाना।</p>
<p><strong>अशोक नगर समाज ने किए श्रीफल भेंट</strong></p>
<p>बुधवार को अशोक नगर जैन समाज पंचायत कमेटी के अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित बरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर, मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, पंचायत सदस्य विपिन सिंघई, नितिन बज, हेमंत टडैया, पंच कल्याणक के पात्र शैलेंद्र दददा, धर्मेंद्र रोकड़िया, सचिन कांसल, गिरीश अथाईखेडा रिंकेश कांसल, मुनेश विजयपुरा, मुन्ना बांझल, अक्षय टडैया प्रमुखजनों ने मुनि संघ को श्रीफल भेंटकर शांतिनगर गांव मंदिर में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का निवेदन किया। इस दौरान जैन समाज के मंत्री धुर्रा ने कहा कि गुरुदेव शांतिनगर गांव मंदिर की प्रतिष्ठा के लिए हम सब निवेदन लेकर आए हैं।आपके चरण पड़ते ही सब कार्य पूरा हो जाएगा।</p>
<p><strong>अशोक नगर से बने आईएएस चितवन जैन का हुआ सम्मान</strong></p>
<p>अशोक नगर जिले से बने आईएएस चितवन जैन ने श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी के साथ पहुंचकर परिवार सहित मुनिश्री सुधासागरजी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया है। इस दौरान उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेवा का मन में प्रबल भाव था। गुरुदेव यह भावना आपके आशीर्वाद से प्रल्लवित हुई। इस सेवा को और भी अच्छी तरह से करते हुए ऐसा क्या करें कि लोग याद रखें। मुनिश्री सुधासागरजी ने कहा कि सबसे पहले राष्ट्र है, राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तब आप और हम सब मिलकर धर्म संस्कृति के लिए कुछ कर सकते हैं। आज सबसे अच्छा समय है, जब आप अपनी इच्छा के अनुसार धर्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी ही भूल के कारण ये जीव आत्मा भटक रही है। हमारी ही भूल हम पर हावी हो रही है इन भूलों को सुधारने का करने उद्यम करना होगा। कर्मों के अनुसार न करके स्वयं को निरखकर, ज्ञाता, दृष्टा स्वभाव की ओर अपने चंचल चित्त को लगाए रखना होगा। इससे राग, द्वेष, मोह में कमी आएगी। जो दःुखों का मुख्य कारण है। अपने स्वभाव रूप आनंद पाने की तरफ़ कम से कम एक कदम तो उठाएं।</p>
<p><strong>णमोदय तीर्थ के नाम से जाना जाएगा नव निर्मित जिनालय</strong></p>
<p>पिछले 12 वर्षों से बन रहे नवीन जिनालय में विराजमान होने वाले भगवान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा का तिलकदान करने का सौभाग्य उषा देवेंद्रकुमार अर्पितकुमार सिंघई ने प्राप्त किया। सर्व प्रथम तिलकदान की क्रिया को मुनिश्री सुधासागरजी ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के मंत्रोच्चार के बीच किया। इसके बाद सर्व समाज और बाहर से पधारे भक्तों भी तिलकदान का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बताया गया कि यह मंदिर णमोदय तीर्थ के नाम से जाना जाएगा। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष रूपेश जैन, मंत्री शशांक सिंघई, पूर्व अध्यक्ष चंद्रकुमार मोदी, अरविंदकुमार मक्कू, मनीष मोदी, दीप टडैया काली मोदी, संजय सिंघई उपस्थित थे।</p>
