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	<title>मुनिश्री विलोकसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री विलोकसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अंतरंग विकारों पर नियंत्रण के बिना मुक्ति संभव नहीं : मुनिश्री विलोकसागर जी ने प्रवचन में दी मंगल देशना से धर्म प्रेरणा </title>
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		<pubDate>Sun, 12 Oct 2025 14:13:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आप कितनी भी भक्ति, पूजा पाठ कर लेना, जब तक अंतरंग के परिणामों को नहीं संभालोगे तब तक मुक्ति नहीं मिल सकती। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। यदि प्रभु की भक्ति, पूजन करने के बाद भी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आप कितनी भी भक्ति, पूजा पाठ कर लेना, जब तक अंतरंग के परिणामों को नहीं संभालोगे तब तक मुक्ति नहीं मिल सकती। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> यदि प्रभु की भक्ति, पूजन करने के बाद भी आपके अंतरंग के परिणामों में विशुद्धि नहीं हो रही तो आप अज्ञानी हैं। आप कितनी भी भक्ति, पूजा पाठ कर लेना, जब तक अंतरंग के परिणामों को नहीं संभालोगे तब तक मुक्ति नहीं मिल सकती। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि पूर्वाचार्यों ने कहा है कि &#8220;जो हुआ सो हुआ, अब मत खोदो कुआं&#8221;। जो हो गया उसे हो जाने दो। अब आगे की सोचों। अपने अंतरंग के परिणामों को सम्हालों। आपने साधु संतों के खूब प्रवचन सुने, खूब सत्संग किया, खूब शास्त्र पढ़े, लेकिन अपने अंतरंग के विकारों पर नियंत्रण नहीं किया तो आपका ये सब व्यर्थ हो जाना है ।</p>
<p>हमें सदैव अपने परिणामों को सुधारना चाहिए, हमें स्वयं को देखना चाहिए, सामने वाले के परिणामों से हमारा कोई लेना देना नहीं हैं। जब तक हमारा अपनी वाणी और विचारों पर नियंत्रण नहीं होगा तब तक हम यूं ही इस संसार सागर में भटकते रहेंगे । जिस दिन हमने अपने मन के विकारों पर नियंत्रण कर लिया, अपनी कषायों के दमन का प्रयास कर लिया, तो समझो हम मुक्ति मार्ग की ओर गमन करने कर रहे हैं।</p>
<p><strong>अभ्यास करने से कठिन से कठिन कार्य भी हो जाते हैं</strong></p>
<p>हमें कषायों के शमन के लिए, अपने अंतरंग के विकारों पर नियंत्रण के लिए धीरे धीरे अभ्यास करना होगा। किसी भी प्रकार की विपरीत परिस्थितियों में भी समता का भाव रखना होगा । किसी भी कार्य का बारम्बार अभ्यास करने से कठिन से कठिन कार्य भी सहजता और सरलता से पूर्ण हो जाते हैं। हमें इस संसार के जन्म मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त करने के लिए कषायों पर, अपने अंतरंग के विकारों को जीतना होगा, तभी हम संयम के पथ पर बढ़ते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर हो सकेंगे।</p>
<p><strong>मनुष्य की असली पहचान वाणी और व्यवहार से होती है</strong></p>
<p>मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने बताया कि प्राणी को अपनी कथनी और करनी में समानता रखना चाहिए। व्यक्ति की असली पहचान उसकी वाणी और व्यवहार से होती है। पढ़े लिखे को समझदार और अनपढ़ को गंवार समझा जाता है लेकिन, आपको संसार में कुछ ऐसे लोग भी मिल जाएंगे जो पढ़े लिखे होकर भी गंवार की श्रेणी में आते हैं और कुछ ऐसे भी मिलेगे जो अनपढ़ होते हुए भी समझदारों की श्रेणी में आते हैं। आध्यात्म यही कहता है, धर्म यही कहता है । यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन भगवान की भक्ति करता है, पूजन करता है, शास्त्र पड़ता है, कथा का वाचन या श्रवण करता है लेकिन उसके अंदर निर्मलता का वास नहीं हैं, उसके अंदर परोपकार और अहिंसा की वास नहीं हैं तो वह ज्ञानी नहीं अज्ञानी कहलाता है। इसके विपरीत कोई व्यक्ति न मंदिर जाता है, न प्रभु की भक्ति, पूजन, स्वाध्याय करता है, फिर भी उसके अंदर निर्मलता, अहिंसा, सत्य, परोपकार, जीवदया के वाश है तो वह अज्ञानी नहीं ज्ञानियों की श्रेणियों में आता है।</p>
<p><strong> सिद्धचक्र विधान पत्रिका का हुआ विमोचन</strong></p>
<p>जैन संत मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज के पावन सान्निध्य में 14 नवंबर से 21 नवंबर तक होने जा रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ की कार्यक्रम पत्रिका का विमोचन पुण्यार्जक परिवार कैलाशचंद राकेशकुमार जैन सिखाई का पुरा परिवार एवं समाज के श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा किया गया । इस विधान में निरंतर आठ दिन तक सिद्ध परमेष्ठियों की भक्ति पूर्वक आराधना करते हुए 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong> राग से वैराग्य की ओर&#8221; नाटक का हुआ मंचन</strong></p>
