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	<title>मुनिश्री साध्य सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री साध्य सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मुनिश्री साध्य सागर जी का 8 वां संयम दीक्षा महोत्सव मनाया: श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की  </title>
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		<pubDate>Mon, 06 Oct 2025 12:17:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन पंक्तियों को जीवन में धारण कर अपने मोक्ष के पथ को प्रशस्त कर ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने का का कार्य मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज कर रहे हैं। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। जीवन के किसी भी क्षण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन पंक्तियों को जीवन में धारण कर अपने मोक्ष के पथ को प्रशस्त कर ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने का का कार्य मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद</strong>। जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इन पंक्तियों को जीवन में धारण कर अपने मोक्ष के पथ को प्रशस्त कर ज्ञान रूपी प्रकाश को फैलाने का का कार्य मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज कर रहे हैं। समाज प्रवक्ता सन्मति जैन काका ने बताया कि तप एवं त्याग की नगरी कहे जाने वाले नगर में चातुर्मासरत मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज का आठवां संयम दीक्षा महोत्सव समाजजनों ने बड़े भक्ति भाव एवं हर्षाेल्लास से मनाया। कार्यक्रम की इस मंगल बेला में सर्व प्रथम श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा की गई। मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के मुखारबिंद से उच्चारित शांतिधारा करने का शौभाग्य अशोक परीन कुमार विभव पंचोलिया परिवार को प्राप्त हुआ। शांति सागर वर्धमान देशना निलय में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत त्रय आचार्यों के चित्र के समक्ष बाहर से पधारे सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर की। मंगलाचरण संगीता पाटोदी ने किया। अगली कड़ी में मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के गृहस्थ अवस्था की माता राजुल बाई एवं भाई गौरव भैया का समाजजनों ने शॉल श्रीफल एवं वस्त्र भेंटकर सम्मान किया। युगल मुनिराज के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेट करने का शौभाग्य बाहर से पधारे अतिथियों एवं सभी समाजजनों को प्राप्त हुआ। इसी कड़ी में मुनि श्री के गृहस्थ अवस्था के भाई गौरव भैया ने मुनि श्री के प्रति अपनी विनयांजलि दी एवं मुनि श्री के बचपन से दीक्षा तक के संस्मरण सुनाए। अगले क्रम में पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का पूजन सभी समाजजनांे ने अर्घ्य चढ़ाकर बड़े भक्ति भाव से किया। यह प्रक्रिया संगीता पाटोदी एवं प्रशांत चौधरी ने संपन्न करवाई।</p>
<p><strong>आचार्यश्री विशुद्धसागर जी से 2017 में प्राप्त की दीक्षा </strong></p>
<p>इस अवसर पर मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने गुरु के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे गुरुवर जिन्होंने हमें मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ाया, जो युवा पीढ़ी भटक रही थी जिन्हें रास्ता नहीं मिल रहा था। ऐसे आचार्य विशुद्ध सागर जी की छत्रछाया पाकर कई युवाओं ने जैनेश्वरी दीक्षा ली और 6 अक्टूबर 2017 के दिन इंदौर में मुझे भी जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि आचार्य भगवंत कहते है जिसके अंदर का गुरु जाग जाता है ना उसे परिवार वालों को डराना पड़ता है और ना समाज वालों को वो दीक्षा लेकर निकल जाता है। आज आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज की जन्म नगरी में हमारा आठवां दीक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-91831" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/10/IMG-20251006-WA0013-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने भी संबोधित </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब भी हमारा समाधि काल हो, बस जीवन का अंत हो मेरे समाने निर्गनत हो। इसी भावना के लिए मुनि दीक्षा मनाते हैं। यही दीक्षा दिवस है, जो संयम की अनुमोदना कर रहे, वीतरागियों की निर्ग्रंथोंकी अनुमोदना कर रहे हैं कि हम भी ऐसे तप के धारी बनें। हम भी ऐसे चरित्र के धारी बनंे और हम भी ऐसे विशेष व्यक्तित्व के धारी बने कि हममें नगर नहीं पूरा तीन लोक अनुमोदना करें। इसी अवसर पर मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने भी अपनी वाणी से सभी को संबोधित किया। इस पावन मंगलमय अवसर पर भोपाल, सीहोर, आष्टा, इंदौर, उज्जैन, बुरहानपुर, बड़वाह, सनावद सहित अनेक शहरों से पधारे भक्त और समाजजन उपस्थित थे। प्रभावना वितरण की गई। संचालन अनुभव सराफ ने किया।</p>
<p><strong>जीवन परिचय </strong></p>
<p>जैसा कि ज्ञात है की मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज का दीक्षा के पूर्व का नाम शिवम् था। आप के पिता का नाम जयकुमार जैन, माताजी का नाम राजुल बाई जैन। आप का जन्म 3 दिसंबर 1987 को उज्जैन नगर में हुआ था। आपकी लौकिक शिक्षा 12 वीं तक हुई है। आप ने ब्रह्मचर्य व्रत 2010 में उज्जैन में लिया था। आप की मुनि दीक्षा 6 अक्टूबर 2017को आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के कर कमलों से इंदौर में हुई थी।</p>
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		<title>मुनिराजों के सानिध्य में मंत्र जाप्य अनुष्ठान किया: पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की </title>