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		<title>ज्ञान से सबकुछ जाना जा सकता है इसके लिए भी ज्ञान जरूरी : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में वेदी प्रतिष्ठा समारोह के लिए पंचायत कमेटी ने किए श्रीफल भेंट  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 16:49:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ ज्ञान जब भी जहां से भी मिले प्राप्त कर लेना चाहिए। कुमति ज्ञान और सुमित ज्ञान के साथ ज्ञान आठ प्रकार का होता है। अवधि ज्ञान के साथ कुअवधिज्ञान भी होता है।यह उद्गार देवोदय तीर्थ देवगढ़ में मुनि श्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोक नगर। ज्ञान से सब कुछ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong> ज्ञान जब भी जहां से भी मिले प्राप्त कर लेना चाहिए। कुमति ज्ञान और सुमित ज्ञान के साथ ज्ञान आठ प्रकार का होता है। अवधि ज्ञान के साथ कुअवधिज्ञान भी होता है।यह उद्गार देवोदय तीर्थ देवगढ़ में मुनि श्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोक नगर।</strong> ज्ञान से सब कुछ जाना जा सकता है इसके लिए भी ज्ञान प्राप्त करना होगा। ज्ञान जब भी जहां से भी मिले प्राप्त कर लेना चाहिए। कुमति ज्ञान और सुमित ज्ञान के साथ ज्ञान आठ प्रकार का होता है। अवधि ज्ञान के साथ कुअवधिज्ञान भी होता है।यह उद्गार देवोदय तीर्थ देवगढ़ में मुनि श्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि विनय करने से ज्ञान सहजता से प्राप्त हो जाता है। जब ज्ञान प्राप्त करने की बात आई तो श्री रामचन्द्र जी ने लक्ष्मण जी को रावण के पास ज्ञान प्राप्त करने के लिए भेज दिया लेकिन, रावण कुछ नहीं बोला तब श्री राम ने कहा कि ज्ञान विनय के साथ आता है और श्री लक्ष्मण जी ने रावण से युद्ध भूमि में ज्ञान प्राप्त किया। ये कहीं भी कभी भी मिल सकता है। इस दौरान जैन समाज अशोक नगर द्वारा वेदी प्रतिष्ठा के लिए श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>मुनि संघ के चरणों में निवेदन कर आगमन आग्रह</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने देवगढ़ से लौटकर बताया कि मुनिश्री सुधासागरजी के अशोकनगर जिले से निकले की संभावना को देखते हुए श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर की वेदी प्रतिष्ठा के साथ ही गांव मंदिर एवं पार्श्वनाथ मंदिर की वेदी प्रतिष्ठा का निवेदन प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भैया के साथ जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल, उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा, संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनीष वरखेडा़, नीलेश टिकंल, एनएस हेमंत टडैया, प्रदीप कांसल, मनोज जैन लल्ला, प्रदीप कडरया, आस्तिक जैन सहित सभी सदस्यों ने श्रीफल भेंटकर किया।</p>
<p><strong> सत्य को जानकर सत्य नहीं कह पाते</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि सत्य तो सत्य ही होता है। आज वर्तमान में सत्य को जानकर सत्य नहीं कह पाते तो कोई बात नहीं। मौन रहना भी सत्य का समर्थन समझना चाहिए। दुष्टजनों के समाने सत्य नहीं बोल पाने पर गिलानी नहीं करना चाहिए। दुष्ट जनो के समाने मौन रहने पर वे आपको मूर्ख मानकर छोड़कर चले जाएंगे। मेरे मौन रहने से सब हमें मूर्ख ही समझ रहे हैं। मूर्ख के समाने सत्य बोलने से वह आप पर हमला कर सकता है। ऐसे समय में मौन रहना ही ठीक है। अराजक तत्वों के सामने मौन रहना ही ठीक है क्योंकि, वे कुछ भी कर सकते हैं।</p>
<p><strong>मध्यप्रदेश में प्रवेश पर नगर में मंदिरों की हो प्रतिष्ठा</strong></p>
