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	<title>भोपाल &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भोपाल &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>सनावद में आर्यिका संघ का हुआ मंगल प्रवेश: आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर की अगवानी  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 05:14:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230; सनावद। त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। <span style="color: #ff0000">सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सनावद।</strong> त्याग संयम एवं अठारह त्यागियों की जन्म नगरी सनावद में आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षित आर्यिका श्री विश्वयशमति जी और आर्यिका श्री विमलमति जी का मंगल विहार भोपाल में वर्ष 2025 का वर्षायोग संपन्न कर सिद्धक्षेत्र नेमावर के दर्शन कर आप सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट की वंदना कर णमोकार तीर्थ नाशिक की ओर हो रहा है। आर्यिका संघ की मंगल अगवानी सभी समाजजनों ने ट्रेंगल चौराहे पर पहुंच कर की। आर्यिका संघ ने नगर के सभी जिन मंदिरों एवं गृह चैत्यालयों के दर्शन कर आप श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचीं। जहां समाज की गवाक्षीजैन, प्रियंका पंचोलिया, गरिमा पंचोलिया, अंशुमा सराफ, संध्या जैन, मंजुला भूच, साधना जैन ,चंदा पाटनी सहित अनेक महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश रखकर पाद प्रक्षालन कर अगवानी की।</p>
<p><strong>मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी की आध्यात्मिक चर्चा हुई</strong></p>
<p>नगर में पूर्व से विराजमान मुनि श्री अक्षय सागरजी, मुनि श्री निराकुल सागरजी के आर्यिका संघ ने दर्शन किए एवं मुनि श्री एवं आर्यिका माताजी की आध्यात्मिक चर्चा हुई। शाम की मंगल बेला में आर्यिका माताजी द्वारा आचार्यश्री शांतिसागर वर्धमान देशना निलय में सामयिक, गुरु भक्ति, आचार्य वंदना, प्रश्न मंच व मंगल उद्धबोधन हुए। इस अवसर पर प्रशांत चौधरी, राजेश पंचोलिया, हेमंत काका, संतोष बाकलीवाल, अचिंत्य जैन, देवेंद्र काका, मुकेश जैन, राजू जैन, कमल केके, वारिश जैन, आशीष जैन, मिश्रू जैन, सुनिल मास्टर साब आशीष जैन, कमलेश भूच, गोरू मुंशी, हितांश, नीरव, अभियांशु, नरेंद्र भारती सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।</p>
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		<title>भोपाल में सर्वार्थसिद्धि का हुआ शिलान्यास : समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट की सराहनीय पहल 100 सीटर बनेगा छात्रावास </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Dec 2025 13:34:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन समाज की बेटियों के लिए धार्मिक एवं लौकिक उच्च शिक्षा हेतु समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संस्थापित एवं संचालित सर्वार्थ सिद्धि के निर्माणाधीन छात्रावास का शिलान्यास समारोह विविध अनुष्ठानों के साथ हुआ। भोपाल से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी, राजेश रागी की यह खबर&#8230; भोपाल। जैन समाज की बेटियों के लिए धार्मिक एवं लौकिक उच्च शिक्षा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन समाज की बेटियों के लिए धार्मिक एवं लौकिक उच्च शिक्षा हेतु समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संस्थापित एवं संचालित सर्वार्थ सिद्धि के निर्माणाधीन छात्रावास का शिलान्यास समारोह विविध अनुष्ठानों के साथ हुआ। