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	<title>मंगल &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>शनि और मंगल ग्रह की युति से युद्ध और हिंसा में बढ़ोतरी की आशंका : डॉ. जैन ने कहा- भूकंप आने से जन धन हानि की संभावना </title>
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		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 12:57:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि 01.52 बजे उदय होंगे। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> शनि और मंगल ग्रह की युति से विश्व में हिंसा और युद्ध की संभावना बलबती दिखाई दे रही है। साथ ही भूकंप आदि से जन धन की आशंका है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया शनि ग्रह 17 अप्रैल को 13.59 बजे मीन राशि में उदय, मंगल 18 अप्रैल को मीन राशि में रात्रि 01.52 बजे उदय होंगे। शनि एवं मंगल दोनों ग्रह 20 अप्रैल से युति से युद्ध, हिंसा, उपद्रव को पृथ्वी पर भड़काएंगे चारों तरफ आग के गोले, धुआं से पृथ्वी थर्राएगी। कहीं कहीं भूकंप से भी हानि के योग है। जैन ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि मंगल-शनि की युति के साथ ही लगातार तीन राशियों में सभी पाप और क्रूर ग्रह चलेंगे।</p>
<p>कुंभ राशि में राहु है, मीन राशि में मंगल एवं शनि ,चंद्रमा रहेंगे, मेष राशि में सूर्य एवं शुक्र रहेंगे। मंगल एवं शनि का मीन राशि में युति का गुरु से केंद्र योग सूर्य और राहु से द्विर्द्वादश योग रहने से 18 अप्रैल से 15 मई 2026 तक का समय इजराइल अमेरिका, ईरान के लिए और उनके राष्ट्राध्यक्ष के लिए घातक है। अन्य देश भी इसकी चपेट में रहेंगे। महंगाई बढ़ेगी, तेल, पेट्रोल, गैस नष्ट होने से महंगाई का जन जीवन पर व्यापक असर पड़ेगा। भूमंडल पर युद्ध, भूकंप, सुनामी, हिंसा, उपद्रव से जन-धन हानि से आम जनता दुःखी और पीड़ित रहेगी। ज्ञात रहे कि वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन तीन दशक से अधिक समय से ज्योतिष पर अपनी सटीक भविष्यवाणियां कर रहे हैं। जिनमें दर्जनों जटिल मुद्दों पर भविष्यवाणियां समय समय पर सत्य सिद्ध होती रही हैं।</p>
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		<title>गिरारगिरी में मुनिराजों का हुआ मंगल मिलन : सिद्धचक्र महामंडल विधान में उमड़ा आस्था का सैलाब </title>
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		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:08:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 जनवरी तक आयोजित 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में हो रहा है। ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; ललितपुर। श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 जनवरी तक आयोजित 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में हो रहा है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी जी में 16 से 23 जनवरी तक आयोजित 25 मंडलीय 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान, वार्षिक मेला, विश्व शांति महायज्ञ एवं भव्य रथोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में हो रहा है। यह आयोजन आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज एवं मुनि श्री शीलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में हो रहा है। रविवार को सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत 16 अर्घ्य विधानों के पात्रों ने भक्ति नृत्य के साथ भावपूर्ण अर्घ्य समर्पित किए। संपूर्ण वातावरण सिद्धाराधना की भक्ति बयार से ओतप्रोत हो उठा।</p>
<p><strong>दो संघों का भव्य मंगल मिलन </strong></p>
