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	<title>मांसाहार &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>व्यसन करने वाला धार्मिक अनुष्ठान करने का पात्र नहीं : मुनिश्री विलोकसागर’जी ने व्यसनों को त्यागने का दिया उपदेश </title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 09:54:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[व्यसन करने वाले को सभी जगह हेय दृष्टि से देखा जाता है, ऐसा व्यक्ति सर्वत्र निंदा का पात्र बनता है। यह उद्गार मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; मुरैना। व्यसनों में लिप्त सांसारिक प्राणी धार्मिक अनुष्ठान, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>व्यसन करने वाले को सभी जगह हेय दृष्टि से देखा जाता है, ऐसा व्यक्ति सर्वत्र निंदा का पात्र बनता है। यह उद्गार मुनि श्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> व्यसनों में लिप्त सांसारिक प्राणी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा, पाठ आदि करने की पात्रता नहीं रखता है। व्यसनी व्यक्ति श्री जिनेंद्र प्रभु का स्पर्श तक नहीं कर सकता, पूजा पाठ अभिषेक तो बहुत दूर की बात है। व्यसन करने वाले को सभी जगह हेय दृष्टि से देखा जाता है, ऐसा व्यक्ति सर्वत्र निंदा का पात्र बनता है। यह उद्गार मुनिराजश्री विलोकसागरजी महाराज ने बड़ा जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होने कहा कि व्यसनी व्यक्ति देश धर्म समाज एवं परिवार पर बोझ होता है। वह सदैव अपने आप को एवं अपने परिवार को दुखी करता है, संकट में डालता है। व्यसनों से मुक्त रहना जैन धर्म के पालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुनिश्री ने बताया कि जैन धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए व्यक्ति अपने जीवन को शुद्ध, पवित्र और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना सकता है। व्यसनों से दूर रहकर ही हम आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।</p>
<p><strong>यसनी व्यक्ति कभी भी संयम की साधना नहीं कर सकता </strong></p>
<p>जैन सिद्धांत हमें सिखाता है कि सभी के लिए खासकर एक सच्चे जैन अनुयायी के लिए व्यसनों का त्याग अनिवार्य है, जो उसे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ बनाता है। जैन दर्शन में मांसाहार, मद्यपान, जुआ, चोरी, पर स्त्री सेवन, शिकार और वेश्यागमन सात व्यसन बताए गए हैं। ये सभी कर्मों को बढ़ाने वाले और आत्मा को दुःख देने वाले माने जाते हैं। इन सात व्यसनों को जैन धर्म में महापाप माना जाता है और इनसे दूर रहने की शिक्षा दी जाती है। इन व्यसनों का त्याग करके ही मोक्ष की प्राप्ति संभव है। व्यसनी व्यक्ति कभी भी संयम की साधना नहीं कर सकता। जैन धर्म में इन सात व्यसनों का त्याग अनिवार्य माना गया है, क्योंकि ये व्यक्ति के आत्मिक उत्थान में बाधा उत्पन्न करते हैं। इन सप्त व्यसनों का त्याग करने वाला श्रावक ही मुनिराजों को आहार आदि दान देने के योग्य है, सप्त-व्यसनी नहीं।</p>
<p><strong>मुनिश्री विबोधसागर ने सैकड़ों श्रावकों को कराया व्यसन मुक्त</strong></p>
<p>मुनिराजश्री विवोधसागरजी महाराज नित्य ही अपने पास आने वाले भक्तों को व्यसनों के त्याग की शिक्षा देते हैं। वे आने वाले भक्तों को तब तक नहीं छोड़ते जब तक कि वो धूम्रपान, गुटका आदि का त्याग नहीं कर देता। पूज्य मुनिश्री ने अभी तक सैकड़ों लोगों को व्यसन मुक्त किया है। गुरुदेव ने अभी हाल ही में सारगर्भित उद्वोधन देकर पदमचंद जैन, मुकेश जैन, वीरेंद्र जैन, मनोज जैन सहित अनेकों बंधुओं को गुटका और धूम्रपान की लत से छुटकारा दिलाया। मुनिश्री विबोध सागर महाराज का कहना है कि व्यसनी व्यक्ति समाज व परिवार के लिए एक कलंक के समान है। व्यसनी व्यक्ति को अपने लिए न सही लेकि, अपने बीबी और बच्चों की खातिर व्यसनों को त्याग देना चाहिए। आप धर्म की बात मत करिए, किन्तु अपने स्वास्थ्य की खातिर, अपने शरीर के लिए इन सबका त्याग कर देना चाहिए। ऐसा करने से आप स्वयं स्वस्थ और खुशहाल तो होंगेही आपका परिवार भी प्रसन्नचित रहेगा। व्यसनों में लिप्त व्यक्ति अक्सर अपनी भावनाओं और इच्छाओं पर नियंत्रण खो देता है, जिससे वह दूसरों के प्रति हिंसक या असंवेदनशील हो सकता है। इस प्रकार, व्यसन अहिंसा के सिद्धांत का सीधा उल्लंघन करते हैं।</p>
<p><strong>’व्यसन आत्मा की शुद्धि में बाधक होते हैं’</strong></p>
