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	<title>मुनिश्री विबोध सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीर्थंकर नेमिनाथ का किया महामस्तकाभिषेक: निर्वाण लाड़ू के साथ निकली घटयात्रा </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 14:28:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिराजश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में भगवान नेमिनाथ का स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य पंकज जैन मेडिकल, अजय राजीव जैन टीटू को एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य अजयकुमार राजीव जैन गोसपुर, शैलेशकुमार अभिषेक जैन सोना क्रॉकरी, महावीरप्रसाद विमलकुमार [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिराजश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में भगवान नेमिनाथ का स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य पंकज जैन मेडिकल, अजय राजीव जैन टीटू को एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य अजयकुमार राजीव जैन गोसपुर, शैलेशकुमार अभिषेक जैन सोना क्रॉकरी, महावीरप्रसाद विमलकुमार बघपुरा, महेशचंद बनवारीलाल जैन को प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव मुनिराजों के सान्निध्य में उल्लास पूर्वक मनाते हुए निर्वाण लाड़ू समर्पित किया गया। मुनिराजश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विबोध सागर के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में भगवान नेमिनाथ का स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। प्रथम स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य पंकज जैन मेडिकल, अजय राजीव जैन टीटू को एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य अजयकुमार राजीव जैन गोसपुर, शैलेशकुमार अभिषेक जैन सोना क्रॉकरी, महावीरप्रसाद विमलकुमार बघपुरा, महेशचंद बनवारीलाल जैन को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर प्रथम निर्वाण लाड़ू समर्पित करने का सौभाग्य राजकुमार गौरव जैन सीए को प्राप्त हुआ। ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी एवं अजय भैयाजी (झापन वाले) के निर्देशन में भगवान नेमीनाथ स्वामी का अष्टद्रव्य से पूजन किया गया। भगवान नेमिनाथ निर्वाण कल्याणक पर जैन मंदिर में प्रातःकाल से ही जैन बंधुओं में भारी उत्साह देखा गया। सभी भक्तगण जैन भजनों पर भक्ति नृत्य कर तीर्थंकर नेमिनाथ की जय जयकार कर रहे थे।</p>
<p><strong>सिद्धचक्र विधान के पात्रों का हुआ चयन</strong></p>
<p>आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्व शांति महायज्ञ के प्रारंभ से पूर्व दिलीप जैन मधुवन दिल्ली द्वारा ध्वजारोहण किया गया। विधान के लिए सौधर्म इंद्र पवन कुमार सिद्धार्थ जैन, श्रीपाल मैना सुंदरी विमल शशि जैन बघपुरा, कुबेर इंद्र पंकज संगीता जैन मेडिकल, महा यज्ञनायक डालचंद निखिलकुमार बरहाना, यज्ञ नायक नेमीचंद ममता जैन ट्रांसपोर्ट, भरत चक्रवर्ती भागचंद मुकुल जैन, ईशान इंद्र मीना सुरेशचंद केशव कॉलोनी, सानत इंद्र बनवारीलाल महेशचंद जैन का चयन किया गया। सभी पात्रों को पूज्य गुरुदेव ने सभी पात्रों को शुभाशीष प्रदान किया। कार्यक्रम के मध्य पूज्य गुरुदेव मुनिश्री विलोकसागर महाराज के प्रवचन हुए। मुनिश्री ने अपने मंगल उद्वोधन में श्री सिद्धचक्र विधान के महत्व के संबंध में सभी बंधुओं को जानकारी दी। सभी साधर्मी बंधुओं को विधान में सम्मिलित होने बाबत प्रोत्साहित किया।</p>
<p><strong>आज से होगा विधान का शुभारंभ</strong></p>
<p>आज प्रातःकालीन वेला में मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज के पावन सान्निध्य में एवं बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी के आचार्यत्व में श्री सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ होगा। सर्वप्रथम पात्र शुद्धि, मंडप शुद्धि, पांडाल शुद्धि, भूमि शुद्धि के पश्चात श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य नियम पूजन किया जाएगा। सभी आवश्यक क्रियाओं के बाद विधान का पूजन आरंभ होगा। प्रथम दिन भक्तिभाव से सिद्धों की आराधना करते हुए 32 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे।</p>
<p><strong>घटयात्रा में महिलाओं ने की सहभागिता</strong></p>
<p>विधान के प्रारंभ से पूर्व मांगलिक क्रियाओं के तहत घटयात्रा निकाली गई। सौभाग्यशाली महिलाएं एवं कन्याएं अपने सिर पर मंगल कलश रखकर चल रहीं थी। मंगल कलश में मांगलिक बस्तुओं के साथ जल लाया गया। उसी जल से विधान स्थल की शुद्धि की जाएगी। विधान में सम्मिलित होने वाले सभी साधर्मी बंधुओं, माता बहनों को आयोजन समिति की ओर से साड़ियां, धोती, दुपट्टा, हार, मुकुट आदि सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। 3 जुलाई से शुरू होने जा रहे आठ दिवसीय अनुष्ठान में निरंतर आठ दिन सिद्ध परमेष्ठि की आराधना की जाएगी।</p>
