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	<title>भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भगवान &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>मेरी जिंदगी में जो आ रहा है, सब अच्छे के लिए आ रहा है-निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजीः ज्ञानी व्यक्ति दुर्घटना के मार्ग को पहले से ही छोड़ देता है  </title>
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		<pubDate>Wed, 26 Feb 2025 09:12:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[व्यक्ति एक होता है लेकिन 24 घंटे में उसे नाना रूप धारण करने पड़ते हैं, एक वस्तु नाना रूप धारण कर सकती है उसमें अनन्त शक्ति विद्यमान रहती है, एक आँख कितना देख सकती है इसका आज तक कोई निर्णय नहीं कर पाया। इन कानों ने कितने शब्द सुने इन हाथों से व्यक्ति कितना खा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>व्यक्ति एक होता है लेकिन 24 घंटे में उसे नाना रूप धारण करने पड़ते हैं, एक वस्तु नाना रूप धारण कर सकती है उसमें अनन्त शक्ति विद्यमान रहती है, एक आँख कितना देख सकती है इसका आज तक कोई निर्णय नहीं कर पाया। इन कानों ने कितने शब्द सुने इन हाथों से व्यक्ति कितना खा पी चुका है, उसकी कोई गिनती नहीं है। ये बातें अपने प्रवचन में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने कहीं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए स्लीमनाबाद, कटनी म.प्र. से राजीव सिंघई की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>स्लीमनाबाद (कटनी)।</strong> एक व्यक्ति को 24 घंटे में नाना रूप धारण करने पड़ते हैं, जिंदगी कितने तरीकों से तबाह हो सकती है, आँखों में आंसू कितने तरीकों से आ सकते हैं, कोई गिनती नहीं। कौन कब अपना दुश्मन बन जाए, किसी पर भी विश्वास मत करना। कर्म सिद्धान्त में कहा कि यहाँ तक स्वयं पर भी विश्वास मत करना। जीवन में कभी यह मत सोचना कि हमारे बुरे दिन आए हैं, बुराई में भी अच्छाई देखो। ये क्यों सोचते हो कि रात हो गई है, ये सोचो न प्रातःकाल होने की तैयारी हो रही है।</p>
<p><strong>अच्छे दिन किसी अशुभ दिन की डायरी की पीठ पर लिखा है </strong></p>
<p>स्वर्गों में शुभ घड़ी नहीं होती क्योंकि वहां दिन तो होता है लेकिन सुबह नहीं होती और सुबह नहीं होती तो मंगल नहीं होता। रात के बाद जो सूर्य का उदय होता है वो मांगलिक है, वहाँ तो सदा दिन रहता है। प्रातःकाल की शुभ बेला किसी रात पर लिखी है। अच्छे दिन किसी अशुभ दिन की डायरी की पीठ पर लिखा है। जब भी कोई अशुभ दिन आए तो बस एक बात सोच लेना-‘मेरी जिंदगी में जो आ रहा है, सब अच्छे के लिए आ रहा है।‘ अस्पताल में भर्ती हो तो अच्छे के लिए, स्टेशन पर जा रहे थे और गाड़ी चूक गई तो बुरा मत मानो, अच्छे के लिए, शायद कोई दुर्घटना होनी होगी तो करने कहा-इसकी गाड़ी चूका दो।</p>
<p><strong>गरीबी तुम्हारे लिए वरदान है </strong></p>
<p>गरीबों के लिए अपन अभिशाप देते हैं और एक अमीर आदमी कह रहा है कि भगवन! मैं गरीब होता तो आज मेरा परिवार बच जाता। गरीबी तुम्हारे लिए वरदान है क्योंकि तुम्हारे पास इतना ही है जिससे चोर को चोरी करने का भाव न आये, जिससे तुम जिंदगी अच्छी तरह से जी सको।</p>
<p><strong>कोई दुर्घटना घटे तो अपने लिए एक मौका दो</strong></p>
<p>जिन्दगी में ऐसे मौके भी आये जब 8 मंजिल वाले धराशायी हो गए और झोपड़ी वाले बच गए, गिरे तो थोड़ा बहुत सिर फूट गया, इसलिए जब भी कोई दुर्घटना घटे तो अपने लिए एक मौका दो, शायद ये दुर्घटना अच्छे के लिए आई है तो अच्छे दिन ज्यादा दूर नहीं। किस्मत भी कहेगी कि ये बुरे दिनों को अच्छे दिन कह रहा है, इसका अर्थ इसको ज्यादा दिन बुरे दिनों में नही रखना, एक वर्ष समय 6 महीने में निकल जाएगा। उसके बुरे दिन लंबे समय तक चलते हैं, जो अपनी किस्मत को कोसते हैं, जो अपने दिन को बुरा दिन मानते हैं, उनके बुरे दिन लंबे दिन तक जाते हैं।</p>
<p><strong>ज्ञानी व्यक्ति दुर्घटना के मार्ग को पहले से ही छोड़ देता है </strong></p>
<p>जिन जिन से हमारी मौत हो सकती है, जिन जिन से हमारा विनाश हो सकता है, जिन-जिन के कारण से हमें दुख हो सकता है उनको मैं पहले ही छोड़ता हूँ, ज्ञानी व्यक्ति दुर्घटना के मार्ग को पहले से ही छोड़ देता है, मैं त्यागी बनाकर मरूंगा, अनाथ बनकर नहीं मरूँगा। छुड़ा लेना भिखारी का काम है और छोड़ देना भिक्षुक का काम है।</p>