<p>व्यसन किसी भी प्रकार की बुरी आदत या नशा होता है जो व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। इनमें धूम्रपान, गुटका, शराब, मादक पदार्थों का सेवन, जुआ खेलना आदि शामिल हैं। ये व्यसन व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति को कम करते हैं और उसे नैतिक और आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाते हैं। जैन धर्म में व्यसनों को गंभीर पाप माना गया है। जैन श्रावकों के लिए व्यसनों का त्याग आवश्यक है, क्योंकि ये आत्मा की शुद्धि में बाधक होते हैं। जैन धर्म के अनुसार, किसी भी प्रकार का व्यसन अहिंसा के सिद्धांत का उल्लंघन है। शराब पीने या मादक पदार्थों का सेवन करने से व्यक्ति विवेक शून्य हो जाता है, व्यसन व्यक्ति को हिंसक बना सकता है और उसके विचारों को दूषित कर सकता है । जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत अहिंसा है, जो केवल शारीरिक हिंसा को ही नहीं, बल्कि मानसिक और वाणी के माध्यम से की जाने वाली हिंसा को भी पाप समझता है।</p>
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		<title>महावीर जन्म कल्याणक जयंती : मध्य प्रदेश के बूचड़खाने, मांस, मछली, अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग </title>
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		<pubDate>Mon, 15 Apr 2024 07:31:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महावीर जन्म कल्याणक जयंती के दिन जैन समाज ने पूरे मध्य प्रदेश के बूचड़खाने मांस मछली अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग है। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230; इंदौर। महावीर जन्म कल्याणक जयंती के दिन जैन समाज ने पूरे मध्य प्रदेश के बूचड़खाने मांस मछली अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>महावीर जन्म कल्याणक जयंती के दिन जैन समाज ने पूरे मध्य प्रदेश के बूचड़खाने मांस मछली अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> महावीर जन्म कल्याणक जयंती के दिन जैन समाज ने पूरे मध्य प्रदेश के बूचड़खाने मांस मछली अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग है। जीवदया प्रेमी विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने स्वायत शासन अधिकारी व मुख्य मंत्री को पत्र भेजकर निवेदन किया है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी जैन धर्म की महावीर जन्म कल्याणक जयंती दिनांक 21 अप्रेल रविवार को आ रही है।</p>
<p>महावीर जन्म कल्याणक जयंती के दिन पूरे भारत के बूचड़खाने मांस मछली अंडे के विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश पारित किया जाए व समस्त आयुक्त नगरनिगम समस्त आयुक्त नगर परिषद समस्त अधिशासी अधिकारी नगरपालिका समस्त जिलाधीश समस्त पुलिस अधीक्षक मध्यप्रदेश को आदेश जारी करें कि पूरे भारत में जैन धर्म मे अहिंसा में आस्था रखने वालों की भावना को देखते हुए पूर्ण प्रतिबंध का आदेश जारी करें।</p>
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		<title>आईएएस शोभित जैन ने शाकाहारियों को संदेश : युवा पीढ़ी को मांसाहार से बचाया जाना जरूरी </title>
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		<pubDate>Tue, 04 Jul 2023 13:30:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव शोभित जैन ने शाकाहारियों से अनुरोध किया है कि वह केवल शाकाहारी रेस्टोरेंट्स, भोजनालय या होटल में ही भोजन करें। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; भोपाल।। आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव शोभित जैन ने शाकाहारियों से अनुरोध किया है [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव शोभित जैन ने शाकाहारियों से अनुरोध किया है कि वह केवल शाकाहारी रेस्टोरेंट्स, भोजनालय या होटल में ही भोजन करें। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।।</strong> आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के सदस्य सचिव शोभित जैन ने शाकाहारियों से अनुरोध किया है कि वह केवल शाकाहारी रेस्टोरेंट्स, भोजनालय या होटल में ही भोजन करें। किसी भी मांसाहारी रेस्टोरेंट्स आदि में भोजन ना करें जब तक की उनमें पृथक-पृथक किचन ना हो। जैन ने कहा कि एक ही किचन होने से पूर्ण संभावना होती है कि मांस किसी न किसी प्रकार शाकाहारी भोजन में मिक्स हो जाता है। विभिन्न विद्यार्थियों को यदि वह मेस में भोजन करते हैं तो उन्हें अलग से शाकाहारी रसोई की मांग करनी चाहिए।</p>
<p><strong>बड़ी हस्तियों से सीखें</strong></p>
