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	<title>मुनिश्री प्रमाणसागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे ? : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बागरौद में दी मंगल देशना, सच्चे मित्रों की बताई पहचान  </title>
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		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 09:23:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230; बागरौद विदिशा। सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">बागरौद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बागरौद विदिशा।</strong> सच्चे अर्थों में यह पहचानना बड़ा मुश्किल होता है कि कौन हमारा मित्र है अथवा कौन हमारा दुश्मन? यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ने राहतगढ़ की ओर प्रस्थान करते हुए बूढ़ी बागरौद स्थित जिनालय परिसर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जब तक तुम्हारे पास धन पैसा है तो ऐसे मित्र मिल जाएंगे जो तुम्हारे परम हितैषी बनेंगे और तुम्हारे अंदर बुरी आदतों का समर्थन करेंगे लेकिन, जैसे ही तुम्हारा धन समाप्त होगा और बुरा बक्त शुरु होगा तो वह तुमसे किनारा कर लेंगे लेकिन, जो तुम्हारे हितैषी मित्र भाई बंधु होते हैं। वह संकट आने पर तुम्हारा सहयोग भी करते हैं और तुम्हें महसूस भी नहीं होंने देते। इस विषय पर गुरुदेव कहते हैं कि ‘हमारे दोष जिनसे फले-फूले वे हमारे बंधु कैसे? मुनि श्री ने कहा कि व्यवहारिक जीवन में हमें अनेक लोगों के संपर्क और संसर्ग में रहना पड़ता है। जिन्हें अक्सर हम अपना मित्र या बंधु कहते हैं, लेकिन क्या वास्तव में वह हमारे सच्चे मित्र या बंधु हैं?</p>
<p><strong>विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि रक्त संबंधित भाई ही आपका बंधु है, कभी-कभी देखने में आता है कि जिससे हमारा कोई संबंध नहीं कोई स्वार्थ नहीं लेकिन, विपत्ति के समय पर हमारा ऐसा सहयोग दिया कि उससे रक्त से बढ़कर रिलेशन बन गया। मुनि श्री ने कहा कि सच्चा मित्र या बंधु बुराइयों में न तो खुद लगते हैं और न हीं दूसरों को लगने देते हैं। मुनि श्री ने कहा कि जो हमें दोषों और बुराइयों से बचाए और विपत्ति में साथ दे वही हमारा सच्चा मित्र है और जो विपत्ति में साथ छोडकर भाग जाए, वह मित्र नहीं शत्रु है।</p>
<p><strong>मुनिश्री शनिवार को सुबह राहतगढ़ में करेंगे मंगल प्रवेश </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मुनि श्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ की राहतगढ़ में मंगल अगवानी 22 नवंबर को प्रातःकालीन बेला में होगी। आपके साथ मुनि श्री संधानसागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक एवं बालब्रह्मचारियों का संघ है।यहां पर 27 नवंबर से 2 दिसंबर तक नवीन जिनालय के पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव होने जा रहा है।</p>
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		<title>अहंकार प्रभु का नहीं होने देता : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बाबड़ीकला में दी अहंकार छोड़ने की सीख </title>
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		<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 07:22:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने के बाद भी प्रभु का नहीं होने देता। भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की खबर&#8230; भोपाल। बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने के बाद भी प्रभु का नहीं होने देता। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> बाबड़िया कला दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा में मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि अहंकार प्रभु चरणों में झुकने के बाद भी प्रभु का नहीं होने देता। &#8216;मैं कुछ हूं, यह मंदिर मेरा है, यह मेरे भगवान हैं, मैं पदाधिकारी हूं कि ऐसी अकड़ श्रद्धा को कमजोर करती है। मुनिश्री ने कहा कि विनम्र व्यक्ति श्रद्धाशील होता है। झुकने में उपलब्धि है जबकि, झुकाने में पीड़ा। जो झुकना जानता है, सृष्टि उसके चरणों में न्योछावर हो जाती है, और जो दूसरों को झुकाना चाहता है, सृष्टि उसे उखाड़कर फेंक देती है। पति-पत्नी के प्रसंग से उदाहरण देते हुए मुनिश्री ने बताया कि यदि मन नहीं झुका तो जीवन में संघर्ष और कटुता बनी रहती है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि काल्पनिक छवि को अपनी मान लेना अज्ञानता है। &#8216;मैं क्यों झुकूं यही जीवन की विडंबना है जबकि, झुकने की कला से जीवन कभी रुकता नहीं। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनिसंघ का मंगल विहार ‘संस्कार उपवन प्राइड’ की ओर हुआ है। यहां तीन दिवसीय विशेष कार्यक्रम में प्रातः प्रवचन 8:30 बजे और सायं शंका-समाधान 6:20 बजे होंगे।</p>
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		<title>अर्थ को पहचानो और जीवन को सही दिशा दें : मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने कहा- जो अर्थ को पहचान कर जीवन जीता है परमार्थ के सुख को प्राप्त करता है  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 14:09:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो। भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की खबर&#8230; भोपाल (अवधपुरी)। अपने जीवन में यदि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन विद्यावाणी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)</strong>। अपने जीवन में यदि आपने पुण्य नहीं किया। यह जीवन व्यर्थ गया लेकिन, यदि उसे पाप के कार्य में रमा दिया या किसी का शोषण किया तो आपका जीवन को अनर्थ किया। वहीं आपने सही नियोजन कर अपने अर्थ को परमार्थ में लगा दिया तो वह आपका सही प्रयोजन है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर जी महाराज ने चार शब्द अर्थ, व्यर्थ, अनर्थ और परमार्थ की व्याख्या करते हुए व्यक्त किए। मुनि श्री ने कहा कि जीवन को व्यर्थ और अनर्थ से बचाना है तो अपने समय, शक्ति और संसाधनों का सही उपयोग करो। इनको सही दिशा दो, गलत कार्यों में इनका नियोजन तो कभी करना ही नहीं चाहिए। यह अपनी आत्मा के साथ छल और अनर्थ है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि आपने विचार किया कभी में अनर्थ की ओर बढ़ रहा हूं या मेरे जीवन में अनर्थ घट रहा है? उन्होंने दूध का उदाहरण देते हुए कहा कि दूध के दोहने का कोई अर्थ है। वहीं दूध का फट जाना व्यर्थ है। वहीं दूध को ढोल देना अनर्थ है। वहीं दूध को जमाकर उसका घी निकाल लैना परमार्थ है। जीवन दूध की तरह है। इसका सही उपयोग करो व्यर्थ मत जाने दो।</p>
<p><strong>जीवन को सही दिशा नहीं दोगे तो विकृति आएगी </strong></p>
<p>मुनिश्री ने कहा कि जीवन को सही दिशा नहीं दोगे तो जीवन में विकृति आएगी और जीवन बरबाद होगा। संत कहते है जीवन को जिओ और जीवन को बर्बाद होने से बचाओ। जिससे बाद में पछताना न पड़े। उन्होंने अल्फ्रेड नोबल जो कि डायनामाइट का आविष्कारक था का उदाहरण देते हुए कहा कि उसके मन में विचार आया कि लोग मेरे मरने के बाद किस रूप में याद करेंगे? उसने समाचार पत्र में एक झूठी विज्ञप्ति दे दी कि अल्फ्रेड नोबल मर गया। अखबारों ने इस खबर को फ्रंट में छापा। मौत का सौदागर सदा के लिए सो गया। अल्फ्रेड नोबल ने जब यह पढ़ा तो उसने अपने आपको धिक्कारते हुए कहा कि इस दुनिया से जाने के बाद लोग मुझे मौत के सौदागर के रूप में याद करेंगे और उसने निर्णय लिया कि मुझे मौत का सौदागर नहीं शांति का दूत बनना है और इसी भावना से उसने अपनी संपत्ति को शांति के लिए जो नोबल पुरस्कार के रूप में लगा दिया, जो आज भी नोबल पुरस्कार के रूप में दिया जाता है।</p>