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी, राजेश रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> जैन समाज की बेटियों के लिए धार्मिक एवं लौकिक उच्च शिक्षा हेतु समर्पण चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संस्थापित एवं संचालित सर्वार्थ सिद्धि के निर्माणाधीन छात्रावास का शिलान्यास समारोह विविध अनुष्ठानों के साथ हुआ। दीपक राज जैन ने बताया कि राजधानी भोपाल में शिलान्यास समारोह अशोक जैन अध्यक्ष तीर्थधाम ज्ञानोदय की अध्यक्षता में, ताराचंद जैन विधायक उदयपुर के मुख्य आतिथ्य एवं सुरेश जैन आईएएस, न्यायमूर्ति विमला जैन, न्यायाधीश अरविंद जैन, न्यायाधीश सचिन जैन, वीरेन्द्र जैन ज्ञायक बांसवाड़ा, पंडित रजनी भाई दोशी हिम्मतनगर, पंडित विराग शास्त्री जबलपुर, डॉ. अरुण जैन जयपुर, महेंद्र चौधरी भोपाल, रजनी जैन रायसेन, सुधीर जैन कटनी, डॉ. गुलाबचंद जैन घुवारा, सुमतिलाल लुणदिया बांसवाड़ा, प्रतीक गांधी इंदौर के विशिष्ट आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर छात्रावास का शिलान्यास अमेरिका से पधारी नमिताबेन किशोर भाई शाह, किशोरभाई सुरजी शाह के करकमलों से किया गया। शिलान्यास समारोह में भोपाल के अतिरिक्त इंदौर, जबलपुर, आगरा, विदिशा, सिद्धायतन द्रोणगिरि ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष विनोद डेवडिया, वर्तमान अध्यक्ष आलोक जैन दाऊ, उपाध्यक्ष रतनचंद्र जैन शास्त्री, कोषाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद जैन, डॉ.गुलाबचंद्र जैन उपमंत्री जमुनालाल जैन, संतोष कुमार जैन सहित खड़ैरी, घुवारा, छिंदवाड़ा, सागर, सिलवानी, रायसेन, ग्यारसपुर, शुजालपुर, बकस्वाहा, शाहगढ़ सहित अनेक स्थानों से साधर्मियों की उपस्थिति रही। संचालन श्रीमती ममता राजकुमार शास्त्री एवं आभार प्रदर्शन डॉ. महेश जैन ने किया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान सर्वार्थ सिद्धि की बालिकाओं ने सुंदर मंगलाचरण कर सभी का स्वागत किया एवं अतिथियों के द्वारा ध्वजारोहण कर महोत्सव का शुभारंभ हुआ। स्मरण रहे सर्वार्थसिद्धि में मनोहारी दिगंबर जिन मंदिर, स्वाध्याय भवन, 100 सीटर छात्रावास, अतिथि निवास एवं भोजनालय की योजना है, जिसका निर्माण प्रारंभ शिलान्यास से प्रारंभ किया गया। जो सकल जैन समाज के लिए गौरव की बात है।</p>
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		<title>अष्टान्हिका पर्व में नंदीश्वर द्वीप के जिनालयों सिद्ध भगवंतों की आराधना का विधान: आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी संघ के सानिध्य में आरंभ हुआ पर्व  </title>
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		<pubDate>Thu, 30 Oct 2025 10:01:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज में सिद्ध भगवंतों की आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कई लोगों ने आठ दिन के एकासना व्रत का संकल्प लिया। इस मौके पर मंगलवारा जैन मंदिर की धर्मशाला में आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी और उनके संघ का सानिध्य प्राप्त हुआ। भोपाल से पढ़िए, यह साभार संकलित खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज में सिद्ध भगवंतों की आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कई लोगों ने आठ दिन के एकासना व्रत का संकल्प लिया। इस मौके पर मंगलवारा जैन मंदिर की धर्मशाला में आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी और उनके संघ का सानिध्य प्राप्त हुआ। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह साभार संकलित खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> दिगंबर जैन समाज में सिद्ध भगवंतों की आराधना के लिए अष्टान्हिका पर्व का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कई लोगों ने आठ दिन के एकासना व्रत का संकल्प लिया। इस मौके पर मंगलवारा जैन मंदिर की धर्मशाला में आर्यिका श्री सृष्टिभूषण माताजी और उनके संघ के सानिध्य और उत्तरप्रदेश के संस्कृत के विद्वान प्रतिष्ठाचार्य नन्हे भैया के निर्देशन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत हुई। राजस्थान की भजन गायिका प्रीति ने भजनों की प्रस्तुति से भक्ति रस बरसाया।</p>
<p>धर्म, संस्कृति, पर्यावरण शुद्धि, संयम तथा विश्व शांति एवं समाज की प्रगति की भावना से सिद्ध भगवंतों की आराधना की जाएगी। अष्टान्हिका पर्व आठ दिन का होता है। यह साल में तीन बार कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ मास में आता है। इसमें नंदीश्वर द्वीप के जिनालयों व सिद्ध भगवंतों की आराधना का विधान है। यह अष्टमी से शुरू होकर पूर्णिमा तक चलता है।</p>