<p>जैन ने कहा कि युवा जनरेशन को बचाना जरूरी है। बड़े-बड़े होटलों में युवा नहीं चाहते हुए भी मांसाहारी खाना शुरू कर देते हैं। अगर आप शाकाहारी हैं तो शाकाहारी होटल पर ही खाना खाएं। उन्होंने कहा कि विश्व की लगभग 22 प्रतिशत जनसंख्या शाकाहारी या विगन की श्रेणी में आती है और यह संख्या निरंतर बढ़ रही है। एकअक्टूबर को विश्व शाकाहार दिवस मनाया जाता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जब लियोनार्डो द विंची, वॉल्टियर, एडोल्फ हिटलर, पाइथागोरस, निकोला टेस्ला, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, लिओ टॉलस्टॉय, अल्बर्ट आइंस्टाइन, रिकी मार्टिन, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, मार्टिना नवरातिलोवा, विराट कोहली, एलिशिया सिल्वरस्टोन, लिंडा मकर्टनी, सरीना विलियम्स, लुइस हैमिल्टन, बिल क्लिंटन, मेडना, अमिताभ बच्चन, आमिर खान, विद्या बालन ने शाकाहार अपनाया है तो हमें अपनाने में सोचना नहीं चाहिए।</p>
<p><strong>वीडियो हो रहा वायरल</strong></p>
<p>सोशल मीडिया पर भोपाल के एक पांच सितारा होटल का वीड़ियो वायरल हो रहा है, जिसमें शाकाहारियों को भोजन में मांसाहर परोसा जा रहा है।</p>
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		<title>बच्चों ने जीवित पशुओं के निर्यात के विरोध में निकाला जुलूस : श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में नन्हीं प्रतिभाऐं सीख रहीं धर्म ज्ञान  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/opposition_to_the_livestock_import_export_bill_2023_to_be_presented_in_parliament-3/</link>
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		<pubDate>Sat, 17 Jun 2023 13:37:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वर्णी नगर मडावरा में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, जयपुर के तत्वावधान में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन 14 से 22 जून तक आयोजित किया जा रहा है। &#8220;गौ माता कहे पुकार, बंद करो जीवित पशुओं का निर्यात&#8221; इस नारे को लगाते हुए बच्चों ने नगर में जुलूस निकालकर मत्स्य पालन, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वर्णी नगर मडावरा में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, जयपुर के तत्वावधान में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन 14 से 22 जून तक आयोजित किया जा रहा है। &#8220;गौ माता कहे पुकार, बंद करो जीवित पशुओं का निर्यात&#8221; इस नारे को लगाते हुए बच्चों ने नगर में जुलूस निकालकर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, नई दिल्ली के सचिव से मांग की है कि भारत देश से जीवित पशुओं के निर्यात के अध्यादेश को निरस्त किया जाए। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजीव सिंघई की यह विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> वर्णी नगर मडावरा में श्री दिगम्बर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर, जयपुर के तत्वावधान एवं निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधा सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं शिविर प्रभारी पं. आलोक मोदी शास्त्री, पं. मुकेश जैन शास्त्री ललितपुर के मार्गदर्शन में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का आयोजन 14 से 22 जून तक आयोजित किया जा रहा है। शिविर के संयोजक डॉ. बिरधीचंद्र जैन एवं डॉ. राकेश जैन सिंघई ने बताया कि भारतवर्ष में दो सौ स्थानों पर शिक्षण शिविर आयोजित किए गए। जिसमें लगभग दो लाख बच्चों, युवाओं, महिलाओं ने भाग किया। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गर्मियों की छुट्टियों का सदुपयोग करने के लिए बच्चों का शिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। जिसमें बच्चे धार्मिक संस्कारों के साथ नैतिक संस्कारों को सीख रहे हैं। प्रातः काल बच्चों को पूजन करने की विधि एवं बालबोध भाग एक व दो सिखाए जा रहे हैं। दोपहर व सायंकाल में सीनियर वर्ग के लिए धार्मिक ग्रंथों रत्नकरण्ड, श्रावकाचार, द्रव्य संग्रह, छहढाला, इष्टोपदेश आदि ग्रंथों पर पं. सोहित जैन शास्त्री, पं. आदित्य जैन शास्त्री के निर्देशन में कक्षाएं चल रही हैं। सायंकाल सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित हो रही हैं जिसमें बच्चे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशिक्षण शिविर को सफल बनाने में प्राचार्या ममता जैन, रुबी जैन का सहयोग मिल रहा है। इस मौके पर डॉ. राकेश जैन सिंघई, राजू सेठी, सुमत मोदी, अनिल जैन शिक्षक पुष्पेन्द्र जैन मौजूद रहे।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46374" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016.jpg" alt="" width="1280" height="911" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016-300x214.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016-1024x729.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016-768x547.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0016-990x705.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>गौ माता कहे पुकार</strong></p>
