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	<title>मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी में मना जन्म-तप कल्याणक महोत्सव : आगरा नगर में निकली भगवान की भव्य रथयात्रा </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 14:19:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में गुरुवार को जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। यह पावन आयोजन मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में हुआ। महोत्सव के अवसर पर सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भगवान आदिनाथ के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा। प्रातःकाल कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ के अभिषेक, शांतिधारा और नित्य-नियम पूजन गाजे-बाजे श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से पूजन-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया।इसके बाद भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को सुसज्जित रथ में विराजमान कर रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा का शुभारंभ विधायक विजय शिवहरे द्वारा हरी झंडी दिखाकर किया गया। गाजे-बाजे, ध्वज-पताकाओं, भक्ति गीतों और भगवान के जयकारों के साथ निकली इस शोभायात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया।</p>
<p><strong>आकर्षक झांकियां रही शामिल</strong></p>
<p>रथयात्रा में भगवान आदिनाथ के जीवन प्रसंगों पर आधारित एक दर्जन से अधिक आकर्षक झांकियां शामिल रहीं।बजिन्होंने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।त्रिशला महिला मंडल की महिलाओं ने रथयात्रा के दौरान भक्ति भाव से नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ा दिया।शोभायात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए और पूरे उत्साह के साथ भगवान के जयकारे लगाते हुए यात्रा में शामिल रहे।</p>
<p><strong>रथयात्रा का हुआ भव्य स्वागत</strong></p>
<p>यह भव्य रथयात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर पुलिस लाइन रोड, साईं की तकिया चौराहा,कलेक्ट्रेट, स्टेट बैंक, अरिहंत मार्केट,टंकी वाले जैन मंदिर, छीपीटोला चौराहा,कीर्ति स्तंभ, पल्ला मार्केट,ढाकरन चौराहा,नाई की मंडी और सुभाष पार्क होते हुए पुनः नॉर्थ ईदगाह जैन मंदिर पहुंची। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और नगरवासियों द्वारा शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया गया। विशेष रूप से छीपीटोला जैन समाज द्वारा यात्रा का अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया गया।</p>
<p><strong>1008 स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>मंदिर पहुंचने के पश्चात नॉर्थ ईदगाह जैन समाज के तत्वावधान में मुनिश्री की विशाल धर्मसभा आयोजित की गई।कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन और चित्र अनावरण के साथ हुआ।अपने मंगल प्रवचनों में मुनिश्री ने भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि भगवान आदिनाथ ने मानव जीवन को धर्म,संयम और आत्मकल्याण की दिशा प्रदान की। उनके उपदेश आज भी समाज को सत्य, अहिंसा और त्याग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। इसके पश्चात मुनिसंघ एवं बाल ब्रह्मचारी नितिन भैया जी के कुशल निर्देशन में सौभाग्यशाली भक्तों द्वारा भगवान आदिनाथ की प्रतिमा का 1008 स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक संपन्न कराया गया।</p>
<p><strong>मुनिश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित</strong></p>
