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	<title>माँ सरस्वती &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>माँ सरस्वती &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जेएसी मुरैना जागृति ने मनाया वसंत पंचमी उत्सव : भजन संध्या के साथ हुआ नवीन इकाई के कार्यकाल का शुभारंभ </title>
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		<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 11:32:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर की महिलाओं के स्वयंसेवी संगठन जेएसी मुरैना जागृति की नई इकाई ने अपने नए कार्यकाल की शुरूआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ की। मेम्बर्स ने वसंतोत्सव में भजन बैठक का आयोजन किया। वसंत पंचमी के अवसर पर खास कार्यक्रम में जेएसी मुरैना जागृति की सभी मेम्बर्स पीले परिधान पहनकर पहुंची थीं। मुरैना से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर की महिलाओं के स्वयंसेवी संगठन जेएसी मुरैना जागृति की नई इकाई ने अपने नए कार्यकाल की शुरूआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ की। मेम्बर्स ने वसंतोत्सव में भजन बैठक का आयोजन किया। वसंत पंचमी के अवसर पर खास कार्यक्रम में जेएसी मुरैना जागृति की सभी मेम्बर्स पीले परिधान पहनकर पहुंची थीं। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> नगर की महिलाओं के स्वयंसेवी संगठन जेएसी मुरैना जागृति की नई इकाई ने अपने नए कार्यकाल की शुरूआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ की। मेम्बर्स ने वसंतोत्सव में भजन बैठक का आयोजन किया। वसंत पंचमी के अवसर पर खास कार्यक्रम में जेएसी मुरैना जागृति की सभी मेम्बर्स पीले परिधान पहनकर पहुंची थीं। सबसे पहले उन्होंने विधि-विधान के साथ मां वीणापाणि की पूजा की और श्रद्धाभाव के साथ उनकी आरती उतारी। इस अवसर पर आमंत्रित संगीत मंडली ने मनोहारी भजनों की प्रस्तुति दी। सदस्यों ने पूरे भक्तिभाव से भजन सुने। जेएसी की नई इकाई का कार्यकाल शुरू होने की औपचारिक घोषणा की गई।</p>
<p><strong>आगामी सत्र में होने वाले कार्यक्रमों की प्लानिंग की </strong></p>
<p>निवर्तमान अध्यक्ष भावना जैन ने नवीन अध्यक्ष इति माहेश्वरी, सचिव सुमन भदौरिया और कोषाध्यक्ष हेमलता मोदी को उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान संगठन की सदस्यों ने नए सत्र में भी सेवाभाव से कार्य करते रहने का संकल्प दोहराया। सभी मेम्बर्स ने मिलकर आगामी सत्र में होने वाले कार्यक्रमों की प्लानिंग की और कहा कि हमेशा की तरह हमारा फोकस सेवाभावी गतिविधि, महिलाओं के लिए पर्सनैलिटी डेवलेपमेंट और रोजगारपरक कार्यक्रमों का आयोजन भी प्रमुखता से किया जाएगा।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह रहीं शामिल </strong></p>
<p>कार्यक्रम में जेएसी मुरैना जागृति की सहसचिव नीता शिवहरे ज्योति मोदी, कंचनसिंह, कंचन चावला, नीरजपाल गुप्ता, लता गोयल, मिनी गर्ग, अनिता गर्ग, सरिता गर्ग, रश्मि सिंह, अंजना शिवहरे, अनुराधा गर्ग, ऋतु राठी, डॉ. अनुभा महेश्वरी राधा राजौरिया, डॉ. शिवानी तोमर पल्लवी सहित सभी सदस्यगण शरीक हुईं।</p>