<p><strong>अपने धन का सदुपयोग करना है </strong></p>
<p>चोर न ले जा पाए, छापा न पड़ पाये, उसके पहले ही हमें अपने धन का सदुपयोग करना है, त्याग तो नही सकता मैं, क्योंकि त्यागने की हिम्मत मुझ में नहीं है, उसके लिए तो बहुत हिम्मत चाहिए। पुण्य के फल का दुरुपयोग न हो पाए उसके पहले सदुपयोग कर लेना। होश में धन कमाया है तो होश में ही गंवा कर जाना। ये सब इतनी गहराई वाली बातें अपने प्रवचन में निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधा सागरजी महाराज ने कहीं।</p>
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		<title>आचार्यश्री के प्रथम समाधि दिवस पर याद कियाः 31 फूट ऊँचा कीर्ति स्तंभ जिले की ऐतिहासिक कृति है </title>
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		<pubDate>Tue, 18 Feb 2025 12:16:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते हुए भारतवासियों को भारत की मूल संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘इंडिया नहीं भारत बोलो‘ एवं ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ एक अभियान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते हुए भारतवासियों को भारत की मूल संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘इंडिया नहीं भारत बोलो‘ एवं ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ एक अभियान का उद्घोष किया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए कुचामन सिटी से सुभाष पहाडिया की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुचामन सिटी।</strong> इंडिया नही भारत बोलो के भारत में 140, गौशालाओ व हथकरघा खादी के प्रेरक अनासक्त महायोगी महाप्रयाण परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य 108 श्री विद्या सागरजी महाराज का आज से एक वर्ष पूर्व डुंगरगढ छत्तीसगढ़ मे आज संलेखनापूर्वक समाधिस्त होने पर प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर महावीर मन्दिर, डीडवाना रोड पर सुबह सात बजे कलशाभिषेक किया गया। नवीकुमार काला प्रेमपुरा विकास काला, जिलीया द्वारा शान्ति धारा की गई। देव शस्त्र पूजन के पश्चात आचार्य की संगीतमय पूजन विधानकर जल, चन्दन, अक्षत, पुष्प नैवद्य, दीप, धूप महाअर्घ्य लालचन्द, विमलचन्द, रमेशचन्द, महेन्द्र, ललित कुमार, नीरज, पवन, विनय, विकास, आकास, पारश पहाडिया सुरेश, राजेश, राजकुमार, संदीप पांडया, तेजकुमार बडजात्या, माणक काला, राजेश गगवाल, अमित पाटोदी सभी श्रावक-श्राविकाओ द्वारा सपरिवार समर्पित किए गए।</p>
<p>अध्यक्ष लालचंद पहाडिया ने बताया कि पूर्व में आचार्यश्री के पचासवें दीक्षा दिवस पर मन्दिर परिसर में जिले मे प्रथम पहाडिया परिवार द्वारा भव्य मारबल का 31 फूट ऊँचा कीर्ति स्तंभ निर्मित किया गया है। जो जिले मे ऐतिहासिक कृति है। सायंकाल 7/30 बजे सगीतमय भक्ति के साथ देव शास्त्र व आचार्यश्री विद्या सागरजी महाराज की महाआरती कर व गुणानुवाद कर भक्ति के साथ याद किया गया।</p>
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		<title>आचार्यश्री विद्यासागरजी का समाधि दिवस मनाया गयाः पूजा अर्चनाकर शोभायात्रा निकाली गई </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Feb 2025 10:23:28 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[108 आचार्यश्री विद्यासागरजी के समाधि दिवस के अवसर पर आचार्यश्री की पूजा अर्चना कर शोभायात्रा निकाली गई। समाजजनों ने घर-घर आरती उतारी। पढ़िए इंदौर की यह पूरी खबर&#8230; इंदौर। 108 आचार्यश्री विद्यासागरजी महामुनि राज के समाधि दिवस के अवसर पर परिवहन नगर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री की पूजा अर्चना कर शोभायात्रा कॉलोनी के मुख्य [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>108 आचार्यश्री विद्यासागरजी के समाधि दिवस के अवसर पर आचार्यश्री की पूजा अर्चना कर शोभायात्रा निकाली गई। समाजजनों ने घर-घर आरती उतारी। <span style="color: #ff0000">पढ़िए इंदौर की यह पूरी खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> 108 आचार्यश्री विद्यासागरजी महामुनि राज के समाधि दिवस के अवसर पर परिवहन नगर दिगंबर जैन मंदिर में आचार्यश्री की पूजा अर्चना कर शोभायात्रा कॉलोनी के मुख्य मार्गाे से निकाली गई। समाजजनों ने घर-घर आरती उतारी एवं अंत में विनयनजी स्वरूप अमन जैन, मीनल जैन ने भजन के माध्यम से अपनी विनयांजलि प्रस्तुत की एवं प्रभावना का वितरण श्रीमती कनकलाताजी, नवनीतजी, सृष्टिजी के परिवार द्वारा की गई।</p>