<p>इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत हो उठा। कार्यक्रम के अंत में अपार समग्र जैन समाज ने मुनिश्री के समक्ष श्रीफल अर्पित कर उनके चरणों में बैठकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। सायंकाल धर्मसभा, आशीर्वचन तथा स्वागत-सम्मान कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।जन्म-तप कल्याणक महोत्सव के इस भव्य आयोजन ने आगरा नगर में जैन समाज की एकता, श्रद्धा और धार्मिक आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।इस कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल द्वारा किया गया।</p>
<p><strong>यह समाज जन रहे मौजूद</strong></p>
<p>इस अवसर पर मंदिर के अध्यक्ष राजेश जैन सेठी,मंत्री अशोक जैन,निर्मल जैन मोठया, मनोज जैन बाकलीवाल हीरालाल बैनाड़ा,अमित जैन बॉबी,अजय जैन, संजीव जैन,राजेश जैन बल्ले, जगदीश प्रसाद जैन,राकेश जैन पर्देवाले,मनीष जैन ठेकेदार,सुनील जैन ठेकेदार,मनोज जैन बल्लो, मीडिया प्रभारी शुभम जैन,विमल जैन,रूचि जैन,पूजा जैन,शालू जैन, डेजी जैन,सरिता जैन,अर्चना जैन, रिंकी जैन,समस्त नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी एवं छीपीटोला जैन समाज के अलावा समग्र आगरा जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में सम्मिलित हुआ।</p>
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		<title>अपने-अपने कर्मों का फल सबको मिलता है कुछ इस भव में तो कुछ परभव में: मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने कर्म गति की महत्ता पर दिया जोर </title>
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		<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 09:46:27 +0000</pubDate>
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<p><strong>मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर से न डरे लेकिन, कर्मों से बचकर रहना चाहिए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़े जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सांसारिक प्राणी को अपने कर्मों के परिणामों से डरना चाहिए। भले ही वह ईश्वर से न डरे लेकिन, कर्मों से बचकर रहना चाहिए। कहते है कि भगवान बहुत दयालु हैं और माफ़ कर सकते हैं, लेकिन कर्मों के फल अवश्य मिलते हैं और वे किसी को भी माफ नहीं करते। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति जैसे कर्म करता है, उसे उसी प्रकार के परिणामों की प्राप्ति होती है। अच्छे कर्मों से अच्छे और बुरे कर्मों से बुरे परिणामों की प्राप्ति होती है। जैन दर्शन के अनुसार कर्म एक जटिल सिद्धांत है और इन कर्मों के बंधन से मुक्त होने के लिए जप तप भक्ति पूजन के साथ आचरण की शुद्धता और आत्म-नियंत्रण आवश्यक है। जैन दर्शन का कर्म सिद्धांत बताता है कि सभी जीव कर्मों से बंधे हैं जो सूक्ष्म भौतिक कणों के रूप में होते हैं और आत्मा से जुड़ते हैं। जिससे जीव का भविष्य निर्धारित होता है।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-91301" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/09/IMG-20250929-WA0036-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /> जैन धर्म में कर्म सिद्धांत ईश्वर पर आधारित नहीं</strong></p>
<p>इन कर्मों के प्रभाव से ही जीवन में सुख-दुख, जन्म और शरीर का स्वरूप तय होता है। इस बंधन से मुक्ति के लिए जैन दर्शन तीन रत्नों सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का पालन करने के सिद्धांत पर बल देता है। जिसके माध्यम से कर्मों का क्षय करके आत्मा मोक्ष मार्ग की ओर गमन करती है। जैन धर्म में कर्म सिद्धांत ईश्वर पर आधारित न होकर व्यक्तिगत उत्तरदायित्व पर बल देता है। आत्मा अपने कर्मों के बंधन से स्वयं ही मुक्त हो सकती है और तपस्या, नैतिक आचरण और अहिंसा का पालन और संयम के मार्ग पर चलते हुए कर्मों का क्षय किया जा सकता है।</p>
