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	<title>मुनिश्री विबोधसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री विबोधसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पुण्य और पाप से ही संसार में होती है सुख दुख की प्राप्ति : मुनिश्री विलोकसागर जी के प्रवचनों में सुख दुःख पर चर्चा  </title>
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		<pubDate>Thu, 25 Sep 2025 04:31:13 +0000</pubDate>
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<p><strong>बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते हैं तो सुखों की अनुभूति होती है और जब बुरे कर्म उदय में आते हैं तब दुखों की अनुभूति होती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> मुरैना।</strong> बड़े जैन मंदिर में धर्म सभा के दौरान मुनिश्री विलोक सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक जीवन में सुख और दुख का चक्र घूमता रहता है। जब हमारे अच्छे कर्म उदय में आते हैं तो सुखों की अनुभूति होती है और जब बुरे कर्म उदय में आते हैं तब दुखों की अनुभूति होती है। पुण्य से अच्छे कर्म बनते हैं और पाप से बुरे कर्मों का बंध होता है। कहने का मतलब यह है कि अच्छे कार्यों को पुण्य और बुरे कार्यों को पाप कहा जाता है। जैन दर्शन के अनुसार, पुण्य अच्छे कर्मों को कहते हैं जो सुख लाते हैं और आत्मा को पवित्र करते हैं, जबकि पाप बुरे कर्मों को कहते हैं जो दुख का कारण बनते हैं और आत्मा को अपवित्र करते हैं। पापों में मुख्य रूप से पाँच अणुव्रत का उल्लंघन आता है, जैसे हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील और परिग्रह। पुण्य के लिए दान, सेवा और धर्म का पालन करना महत्वपूर्ण है। जैन धर्म का लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है। जिसमें पुण्य और पाप दोनों से ऊपर उठना होता है, क्योंकि ये दोनों ही आत्मा को संसार चक्र में बाँधते हैं। पुण्य वह है जो आत्मा को पवित्र करता है और सुख का कारण बनता है। दूसरों की सहायता करना, दान देना, सेवा करना और धर्म के सिद्धांतों का पालन करना शामिल है । भूखे को अन्न देना, प्यासे को पानी पिलाना, जरूरतमंदों को वस्त्र देना, या सभी जीवों के लिए मंगल कामना करना, परोपकारी कार्य करना भी पुण्य ही कहलाता है। पाप आत्मा को अपवित्र करता है और दुख का कारण बनता है। जैन दर्शन में हिंसा करना, झूठ बोलना, चोरी करना, ब्रह्मचर्य का पालन न करना, आवश्यकता से अधिक संचय करना पाप की श्रेणी में आते हैं। पुण्य और पाप दोनों ही कर्म हैं जो आत्मा से बंधे होते हैं। जैन धर्म का अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्त करना है, जो संसार के जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है। पुण्य और पाप के फल को भोगने के बाद ही आत्मा मोक्ष तक पहुँच पाती है। पुण्य को आत्मा की शुद्धि का माध्यम माना जाता है, जिससे अंततः मोक्ष प्राप्त होता है।</p>
<p><strong>आपके एक-एक पल का हिसाब लिखा जा रहा है</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनिश्री विबोधसागर महाराज’ ने कहा कि सांसारिक प्राणी बहुत होशियार और चालाक है। जब वह पुण्य करता है तो समझता है कि भगवान सब देख रहे हैं, लेकिन जब पाप करता है तो वह समझता है कि भगवान तो है ही नहीं, कोई कुछ नहीं देख रहा लेकिन मनुष्य यही भूल करता है। संसार में आपके पुण्य और पाप के अनुसार ही आपको सुख दुख की अनुभूति होती है। ऊपर वाले के यहां आपके एक-एक पल का हिसाब लिखा जा रहा है, जो आपको चुकाना ही होगा। उसमें कोई और सम्मिलित नहीं होगा, सिर्फ आप ही चुकता करोंगे, आप ही भुगतेंगे। इस लिए हे भव्य आत्माओं, मनुष्य जन्म मिला है तो अच्छे कर्म करिए, बुरे कर्मों का त्याग करिए । अच्छा सोचिए, अच्छा करिए, आपका सब मंगल मंगल होगा । बुरा सोचेंगे, बुरा करोगे तो आपका भी अमंगल अमंगल ही होगा।</p>
<p><strong> शुक्रवार को होगी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता</strong></p>
