<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B5-%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Fri, 24 Oct 2025 12:34:34 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>दर्शनोदय तीर्थ तक पदयात्रा 2 नवंबर से आरंभ : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सानिध्य में होगा भगवान आदिनाथ का महामस्तकाभिषेक </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_pilgrimage_to_darshanodaya_tirtha_will_begin_on_november_2/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_pilgrimage_to_darshanodaya_tirtha_will_begin_on_november_2/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 12:34:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[AshokNagar]]></category>
		<category><![CDATA[Darshanodaya Tirtha]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Adinath]]></category>
		<category><![CDATA[Mahamastakabhishek]]></category>
		<category><![CDATA[Munipungav Shri Sudhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Padyatra]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अशोकनगर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दर्शनोदय तीर्थ]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पदयात्रा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान आदिनाथ]]></category>
		<category><![CDATA[महामस्तकाभिषेक]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=92905</guid>

					<description><![CDATA[तीर्थनगरी अशोकनगर से आगामी 2 नवंबर को आरंभ होने जा रही पावन पदयात्रा धर्म-प्रेमियों के लिए एक अलौकिक अवसर लेकर आ रही है। यह पदयात्रा मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में प्रारंभ होगी। अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; अशोकनगर। तीर्थनगरी अशोकनगर से आगामी 2 नवंबर को आरंभ होने जा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>तीर्थनगरी अशोकनगर से आगामी 2 नवंबर को आरंभ होने जा रही पावन पदयात्रा धर्म-प्रेमियों के लिए एक अलौकिक अवसर लेकर आ रही है। यह पदयात्रा मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में प्रारंभ होगी। <span style="color: #ff0000">अशोकनगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अशोकनगर।</strong> तीर्थनगरी अशोकनगर से आगामी 2 नवंबर को आरंभ होने जा रही पावन पदयात्रा धर्म-प्रेमियों के लिए एक अलौकिक अवसर लेकर आ रही है। यह पदयात्रा मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में प्रारंभ होगी और 4 नवंबर की प्रातःकालीन बेला में दर्शनोदय तीर्थ पहुँचकर संपन्न होगी। तीर्थ प्रवेश के पावन अवसर पर भगवान आदिनाथ का भव्य महामस्तकाभिषेक किया जाएगा।</p>
<p>जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेकर पुण्यार्जन का लाभ प्राप्त करेंगे। यह आयोजन न केवल धर्म-भावना को जागृत करेगा, बल्कि साधु-संघ के पदविहार का दुर्लभ साक्षात्कार भी कराएगा। श्रद्धालुओं से आह्वान है कि वे इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनें और जगतपूज्य गुरुदेव के साथ पदविहार का पुण्य लाभ प्राप्त करें।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_pilgrimage_to_darshanodaya_tirtha_will_begin_on_november_2/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अशोकनगर में जारी साधना शिविर से लाइव : साधना का प्रभात जब गुरु ने शिष्यों को सरस्वती पुत्र बनाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/live_from_the_sadhna_camp_going_on_in_ashoknagar/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/live_from_the_sadhna_camp_going_on_in_ashoknagar/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 10:53:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[AshokNagar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Jabalpur]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munipungav Shri Sudhasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[New Galla Mandi Camp Site]]></category>
		<category><![CDATA[Sadhana Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Shirshasana]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अशोकनगर]]></category>