<p><strong>मुनिश्री विबोधसागर ने समझाया कर्म सिद्धांत</strong></p>
<p>धर्म सभा में जैन संत मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने कर्म सिद्धांत को समझाते हुए बताया कि कर्मफल वह सिद्धांत है। जिसके अनुसार किए गए हर कर्म का फल अवश्य मिलता है। अच्छे कर्मों का अच्छा फल और बुरे कर्मों का बुरा फल मिलता है। निश्चित नहीं है कि कर्मों का फल कब मिलेगा लेकिन, मिलेगा जरूर। कुछ कर्मों का परिणाम तुरंत मिल जाता है कुछ का अगले जन्म में या भविष्य में कभी भी मिल सकता है। सभी धर्मों में कर्म फल की व्याख्या की गई है। मनुष्य अपने कर्मों से बच नहीं सकता और प्रकृति का यह एक अटल नियम है कि जैसा कर्म वैसा फल मिलता है। जैन दर्शन के अनुसार, कर्म आठ प्रकार के होते हैं जो आत्मा को संसार में बांधते हैं. ये कर्म ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयुकर्म, नामकर्म, गोत्रकर्म और अन्तरायकर्म हैं ये सूक्ष्म भौतिक कण (पुद्गल) हैं जो आत्मा से जुड़कर विभिन्न अनुभवों और परिस्थितियों का कारण बनते हैं और आत्मा को मोक्ष प्राप्त होने तक जन्म-मरण के चक्र में फंसाए रखते हैं।</p>
<p><strong>कर्म सिद्धांत प्रकृति का अटल सत्य</strong></p>
<p>युगल मुनिराजों ने बताया कि कर्म का फल, कर्मफल सिद्धांत का एक हिस्सा है। जिसका अर्थ है कि व्यक्ति को अपने किए गए कर्मों के अनुसार ही फल या परिणाम मिलता है। अच्छे कर्म सुख और समृद्धि लाते हैं, जबकि बुरे कर्म दुख और कष्ट का कारण बनते हैं। यह प्रकृति का एक अटल नियम है। मनुष्य अपने द्वारा किए गए कर्मों का फल, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, उसे निश्चित रूप से भोगना ही पड़ता है। यह प्रकृति का एक अटल और स्थायी नियम है। जिससे कोई भी बच नहीं सकता। अच्छे कर्म सुख, शांति, यश और मान- सम्मान प्रदान करते हैं जबकि, बुरे कर्म दुख, दरिद्रता और अपमान का कारण बनते हैं। कर्मों का फल मिलने के लिए एक सही समय और संयोग का बनना ज़रूरी होता है। कर्मफल का प्रभाव केवल इसी जन्म तक सीमित नहीं रहता है बल्कि यह अगले जन्मों तक भी पहुंच सकता है। अपने भविष्य और परिणामों को बेहतर बनाने के लिए व्यक्ति को हमेशा अपने वर्तमान कर्मों पर ध्यान देना चाहिए और अच्छे कर्म करने का प्रयास करना चाहिए।</p>
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		<title>भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक एवं रक्षाबंधन विधान 9 अगस्त को: रक्षा बंधन विधान में 700 अर्घ्य होंगे समर्पित  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/lord_shreyansnath_moksha_kalyanak_and_rakshabandhan_vidhan_on_9th_august/</link>
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		<pubDate>Fri, 08 Aug 2025 08:56:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। नगर के बड़े जैन मंदिर में आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित आचार्यश्री आर्जवसागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज का 2025 का आध्यात्मिक पावन वर्षायोग धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। शनिवार 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन मुनिराजों के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन बेला में 6 बजे श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं अष्टद्रव्य से पूजन किया जाएगा। इसके बाद 7 बजे रक्षाबंधन विधान होगा। जिसमें मुनि विष्णुकुमार एवं अन्य 700 मुनिराजों की पूजा-अर्चना करते हुए 700 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। प्रातः 8.30 बजे युगल मुनिराजों के प्रवचन होंगे। प्रवचनों के बाद भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी का निर्वाण लाड़ू अर्पित होगा। मुनिराजों द्वारा रक्षा सूत्रों का वितरण भी होगा।</p>