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		<title>कर्म अच्छे हो या बुरे उसका फल भोगना जरूर होता है: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कर्म फल की व्याख्या की  </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 10:19:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। भोपाल अवधपुरी से पढ़िए, यह खबर&#8230; भोपाल अवधपुरी। बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल अवधपुरी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल अवधपुरी।</strong> बुरा कर्म हमेशा बुरा ही रहेगा, उसे वह कितना भी अच्छा कहे खूब दान करे लेकिन, उसे कोई अच्छा नहीं कह सकता है। यह उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले के डकैत डकैती डालने जाते थे और मन्नत मानते थे कि यदि अच्छी डकैती हाथ लगी तो मंदिर में घंटा चढ़ाएंगे। मुनि श्री ने कहा कि बताइए अपने बुरे काम में भगवान को भी शामिल कर लिया? ऐसे ही आजकल कोई व्यक्ति गलत कार्य करके धन को कमाता है और खूब दान देता है तो क्या आप लोग इसे अच्छा कर्म कहेंगे? मुनि श्री ने कहा कि भले ही आप लोग दान मत दो चलेगा लेकिन, किसी के घर डाका डालकर किसी का दिल मत दुखाओ। जैसी करनी बैसी भरनी यह कहावत तो आप लोगों ने सुनी होगी।</p>
<p><strong>जैसा तुम करोगे वैसा तुम भरोगे</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि एक आदमी मरा तो उसका लेखा जोखा देखा गया तो उसके सब काले कारनामे थे तो उससे पूछा गया कि तुमने अपनी जिंदगी में कोई अच्छा कार्य किया हो तो बताइये? उस आधार पर स्वर्ग भेजा जा सकता है। उसने बहूत याद किया लेकिन, उसने कोई अच्छा कार्य किया ही नहीं था तो बताए क्या? उसे याद आया बचपन में एक बार चवन्नी का दान किया था। वह भी एक की अठन्नी चुराकर तो चित्रगुप्त ने कहा कि चोरी का माल दान करके स्वर्ग में कोई जगह नहीं है। हर व्यक्ति चाहता है, उसके जीवन में कोई बुरा प्रसंग न घटे, सब कुछ अच्छा अच्छा हो लेकिन, कर्म सिद्धांत कहता है कि जैसा तुम करोगे वैसा तुम भरोगे। घर आंगन में यदि बबूल का पेड़ लगाया है तो उसमें बबूल की कांटेदार फलियां ही आएंगी। उसमें मीठे-मीठे फल नहीं लग सकते।</p>
<p><strong>सभी अनुकूलताएं मिली उसे आत्महित में लगाएं</strong></p>
<p>उसी प्रकार जीवन में कुछ अच्छा पाना चाहते हो तो अपने द्वारा किए जा रहे कार्यों की खुद समीक्षा करो। अपनी आत्मा का विश्लेषण करके देखो और निर्णय करो कि मैंने अभी तक जो भी कार्य किए हैं। उनमें से कितने कार्य अच्छे किए हैं? मुनि श्री ने कहा कि अनुकूलताएं पाने के बाद भी जो अपनी आत्मा का अहित कर रहा है। क्या आप उसे अच्छा कहोगे? लोग दूसरों के प्रति बुरा कम करते है। खुद के प्रति बुरा ज्यादा करते हैं और विडंबना यह है कि उसे बुरा मानते ही नहीं। ऐसे लोग कभी भी अपनी आत्मा का हित नहीं कर सकते, जो अपनी आत्मा का हित नहीं कर सकता। वह दूसरे की आत्मा का हित भी नहीं कर सकता। मुनि श्री ने कहा कि कर्म के संयोग से अच्छा शरीर पाया और सभी अनुकूलताएं मिली उसे आत्महित में लगाएं। आत्महित का ध्यान रखने वाला ही परहित का कार्य कर सकता है। अपने आपको त्याग संयम और भगवान की आराधना से जोड़ें। यह जानकारी प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने दी।</p>
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		<title>विषयाक्त मन बंधन का कारण है विषयारिक्त मन मुक्ति का आधार : मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने मन की दिशा और दशा को सारगर्भित व्याख्या से समझाया  </title>
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		<pubDate>Wed, 15 Oct 2025 13:32:57 +0000</pubDate>
