<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>मिच्छामि दुक्कडम &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%A1%E0%A4%AE/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Tue, 09 Sep 2025 13:23:27 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=7.0.2</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>मिच्छामि दुक्कडम &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>अरथूना के 16 तपस्वियों का सम्मान कर की अनुमोदना : फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज ने किया बहुमान </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/approval_of_honouring_16_ascetics_of_arthuna/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/approval_of_honouring_16_ascetics_of_arthuna/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 13:23:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Arthuna]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[Federation of Humad Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Michhami Dukkadam]]></category>
		<category><![CDATA[Paryushan festival]]></category>
		<category><![CDATA[Shri Pavitramati Mataji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अरथूना]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[पर्यूषण पर्व]]></category>
		<category><![CDATA[फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[मिच्छामि दुक्कडम]]></category>
		<category><![CDATA[श्री पवित्रमती माताजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=90298</guid>

					<description><![CDATA[अरथूना फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की ओर से ऐतिहासिक धर्म नगरी में पर्यूषण पर्व में 16 उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों के तप की अनुमोदना कर उनका बहुमान किया गया। अरथूना से पढ़िए, यह खबर&#8230; अरथूना। फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की ओर से ऐतिहासिक धर्म नगरी अरथूना में पर्यूषण पर्व में 16 [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अरथूना फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की ओर से ऐतिहासिक धर्म नगरी में पर्यूषण पर्व में 16 उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों के तप की अनुमोदना कर उनका बहुमान किया गया। <span style="color: #ff0000">अरथूना से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अरथूना।</strong> फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज की ओर से ऐतिहासिक धर्म नगरी अरथूना में पर्यूषण पर्व में 16 उपवास की तपस्या करने वाले तपस्वियों के तप की अनुमोदना कर उनका बहुमान किया गया। आयोजन मे श्री पवित्रमती माताजी के मांगलिक सान्निध्य एवं आशीर्वाद के साथ फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज के संस्थापक एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अजीत कोठिया, राजेंद्र कोठिया, महिला प्रकोष्ठ की निशा कोठिया ने सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना कर उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर महेंद्र देवड़िया, संजय दोसी , महेंद्र दोसी, राहुल दोसी, सुनील दोसी, पलाश दोसी, मीनाक्षी शाह, रजनी दोसी, प्रीति शाह, कोमल शाह, मनीषा दोसी, पूजा शाह, मनीषा सुनील, वीणा पंचौरी तथा रंजना पंचोरी को फेडरेशन की ओर से शुभकामनाएं दी गई।</p>
<p>कोठिया ने कहा कि आर्यिका श्री पवित्रमति माताजी के सान्निध्य में इस वार तप करने वाले 80 से अधिक श्रावक श्राविकाओं ने न केवल तप की महिमा बताई वरन अरथूना की धर्म ध्वजा पूरे देश में आलोकित कर दी है। ऐसे सभी तपस्वियों पर फेडरेशन ऑफ हूमड़ जैन समाज गर्व करता है और उनको मिच्छामि दुक्कड़म कहकर उनकी साता पूछते हुए सभी की भूरी-भूरी प्रशंसा करता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/approval_of_honouring_16_ascetics_of_arthuna/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रसंगवश क्षमापर्व विशेष, बंधनों से मुक्ति की चाबी-जैन क्षमा परंपरा : संबंधों का पुनर्निर्माण-क्षमा पर्व का सामाजिक आयाम </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/incidentally_the_festival_of_forgiveness_is_particularly_important_it_is_the_key_to_liberation_from_worldly_attachments_the_jain_tradition_of_forgiveness/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/incidentally_the_festival_of_forgiveness_is_particularly_important_it_is_the_key_to_liberation_from_worldly_attachments_the_jain_tradition_of_forgiveness/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 16:12:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Ascetic]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Incidentally]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Tradition of Forgiveness]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Updates]]></category>