<p><strong>भजन भक्ति के साथ होंगे सभी विधान </strong></p>
<p>भगवान श्रेयांसनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव एवं रक्षाबंधन विधान के लिए सागर से प्रतिष्ठाचार्य पंडित पवनकुमार शास्त्री दीवान मुरैना आए हुए हैं। विधानाचार्य दीवानजी विधान सहित सभी कार्यक्रमों को मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न कराएंगे। इस अवसर पर संघस्थ ब्रह्मचारी राहुल भैयाजी गंज बासौदा, चक्रेश शास्त्री मुरैना, संजय शास्त्री सिहोनिया, नवनीत शास्त्री मुरैना एवं अन्य विद्वान, त्यागीवृति विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में भजन गायक एवं संगीतकार मनीष जैन एंड पार्टी द्वारा विशेष प्रस्तुति दी जाएगी।</p>
<p><strong>निर्वाण कांड निर्वाण कांड का वाचन होगा  </strong></p>
<p>रक्षाबंधन वाले दिन जैन धर्म के तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव धार्मिक उत्साह से मनाया जाएगा। इस अवसर पर जैन मंदिरों में सभी श्रावक एवं श्राविकाएं भगवान श्रेयांसनाथ का विशेष पूजन एवं भक्ति करते हुए उनकी उपासना करेंगे। सभी लोग एक साथ भक्ति एवं श्रद्धा के साथ निर्वाण कांड निर्वाण कांड का वाचन करते हुए, मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ निर्वाण लाड़ू समर्पित करेंगे। सभी भक्तगण महामंत्र नमोकार का जाप एवं जिनेंद्र प्रभु की स्तुति करते हुए भक्ति भाव के साथ पूजन अर्चन करेंगे।</p>
<p><strong>भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है रक्षाबंधन </strong></p>
<p>जैन संत मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने बताया कि पौराणिक काल में अकंपनाचार्य के नेतृत्व में 700 जैन मुनियों का एक संघ हस्तिनापुर पहुंचा। राजा बलि ने उन पर उपसर्ग किया। जिससे मुनियों को कष्ट होने लगा। मुनि विष्णुकुमार ने वामन का रूप धारण कर बलि से तीन पग भूमि मांगी और तीन पग में ही सारा संसार नापकर मुनियों की रक्षा की। इस घटना को जैन धर्म में रक्षा बंधन के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म में रक्षा बंधन न केवल भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है, बल्कि यह राष्ट्र, धर्म, और समाज की रक्षा का भी संकल्प लेने का दिन है। इस दिन, जैन धर्मावलंबी मंदिर जाते हैं, मुनि विष्णु कुमार और 700 मुनियों की पूजा करते हैं और एक-दूसरे को राखी बांधकर एक-दूसरे की रक्षा एवं देश, धर्म, संस्कृति, साधु संतों की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।</p>
<p><strong>जैन संस्कृत विद्यालय में होगा शांतिनाथ विधान का समापन </strong></p>
<p>नगर के श्री गोपाल दिगंबर जैन संस्कृत महाविद्यालय में मुनिराजों के पावन सान्निध्य एवं विधानाचार्य पंडित चक्रेश शास्त्री के आचार्यत्व में श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में सोलह दिवसीय विधान का आयोजन चल रहा है। शनिवार 9 अगस्त को विधान के अंतिम दिन विश्व शांति महायज्ञ के आयोजन के साथ ही सोलह दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान का समापन होगा।</p>
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		<title>तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी 3 अगस्त को होगी: प्रतियोगिता में 8 से 90 वर्ष तक के धर्मानुरागी हो सकेंगे शामिल  </title>