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<p><strong>मनुष्य के पास न तो शेर जैसा पराक्रम है और न ही चीते जैसी फुर्ती न ही हिरन जैसी चपलता। फिर भी मनुष्य श्रेष्ठ क्यों? इसका उत्तर देते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कहा कि मन विचार और संकल्प शक्ति से मनुष्य महान बनता है। यह उदगार मुनिश्री ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल</strong>। मनुष्य के पास न तो शेर जैसा पराक्रम है और न ही चीते जैसी फुर्ती न ही हिरन जैसी चपलता। फिर भी मनुष्य श्रेष्ठ क्यों? इसका उत्तर देते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज ने कहा कि मन विचार और संकल्प शक्ति से मनुष्य महान बनता है। यह उदगार मुनिश्री ने विद्याप्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि भगवान महावीर ने कार्तिक बदी अमावस्या को मोक्षलक्ष्मी को प्राप्त किया था। अतः प्रातःकालीन बेला में निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। सांयकालीन गौतम गणधर स्वामी को कैवल्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अतः जैन समाज दीपावली पर्व 20 अक्टूबर सोमवार को मनाएंगे। इसी के साथ चातुर्मास निष्ठापन हो जाएगा। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य मनु की संतान है। मैं कहता हूं कि मनुष्य मन की संतान है। हम अपने मन को जिस दिशा में ले जाएं। हमारा मन वैसा बन जाता है। मुनि श्री ने कहा कि विषयासक्त मन बंधन का कारण है, विषयारिक्त मन मुक्ति का आधार है।</p>
<p>नर से ही नारायण और नर से ही नारकी बनते हैं। जिनका मन सही दिशा में चलता है। वह नर से नारायण और जिसका मन गलत दिशा में चला जाता है। वह नर से नारकीय हो जाता है। मुनि श्री ने कहा कि जो मनुष्य अपने मन की शक्ति को पहचान कर सही दिशा में नियोजित कर देते हैं वही व्यक्ति महान बनते हैं। मन की शक्ति का पता तो सभी को है लेकिन, उसका प्रयोग नहीं है क्योंकि, आपने अपने मन की दिशा को उल्टा बना रखा है। मात्र उस दिशा को बदलने की आवश्यकता है। मुनि श्री ने कहा कि मैं फिजिकली डायरेक्शन बदलने की बात नहीं कर रहा हूं। आपके मेंटली डाइरेक्शन को बदलने की बात कर रहा हूं।</p>
<p><strong>हमारा फोकस फोटो पर नहीं एक्सरे पर होना चाहिए</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति की बोली और व्यवहार में धोखा हो सकता है लेकिन, यदि सोच को समझ लोगे तो आप कभी धोखा नहीं खाओगे क्योंकि, सोच ही व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान है। जो हमारे आंतरिक पक्ष को उजागर करती है। मुनि श्री ने कहा कि बोली और व्यवहार फोटो है जबकि, सोच भीतर के एक्सरे के समान है। हमारा फोकस फोटो पर नहीं एक्सरे पर होना चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि धर्मक्षेत्र में जब भी हम आगे बढते हैं तो क्रियाओं पर ज्यादा ध्यान देते है लेकिन, यह जरूरी नहीं कि क्रियाएं आपके जीवन में प्रभाव छोडं़े। उन्होंने तीन शब्द वृत्ति, प्रवृत्ति और परिणाम पर चर्चा करते हुए कहा कि जो भी क्रिया झलक रही है वह प्रवत्ति का परिणाम है, लेकिन यदि मन की वृत्ति नहीं बदली तो प्रवृत्ति बदलने के बाद भी परिणाम में मजा नहीं आएगा।</p>
<p><strong>अपनी सोच को व्यापारिक नहीं, व्यवहारिक बनाइये</strong></p>
<p>यदि परिणाम को पाना चाहते हो तो मनोवृत्ति को बदलिए मन की धारा बदलने से जीवन बदल जाता है। मुनि श्री ने कहा कि लोक हो अथवा लोकोत्तर जिसके मन की दिशा सही होगी। उसका जीवन परिवर्तित हो जाता है। मुनि श्री ने कहा कि अपने जीवन व्यवहार के लिये अर्थ जुटाना बुरा नहीं है, लेकिन जिसकी सोच भौतिक हो जाती है वह अपनी जिंदगी को मजा मौज और मस्ती में खपा देता है। मुनि श्री ने कहा कि दुनिया में भौतिक सोच के लोगों की भरमार है, जिनके लिए पैसा ही सब कुछ है। भौतिक संसाधनों का उपयोग करना बुरा नहीं लेकिन, उसको अपने जीवन का लक्ष्य बनाना बुरा है। अपनी सोच को व्यापारिक नहीं, व्यवहारिक और आध्यात्मिक बनाइए। मुनि श्री ने कहा एक दूसरे का सम्मान करना हमें व्यवहार सिखाता है। जो हमारे आचरण भद्रता और सभ्यता को प्रकट करता है। वंही संसार चक्र से छुटकारा पाने का उपाय हमें आध्यात्मिक सोच के माध्यम से मिलता है।</p>