		<category><![CDATA[जबलपुर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[नवीन गल्ला मंडी शिविर स्थल]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[शीर्षासन]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[साधना शिविर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=89324</guid>

					<description><![CDATA[पांडाल में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज मंच पर आ चुके हैं। मौन पसरा है, केवल गुरुजी की वाणी गूंज रही है। वे हर एक शिविरार्थी के मस्तक पर बीजाक्षरों का रोपण कर रहे हैं। अशोक नगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की लाइव रिपोर्ट&#8230; सुबह के ठीक 3.30 बजे&#8230; अशोकनगर में शिविरार्थियों के शयन स्थल [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>पांडाल में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज मंच पर आ चुके हैं। मौन पसरा है, केवल गुरुजी की वाणी गूंज रही है। वे हर एक शिविरार्थी के मस्तक पर बीजाक्षरों का रोपण कर रहे हैं। <span style="color: #ff0000">अशोक नगर से पढ़िए, राजीव सिंघई की लाइव रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सुबह के ठीक 3.30 बजे&#8230;</strong></p>
<p>अशोकनगर में शिविरार्थियों के शयन स्थल पर अचानक गूंजती मधुर धुन-</p>
<p>’जागो मोहन प्यारे&#8230;’ यह कोई साधारण आवाज नहीं। यह ब्रह्मचारी विनोद भैया जबलपुर का स्वर है, जो स्नेह और वात्सल्य से लबालब भरा हुआ है। धीरे-धीरे सुप्रभात स्तोत्र की धुन गूंजती है और एक-एक कर शिविरार्थी निंद्रा से बाहर आकर जीवन के नव प्रभात में प्रवेश करते हैं। धोती-दुपट्टा पहनकर सभी तैयार हैं। चारों ओर शांति, लेकिन नवीन गल्ला मंडी शिविर स्थल मानो जीवन्त हो उठा है। श्री पार्श्व जैन मिलन की टीम धोती-दुपट्टा वितरित कर रही है, वहीं बाहर भक्तामर मंडल के युवा हाथ जोड़कर विनम्र आग्रह कर रहे हैं -बस में बैठ जाइए&#8230; करीब 100 बसें कतार में खड़ी, हजारों शिविरार्थियों को साधना-स्थल तक पहुंचाने को तत्पर।</p>
<p><strong>सुबह 5 बज चुके हैं&#8230;</strong></p>
<p>पांडाल में मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज मंच पर आ चुके हैं। मौन पसरा है, केवल गुरुजी की वाणी गूंज रही है। वे हर एक शिविरार्थी के मस्तक पर बीजाक्षरों का रोपण कर रहे हैं- ठीक वैसे ही जैसे पंच कल्याणक में पाषाण की प्रतिमाओं में करते हैं। क्षणभर में शिविरार्थी सामान्य नहीं रहे-वे अब सरस्वती पुत्र हो गए। गुरुजी ने उनके भीतर की सुप्त शक्तियों को जागृत कर दिया।</p>
<p><strong>शिविरार्थियों की आंखें छलक उठीं</strong></p>
<p>आंसुओं से भीगे अधरों पर केवल एक ही भावना थीदृ हे गुरुवर! आपने हमें अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश में खड़ा कर दिया। यह उपकार जन्म-जन्मांतर तक नहीं भूलेंगे। यदि कभी आवश्यकता पड़ी, तो अपने प्राणों तक को आपके चरणों में अर्पित कर देंगे। वात्सल्य और भक्ति का यह प्रवाह इतना गहरा था कि गुरु और शिष्य के बीच कोई दूरी ही नहीं रह गई। हर हृदय एक स्वर में बोल उठा-हे गुरुवर, हमें ऐसी शक्ति देना कि हम बार-बार जन्म लें तो भी आपके ही गुण गाएं। हमारे जीवन की हर सांस आपके चरणों की धूलि से सुगंधित हो। यदि जन्म लेना भी पड़े तो केवल आपके चरणों में आकर।”यही वह अनंत प्रेम से भरा गुरु-शिष्य संबंध है, जो काल के हर प्रवाह में अमर रहेगा, अविच्छिन्न रहेगा।</p>
<p>इस शिविर में 8 साल का बालक भी है और 86 वर्ष का बुजुर्ग भी। मंच पर दोनों का संगम देख पूरी सभा भाव-विभोर हो गई। जब 86 वर्षीय शिविरार्थी ने वहीं शीर्षासन किया तो पूरा पांडाल तालियों से गूंज उठा।</p>
<p><strong>सुबह 6 बजे।</strong></p>
<p>पूजन-स्थल पर मंगलाष्टक गूंज रहा है। अभिषेक-शांतिधारा में हर कोई पुण्यशाली बनना चाहता है, जिसका नाम गुरु मुख से लिया जाए। बोली पर बोली चढ़ती जा रही है। सवा लाख&#8230; दो लाख! और अंततः बोली फाइनल होती है। पूजन के बाद शिविरार्थी भिक्षावृत्ति के लिए शहर में निकले। कतारबद्ध, श्वेत-वस्त्रों में सिर झुकाए जब वे सड़कों पर चले तो पूरा शहर अचंभित रह गया। ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। यह चर्चा का विषय बन गया। भोजन के उपरांत विश्राम, फिर दोपहर 2 बजे गुरुजी मंच पर। कक्षा शुरू होने से पहले शरारती शिविरार्थियों को गुरु-वचन की डांट भी मिली। याद दिलाया गया कि साधना अनुशासन से ही सिद्ध होती है। फिर प्रश्नोत्तर, छहढाला, जिज्ञासा समाधान- दिनभर साधना का प्रवाह चलता रहा। इस बीच बेल्जियम से आए गौरव जैन ने पूछा-हम आलू-प्याज नहीं खाते, लोग पूछते हैं क्यों? क्या कोई ऐसी जैन पुस्तक है जो उन्हें दे सकूं?</p>
