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	<title>मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>कर्तव्य निष्ठ मनुष्य साधारण नहीं रहता वह साधक बन जाता हैः मुनि श्री प्रमाण सागर ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम में दी धर्मदेशना  </title>
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		<pubDate>Wed, 20 Aug 2025 11:05:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्म करो लेकिन, उस कर्म के प्रति कोई आपेक्षा मत रखो। ‘कर्म सिद्धांत’ हमें यही समझाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने ‘कर्म की कसौटी’ की बात करते हुए कहा कि पूरी प्रकृति हमें यह पाठ पढ़ाती है कि ‘कर्म करो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कर्म करो लेकिन, उस कर्म के प्रति कोई आपेक्षा मत रखो। ‘कर्म सिद्धांत’ हमें यही समझाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने ‘कर्म की कसौटी’ की बात करते हुए कहा कि पूरी प्रकृति हमें यह पाठ पढ़ाती है कि ‘कर्म करो परिणाम की चिंता मत करो’। <span style="color: #ff0000">भोपाल अवधपुरी से राजीव सिंघई की पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल अवधपुरी।</strong> कर्म करो लेकिन, उस कर्म के प्रति कोई आपेक्षा मत रखो। ‘कर्म सिद्धांत’ हमें यही समझाता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने ‘कर्म की कसौटी’ की बात करते हुए कहा कि पूरी प्रकृति हमें यह पाठ पढ़ाती है कि ‘कर्म करो परिणाम की चिंता मत करो’ लेकिन, हम लोग यह पाठ भूल जाते हैं, उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ‘सूरज ऊगता है और सारे जगत में रोशनी फैलाता है, वह इस बात की चिंता नहीं करता कि कौन मेरा अभिनंदन कर रहा और कौन मेरा उपयोग कर रहा है तथा कौन मेरी उपेक्षा कर रहा है, वह अपने कर्तव्य का पालन करते हुये जगत को आलोकित करता है।</p>
<p><strong>कर्म किए जा फल की इच्छा मत कर </strong></p>
<p>नारायण श्री कृष्ण गीता में कहते है कि ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन’ कर्म पर ही तेरा अधिकार है,उसके फल पर नहीं। उन्होंने कहा कि आप सभी लोग अपने अपने मन से पूछिए कि हम जो कार्य करते हैं वह कर्तव्य की भावना से करते हैं या फल की आकांक्षा से? परिवार में मां-बाप का कर्तव्य है। संतान को जन्म देना उसका लालन-पालन कर अच्छे संस्कार देना, ’जब तक व्यक्ति के मन में सहज कर्तव्य की भावना होती है तो कोई चाह नहीं होती सारे कार्य सहजता से संपादित होते हैं, लेकिन जब हम उनसे परिणाम की अपेक्षा रखते हैं तो बहुत सी उथल पुथल और बेचैनी प्रारंभ हो जाती है।</p>
<p><strong>कोई भी कार्य हो उसे कर्तव्य मान कर करो</strong></p>
<p>उन्होंने निष्काम कर्म योग की चर्चा करते हुए कहा कि जैसे एक किसान खेत में बीज बोते हुए इस बात की चिंता नहीं करता कि फसल आएगी या नहीं? वह तो अपने कर्तव्य भावना से खेत में बीज बोता है। समय पर निंदाई-गुड़ाई करता है, वह जानता है कि मेरे हाथ में कर्म है परिणाम नही और वह निश्ंिचत हो जाता है। समय पर पानी बरसाना या न बरसाना तो प्रकृति के हाथ में है। यह सोचकर वह अपनी तपस्या में कोई कमी नहीं करता और फसल आई तो वह उसे निष्काम वृत्ति से स्वीकार करता है। मुनि श्री ने कहा कि कोई भी कार्य हो उसे कर्तव्य मान कर करो उसके परिणाम की धारणा लेकर मत चलो</p>
<p><strong> कर्तव्य की भावना से प्रेरित व्यक्ति का जीवन बहुत सहज शांत होता है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रवचन देना मेरा कर्म है। मैं आप लोगों से यह अपेक्षा रखूं कि जैसा मैं बोलूं उसका वैसा प्रभाव पड़े,। यदि मैं ऐसा सोचता हूं तो यह मेरी चेतना को अशांत करेगा। कर्तव्य की भावना से प्रेरित व्यक्ति का जीवन बहुत सहज शांत और संतुलित रहता है,उसके जीवन में सकारात्मकता होती है। वह परिणाम को कभी महत्व नहीं देते। उन्होंने कहा इसी प्रकार आपके घर परिवार, ऑफिस, व्यापार या धार्मिक क्षेत्र हो या साधना के क्षेत्र में कई बार ऐसी स्थिति आती है कि परिणाम आपके अनुकूल नहीं होते तो आपके मन में उथल-पुथल मच जाती है, लेकिन जो कर्तव्य को प्रमुखता देते है,वह परिणाम की चिंता नहीं करते। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके हाथ से राजगद्दी गई, महलों का सुख गया। यदि वह परिणाम की चिंता कर बगावत करते तो कर सकते थे लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया। अपने कर्तव्य का पालन करते हुए वन की ओर प्रस्थान कर गए।</p>
