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	<title>मुनिराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मुनिराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मूलाचार का मार्ग दिखा, जीवन को अर्थ दिलाया : प्रथमाचार्य शांतिसागरजी को मुनिराज ने भी किया स्मरण  </title>
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		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 13:09:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विदिशा में विराजित मुनिश्री सर्वार्थसागरजी ने आचार्यश्री के जन्म जयंती पर स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया। उन्हें संयम, शील और साधना का अमर पुंज बताया। मंगलवार को अपने प्रवचनों के दौरान आचार्य श्री की वंदना कर धर्मप्रेमी जनता ने भी पुण्यलाभ लिया। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ विदिशा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विदिशा में विराजित मुनिश्री सर्वार्थसागरजी ने आचार्यश्री के जन्म जयंती पर स्मरण कर उनका गुणानुवाद किया। उन्हें संयम, शील और साधना का अमर पुंज बताया। मंगलवार को अपने प्रवचनों के दौरान आचार्य श्री की वंदना कर धर्मप्रेमी जनता ने भी पुण्यलाभ लिया। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज जी ससंघ विदिशा में विराजमान हैं। उनके शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने विदिशा में अपने प्रवचन में कहा कि आचार्य शांतिसागर, तप के ज्योतिर्मय प्रणेता, संयम, शील और साधना के अमर पुंज विधाता।</p>
<p>बीसवीं सदी में धर्म का दीप पुनः जलाया, मूलाचार का मार्ग दिखा, जीवन को अर्थ दिलाया।</p>
<p>चरणों में जिनके झुकता है समय भी नतमस्तक, गुरुता की प्रतिमा बने, जिनका आभास अलौकिक।</p>
<p>संन्यास में जिनकी महिमा रही चिर अमर अपार, उन प्रथमाचार्य को बारंबार वंदन अपार।</p>
<p>ध्यान, तप और त्याग की साक्षात मूर्ति बने, संयम पथ पर चलकर जग को दीपक जैसे तले।</p>
<p>प्रथमाचार्य का गौरव जिनसे फिर जाग उठा, जैन धर्म का स्वाभिमान जिनसे फिर भाग उठा।</p>
<p>गर्भ में भी तप की थी जिनकी पावन झलक, ऐसे संत थे वे, जैसे भगवान की कोई झलक।</p>
<p>मूलाचार के अनुशासन को जीवन बना डाला, धरा पर चलती साधना को स्वरूप बना डाला।</p>
<p>इधर, अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष अभिषेक अशोक पाटील ने बताया कि गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या में विराजमान हैं। आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के साक्षात तीन बार दर्शन करने वाली हैं गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी, जिन्होने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी के तीन बार दर्शन किए हैं। 1. नीरा (महाराष्ट्र ) में सन् 1954 में, 2. बारामती (महा.) में सन् 1955 में,3 कुंथलगिरि सिद्धक्षेत्र (महा.) में सन् 1955 में संल्लेखना के समय। सन् 1955 में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी ने कुंथलगिरि में देशभूषण-कुलभूषण जी की प्रतिमा के समक्ष 12 वर्ष की संल्लेखना ली थी। दिगम्बर साधु संत परम्परा में वर्तमान युग में अनेक तपस्वी, ज्ञानी ध्यानी संत हुए। उनमें आचार्य श्री शांतिसागरजी महाराज एक ऐसे प्रमुख संत श्रेष्ठ तपस्वी रत्न हुए हैं, जिनकी अगाध विद्वता, कठोर तपश्चर्या, प्रगाढ़ धर्म श्रद्धा, आदर्श चरित्र और अनुपम त्याग ने धर्म की ज्योति प्रज्वलित की है। आपने जो किया वह अभूतपूर्व है।</p>
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		<title>विस्तारवादी नीति से साधु धर्म का पालन नहीं होता-आचार्य विशुद्ध सागर: 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे </title>