<p>प्रचार मंत्री डॉ. सुनील संचय ने बताया कि रविवार को गिरारगिरी अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रभावी शिष्य मुनि श्री अभयसागर जी महाराज ससंघ एवं आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल मिलन गाजे-बाजे एवं जयकारों के साथ हुआ। मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ससंघ एवं सैकड़ों श्रद्धालु धसान नदी पुल पर मुनि श्री अभयसागर जी महाराज की अगवानी के लिए पहुँचे। जैसे ही दोनों संघों का मिलन हुआ, जयकारों के उद्घोष से आकाश गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर धर्मसभा का आयोजन किया गया, जिसमें पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का पुण्य लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>जैन दर्शन आत्मसंयम का मार्ग दिखाता है</strong></p>
<p>धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री अभयसागर जी महाराज ने कहा कि सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि की अनुपम साधना है। यह विधान हमें स्मरण कराता है कि सिद्धों का स्मरण ही संसार के बंधनों से मुक्ति का मार्ग है। जब साधु-संतों का मिलन होता है, तब केवल देह नहीं, विचारों का भी संगम होता है, जो समाज को धर्म की दिशा देता है। उन्होंने कहा कि आज का युग भौतिकता की ओर अधिक झुक गया है, किंतु जैन दर्शन आत्मसंयम, अहिंसा और समता का मार्ग दिखाता है, जिसे जीवन में उतारना ही सच्ची आराधना है।</p>
<p><strong>यह मिलन समाज के लिए संदेश</strong></p>
<p>मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहाकृसमत्व ही धर्म का प्राण है। सिद्धचक्र की आराधना तभी फलवती होती है, जब जीवन में राग-द्वेष का क्षय और समभाव का विकास हो। मुनि संघों का यह मिलन समाज के लिए संदेश है कि एकता, अनुशासन और श्रद्धा से ही धर्म प्रभावना संभव है।</p>
<p><strong>जादूगर राजकुमार के करतबों ने किया मंत्रमुग्ध </strong></p>
<p>आयोजन के अंतर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में दिल्ली के सुप्रसिद्ध जादूगर राजकुमार द्वारा प्रस्तुत रोमांचक जादुई करतबों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके कार्यक्रम में वस्तुओं का अदृश्य हो जाना, क्षणभर में स्थान परिवर्तन, संतुलन और साहसिक प्रयोग विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। पारंपरिक जादू और आधुनिक तकनीक के समन्वय ने दर्शकों की खूब तालियाँ बटोरीं।</p>
<p><strong>धार्मिक विधि-विधान एवं आयोजन व्यवस्था</strong></p>
<p>धार्मिक विधि-विधान का सफल संपादन पंडित मनोज शास्त्री (बगरोही), पंडित देवेंद्र शास्त्री (मड़ावरा) एवं पंडित विकर्ष शास्त्री द्वारा किया गया। इस अवसर पर गिरारगिरी कमेटी अध्यक्ष चक्रेश जैन, महामंत्री प्रदीप जैन मड़ावरा, कोषाध्यक्ष मुकेश सिंघई, आयोजन समिति अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री राजेश रज्जू मड़ावरा, कोषाध्यक्ष दीपचंद्र जैन, अभिषेक जैन दीपू, अजित जैन, त्रिलोक जैन ने समागत अतिथियों का स्वागत किया।</p>
<p><strong>निर्वाण लाडू समर्पण का पुण्य सौभाग्य</strong></p>
<p>मूलनायक आदिनाथ भगवान का प्रथम निर्वाण लाडू समर्पण का सौभाग्य सुनील जैन, नेहा जैन, आदर्श जैन, आयुष जैन, अवनी जैन एपी बाम स्पेशल परिवार, द्वितीय सौभाग्य कपूरचंद जैन, प्रदीप जैन, निधि जैन (मड़ावरा), तृतीय सौभाग्य ब्र. अनुराग जैन, इंद्रा जैन, अभिषेक जैन, दर्शना जैन (मड़ावरा), चतुर्थ सौभाग्य भगवानदास, प्रेमचंद, वीरेंद्र जैन (मड़ावरा) को प्राप्त हुआ। आयोजन में मड़ावरा, बरायठा, महरौनी, शाहगढ़, टीकमगढ़, ललितपुर, सोजना, सागर, बंडा, इंदौर, बड़ागांव, साढूमल, सौरई, खुटगुवा, गौना, नेकौरा सहित अनेक स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।</p>