<p>रात्रि को प्रश्न मंच, महाआरती, गुरुभक्ति के पश्चात समाज की प्रतिभाओं एवं विलोक सागर बालिका मण्डल द्वारा &#8220;राग से वैराग्य की ओर&#8221; नाट्य रूपांतरण का मंचन किया गया । जिसमें बताया गया कि किस प्रकार एक सांसारिक प्राणी सभी प्रकार के भौतिक सुखों का त्याग कर संयम साधना करते हुए वैराग्य धारण कर सकता है । उपस्थित सभी लोगों ने नाट्य रूपांतरण की सराहना की।</p>
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		<title>ज्ञान एक ऐसी वस्तु है, जो हमें इंसान बनाती है: संस्कार शिक्षण शिविर के प्रथम दिन दी धार्मिक शिक्षा </title>
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		<pubDate>Mon, 26 May 2025 13:33:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, रत्नकरण श्रावकाचार की विषयवार कक्षाओं में शिविरार्थियों को विषयवार शिक्षा प्रदान की गई। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> ज्ञान एक ऐसी वस्तु है जो हमें इंसान बना देती है। यदि हम थोड़ा थोड़ा भी अध्ययन करें, स्वाध्याय करें तो भी हम एक दिन ज्ञानवान बन सकते हैं। थोड़ा थोड़ा संयम धारण करने वाला व्यक्ति भी एक दिन संयमी पुरुष बन जाता है। थोड़ा-थोड़ा संचय करने वाला भी एक दिन धनवान बन जाता है। बूंद-बूंद से भी घड़ा भर जाता है। इसी प्रकार एक-एक गुण को धारण करने वाला व्यक्ति गुणवान बन जाता है। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने बड़े जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्कार शिविर में शिवरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति समय का महत्व नहीं समझते, अपने अमूल्य समय को यंू ही बर्बाद करते हैं वे जीवन में कभी भी सफल नहीं होते। बिना परिश्रम के विद्या प्राप्त नहीं होती, यदि बिना परिश्रम के विद्या प्राप्त हो भी जाए तो वो अधिक समय तक रुकती नहीं हैं।</p>
<p>आने वाले समय में ऐसी विद्या नष्ट हो जाती है। परिश्रम और संघर्ष के साथ जो विद्या प्राप्त होती है, वहीं हमें सही ज्ञान प्रदान करती है। समय का सम्मान करिए, समय का सम्मान करने वालों को विद्या विद्या तुरंत प्राप्त होती है। इसलिए कठिन परिश्रम के साथ संघर्षों में हमें विद्या अर्जन करना चाहिए। विद्या का, ज्ञान का सृजन करना ही हमारे मानव जीवन का लक्ष्य होना चाहिए, तभी हमारा मानव जीवन सार्थक होगा। आत्मा की विशुद्धि के लिए प्रभु आराधना आवश्यक है। मुनिश्री ने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता के लिए विशुद्धि की आवश्यकता होती है। उसी विशुद्धि को बनाए रखने के लिए प्रभु की भक्ति, प्रभु की आराधना की आवश्यकता होती है और यह आवश्यकता तब तक बनी रहना चाहिए तब तक हमें निर्वाण की प्राप्ति नहीं हो जाती। हमें आत्मा की विशुद्धि के लिए सतत ज्ञान की आराधना परम आवश्यक है।</p>
<p>क्योंकि ज्ञान प्राप्त करना बहुत दुर्लभ है। हमें मानव जीवन मिला है। कब यह शरीर हमारा साथ छोड़ दे, किसी को नहीं मालूम। जीवन बहुत कम है, थोड़ा है। हमें इस थोड़े से जीवन में ज्ञान प्राप्ति के लिए सतत प्रयत्नशील रहना चाहिए। विद्या और ज्ञान से हमारा जीवन सहज और सरल हो जाता है। यही हमारे जीवन का लक्ष्य होना चाहिए।</p>
<p><strong>शिक्षण शिविर का प्रथम दिन शिविरार्थियों में उत्साह </strong></p>
<p>शिक्षण शिविर के प्रथम दिन शिविरार्थियों में भारी उत्साह दिखाई दिया। प्रातःकालीन वेला में सभी बंधुओं, युवाओं एवं बच्चों को सामूहिक रूप से श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक पूजन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर से आए हुए विद्वानों ने बाल बोध प्रथम, द्वितीय, भक्तामर, तत्त्वार्थ सूत्र, छहढाला, द्रव्य संग्रह, रत्नकरण श्रावकाचार की विषयवार कक्षाओं में शिविरार्थियों को विषयवार शिक्षा प्रदान की गई। स्वयं मुनिश्री विबोध सागर महाराज ने रत्नकरण श्रावकाचार की कक्षा का संचालन करते हुए शिक्षण प्रदान किया। शाम को मुनिश्री विलोक सागर जी महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम में लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।</p>
<p><strong>कार्यों की सफलता के लिए उमंग और उत्साह चाहिए</strong></p>
<p>सांसारिक जीवन में कोई भी कार्य बगैर विघ्न के पूरा नहीं होता है। अनुशासन एवं विधि विधान से किए गए सभी कार्य सफल होते है। सभी कार्यों की सफलता के लिए समर्पण, उत्साह और उमंग की आवश्यकता होती है। उमंग और उत्साह के साथ किए गए सभी कार्य सफल होते हैं।</p>