		<category><![CDATA[Mischemi Dukkadam श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Special Feature on the Festival of Forgiveness]]></category>
		<category><![CDATA[Supreme Forgiveness]]></category>
		<category><![CDATA[The Key to Liberation]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तम क्षमा]]></category>
		<category><![CDATA[क्षमापर्व विशेष]]></category>
		<category><![CDATA[जैन क्षमा परंपरा]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रसंगवश]]></category>
		<category><![CDATA[मिच्छामि दुक्कडम]]></category>
		<category><![CDATA[मुक्ति की चाबी]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=90151</guid>

					<description><![CDATA[ जैन धर्म की गहरी और संवेदनशील परंपरा हमें इन्हीं बोझों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है-क्षमा पर्व के रूप में, जो केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन की नवीनता का उत्सव है। बड़वानी से प्रो. आरके जैन ‘अरिजित’ की यह विशेष आलेख&#8230; बड़वानी। मनुष्य का जीवन एक ऐसी यात्रा है, जो [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> जैन धर्म की गहरी और संवेदनशील परंपरा हमें इन्हीं बोझों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है-क्षमा पर्व के रूप में, जो केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन की नवीनता का उत्सव है। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से प्रो. आरके जैन ‘अरिजित’ की यह विशेष आलेख&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> मनुष्य का जीवन एक ऐसी यात्रा है, जो बाहर की सड़कों से कहीं अधिक भीतर की गलियों में भटकती है। हम रोज़मर्रा की भागदौड़ में इतने उलझ जाते हैं कि यह भूल जाते हैं-हमारे कंधों पर न केवल सांसारिक ज़िम्मेदारियों का भार है, बल्कि उन अनकहे, अनदेखे बोझों का भी, जो हमारे मन के कोनों में धूल की तरह जमा होते रहते हैं। ये बोझ हैं हमारे उन शब्दों के, जो अनजाने में किसी के हृदय को चोट पहुँचाते हैं; उन विचारों के, जो किसी के प्रति ईर्ष्या या क्रोध से भरे होते हैं; और उन कर्मों के, जो अनजाने में भी किसी जीव को कष्ट देते हैं। जैन धर्म की गहरी और संवेदनशील परंपरा हमें इन्हीं बोझों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है-क्षमा पर्व के रूप में, जो केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और जीवन की नवीनता का उत्सव है।</p>
<p>क्षमा पर्व, जिसे जैन परंपरा में पर्यूषण पर्व के अंत में मनाया जाता है, केवल एक औपचारिक माफी माँगने का दिन नहीं है। उत्तम क्षमा या मिच्छामि दुक्कडम, ये शब्द केवल वाणी की सजावट नहीं, बल्कि एक गहरे दार्शनिक भाव के प्रतीक हैं, जो हमें स्वयं और दूसरों के प्रति करुणा का पाठ पढ़ाते हैं। यह पर्व हमें उस साहस की ओर ले जाता है, जहाँ हम अपने अहंकार को झुकाकर, अपनी भूलों को स्वीकार करते हैं। यह साहस कोई कमज़ोरी नहीं, बल्कि आत्मिक बल की पराकाष्ठा है। क्योंकि जब हम अपने मन की कठोरता को पिघलाते हैं, तभी हम उस उजाले को देख पाते हैं, जो हमारी आत्मा को मुक्त करता है।</p>
<p>जैन दर्शन का एक अनमोल सूत्र है, क्षमा पहले स्वयं को दी जाती है। हम अक्सर यह मान बैठते हैं कि क्षमा माँगना या देना केवल दूसरों के लिए होता है, पर वास्तव में यह प्रक्रिया हमारे भीतर शुरू होती है। जब तक हम अपनी कमियों, अपनी भूलों, अपने उन क्षणों को नहीं अपनाते, जिनमें हम कमज़ोर हुए, तब तक हम दूसरों के प्रति सच्ची सहानुभूति नहीं जगा सकते। स्वयं को क्षमा करना आसान नहीं, यह एक ऐसी यात्रा है, जिसमें हमें अपने उन हिस्सों को गले लगाना पड़ता है, जिन्हें हम अक्सर छिपाने की कोशिश करते हैं। जैन धर्म कहता है कि जब हम अपने अंदर की इन गांठों को खोलते हैं, तभी हम दूसरों के प्रति भी कोमल हो पाते हैं। यह आत्म-क्षमा ही वह पहला कदम है, जो हमें सच्ची करुणा और अहिंसा की ओर ले जाता है।</p>
<p>आज का युग, जहाँ हर क्षण सूचनाओं का तूफान आता है, रिश्तों को बनाना और तोड़ना पहले से कहीं आसान हो गया है। एक गलत शब्द, एक तीखी टिप्पणी, या एक छोटी-सी गलतफहमीकृये सब न केवल व्यक्तिगत रिश्तों को, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर सकते हैं। ऐसे में क्षमा पर्व हमें एक ठहराव देता है। यह हमें याद दिलाता है कि रिश्तों की मरम्मत कोई जटिल विज्ञान नहीं, बल्कि एक साधारण, हृदय से निकला “माफ़ कर दो” है। यह शब्द जादू की तरह काम करता है, यह न केवल सामने वाले के मन को शांत करता है, बल्कि हमें भी उस बोझ से मुक्त करता है, जो हम अनजाने में ढो रहे होते हैं।</p>