<p>इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने कहा कि अशोक नगर में ऐतिहासिक शाही पंच कल्याणक महा महोत्सव हुआ। अब हम सब उम्मीद कर रहे हैं। जब आपका मध्य प्रदेश में प्रवेश हो तो नगर के सभी जिनालय में वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव मनाए जाने का हम सब को सौभाग्य प्राप्त हो ये निवेदन लेकर आए हैं। ‌इस दौरान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया जी ने कहा कि समाज पूरी ताकत लगाकर प्रयास करती रहेगी तो हो सकता है गुरु जी के चरण फिर एक बार अशोक नगर जिले की ओर बढ़ जाएं। सबसे अच्छा तो ये है कि पूरा जिला एक साथ प्रयास करें।</p>
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		<title>अभिनंदनोदय तीर्थ में संतशाला का शिलान्यास : विद्यालय को उच्चीकृत कर विभिन्न संकायों के लिए मुनि श्री ने दिया मार्गदर्शन  </title>
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		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:19:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। जिसका पुण्यार्जन सेठ शिखरचंद सुरेन्द्र कुमार किसलवास द्वारा किया गया। मंत्रोच्चार के साथ जयकुमार शास्त्री [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। अभिनंदनोदय तीर्थ में बुधवार प्रातःकाल मुनिश्री सुधासागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में संतशाला की आधारशिला रखी गई। जिसका पुण्यार्जन सेठ शिखरचंद सुरेन्द्र कुमार किसलवास द्वारा किया गया। मंत्रोच्चार के साथ जयकुमार शास्त्री ने मुनि श्री के आशीर्वाद से पूजन के बाद शिलान्यास कराया। इसके पूर्व मुनि श्री ने प्रातःकाल चन्द्रप्रभु जिनालय डोडाघाट के दर्शन किए। इसके बाद सुधासागर कन्या इंटर कॉलेज पहुंचे। जहां विद्यालय परिवार ने मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर आर्शीवाद ग्रहण किया। विद्यालय को उच्चीकृत कर विभिन्न संकायों के लिए मुनि श्री ने मार्गदर्शन किया। मुनि संघ की अगुवाई विनम्र बाल मंच द्वारा दिव्यघोषों के साथ की गई। द्वारे-द्वारे श्रद्धालुओं ने रंगोली सजाई और पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद ग्रहण किया।</p>
<p><strong>जिज्ञासा समाधान अभिनंदनोदय तीर्थ में हुआ</strong></p>
<p>नगर के पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अटामंदिर में मुनि श्री सुधासागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का पुण्यार्जन प्रमोद कुमार, गौरव जैन पाय एवं सोमचंद,संजीव कुमार, राजीव जैन लकी परिवार द्वारा किया गया। इस दौरान भगवान बाहुबलि की वेदिका पर अभिषेक शांतिधारा की व्यवस्थाओं के लिए वीरेन्द्र जैन कड़की, प्रमोद जैन गुरसौरा, प्रकाश जैन अनमोल के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई। मुनि श्री ने जैन अटामंदिर द्वारा क्रय की गई भूमि का अवलोकन किया और जैन पंचायत की मौजूदगी में भूमि का नामकरण विद्या सुधा वाटिका सर्वसम्मति से हुआ तथा अगामी कार्ययोजना के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। संचालन महामंत्री आकाश जैन एवी गैस द्वारा किया गया। मुनि श्री सुधासागर महाराज को भक्ति पूर्वक आहारदान का पुण्यार्जन सिंघई शीलचंद राजीव अनौरा परिवार को मिला। सायंकाल जिज्ञासा समाधान अभिनंदनोदय तीर्थ में हुआ। जहां श्रावकों ने अपनी शंकाओं का समाधान पाया। इसके बाद गुरुभक्ति हुई जिसमें श्रावकों ने सम्मलित होकर आरती की और भक्ति में झूमे।</p>