<p dir="ltr"><strong>रात्रि भक्तामर पाठ</strong></p>
<p dir="ltr">रात्रि में भक्तामर जी का पाठ के साथ 131 दीपकों से आचार्य श्री की आरती की गई । आरती में समाज के  चंदन राव का, राजीव मोदी ,राजेंद्र जैन, प्रमोद चंदेरिया चैतन, जैन अमन जैन ,आकाश जैन, कमल जैन निलेश जैन वर्णित जैन राजेश पाटनी अध्यक्ष नवनीत जैन सहित महिला पुरुष समाज जन उपस्थित हुए</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="size-medium wp-image-74258 aligncenter" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121-225x300.jpg" alt="" width="225" height="300" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121-768x1024.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121-1152x1536.jpg 1152w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121-990x1320.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250210-WA0121.jpg 1200w" sizes="(max-width: 225px) 100vw, 225px" /></p>
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		<title>गणतंत्र दिवस एवं आचार्यश्री के प्रथम समाधि दिवस के पूर्व मूल संस्कृति को अपनाने का संदेश दियाः ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ आहवान  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jan 2025 16:25:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते हुए भारतवासियों को भारत की मूल संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘इण्डिया नहीं भारत बोलो‘ एवं ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ एक अभियान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते हुए भारतवासियों को भारत की मूल संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘इण्डिया नहीं भारत बोलो‘ एवं ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ एक अभियान का उद्घोष किया था। <span style="color: #ff0000">पढ़िए ओम पाटोदी की यह पूरी खबर इंदौर से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> अंग्रेज जब भारत आये तो उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक ताने-बाने की तोड़ने के लिए यहां की शिक्षा पद्धति, रिति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान, धार्मिक आस्थाओं पर प्रहार करते हुए देश की सांस्कृतिक विरासत को तहस-नहस किया। फिर फूट डालो राज करो की कूटनीति को अपनाकर भारतवासियों को गुलामी की जंजीरों में जकड़ लिया। अंग्रेज तो चले गए परन्तु हम आज़ तक उनके द्वारा लादे गए कुसंस्कारों का बोझ ढोते जा रहें हैं। उक्त जानकारी वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी एवं स्वप्निल जैन ने सभा में दी।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72837" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0049-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />मूल संस्कृति से जोड़ने हेतु आह्वान</strong></p>
<p>आचार्यश्री विद्यासागरजी महा मुनिराज ने उक्त बातों का गहन चिंतन करते हुए भारतवासियों को भारत की मूल संस्कृति से जोड़ने के लिए ‘इण्डिया नहीं भारत बोलो‘ एवं ‘भारत बने भारत‘ के नारे के साथ वर्षों पूर्व एक अभियान का आहवान किया था। जिसमें हथकरघा (स्वावलंबन), प्रतिभा स्थली, प्रतिभा चयन छात्रावास (गुरुकुल), पुर्णायु (आयुर्वेद), शांतिधारा, गौशाला (गौवंश संवर्धन), तीर्थ रक्षा धर्म रक्षा (भारत की मूल संस्कृति पुनः स्थापना), मातृभाषा प्रचार प्रसार (हिंदी प्रचार), प्राचीन साहित्य का पुनः लेखन सृजन (भारत की मूल विचारधारा), जीवन्त तीर्थाे का सृजन (मुनि श्रमणों को दीक्षित करना) जैसे दर्जनों प्रकल्प शामिल हैं।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72839" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047.jpg" alt="" width="1600" height="910" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-300x171.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-1024x582.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-768x437.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-1536x874.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-990x563.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0047-1320x751.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />पोस्टर द्वारा भारत की मूल संस्कृति को अपनाने का संदेश </strong></p>