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		<title>शिक्षक संदर्भ समूह रत्न सम्मान से तीन शिक्षक भोपाल में सम्मानित: शिक्षकों ने परिचर्चा में उत्कृष्ट विचारों का किया समावेश  </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Oct 2025 14:20:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित दुष्यंत संग्रहालय में शिक्षक संदर्भ समूह नव सृजन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और शिक्षाः स्वचालन की दुनिया में मानव एजेंसी का संरक्षण’ विषय पर परिचर्चा रखी गई। समारोह के मुख्य अतिथि मप्र के पूर्व मुख्य सचिव एवं सदस्य मप्र मानव अधिकार आयोग डॉ.अवधेश प्रताप [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित दुष्यंत संग्रहालय में शिक्षक संदर्भ समूह नव सृजन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और शिक्षाः स्वचालन की दुनिया में मानव एजेंसी का संरक्षण’ विषय पर परिचर्चा रखी गई। समारोह के मुख्य अतिथि मप्र के पूर्व मुख्य सचिव एवं सदस्य मप्र मानव अधिकार आयोग डॉ.अवधेश प्रताप सिंह एवं डॉ. अश्विनी कुमार गर्ग क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल थे। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> विश्व शिक्षक दिवस के अवसर पर भोपाल स्थित दुष्यंत संग्रहालय में शिक्षक संदर्भ समूह नव सृजन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और शिक्षाः स्वचालन की दुनिया में मानव एजेंसी का संरक्षण’ विषय पर परिचर्चा रखी गई। समारोह के मुख्य अतिथि मप्र के पूर्व मुख्य सचिव एवं सदस्य मप्र मानव अधिकार आयोग डॉ.अवधेश प्रताप सिंह एवं डॉ. अश्विनी कुमार गर्ग क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल थे। इस अवसर पर शासकीय शिक्षक संगठन के अध्यक्ष राकेश दुबे विशेष रूप से उपस्थित थे। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि शिक्षक संदर्भ समूह की विगत 15 वर्षों की रचनात्मक यात्रा को साथ दो दस्तावेजों के रूप में प्रकाशित कर इसका विमोचन किया गया। परिचर्चा के विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर समूह के संस्थापक डॉ.दामोदर जैन, संतोष कुमार जैन गुरुजी आदि ने अपने विचार रखें।</p>
<p>इस अवसर पर इंदौर जिले के तीन शिक्षक जिनमें संतोष जैन ‘गुरुजी’ कमलेश यदुवंशी एवं उर्मिला सर कानूनगो का शॉल, श्रीफल और मोमेंटो प्रदान कर शिक्षक संदर्भ समूह रत्न सम्मान -2025 से अतिथियों ने सम्मानित किया। इसके साथ ही विभिन्न जिलों से आए 50 से अधिक शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। संतोष सर की इस उपलब्धि पर इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ.जैनेन्द्र जैन, राकेश जैन चेतक, राजेश लारेल, भुपेंद्र जैन, कमल जैन चेलेंजर आदि समाजजनों ने बधाई दी।</p>
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		<title>संयम हमारे जीवन के रूपांतरण का आधार है : मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने उत्तम संयम धर्म की परत-दर परत व्याख्या की  </title>
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		<pubDate>Wed, 03 Sep 2025 11:10:20 +0000</pubDate>
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<p><strong>दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों से कहा कि संयम का संबंध केवल प्रवृत्ति और शालीनता से नहीं, बल्कि मनोवृत्ति के परिष्कार से है। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल।</strong> दशलक्षण महापर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म का पर्व बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने शिविरार्थियों से कहा कि संयम का संबंध केवल प्रवृत्ति और शालीनता से नहीं, बल्कि मनोवृत्ति के परिष्कार से है। उन्होंने कहा कि यदि इन दस दिनों में प्रत्येक साधक अपने भीतर के संयम को जगा लें तो जीवन भर उसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा। संयम जीवन का रूपांतरण ही नहीं करता, बल्कि वह जीवन का सुरक्षा कवच और चेतना के निखार का मूल है। मुनि श्री ने भाव, विचार, वाणी और व्यवहार-इन चारों में संयम की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा-यदि भावों में शुद्धि, विचारों पर नियंत्रण, वाणी में लगाम और व्यवहार में संतुलन होगा तो हम संयम के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे।</p>