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		<title>22 मई को होगी तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता:  भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित होंगे प्रश्न </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/tirthankar_mahavir_quiz_competition_will_be_held_on_22nd_may/</link>
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		<pubDate>Wed, 21 May 2025 11:44:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के बड़े जैन मंदिर में विराजमान मुनिराज विलोक सागर एवं विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य में गुरुवार 22 मई को शाम 7 से 8 बजे तक बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है। जिसमें लगभग 400 से अधिक प्रतियोगियों के सम्मिलित होने की संभावना है। मुरैना से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के बड़े जैन मंदिर में विराजमान मुनिराज विलोक सागर एवं विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य में गुरुवार 22 मई को शाम 7 से 8 बजे तक बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है। जिसमें लगभग 400 से अधिक प्रतियोगियों के सम्मिलित होने की संभावना है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के व्यक्तित्व से प्रत्येक व्यक्ति को परिचित होना चाहिए। भगवान महावीर कोई साधारण पुरुष नहीं थे, उन्होंने अपने तपोबल एवं सिद्धांतों का पालनकर संयम के मार्ग को अपनाते हुए मोक्ष प्राप्त किया था। वे सदैव सत्य अहिंसा, शाकाहार एवं जियो और जीने दो का उपदेश देकर प्राणी मात्र को स्वयं के कल्याण का मार्ग बताते थे। नगर के बड़े जैन मंदिर में विराजमान मुनिराज विलोक सागर एवं विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य में गुरुवार 22 मई को शाम 7 से 8 बजे तक बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर महावीर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है।</p>
<p>जिसमें लगभग 400 से अधिक प्रतियोगियों के सम्मिलित होने की संभावना है। प्रतियोगिता के संयोजक डॉ. मनोज जैन ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित प्रतियोगिता बड़े जैन मंदिर में होने जा रही है। जिसमें जैन-अजैन सभी व्यक्ति सहभागिता प्रदान करेंगे। प्रतियोगिता का उद्देश्य आमजन को भगवान महावीर के जीवन चरित्र एवं सिद्धांतों से अवगत कराना है। परीक्षा के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लगभग 100 प्रतियोगियों को अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी, महेंद्र जैन एडवोकेट रवींद्र जैन गोसपुर, पंकज जैन मेडिकल, प्रेमचंद जैन बंदना साड़ी, राकेश जैन टायर वाले, डालचंद जैन एवं अन्य समाजसेवियों के सहयोग से पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।</p>
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		<title>विश्व कल्याण की कामना श्री सिद्धचक्र विधान का समापन: महायज्ञ कर निकाली श्रीजी पालकी शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Sun, 11 May 2025 10:11:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य आचार्यश्री आर्जवसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के पावन सानिध्य में नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। जैन संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन में विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने विधान की सभी क्रियाओं को संपन्न कराया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-80698" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />कार्यक्रम के दौरान 4 मई से 10 मई तक प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान के मध्य पूज्य मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। शाम को महाआरती, गुरु भक्ति, शास्त्रसभा के साथ स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रविवार को विधान के अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। विधान के पुण्यार्जक मुन्नालाल, राकेशकुमार, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार परिवार के पुण्य की सभी ने अनुमोदना की। विधान के समापन पर विराजमान युगल मुनिराजों ने सभी को धर्म वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>विश्व शांति महायज्ञ में दी आहुति</strong></p>