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		<pubDate>Tue, 15 Apr 2025 13:14:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं।खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन आए [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं।खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन आए हैं। <span style="color: #ff0000">खरगोन से पढ़िए दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> खरगोन।</strong> नगर का राधा कुंज सभागार, टैगोर पार्क कॉलोनी, पोस्ट ऑफिस चौराहा सभी जगह दिगंबर जैन संत, आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, एलक महाराज, क्षुल्लक महाराज,ब्रह्मचारी दीदी, भैया दिखाई दे रहे हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में चल रही भगवान महावीर मंदिर वेदी शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव में मंगलवार प्रातः गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ससंघ और गणिनी आर्यिका विशिष्ट श्री माताजी का आगमन हुआ। खरगोन नगर की इतिहास में पहली बार आचार्य, मुनिराज, आर्यिका माताजी, ऐलक, क्षुल्लक महाराज, ब्रह्मचारी दीदी,भैया, प्रतिमा धारी श्रावक-श्राविका सहित लगभग 80 त्यागी वृंद खरगोन की भूमि पर पधारे। गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज आर्यिका माताजी की अगवानी धूमधाम से नगरवासियों ने की। जो विकल्प मुक्त व संकल्प से युक्त है, उसे संसार का कोई भी तूफान हिला नहीं सकता।</p>
<p>आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अध्यात्म गंगा में समाहित कराते हुए आचार्य कुंदकुंद द्वारा लिखित समयसार ग्रंथ की प्राकृत गाथाओं के संदर्भ में कहा कि साधु समतावादी होता है, उसका सबके प्रति करुणा का भाव होता है। साम्राज्य परंपरा में साधु परंपरा नहीं है। राजा अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए कुछ भी करता है, लेकिन साधु अपनी साम्य समता भाव के कारण जाना जाता है। महापुरुष कभी भी व्यर्थ बकवास नहीं करता, सज्जन पुरुष सभी जीवो के कल्याण के लिए कार्य करता है, जो सिद्धांतों के विपरीत मान्यता रखता है वह दुखी रहता है।</p>
<p>जो व्यक्ति या साधु विकल्प से मुक्त और संकल्प से युक्त होता है। उसे संसार का कोई तूफान हिला नहीं सकता। हमेशा विवेकपूर्ण बोलना चाहिए। ध्यान रहे प्रज्ञाबल जिसके पास है बाहुबल उसका कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता। भारत का प्रज्ञाबल मेघा प्रचंड है। भारत के इंजीनियर, डॉक्टर सभी को विश्व में पसंद किया जाता है, भारत का अध्यात्म वस्तु का स्वभाव है, भारत में साधु होते हैं इसलिए धर्म यहां सुरक्षित है।</p>
<p><strong>भौतिक वस्तुओं में सुख नहीं है: गणधर विवर्धन सागर</strong></p>
<p>गणाचार्य विराग सागर जी महाराज के शिष्य गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर जी महाराज ने आचार्य विशुद्ध सागर जी के साथ हुए मिलन को सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने कहा कि भौतिक वस्तुओं में सुख ढूंढने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता है। सद कर्तव्यों का पालन करो, व्यसनों से दूर रहो, गुरु के चरणों के समीप रहो। दोनों संघों का आत्मीय मिलन देखकर श्रद्धालुओं ने हर्ष व्यक्त किया।</p>
<p><strong>सोलह स्वप्नों की प्रस्तुति ने मन मोहा</strong></p>
<p>सायंकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति महिला मंडल द्वारा दी गई। विभिन्न साज सज्जा के साथ भगवान महावीर के पांच नाम की नाटिका नृत्य की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया। प्रातः काल अभिषेक, शांति धारा, मंडल विधान,पूजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित धर्मचंद शास्त्री ने संपन्न कराया।</p>
<p><strong>1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं आचार्य विशुद्ध सागर जी </strong></p>