<p>एक शिविरार्थी ने कहा- मैंने अपनी मां को 75 प्रतिशत लीवर डोनेट किया, पर मां को पता नहीं, ऐसा संबंध कैसे?”गुरुजी ने उत्तर दिया-जब निमित्त-नैमित्तिक संबंध गहरे होते हैं, तभी ऐसे भाव उपजते हैं और अंत में वह अमर वाणी- धर्म रूढ़ी़ नहीं है। धर्म एक जीवंत कहानी है। धर्म जीने की कला है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/live_from_the_sadhna_camp_going_on_in_ashoknagar/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>समाज को तनाव में डालने वाली प्रतिक्रिया से बचें : जैन समाज और जैन धर्म की सुरक्षा ही हमारा कर्तव्य  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/avoid_reactions_that_put_society_into_tension/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/avoid_reactions_that_put_society_into_tension/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 Aug 2025 14:07:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chanderi]]></category>
		<category><![CDATA[Curiosity]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Munipungav Shri Sudhasagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Reaction]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Unpleasant Controversy]]></category>
		<category><![CDATA[अनिष्टकारी विवाद]]></category>
		<category><![CDATA[चंदेरी]]></category>
		<category><![CDATA[जिज्ञासा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतिक्रिया]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=88193</guid>

					<description><![CDATA[किसी भी चैनल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दें और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियों में जुट जाएं एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। चंदेरी से पढ़िए, अमित जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>किसी भी चैनल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दें और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियों में जुट जाएं एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। <span style="color: #ff0000">चंदेरी से पढ़िए, अमित जैन एडवोकेट की यह समाजोपयोगी अपील&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>चंदेरी।</strong> कुछ दिनों से मन बहुत व्यथित है सोचा कि मन की व्यथा समस्त मुनि संघ, समस्त आर्यिका संघ एवं समस्त समाज जनों तक पहुंचाई जाए। जैसा कि आप सभी लोगों को विदित है कि कुछ दिनों पहले एक समाज जन बुजुर्ग ने अशोकनगर में निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज के समक्ष एक जिज्ञासा रखी। जिसको लेकर पूरे भारत वर्ष के जैन समाज में तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। समाज जनों से विनम्रता पूर्वक एक आग्रह एक निवेदन करना चाहता हूं कि इस तरह की जिज्ञासाएं या मन के भाव सार्वजनिक मंचों से उद्घोषित न करें और समाज के जिम्मेदार व्यक्तियों से भी आग्रह और निवेदन है कि इस तरह की जिज्ञासाओं को जिनसे समाज में तनाव और बिखराव की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है, प्रचारित या प्रसारित न करें और न ही किसी अन्य को करने दें। अगर किसी वजह से इस तरह की जिज्ञासाएं या किसी के मन के भाव सोशल मीडिया पर प्रचारित या प्रसारित हो भी जाएं तो धर्म को बचाने के लिए और समाज में सामंजस्यता बनाए रखने के लिए समाजजन, मुनिसंघ, एवं समस्त आर्यिका संघ सार्वजनिक मंचों से ऐसी जिज्ञासा और किसी के मन के भावों के प्रति प्रतिक्रिया स्वरूप कुछ भी गलत या अशिष्ट भाषा का उपयोग न करे क्योंकि, वैसे ही जैन धर्म और जैन समाज इस दुनिया में बहुत कम है।</p>