<p>आचार्यश्री की भावना को जीवन्त एवं साकार बनाने के लिए इस गणतंत्र दिवस एवं आचार्यश्री के प्रथम समाधि दिवस 6 फरवरी के पूर्व वर्द्धमानपुर शोध संस्थान की पहल पर ज्ञान वर्धनी पाठशाला गुप्ति सदन इंदौर के बच्चों और समाजजनों ने आचार्यश्री के चित्र के साथ भारत बने भारत के पोस्टर द्वारा भारत की मूल संस्कृति को अपनाने का संदेश दिया। सभा में राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ की जानकारी समाजसेवी अभय संघवी, मयंक जैन ने दी। कार्यक्रम में ऊषा पाटनी, अभय पाटोदी आदि लोग मौजूद थे।</p>
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		<title>ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष बाद हुआ अष्ट धातु स्वर्ण ध्वजारोहणः सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की दर्शनीय उपस्थिति  </title>
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		<pubDate>Wed, 22 Jan 2025 16:22:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात आज बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ। पढ़िए यह पूरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात आज बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह पूरी खबर इंदौर से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात दिनांक 22 जनवरी 2025 बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण कार्यक्रम मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ। <img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72832" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045.jpg" alt="" width="1128" height="752" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045.jpg 1128w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0045-990x660.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1128px) 100vw, 1128px" /></p>
<p><strong>ध्वजारोहण का अवसर एक सौ चार वर्ष बाद </strong></p>
<p>ध्वजारोहण का यह महापुण्य का अवसर एक सौ चार वर्ष बाद धीरेंद्र कासलीवाल, कमलेश कासलीवाल, आमोद कासलीवाल, प्रमोद कासलीवाल, विकास कासलीवाल, अमित कासलीवाल व रोहन कासलीवाल, पुष्पा प्रदीप कासलीवाल की उपस्थिति में हुआ। शिखर पर ध्वजारोहण स्थापित किया रोहन कासलीवाल और कमलेश कासलीवाल ने इनके सहयोगी रहे ऋषभ पहाड़िया, राजकुमार जैन, प्रकाश जैन वकील साहब, विकास कासलीवाल, काँच मंदिर समाज के विजय कासलीवाल की इसमें महति भूमिका रही।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72833" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0044-1.jpg" alt="" width="960" height="1280" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0044-1.jpg 960w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0044-1-225x300.jpg 225w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0044-1-768x1024.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 960px) 100vw, 960px" />इन गणमान्यजनों की उपस्थिति रहीं</strong></p>
<p>इस अवसर पर विमल पहाडिया, अशोक जैन ,नकुल पाटोदी, देवेन्द्र पाटोदी, शरद पानोत, अनिल पटवा, विशाल जैन, पूजा कासलीवाल नेहा पहाड़िया सरिता काला ज्योति काला संगीता पहाड़िया आदिति जैन, सरिता जैन आदि उपस्थित थे।</p>
