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	<title>मुनिश्री विबोधसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>मुनिश्री विबोधसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>तीर्थों की वंदना से आत्मबल और तपोबल में वृद्धि: मुनिश्री विलोकसागर जी का 12 नवंबर की शाम मुरैना में भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 10:11:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री विलोकसागरजी ने अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी तीर्थ में तीर्थ वंदना के महत्व पर प्रकाश डाला। मुनिश्री ने कहा कि तीर्थों की वंदना करने से मनुष्यों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा तो मिलती ही है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। मुनिश्री विलोकसागरजी ने अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी तीर्थ में तीर्थ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री विलोकसागरजी ने अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी तीर्थ में तीर्थ वंदना के महत्व पर प्रकाश डाला। मुनिश्री ने कहा कि तीर्थों की वंदना करने से मनुष्यों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा तो मिलती ही है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> मुनिश्री विलोकसागरजी ने अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी तीर्थ में तीर्थ वंदना के महत्व पर प्रकाश डाला। मुनिश्री ने कहा कि तीर्थों की वंदना करने से मनुष्यों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा तो मिलती ही है। साथ ही उसके आत्मबल में वृद्धि भी होती है। जैन दर्शन में तीर्थ यात्रा का महत्व आत्म-खोज, आध्यात्मिक विकास और ज्ञान प्राप्ति से जुड़ा है। यह यात्रा भक्तों को तीर्थंकरों की शिक्षाओं से जोड़ती है और उन्हें जीवन के सत्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती है। मुनिश्री ने कहा कि इन तीर्थ स्थलों पर जाकर, जैन अनुयायी शांति, संयम और मोक्ष का अनुभव करते हैं। जिससे उनके जीवन में पुण्य और शांति आती है। तीर्थयात्रा भक्तों को आत्म-खोज और आध्यात्मिक प्रगति के लिए प्रेरित करती है। यह तीर्थयात्राएं ज्ञान प्राप्त करने, ध्यान केंद्रित करने और आंतरिक शांति पाने का अवसर देती हैं। मुनिश्री आगे कहते हैं कि तीर्थयात्रा के माध्यम से भक्त तीर्थंकरों की शिक्षाओं और उनके जीवन से जुड़ते हैं। दान, संयम और क्षमा जैसे गुणों का पालन करते हुए तीर्थयात्रा कर्मों के बोझ को कम करने में मदद करती है।</p>
<p>धर्म, काम और मोक्ष इन तीनो की प्राप्ति में तीर्थ यात्राएं मददगार होती हैं। मानव का तीर्थयात्रा करने का उद्देश्य भी अलग-अलग होता है। सात्विक एवं संयमी मनुष्य अपने तपोबल में वृद्धि करने एवं मोक्ष प्राप्ती के लिए तीर्थ यात्रा करते हैं और सात्विक तथा राजसी प्रवृत्ति के मनुष्य शान शौकत और मनोरंजन के लिए तीर्थ यात्रा करते हैं। अधिकांशतः मनुष्य धर्म के लिए तीर्थ यात्रा करते है। सांसारिक प्राणियों को समय समय पर तीर्थ वंदना करते रहना चाहिए। जब भी आप तीर्थ वंदना पर जाएं, मन वचन काया की शुद्धि के साथ ही तीर्थ वंदना करें। तभी आपको सार्थक परिणामों की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>तीर्थ वंदना से मिलती है संयम की प्रेरणा </strong></p>
<p>इस अवसर मुनिश्री विबोधसागर महाराज ने बताया कि तीर्थ यात्रा करने से हमारा ज्ञान बढ़ता है, हम अपनी संस्कृति और रिवाजों से परिचित होते हैं। प्राचीन तीर्थ स्थलों पर जाने से पौराणिक ज्ञान बढ़ता है। अपने ईष्ट एवं महापुरुषों से जुड़ी कथाएं और परंपराएं मालूम होती हैं। प्राचीन संस्कृति को जानने का मौका मिलता है। तीर्थ जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा त्याग, आत्मा की शुद्धि और आत्म-शुद्धि के शिखर तक पहुंचने के लिए अपनी आत्मा की गहराई में झांकने के लिए प्रेरित करती है।</p>