<p>क्षमा पर्व का एक और अनूठा आयाम है, यह हमें केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं रखता। जैन धर्म की अहिंसा की अवधारणा इतनी व्यापक है कि यह समस्त जीव-जगत को अपने आलिंगन में लेती है। इस पर्व पर हम न केवल अपने परिचितों से, बल्कि उन सभी जीवों से क्षमा माँगते हैं, जिन्हें हमने अनजाने में कष्ट पहुँचाया। चाहे वह हमारे कदमों तले कुचला गया एक छोटा-सा कीट हो, या वह जल और पृथ्वी हो, जिसका हमने अनजाने में दुरुपयोग कियाकृक्षमा पर्व हमें इन सबके प्रति अपनी ज़िम्मेदारी स्मरण कराता है। यह एक ऐसी सोच है, जो हमें मनुष्य-केंद्रित दृष्टिकोण से बाहर निकालकर समस्त सृष्टि के साथ एक गहरे रिश्ते में जोड़ती है। यह हमें सिखाता है कि हमारा जीवन केवल हम तक सीमित नहीं, बल्कि इस विशाल विश्व के साथ एक अटूट बंधन में बंधा है।</p>
<p>क्षमा माँगना या देना इतना दुर्लभ क्यों है? क्योंकि हम इसे अक्सर अपनी प्रतिष्ठा, अपने अहंकार की कसौटी पर तौलते हैं। हम सोचते हैं-क्षमा माँगने से हम छोटे हो जाएँगे, या क्षमा देने से सामने वाला हमारा दुरुपयोग करेगा। पर जैन दर्शन हमें इस भ्रम से बाहर निकालता है। यह कहता है कि क्षमा कोई सौदा नहीं, बल्कि आत्मा की स्वाभाविक अवस्था है। जब हम क्षमा को गणनाओं से मुक्त करते हैं, तभी वह अपनी पूरी शक्ति के साथ हमारे जीवन को बदल देती है। यह वह शक्ति है, जो न केवल व्यक्तिगत शांति लाती है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी पोषित करती है।</p>
<p>क्षमा पर्व का एक और गहरा संदेश है-यह हमें अपने विचारों, वचनों और कर्मों में एकरूपता लाने की प्रेरणा देता है। केवल शब्दों से उत्तम क्षमा या मिच्छामि दुक्कडम कहना पर्याप्त नहीं; यह भाव हमारे हृदय में उतरना चाहिए। अगर हम बाहर से क्षमा माँगते हैं, लेकिन भीतर क्रोध या कटुता पाले रहते हैं, तो यह आत्मप्रवंचना होगी। सच्ची क्षमा वही है, जो हमारे व्यवहार में झलके-जब हम किसी की भूल को भूल जाएँ, जब हम किसी के प्रति सहानुभूति से देखें, और जब हम अपने कर्मों को शुद्ध करने का संकल्प लें। यह वह क्षण है, जब क्षमा पर्व एक जीवंत अनुभव बन जाता है, न कि केवल एक परंपरा</p>
<p>आज जब हम इस पर्व को मना रहे हैं, तो यह प्रश्न उठता है, क्या क्षमा केवल एक दिन की बात है? क्या हमें हर बार पर्यूषण की प्रतीक्षा करनी चाहिए, या इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए? जैन दर्शन का जवाब साफ हैकृक्षमा एक सतत प्रक्रिया है। यह वह दीपक है, जिसे हमें हर दिन जलाए रखना है। हर रात, जब हम अपने दिन का लेखा-जोखा करें, तो यह पूछें-क्या मैंने किसी को दुख पहुँचाया? क्या मैंने किसी जीव के प्रति अहिंसा का पालन किया? और अगर कहीं भूल हुई, तो उसे स्वीकार कर, क्षमा माँगने का साहस जुटाएँ। यही वह साधना है, जो हमें सच्चे अर्थों में जैन बनाती है।</p>
<p>इस क्षमा पर्व पर, हम उस मौन को सुनें, जो हमारे भीतर की पुकार है। हम उन सभी से क्षमा माँगें जिन्हें हम जानते हैं और जिन्हें नहीं; जिन्हें हमने देखा और जिन्हें अनदेखा किया। हम स्वयं को भी क्षमा करें-उन क्षणों के लिए, जब हम कमज़ोर हुए, जब हम भटके, जब हमने स्वयं को ठगा। और सबसे बढ़कर, हम इस संकल्प को दोहराएँ कि हम अपने जीवन को अहिंसा, करुणा और क्षमा के रंगों से रंगेंगे। क्योंकि क्षमा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि वह संगीत है, जो हमारी आत्मा को मुक्ति का रास्ता दिखाता है। यह वह पंख है, जो हमें क्रोध और घृणा के बोझ से मुक्त कर, आकाश की ऊँचाइयों तक ले जाता है।</p>
<p>इस क्षमा पर्व पर, हम अपने हृदय के दरवाज़े खोलें। हम उन सभी गांठों को खोल दें, जो हमें बाँधे हुए हैं। हम उन सभी के प्रति करुणा का हाथ बढ़ाएँ, जिनके साथ हमारा कोई भी रिश्ता है-चाहे वह मनुष्य हो, प्रकृति हो, या स्वयं हमारी आत्मा। और जब हम कहेंकृ उत्तम क्षमा या मिच्छामि दुक्कडम तो यह शब्द केवल हमारे होंठों से नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की गहराइयों से निकले। यही इस पर्व की सच्ची सार्थकता है, और यही जैन धर्म का वह अनमोल उपहार है, जो हमें जीवन की सबसे बड़ी विद्रूपता से मुक्ति दिलाता है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/incidentally_the_festival_of_forgiveness_is_particularly_important_it_is_the_key_to_liberation_from_worldly_attachments_the_jain_tradition_of_forgiveness/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