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		<title>ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष बाद हुआ अष्ट धातु स्वर्ण ध्वजारोहणः सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की दर्शनीय उपस्थिति  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Jan 2025 15:57:56 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात आज बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ। पढ़िए यह पूरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात आज बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह पूरी खबर इंदौर से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> धर्मानुरागी महानुभावों के लिए अत्यंत हर्ष का विषय हैं कि ऐतिहासिक काँच मंदिर में एक सौ चार वर्ष पश्चात दिनांक 22 जनवरी 2025 बुधवार को पंचपरमेष्टी मण्डल विधान एवं नवीन ध्वजारोहण का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ध्वजारोहण कार्यक्रम मे काँच मंदिर के स्वप्न दृष्टा सर सेठ हुकमचंदजी की चौथी, पाँचवीं व छठी पीढ़ी की उपस्थिति में हुआ।</p>
<p><strong>ध्वजारोहण का अवसर एक सौ चार वर्ष बाद </strong></p>
<p>ध्वजारोहण का यह महापुण्य का अवसर एक सौ चार वर्ष बाद धीरेंद्र कासलीवाल, कमलेश कासलीवाल, आमोद कासलीवाल, प्रमोद कासलीवाल, विकास कासलीवाल, अमित कासलीवाल व रोहन कासलीवाल, पुष्पा प्रदीप कासलीवाल की उपस्थिति में हुआ। शिखर पर ध्वजारोहण स्थापित किया रोहन कासलीवाल और कमलेश कासलीवाल ने इनके सहयोगी रहे ऋषभ पहाड़िया, राजकुमार जैन, प्रकाश जैन वकील साहब, विकास कासलीवाल, काँच मंदिर समाज के विजय कासलीवाल की इसमें महति भूमिका रही।</p>
<p><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-72816" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037.jpg" alt="" width="1128" height="752" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037.jpg 1128w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-1024x683.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/01/IMG-20250122-WA0037-990x660.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1128px) 100vw, 1128px" />इन गणमान्यजनों की उपस्थिति रहीं</strong></p>
<p>इस अवसर पर विमल पहाडिया, अशोक जैन ,नकुल पाटोदी, देवेन्द्र पाटोदी, शरद पानोत, अनिल पटवा, विशाल जैन, पूजा कासलीवाल नेहा पहाड़िया सरिता काला ज्योति काला संगीता पहाड़िया आदिति जैन, सरिता जैन आदि उपस्थित थे।</p>
]]></content:encoded>
					
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		<title>गुरु चरणों में मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादवः मुनिश्री प्रमाण सागर से आशीर्वाद प्राप्त किया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/madhya_pradesh_chief_minister_dr_mohan_yadav_received_blessings_from_munishri_praman_sagarji_maharaj/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Jan 2025 13:19:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[गुणायतन प्रणेता शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर संसघ के दर्शनाथ पधारे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंगलवार को परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागरजी संसघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह पूरी खबर उज्जैन से&#8230; उज्जैन। नगर में विराजित श्रमण संस्कृति के समाधिष्ट महामहिम [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>गुणायतन प्रणेता शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर संसघ के दर्शनाथ पधारे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंगलवार को परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागरजी संसघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह पूरी खबर उज्जैन से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>उज्जैन।</strong> नगर में विराजित श्रमण संस्कृति के समाधिष्ट महामहिम संत आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज के प्रयाग शिष्य गुणायतन प्रणेता शंका समाधान के जनक परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर संसघ के दर्शनाथ पधारे माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज दिनांक 21 जनवरी 2025 मंगलवार को परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागरजी संसघ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया एवं प्रदेश की खुशहाली के लिए भी बहुत ही सौहार्दपूर्ण धर्म चर्चा कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्रीजी के साथ विधायक अनिल जैन और योगेन्द्र बडजात्या और समाजजन भी उपस्थित रहे।</p>