<p><strong>युगल मुनिराजों ने किए भगवान शांतिनाथ के दर्शन</strong></p>
<p>युगल मुनिराज पोरसा से पद विहार करते हुए जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र सिहोनियाजी पहुंचकर भूगर्भ से प्राप्त अतिशयकारी भगवान शांतिनाथजी, कुंथनाथजी, अरहनाथजी के दर्शन के साथ ही क्षेत्र के अन्य जिनालयों के दर्शन किए। उन्होंने सिहोनियाजी को अलौकिक एवं अदभुत तीर्थ बताते हुए संयम की साधना के लिए सर्वाेत्तम स्थान बताया।</p>
<p>अतिशय क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष टिल्लू जैन। उपाध्यक्ष नीलेश जैन, महामंत्री विवेक जैन, कोषाध्यक्ष रवि जैन, संजय जैन, मुकेश जैन, संजीव जैन, पिंटू जैन अम्बाह, बृजेश जैन दादा, सुनील जैन, राकेश जैन मुरैना ने विहार में सम्मिलित होकर गुरुदेव के क्षेत्र पर मंगल आगमन पर पाद प्रक्षालन कर भव्य अगवानी की।</p>
<p><strong>12 नवंबर की शाम मुरैना में होगा भव्य मंगल प्रवेश</strong></p>
<p>युगल मुनिराजों का आज रात्रि विश्राम ग्राम मिरघान में हो रहा है। बुधवार 12 नवंबर की आहारचर्या ग्राम खेरा में होगी और सामयिक के पश्चात बड़े जैन मंदिर मुरैना के लिए पद विहार होगा। दोपहर को नगर सीमा से युगल मुनिराजों को बैंडबाजों के साथ भव्य शोभायात्रा के रूप में शाम को मुरैना नगर प्रवेश कराया जाएगा।</p>
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		<title>आज होगा तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का पुरस्कार वितरण : एक सैकड़ा से अधिक प्रतियोगी होंगे सम्मानित </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 13:25:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना में आज शाम बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया था, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। पढ़िए मनोज जैन नायक की ख़ास रिपोर्ट… मुरैना में आज शाम 6 बजे बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना में आज शाम बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया था, जिनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की ख़ास रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p>मुरैना में आज शाम 6 बजे बड़े जैन मंदिर में तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण का आयोजन होगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य समाज को तीर्थंकरों और महापुरुषों के जीवन चरित्र से अवगत कराना तथा धर्म के प्रति जागरूक करना है।</p>
<p>संयोजक डॉ. मनोज जैन एवं विमल जैन बबलू ने जानकारी दी कि इस प्रतियोगिता का आयोजन पूज्य मुनिश्री विलोकसागर जी और मुनिश्री विबोधसागर जी महाराज की प्रेरणा और आशीर्वाद से किया जा रहा है। प्रतियोगिता में करीब 250 प्रतिभागियों ने भाग लिया था जिन्हें उम्र के आधार पर तीन ग्रुपों में विभाजित किया गया था।</p>
<p>ग्रुप ए में 50 या उससे अधिक अंक, ग्रुप बी और सी में 80 या अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। सभी योग्य प्रतियोगियों को सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना दे दी गई है। पुरस्कार वितरण का सौजन्य श्रावक श्रेष्ठि यतीन्द्र कुमार संजय रेखा जैन मुरैना एवं लखमीचंद लालजीराम जैन बानमौर द्वारा किया जा रहा है। संयोजक नवनीत शास्त्री, डॉ. मनोज जैन और विमल जैन बबलू ने सभी प्रतियोगियों से समय पर उपस्थिति की अपील की है।</p>
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		<title>धर्मसभा में मन को शांति और निर्मलता मिलती है: मुनिश्री विबोधसागर जी ने श्रवण शक्ति का बताया महात्म्य  </title>