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		<pubDate>Sat, 02 Aug 2025 08:54:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगिता मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से उन्हीं के सान्निध्य में आयोजित की जा रही है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। जैन धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगिता मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से उन्हीं के सान्निध्य में आयोजित की जा रही है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होने जा रही है। प्रतियोगिता संयोजक डॉ. मनोज जैन एवं विमल जैन बघपुरा ने बताया कि मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से उन्हीं के सान्निध्य में प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता के माध्यम से आजकल के युवाओं में धर्म के प्रति ललक पैदा करना ही इसका उद्देश्य है। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के आयोजकों के अनुसार बड़ा जैन मंदिर में चातुर्मासरत युगल मुनिराजों के निर्देशन में तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन शाम 6.30 से 7.30 बजे तक होगा। इस धार्मिक ज्ञान प्रतियोगिता में 8 से लेकर 90 वर्ष तक के सभी धर्मानुरागी बंधुगण माताएं बहनें भाग ले सकेंगी। भगवान आदिनाथ एवं भगवान पारसनाथ के जीवन चरित्र पर आधारित इस प्रतियोगिता में 150 प्रश्न होंगे। जिनका जवाब देना होगा। जिसमें से प्रश्नोत्तरी में 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रतियोगिता में 100 में से 100 अंक लाने वाले प्रतियोगियों को चांदी की माला से सम्मानित किया जाएगा एवं 90 अंक अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले सभी प्रतियोगियों को सांत्वना पुरस्कार दिया जाएगा।</p>
<p>तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता को संपन्न करवाने के लिए संयोजक डॉ. मनोज जैन (प्रोफेसर), सह संयोजक विमल जैन बघपुरा, विद्वत नवनीत शास्त्री, एडवोकेट दिनेश जैन वरैया, राकेश जैन शास्त्री परिवार, सजल जैन बरहाना, अनिल नायक गढ़ी, अजय जैन गोसपुर अथक सहयोग कर रहे हैं। प्रश्नोत्तरी पुण्यार्जक चेतनमाला, सुप्रिया, देवदत्त जैन मुरैना होगें और रेखा संजय जैन मुरैना एवं लालजीराम लखमीचंद जैन बानमौर की ओर से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।</p>
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		<title>आदिनाथ पार्श्वनाथ प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को: मुनिराज का धर्म प्रभावना के लिए अनोखा प्रयोग </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 12 Jul 2025 14:30:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होगी। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के उद्देश्यों के बारे कहा कि हम जिस भी धर्म को मानते हैं अथवा जिस भी इष्ट का पूजन भक्ति आराधना करते है, उनके जीवन चरित्र से, उनके [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होगी। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के उद्देश्यों के बारे कहा कि हम जिस भी धर्म को मानते हैं अथवा जिस भी इष्ट का पूजन भक्ति आराधना करते है, उनके जीवन चरित्र से, उनके व्यक्तित्व से उनके कृतित्व से हमें भलीभांति परिचित होना चाहिए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ एवं 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता 3 अगस्त को आयोजित होगी। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हम जिस भी धर्म को मानते हैं अथवा जिस भी इष्ट का पूजन भक्ति आराधना करते है, उनके जीवन चरित्र से, उनके व्यक्तित्व से उनके कृतित्व से हमें भलीभांति परिचित होना चाहिए। ताकि हम अपनी संस्कृति का एक अच्छे तरीके से प्रचार प्रसार कर सकें। जब हमें अपने तीर्थंकरों के संबंध में जानकारी होगी, तभी हम अन्य किसी भी व्यक्ति को उनके संबंध में कुछ बता सकते हैं। इसलिए ही इस तरह की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिएं हो रही है और ऐसी प्रतियोगिता में हर उम्र के बंधुओं, माता बहनों को भाग लेना चाहिए, ताकि आप अपनी संस्कृति से भलीभांति परिचित हो सकें।</p>