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		<title>मुनिश्री विलोकसागर बोले- जहां एकता, भक्ति और समर्पण वहीं चातुर्मास: धर्मसभा में भक्ति और समर्पण को बताया श्रेष्ठ  </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Jun 2025 13:53:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का दीक्षा दिवस श्री महावीर दिगंबर जैन नसियाजी मंदिर में 30 जून को प्रातः 7.30 बजे से मनाया जाएगा। सभी भक्तगण अष्टदृव्य से आचार्य श्री का पूजन करेंगे। गुणानुवाद सभा भी होगी। मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज रविवार को नसियाजी जैन मंदिर पहुंचे। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का दीक्षा दिवस श्री महावीर दिगंबर जैन नसियाजी मंदिर में 30 जून को प्रातः 7.30 बजे से मनाया जाएगा। सभी भक्तगण अष्टदृव्य से आचार्य श्री का पूजन करेंगे। गुणानुवाद सभा भी होगी। मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज रविवार को नसियाजी जैन मंदिर पहुंचे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> साधु संत किसी समाज की या व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं होते। वे तो अविरल जल धारा की तरह होते हैं। साधु संतों के खासकर, दिगंबर साधुओं के कोई मठ या कोई निश्चित निवास नहीं होते। वे तो निरंतर पद विहार करते हुए धर्म प्रभावना करते हैं। दिगम्बर संत जहां भी भक्तों की भक्ति, समर्पण और समाज की एकता देखते हैं, वहीं अल्प प्रवास पर स्व कल्याण और प्राणी मात्र के कल्याण के लिए धर्म प्रभावना करते हैं। यह उद्गार मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने नसिया जी जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि केवल श्रीफल भेंट करने से चातुर्मास नहीं हुआ करते। चातुर्मास कराने के लिए भक्ति, समर्पण के साथ-साथ सामाजिक एकता का होना अति आवश्यक होता है। सामाजिक एकता के अभाव में कराया गया चातुर्मास सार्थक परिणाम नहीं देगा। हमारा भी चातुर्मास वहीं होगा, जहां की समाज में एकता होगी, भक्ति होगी और समर्पण होगा। मुनिश्री ने चातुर्मास के संबंध में कहा कि चातुर्मास के चार माह मन को पावन और पवित्र बनाने का समय होता है। बिखरे हुए समाज में ये सब होना संभव दिखाई नहीं पड़ता। अभी भी समय है, जाग जाओ, अन्यथा कहीं ऐसा न हो कि बाद में आपको पछताना पड़े।</p>
<p><strong>चित्र अनावरण और पाद प्रक्षालन किया </strong></p>
<p>धर्मसभा के प्रारंभ में आचार्यश्री विद्यासागर के चित्र का अनावरण जैन मित्र मंडल द्वारा एवं दीप प्रज्वलन फाटक बाहर जैन समाज के श्रावक श्रेष्ठियों द्वारा किया गया। मुनिराजों के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य वीरेंद्रकुमार जितेंद्रकुमार जैन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य रमाशंकर जैन, पदमचंद जैन तथा जैन मित्र मंडल को प्राप्त हुआ। मुनिराजों की आहारचर्या पवनकुमार ऋषभ जैन एवं पदमचंद गौरव जैन के यहां हुई।</p>
<p><strong>नसियाजी में होगा आचार्यश्री का दीक्षा दिवस समारोह</strong></p>
<p>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के मुख्य संयोजक अनूप जैन भंडारी ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का दीक्षा दिवस श्री महावीर दिगंबर जैन नसियांजी मंदिर में 30 जून को प्रातः 7.30 बजे से मनाया जाएगा। सभी भक्तगण अष्टदृव्य से आचार्य श्री का पूजन करेंगे। इस पावन अवसर पर गुणानुवाद सभा भी होगी। समारोह को सानिध्य प्रदान करने के लिए मुनिराजश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज रविवार को नसियाजी जैन मंदिर पहुंचे। नसिया जी में महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश रखकर, मंगलगीत गाते हुए मुनियों की अगवानी की। नसिया जी में रविवार को प्रातः प्रवचन एवं आहारचर्या हुई। आज प्रातः आचार्य विद्यासागर दीक्षा दिवस महोत्सव के उपलक्ष्य में गुणानुवाद सभा भी होगी।</p>
<p><strong>विहार के दौरान यह रहे मौजूद </strong></p>
<p>बड़े जैन मंदिर से नसियां जी जैन मंदिर लाने एवं ले जाने के समय जैन मित्र मंडल के सदस्यों का सहयोग सराहनीय रहा। विहार के समय जैन मित्र मंडल के मुख्य संयोजक सतेंद्र जैन खनेता, एडवोकेट धर्मेंद्र जैन, रविकांत जैन रिंकू, विमल जैन राजाखेड़ा, अशोक जैन मेडिकल, नितिन जैन बघपुरा, नरेश जैन टिल्लू, सुनील जैन, पंकज जैन, महेश जैन, विकास जैन, वीरेंद्र जैन, राजकुमार जैन, सुनीत जैन, प्रशांत जैन, शैलेन्द्र जैन, डॉक्टर मनोज जैन, डॉक्टर सतेंद्र जैन, प्रकाश जैन, पारस जैन सहित सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु उपस्थित थे।</p>
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