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	<title>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>जीवन को सफल और सुरक्षित बनाने में सहायक हैं संस्कार : खूंटी जिले में शिक्षण शिविरों का समापन </title>
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		<pubDate>Sat, 24 May 2025 09:50:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा में आयोजित शिक्षण शिविरों में 1000 [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा में आयोजित शिक्षण शिविरों में 1000 से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया। <span style="color: #ff0000">खुटी से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खुटी।</strong> आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के पावन अवसर पर पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के सराक क्षेत्र में आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में झारखंड प्रांत के खुटी जिले में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 24 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का मंगलाचरण अनुज जैन सराक ने किया चित्रावरण, दीप प्रज्वलन उपस्थित विद्वत श्रीपं. राजकुमार शास्त्री कर्द ने किया। सामूहिक मंगरचारण विदुषी सपना जैन, साधिका जैन ने किया।</p>
<p>सभी उपस्थित विद्वानों का सम्मान स्थानीय समाज के वरिष्ठजन द्वारा किया गया। शिविर स्थानों में कसमार, कोरला, डोडमा, खूटी स्थानों पर शिक्षण शिविरों द्वारा धर्म प्रभावना हुई। जिसके सामूहिक समापन समारोह में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त शिविराथियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। जिन्होंने मेहंदी, सिलाई, पेंटिंग में अपना स्थान प्राप्त किया है। उनका भी सम्मान किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।</p>
<p><strong>ज्ञान प्राप्त करने के अवसर का हमें लाभ लेना चाहिए</strong></p>
<p>अंत में आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी ने आशीष वचन में कहा कि आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की प्रेरणा से आयोजित शिक्षण शिविरों द्वारा संस्कारों का बीजारोपण का कार्य हो रहा है। जो भविष्य में जाकर जैन संस्कृति की प्रभावना करेगा। शिक्षण शिविरों द्वारा कम समय में ज्ञान प्राप्त करने के अवसर का हमें लाभ लेना चाहिए। संस्कार जीवन को सफल एवं सुरक्षित बनाते हैं। मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज ने कहा कि अगर हमें ज्ञान प्राप्त करना है तो हमें कुछ सीखना और जानना होगा। इसके लिए कम समय में होने वाले शिक्षण शिविरों में भाग लेकर समय का सदुपयोग कर जीवन में ज्ञानार्जन करें। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में विद्वानों द्वारा समय निकालकर सराक क्षेत्र आना, वहां शिविर लगाना और अपने अनुकूल परिस्थितियों के न होने पर भी शिविरों का संचालन करना बड़ा कठिन कार्य है। फिर भी यहां आकर बच्चों को धार्मिक शिक्षा देकर जैन धर्म की प्रभावना करना बड़ा ही सराहनीय कार्य है।</p>
<p><strong>मद्य और मांस त्याग का संकल्प लिया </strong></p>
<p>पश्चिम बंगाल, झारखंड,उड़ीसा प्रांत के बच्चों ने आयोजित शिक्षण शिविरों में शामिल होकर एक हजार से ज्यादा बच्चों नाम मद्य त्याग, मांस त्याग का संकल्प लिया। जिसमें खूटी दिगंबर जैन समाज द्वारा विद्वानों की आवास एवं भोजन व्यवस्था की गई। समाज के अध्यक्ष शिखरचंद जैन ने कहा कि मेरा सौभाग्य है की आचार्यश्री ज्ञान सागर जी द्वारा आयोजित शिक्षण शिविरों में विद्वान हमारे क्षेत्र में पधारकर जैन धर्म की प्रभावना कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। शिविर व्यवस्थाओं के लिए अनुज जैन सराक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक शिक्षण शिविर एवं शाकाहार के लिए किया जा रहा कार्य से भारतीय संस्कृति को पुनः जीवंत करने में सफलता मिलेगी।</p>
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		<title>पश्चिम बंगाल के शिक्षण शिविरों का समापन :  झारखंड में किए 19 मई से शिविर आरंभ </title>
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		<pubDate>Wed, 21 May 2025 11:43:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में पुरुलिया जिला में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 18 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। 19 मई से खूटी जिले झारखंड के विभिन्न स्थानों पर ज्ञान संस्कार शिक्षण [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में पुरुलिया जिला में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 18 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। 19 मई से खूटी जिले झारखंड के विभिन्न स्थानों पर ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ हुआ। <span style="color: #ff0000">खूटी से पढ़िए, मनीष जैन विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>खुटी।</strong> आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल, झारखंड, उड़ीसा के सराक क्षेत्र में आचार्य श्री ज्ञेय सागर जी, आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में पुरुलिया जिला में चल रहे शिक्षण शिविरों का समापन 18 मई को हुआ। शिविर समापन में जूम चैनल के माध्यम से मुनि श्री नियोग सागर जी महाराज, आर्यिका श्री सुज्ञान मति का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ।</p>