<p>इस प्रतियोगिता के माध्यम से आजकल के युवाओं में धर्म के प्रति ललक पैदा करना ही इसका उद्देश्य है। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता संयोजक डॉ. मनोज जैन एवं सह संयोजक विमल जैन बघपुरा ने बताया कि नगर के बड़ा जैन मंदिर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागरजी एवं मुनिश्री विबोधसागरजी की पावन प्रेरणा एवं आशीर्वाद से तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन बड़े जैन मंदिरजी में 3 अगस्त को शाम 6.30 से 7.30 बजे तक होने जा रहा है।</p>
<p><strong>इसमें यह हो सकते हैं भागीदार </strong></p>
<p>इस धार्मिक ज्ञान प्रतियोगिता में 8 वर्ष से लेकर 90 वर्ष तक के सभी धर्मानुरागी बंधु,़ माताएं बहनें भाग ले सकेंगी। भगवान आदिनाथ एवं भगवान पारसनाथ के जीवन चरित्र पर आधारित इस प्रतियोगिता में 150 प्रश्नों की एक प्रश्नोत्तरी तैयार की गई है। जिसमें से प्रश्नोत्तरी में 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रतियोगिता में 100 में से 100 अंक लाने वाले प्रतियोगियों को चांदी की माला से सम्मानित किया जाएगा एवं 90 अंक अथवा उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले सभी प्रतियोगियों को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता के लिए पंजीयन जरूरी </strong></p>
<p>जो भी साधर्मी बंधु इस प्रतियोगिता में सम्मिलित होना चाहते हैं वे प्रश्नोत्तरी पत्रक बड़े जैन मंदिर से प्राप्त कर सकते हैं। सभी प्रतियोगियों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक है, तभी उन्हें प्रश्नोत्तरी प्राप्त होगी। प्रश्नोत्तरी आपको ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यम से उपलब्ध रहेगी। जिसके माध्यम से आप घर बैठे अपनी तैयारी कर सकते हैं।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता संचालन समिति का गठन</strong></p>
<p>तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता की व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए एक समिति का गठन किया गया है। जिसमें संयोजक डॉ. मनोज जैन (प्रोफेसर), सह संयोजक विमल जैन बघपुरा, नवनीत शास्त्री, एडवोकेट दिनेश जैन वरैया, राकेश जैन शास्त्री परिवार, सजल जैन बरहाना, अनिल नायक गढ़ी, अजय जैन गोसपुर को बनाया गया है। प्रश्नोत्तरी पुण्यार्जक चेतन माला, सुप्रिया, देवदत्त जैन मुरैना होंगे और रेखा संजय जैन मुरैना एवं लालजीराम लखमीचंद जैन बानमौर की ओर से पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।</p>
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		<title>प्राणी के कल्याण की भावना रखने वाला ही कहलाता है संत: मुनिश्री विलोक सागरजी ने धर्मसभा में बताए आत्म कल्याण के रहस्य </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Jun 2025 12:53:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साधु, संत, महात्मा किसी धर्म विशेष के नहीं होते। सच्चे अर्थों में साधु संत वही है जो जन कल्याण की भावना रखते हैं। साधु कोई भी हो वह स्वयं कल्याण की भावना रखता है और अन्य जनमानस को आत्मकल्याण के लिए प्रेरित करता है। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>साधु, संत, महात्मा किसी धर्म विशेष के नहीं होते। सच्चे अर्थों में साधु संत वही है जो जन कल्याण की भावना रखते हैं। साधु कोई भी हो वह स्वयं कल्याण की भावना रखता है और अन्य जनमानस को आत्मकल्याण के लिए प्रेरित करता है। मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज ने मुरैना में धर्मसभा को संबोधित कर कई रहस्यों से पर्दा हटाया। समाजजनों ने उन्हें जिनवाणी भेंट की। