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	<title>महिला प्रदेश इकाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>महिला प्रदेश इकाई &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की महिला प्रदेश इकाई का गठन : आधे घंटे किए हुए पुण्य को 24 घंटे में गंवा रहे है लोग- मुनि श्री सुधा सागर जी  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:12:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस संसार में 90 प्रतिशत लोग खाकड़ा देते है,व्यक्ति जितना पुण्य करता है उतना गंवा भी देता है। हाथी होता वह तालाब में जाकर अपनी सूंड से अपने शरीर पर पानी डाल लेता है। यह उदगार नगर में विराजमान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। मुंगावली से पढ़िए, राजीव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस संसार में 90 प्रतिशत लोग खाकड़ा देते है,व्यक्ति जितना पुण्य करता है उतना गंवा भी देता है। हाथी होता वह तालाब में जाकर अपनी सूंड से अपने शरीर पर पानी डाल लेता है। यह उदगार नगर में विराजमान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">मुंगावली से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुंगावली।</strong> इस संसार में 90 प्रतिशत लोग खाकड़ा देते है,व्यक्ति जितना पुण्य करता है उतना गंवा भी देता है। हाथी होता वह तालाब में जाकर अपनी सूंड से अपने शरीर पर पानी डाल लेता है और नहा लेता है मगर, वही हाथी जब तालाब से बाहर आता है और पीठ पर मिट्टी डाल लेता है। यह उदगार नगर में विराजमान मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यही स्थिति आप लोगों की है मंदिर में जाते हो, गुरुओं के पास जाते हो,स्नान करके आते हो। मंदिर में जाकर जाप भी कर लेता हूं। साधुओं के साथ अलाप भी कर लेता हूं। इंसान से कही भगवान न बन जाऊं इस लिए थोड़ा पाप भी कर लेता हूं। यही दशा है गृहस्थ की।आधा घंटे मंदिर में पुण्य कमाता है उधर, 24 पाप में गंदा हो जाता है। मंदिर से निकलते ही पुनः राग देष, कषाय में लग जाता है दसलक्षण पर्व आते है ओर दस दिनों तक जमकर पूजा, पाठ,विधान आदि की क्रियाएं करता है ओर दस दिन बाद दसलक्षण के दिनों में सब्जी सस्ती हो जाती है मगर जैसे ही दसलक्षण खत्म होते हैं। वैसे ही सब्जियां महंगी हो जाती है। तुम जैन हो हाथी के समान इतनी मेहनत करके तुम तालाब में जाते हो और पुन: तुम खुद आकर मिट्टी डाल लेते हो कोई दूसरा डाले तो कोई बात नहीं मगर तुम खुद अपने किए कराए पर मिट्टी डाल लेते हो।</p>
<p><strong> कुछ नया करने का सौभाग्य मिला रहा</strong></p>
<p>इस दौरान राष्ट्रीय जिनशासन एकता की प्रेरणा से मुनि श्री के सान्निध्य में एकता संघ की महिला इकाई का गठन किया गया। इस दौरान महिला महा समिति कि राष्ट्रीय महासचिव इन्द्र गांधी ने कहा कि हम सब संगठन के लिए काम करें और कुछ अलग करके दिखाए। इस दौरान संगठन के सर कार्य वाहक राकेश बाबा ने कहा कि गुरुदेव के आशीर्वाद से अशोक नगर में राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान कुछ बिंदुओं पर निर्णय लिया गया था। हम सब उन्हीं पर अमल कर रहे हैं। इस दौरान मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि हम सब विभिन्न संगठनों के मध्य से काम कर रहे हैं लेकिन, सौभाग्य से हमें गुरुदेव के आशीर्वाद से हमें कुछ नया करने का सौभाग्य मिला रहा है इस हेतु तैयार रहना है इस दौरान जिला प्रमुख विपिन सिंघई निर्मल मिर्ची शैलेन्द्र दददा हेमंत टडैया नवीन सर सहित प्रमुख जनो ने विचार रखे।</p>
<p><strong>तुममें यह परिवर्तन कैसे आ गया</strong></p>
<p>उन्होंने कहा तुम स्कूल में पड़ कर कुछ बन गये तो आप अपनी योग्यता से उस स्कूल का गौरव लौटाने का पुरूषार्थ अपनी योग्यता से करों इसी प्रकार आपको अपने नगर में कुछ करने का सौभाग्य प्राप्त हो जरूर करना चाहिए करो कुछ तो करो कुछ ऐसा करो कि लोग तुम्हे देखते ही कहे कि तुममें यह परिवर्तन कैसे आ गया,आप सभी लोग जिस दिन उस मिट्टी डालना बंद कर दोगे तो सब कुछ बदल जाएगा वही मुनि श्री को नवधा पूर्वक आहार कराने का सौभाग्य संजय,शुभांशु सिंघई परिवार को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>जीव के ही पुदगल कर्म बंधते है वो ही उसमें शक्ति भरते हैं</strong></p>
<p>जीव के ही पुदगल कर्म बंधते हैं वो ही उसमें इतनी शक्ति भरते हैं जिससे वह सत्ता में पड़े रहते हैं। बाद में उदय में आते जीव ही तद रुप होकर व्यवहार में आ जाता है। ये सब निमित्त नैमित्तिक संबंध जीव ही स्वयं अपने आप बनता चला जाता है। आपको कोई जन्म मरण के कष्ट नहीं दे रहा जो आपने जो कर्म किये उन्हीं का फल समाने आते हैं जिस प्रकार आप लोग घंडी में चावी भर देते हैं और जो समय आपने भर दिया। उस समय ही अलार्म बजता है भले आपकी नींद ख़राब हो रही हो वो आप आपके द्वारा ही तो भरा गया इसी प्रकार आपको जो कर्म किए हैं उसी का फल आपके समाने होता है।</p>
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