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		<title>ज्योतिषाचार्य डॉ. जैन धर्मनिष्ठ, वाणीभूषण की उपाधि से सम्मानित : अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के चतुर्थ स्थापनादिवस का आयोजन संपन्न &#8211; आगरा </title>
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		<pubDate>Sat, 19 Oct 2024 08:35:30 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुरैना, आगरा में अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के चतुर्थ स्थापनादिवस का आयोजन परम पूज्य उपाध्याय मेडिटेशन गुरु श्री विहसंत सागर जी महाराज जी के सानिध्य में 17 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिन हुआ। इसमें 100 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने लिया भाग। पढ़िए मनोज जैन नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;. मुरैना, ताज की नगरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>मुरैना, आगरा में अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के चतुर्थ स्थापनादिवस का आयोजन परम पूज्य उपाध्याय मेडिटेशन गुरु श्री विहसंत सागर जी महाराज जी के सानिध्य में 17 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिन हुआ। इसमें 100 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने लिया भाग। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की यह विशेष रिपोर्ट&#8230;.</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना,</strong> ताज की नगरी आगरा में अखिल भारतीय जैन ज्योतिषाचार्य परिषद के चतुर्थ स्थापनादिवस का आयोजन परम पूज्य उपाध्याय मेडिटेशन गुरु श्री विहसंत सागर जी महाराज जी के सानिध्य में 17 अक्टूबर शरद पूर्णिमा के दिन हुआ।</p>
<p><strong>100 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने लिया भाग</strong></p>
<p>इस अवसर पर भारत के मुंबई, दिल्ली, जयपुर, किशनगढ़, मेरठ, ग्वालियर, जबलपुर, वापी, भोपाल, सूरत, आगरा आदि शहरों के 100 से अधिक ज्योतिष विद्वानों ने भाग लिया और अपने ज्योतिष पर अलग अलग विचार रखे।</p>
<p><strong>डॉ हुकुमचंद जैन ने ज्योतिष विषय पर दिया उद्वोधन</strong></p>
<p>ग्वालियर शहर से ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने भी अपना ज्योतिष विषय पर उद्वोधन देते हुए कहा कि आज कल ज्योतिष विद्वान मंगल,कालसर्प योग, शनि साढ़ेसाती,आदि को प्रमुखता से बताते हैं लेकिन उसका उपाय प्रोपर और सटीक पूछने वाले को नहीं देते इसलिए ज्योतिष के प्रति व्यक्ति भ्रमित है।जबकि ज्योतिष शास्त्रों में जब जब गोचर वस या महादशा,अंतर्दशा में अशुभ ग्रह भ्रमण करते हैं तो व्यक्ति को नाना प्रकार के कष्ट से बचने के सरल मंत्र जाप,उपाय वर्णित है जिनसे ग्रह पीड़ा शांत होती हैं। राहु केतु पीड़ा, मंगली पत्रिका, पितृ दोष, कालसर्प योग दोष के अनेक सरल उपाय है उन्हें विद्वानों को बताना चाहिए ओर समय के साथ उनमें प्रयोग करना चाहिए।</p>
<p><strong>खुला प्रश्न मंच भी हुआ</strong></p>
<p>कुछ ज्योतिष विद्वानों और आम जनता ने भी ज्योतिषाचार्य से खुले मंच पर प्रश्न किए जैसे मंगली पत्रिका का जीवन पर असर, कालसर्प या पितृ दोष के उपाय से शांति संभव है क्या ग्रहण का मनुष्य जीवन और तेजी मंदी पर कैसे असर होता है या नहीं इसे माने या नहीं आज के समय में इस पर ज्योतिषाचार्य जैन ने कहा कि ग्रह गौचर और ग्रहण सभी चर अचर पर अपना असर उनकी राशि, नक्षत्र के अनुसार अच्छा बुरा प्रभाव डालते हैं उनके उपाय पर भी प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>हुआ सम्मान</strong></p>
<p>इस अवसर पर ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन को अर्पित मय पावन वर्षायोग समिति, ग्रेटर कमला नगर आगरा उत्तरप्रदेश ने उन्हें धर्मनिष्ठ, विभूषण, सरल स्वभावी ज्योतिष विद्वान की उपाधि से सम्मानित किया।</p>
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