<p><strong>आंखें बंद कीजिए और एक प्रयोग कीजिए</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि थोड़े से चिंतन ने अल्फ्रेड नोबल की दिशा बदल दी। आप सभी लोग आंखें बंद कीजिए और एक प्रयोग कीजिए। आप मर गए हैं। चारों ओर से लोग एकत्रित हैं। आपकी अर्थी को बांध कर शमशान ले जाया गया। वहां पर उस कफन को निकालकर अग्नि के हवाले कर दिया गया। उसी समय कुछ लोग अपने-अपने मोबाइल में लग गए तो कुछ लोग अपनी अपनी गपशप कर रहे थे तो तो कुछ लोग कपाल क्रिया होने का इंतजार कर रहे थे कि कब हो और मैं राख में परिवर्तित हो गया। शोक सभा हुई और मेरे विरोधियों ने भी मेरा गुणगान किया। कुछ दिनों घर में बैठकों का सिलसिला चला मैंने देखा कि कल तक जो कहा करते थे कि तुम्हारे बिना कैसे रहेंगे? वह सभी अपने-अपने काम में लग गए। यह कहानी मेरी नहीं सभी की है।</p>
<p><strong>सभी को तो राख होना है</strong></p>
<p>जिन्होंने अपने जीवन में कुछ अच्छे कार्य किये उनको भी लोग कुछ समय तक ही याद करते है फिर भूल जाते हैं। मुनि श्री ने कहा कि एक दिन तो सभी को तो राख होना है।’मेरा भी राख होगा तेरा भी खाक होगा। यही जीवन की सच्चाई है। इसी मोहमाया में ही पूरा जीवन व्यर्थ हो जाता है, फिर याद आता है। यदि मैंने अपनी आत्मा को पहचान कर कल्याण का मार्ग अपनाया होता तथा मोक्ष मार्ग के अनुरूप चला होता तो मैं भी परमार्थ के रास्ते पर चल अपनी इस आत्मा को भवभव के बंधन से मुक्त कर लेता।</p>
<p><strong>रविवार को होगा क्षमावाणी पर्व</strong></p>
<p>रविवार को दोपहर 1.30 बजे से वृहद क्षमावाणी पर्व मुनिसंघ के सान्निध्य में मनाया जाएगा। इसमें भोपाल तथा आसपास के जिले से भी श्रद्धालु सम्मलित होंगे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराजसिंह चौहान तथा सांसद आलोक शर्मा सहित जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।</p>
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		<title>मक्सी तीर्थ को मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ का मिला आशीर्वादः तीर्थ क्षेत्र के मुख्यद्वार का हुआ भूमिपूजन  </title>
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		<pubDate>Sat, 25 Jan 2025 09:44:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश मक्सी में हुआ। यहां श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र में मुनिश्री ने सुबह पूजन कर तीर्थ की वंदना की और उपस्थित समाज के श्रेष्ठीजनों को अपने आशीर्वचनों से कृतार्थ किया। यहां पर शांतिधारा में जैन समाज के गुरु भक्तों ने श्रद्धा भक्ति के साथ भाग लिया। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश मक्सी में हुआ। यहां श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र में मुनिश्री ने सुबह पूजन कर तीर्थ की वंदना की और उपस्थित समाज के श्रेष्ठीजनों को अपने आशीर्वचनों से कृतार्थ किया। यहां पर शांतिधारा में जैन समाज के गुरु भक्तों ने श्रद्धा भक्ति के साथ भाग लिया। इस अवसर पर तीर्थ क्षेत्र के मुख्यद्वार का भूमिपूजन किया गया। <span style="color: #ff0000">मक्सी से पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मक्सी।</strong> स्थानीय श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ क्षेत्र में भावना योग प्रवर्तक, गुणायतन तीर्थ प्रणेता मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज ससंघ का शुक्रवार सुबह मंगल प्रवेश हुआ। मक्सी तीर्थ के पदाधिकारियों, समाजजनों और मक्सीवासियों को गुरुदेव का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>दिए मंगल आशीर्वचन</strong></p>