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		<title>भगवान शांतिनाथ जी का जन्म तप और मोक्ष कल्याणक 26 मई को : तिथि के अनुसार तीनों कल्याणक ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Sun, 25 May 2025 12:19:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ जी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याण 26 मई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार यह शुभ अवसर ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को आ रहा है। इस पुण्य मौके पर दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-पाठ और आराधना का दौर रहेगा। श्रीफल जैन न्यूज की ओर से विशेष कड़ी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ जी का जन्म, तप और मोक्ष कल्याण 26 मई को मनाया जाएगा। तिथि अनुसार यह शुभ अवसर ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को आ रहा है। इस पुण्य मौके पर दिगंबर जैन मंदिरों में अभिषेक, शांतिधारा, पूजा-पाठ और आराधना का दौर रहेगा। श्रीफल जैन न्यूज की ओर से विशेष कड़ी में आज पढ़िए, <span style="color: #ff0000">उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ का जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक एक ही दिन ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी को हुआ आता है। जैन धर्म ग्रंथों के अनुसार जन्म हस्तिनापुर में हुआ था, उनके पिता राजा विश्वसेन और माता महारानी ऐरा थीं। वैराग्य आने पर उन्होंने हस्तिनापुर में ही दीक्षा ली। जिसे तप कल्याणक कहा जाता है। उन्होंने सम्मेदशिखर पर्वत पर तपस्या की और वहीं मोक्ष को प्राप्त हुए। भगवान शांतिनाथ के जन्म, तप और मोक्ष कल्याणक इस वर्ष 26 मई को आ रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि बचपन से ही भगवान शांतिनाथ कामदेव के सामन सुंदर थे। उनका मनोहारी रूप देखने के लिए देवराज इंद्र, इंद्राणी उपस्थित हुए थे। भगवान शांतिनाथ के शरीर की आभा स्वर्ण के समान थी। उनके शरीर पर सूर्य, चंद्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिन्ह थे। जन्म से ही उनकी चिह्वा पर मां सरस्वती विराजित थीं। जब भगवान शांतिनाथ युवावस्था में पहुंचे तो राजा विश्वसेन ने उनका विवाह करवाया एवं स्वयं मुनि दीक्षा ले ली। राजा बने शांतिनाथ के शरीर पर जन्म से ही शुभ चिन्ह थे। इस कारण वे शीध्र चक्रवर्ती राजा बन गए।</p>
<p><strong>भगवान शांतिनाथ ने सैकड़ों वर्षों तक न्यायपूर्वक किया शासन </strong></p>
<p>भगवान शांतिनाथ जी की 96 हजार रानियां थीं। उनके पास 84 लाख हाथी, 360 रसोइए, 84 करोड सैनिक, 28 हजार वन, 18 हजार मंडलिक राज्य, 360 राजवैद्य, 32 हजार अंगरक्षक देव,32 चंवर ढुलाने वाले, 32 हजार मुकुटबंध राजा, 32 हजार सेवक देव, 16 हजार खेत, 56 हजार अंतर्दीप, 4 हजार मठ, 32 हजार देश, 96 करोड़ ग्राम, 1 करोड़ हंडे, 3 करोड़ गायें, 3 करोड़ 50 लाख बंधु-बांधव, 10 प्रकार के दिव्य भोग, 9 निधियां और 24 रत्न, 3 करोड़ थालियां आदि अकूत संपदा थी। इस अकूत संपदा के मालिक शांतिनाथ ने सैकड़ों वर्षों तक पूरी पृथ्वी पर न्यायपूर्वक शासन किया।</p>
<p><span style="color: #ff0000"><strong>सोलह वर्षों तक घोर तप किया</strong></span></p>
<p>एक दिन वे दर्पण में अपना मुख देख रहे थे तभी उनकी किशोरावस्था का एक और मुख दिखाई दिया। मानों वह उन्हें कुछ संकेत कर रहा था। उस संकेत को देख वे समझ गए कि वे पहले किशोर थे फिर युवा हुए और अब प्रौढ़। इसी प्रकार सारा जीवन बीत जाएगा, लेकिन उन्हें इस जीवन मरण के चक्र से छुटकारा पाना है। यही उनके जीवन का उद्देश्य भी है। और उसी पल उन्होंने अपने पुत्र नारायण का राज्याभिषेक किया और स्वयं दीक्षा लेकर दिगंबर मुनि बन गए। मुनि बनने के बाद लगातार सोलह वर्षों तक विभिन्न वनों में रहकर घोर तप किया और पौष शुक्ल दशमी को उन्हें केवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे तीर्थंकर कहलाए। तदंतर उन्होंने लगातार विहार कर लोक कल्याण किया, उपदेश दिए। ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी के दिन सम्मेद शिखर जी पर भगवान शांतिनाथ को निर्वाण प्राप्त हुआ।</p>