<p><strong>भावनायोग मन तथा विचारों की शुद्धि का प्रमुख साधन</strong></p>
<p>मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने बताया कि सामान्य व्यक्ति के मन में प्रतिदिन लगभग साठ हजार विचार आते हैं, जिनमें से उपयोगी विचार बहुत कम होते हैं। विचार मन से उत्पन्न होते हैं और भावनायोग मन तथा विचारों की शुद्धि का प्रमुख साधन है। मुनि श्री ने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वे अपने विचारों के प्रहरी बनें और उन पर नियंत्रण रखें, क्योंकि भावों का अनुशासन ही भावों का संयम है।</p>
<p><strong>संयमी व्यक्ति इच्छाओं का गुलाम नहीं होता</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि संयम से आत्मबल का निर्माण होता है। संयमी व्यक्ति इच्छाओं का गुलाम नहीं होता, बल्कि उनका स्वामी बन जाता है। आज जब पूरी दुनिया भोगवाद की अंधी दौड़ में लगी हुई है, तब जैन धर्म का ष्उत्तम संयमष् जीवन को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है। इच्छाओं पर नियंत्रण ही सच्चे आत्मबल, शांति और आनंद की प्राप्ति का मार्ग है।</p>
<p><strong>सभी संयमियों का सम्मान किया </strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि उत्तम संयम दिवस पर उन सभी संयमियों का सम्मान किया गया। जिन्होंने पांच उपवास पूर्ण किए हैं। वहीं, सात और दस उपवास का संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं ने गुरुचरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p><strong>दशलक्षण विधान भक्ति भाव से हुआ</strong></p>
<p>प्रातः 5.30 बजे भावनायोग के पश्चात श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके उपरांत नित्य नियम पूजन एवं पर्व पूजन के साथ दशलक्षण विधान भक्ति भाव से हुआ। इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मंचासीन रहे। संचालन बाल ब्र. अशोक भैया लिधौरा ने किया।</p>
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		<title>लोभ-लालच और लिप्सा से निवृत्ति ही शौच धर्म है : उत्तम शौच धर्म पर मुनिश्री प्रमाणसागर के विचारों से मिली श्रावकों को प्रेरणा  </title>
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		<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 07:55:11 +0000</pubDate>
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<p><strong>दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौचष्धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा- मन की तरंग मार ले, बस हो गया भजन; आदत बुरी सुधार ले, बस हो गया भजन। मुनिश्री ने कहा कि इंसान झोपड़ी में रहता है लेकिन, महलों की चाह उसे चैन से जीने नहीं देती। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>भोपाल।</strong> दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर उत्तम शौचष्धर्म की व्याख्या करते हुए मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा- मन की तरंग मार ले, बस हो गया भजन; आदत बुरी सुधार ले, बस हो गया भजन। मुनिश्री ने कहा कि इंसान झोपड़ी में रहता है लेकिन, महलों की चाह उसे चैन से जीने नहीं देती। यही चाह जीवन में काँटों का मार्ग बनाती है। धन की चाह कांटों का ताज है, जिसने गरीब से लेकर करोड़पति तक सभी को दौड़ाया है। धन की यह दौड़ इंसान को ठहरने नहीं देती और चित्त को मलिन करती है। उन्होंने कहा कि लोभ-लालच और लिप्सा से निवृत्ति ही शौच धर्म है। इच्छाओं की आग कभी खत्म नहीं होती, वह हवा और ऑक्सीजन की तरह भड़कती रहती है किंतु, संयम रूपी नाइट्रोजन ही इस आग को शांत कर सकती है।</p>
<p><strong>दूसरों की ओर निगाह रखने से केवल ‘दाह’ बढ़ती है</strong></p>