<p>&#8220;गौ माता कहे पुकार, बंद करो जीवित पशुओं का निर्यात&#8221; इस नारे को लगाते हुए बच्चों ने नगर में जुलूस निकालकर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, नई दिल्ली के सचिव से मांग की है कि भारत देश से जीवित पशुओं के निर्यात के अध्यादेश को निरस्त किया जाए। यह भारतीय संस्कृति पर कलंक है। भारतीय संस्कृति अहिंसामयी है। भारतीय संस्कृति को बचाना है तो इस अध्यादेश को वापिस लेना होगा। जिससे भारतीय संस्कृति सुरक्षित बच सके।</p>
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		<title>जीवित पशुधन को माना जा रहा है कमोडिटी : पशुधन निर्यात के प्रस्तावित बिल का देशव्यापी विरोध जीवित पशुओं की निर्यात नीति को वापस लिया जाए </title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jun 2023 13:34:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार पशुओं के निर्यात का विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित विधेयक का देशभर में अहिंसा प्रेमियों, पशु प्रेमियों और संस्कृति प्रेमियों द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है। देश के लगभग 80 प्रतिशत राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध है। पढ़िए जिनेंद्र जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230; जयपुर। भारत सरकार पशुओं के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत सरकार पशुओं के निर्यात का विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित विधेयक का देशभर में अहिंसा प्रेमियों, पशु प्रेमियों और संस्कृति प्रेमियों द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है। देश के लगभग 80 प्रतिशत राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए जिनेंद्र जैन की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>जयपुर।</strong> भारत सरकार पशुओं के निर्यात का विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित विधेयक का देशभर में अहिंसा प्रेमियों, पशु प्रेमियों और संस्कृति प्रेमियों द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है। देश के लगभग 80 प्रतिशत राज्यों में गोवध पर प्रतिबंध है। ऐसे में राज्यों की लिखित सहमति के बगैर इस प्रकार का विधेयक लाना संवैधानिक भावनाओं के विरुद्ध है। वध के लिए जीवित पशुओं का निर्यात संविधान के अनुच्छेद 48 और 51-ए (जी) के विरुद्ध है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-46367" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0013.jpg" alt="" width="961" height="624" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0013.jpg 961w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0013-300x195.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/06/IMG-20230617-WA0013-768x499.jpg 768w" sizes="(max-width: 961px) 100vw, 961px" /></p>
<p><strong>विधेयक लाना मनमानी</strong></p>
<p>श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा इस प्रकार का विधेयक लाना मनमानी है। उन्होंने जीवित पशु पक्षियों को ‘वस्तु’ की श्रेणी में लेने को भी अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि आयात निर्यात पशुपालन विभाग का कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मांस निर्यात तो गलत है ही, अब ‘जीवित मांस’ का निर्यात भी क्रूरता और संवेदनहीनता का एक वीभत्स उदाहरण है। देश में ‘पशुपालन मंत्रालय’ चल रहा है पर अब उसका नाम पशुपालन नहीं अपितु ‘पशुमारण मंत्रालय’ होना चाहिए।</p>
<p><strong>सक्रिय भूमिका बढ़ाने का अनुरोध</strong></p>
<p>इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया की इस निर्यात के बिल पर आश्चर्य जताते हुए प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्हें स्मरण करवाया कि वर्ष 2013 में उन्होंने एक वक्तव्य में टिप्पणी की थी,‘यदि कोई पिल्ला भी कार के पहिये के नीचे आ जाए तो उन्हें दुख होता है, फिर जीवित पशुओं का निर्यात क्यूं किया जा रहा ? जैन ने देश के सभी धर्मावलंबियों, पशु प्रेमियों,विभिन्न धार्मिक संगठनों और जनसमुदाय को एक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए अनुरोध किया।</p>