<p>अगर मुनिसंघ, आर्यिका संघ एवं समस्त जैन-जैनेत्तर समाज इसी तरह से सार्वजनिक मंचों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया स्वरूप अशिष्ट भाषा का उपयोग करते रहेंगे तो समाज में तनाव तथा बिखराव की स्थिति उत्पन्न होती रहेगी। अतः धर्म और समाज से जुडे होने के नाते धर्म को चिरकाल तक इस दुनिया में बचाए रखने के लिए समस्त मुनिसंघों, समस्त आर्यिका संघों एवं समस्त समाज जनों से विनम्रता पूर्वक आग्रह एवं निवेदन करता हूं कि किसी भी चैनल या सोशल मीडिया के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया न दें और इस अनिष्टकारी विवाद को यहीं समाप्त कर निकट आ रहे सबसे बडे पर्व यानि पर्वराज पर्यूषण की तैयारियों में जुट जाएं एवं आत्म कल्याण एवं जनकल्याण के निमित्त कार्य करते हुए अपने जीवन को सफल बनाएं। मेरे शब्दों से या मेरी बातों से किसी के दिल को ठेस लगी हो, या किसी का दिल दुखी हुआ हो तो मैं आप सभी करबद्ध होकर क्षमा याचना करता हूं।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/avoid_reactions_that_put_society_into_tension/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर की द्वादशवर्षीय परीक्षा: 220 परीक्षार्थियों की परीक्षा अटा मंदिर में हुई  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/twelfth_year_examination_of_shramana_sanskriti_sansthan_sanganer/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/twelfth_year_examination_of_shramana_sanskriti_sansthan_sanganer/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 27 Apr 2025 11:24:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Abhinandanoday Teerthkshetra Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lalitpur]]></category>
		<category><![CDATA[Munipungav Shri Sudhasagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shraman Sanskriti Sansthan Sanganer]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Digambar Jain Panchayat Samiti]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Twelfth Year Examination]]></category>
		<category><![CDATA[अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वादशवर्षीय परीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[ललितपुर]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=79883</guid>

					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति (रजि.) समिति के सहयोग से अवशेष 241 में 220 परीक्षार्थियों की परीक्षा अटा मंदिर में संपन्न हुई। ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की खबर&#8230; ललितपुर। समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति (रजि.) समिति के सहयोग से अवशेष 241 में 220 परीक्षार्थियों की परीक्षा अटा मंदिर में संपन्न हुई। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए अक्षय अलय की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> समाधिस्थ आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य मुनिपुंगव श्री सुधासागर महाराज की प्रेरणा से संचालित श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर जयपुर द्वारा 12 वर्षीय स्वाध्याय पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। श्री दिगंबर जैन पंचायत समिति (रजि.) के सहयोग से अवशेष 241 में 220 परीक्षार्थियों की परीक्षा अटा मंदिर में संपन्न हुई। जिसमें अभिनंदनोदय तीर्थक्षेत्र मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, अशोक जैन दैलवारा, अटा मंदिर प्रबंधक मनोज जैन बबीना, अजय जैन गंगचारी, बडा मंदिर प्रबंधक अजित जैन गदयाना, आनंद जैन भागनगर, बाहुबली नगर के प्रबंधक विकास जैन सौंरई, अभय जैन रिंकू का विशेष सहयोग रहा।</p>
<p>परीक्षा प्रभारी आलोक मोदी, राजेश शास्त्री के मार्गदर्शन में परीक्षा की गई। उन्होंने बताया कि द्वादशवर्षीय परीक्षा में उत्तीर्ण होने के पश्चात सिद्धांत शास्त्री, सिद्धांत विशारद, सिद्धांत आचार्य की उपाधि प्रदान की जाती है। द्वादशवर्षीय पाठ्यक्रम में अध्ययन करके श्रावक-श्राविकाएं एवं युवा धर्म के ज्ञान सीख रहे हैं। परीक्षा को पूर्ण कराने में आलोक मोदी, राजेश शास्त्री, दिलीप शास्त्री, वंदित जैन का विशेष सहयोग रहा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/twelfth_year_examination_of_shramana_sanskriti_sansthan_sanganer/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शिक्षण शिविरों में बच्चे होंगे संस्कारी: मुरैना में 25 मई से 1 जून तक लगेंगे शिविर </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/children_will_become_cultured_in_educational_camps/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/children_will_become_cultured_in_educational_camps/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Apr 2025 10:27:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samaysagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Children will become cultured in the educational camps. Shrifal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Indore श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[morena]]></category>