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		<title>जेएसी मुरैना जागृति ने बसंत ऋतु का स्वागत कियाः माँ वीणापाणि पूजन के साथ कई कार्यक्रम सम्पन्न हुए </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 30 Jan 2025 13:05:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में जेएसी मुरैना जागृति के सदस्यों ने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। माँ सरस्वती की पूजा कर गीत-संगीत के साथ बसंत ऋतु का स्वागत किया। कार्यक्रम में बसंती थीम पर आधारित गेम्स भी खेले गए, जिनमें सभी सदस्यों ने उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। पढ़िए मुरैना से मनोज जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में जेएसी मुरैना जागृति के सदस्यों ने विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। माँ सरस्वती की पूजा कर गीत-संगीत के साथ बसंत ऋतु का स्वागत किया। कार्यक्रम में बसंती थीम पर आधारित गेम्स भी खेले गए, जिनमें सभी सदस्यों ने उत्साह और उमंग के साथ भाग लिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मुरैना से मनोज जैन नायक की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> जेएसी मुरैना जागृति के सदस्यों ने बसंत पंचमी के उपलक्ष्य में खास कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने माँ सरस्वती की पूजा की और गीत-संगीत के साथ बसंत ऋतु का स्वागत किया। कार्यक्रम में बसंती थीम पर आधारित गेम्स भी खेले गए, जिनमें सभी सदस्यों ने उत्साह और उमंग के साथ भागीदारी की।</p>
<p><strong>बसंती रंग सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक </strong></p>
<p>जेएसी मुरैना जागृति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संगठन की सभी मेंबर्स बसंती परिधान पहनकर पहुंची थीं। सबसे पहले उन्होंने माँ वीणापाणि की आराधना की और एक-दूसरे को बसंत पंचमी पर शुभकामनाएं दीं। इसके बाद संगठन की अध्यक्ष भावना जैन ने कहा कि बसंती रंग सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। साथ ही सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है। इस रंग का संबंध आध्यात्मिकता से भी है। सचिव भारती मोदी और कोषाध्यक्ष नीता बांदिल ने भी बसंत पंचमी के बारे में खास जानकारियां जेएसी मेम्बर्स को दीं।</p>
<p><strong>गेम्स बसन्त पंचमी पर ही आधारित रहे</strong></p>
<p>इसके बाद कार्यक्रम की संयोजक ललिता गोयल और अनुराधा गर्ग ने खुल जा सिम-सिम और तंबोला आदि गेम्स कराए। खास बात यह है कि इन गेम्स में जो प्रश्न पूछे गए, वे बसन्त पंचमी पर ही आधारित थे। गेम्स में जिन मेम्बर्स ने बेहतर प्रदर्शन किया, उन्हें पुरस्कार दिए गए। गेम्स के अलावा संगठन की सदस्यों ने बसंत पंचमी के गीत गाये और पारंपरिक नृत्य भी किया। अन्त में सभी ने भोजन किया। मेन्यू में अधिकांश चीजें पीले रंग की रखी गई थीं। जेएसी मुरैना जागृति के इस पहले सामूहिक कार्यक्रम में कार्यकारिणी का गठन भी किया गया।</p>
<p><strong>सेवा कार्यों की रूपरेखा तय की </strong></p>
<p>बसंत पंचमी के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में जेएसी मुरैना जागृति की सदस्यों ने सालभर चलने वाले सेवा कार्यों की रूपरेखा भी तय की। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि अब हमें इस तरह के कार्य करने हैं, जो जरूरतमंदों के लिए सीधे मददगार साबित हों।</p>
<p><strong>महिलाओं को सशक्त बनाने का उद्देश्य</strong></p>
<p>विशेषकर महिलाओं को सशक्त बनाने और बच्चों की हेल्प से जुड़ी एक्टिविटीज पर हमारा फोकस रहेगा। इसके अलावा हर साल आयोजित किये जाने वाले रूटीन कार्यक्रमों पर भी संगठन की सदस्यों ने चर्चा की। सभी ने संकल्प लिया कि बीते 15 वर्षों की तरह आगे भी जनहित के कार्यों को जारी रखा जाएगा।</p>
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