<p>मुनिश्री ने प्रसिद्ध लेखक टॉलस्टॉय का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन की दो बड़ी घटनाएँ हैं- जिसे वह चाहता है, वह मिलता नहीं और जो मिलता है, उसे चाहता नहीं। यदि जीवन को संभालना है तो जो मिला है उसमें संतोष करना सीखना होगा। दूसरों की ओर निगाह रखने से केवल ‘दाह’ बढ़ती है। उन्होंने स्पष्ट कहा- चाह होगी तो दाह होगी। इसे कोई रोक नहीं सकता। बड़े-बड़े धनपति और उद्योगपति भी इस संसार से आह भरते ही विदा हो गए। यदि चाह और दाह को शांत करना है तो संयम की राह पकड़ो, जहाँ संतोष ही आदर्श है।</p>
<p><strong>दशलक्षण धर्म की पूजा भक्ति भाव से की </strong></p>
<p>जैन धर्म निष्कर्म बनने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि निष्काम बनने की राह दिखाता है। जीवन में पुरुषार्थ करना चाहिए, किंतु यह भाव रखना आवश्यक है कि ष्मेरे हाथ में प्रयत्न है, परिणाम नहीं। प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि प्रातःकाल भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के साथ दशलक्षण धर्म की पूजा भक्ति भाव से की गई। भगवान पुष्पदंत स्वामी के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर मुनिश्री ने भावनायोग के माध्यम से श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज का ध्यान कराया और निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया। इसका सौभाग्य मधु जैन व पारस जैन (आगरा) को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर भोपाल सहित इंदौर, विदिशा, सागर, ललितपुर, मुंबई, आगरा, दिल्ली, कोलकाता और बोस्टन (अमेरिका) से श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। मुनिश्री संधानसागर महाराज सहित सभी क्षुल्लक विराजमान रहे। संचालन अशोक भैया लिधोरा ने किया।</p>
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		<title>इच्छाओं के गुलाम बन चुके हैं लोग, मन की स्वतंत्रता ही असली स्वराज : देश आज़ाद, पर मन की बेड़ियों में बंधे – मुनि प्रमाण सागर </title>
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		<pubDate>Sat, 16 Aug 2025 03:05:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल के विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस पर मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि असली आज़ादी सत्ता नहीं, बल्कि मन और इच्छाओं पर नियंत्रण है। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और बुरी आदतों से मुक्त होकर आत्म संयम अपनाने का संदेश दिया। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट… भोपाल (अवधपुरी) स्थित विद्या प्रमाण गुरुकुलम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल के विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस पर मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि असली आज़ादी सत्ता नहीं, बल्कि मन और इच्छाओं पर नियंत्रण है। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और बुरी आदतों से मुक्त होकर आत्म संयम अपनाने का संदेश दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी</strong>) स्थित विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय संत मुनि प्रमाण सागर, मुनि संधान सागर और संघ के सानिध्य में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान का आयोजन हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर अनेक पदाधिकारी और समाजबंधु उपस्थित रहे। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की दासता से मुक्त हुआ, लेकिन आज भी हम अपनी इच्छाओं और बुरी आदतों के गुलाम हैं। उन्होंने कहा कि मन की बेड़ियां तोड़ना सबसे कठिन है, और असली स्वराज वही है जब व्यक्ति अपनी आत्मा और चेतना पर शासन करे।</p>
<p>मुनि श्री ने विशेष रूप से डिजिटल नशे पर चिंता जताई, जिसमें युवा और बुजुर्ग दोनों सोशल मीडिया में डूबे रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय, ऊर्जा और मानसिक शुद्धता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए एक हाथी की कहानी सुनाई, जो बचपन की रस्सी की आदत के कारण ताकतवर होते हुए भी बंधा रहता है—जैसे लोग अपनी बुरी आदतों के कारण बंधे रहते हैं।</p>