		<category><![CDATA[Munipungav Shri Sudhasagar Ji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Shramana Culture Sanskaar Education Camp]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Digambar Jain Shramana Culture Institute Sanganer]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Parshvanath Digambar Jain Temple Committee]]></category>
		<category><![CDATA[Summer Education Camp]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री समयसागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[इंदौर]]></category>
		<category><![CDATA[ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[मुरैना]]></category>
		<category><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर]]></category>
		<category><![CDATA[श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=79610</guid>

					<description><![CDATA[धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन 25 मई से 1 जून तक किया जाएगा। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से इन शिविरों को ग्वालियर-चंबल संभाग के 70-80 स्थानों पर लगाना तय हुआ है। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर की ओर से श्रमण संस्कृति [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन 25 मई से 1 जून तक किया जाएगा। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से इन शिविरों को ग्वालियर-चंबल संभाग के 70-80 स्थानों पर लगाना तय हुआ है। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर की ओर से श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर लगाए जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। ग्रीष्मकालीन अवकाश में बच्चों को संस्कारित करने के उद्देश्य से धार्मिक संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन 25 मई से 1 जून तक किया जाएगा। शिक्षण शिविरों के स्थानीय प्रभारी प्राचार्य वीरेंद्र जैन बाबा ने बताया कि इन शिविरों के माध्यम से बुजुर्ग, युवा, बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्रदान की जाती है। साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति से परिचित कराया जाता है। ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविरों में सभी जन अपनी संस्कृति से परिचित तो होते ही हैं, साथ ही उनमें नवीन संस्कारों की उत्पत्ति भी होती है। शिक्षण शिविरों के क्षेत्रीय प्रभारी विद्वत नवनीत जैन शास्त्री ने बताया कि श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर की ओर से श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का आयोजन आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवंत जीवन की फलश्रुति के रूप में विद्यागुरु उपकार महोत्सव के रूप में किया जा रहा है। आचार्य श्री समयसागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से इन शिविरों को ग्वालियर-चंबल संभाग के 70-80 स्थानों पर लगाना तय हुआ है।</p>
<p><strong>व्यवस्थाओं एवं नियमावली पर गहन विचार-विमर्श किया</strong></p>
<p>ग्रीष्मकालीन शिक्षण शिविर आयोजन के संदर्भ में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष प्राचार्य अनिल जैन, मंत्री विनोद कुमार जैन तार, चंबल संभाग क्षेत्रीय प्रभारी नवनीत जैन शास्त्री मुरैना, स्थानीय शिविर प्रभारी प्राचार्य वीरेंद्र जैन बाबा, मुख्य संयोजक राजकुमार कुमार जैन वरैया, संयोजक अजयकुमार जैन गोसपुर, सुरेशचंद्र जैन, अनिल जैन नायक गढ़ी, अनिरुद्ध कुमार जैन, अरविंद जैन बिल्लू (पान वाले), शशांक जैन, मुकेश जैन नंदपुरा, जयचंद्र जैन नंदपुरा, सतेंद्र जैन गोपालपुरा, धर्मेंद्र जैन, राकेश जैन शास्त्री ने शिविर संबंधी व्यवस्थाओं एवं नियमावली पर गहन विचार-विमर्श किया। सर्व सम्मति से तय हुआ कि मुरैना नगर में बड़ा जैन मंदिर एवं जैन संस्कृत विद्यालय में 25 मई से 1 जून तक शिक्षण शिविर लगाया जाएगा। ग्रीष्मकालीन