<p>प्रातः पूजन, द्वीप, गुरु वंदना के बाद ससंघ ने पूरे मक्सी तीर्थ की वंदना कर क्षेत्र को अपने मंगल कदमों से पावन किया। इसके बाद गुरुदेव ने मंगल आशीर्वचन प्रदान किया। सर्वप्रथम शांति धारा की बोली मुकेश पाटौदी, निलेश छाबड़ा देवास, योगेंद्र सेठी इंदौर ने ली। श्री मक्सी तीर्थ के ट्रस्टी अमित कासलीवाल, देवेंद्र कांसल ने महाराज श्री को 100 वर्ष प्राचीन मक्सी तीर्थ के इतिहास की जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वर्षों तीर्थ पर मंदिर को लेकर श्वेतांबर-दिगंबर विवाद बना रहा। जिसे मक्सी तीर्थ के पूर्व अध्यक्ष जैन रत्न स्व. प्रदीपकुमारसिंह कासलीवाल ने अपने अथक प्रयत्नों से इसको सुलझाया।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72945" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010.jpg" alt="" width="1213" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010.jpg 1213w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010-227x300.jpg 227w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010-776x1024.jpg 776w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010-768x1013.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010-1164x1536.jpg 1164w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250125-WA0010-990x1306.jpg 990w" sizes="(max-width: 1213px) 100vw, 1213px" />मुनिश्री ने किया मुख्यद्वार का भूमिपूजन</strong></p>
<p>गुरुदेव के सानिध्य में मक्सी तीर्थ पर विशाल मुख्यद्वार बनाने का भूमि पूजन पुण्यार्जक नमक मंडी ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रकाश वीरबाला कासलीवाल परिवार उज्जैन ने किया। भूमि शुद्धि और भूमि पूजन पंडित अशोकजी जैन शास्त्री ने करवाया। अश्विन रुचि कासलीवाल को गुणायतन तीर्थ का ट्रस्टी बनने पर सम्मानित किया गया।</p>
<p><strong>यह रहे उपस्थित </strong></p>
<p>मक्सी तीर्थ कमेटी के सदस्य एवं पुष्पा कासलीवाल, प्रमोद कासलीवाल इंद्र भवन, योगेंद्र, अरविंद सेठी आनंद भवन, कमलेश कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका, विजय काला सनावद, सुशील पांड्या, विपुल बांझल रितेश जैन, संजय पापड़ीवाला, ऋषभ जैन, नरेंद्र जैन, गिरिश रारा, दादा नारायण यादव, नवीन जैन उज्जैन, मुन्ना सरकार, शैलेंद्र जैन नयापुरा मंदिर उज्जैन, निलेश छाबड़ा देवास आदि समाजश्रेष्ठी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>भावना योग से सकारात्मकता आई और नकारात्मक विचार मिटेः छत्रपति नगर दलाल बाग में हुई मुनिश्री की धर्मसभा </title>
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		<pubDate>Sat, 14 Dec 2024 13:48:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने सुबह धर्मसभा में ‘भावनायोग’ कराते हुए छत्रपति नगर दलाल बाग में प्रबोधन दिया। उन्होंने इसका उपयोग करने से होने वाले प्रभावों के बारे में जैन श्रावकों को सजग किया। रविवार को आधार शिला रखी जाएगी। पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230; इंदौर। जो मेरे भीतर शुद्ध परमात्मा है वह मैं हूं, जो [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने सुबह धर्मसभा में ‘भावनायोग’ कराते हुए छत्रपति नगर दलाल बाग में प्रबोधन दिया। उन्होंने इसका उपयोग करने से होने वाले प्रभावों के बारे में जैन श्रावकों को सजग किया। रविवार को आधार शिला रखी जाएगी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जो मेरे भीतर शुद्ध परमात्मा है वह मैं हूं, जो इस ‘भावना’ का शुद्ध भाव से ध्यान करता है। वह सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने सुबह धर्मसभा में ‘भावनायोग’ कराते हुए छत्रपति नगर दलाल बाग में व्यक्त किए। महोत्सव के अंतिम दिन मुनि श्री ने कहा भावना योग तन को तो स्वस्थ करता ही है। यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है। इसके नियमित प्रयोग से कैंसर जैसे रोग पर भी विजय प्राप्त की जा चुकी है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं।</p>