<p>प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के संयोजक डॉक्टर मनोज जैन एवं विमल जैन बबलू द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार परम पूज्य मुनिश्री विलोकसागर जी महाराज एवं मुनिश्री विबोध सागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में ज्ञान वर्धक पंच परमेष्ठी प्रतियोगिता का आयोजन 26 सितंबर शुक्रवार को शाम 6 बजे से पंचायती बड़ा जैन मंदिर मुरैना में किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता का रिजल्ट एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम 6 अक्टूबर 2025 शाम 6रू00 बजे से बड़े जैन मंदिर जी में होगा। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतियोगियों को पुण्यार्जक परिवार यतीन्द्रकुमार संजय रेखा जैन श्रीमती रेखा जैन नगर पालिका परिवार एवं लख्मीचंद लालजी राम जैन बामोर के सौजन्यवसे सम्मानित किया जाएगा। प्रश्नोत्तरी प्रदाता पुण्यार्जक परिवार मुन्नीदेवी, डॉ-मनोज अभिलाषा जैन हैं।</p>
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		<title>मंगल कलश स्थापना में उमड़ा जैन सैलाब : वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों का आध्यात्मिक आयोजन </title>
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		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 15:56:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों द्वारा किया जाने वाला एक आध्यात्मिक आयोजन है क्योंकि, साधुजन तो चतुर्दशी के दिन ही चातुर्मास प्रतिष्ठापन कर लेते हैं। मंगल कलश स्थापना का आयोजन नगर एवं समाज में प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से किया जाता है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों द्वारा किया जाने वाला एक आध्यात्मिक आयोजन है क्योंकि, साधुजन तो चतुर्दशी के दिन ही चातुर्मास प्रतिष्ठापन कर लेते हैं। मंगल कलश स्थापना का आयोजन नगर एवं समाज में प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से किया जाता है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> वर्षाकाल के चार माह एक ही स्थान पर रुककर अहिंसा धर्म का पालन करते हुए संयम की साधना करना, स्वाध्याय करना, आत्मकल्याण हेतु लोगों को प्रेरित करना एवं उपदेश देना, जप तप व्रत उपवास, अनुष्ठान करते हुए पापों का क्षय करना ही चातुर्मास कहलाता है। हमने भी वर्षाकाल के चार माह नगर में रुकने का संकल्प लिया है लेकिन, हमारी संयम की साधना में व्यवधान उत्पन्न होने अथवा आगम में वर्णित कथनों के विपरीत स्थितियां उत्पन्न होने की स्थिति में हम चारों दिशाओं में तीस-तीस किमी विहार कर सकते हैं। साधु संतों के साथ साथ श्रावकों को भी इन चार माह में आत्मकल्याण हेतु साधना, साधुओं की चर्या में सहभागिता एवं स्वाध्याय आदि करना चाहिए। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में चातुर्मासरत मुनिश्री विलोकसागर महाराज ने वर्षायोग कलश स्थापना दिवस पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस अवसर पर मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने कहा कि वर्षायोग कलश स्थापना श्रावकों द्वारा किया जाने वाला एक आध्यात्मिक आयोजन है क्योंकि, साधुजन तो चतुर्दशी के दिन ही चातुर्मास प्रतिष्ठापन कर लेते हैं। मंगल कलश स्थापना का आयोजन नगर एवं समाज में प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता के उद्देश्य से किया जाता है। श्रावकों द्वारा आयोजित इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जैन-अजैन सभी को वर्षायोग से जोड़ना होता है, ताकि सभी लोग वर्षाकाल के चार माह तक मुनिराजों की संयम साधना, आहार, विहार, वैयावृति एवं प्रवचन, स्वाध्याय के माध्यम से अपने कल्याण हेतु संयम मार्ग की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर सकें।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-85657" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0065-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />कलश स्थापित करने वाले पुण्यशाली श्रावक</strong></p>
