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	<title>मुनिश्री विलोक सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री विलोक सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सरला बाग में मुनिश्री विलोक सागर जी का मंगल प्रवेश : श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर मुनिश्री की अगवानी की </title>
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		<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 14:13:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दयालबाग स्थित सरला बाग के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को आध्यात्मिक उल्लास का भव्य दृश्य देखने को मिला। जब देव नगर जैन मंदिर से मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। दयालबाग स्थित सरला बाग [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दयालबाग स्थित सरला बाग के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को आध्यात्मिक उल्लास का भव्य दृश्य देखने को मिला। जब देव नगर जैन मंदिर से मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> दयालबाग स्थित सरला बाग के श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को आध्यात्मिक उल्लास का भव्य दृश्य देखने को मिला। जब देव नगर जैन मंदिर से मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ का मंगल आगमन हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया और पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण व्याप्त हो गया।मुनिश्री के स्वागत में बैंडबाजों और सुसज्जित बग्गी के साथ भव्य नगर भ्रमण का आयोजन किया। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती कर मुनिश्री की अगवानी की। सरला बाग जैन मंदिर पहुंचने पर भक्तों ने अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से उनका स्वागत किया। मंदिर परिसर में आयोजित मंगल प्रवचन में मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज ने भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त वही है, जो व्यसनों से दूर रहकर अहिंसा, संयम और सदाचार को अपने जीवन में उतारता है।</p>
<p>उनके प्रवचन से उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। सायंकालीन कार्यक्रम में शंका समाधान, गुरु भक्ति एवं 48 दीपों से भक्तामर पाठ का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत रहा। प्रचार मंत्री सुबोध कुमार जैन ने बताया कि 22 मार्च को प्रातःसामूहिक अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p>इसके पश्चात विधानाचार्य आशुतोष शास्त्री के निर्देशन में संगीतमय श्री महावीर विधान संपन्न होगा। कार्यक्रम में सभी श्रद्धालुओं को सपरिवार आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर सुबोधकुमार जैन, महेशचंद जैन,राहुलेद्र जैन,मनीष जैन एडवोकेट,पवन जैन, पारस जैन, विकास जैन,रॉबिन जैन,सौरभ जैन, मनोज जैन,संजीव जैन,पीयूष जैन, राजीव जैन, मनसुख जैन,अक्षत जैन ऋतु जैन,दीप्ति जैन,मनी जैन आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>छीपीटोला के जैन भवन में हुई भव्य गोद भराई : महिलाओं ने मंगल गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बनाया </title>
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		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 14:15:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोधसागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं छीपीटोला मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अप्रैल माह में श्री सर्वतोभद्र जिनालय में होने वाले आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव के तहत पारसमल जैन एवं स्नेहलता जैन को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आगरा से पढ़िए, शुभम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोधसागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं छीपीटोला मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अप्रैल माह में श्री सर्वतोभद्र जिनालय में होने वाले आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव के तहत पारसमल जैन एवं स्नेहलता जैन को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। मुनिश्री विलोक सागर जी एवं मुनि श्री विबोधसागर जी ससंघ के मंगल सानिध्य एवं छीपीटोला मंदिर कमेटी के तत्वावधान में अप्रैल माह में श्री सर्वतोभद्र जिनालय में होने वाले आदिनाथ पंचकल्याणक महोत्सव के तहत पारसमल जैन एवं स्नेहलता जैन को प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस पावन अवसर पर उनकी गोद भराई एवं सम्मान समारोह का आयोजन शनिवार को श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर स्थित जैन भवन, छीपीटोला में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। सभी श्रावक- श्राविकाओं ने