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	<title>भाषा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>भाषा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>गहन शोध के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी पांडुलिपियां: तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद को सैकड़ों वर्ष प्राचीन दुर्लभ जैन ग्रंथों की मिली अनमोल सौगात  </title>
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		<pubDate>Sat, 22 Nov 2025 12:24:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुलाधिपति सुरेश जैन बोले, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के संग्रह में अब तक हस्तलिखित ग्रंथ नहीं थे, लेकिन कुंदरकी जैन चैत्यालय की ओर से दिए गए इस दान के जरिए पहली बार यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हुई। उम्मीद जताई कि ये पांडुलिपियां जैन दर्शन, इतिहास, भाषा और संस्कृति से जुड़े गहन शोध एवं अध्ययन के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कुलाधिपति सुरेश जैन बोले, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के संग्रह में अब तक हस्तलिखित ग्रंथ नहीं थे, लेकिन कुंदरकी जैन चैत्यालय की ओर से दिए गए इस दान के जरिए पहली बार यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हुई। उम्मीद जताई कि ये पांडुलिपियां जैन दर्शन, इतिहास, भाषा और संस्कृति से जुड़े गहन शोध एवं अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। <span style="color: #ff0000">मुरादाबाद से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरादाबाद।</strong> तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद को सैकड़ों वर्ष प्राचीन दुर्लभ जैन ग्रंथों की अनमोल सौगात मिली है। जैन साहित्य के इस दुर्लभ संग्रह में डुंडारी भाषा की हस्तलिखित पांडुलिपियां भी शामिल हैं। ये पांडुलिपियां सैकड़ों वर्ष पुरानी होने के कारण ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन कहते हैं कि यूनिवर्सिटी के संग्रह में अब तक हस्तलिखित ग्रंथ नहीं थे, लेकिन इस दान के जरिए पहली बार यह ऐतिहासिक उपलब्धि संभव हुई है। ये पांडुलिपियां जैन दर्शन, इतिहास, भाषा और संस्कृति से जुड़े गहन शोध एवं् अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगी। इस अवसर पर फर्स्ट लेडी वीना जैन, ग्रुप वाइस चेयरमैन मनीष जैन, ऋचा जैन, जाह्न्वी जैन ने कहा कि यह जैन साहित्य टीएमयू की संस्कार आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन कहते हैं कि लाइब्रेरी को भेंट में मिले इन दुर्लभ जैन ग्रंथों के अध्ययन से स्टुडेंट्स को जैन धर्म के वास्तविक मूल एवं् जीवन दर्शन सीखने का सौभाग्य मिलेगा।</p>
<p><strong>ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक </strong></p>
<p>उल्लेखनीय है कि तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के नॉलेज रिसोर्स सेंटर में वर्तमान में 3 लाख 14 हजार से अधिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। कुलपति प्रो. वीके जैन ने कहा कि आज के नवाचार, विज्ञान और तकनीकी युग में भी पारंपरिक ज्ञान की महत्ता कभी कम नहीं होती है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से ही संतुलित, संवेदनशील और पूर्ण विकास संभव है। टीएमयू इसी सोच के साथ सतत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। प्रो. जैन ने कहा कि यह दान जैन अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं् संवर्द्धन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। प्रो. जैन ने घोषणा की, शीघ्र ही इन दुर्लभ ग्रंथों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया आरंभ होगी, जिससे इन ऐतिहासिक धरोहरों का सुरक्षित संरक्षण और वैश्विक स्तर पर शोधार्थियों तक उनकी सहज पहुंच सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p><strong>इन लोगों ने लाइब्रेरी को ग्रंथों का दिया दान </strong></p>