शिविर भिंड जिले में 11मई से 18मई, ग्वालियर संभाग में 18 मई से 25 मई, मुरैना संभाग में 25 मई से 1 जून 2025 तक होंगे। शिविर मुरैना, भिंड, ग्वालियर-चंबल संभाग के कई स्थानों पर लगाए जाएंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/children_will_become_cultured_in_educational_camps/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>विजाति और विधर्मी विवाह आगम सम्मत नहीं है- निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराजः महाराज के प्रवचनों को सुनने के लिए जिन समुदाय में उल्लास का माहौल </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/extra_casteand_heterodox_marriages_are_not_acceptable_nirayapk_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/extra_casteand_heterodox_marriages_are_not_acceptable_nirayapk_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 28 Nov 2024 13:27:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[munishree sudhasagar ji]]></category>
		<category><![CDATA[Pravachan]]></category>
		<category><![CDATA[Sagar  श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[सागर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=70411</guid>

					<description><![CDATA[सागर में विराजित मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने प्रबोधन में जीवन के कई पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। पढ़िए सागर से राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; सागर। तुम जैन हो इसमें कोई संदेह नहीं क्योंकि तुम्हारे बाप जैन थे। जैन तुम्हें [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>सागर में विराजित मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज ने प्रबोधन में जीवन के कई पहलुओं पर ध्यान आकर्षित किया। उनके प्रवचनों को सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए सागर से राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> तुम जैन हो इसमें कोई संदेह नहीं क्योंकि तुम्हारे बाप जैन थे। जैन तुम्हें बलदियत में मिला है क्योंकि, जैन शब्द जातिवाचक हो गया, गुणवाचक नहीं रहा। पहले जितनी भी जातियां थी वे वर्ण या कर्म के आधार पर थी। एक घर में क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र तीनों पाए जा सकते हैं, एक भाई क्षत्रिय है, एक भाई व्यापार कर रहा है तो वैश्य है और एक भाई शिल्प का काम कर रहा है तो शुद्र है। इसलिए ऋषभदेव ने यह वर्ण की व्यवस्था कर्म के आधार पर की थी। जो जैसा कर्म करेगा वो वो है, भाई या रिश्तेदार से मतलब नहीं है। यह प्रबोधन सागर में विराजित निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा में दिए।</p>
<p><strong>सभी</strong> <strong>को 72 कलाएं आनी चाहिए</strong></p>
<p>जितनी 72 कलाएं हैं यह सब क्षत्रिय कर सकता है, राजा या रानी कोई भी हो सबको ये 72 कलाएं आना चाहिए। जिनको इनका ज्ञान नहीं है उनको गृहस्थ होने का अधिकार नहीं है। ऋषभदेव कहते है यदि आपको 72 कलाओं का ज्ञान नहीं है तो आपकी गृहस्थी संकट में पड़ेगी। आप से और अपने बच्चों को भी 72 कलाओं का ज्ञान करवाओ। आज की शिक्षा एकांकी है यदि सफल हो गए तो ऊंचाई पर पहुंचोगे और असफल हो गये तो बेरोजगार बनोगे। आपको बर्तन बनाने, कपड़े सिलने, जूते बनाने, झाड़ू लगाना, गंदगी साफ करना भी आना चाहिए। आपको जुआ खेलना, चोरी करना भी आना चाहिए, आपको संगीत, नाचना भी आना चाहिए, ये बहुत काम की चीजें है। ये जिंदगी के बहुत बड़े रहस्य है।</p>
<p><strong>कला को अपनी आजीविका का साधन बना लो</strong></p>
<p>अपराध शास्त्र जो व्यक्ति नहीं जानता है, उसकी जिंदगी का बहुत बड़ा शोषण होगा, चोर तुम्हारे यहां चोरी करते रहेंगे और तुम लूटते रहोगे इसलिए तुम्हें ज्ञान होना चाहिए चोरी कैसे की जाती है, जुआ कैसे खेला जाता है, ये सब शास्त्र है। रामचंद्र जी को गुरु ने बर्तन बनाना सिखाया था, बर्तन बनाना तो कुम्हार का काम है। अब यहां पर आपको सीखना बस है, लेकिन आप जिस कला को अपनी आजीविका का साधन बना लेंगे तो वहीं से वर्ण व्यवस्था चालू हो जाएगी। आपने चोरी को आजीविका का साधन बना लिया तो आप डाकू कहलाएंगे। ऋषभदेव ने चोर कला, चोरी करने के लिए नहीं, चोरों से सावधान रहने के लिए सिखाइर्, क्योंकि जब तक अपराधी की कल नहीं जानेंगे, अपराधी तक पहुंच नहीं पाएंगे।</p>