<p><strong>नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि तो यहां तक कहता हूं कि नियमित भावनायोग करने वालों की ‘अकालमृत्यु’ नहीं होगी। इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है तथा खोया हुआ आत्म विश्वास बढ़़ता है। यह प्रमाणित हो चुका है जिन लोगों ने नियमित भावनायोग किया। उनके विचारों में सकारात्मकता आई तथा नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि आप लोग गुरु से आशीर्वाद लेते हो और आपका मन प्रसन्न हो जाता है यह क्या है? यह भी हमारे अवचेतन मन पर पड़ने वाला एक प्रभाव ही तो है।</p>
<p><strong>सभी कार्य सहज में होते चले जाते हैं</strong></p>
<p>अवचेतन मन पर आशीर्वाद से अंतः स्रावी ग्रंथियां में परिवर्तन आता है तो हमारे अंदर उत्साह और नवऊर्जा का संचार होता है तथा आनंद की अनुभूति होती है और सभी कार्य सहज में होते चले जाते है। उन्होंने आशीर्वाद की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे अंदर जितनी भी मनोविकृतियां हैं यहां तक कि जो लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या की भावना तथा अनिंद्रा जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, उन्हें इन बीमारियों से मुक्ति मिली है।</p>
<p><strong>‘मुझे शांत रहना है’</strong></p>
<p>मुनिश्री ने एक प्रयोग कराते हुए कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति सभा में नहीं होगा। जिसे कभी गुस्सा नहीं आया हो अथवा किसी के गुस्से का शिकार ना बना हो जिन लोगों को बात-बात पर गुस्सा आता हो। ऐसे लोगों को नियमित भावना योग करना चाहिए ‘मुझे शांत रहना है’ इस एक बोध वाक्य ने लोगों की जिंदगियां बदल दी। उन्होंने कहा कि ‘मुझे शांत रहना है’ का बोध वाक्य जब हम बारबार दोहराते है तो उसका असर हमारे अवचेतन मन पर पड़ता है और धीरे-धीरे हमारा गुस्सा शांत हो जाता है।</p>
<p><strong>आत्म विश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि ऐसे कई प्रमाण सामने आए हैं। अनेक लोग जो प्रचंड क्रोधी थे वह शांतमूर्ति बन गए। सभा में यदि कोई हो तो वह भी नियमित 90 दिन का अभ्यास करें तो उनके जीवन में वह भी व्यापक परिवर्तन महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि भावना योग से जिन बच्चों का पढ़़ने में मन नहीं लगता था। उन विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ी और आत्म विश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत हुआ। वह नीट तथा आईआईटी जैसी परीक्षा में अच्छी रेंक के साथ उत्तीर्ण हुए।</p>
<p><strong>मुनि संघ भी रहा मौजूद</strong></p>
<p>धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं प्रवक्ता अविनाश जैन विद्या वाणी ने बताया कि तेज ठंड का प्रभाव होने के बाबजूद भी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेगसागर महाराज, मुनिश्री संधान सागरजी, महाराज सहित सभी क्षुल्लक विराजमान थे।</p>
<p><strong>श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकली</strong></p>
<p>आज की धर्म सभा के पूर्व श्रीजी की भव्य शोभा यात्रा निकली शोभायात्रा में शोधर्म इंद्र भुपेंद्र जैन हाथी पर सवार होकर धर्म ध्वजा के साथ एवं कुबेर इन्द्र नरेंद्र नायक, राकेश नायक, राजेन्द्र नायक रथ पर विराजमान श्री जी को लेकर जिनालय पहुंचे। इस अवसर डॉ. जैनेंद्र जैन, कमल जैन, चैलेंजर, डीएल जैन, प्रकाश दलाल, कैलाश वेद, अनिल जैन, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन आदि शामिल हुए।</p>
<p><strong>मुनि संघ का मंगल विहार रेवती रेंज की ओर</strong></p>
<p>दोपहर में 1.30 बजे शंका समाधान के बाद मुनि संघ का मंगल विहार छत्रपति नगर से रेवती रेंज की ओर हुआ। रात्रि विश्राम सिद्ध विहार कॉलोनी में होकर रविवार को सुबह नवीन जिनालय की आधारशिला रखने के बाद मुनिसंघ रेवतीरेंज की ओर प्रस्थान करेंगे तथा आहारचर्या वहां संपन्न होगी।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में शामिल होने की अपील</strong></p>