<p>मीडिया प्रभारी राजेंद्र जैन, महावीर आशीष जैन ने बताया कि आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने 35 वर्षों के साधु काल में सर्वाधिक पद विहार किया है। वे संपूर्ण भारतवर्ष में अभी तक 1 लाख 25 हजार किमी पद विहार कर चुके हैं। उल्लेखनीय है कि दिगंबर जैन साधु 24 घंटे में मात्र एक बार विधि पूर्वक आहार जल ग्रहण करते हैं। दिगंबर रहते हैं, पैदल पद विहार करते हैं ,किसी भी तरह के वाहनों का उपयोग नहीं करते हैं। भीषण गर्मी में भी पंखा कूलर आदि किसी भी प्रकार के भौतिक संसाधनों का उपयोग भी नहीं करते हैं। भीषण तापमान में भी पैदल पद विहार करना आम जनों को आश्चर्य में डालता है लेकिन, उनका तप, त्याग, तपस्या के बल पर यह सब संभव हो पता है। सायंकालीन आरती करने का सौभाग्यचंदा बडजात्या, मनीष रीना बड़जात्या ने और पाद प्रक्षालन चिंतामन जैन खंडवा, शास्त्र भेंट दयाचंद जैन खरगोन ने किया। आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन अरुण, तरुण, वरुण धनोते ने किया।</p>
<p><strong> बुधवार वेदी में विराजेंगे तीर्थंकर भगवान </strong></p>
<p>वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव संयोजक अनिल जैन, महामंत्री अरुण धनोते ,कोषाध्यक्ष जितेंद्र जैन ने बताया कि 80 वर्ष प्राचीन मंदिर को जीर्णाेद्धार कर नूतन मार्बल का मंदिर बनाया गया है। जिसमें मूल नायक भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ नव प्रतिष्ठित शांतिनाथ भगवान, सुमति नाथ भगवान, चंद्रप्रभ भगवान, शीतलनाथ भगवान, पदमप्रभ भगवान की प्रतिमाएं नूतन जिन मंदिर में बुधवार प्रातः 9 बजे विराजमान की जाएगी।</p>
<p><strong>रथ यात्रा से मंदिर पहुंचेंगे  </strong></p>
<p>बुधवार प्रातः 7 बजे रथयात्रा राधा कुंज परिसर से महावीर मंदिर पोस्ट ऑफिस चौराहा पहुंचेगी। जहां नूतन वेदी में भगवान विराजमान होने के बाद आचार्य विशुद्ध सागर जी के मंगल प्रवचन होंगे। समाज अध्यक्ष विनोद जैन, विजय जैन, प्रदीप जैन, अरुण धनोते, जितेंद्र जैन, अनिल जैन, सुनील जैन ठेकेदार,अरुण जैन ठेकेदार, पंकज गोधा, राकेश जैन ने धर्म लाभ लेने की अपील की है।</p>
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		<title>14 से 16 अप्रैल को नवीन जिनालय का शिखर प्रतिष्ठा महोत्सवः आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी ससंघ के सानिध्य में </title>
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		<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 07:48:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर महावीर चैत्यालय खरगोन में नवीन जिनालय का शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित होने वाला है। जिसमें चर्या शिरोमणि आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का सानिध्य खरगोन नगर सहित सम्पूर्ण निमाड़वासियों को प्राप्त हो रहा है। पढ़िए खरगोन से अजय पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230; खरगोन। नवग्रह की नगरी खरगोन नगर में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर महावीर चैत्यालय खरगोन में नवीन जिनालय का शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित होने वाला है। जिसमें चर्या शिरोमणि आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का सानिध्य खरगोन नगर सहित सम्पूर्ण निमाड़वासियों को प्राप्त हो रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए खरगोन से अजय पंचोलिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खरगोन।</strong> नवग्रह की नगरी खरगोन नगर में श्री दिगंबर महावीर चैत्यालय खरगोन में नवीन जिनालय का शिखर प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम दिनांक 14 अप्रैल से 16 अप्रैल 2025 में आयोजित होने वाला है। जिसमें चर्या शिरोमणि आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का सानिध्य खरगोन नगर सहित सम्पूर्ण निमाड़वासियों को प्राप्त हो रहा है।</p>
