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	<title>मशीन लर्निंग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>मशीन लर्निंग &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>एआई अवेयरनेस क्विज़ में आयुषी जैन और प्राची चौधरी विजेता : प्रतिभागियों की ज्ञान क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और तकनीकी समझ का समग्र मूल्यांकन किया  </title>
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		<pubDate>Mon, 08 Jun 2026 16:00:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[टीएमयू के कॉलेज ऑफ कम्प्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सीसीएसआईटी में एआई अवेयरनेस क्विज़ 2026 में 49 टीमों ने शिरकत की। एआई अवेयरनेस क्विज़ 2026 में बीसीए- डेटा एनालिटिक्स की छात्रा आयुषी जैन और बीसीए- साइबर सिक्योरिटी की छात्रा प्राची चौधरी संयुक्त रूप से विजेता रहीं। मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>टीएमयू के कॉलेज ऑफ कम्प्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सीसीएसआईटी में एआई अवेयरनेस क्विज़ 2026 में 49 टीमों ने शिरकत की। एआई अवेयरनेस क्विज़ 2026 में बीसीए- डेटा एनालिटिक्स की छात्रा आयुषी जैन और बीसीए- साइबर सिक्योरिटी की छात्रा प्राची चौधरी संयुक्त रूप से विजेता रहीं। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, प्रो. श्यामसुंदर भाटिया की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कम्प्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी-सीसीएसआईटी में एआई अवेयरनेस क्विज़ 2026 में बीसीए डेटा एनालिटिक्स की छात्रा आयुषी जैन और बीसीए साइबर सिक्योरिटी की छात्रा प्राची चौधरी संयुक्त रूप से विजेता रहीं। बीसीए डेटा एनालिटिक्स की स्टूडेंट्स वैष्णवी और अनुष्का रावत दूसरे स्थान पर रहीं। प्रतियोगिता में कुल 49 टीमों ने पंजीकरण कराया। प्रत्येक टीम में दो सदस्य शामिल थे। प्रतियोगिता तीन चरणों में की गई, जिससे प्रतिभागियों की ज्ञान क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और तकनीकी समझ का समग्र मूल्यांकन किया गया। प्रारंभिक चरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, उभरती तकनीकों एवम् सामान्य तकनीकी जागरूकता से संबंधित बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए। दूसरे चरण में प्रतिभागियों की तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण एवम् एआई संबंधी गहन जानकारी का परीक्षण किया गया। इस चरण में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों को अंतिम दौर के लिए चयनित किया गया। अंतिम चरण ऑफलाइन मोड में आयोजित किया गया। अंतिम चरण में रैपिड रेस्पोंस आधारित गतिविधियों के जरिए प्रतिभागियों की निर्णय क्षमता, विषयगत गहराई और तकनीकी दक्षता को परखा गया।</p>
<p><strong>वर्तमान युग आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एआई का है</strong></p>
<p>इससे पूर्व फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेशकुमार द्विवेदी, कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. प्रियांक सिंघल एवं शिवांश शर्मा और सीसीएसआईटी के प्रॉक्टर प्रो. प्रदीप कुमार, बीएससी सीएस के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ब्रहमदत्त गौड़ आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया। फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी ने कहा कि वर्तमान युग आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एआई का है, जो शिक्षा, उद्योग, स्वास्थ्य, अनुसंधान, कृषि, व्यापार तथा समाज के विभिन्न क्षेत्र में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। एआई केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि भविष्य की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए इसके सिद्धांतों, अनुप्रयोगों और संभावनाओं को समझना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे आने वाली चुनौतियों और अवसरों के लिए स्वयं को तैयार कर सकें। संचालन स्टूडेंट्स अंशिका कक्कड़, प्रिया, मेहुल मेहरोत्रा और तनिष्क गुप्ता ने किया।</p>
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		<title>संस्कृत मानव सभ्यता की अद्भुत धरोहर: रोहिणी जैन ने कहा संस्कृत का पुनर्जीवन वैश्विक पहचान बना सकता है  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 08:00:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार व्याख्यानमाला में रोहिणी जैन ने रखे। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक है। टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230; टीकमगढ़। संस्कृत केवल अतीत की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार व्याख्यानमाला में रोहिणी जैन ने रखे। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक है। <span style="color: #ff0000">टीकमगढ़ से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टीकमगढ़।</strong> संस्कृत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना है। यह प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक का सेतु है। यह विचार रविवार को आयोजित व्याख्यानमाला में विदुषी रोहिणी जैन ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संस्कृत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में पथप्रदर्शक की भूमिका निभाती आ रही है। यह विश्व की सबसे प्राचीन, सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। जैन ने बताया कि संस्कृत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्याकरणिक संरचना है। पाणिनि का अष्टाध्यायी विश्व की सबसे सटीक और तार्किक व्याकरणिक रचना मानी जाती है। यही कारण है कि आधुनिक कम्प्यूटर भाषाओं के निर्माण में भी इसे आदर्श माना जा सकता है।</p>
<p><strong>तकनीक से जुड़ाव जरूरी </strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि जहां अंग्रेज़ी सहित अन्य भाषाओं में असंगतियां देखने को मिलती हैं, वहीं संस्कृत में पूर्ण स्पष्टता और तार्किकता है। यही कारण है कि जब विश्व में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का दौर शुरू हुआ, तब शोधकर्ताओं ने पाया कि संस्कृत इन तकनीकों को विकसित करने में अत्यंत उपयोगी हो सकती है।</p>
<p><strong>वैश्विक रुचि जागृत करनी होगी </strong></p>
<p>आज जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन सहित अनेक देशों के विश्वविद्यालयों में संस्कृत का गहन अध्ययन हो रहा है। जर्मनी के कम से कम 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जहां इसे केवल धार्मिक या दार्शनिक दृष्टि से नहीं बल्कि आधुनिक विज्ञान और तकनीक के परिप्रेक्ष्य में भी पढ़ाया जाता है।</p>
<p><strong>भविष्य की भाषा है संस्कृत </strong></p>
<p>रोहिणी जैन ने कहा कि संस्कृत की शब्द संरचना और व्याकरणिक नियम कंप्यूटरों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं, क्योंकि इसमें प्रत्येक शब्द और वाक्य का निश्चित और स्पष्ट अर्थ होता है। यही कारण है कि कई शोध संस्थान संस्कृत को भविष्य की तकनीकी भाषा मान रहे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि “संस्कृत का पुनर्जीवन भारत को ज्ञान और तकनीक की दिशा में विश्व का नेतृत्वकर्ता बना सकता है। यह भाषा हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए आधुनिकता के साथ तालमेल बैठाने में सक्षम है। संस्कृत को विज्ञान और तकनीक का सेतु बनाया जाए, यही भारत के स्वर्णिम भविष्य की आधारशिला सिद्ध होगी।</p>
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