<p><strong>यह समाज जन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर जैन पंचायत के अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत खजुरिया, सीए सौरभ जैन प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक जैन दैलवारा, मनोज जैन बबीना, अजय जैन गंगचारी, वीरचंद सराफ, प्रमोद जैन पाय, शिक्षक प्रफुल्ल जैन, संजीव जैन लकी, अखिलेश गदयाना, धन्यकुमार जैन एड, प्रधानाचार्य कल्पना जैन, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, सौरभ जैन पीलू, नरेन्द्र जैन छोटे पहलवान, संजय रसिया, संजीव सौरया आदि मौजूद रहे।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर रहेगी शराबबंदी </strong></p>
<p>दिगम्बर जैन महासमिति ललितपुर महरौनी संभाग ने बुधवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर 30 मार्च को महावीर जयंती पर अंडा, मांस, मछली, शराब की बिक्री को प्रतिबंधित किए जाने की मांग की। इस आशय का ज्ञापन देते हुए संभाग के अध्यक्ष महेन्द्र जैन मडवैया एडवोकेट ने बताया कि जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्मोत्सव पर ऐसी दुकानों पर विक्रय प्रतिबंधित की जाए। इस संबंध में अपर जिला मजिस्टेट ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अधिशासी अधिकारी नगरपालिका को निर्देशित किया है 30 मार्च को महावीर जयंती पर शराब, अंडा, मांस, मछली की बिक्री को प्रतिबंधित किए जाने के संबंध में कार्रवाई करें। ज्ञापन देने वालें में कार्य अध्यक्ष राजकुमार जैन मोदी, महामंत्री ब्रजकिशोर जैन एड, संतोष गोयल, उत्तमचंद जैन, अरूण जैन, संतोष वत्सल, कामरेड जिनेन्द्र जैन, अवनीश बुखारिया, महेश अमरा, अक्षय कुमार जैन आदि प्रमुख रहे।</p>
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		<title>राजसी वैभव छोड वैराग्य पथ पर चले युवराज आदिकुमार : आत्मशुद्धि और संयम ही जीवन का आधार-मुनिश्री सुधासागरजी </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 16:58:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तप कल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> सतोदय तीर्थ सेरोन पंचकल्याणक में मुनि श्री सुधासागर महाराज के ससंघ सानिध्य में तपकल्याणक में युवराज आदिकुमार ने जय राजसी वैभव त्याग कर वैराग्य की ओर कदम बढ़ाए तो उपस्थित धर्मालुजनों ने जयजयकारों के बीच अनुमोदना की। मुनि श्री ने उपस्थित धर्मालुजनों को तप कल्याणक की महिमा बताते हुए कहा आत्मशुद्धि और संयम को जीवन का आधार है। जीवन में अपने भावों को निर्मल बनाते हुए अच्छे कार्यों में में की ओर बढ़ो और संकल्पित हो कि बुरे आचरणों से बचेंगे। शनिवार को प्रातःकाल पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में प्रातःकाल प्रभु अभिषेक, शांतिधाराध के उपरान्त जन्म कल्याणक पूजन हुई। मध्यान्ह में महोत्सव स्थल अयोध्यापुरी नगरी में महाराज नाभिराय के आंगन में युवराज आदिकुमार की भव्य बारात निकाली गई। जिसमें इन्द्र इन्द्राणी और श्रद्धालु झूम उठे। सत्येन्द्र शर्मा एण्ड पार्टी के भक्तिमय भजनों ने वातावरण को पूर्णतः धर्ममय बना दिया मुकुटवद्ध राजाओं द्वारा भेंट दी गई। इसी दौरान नीलांजना नृत्य के दौरान वैराग्य के भाव पूर्ण क्षण उस समय आया जब तपकल्याणक के दौरान दीक्षा विधि सम्पन्न हुई। जिसमें राजसी वैभव का त्याग कर जब वालक तीर्थंकर ने दिगम्बर दीक्षा हेतु वैराग्य पथ पर कदम बढ़ाए और अपना राजपाट सौंपते हुए दीक्षा हेतु वन को प्रस्थान कर गए। इस दौरान पूरा पाण्डाल वैराग्य की जय के उ‌द्घोष से गूंज उठा। इस दौरान प्रमुख रूप से महाराजा नाभिराय मरूदेवी मालती महेन्द्र सर्राफ, सौधर्म इन्द्र अनुपमा सतीश जैन बजाज, कुवेर सीमा सिंघई मनोज जैन, महायज्ञनायक सुमन विमल जैन, ममता अमित जैन वल्ली डोंगरा भरत चक्रवर्ती, विजय जैन लागौन वाहूवलि, नीतेश जैन विलौआ जखौरा राजा सोम, देवेन्द्र कुमार मंजू जैन राजा श्रयांस, पवन जैन बाबा मार्वल ईशान इन्द, समता जैन आनंद जैन साइकिल सानत,इन्द्र ब्राहमेन्द्र रूवी संजय मोदी, विधियज्ञनायक राजू जैन मड़वरा, महामण्डलेश्वर राजीव जैन पीहर साढी आदि प्रमुख भूमिका में रहे।</p>