<p>आध्यात्मिक पावन वर्षायोग समारोह में मुख्य प्रथम कलश प्रशांतकुमार दिव्यांश मोनू जैन (टायर वाले) एवं मुख्य द्वितीय कलश पवनकुमार सिद्धार्थ ध्रुव जैन (पोरसा वाले) को स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अन्य कलश प्रेमचंद पंकज जैन, प्राचार्य अनिल जैन, संजय रोबिन जैन, बनवारी महेशचंद जैन, पदमचंद पलाश जैन, राकेशकुमार प्रदीप जैन, महावीरप्रसाद विमल जैन, राजेंद्रप्रसाद अतुल जैन, शशि पदमचंद जैन, मसूलआई परिवार राहतगण, आशीष मिथुन जैन, विमलकुमार अमन जैन, मुकेश रोहित जैन, सुरेंद्र सोनी जैन, ओमवती सुनील जैन, आशीष जैन, डॉ. अभिलाषा मनोज जैन, राजकुमार सुनील वरैया, शांतिलाल दिनेशचंद जैन, सुभाष चंद जैन, वीरेंद्र जैन बाबा, मूलचंद मनीष जैन सहित अनेकों श्रावकों, साधर्मी बंधुओं को स्थापित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>जिनाभिषेक एवं भक्तामर विधान का हुआ आयोजन</strong></p>
<p>परम पूज्य मुनिश्री विलोक सागर एवं मुनिश्री विविधसागर महाराज के पावन सान्निध्य में प्रातःकालीन वेला में स्याद्वाद युवा क्लब द्वारा सामूहिक मासिक जिनाभिषेक किया गया। क्लब के सभी सदस्यों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में अत्यंत ही भक्ति एवं श्रद्धा के साथ जिनेंद्र प्रभु का जलाभिषेक किया। जैन मिलन बालिका मंडल ने 48 मंडलीय श्री 1008 भक्तामर विधान का आयोजन किया। विधानाचार्य संजय भैयाजी एवं अजय भैयाजी ने भक्तामर के प्रत्येक श्लोक का वाचन करते हुए अर्घ्य समर्पित कराए। विधान के सभी 48 माढ़नों पर चार चार साधर्मी बंधु अर्घ समर्पित कर रहे थे। जैन मिलन बालिका मंडल की सभी सदस्याएं अपनी पारंपरिक वेशभूषा में उपस्थित होकर भक्ति एवं श्रद्धा के साथ नृत्य करते हुए भक्तामर विधान की आराधना कर रही थीं। समाज के सभी लोगों ने बालिकाओं के इस पुनीत कार्य की सराहना की।</p>
<p><strong>आगंतुक अतिथियों का हुआ बहुमान</strong></p>
<p>मंगल कलश स्थापना समारोह के पावन अवसर पर सकल जैन समाज मुरैना की ओर से वर्षायोग समिति के मुख्य संयोजक राजेंद्र जैन दयेरी एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्राचार्य अनिल जैन के नेतृत्व में समाज के श्रावक श्रेष्ठियों ने दिल्ली, झांसी, राहतगढ़, दमोह, सागर, इंदौर, जौरा सहित संपूर्ण भारतवर्ष से पधारे हुए अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया। आध्यात्मिक पावन वर्षायोग मंगल कलश स्थापना की सभी धार्मिक क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी संजय भैयाजी मुरैना वाले, संघस्थ ब्रह्मचारी संजय भैयाजी बम्होरी, ब्रह्मचारी अजय भैयाजी झापन तमूरा दमोह, संजय शास्त्री सिहोनिया ने मंत्रोचारण के साथ संपन्न कराई। इस अवसर पर चक्रेश शास्त्री एवं नवनीत शास्त्री ने पूर्ण सहयोग प्रदान किया। जैन मिलन बालिका, नन्हें मुन्ने बच्चों एवं अन्य ग्रुपों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम के शुभारंभ में पदमचंद चौधरी द्वारा मंगलाचरण बाहर से पधारे हुए अतिथियों द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं झांसी से आए हुए गुरु भक्तों द्वारा शास्त्र भेंट किए गए।</p>
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		<title>जैन तीर्थ टिकटोली में होगा महामस्तकाभिषेक: जौरा में 7 जून को मनाया जाएगा सुपार्श्वनाथ जी का मोक्ष कल्याणक   </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Jun 2025 14:07:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिराजों का अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 8 जून को भव्य मंगल प्रवेश होगा एवं मुनिश्री के सानिध्य में भगवान शांतिनाथ का महामस्तकाभिषेक होगा। मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज मुरैना से पद विहार करते हुए जौरा में धर्म प्रभावना कर रहे हैं। जौरा में 7 जून को तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ का निर्वाण लाड़ू चढाया जाएगा। मुरैना [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिराजों का अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 8 जून को भव्य मंगल प्रवेश होगा एवं मुनिश्री के सानिध्य में भगवान शांतिनाथ का महामस्तकाभिषेक होगा। मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज मुरैना से पद विहार करते हुए जौरा में धर्म प्रभावना कर रहे हैं। जौरा में 7 जून को तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ का निर्वाण लाड़ू चढाया जाएगा। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मुनिराजों का अतिशय क्षेत्र टिकटोली में 8 जून को भव्य मंगल प्रवेश होगा एवं मुनिश्री के पावन सानिध्य में मूलनायक भगवान शांतिनाथ का महामस्तकाभिषेक होगा। अतिशय क्षेत्र टिकटोली के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी ने बताया कि आचार्य विद्यासागर महाराज, आचार्यश्री आर्जवसागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज मुरैना से पद विहार करते हुए जौरा में धर्म प्रभावना कर रहे हैं। मुनिराज जौरा से 7 जून को शाम 5 बजे अतिशय क्षेत्र टिकटोली के लिए मंगल पद विहार करेंगे। रात्रि विश्राम परसोटा मोड पर होगा। रविवार 8 जून को प्रातः 7 बजे मुनिराजों का भव्य मंगल प्रवेश अतिशय क्षेत्र टिकटोली में होगा। मुनिराज के आगमन की सूचना मिलते ही कमेटी ने अगवानी की विशेष तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं।</p>
<p>दिगंबर संतों की अगवानी के लिए जैन मित्र मंडल मुरैना, अतिशय मित्र मंडल जौरा ने विशेष योजना तैयार की है। क्षेत्र की सीमा पर सभी लोगों द्वारा मुनिश्री का पाद प्रक्षालन, आरती एवं श्रीफल द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी। गाजे बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में मुनिराजों को भव्य मंगल प्रवेश कराया जाएगा। अतिशय क्षेत्र टिकटोली पहुंचने के लिए 8 जून को प्रातः 6 बजे बड़े जैन मंदिर मुरैना से निःशुल्क बस रवाना होगी। आहारचर्या के बाद बस मुरैना वापस लौटेगी। मुनिराजों के टिकटोली आगमन से सभी गुरुभक्तों में खुशी है। इस अवसर पर मुरैना, बानमौर, जौरा, अम्बाह, आगरा, धौलपुर आदि अनेकों स्थानों से सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए क्षेत्र कमेटी ने सभी तैयारियों को पूर्ण कर लिया है। क्षेत्र पर आने वाले सभी बंधुओं के आवास एवं भोजनादि की समुचित व्यवस्था की गई है।</p>
<p><strong>मुनिराज जौरा में कर रहे हैं धर्म प्रभावना</strong></p>
<p>युगल मुनिराजों के पावन सानिध्य में महती धर्म प्रभावना हो रही है। मुनिश्री ने मुरैना से मंगल पद विहार करते हुए गुरुवार 5 जून को जौरा में भव्य मंगल प्रवेश किया था। 7 जून को मुनिश्री के सानिध्य में तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। सभी जैन धर्मावलंबी मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर निर्वाण लाड़ू समर्पित करेंगे। आहारचर्या एवं सामयिक के पश्चात शाम को 5 बजे अतिशय क्षेत्र टिकटोली के लिए विहार होगा।</p>
<p><strong>टिकटोली में होगा भगवान शांतिनाथ का महामस्तकाभिषेक</strong></p>
<p>क्षेत्र कमेटी के महामंत्री ओमप्रकाश जैन जौरा ने बताया कि लगभग 1100 वर्ष प्राचीन श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन परमोदय अतिशय क्षेत्र टिकटोली दूमदार मेंयुगल मुनिराजों के पावन सानिध्य में मूलनायक भगवान शांतिनाथ का महामस्काभिषेक 8 जून को प्रातः 8 बजे किया जाएगा। यूं तो भगवान शांतिनाथ स्वामी सहित सभी जिनबिम्बों का नित्य ही अभिषेक होता है, लेकिन वार्षिक मेला एवं विशेष अवसरों पर महामस्तकाभिषेक का होगा।</p>
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		<title>विश्व कल्याण की कामना श्री सिद्धचक्र विधान का समापन: महायज्ञ कर निकाली श्रीजी पालकी शोभायात्रा </title>
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		<pubDate>Sun, 11 May 2025 10:11:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर के बड़े जैन मंदिर में विश्व शांति एवं कल्याण के लिए महायज्ञ के साथ श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का समापन हुआ। आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के शिष्य आचार्यश्री आर्जवसागर महाराज के शिष्य मुनिश्री विलोकसागर महाराज एवं मुनिश्री विबोधसागर महाराज के पावन सानिध्य में नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत सिद्धों की आराधना की जा रही थी। जैन संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्राचार्य पंडित महेंद्रकुमार शास्त्री के निर्देशन में विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने विधान की सभी क्रियाओं को संपन्न कराया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-80698" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg" alt="" width="1599" height="899" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015.jpg 1599w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-300x168.