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		<pubDate>Wed, 13 Aug 2025 12:17:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मसभा में सदैव तीर्थंकरों की वाणी का श्रवण करना चाहिए। जीव, अजीब, आर्सव, बंध, निर्जरा और मोक्ष की बातों की चर्चा करना चाहिए। सच्चे अर्थों में धर्म सभा या सत्संग वही होता है। जिसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र की चर्चा की जाती है। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मसभा में सदैव तीर्थंकरों की वाणी का श्रवण करना चाहिए। जीव, अजीब, आर्सव, बंध, निर्जरा और मोक्ष की बातों की चर्चा करना चाहिए। सच्चे अर्थों में धर्म सभा या सत्संग वही होता है। जिसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र की चर्चा की जाती है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> धर्मसभा में सदैव तीर्थंकरों की वाणी का श्रवण करना चाहिए। जीव, अजीब, आर्सव, बंध, निर्जरा और मोक्ष की बातों की चर्चा करना चाहिए। सच्चे अर्थों में धर्म सभा या सत्संग वही होता है। जिसमें सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र की चर्चा की जाती है। ये सारी चर्चाएं एक-दूसरे के इर्द गिर्द घूमेंगी। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विबोधसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहे। उन्होंने कहा कि ये सभी घूम फिरकर जीव और पुदगल पर आ जाएगी। यदि इसे आप समझ गए तो समझो सबकुछ समझ गए। यदि आप आर्सव को, कर्म को समझ गए तो अन्य बातें भी आपकी समझ में आने लगेंगी।</p>
<p><strong> धर्मसभा में सदैव धर्म की ही चर्चा में समय व्यतीत करना चाहिए        </strong></p>
<p>जब भी हमें किसी सत्संग में अथवा धर्मसभा में बैठने का अवसर मिले तो इस पावन अवसर को चूकना नहीं चाहिए। धर्मसभा में मन वचन काय से शुद्धि पूर्वक बैठना चाहिए। सत्संग और धर्म सभा में बैठने मात्र से मन को शांति और निर्मलता प्राप्त होती है। भले ही धर्मसभा में आपकी समझ में कुछ नहीं आ रहा है लेकिन, जब तक आप वहां बैठे हैं तब तक पाप कर्मों से बचे हुए हैं, आप कर्म के बंधन से बचे हुए हैं। यदि आपने कर्म बंधन से बचने का तरीका सीख लिया तो एक दिन कर्मों की निर्जरा भी करने लगोगे। धर्मसभा में सदैव धर्म की ही चर्चा में समय व्यतीत करना चाहिए। इधर-उधर की फालतू चर्चा कदापि नहीं करना चाहिए।</p>
<p><strong>विलोकसागर बालिका मंडल द्वारा स्वतंत्रता दिवस का आयोजन</strong></p>
<p>बड़े जैन मंदिर में चातुर्मासरत मुनिराजों के पावन सान्निध्य में विलोक सागर बालिका मंडल के तत्वावधान में 15 अगस्त को श्री पंचायती बड़ा जैन मंदिर परिसर में स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया जाएगा। प्रातःकाल समाज की बालिकाओं द्वारा एक भव्य परेड की जाएगी। जिसमें बालिकाएं अनुशासन और देशभक्ति की अद्भुत झलक प्रस्तुत करेंगी। इसके पश्चात् मंच पर एक सुंदर एवं भावपूर्ण नाटिका की प्रस्तुति दी जाएगी, जो स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय एकता का संदेश देगी। कार्यक्रम के तहत विधिवत झंडा फहराया जाएगा तथा राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया जाएगा। इस अवसर पर समस्त साधर्मी बंधु माता बहनें, गणमान्य नागरिक एवं समाजजन उपस्थित रहेंगे।</p>
<p><strong>प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का परिणाम 15 अगस्त को</strong></p>
<p>तीर्थंकर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का परिणाम 15 अगस्त की शाम को घोषित किया जाएगा। संयोजक डॉ. मनोज जैन एवं विमल जैन बबलू ने बताया कि 15 अगस्त को मुनिराजों के सान्निध्य में तीर्थंकर आदिनाथ एवं पार्श्वनाथ स्वामी प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद ही उत्कृष्ट प्रतियोगियों को पुरस्कृत किया जाएगा। परिणाम घोषणा के समय सभी प्रतियोगियों का उपस्थित रहना अनिवार्य है।</p>
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