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		<title>श्रमण मुनि सुधा सागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद और प्रेरणा सेः श्रमण संस्कृति संस्थान के नए भवन के नवनिर्वाण की घोषणा </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/announcement_of_construction_of_new_building_of_shramana_sanskriti_sansthan_with_blessings_and_inspiration_of_sudha_sagarji_maharaj/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 20 Jan 2025 15:56:01 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रमण संस्कृति संस्थान के नए भवन के नवनिर्वाण की घोषणा जयपुर में हुई। देश के प्रसिद्ध दानवीर भामाशाह जैन रत्न समाज गौरव पाटनी परिवार, किशनगढ़ के द्वारा अभूतपूर्व दान की घोषणा की गई। नए छात्रावास भवन का निर्माण पुण्यार्जक आर.के. मार्बल पाटनी परिवार, किशन गढ़ के द्वारा होगा। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह पूरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>श्रमण संस्कृति संस्थान के नए भवन के नवनिर्वाण की घोषणा जयपुर में हुई। देश के प्रसिद्ध दानवीर भामाशाह जैन रत्न समाज गौरव पाटनी परिवार, किशनगढ़ के द्वारा अभूतपूर्व दान की घोषणा की गई। नए छात्रावास भवन का निर्माण पुण्यार्जक आर.के. मार्बल पाटनी परिवार, किशन गढ़ के द्वारा होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन दद्दू की यह पूरी खबर इंदौर से&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> श्रमण संस्कृति के समाधिस्थ महामहिम आचार्य भगवन विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि सुधा सागरजी महाराज के मंगल आशीर्वाद और प्रेरणा से श्रमण संस्कृति संस्थान के नए भवन के नवनिर्वाण की घोषणा जयपुर शहर में बहुत ही भव्य आयोजन में पधारे समाज के समस्त श्रेष्ठियों के द्वारा हुई।</p>
<p><strong>अभूतपूर्व दान की घोषणा की गई। </strong></p>
<p>इस आयोजन में गुरुवर सुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद से देश के प्रसिद्ध दानवीर भामाशाह जैन रत्न समाज गौरव परिवार चामुंडा राय कवरीलालजी अशोक कुमारजी, सुरेश कुमारजी, विमल कुमारजी पाटनी परिवार, किशनगढ़ के द्वारा अभूतपूर्व दान की घोषणा की गई। श्रमण संस्कृति संस्थान के अंतर्गत बनने वाले नए छात्रावास भवन की 2 अंडरग्राउंड तलघर सहित 12 मंजिल सम्पूर्ण नए भवन का निर्माण पुण्यार्जक आर.के. मार्बल पाटनी परिवार, किशन गढ़ के द्वारा किया जाएगा।</p>
<p><strong>पाटनी परिवार के दान की अनुमोदना </strong></p>
<p>पाटनी परिवार के दान की अनुमोदना करते हुए इंदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन आजाद जैन, बीड़ी वाले महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश विनायका हंसमुख गांधी, टीके वेद, नरेंद्र वेद मयंक जैन, विश्व जैन संगठन एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष, मुक्ता जैन, सारिका जैन, रेखा जैन श्रीफल आदि समाज ने बंधाई देते हुए पाटनी परिवार के दान की बहुत-बहुत अनुमोदना की।</p>
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		<title>भगवान सबका अच्छा ही करते हैंः आचार्य श्री सुंदरसागर जी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 Jul 2022 12:31:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातपगढ़ चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; जो कुछ होता है, उसके पीछे खुद का ही कर्म हाथ की रेखाएं अच्छी या बुरी नहीं होती, सब अपने कर्मों का लेखा-जोखा न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन  प्रतापगढ़,27 जुलाई । स्थानीय नया मंदिर में आगुन्तक श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदरसागर जी ने कहा है कि भगवान महावीर की दिव्यदेशना का [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<ul>
<li><span style="color: #008000;">जो कुछ होता है, उसके पीछे खुद का ही कर्म</span></li>