<p><strong>आत्म अनुशासन अपनाने का आग्रह </strong></p>
<p>उन्होंने युवाओं से भावनात्मक प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण, अपनी गति से लक्ष्य प्राप्ति और आत्म अनुशासन अपनाने का आग्रह किया। मुनि श्री के अनुसार, आध्यात्मिकता से जुड़ने पर व्यक्ति अपने विचारों, इच्छाओं और समय पर नियंत्रण पा सकता है। कार्यक्रम में घोषणा की गई कि 24 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक “विचारों पर नियंत्रण” प्रवचन माला और भावनायोग अभ्यास चलेगा। रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 5000 स्वयंसेवकों को विशेष संबोधन और सोमवार को मुनि श्री का मौन उपवास रहेगा।</p>
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		<title>सुख-दुख जीवन का हिस्सा, प्रतिकार से बचें – प्रवचन में मुनि श्री का संदेश : जीवन में घट रही हर घटना को स्वीकारें – मुनि प्रमाण सागर </title>
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		<pubDate>Fri, 15 Aug 2025 06:08:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भोपाल के अवधपुरी स्थित प्रवचन मंच से मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी घट रहा है उसे सहजता से स्वीकार करें। प्रतिकार, वहिष्कार या सत्कार – तीनों में न उलझें। सुख-दुख दोनों को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानकर संतुलन बनाना ही सच्ची साधना है। पढ़िए अविनाश जैन विद्यावाणी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भोपाल के अवधपुरी स्थित प्रवचन मंच से मुनि श्री प्रमाण सागर जी ने कहा कि जीवन में जो कुछ भी घट रहा है उसे सहजता से स्वीकार करें। प्रतिकार, वहिष्कार या सत्कार – तीनों में न उलझें। सुख-दुख दोनों को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा मानकर संतुलन बनाना ही सच्ची साधना है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए अविनाश जैन विद्यावाणी की रिपोर्ट…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल (अवधपुरी)।</strong> जीवन में अच्छा-बुरा, प्रतिकूल-अनुकूल, संयोग-वियोग, हानि-लाभ — जो भी घट रहा है, उसे दिल से स्वीकार करो।” यह प्रेरणादायी संदेश मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने अवधपुरी में आयोजित प्रातः प्रवचन सभा में दिया।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि किसी भी घटना के बाद स्वीकृति या अस्वीकृति का भाव ही हमें दुखी करता है। आजकल लोग सोशल मीडिया की पोस्ट और टिप्पणियों पर अपनी खुशी या दुःख निर्भर कर लेते हैं। उन्होंने स्वीकार, सत्कार, प्रतिकार और वहिष्कार शब्दों की व्याख्या करते हुए कहा — जिनसे मेरे कर्म कटे, वे मेरे शत्रु कैसे?” जो हमें अपशब्द कह रहा है, वह अपने अंदर का गुबार निकाल रहा है और इससे हमारे भीतर का तनाव भी समाप्त होता है।</p>
<p><strong>असली छवि अनाम, अरूप, अजर, अमर और अविनाशी है</strong></p>
<p>मुनि श्री के अनुसार, यदि कोई हमारे विरोध में बोले तो उसका भी सत्कार करना चाहिए। उन्होंने कहा — “जिस छवि को लोग सोशल मीडिया पर बिगाड़ने की कोशिश करते हैं, वह असली नहीं, वह तो एक काल्पनिक छवि है। मेरी असली छवि अनाम, अरूप, अजर, अमर और अविनाशी है, जिसे कोई बना या बिगाड़ नहीं सकता।” उन्होंने कहा कि धर्मी लोगों को आज आत्मज्ञान की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। मात्र किताबों का ज्ञान आत्मज्ञान नहीं है, बल्कि अपने दोषों को स्वीकार करना ही असली आत्मज्ञान है। जिस दिन हम अपनी अंतरात्मा को पहचान लेते हैं, जीवन में अद्भुत मस्ती आ जाती है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि 15 अगस्त से 24 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक विशेष प्रवचन माला आयोजित होगी, जिसका सभी महानुभाव लाभ लें।</p>
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