<p><strong>इनका मिल रहा है सहयोग</strong></p>
<p>आयोजन की व्यवस्थाओं में दिगम्बर जैन पंचायत समिति, आचार्य विद्यासागर व्यायामशाला, वीर सेवा संघ, जैन मिलन मुख्य शाखा सुधा कलश महिला मण्डल के अतिरिका सतोदय तीर्थ अध्यक्ष सतीश जैन बजाज, महामंत्री सिंघई मनोज जैन बबीना, विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय रसिया, नीतेश विलौआ, अमितेश जैन, अभय जैन ग्राफिक्स, अनंत सराफ, श्रयांस जैन गदयाना, राजेन्द्र जैन मिठया, पं. जयकुमार जैन, अभय जैन, प्रदीपजैन बौदा, अवध किशोर जैन, प्रदीप जैन बरोदा, सौरभ जैन पीलू, मुकेश जैन नेता आदि का सकिय सहयोग मिल रहा है।</p>
<p><strong>ज्ञान कल्याणक 8 मार्च को</strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार सत्तोदय तीर्थ सेरोन में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के ज्ञान कल्याणक में आज 8 मार्चको प्रातः नित्यमह सामूहिक पूजन, शान्ति हवन, मुनिश्री की मंगल देशना के उपरान्त महामुनिराज वृषभसागर महाराज की आहारचर्या, मध्यान्ह में ज्ञानकलयाणक की आन्तरिक कियाए श्रीजी की स्थानपना, नेत्रोन्मीलन, प्राणप्रतिष्ठा सूरिमंत्र समोवशरण की रचना एवं सायंकाल सांस्कृतिक कार्यकम होगा।</p>
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		<title>सतोदय में अपार पुरातन संपदा, जिनका संरक्षण जरूरी: मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव की तैयारियां, स्वयंसेवी संस्थाएं जुटी </title>
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		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 13:31:22 +0000</pubDate>
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<p><strong>सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने शुक्रवार को यहां की मूर्तिकला को देखा और उनके संरक्षण के लिए समाज को प्रेरित किया। मुनि श्री ने कहा कि सतोदय में पुरातन संपदा का अपार भंडार है, इसको संरक्षित किया जाना जरूरी है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। सतोदय तीर्थ सेरोन में मुनिश्री सुधासागरजी महाराज ससंघ ने शुक्रवार को यहां की मूर्तिकला को देखा और उनके संरक्षण के लिए समाज को प्रेरित किया। मुनि श्री ने कहा कि सतोदय में पुरातन संपदा का अपार भंडार है, इसको संरक्षित किया जाना जरूरी है। मुनि श्री ने सतोदय में विराजित प्रतिमाओं के दर्शन किए और विकास कार्यों को देखा। मुनि श्री ने प्राचीन संग्रहालय में रखी मूर्तियों को देखकर उनके संरक्षण पर बल दिया। शुक्रवार प्रातःकाल मुनि श्री के सानिध्य में प्रभु अभिषेक शांतिधारा हुई। जिसका पुण्यार्जन सुशील जैन शाह परिवार दिल्ली एवं सोमचंद संजीव जैन लकी परिवार ललितपुर ने किया। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन का पुण्यार्जन ज्ञानचंद रीतेश कुमार सादूमल परिवार ने किया। मुनि श्री की आहारचर्या कराने का पुण्यार्जन संगीता मनीष जैन नायक परिवार को मिला। मुनि श्री ससंघ के सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप जैन सुयश अशोकनगर के मार्गदर्शन में होने वाले श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए प्रमुख पात्रों के चयन के बाद आयोजन स्थल पर तैयारियां चल रही है। प्रतिष्ठा महोत्सव के इंद्र-इंद्राणियों की व्यवस्थाओं को जैन मिलन मुख्य शाखा पूर्ण कर रही है।</p>