<p><strong>धर्मराज को दासता का अनुभव करना पड़ा</strong></p>
<p>पुरुषों को स्त्री बनना भी आना चाहिए। यहां तक की हिजड़ा बना भी आना चाहिए क्योंकि, अर्जुन ने अज्ञातवास में इसी तरह अपनी रक्षा की थी। किसी की दासता करना भी आना चाहिए क्योंकि, धर्मराज को दासता का अनुभव करना पड़ा। तुम्हें भीख मांगना भी आना चाहिए क्योंकि, यह दुनिया है यहां कुछ भी हो सकता है। 72 कलाएं जिनके पास होती हैं वे कभी भूखो नहीं मर सकते, चाहे भली उन्हें देश निकाला दे दो। श्रीराम को झोपड़ी बनाना नहीं आता तो पेड़ के नीचे बैठे-बैठे क्या होता। नाच गान आपको सीखना है लेकिन नाच गान से आजीविका मत चलाना, आप शुद्र की कोटि में चले जाएंगे।</p>
<p><strong>यदि शुद्र की कन्या आएगी तो तुम्हारे रिश्तेदार की कन्या है</strong></p>
<p>जिसको जूता चप्पल बनाना आता है उससे साधु आहार ले सकते हैं लेकिन, आजीविका नहीं होना चाहिए। जूत्ते चप्पल की दुकान वाला न तो अभिषेक कर सकता है और न ही आहार दे सकता है, उसके लिए वही नियम होंगे जो शुद्र पर होते हैं क्योंकि, वह उससे आजीविका कर रहा है। शास्त्रों में 72 कलाएं लिखी हैं। 72 आजीविका के साधन नहीं लिखे। आजीविका के कारण वर्तमान में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र के भेद किए गए। यदि शुद्र की कन्या आएगी तो तुम्हारे रिश्तेदार की कन्या है, उसको हम पुनः व्यापार छुड़ायेंगे, आप इस आजीविका से कमाया हुआ धन नहीं खाओगे, पीहर में पानी भी नही पियेंगे क्योंकि, अब आप क्षत्रिय कुल में आ चुके हैं, अब वो साधु को आहार दे सकती है। पिता का संबंध तो रहेगा लेकिन आजीविका का संबंध टूट जाएगा, खान पान छूट जाएगा। वहां का दाना भी ग्रहण नहीं करेगी, रिश्तेदारी का व्यवहार भी नही लेगी क्योंकि, उसी कमाई से आएगा।</p>
<p><strong>&#8230;तो नियम से मिथ्यात्व की कोटि में ही आएगा</strong></p>
<p>वर्तमान में जाति व्यवस्था अलग हो गई तो धर्म भी अलग होगा, गुरु भी अलग होगा, आचार विचार भी अलग होगा। आज जातिगत बंटवारा होने से जाति का संबंध जाति में ही बनेगा, विवर्ण में बन सकता था, विजाति में नहीं तो विजाति व विधर्मी विवाह आगम सम्मत नहीं है। आप उनसे जो संबंध बनाएगा वह नियम से मिथ्यात्व की कोटि में ही आएगा। जो कार्य जैन कर सकता है, उतने ही कार्य विजाति विवाह करने वाला करेगा।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/extra_casteand_heterodox_marriages_are_not_acceptable_nirayapk_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धर्मसभा में दिए प्रवचन : भगवान ने देखी मौत है और चले गए अमरता की ओर- निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/god_has_seen_death_and_moved_towards_immortality_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/god_has_seen_death_and_moved_towards_immortality_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 17 Oct 2024 09:11:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Chaturmas]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[discourse]]></category>
		<category><![CDATA[indore]]></category>
		<category><![CDATA[International Archeology Day]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[religious meeting]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Bharat Varsh Digambar Jain Tirtha Sanrakshan Mahasabha श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[जैन सोसायटी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रवचन]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[सागर]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=68553</guid>

					<description><![CDATA[श्री सुधासागर जी महाराज ने जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तीन लक्ष्यों की बात की। पहला लक्ष्य वह होना चाहिए जो हमें प्राप्त करना है—वह जो ध्यान योग्य और भावना के योग्य हो। दूसरा लक्ष्य वह है जो हम प्राप्त कर सकते हैं, और तीसरा लक्ष्य वह है जो हमें प्राप्त है। हमें [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्री सुधासागर जी महाराज ने जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तीन लक्ष्यों की बात की। पहला लक्ष्य वह होना चाहिए जो हमें प्राप्त करना है—वह जो ध्यान योग्य और भावना के योग्य हो। दूसरा लक्ष्य वह है जो हम प्राप्त कर सकते हैं, और तीसरा लक्ष्य वह है जो हमें