<p>यहां पर दोपहर एक बजे सहस्त्रकूट जिनालय की आधारशिला मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ एवं मुनिश्री विनम्र सागर महाराज ससंघ एवं आर्यिका दुर्लभमति संसघ सानिध्य में रखी जाएगी। दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट रेवती रेंज के समस्त पदाधिकारिओं तथा धर्म प्रभावना समिति के महामंत्री हर्ष जैन एवं दद्दू ने सभी महानुभावों से कार्यक्रम में पधारने की अपील की है।</p>
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		<title>आचार्यश्री प्रमाण सागर जी विहार कर छत्रपतिनगर के आदिनाथ जिनालय पहुंचेंगेः मंगल अगवानी में जैन धर्मानुयायी लेंगे धर्म लाभ </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Dec 2024 12:39:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इंदौर के तिलकनगर में विराजित पूज्य आचार्यश्री प्रमाण सागर जी महाराज यहां से विहार कर तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय में मंगल प्रवेश करेंगे। यहां उनकी भव्य अगवानी की जाएगी। शाम को शंका समाधान होगा। अगवानी के लिए बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी जुटेंगे। पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230; इंदौर। श्रमण संस्कृति समाधिस्थ महामहिम आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इंदौर के तिलकनगर में विराजित पूज्य आचार्यश्री प्रमाण सागर जी महाराज यहां से विहार कर तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय में मंगल प्रवेश करेंगे। यहां उनकी भव्य अगवानी की जाएगी। शाम को शंका समाधान होगा। अगवानी के लिए बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी जुटेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर से यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p>इंदौर। श्रमण संस्कृति समाधिस्थ महामहिम आचार्य श्री विद्यासागर सागर जी महाराज के प्रयाग शिष्य गुणायतन एवंशंका समाधान प्रणेता परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ससंघ का मंगल विहार बुधवार दोपहर 1.30 बजे तिलकनगर से तीर्थ स्वरूप आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में होगा। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने बताया कि मंगल अगवानी जुलूस दोपहर ठीक 2.45 बजे मोदी जी की नसिया बड़ा गणपति से सीताराम पार्क, महावीर बाग, अग्रसेन नगर से शुरू होगा। मुनिश्री का मंगल प्रवेश श्री आदिनाथ जिनालय में होगा।</p>
<p><strong>शंका समाधान शाम को होगा</strong></p>
<p>ट्रस्ट कार्य अध्यक्ष डॉ जैनेंद्र जैन ने बताया कि बुधवार शाम को शंका समाधान ठीक 5.45 बजे दलाल बाग छत्रपति नगर इंदौर में होगा।</p>
<p><strong>अगवानी में शामिल होने की अपील</strong></p>
<p>महामंत्री विपुल बांझल ने चारों कॉलोनी छत्रपति नगर, अग्रसेन नगर, गौरव नगर, महावीर बाग के सभी समाजजन मुनि श्री प्रमाण सागर जी संसघ की मंगल अगवानी में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।</p>
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		<title>समाजजन हुए भावविभोर : मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज और मुनिश्री विनम्रसागर जी का हुआ मंगल मिलन </title>
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		<pubDate>Sun, 16 Jun 2024 09:05:21 +0000</pubDate>
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<p>समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस मिलन के हजारों समाज जन साक्षी बने और मिलन देखकर भाव विभोर हुए।</p>
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