<p><strong>यह समाजजन देख रहे हैं व्यवस्थाएं </strong></p>
<p>जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ. अक्षय टडैया, महामंत्री आकाश जैन, संयोजक सनत जैन खजुरिया, प्रतीक इमलिया, सतोदय तीर्थ सेरोन अध्यक्ष सतीश जैन बंटी, महामंत्री सिंघई, कोषाध्यक्ष विजय जैन लागौन, अजय जैन जखौरा, आनंद जैन साइकिल, संजय मोदी, मुकेश जैन, अरविंद जैन बरोदा, अमित जैन डोगरा, विमल जैन पीहर साडी, मीडिया प्रभारी अक्षय अलया, नीतेश विलौआ, नरेश जैन मुक्ता, पं. जयकुमार जैन, रविजैन चुनगी, अवध किशोर जैन आदि व्यवस्थाएं कर रहे हैं।आगामी 4 से 8 मार्च तक सतोदय तीर्थ सेरोन में श्रीमज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव किया जाएगा। जिसको लेकर जैन समाज में उत्साह है। प्रशासनिक स्तर पर भी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।</p>
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		<title>आपको क्रिया में आनंद आया तब वह पुण्य में बदल जाएगा : मुनिश्री सुधासागरजी के सानिध्य में तप कल्याणक पर तीर्थाेदय में होगी जैनेश्वरी दीक्षा  </title>
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		<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 03:38:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230; अशोकनगर। क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> क्रिया में धर्म नहीं है, उसमें कितना आनंद आया वहीं पुण्य है। भाग्यवान कहां है देवता उस मंदिर में जाते हैं जब भगवान सामने हो तो थोड़ा हंस लिया करें। अपने आप को भाग्यवान मान लेना जैसे ही तुम्हारे पुण्य का उदय आए। प्रभु के चरणों में पहुंचकर भक्ति कर लिया करें। हंस लिया करें। यह उद्गार मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बड़े आदमी को संभालना है। हंसने वाले को संभालना है ये नरक जाने वाले हैं। रावण के पास धन था बुद्धि थी, शरीर निरोगी मिला। धन मिले अय्याशी में लगा दिया। बुद्धि मिली उससे भगवान को कैलाश पर्वत सहित उठरकर फैंकने लगा। इन तीनों को संभालना। मैं जन्म-जन्म का बड़ा आदमी हूं। तुम्हें जो कुछ भी मिला है, अच्छे कर्म से मिला है ये तुम्हारे लिए अपने गुरु से मिलीं है। अब मेरा उपदेश नहीं मैं धनवान हूं बुद्धि मान निरोगी है तो अच्छा कर्म का परिणाम है। अब तुम्हारे लिए अपने आत्म की आवाज सुने। अब भविष्य में भी ऐसा ही चाहते हैं तो यही फार्मूला आगे लगाना है। आज अच्छा कर रहे हैं तो कल भी अच्छा होगा ये आत्मा की आवाज आएगी।</p>
<p><strong>23को जाएगा अशोक नगर जैन समाज द्रव्य भेंट करने गोलाकोट</strong></p>
<p>जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल ने बताया कि तीर्थाेदय तीर्थ गोलाकोट में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ससंघ के श्री सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक महामहोत्सव में ‘तप कल्याणक 23 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे होगा। सुभाषगंज प्रांगण से श्री दिगंबर जैन पंचायत कमेटी अशोकनगर के नेतृत्व में सभी संस्थाओं का प्रतिनिधि मंडल अपने अपने निजी वाहनों से ‘अष्ट मंगल द्रव्य’ लेकर जा रहा है। इस दौरान मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ को कमेटी श्रीफल करेगी। कमेटी के उपाध्यक्ष अजित वरोदिया, प्रदीप तारई, राजेंद्र अमन, महामंत्री राकेश अमरोद, मंत्री शैलेंद्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा, मंत्री संजीव भारिल्य, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, ऑडिटर संजय केटी संयोजक उमेश सिंघई, मनीष सिंघई, मनोज रन्नौद, श्रेयांस घैला सहित अन्य प्रमुख जनों ने सभी से अनुरोध किया है।</p>