<p>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर सम्पूर्ण विश्व में शांति हो, सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो। ऐसी पवित्र एवं पावन भावना के साथ विश्व शांति महायज्ञ किया गया। विधान के प्रतिष्ठा निर्देशक पंडित महेन्द्रकुमार शास्त्री एवं विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ की क्रियाओं को संपन्न कराया। महायज्ञ के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने श्री जिनेंद्र प्रभु से कामना की कि हे! प्रभु इस संसार के सभी जीव सुखी हों, संपूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होकर शांति स्थापित हो। संसार के सभी जीवों का कल्याण हो। सभी साधर्मी बंधुओं, माताओं ने महायज्ञ में आहुति दी।</p>
<p><strong>श्री जिनेंद्र प्रभु की निकली भव्य पालकी शोभायात्रा</strong></p>
<p>विधान के अंतिम दिन आज श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। भगवान जी की प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। चार इंद्र नालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे । भव्य श्री जी शोभायात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में श्री जिनेंद्र प्रभु की आरती उतारकर साधर्मी बंधुओं ने अगवानी की। महिलाएं भक्ति भाव के साथ भक्तिपूर्ण नृत्य कर रही थीं और पुरुष वर्ग भगवान महावीर की जय जयकार करता हुआ चल रहा था। बड़े जैन मंदिर में श्री जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर जलाभिषेक किए गए। सौधर्म इंद्र ने कलश से जैसे ही जल धारा प्रभु के सिर पर ढारी, वैसे ही सम्पूर्ण पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सभी ने हर्ष ध्वनि के साथ जयकारा लगाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया।</p>
<p><strong>युगल मुनिराजों के प्रतिदिन हुए प्रवचन</strong></p>
<p>विधान के दौरान निरंतर आठ दिन सिद्ध परमेष्ठि की पूजा भक्ति, आराधना की गई। इस दौरान प्रतिदिन युगल मुनिराजों के प्रवचन हुए । विराजमान दिगंबर जैन मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित जन समूह को जीवन जीने की कला सिखाते हुए, सत्य अहिंसा का उपदेश दिया।</p>
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		<title>धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है: रविवार से जैन मंदिर में चल रहा है सिद्धचक्र विधान </title>
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		<pubDate>Mon, 05 May 2025 12:04:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में चल रहा है। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में चल रहा है। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर रहे हैं। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सांसारिक प्राणी को सदैव धार्मिक अनुष्ठान करते रहना चाहिए। धार्मिक क्रियाओं से पुण्य की उत्पत्ति होती है और पुण्य से पापों का क्षय होता है। अपने इष्ट का ध्यान, जप, पूजन करने से सुखों की प्राप्ति के साथ मन की शांति प्राप्त होती है। जहां धर्म होता है, जो लोग धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हैं, वहां धर्म उनकी रक्षा करता है। पुण्य से ही व्यक्ति धनवान और ऐश्वर्यवान बनता है। धर्मात्मा व्यक्ति अपने भावों को शुद्ध रखता हुआ अपने चित्त को शुभता की ओर लगता है। उसके हृदय में सदैव शुभ भाव उत्पन्न होते है। इसलिए हमें सदैव पुण्य का अर्जन करना चाहिए। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान बड़े जैन मंदिर मुरैना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज एवं आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के आशीर्वाद से आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सानिध्य एवं संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन एवं प्रतिष्ठाचार्य राजेंद्र शास्त्री मगरौनी के आचार्यत्व में आठ दिवसीय सिद्धों की आराधना की जा रही है। विधान के प्रथम दिन 8, द्वितीय दिन 16, तृतीय दिन 32, चतुर्थ दिन 64, पांचवंे दिन 128, छठवें दिन 256, सातवें दिन 512 एवं अंतिम दिन 1024 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>प्रतिदिन होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम </strong></p>
<p>पुण्यार्जक परिवार मुन्नालाल, राकेशकुमार, रोबिन जैन, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार जैन परिवार की ओर से 4 मई से प्रारंभ हुए श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ में 5 से 10 मई तक प्रतिदिन प्रातः 5.30 बजे जाप, 5.55 बजे अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, 7.40 बजे से विधान, 8.30 बजे मुनिश्री के प्रवचन, शाम 07.30 बजे गुरु भक्ति, आरती, 8.30 बजे शास्त्र सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। भजन गायक एवं संगीतकार स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद प्रतिदिन संगीतमय गुरु भक्ति, महाआरती एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेगी। अंतिम दिन 11 मई को प्रातः विश्व शांति महायज्ञ होगा। महायज्ञ में सभी लोग विश्व शांति की कामना के साथ अग्निकुंड में आहुति देंगे। विधान समापन पर श्री जिनेंद्र प्रभु के कलषाभिषेक, सम्मान समारोह और वात्सल्य भोज का आयोजन रखा गया है।</p>