<p><strong>गुरुवर ससंघ के बढ़ते कदम </strong></p>
<p>गुरुवर ससंघ के बढ़ते कदम खरगोन की ओर निरंतर जारी है। तपती धूप में पूरे मुनिराज अनवरत पद विहार कर रहे हैं। एक समय भोजन और 2 समय पैदल चलना भूमि पर शयन करना। यह चर्यापालन प्रतिदिन सभी मुनिराज निरंतर करते हुए निमाड़ की सरजमीं पर प्रवेश के लिए आगे बढ़ रहे है। समिति के प्रचार संयोजक डेविड जैन ने बताया कि गुरुवर के आगमन की प्रतिक्षा निमाड़ का हर भक्त कर रहा है और स्वागत की तैयारी कर रहा है।</p>
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		<title>विहार में सड़क पर हादसा : नशे में मोटरसाइकिल चालक ने टक्कर मारी, मुनि महाराज घायल </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Feb 2023 10:28:33 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जिंतूर (महाराष्ट्र) में विहार के दौरान बाइक पर सवार 3 शराबियों ने पूज्य मुनि श्री सौम्यसागर महाराज को टक्कर मारी, जिससे उनके एक पैर और एक हाथ में माइनर फ्रैक्चर हुआ है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; जिंतूर (महाराष्ट्र)। विहार के दौरान बाइक पर सवार 3 शराबियों ने पूज्य मुनि श्री सौम्यसागर महाराज को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जिंतूर (महाराष्ट्र) में विहार के दौरान बाइक पर सवार 3 शराबियों ने पूज्य मुनि श्री सौम्यसागर महाराज को टक्कर मारी, जिससे उनके एक पैर और एक हाथ में माइनर फ्रैक्चर हुआ है।<span style="color: #ff0000;"> पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जिंतूर (महाराष्ट्र)।</strong> विहार के दौरान बाइक पर सवार 3 शराबियों ने पूज्य मुनि श्री सौम्यसागर महाराज को टक्कर मारी, जिससे उनके एक पैर और एक हाथ में माइनर फ्रैक्चर हुआ है। सिर में भी थोड़ी सी चोट है लेकिन वे स्वस्थ हैं। इस घटना में विहार में साथ चल रहा जिंतूर का एक श्रावक भी घायल हुआ है। उसे ज्यादा चोटें आई हैं। घटना 26 फरवरी की दोपहर बाद की है। घटनास्थल से जिंतूर की दूरी 10 किलोमीटर रह गई थी। अचानक हुए इस घटनाक्रम में अफरा तफरी मच गई और जैन समाज के लोग एकत्रित हो गए। सूचना मिलने पर डोंगरगढ़ में विराजमान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के पास ब्रह्मचारी तात्या भैया थे, वे सीधे जिंतूर पहुंच गए हैं और महाराज जी शीघ्र स्वस्थ हो, इसके लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। मुनि संघ में 6 मुनि महाराज हैं।</p>
<p>27 फरवरी को सुबह 10:30 बजे ब्रह्मचारी तात्या भैया जी से मेरी बात हुई है उन्होंने महाराज जी के स्वास्थ्य के बारे में यह पूरी जानकारी दी है चिंता की कोई बात नहीं है सभी धर्म प्रेमी बंधु मुनि श्री सौम्यसागर महाराज जल्दी स्वस्थ हो इसके लिए कम से कम एक माला नमोकार मंत्र की अवश्य फेरे। विहार में इस तरह की घटनाएं ना हो इसके लिए संबंधित क्षेत्र के समाजसेवियों को ध्यान रखना होगा और पुलिस को सूचना देना होगी</p>
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		<title>गर्भकल्याणक : गिरार जी में आचार्य विशुद्ध सागर जी ससंघ के सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 18 Feb 2023 12:43:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vishuddha Sagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Adinath Bhagwan]]></category>
		<category><![CDATA[Girar ji]]></category>
		<category><![CDATA[jain dharma]]></category>
		<category><![CDATA[panchkalyanak]]></category>
		<category><![CDATA[Pratishtha Mahotsav]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विशुद्ध सागर]]></category>
		<category><![CDATA[आदिनाथ भगवान]]></category>