<li style="text-align: left;"><span style="color: #008000; font-size: 16px;">हाथ की रेखाएं अच्छी या बुरी नहीं होती, सब अपने कर्मों का लेखा-जोखा</span></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन </span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़,27 जुलाई ।</strong> स्थानीय नया मंदिर में आगुन्तक श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री सुंदरसागर जी ने कहा है कि भगवान महावीर की दिव्यदेशना का हम सब स्वाद ले रहे हैं। हम यह भी भलीभाँति जानते हैं कि भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर हैं। जब भी कोई महापुरुष कोई कार्य करते हैं तो विशुद्धि बढ़ाने के लिए ही करते हैं और आप कोई कार्य करते हैं तो नाम कमाने के लिए करते हैं।</p>
<p>उन्होंने उदाहरण देते हुए अपनी बात स्पष्ट की कि हम और हम बचपन से सुनते आए हैं कि भगवान सबकी रक्षा करते हैं, भगवान ही सबका अच्छा और बुरा करते हैं। परंतु इस पंचम काल में ऐसा भी देखा गया है कि गरीब जो धर्म करता है, उसे और दुख मिलता है और अमीर जो धर्म नहीं करता है, फिर भी उसे सुख- शांति मिलती है। यह सत्य है कि नहीं? भगवान कुछ नहीं करता। तो धनंजय का बेटा बीमार हुआ तो ठीक कैसे हुआ और मैना कुमारी के दुख भगवान ने कैसे हरे, कैसे रक्षा करी? अंजनचोर का कष्ठ मिटाने वाले भी भगवान ही थे। सब का पालन करने वाले भगवान और सबका भाग्य लिखने वाले भगवान तो फिर बताइये- वह राग द्वेष से परे हैं, निरंकार हैं तो वह किसी के लिए बुरा क्यों लिखेंगे। भगवान सबके लिए अच्छा ही लिखेंगे। भगवान इतने गुणवान हैं कि सबका भविष्य परफेक्ट ही लिखेंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि अब सवाल है- जो कुछ भी होता है ऊपर वाले की मर्जी से होता है तो, क्या कर्मों के हिसाब से होता है? जो कुछ होता है कर्मों के अनुसार होगा। एक मिनट के लिए विचार कीजिये जो भगवान सोचता है, वह वह होता है। जो- जो कार्य करोगे वैसा कार्य होगा, तो कर्म किसने किए हैं? आपने स्वयं ने या भगवान ने? जो भगवान सबका भाग्य बनाता है तो गरीब को गरीब क्यों बनाता है और अमीर को अमीर क्यों बनाता है?</p>
<p>आचार्य सुंदरसागर जी ने आगे प्रवचन में कहा- आपके पिताजी आपके लिए अच्छा भाग्य लिखेंगे। ये तो सत्य है ना तो उन्होंने आपकी शादी के लिए एक लड़की पसंद करी, शादी के लिए अच्छा स्टेज लगाया, खूब खर्चा किया, सोना भी चढ़ाया और शादी के समय लड़की भाग गई तो इसमे दोषी कौन? अब आप किसकी गलती निकालोगे पिताजी की या उसमें भी भगवान की गलती निकालोगे। आप भगवान की ही गलती निकालते हैं कि भगवान मेरी दुल्हन भाग गई, पर ये नहीं सोचते कि जो भी हुआ है सब मेरे कर्म हैं। मेरे परिवार के सबके कर्मों के कारण हो रहा है। कर्म स्वयं कर रहा है और दोष भगवान के ऊपर थोपा जाता है। आपने कर्म गलत किए हैं और आपके साथ गलत होता है तो आप कहते हैं कि भगवान ने गलत किया। गलत कर्म आपको बुरा समय दिखाते हैं और अच्छे कर्म आपको शांति समृद्धि लाते हैं। आप यह सोचें कि मेरे स्वयं का अच्छा करने वाला भी मैं हूं और बुरा करने वाला भी मैं हूं। हाथ की रेखाओं पर दोष नहीं देना। रेखा अच्छी या बुरी नहीं होती। सब अपने कर्मों का लेखा-जोखा है। उन हाथ की रेखोओं से, विभिन्न निशानों से सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ऐसा होगा या ना होगा।</p>
<p>भवात्माओं ! संम्भावना और वास्तविकता दोनों अलग- अलग होती है। हाथ की रेखाओं से सिर्फ संभावना लगाई जा सकती है कि ऐसा हो सकता है। वास्तविकता नहीं लगाई जा सकती और सबसे बड़ी गड़बड़ वही होती है जहां हम संभावना को वास्तविकता समझते हैं व उसे दिमाग में फिट कर लेते हैं। संभावना को दिमाग में स्थान देंगे, वास्तविकता में होने की संभावना ज्यादा होगी। स्वयं के कर्त्ताधर्ता हम स्वयं ही हैं। यही मानना चाहिए। आप सबका मंगल हो।</p>
<p><span style="color: #008000;"><a style="color: #008000;" href="https://chat.whatsapp.com/Crte6WvfMtU3xFE5MO7Xy0">ऐसी रोचक खबरों के लिए हमारे वॉट्स ऐप ग्रुप से जुडने के लिए क्लिक करें ।</a></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>काशी में जन्में तीर्थंकर चंद्रप्रभु व पार्श्वनाथ भगवान की शिक्षाओं की प्रासंगिकता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Dec 2021 00:33:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आलेख]]></category>