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		<pubDate>Sun, 06 Jul 2025 12:18:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर में विराजमान द्वय मुनिराज निरंतर धर्म वृद्धि के लिए प्रतिदिन धर्म की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज, मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार को प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर में विराजमान द्वय मुनिराज निरंतर धर्म वृद्धि के लिए प्रतिदिन धर्म की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज, मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार को प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> नगर में विराजमान द्वय मुनिराज निरंतर धर्म वृद्धि के लिए प्रतिदिन धर्म की गंगा प्रवाहित कर रहे हैं। मुनि श्री विश्व सूर्य सागर जी महाराज, मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज के सानिध्य में रविवार को प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ बड़ा दिगंबर जैन मंदिर में पंचामृत अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न की गई। शांतिधारा करने का सौभाग्य कमलकुमार केके परिवार को प्राप्त हुआ। धर्म सभा के प्रारंभ में राजन जैन ने मंगलाचरण किया। मुनि श्री साध्यसागर जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि द्रव्य गुण पर्याय में से गुण हटा दो, पर्याय को हटा दो तो द्रव्य को निहारो द्रव्य आत्मा है।</p>
<p>आत्मा में देखने-सुनने की शक्ति ना हो तो आत्मा पुण्यवृति नहीं हो सकता। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर जी ने कहा कि जब भी आत्मा का कल्याण होगा। वो प्रभु की देशना से ही होगा। एक स्वाध्याय ही ऐसा रास्ता है। जो तुम्हारे आत्मा के गुणों को दूर करती है। दोपहर के सत्र में मुनि श्री साध्य सागर जी के द्वारा मंत्र जाप्य अनुष्ठान करवाया गया। जिसमें मुनिश्री साध्य सागर जी महाराज ने एक-एक मंत्र का शुद्ध उच्चारण कर जाप करवाए। सभी समाजजनों ने एक-एक दीप प्रज्वलित कर महाराज जी द्वारा उच्चारित मंत्रों का जाप किया एवं णमोकार महामंत्र के एक-एक उच्चारण कों कैसे बोलना उसका क्या फल है एवं जाप करते हुए माला के एक-एक दाने का महत्व बताया। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे ।</p>
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		<title>मुनिराजों का वर्षायोग के लिए सनावद में मंगल प्रवेश: मुनियों की अगवानी में जुटे सभी गुरु भक्त  </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 14:31:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 साधुओं की धर्म नगरी में वर्षायोग के लिए दो मुनिराजों का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी और मुनिश्री साध्य सागर जी का मंगल प्रवेश बुधवार को प्रातः बड़वाह की ओर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 साधुओं की धर्म नगरी में वर्षायोग के लिए दो मुनिराजों का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी और मुनिश्री साध्य सागर जी का मंगल प्रवेश बुधवार को प्रातः बड़वाह की ओर से हुआ। सभी समाजजनों ने ट्राइएंगल चौराहे पर पहुंचकर मुनिराजों की अगवानी की। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 साधुओं की धर्म नगरी में वर्षायोग के लिए दो मुनिराजों का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी और मुनिश्री साध्य सागर जी का मंगल प्रवेश बुधवार को प्रातः बड़वाह की ओर से हुआ। सभी समाजजनों ने ट्राइएंगल चौराहे पर पहुंचकर मुनिराजों की अगवानी की।</p>
<p>महिला मंडलों की सदस्यों ने सिर पर मंगल कलश रखकर मुनिराजो की तीन प्रदीक्षणा लगाई। मुनिराजों का जुलूस नगर के प्रमुख मार्गाें से होते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचा। जहां जुलूस का समापन हुआ। मुनिश्री के सानिध्य मंे जैनधर्म के 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ जी के मोक्ष कल्याणक दिवस पर लाडू चढ़ाया गया। द्वय मुनिराजों पर रजतमय छत्री सभी समाजजनों ने क्रम-क्रम से लगाई। जुलूस समापन के बाद आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। जहां सर्वप्रथम आचार्य विराग सागर जी के चित्र के समक्ष द्वय मुनिराजांे के मंगल विहार में सारथी रहे समाजजनों ने दीप प्रज्वलन किया।मंगलाचरण संगीता पाटोदी ने किया। अगली कड़ी में द्वय मुनिराजों को नगर में चातुर्मास की स्वीकृति के लिए समाज के सभी संस्थाओं के साथ सभी समाजजनों ने श्रीफ़ल समर्पित कर निवेदन किया।</p>
<p><strong>मुनि बन गए तो ऐसा मत समझना भगवान बन गए</strong></p>
<p>मुनिश्री साध्य सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि आचार्य वर्धमान सागर जी की नगरी में आना हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि मैंने पारसोला में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन से सीखा। पट्ट परंपरा से पंचम पट्टाचार्य परंपरा तक का वात्सल्य हमने आचार्यश्री में देखा। मुनि श्री ने कहा कि नहीं बन पाओ मुनिराज, नहीं बन पाओ माताजी लेकिन, जब भी माटी के पुतले में भी गुरुदेव विशुद्ध सागर कहते हैं भईया मुनि बन गए तो ऐसा मत समझना भगवान बन गए, मुनि भी बन गए हों तो अपने संयम का अपने अनुशासन का अपने ज्ञान का अपने ध्यान का अपने स्वाध्याय प्रतिक्रमण सामायिक का इतना ध्यान रखना जैसे एक मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने कहा की निश्चित ही आप सभी भव्य आत्माओं ने पर्व पर्याय में पूर्णावृति बंध का आश्रव किया था।</p>
<p>आज वर्तमान में आप सभी लोग सभा में आए उन्हीं पुण्य का प्रभाव है। आप एक दो दिन नहीं चार महीने तक को अग्र वाणी सुनने का अवसर मिलेगा। यह प्रभु की वाणी ही आप की गति को पार लगाएगी। इस अवसर पर विश्वसूर्य सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य रेखा राकेश जैन परिवार एवं श्री साध्य सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य सावित्री भाई कैलाशचंद जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजनों ने अपनी उपस्थिती दर्ज करवाई।</p>
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