		<category><![CDATA[गर्भकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[जैन धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[तीर्थंकर]]></category>
		<category><![CDATA[नाभिराय]]></category>
		<category><![CDATA[पंचकल्याणक]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव]]></category>
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					<description><![CDATA[अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया में चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर ससंघ 27 मुनिराजों के पावन सानिध्य में आयोजित हो रहे श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में गर्भकल्याणक मनाया गया। पढ़िए प्रियंक सर्राफ की विस्तृत रिपोर्ट&#8230; गिरार(मड़ावरा)। धसान नदी के किनारे विराजमान जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया में चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर ससंघ 27 मुनिराजों के पावन सानिध्य में आयोजित हो रहे श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में गर्भकल्याणक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए प्रियंक सर्राफ की विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>गिरार(मड़ावरा)।</strong> धसान नदी के किनारे विराजमान जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर अतिशयकारी आदिनाथ भगवान की छत्रछाया में चर्याशिरोमणी आचार्य विशुद्ध सागर ससंघ 27 मुनिराजों के पावन सानिध्य में आयोजित हो रहे श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के द्वितीय दिवस के कार्यक्रम में गर्भकल्याणक मनाया गया। गर्भकल्याणक के उत्तर रूप की क्रियाओं को कार्यक्रम के प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी जयनिशांत व सहप्रतिष्ठाचार्य सनत कुमार,विनोद कुमार द्वारा सम्पन्न कराया गया। महोत्सव में भोपाल से आए संगीतकार रामकुमार एंड पार्टी ने माहौल को धर्ममय बनाया। महोत्सव को सफल बनाने में अतिशय क्षेत्र गिरार गिरी प्रबंध कारणी समिति द्वारा पूर्णमनोभाव से कार्य किया जा रहा है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-38282" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025.jpg" alt="" width="1280" height="960" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/02/IMG-20230218-WA0025-990x743.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>व्यक्ति का जन्म लेना व मरण होना भी हिंसा</strong></p>
<p>महोत्सव के द्वितीय दिवस की क्रियाओं में सुबह 6.15 बजे से भगवान जिनेन्द्र देव की प्रतिमा का अभिषेक,शांतिधारा, नित्य पूजा, गर्भकल्याणक पूजन किया गया। इसके बाद हवन किया गया। सुबह नौ बजे भव्य सभागार में विराजमान आचार्य विशुद्ध सागर जी ने उपस्थित जनसमुदाय को अपनी मंगल देशना देते हुए कहा कि किसी संयोग का वियोग निश्चित है। व्यक्ति का जन्म लेना व मरण होना भी हिंसा है। धर्म उन लोगों से नहीं चलता जो खूंटे से बंधे हैं। धर्म उन लोगों से चलता है जो विश्व में सबके साथ एकता के साथ खड़े हैं और अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बताए गए 16 स्वप्नों के फल</strong></p>
<p>दोपहर की क्रियाओं में माता मरुदेवी की गोद भराई(सीमंतनी क्रिया) का आयोजन किया गया, जिसमें महिलाओं ने भक्तिभाव पूर्वक माता की गोद भराई की। रात्रि कालीन कार्यक्रम में देवियों द्वारा माता को जगाना, मंगल स्नान, श्रृंगार, छप्पन कुमारियों द्वारा भेंट समर्पण एवं महाराज नाभिराय के दरबार का आयोजन किया गया। इसके बाद विद्वानों द्वारा तत्वचर्चा के उपरांत माता मरुदेवी द्वारा रात्रि में देखे गए 16 स्वप्नों के फल की जिज्ञासा महाराज नाभिराय से की गई, जिसके फलादेशों को महाराज नाभिराय द्वारा बताया गया।</p>
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