<p><strong>वह कमेटी से संपर्क कर अभी अपना रजिस्ट्रेशन कराएं </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि मान लीजिए यदि वह राजगद्दी के लिये अड़ जाते तो क्या वह राम बन पाते? उन्होंने अपने पिता के प्रण की रक्षा करते हुए यह निर्णय लिया। रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाय पर वचन न जाय, कर्तव्य की यह भावना प्रत्येक पुत्र के मन में होना चाहिए। कर्म की कसौटी कर्तव्य है,परिणाम नहींष् कर्तव्य निष्ठ मनुष्य साधारण नहीं रहता वह आध्यात्मिक साधक बन जाता है। मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि आगामी 28 अगस्त से 6 सितंवर तक दशलक्षण पर्व के अवसर पर श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन होगा। इस संस्कार शिविर में प्रतिदिन प्रातःभावनायोग का आयोजन भी रहेगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन बंद हो चुके हैं, जिन महानुभावों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है वह कमेटी से संपर्क कर अभी अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।</p>
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		<title>आज से महामंडल विधान का भव्य शुभारंभ ः 14 नवंबर तक विधान, 15 नवंबर को प्रारंभ होगी 108 जिनबिंव की विशाल शोभायात्रा  </title>
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		<pubDate>Thu, 07 Nov 2024 10:37:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[108 मंडल के साथ संस्कृत भाषा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के मुखारविंद से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत होगी। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की एक रिपोर्ट… इंदौर। 108 मंडल के साथ संस्कृत भाषा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>108 मंडल के साथ संस्कृत भाषा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के मुखारविंद से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत होगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की एक रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> 108 मंडल के साथ संस्कृत भाषा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज, मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज, मुनि श्री संधान सागर महाराज ससंघ के मुखारविंद से श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत 8 नवंबर शुक्रवार से होगी। मोहताभवन से 5.45 पर मंगलाचरण एवं श्री जी का अभिषेक के साथ 6.30 बजे से मोहताभवन रेसकोर्स रोड से घटयात्रा प्रारंभ होगी। जिसमें श्रीजी के साथ मुनिसंघ एवं सौभाग्यवती स्त्रियां सिर पर मंगल कलश लेकर चलेंगी एवं पुरुषवर्ग श्वेत वस्त्रों में रहेंगे।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-69401" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241107-WA0016.jpg" alt="" width="260" height="383" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241107-WA0016.jpg 260w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/11/IMG-20241107-WA0016-204x300.jpg 204w" sizes="(max-width: 260px) 100vw, 260px" />मंडप, उद्घाटन, ध्वजारोहण के साथ विधान प्रारंभ होगा</strong></p>
<p>यह घटयात्रा विजयनगर चौराहा मंगल सिटी पुलिस कोतवाली के सामने बने विशाल पांडाल में पहुंचेगी। उसके बाद सुबह 7.30 बजे मंडप उद्घाटन ध्वजारोहण के साथ विधानाचार्य अशोक भैयाजी, अभय भैयाजी के निर्देशन में विधान प्रारंभ हो जाएगा। जोकि लगातार 14 नवंबर तक चलेगा। 15 नवंबर को वृहद शांतिधारा के पश्चात सभी 108 जिनबिंव की विशाल शोभायात्रा 108 रथों के साथ प्रारंभ होगी। इस ऐतिहासिक विशाल रथयात्रा में सोना चांदी के पालिश वाले विशाल रथ भी होंगे जो कि अजमेर, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आऐंगे। अतः धर्म प्रभावना समिति के सभी सदस्यों ने समाज जन से निवेदन करती है कि सभी कार्यक्रम में समय से भाग लें।</p>
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