<p>कार्यक्रम का मंगलाचरण रामदुलार जैन सराक ने किया। चित्रावरण, दीप प्रज्वलन उपस्थित पंडित जयकुमार दुर्ग, राजकुमार शास्त्री कर्द, पं. रीतेंद्र जैन ने किया। सामूहिक मंगलाचरण स्नेहा जैन, सपना जैन और साधिका जैन ने किया। उपस्थित विद्वानों का सम्मान गौरांग जैन, रामदुलार जैन ने किया। शिविर स्थलों में धनियाडांगा, बेड़ों, सुंदराबान, भागांवान, लायकड़ागा, पांच पहाड़ी, लाली, कोतूमा में शिक्षण शिविरों द्वारा धर्म प्रभावना हुई। जिसका सामूहिक समापन समारोह हुआ। इसमें प्रथम, द्वितीय द्वितीय स्थान प्राप्त शिविराथियों के लिए पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। जिन्होंने मेहंदी, सिलाई, पेंटिंग में अपना स्थान प्राप्त किया है। उनका भी सम्मान किया गया। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। शिविराथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।</p>
<p><strong>हमें ज्ञान प्राप्त करना है तो हमें कुछ सीखना होगा</strong><br />
आर्यिका श्री सुज्ञानमती माताजी ने आशीष वचन में कहा कि आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज की प्रेरणा से विगत वर्षों से चल रहे शिक्षण शिविरों से बच्चों में संस्कार आते हैं। इन शिविरों का आयोजन हमेशा होना चाहिए। मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने आशीष वचन में कहा कि अगर हमें ज्ञान प्राप्त करना है तो हमें कुछ सीखना और जानना होगा। इसके लिए कम समय में होने वाले शिक्षण शिविरों में भाग लेकर समय का सदुपयोग कर जीवन में ज्ञानार्जन करें। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में विद्वानों द्वारा समय निकालकर सराक क्षेत्र आना, वहां शिविर लगाना और अपने अनुकूल परिस्थितियों का ना होकर शिविरों का संचालन करना बड़ा कठिन कार्य है, फिर भी यहां आकर बच्चों को धार्मिक शिक्षा देकर जैन धर्म की प्रभावना करना बड़ा ही सराहनीय कार्य है।</p>
<p>इसके बाद 19 मई से खूटी जिले झारखंड के विभिन्न स्थानों पर ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ हुआ। जिसमें खूटी दिगंबर जैन समाज द्वारा विद्वानों की अवास व्यवस्था की गई। समाज के अध्यक्ष शिखरचंद जैन शिविर किट का विमोचन कर शुभारंभ किया। शिविर व्यवस्थाओं के लिए अनुज जैन सराक भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल झारखंड उड़ीसा के विभिन्न स्थानों पर धार्मिक शिक्षण शिविर एवं शाकाहार के लिए किया जा रहा कार्य से भारतीय संस्कृति को पुनः जीवंत करने में सहभागिता रहेगी।</p>
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		<title>पश्चिम बंगाल के सराक क्षेत्र में शिक्षण शिविर आरंभ: आचार्यश्री ज्ञान सागर जी महाराज का पूजन, दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना से हुआ शुभारंभ  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 10 May 2025 12:56:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ लखनपुर, बारकोना, राजामेला, भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में हुआ। शिविरार्थियों के लिए किट वितरित की गई। वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। लखनपुर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ लखनपुर, बारकोना, राजामेला, भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में हुआ। शिविरार्थियों के लिए किट वितरित की गई। वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। <span style="color: #ff0000">लखनपुर से पढ़िए, मनीष विद्यार्थी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>लखनपुर।</strong> आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के जन्म दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल के सराक में आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी आर्यिका श्री स्वस्ति भूषण माताजी, आर्यिका श्री आर्ष मति माताजी, आर्यिका श्री सुज्ञान मति माताजी के आशीर्वाद से ब्र. मंजुला दीदी, ब्र. मनीष भैया के निर्देशन में भारतवर्षीय सराक ट्रस्ट के तत्वावधान में ज्ञान संस्कार शिक्षण शिविरों का शुभारंभ लखनपुर, बारकोना, राजामेला, भोक्ताबांध, हारीबांगा, लक्ष्मणपुर, साहिबखेड़ा, खगड़ा, चुडरी में हुआ। पंडित जयकुमार दुर्ग, पंडित रीतेंद्र जैन, पंडित राजकुमार शास्त्री, पंडित नितिन शास्त्री, विदुषी स्नेहा जैन, सपना जैन, साधिका जैन ने प्रथम दिन आचार्यश्री ज्ञान सागर जी महाराज का पूजन, दीप प्रज्वलन, कलश स्थापना के साथ शिक्षण शिविर का शुभारंभ किया। शिविरार्थियों के लिए किट वितरित की गई। वरिष्ठ जन को अंग वस्त्र एवं सफेद टोपी से सम्मानित किया गया। मंदिर पदाधिकारी ने विद्वानों का सम्मान किया। शिविर मुख्य संयोजक मनीष विद्यार्थी सागर ने बताया कि पश्चिम बंगाल में सफेद टोपी लगाने की प्रथा नहीं है लेकिन, जिन मंदिर में सिर ढकने के लिए महिलाएं अपने पल्लू का और पुरुष सफेद टोपी का उपयोग करते हैं। इस कारण जब भी आप मंदिर की आते हैं तो टोपी लगाकर जिन दर्शन करने चाहिए। सभी धर्म में सिर ढकने की प्रथा है।</p>
<p>पंडित जयकुमार दुर्ग ने लक्ष्मणपुर में बच्चों को णमोकार मंत्र के महत्व को बताया। णमोकार मंत्र को हम महामंत्र क्यों कहते हैं। हमारे जीवन को किस प्रकार से विशुद्ध कर सकता है। इसके विषय में अपने वक्तव्य दिए। स्थानीय स्तर पर डॉ. प्रदीप जैन, रामदुलार जैन शक्तिपथ जैन शिक्षण शिविरों को सफल बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं।</p>
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