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1024x576.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-768x432.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1536x864.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-990x557.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-1320x742.jpg 1320w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-470x264.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-640x360.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-215x120.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250511-WA0015-414x232.jpg 414w" sizes="(max-width: 1599px) 100vw, 1599px" />कार्यक्रम के दौरान 4 मई से 10 मई तक प्रतिदिन श्री जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन के बाद विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान के मध्य पूज्य मुनिश्री के प्रवचन भी हुए। शाम को महाआरती, गुरु भक्ति, शास्त्रसभा के साथ स्वर लहरी सैंकी एंड पार्टी फिरोजाबाद ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। रविवार को विधान के अंतिम आठवें दिन विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी भव्य शोभायात्रा, सम्मान समारोह, वात्सल्य भोज, आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। विधान के पुण्यार्जक मुन्नालाल, राकेशकुमार, गौरव जैन, सौरभ जैन एवं समस्त चोरम्बार परिवार के पुण्य की सभी ने अनुमोदना की। विधान के समापन पर विराजमान युगल मुनिराजों ने सभी को धर्म वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया।</p>
<p><strong>विश्व शांति महायज्ञ में दी आहुति</strong></p>
<p>श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के समापन पर सम्पूर्ण विश्व में शांति हो, सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो। ऐसी पवित्र एवं पावन भावना के साथ विश्व शांति महायज्ञ किया गया। विधान के प्रतिष्ठा निर्देशक पंडित महेन्द्रकुमार शास्त्री एवं विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मगरौनी ने मंत्रोच्चारण के साथ महायज्ञ की क्रियाओं को संपन्न कराया। महायज्ञ के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने श्री जिनेंद्र प्रभु से कामना की कि हे! प्रभु इस संसार के सभी जीव सुखी हों, संपूर्ण विश्व में सत्य अहिंसा का बोलबाला होकर शांति स्थापित हो। संसार के सभी जीवों का कल्याण हो। सभी साधर्मी बंधुओं, माताओं ने महायज्ञ में आहुति दी।</p>
<p><strong>श्री जिनेंद्र प्रभु की निकली भव्य पालकी शोभायात्रा</strong></p>
<p>विधान के अंतिम दिन आज श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। भगवान जी की प्रतिमा को चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। चार इंद्र नालकी को अपने कंधों पर लेकर चल रहे थे । भव्य श्री जी शोभायात्रा बड़े जैन मंदिर से प्रारंभ होकर सदर बाजार, हनुमान चौराहा, झंडा चौक, सराफा बाजार, लोहिया बाजार होती हुई बड़ा जैन मंदिर पहुंची। शोभायात्रा में श्री जिनेंद्र प्रभु की आरती उतारकर साधर्मी बंधुओं ने अगवानी की। महिलाएं भक्ति भाव के साथ भक्तिपूर्ण नृत्य कर रही थीं और पुरुष वर्ग भगवान महावीर की जय जयकार करता हुआ चल रहा था। बड़े जैन मंदिर में श्री जिनेंद्र प्रभु को पांडुक शिला पर विराजमान कर जलाभिषेक किए गए। सौधर्म इंद्र ने कलश से जैसे ही जल धारा प्रभु के सिर पर ढारी, वैसे ही सम्पूर्ण पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। सभी ने हर्ष ध्वनि के साथ जयकारा लगाते हुए अपनी खुशी का इजहार किया।</p>
<p><strong>युगल मुनिराजों के प्रतिदिन हुए प्रवचन</strong></p>
<p>विधान के दौरान निरंतर आठ दिन सिद्ध परमेष्ठि की पूजा भक्ति, आराधना की गई। इस दौरान प्रतिदिन युगल मुनिराजों के प्रवचन हुए । विराजमान दिगंबर जैन मुनिश्री विलोकसागर एवं मुनिश्री विबोध सागर महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित जन समूह को जीवन जीने की कला सिखाते हुए, सत्य अहिंसा का उपदेश दिया।</p>
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