<p>मंगलाचरण डॉ. करुणा जैन और डॉ. अर्चना जैन ने प्रस्तुत किया। संचालन डॉ. कल्पना जैन ने किया। यूनिवर्सिटी की चीफ लाइब्रेरियन डॉ. विनीता जैन ने बताया कि यूनिवर्सिटी को जैन साहित्य की ये अनमोल देन कुंदरकी के जैन चैत्यालय की ओर से समीर जैन, चतुर बिहारीलाल जैन, प्रमोद बिहारीलाल जैन, कुलवंत राय जैन और संपूर्ण सोनी परिवार से प्राप्त हुई है।</p>
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		<title>कुंदकुंद ज्ञानपीठ इंदौर: निःशुल्क प्राकृत भाषा पाठ्यक्रम अध्ययन कार्यशाला </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Jul 2023 17:14:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ&#8230; इंदौर:- जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर:-</strong> जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा प्राकृत भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क कार्यशाला उपलब्ध कराई जा रही है। प्राचीन भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करने की दृस्टि से प्राकृत भाषा का साहित्य अतयंत उपयोगी रहा है ,भगवान् महावीर स्वामी द्वारा उपदिष्ट जैन आगम साहित्य प्राकृत भाषा की अमूल्य धरोहर है | वैराग्य ,तप, सयम एवं त्याग से ओत प्रोत यह साहित्य आध्यात्मिक सहृदयों को स्वतः ही अपनी और आकृष्ट कर लेता है |अधिकांश जैन ग्रंथो की रचना प्राकृत भाषा में ही हुई है | हमारा मूल महामंत्र णमोकार मंत्र इसी प्राकृत भाषा में है | यह शिलालेखों की भी भाषा रही है | हाथीगुफा शिलालेख, नासिक शिलालेख, अशोक के शिलालेख प्राकृत भाषा में ही हैं |</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा जैनो की पहचान है</strong></p>
<p>हमें प्राकृत भाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए ,प्राकृत भाषा जैनो की पहचान है | वर्तमान समय में आवश्यकता है की हमअन्य भाषाओ के साथ साथ प्राकृत भाषा को भी सीखे | एक युग में प्राकृत जन भाषा थी और हमारे आचार्यों ने इसी को आधार बना कर ग्रंथो की रचना की है | इस लोक भाषा ‘प्राकृत’ का समृद्ध साहित्य रहा है, जिसके अध्ययन के बिना भारतीय समाज एवं संस्कृति का अध्ययन अपूर्ण रहता है। सभी इच्छुक विद्यार्थी संस्था के उदासीन आश्रम स्थित कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।</p>
<p><strong>कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क उपलब्ध </strong></p>
<p>जैन धर्म के शास्त्रों को सरलता से समझने के लिए जैन आगमों की मूल भाषा के अध्ययन व अध्यापन हेतु कुंदकुंद ज्ञानपीठ द्वारा विद्यार्थियों को निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। प्राकृत भाषा का यह पाठ्यक्रम श्रवणबेलगोला विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगा। जिसमे नियमित उपस्थिति एवं विशेष अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय डॉ अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी सम्मान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p>कुंदकुंद ज्ञानपीठ के अध्यक्ष अमित कासलीवाल एवं समाज के संजीव जैन संजीवनी ने बताया कि प्राकृत भाषा के अध्यापन करवाने हेतु संस्कृत विदुषी प्रोफेसर श्रीमती डॉक्टर संगीता मेहता ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है एवं नियमित उपस्थिति एवं विशेष अंक प्राप्त करने वाले प्रशिक्षणार्थियों को स्वर्गीय डॉ अजीत कुमार सिंह कासलीवाल स्मृति प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत प्रमाण पत्र एवं प्रोत्साहन राशि भी सम्मान स्वरूप दी जाएगी।</p>
<p><strong>कुंदकुंद ज्ञानपीठ </strong></p>
<p>जैन साहित्य अत्यंत समृद्ध है, किन्तु वैज्ञानिक अभिरुचि सम्पन्न व्यक्तियों द्वारा अब तक उसका सम्यक अनुशीलन नहीं हुआ है । साथ ही देश के कोने &#8211; कोने में विकीर्ण पुरासम्पदा का संरक्षण, अभिलेखीकरण एवं मूल्यांकन किये जाने की तत्काल आवश्यकता है । इन दूरगामी लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ की स्थापना दिगम्बर जैन उदासीन आश्रम ट्रस्ट के अन्तर्गत 19.10.87 को की गयी एवं इसकी सभी प्रवृत्तियाँ एतदर्थ समर्पित हैं ।</p>
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