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> साधु, संत, महात्मा किसी धर्म विशेष के नहीं होते। सच्चे अर्थों में साधु संत वही है जो जन कल्याण की भावना रखते हैं। साधु कोई भी हो वह स्वयं कल्याण की भावना रखता है और अन्य जनमानस को आत्मकल्याण के लिए प्रेरित करता है। प्राणी मात्र के लिए कल्याण की भावना रखने वाला ही साधु संत महात्मा कहलाने का हकदार है। यह उद्गार मुनिश्री विलोक सागरजी ने बड़ा जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें चिंतन करना चाहिए कि हम स्वयं के प्रति ईमानदार कैसे बनें। हम दूसरों के प्रति ईमानदार बन भी जाएं किंतु अपने प्रति ईमानदार नहीं बन पाते। हमें अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार रहना चाहिए, तब ही हम अपनी आत्मा का कल्याण कर सकते हैं। हम स्वयं के प्रति लापरवाह ज्यादा रहते हैं। गाड़ी चलाने वाला ड्राइवर जब गाड़ी चलाता है तो वह खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास करता है। जब वह खुद सुरक्षित होता है तब हमें भी सुरक्षित रूप में सकुशल अपनी मंजिल तक पहुंचता है। ठीक उसी तरह हम अपने प्रति ईमानदारी से जागरूक होगें तो हम दूसरों के प्रति भी जागरूक व ईमानदार रह पाएंगे।</p>
<p><strong>तीर्थंकर भगवन किसी से द्वेष की भावना नहीं रखते थे</strong><br />
मुनिश्री ने कहा कि जब संत महात्मा स्वयं के कल्याण की भावना रखते हैं तो वह जन जन का कल्याण भी करते हैं। सबकी अपनी अपनी पसंद होती है। तीर्थंकर भगवंतों के समय भी विरोधी लोग हुआ करते थे। उन्हें मानने वाले भी होते थे और उन्हें न मानने वाले भी हुआ करते थे लेकिन, तीर्थंकर भगवन किसी से द्वेष या विरोध की भावना नहीं रखते थे। वे सभी के साथ समता का भाव रखते हुए एक समान आशीर्वाद दिया करते थे। इसी प्रकार वर्तमान में भी हमें सबके प्रति समता का भाव रखना चाहिए, चाहे वह व्यक्ति हमारे पक्ष में हो या विपक्ष में हो। यही सच्चे साधु संतों एवं महापुरुषों की पहचान है । मानव जीवन भावनाओं और धारणाओं पर आधारित है</p>
<p><strong>जाकी रही भावना जैसी, उसने मूरत देखी वैसी</strong><br />
जैसी हमारी भावना होगी, वैसा ही हमारा मन हो जाएगा और वैसे ही विचारों की उत्पत्ति होगी। घर हो या समाज हम लोगों के प्रति गलत धारणाएं पाल लेते हैं और जैसी धारणाएं पाल लेते हैं वैसा ही सोचने और समझने लगते हैं। हमें सपने में भी वही दिखाई देता है कि फला व्यक्ति हमारी बुराई कर रहा है, हमें नीचा दिखाने का संणयंत्र रच रहा है। अरे भले आदमी जरा अच्छी धारणाएं पाल कर तो देख, अच्छा सोचकर तो देख ! हो सकता है सामने वाला आपका शुभचिंतक भी हो सकता है। इसलिए हमें घर, परिवार, समाज में रहते हुएच्ची सोच, अच्छे विचार, अच्छी धारणाओं के साथ जीवन यापन करना चाहिए।</p>
<p><strong>पाद प्रक्षालन कर मां जिनवाणी की भेंट</strong><br />
धर्म सभा के प्रारंभ में समाज के गणमान्य व्यक्तियों द्वारा आचार्य विद्यासागर महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलित किया। श्रेष्ठिवर्ग द्वारा पूज्य युगल मुनिराजों का पाद प्रक्षालन कर उनके कर कमलों में जिनवाणी भेंट कर सातिशय पुण्य अर्जन कर अपने मानव जीवन को धन्य बनाया।</p>
<p><strong>समाज बंधुओं ने विधान के लिए श्रीफल किया भेंट</strong><br />
जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में अष्टाहिंका पर्व के पावन अवसर पर आठ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान कराने के लिए साधर्मी बंधुओं एवं माता बहनों ने मुनिराजों को श्रीफल अर्पित किया। मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने विधान की स्वीकृति प्रदान करते हुए सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। मंदिर कमेटी ने विधान की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए अनूप जैन भंडारी को मुख्य संयोजक मनोनीत करने की घोषणा की।</p>
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