प्राप्त है। हमें इन तीन बातों पर विचार करना चाहिए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> श्री सुधासागर जी महाराज ने जीवन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए तीन लक्ष्यों की बात की। पहला लक्ष्य वह होना चाहिए जो हमें प्राप्त करना है—वह जो ध्यान योग्य और भावना के योग्य हो। दूसरा लक्ष्य वह है जो हम प्राप्त कर सकते हैं, और तीसरा लक्ष्य वह है जो हमें प्राप्त है। हमें इन तीन बातों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब हम समयसार की गहराई में जाएं, तो हमारी भाषा, मन और शारीरिक क्रियाएं भी समयसारमय होनी चाहिए। समयसार में शुद्ध निश्चयनय है, जिसमें तन्मय हो जाना चाहिए। मन, वचन और काय दोनों निश्चयनय में होना चाहिए।</p>
<p><strong> निश्चयनय में अनेकांत नहीं होता</strong></p>
<p>महाराज ने बताया कि अमृतधारा में एक चीज का अभाव है, यह स्पष्ट है, लेकिन जो अनुभूति हो रही है, वह एक की हो रही है, तीनों की नहीं। अनन्त धर्मात्मक वस्तु होने के बावजूद, हमें एकत्व की अनुभूति होती है। निश्चयनय में अनेकांत का स्थान नहीं है; वहाँ केवल एक होता है, अभेद होता है। ज्ञान, दर्शन, और आत्मा सभी अलग हैं, लेकिन इन सबको एक करके एक का अनुभव करना ही निश्चयनय का चमत्कार है। जो मिट रहा है, उसमें अविनाशी का दर्शन करना चाहिए। उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य जैसे पर्यायों को मिटते हुए देखकर सत की अनुभूति होनी चाहिए। यही चैतन्य चमत्कार है, यही समयसार है। इस प्रक्रिया में, जैसे हम मृत्यु की ओर बढ़ते हैं, हमें अमरता का आनंद लेना चाहिए। यह अनुभव हमें जीवन की गहराइयों में उतरने और हमारी आत्मा की सच्चाई को पहचानने में मदद करता है।</p>
<p><strong> नाशवान वस्तुओं से हुआ वैराग्य</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि जितने महापुरुषों को वैराग्य प्राप्त हुआ, वह अविनाशी वस्तुओं से नहीं, बल्कि नाशवान वस्तुओं से हुआ। तारों और बादलों से वैराग्य नहीं आया, बल्कि उनके विघटन से वैराग्य की अनुभूति हुई। जब हम मृत्यु को देखते हैं, तब हम अमरता की ओर बढ़ते हैं—यही एक चमत्कार है। किसी को मरते हुए देखकर अगर हम सोचते हैं कि &#8220;कल मैं भी मरूँगा,&#8221; तो यह बारह भावना है। अभी आप समयसार की गहराई को नहीं समझ सकते। साधु को देखकर साधुता की अनुभूति, रागी को देखकर राग की अनुभूति और प्रतिकूल वातावरण को देखकर क्रोध की अनुभूति होती है। जो घटित हो रहा है, वह ज्ञेयाकार है। ज्ञान का ज्ञेयाकार होना ही संसार है, और ज्ञेय का ज्ञानकार होना ही परमार्थ है। यही जीवन का सत्य है, जो हमें आत्मिक विकास की ओर ले जाता है।</p>
<p><strong>प्रज्ञा भाव को जगाएं</strong></p>
<p>चमत्कार यह है कि मौत को देखकर हमें यह अनुभव नहीं होना चाहिए कि &#8220;कल मैं भी मरूंगा।&#8221; यह सोच कि &#8220;वह मरा है, मैं अमर रहूंगा,&#8221; या &#8220;यह दुःखी है, मैं सुखी हूँ,&#8221; हमें आत्मज्ञान से दूर ले जाती है। चरणानुयोग हमें सिखाता है कि यदि कोई दुखी है, तो हमें भी उसके दुख में समर्पित होना चाहिए। यदि आप दूसरे के दुःख को देखकर दुखी नहीं होते, तो यह दर्शाता है कि आपकी आँखों में संवेदनशीलता का अभाव है। दुखी को देखकर दुखी होना और मृत्यु को देखकर मृत्यु की अनुभूति करना आवश्यक है, लेकिन निश्चयनय कहता है कि संसार को दुखी देखकर हमें सुखी होना चाहिए। यही निश्चयनय और धर्म का अर्थ है।आत्मा आठ कर्मों से लिप्त है, लेकिन शुद्धोपयोगी को शुद्ध का आनंद मिल रहा है—यही प्रज्ञा कहलाती है। दृश्य राग का होना और प्रज्ञा को वीतरागता का आनंद आना, यही सच्ची अनुभूति है। यदि आत्मा आठ कर्मों की बेड़ियों में जकड़ी है, तो हमें प्रज्ञा से आत्मा को अलग करना चाहिए, न कि साक्षात शरीर से। समयसार एक महामंत्र है, जिसने अब तक दुख का पहाड़ नहीं तोड़ा। दूसरों की मौत को देखकर हमें अपनी ज़िंदगी की मूल्य को समझना चाहिए। अगर दो व्यक्ति खड़े हैं—एक आपका पिता और दूसरा एक सामान्य व्यक्ति—तो सामान्य व्यक्ति को देखकर आपको कोई भाव नहीं आना चाहिए। लेकिन पिता को देखकर &#8220;पिता&#8221; शब्द का ना आना, यही प्रज्ञा का चमत्कार है। हमें किसी को हटाना नहीं है; हमें बस प्रज्ञा को जगाना है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/god_has_seen_death_and_moved_towards_immortality_munipungav_shri_sudhasagar_ji_maharaj/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