<p><strong>’तप कल्याणक पर होगी जैनेश्वरी दीक्षा</strong></p>
<p>जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने बताया कि इस दौरान महाराजा नाभी राय के दरबार का आयोजन होगा। आदि कुमार का राज्याभिषेक होगा। इसके साथ ही विभिन्न देशों के राजाओं द्वारा भेंट समर्पित की जायेगी। राज व्यवस्था अषि मषि कृषि विद्या वाणिज्य शिल्प का उपदेश दिया जाएगा। राज्य व्यवस्था के साथ कृषि क्रिया कार्य शिल्पा कला का मार्ग प्रशस्त किया जायेगा। इसके बाद नीलाजंना नृत्य नीलाजना का निधन और आदि कुमार का वैराग्य जैनेश्वरी दीक्षा मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज दी जायेगी।</p>
<p><strong>सब कुछ छोड़कर यदि जायेंगे तो आप भी सिद्ध बन सकते हैं’</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि सब कुछ छोड़कर यदि जायेगा तो आप भी सिद्ध शिला को प्राप्त कर सकते हैं। जैसे तारा का समूह स्वच्छ जल में स्पष्ट दिखाई देता है वैसे ही ज्ञानी को सब कुछ स्पष्ट दिखाई देता है। ये मार्ग आनंद को देने वाला है। यहां मजा नहीं आया ये मजे से आगे आनंद देने वाले हैं। इन विकल्प जालों से आगे बढ़कर परम पद की आराधना करने का पुरूषार्थ करते रहना चाहिए। भेद विज्ञान से ही आराधना का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्ञान दर्शन चारित्र वीर्य चार को जान लिया शुद्ध आत्मा को जानने से हमें आगे कुछ भी नहीं बचा। जिसने अपने आत्म को जान लिया। भाग्यवानों के लिए है।</p>
<p><strong>आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं</strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि मैं नहीं चाहता हूं कि मेरे दरवाजे रोते हुए आये गरीब ना आवे रोगी ना आवे आ गया तो उनको भी ठीक कर दूंगा ये पंच कल्याणक भाग्यवानों के लिए हैं। ये मंदिर भाग्यवानांे के लिए है। भाग्यहीनो के लिए नहीं है। ये धर्म भाग् वानो के लिए है ये धर्म उनके लिए है। जिनके मन और तन सुखी है जैन कुल में उनका हुआ है, जो जन्म-जन्म के पुण्यवान हैं । इस पंचम काल का सबसे बड़ा दोष है कि यहां गरीबांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिर परेशान लोग ज्यादा आ रहे हैं। आज मंदिर में परेशान दःुखी और गरीब लोगांे की भीड़ बढ़ रही है। आज मंदिरों में देने वाले कम लेने ज्यादा आ रहे हो।</p>
<p><strong>जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो, उसी से अतिशय बढ़ता है</strong></p>
<p>कुछ लोग मंदिर में ख़ाली हाथ इसलिए जाते हैं कि भगवान को पता चले कि भक्त के पास कुछ नहीं है जैनी मंदिर में थाल भर-भर कर लेकर जाता है और खाली हाथ आता है। भगवान कहते हैं क्या बात है तू दूखी तो नहीं है। भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए अभी तक इतना दिया है कि तेरे लिए भी लेकर आया हूं मन्दिर कभी खाली हाथ नहीं जाना जब तुम मंदिर में अर्घ्य चढ़ाते हो। उसी से अतिशय बढ़ता है। उससे अतिशय बढ़ता चला जाता है। जितना भाग्यशाली बनकर पुण्यवान कर जिनालय की वंदना करने जाना मैं भाग्यवान हूं जो भगवान के पंच कल्याणक देखने आया हूं।</p>
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