<p><strong>मैना सुंदरी ने कराया था सिद्धचक्र महामंडल विधान</strong></p>
<p>जैन सिद्धांतों के अनुसार मैनासुंदरी के पति श्रीपाल को कोढ़ की बीमारी थी। दिगंबर मुनिराज के उपदेशानुसार मैना सुंदरी ने आठ दिवसीय सिद्धचक्र महा मंडल विधान करते हुए सिद्धों की भक्ति करते हुए आठ दिन में 1024 अर्घ्य समर्पित किए थे और प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक का गंधोदक अपने कोढ़ी पति को लगाया था। जिससे उसके पति एवं अन्य लोगों का कोढ़ समाप्त हुआ था। तभी से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का महत्व माना जाने लगा है। इसे विधानों का राजा भी कहा जाता है।</p>
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		<title>मानव जीवन में भावों का विशेष महत्व : 11 मई तक होगी सिद्धों की आराधना </title>
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		<pubDate>Sun, 04 May 2025 12:03:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के सानिध्य में बड़ा जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 11 मई तक होने जा रहा है। प्रतिष्ठाचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, राजेंद्र जैन शास्त्री मंगरोनी ग्वालियर के आचार्यत्व में विधान का शुभारंभ हुआ। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। मानव जीवन में भावों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के सानिध्य में बड़ा जैन मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 11 मई तक होने जा रहा है। प्रतिष्ठाचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, राजेंद्र जैन शास्त्री मंगरोनी ग्वालियर के आचार्यत्व में विधान का शुभारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मानव जीवन में भावों का विशेष महत्व होता है। हमारे मन में हजारों भाव प्रतिदिन आते-जाते रहते हैं। भाव अच्छे भी आते हैं। भाव बुरे भी आते हैं। अच्छे भाव कम आते हैं। बुरे भाव ज्यादा आते हैं। यदि कोई अच्छा कार्य करने का भाव मन में आ भी जाए तो उसे क्रियान्वित करने में काफी अड़चनें आती हैं। कोई भी धार्मिक आयोजन विधान आदि कोई धर्मी, भाग्यशाली व्यक्ति ही कर सकता है। अधर्मी व्यक्ति तो कोई बहाना बनाकर भाग खड़ा होता है। अच्छे कार्य को पूर्ण करने में विघ्न बाधाएं आ सकती हैं। हमें दृढ़ संकल्प के साथ उन विघ्न बाधाओं को पार करते हुए अपने कार्य को पूर्ण करना चाहिए। यह उद्गार श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में दिगम्बर मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के पावन अवसर परमुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र विधान विधानों का राजा कहलाता है। प्रत्येक जैन प्राणी को अपने जीवन काल में एक बार अवश्य ही सिद्धचक्र विधान कराना चाहिए। भाव पूर्वक सिद्धों की आराधना करने से पापों का क्षय होता है। सांसारिक कष्टों का नाश होता है। वैसे तो कोई भी धार्मिक अनुष्ठान विधान आदि से मन को शांति मिलती है और शुभ परिणामों की उत्पत्ति होती है। इसलिए हमें सदैव शुभ परिणामों के साथ धार्मिक पूजा, पाठ, अनुष्ठान आदि करते रहना चाहिए।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-80321" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250504-WA0021-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />गुरुभक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे</strong></p>
<p>दिगंबराचार्य श्री आर्ज़वसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सान्निध्य में बड़ा जैन मंदिर में रविवार से आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान 11 मई तक होने जा रहा है। प्रतिष्ठाचार्य महेन्द्रकुमार शास्त्री, राजेंद्र जैन शास्त्री मंगरोनी ग्वालियर के आचार्यत्व में आज विधान का शुभारंभ हुआ। घटयात्रा एवं पचरंगी ध्वजारोहण के साथ विधान का शुभारंभ हुआ। भूमि शुद्धि, पंडाल शुद्धि, मंडप शुद्धि, सकलीकरण आदि सभी कार्यक्रम हुए। रात्रि को शास्त्र सभा, गुरुभक्ति, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं आरती होगी।</p>
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