मेवा, किशमिश, फल एवं अखरोट से तीर्थंकर माता की पारंपरिक गोद भराई की। इसके बाद तीर्थंकर पिता का तिलककर, माला एवं दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। समारोह के दौरान महिलाओं ने मंगल गीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया तथा हर्षोल्लास के साथ नृत्य प्रस्तुत किए। पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा एवं उत्सव का अद्भुत माहौल देखने को मिला। संचालन दीपक जैन ने किया। इस अवसर पर मनोज जैन बल्लो, मुन्ना लाल जैन, मुरलीलाल जैन, अभिषेक जैन, दीपक जैन बोतल वाले, दयाचंद जैन, अभिषेक जैन, अलका जैन, हेमलता जैन सहित बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं एवं समाजजन उपस्थित रहे।</p>
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		<title>सांसारिक इच्छाओं, आसक्तियों का त्याग मोक्ष का कारक है-मुनिश्री विलोकसागर: मुनिश्री ने जीवन में त्याग की भावना को सर्वोपरि बताया  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:45:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है। त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है। जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों और अहंकार का भी त्याग है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर जी ने धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन दर्शन में त्याग की महिमा का गुणगान किया गया है । त्याग की भावना रखने वाला प्राणी सदैव सुख शांति से जीवन यापन करता है । जैन धर्म में त्याग एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो साधकों को आध्यात्मिक विकास और मोक्ष की प्राप्ति में मदद करती है। यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों और अहंकार का भी त्याग है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री ने कहा कि त्याग के माध्यम से, व्यक्ति सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर शांति और आनंद का अनुभव कर सकता है। जैन धर्म में त्याग का अर्थ है सांसारिक इच्छाओं और आसक्तियों का स्वेच्छा से परित्याग करना, जो आध्यात्मिक विकास और मुक्ति (मोक्ष) की प्राप्ति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केवल वस्तुओं का त्याग नहीं है, बल्कि कर्मों के प्रति आसक्ति और अहंकार का भी त्याग है।</p>
<p>जैन धर्म में त्याग को एक महत्वपूर्ण गुण माना गया है, जो साधकों को सांसारिक बंधनों से मुक्त होने में मदद करता है। मुनिश्री ने बताया कि त्याग का अर्थ है सभी प्रकार के मोहों से उत्पन्न पापकर्मों से पूर्णतः विरक्त हो जाना। ऐसा व्यक्ति पापपूर्ण विचार नहीं रखता, पापपूर्ण वचन नहीं बोलता और अपने शरीर, मन और आत्मा से कोई पापकर्म नहीं करता। वह न केवल सभी प्रकार के पापों से पूर्णतः विरत रहता है, बल्कि दूसरों द्वारा किए जाने वाले पाप का भी समर्थक नहीं बनता। इसलिए एक मनुष्य को मूल दुख अर्थात मोह का त्याग कर देना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि, जो व्यक्ति मोह अर्थात धन, वासना इत्यादि का त्याग कर देता है। वह सदैव सुखी जीवन व्यतीत करता है।</p>
<p><strong>जैन संस्कृत विद्यालय में चल रहा है शांतिनाथ विधान</strong></p>
<p>परम पूज्य युगल मुनिराजश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के ओवन सान्निध्य में जैन संस्कृत महाविद्यालय में सावन माह के शुक्ल पक्ष में सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान 25 जुलाई से 09 अगस्त तक सुचारू रूप से चल रहा है। विधान की समस्त धार्मिक क्रियाएं विधानाचार्य चक्रेश जैन शास्त्री संपन्न करा रहे हैं। उक्त विधान में जैन संस्कृत विद्यालय के सभी छात्र पूर्ण तन्मयता, श्रद्धा एवं भक्ति के साथ प्रतिदिन अभिषेक, शांतिधारा, पूजन करते हुए भगवान शांतिनाथ स्वामी को अर्घ्य समर्पित कर रहे हैं। आज विधान आयोजन को दसवा दिन है, अभी तक रेखा संजय जैन, पंकज अरिहंत जैन मेडिकल, रवींद्र जैन गोसपुर, विशंभर दयाल अनूप जैन, जितेंद्र जैन बंटी, कुसुम चक्रेश शास्त्री विधान के पुण्यार्जक बन चुके हैं। 09 अगस्त को विश्व शांति महायज्ञ के साथ विधान का समापन होगा।</p>
<p><strong>चल रहा है महामंत्र णमोकर लेखन कार्य</strong></p>
<p>नगर में चातुर्मासरत युगल मुनिराज लोगों को धर्म के प्रति जागरूक करने के लिए नित नित अनेकों प्रकार के आयोजन कर रहे है। अभी हाल ही में उन्होंने सभी श्रावकों को महामंत्र णमोकर के लेखन का कार्य करने के प्रति जागरूक किया है। पुण्यार्जक परिवार रेखा संजय जैन के सौजन्य से लगभग 300 पुस्तिकाएं वितरित की गई हैं। सर्वाधिक संख्या में लेखन करने वालों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए जायेगें। पुण्यार्जक परिवार महावीर प्रसाद, गंगाविशन, अशोक कुमार, कैलाशचंद जैन जौरा की ओर से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।</p>
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