<p><strong>सरकार दे अधिक समय</strong></p>
<p>अहिंसा विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप धींग ने दुःखद आश्चर्य जताया हुए कहा कि जनता की राय जानने के लिए विज्ञप्ति का हिंदी और अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओं में होना चाहिए और राय के लिए दो माह का समय दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विधेयक से गाय, बैल आदि उन पशुओं का भारत के बाहर वध किया जा सकेगा,जिनका भारत में नहीं हो सकता और इसी प्रकार जिन पशु पक्षियों का वध दूसरे देशों में प्रतिबंधित है, उनका वध भारत में किया जा सकेगा। फिर पषु-उत्पाद के आयात निर्यात का एक नया सिलसिला और चलेगा।</p>
<p><strong>तुरंत लगे रोक</strong></p>
<p>अखिल भारतीय श्वेतांबर स्थानकवासी जैन कान्फ्रेंस राजस्थान प्रांत के अध्यक्ष निर्मल पोखरना इस देश ने सदैव नीति और अध्यात्म की बात की है। पशुओं के निर्यात को बढ़ावा देने की नीति एक मानवीय अन्याय है, जो हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है। देशभर के अहिंसा प्रेमियों ने प्रधान मंत्री व पशुपालन मंत्रालय सेे मांग की है कि पशुधन आयात और निर्यात विधेयक 2023 पर तुरंत रोक लगाई जाए। यह विधेयक कृषिप्रधान और ऋषि प्रधान भारत की अहिंसा संस्कृति के विरुद्ध है।</p>
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		<title>जीवित पशु वस्तु नहीं है उनका निर्यात क्यों? : संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले पशुधन आयात निर्यात विधेयक 2023 का विरोध </title>
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		<pubDate>Fri, 16 Jun 2023 11:05:05 +0000</pubDate>
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<p><strong>अहिंसा धर्म को मानने वाले भारत देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का सब्जबाग दिखाने वाली भाजपा सरकार अब जीवित पशुओं को भी वस्तु मानकर उन्हें निर्यात किए जाने के लिए संसद में पशुधन आयात निर्यात विधेयक 2023 को प्रस्तुत कर उसे पारित किए जाने की तैयारी कर रही है। जैन समाज ने इस विधेयक का विरोध किया है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> अहिंसा धर्म को मानने वाले भारत देश को हिंदू राष्ट्र बनाने का सब्जबाग दिखाने वाली भाजपा सरकार अब जीवित पशुओं को भी वस्तु मानकर उन्हें निर्यात किए जाने के लिए संसद में पशुधन आयात निर्यात विधेयक 2023 को प्रस्तुत कर उसे पारित किए जाने की तैयारी कर रही है। इस संबंध में भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है, जिसे संसद के इसी सत्र में प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है। इस विधेयक को लाने का मुख्य उद्देश्य अभी तक भारत से किए जा रहे मांस निर्यात के साथ-साथ अब जीवित पशुओं का भी निर्यात किया जा सके ताकि उनका वध किया जाकर मांस का उत्पादन बढ़ाया जा सके और दुनिया में मांस की मांग अनुसार आपूर्ति होकर मांसाहार को बढ़ावा मिले।</p>
<p><strong>मूक पशु नहीं हैं कमोडिटी</strong></p>
<p>सरकार को स्मरण रखना चाहिए कि जिंदा मूक पशु कोई पंसारी की दुकान पर मिलने वाली कमोडिटी (वस्तु) नहीं है, जिसका निर्यात किया जा सके? जीवित पशुओं को कमोडिटी मानकर उनका निर्यात करना संविधान की मूल भावनाओं के उपबंधों के भी विरुद्ध है। सरकार आज जीवित पशुओं को वस्तु मानकर उनका निर्यात करना चाहती है तो क्या कल जीवित इंसानों को भी कमोडिटी (वस्तु) मानकर उनका भी निर्यात करेगी? दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के मंत्री डॉक्टर जैनेंद्र जैन एवं दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन के मीडिया प्रभारी संजीव जैन संजीवनी एवं राजेश जैन दद्दू ने प्रस्तावित विधेयक का विरोध करते हुए विधेयक को अहिंसा और शाकाहार में विश्वास रखने वाली जैन एवं जैनेत्तर समाज की भावनाओं को आहत और जीवित मूक पशुओं पर अत्याचार करने वाला बताते हुए विधेयक को संसद में प्रस्तुत न किए जाने की मांग की है। आपने पशुओं के प्रति करुणा एवं वात्सल्य का भाव रखने वाली एवं अहिंसा और शाकाहार में विश्वास रखने वाली समस्त समाज से आह्वान किया है कि प्रस्तावित विधेयक के विरोध में राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, कृषि मंत्री और मत्स्य पशुपालन डेयरी मंत्री को ज्ञापन भेजकर विधेयक को रोकने की मांग करें।</p>
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