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					<description><![CDATA[तीर्थंकर चंद्रप्रभ व पार्श्वनाथ की जयंती 30 दिसम्बर 2021 पर विशेष -डाॅ. सुनील जैन ‘संचय’ सर्वधर्म सदभाव की नगरी है काशी। विभिन्न धर्मों के धार्मिक सरोकार से जुड़ी इस पावन नगरी की इन दिनों चर्चा चहुँओर है। देश के प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरिडॉर सहित अनेक सौगातें काशी को हाल ही में दी हैं। बनारस [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तीर्थंकर चंद्रप्रभ व पार्श्वनाथ की जयंती 30 दिसम्बर 2021 पर विशेष</strong></p>
<p><span style="color: #ff6600"><strong>-डाॅ. सुनील जैन ‘संचय’</strong></span></p>
<p>सर्वधर्म सदभाव की नगरी है काशी। विभिन्न धर्मों के धार्मिक सरोकार से जुड़ी इस पावन नगरी की इन दिनों चर्चा चहुँओर है। देश के प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ कॉरिडॉर सहित अनेक सौगातें काशी को हाल ही में दी हैं। बनारस को लोग मंदिरों का शहर, भारत की धार्मिक राजधानी, भगवान शिव की नगरी, दीपों का शहर आदि विशेषण भी देते हैं. प्रसिद्ध अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन लिखते हैं कि “बनारस इतिहास से भी पुरातन है, परंपराओं से पुराना है, किंवदंतियों से भी प्राचीन है और जब इन सबको एकत्र कर दें, तो उस संग्रह से भी दोगुना प्राचीन है.”<br />
मैंने अपने जीवन निर्माण के पांच वर्ष वाराणसी में व्यतीत किए हैं,इसलिए काशी की संस्कृति से मेरा निकटता से परिचय है। गंगा का पावन जल और शांत आनंदमयी घाटों का अनुभव कितना मनमोहक होता है शायद आप लोग जानते होगे, बनारस के कुछ अलग ही रहस्य हैं जो हर शहर से भिन्न है।</p>
<p><strong>बनारस का हर शाम इतना सुहाना लगे।</strong><br />
<strong>इसे भुलाने में कई सदियाँ कई जमाना लगे।।</strong></p>
<p>काशी यानि वाराणसी एक धार्मिक -सांस्कृतिक नगरी एवं पवित्र नगरी मानी जाती है क्योंकि इस नगरी में सभी सम्प्रदायों की आस्था जुड़ी है जिसमें जैन धर्मावलंबियों की आस्था भी जुड़ी है क्योंकि पवित्र गंगा नदी के बीच वसी नगरी काशी में चार तीर्थंकरों का जन्म हुआ, जन्म की ही नहीं चार- चार कल्याणक भी हुए हैं। सप्तम तीर्थंकर श्री सुपार्श्वनाथ, अष्टम तीर्थंकर श्री चन्द्रप्रभ, ग्यारहवें तीर्थंकर श्रेयांशनाथ और तेईसवें तीर्थंकर श्री पार्श्वनाथ ने जन्म लेकर वाराणसी नगरी को पवित्र बनाया है। मेरा सौभाग्य रहा कि पवित्र गंगा किनारे सातवें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ भगवान की जन्मभूमि से सुशोभित जैन घाट पर स्थित सुप्रसिद्ध स्याद्वाद महाविद्यालय में मुझे अध्ययन करने का अवसर मिला।</p>
<p>ऐतिहासिक अवलोकन से स्पष्ट होता है कि जैन धर्म का प्रभाव भी इस नगरी पर रहा है। ‘संयम’ और ‘सहनशीलता’ के प्रतिमूर्ति जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का जन्म काशी में पौष कृष्णा एकादशी को हुआ था । तत्कालीन काशी नरेश महाराजा विश्वसेन आपके पिता एवं महारानी वामादेवी आपकी माता थीं। शहर के भेलुपुर इलाके में तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की जन्मभूमि है। यही वो जगह है जहाँ जैन धर्म के 23 वें तीर्थांकर की जन्म , कर्म और तप भूमि है। जो आज जैन धर्मावलम्बियों के लिए बड़ा स्थल है। यहां आज जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर का भव्य मंदिर है।</p>
<p>पार्श्वनाथ के जन्म स्थल भेलूपुर मुहल्ले में विशाल, कलात्मक एवं मनोरम मन्दिर का निर्माण हुआ है। मन्दिर में काले पत्थरों से निर्मित चार फिट ऊंची पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजमान है। 6273 वर्ग फिट क्षेत्रफल में यह मन्दिर परिसर है। राजस्थानी कारीगरों द्वारा राजस्थानी पत्थरों से निर्मित राजस्थानी शैली का यह मन्दिर अदभुत एवं अद्वितीय है। मन्दिर के दिवारों पर शिल्पकारों द्वारा सुन्दर ढंग से कलात्मक चित्रों को दर्शाया गया है।<br />
इस मंदिर में दर्शन के लिए हर रोज ढेरों श्रद्धालु आते हैं। पार्श्वनाथ ने अज्ञान, आडंबर, अंधकार और क्रिया क्रम के मध्य में क्रांति का बीज बनकर जन्म लिया था।<br />
उन्होंने हमारे भीतर सुलभ बोधि जगाई, व्रत की संस्कृति विकसित की। बुराइयों का परिष्कार कर अच्छा इंसान बनने का संस्कार भरा। पुरुषार्थ से भाग्य बदलने का सूत्र दिया। भगवान पार्श्वनाथ क्षमा के प्रतीक और सामाजिक क्रांति के प्रणेता हैं। उन्होंने अहिंसा की व्याप्ति को व्यक्ति तक विस्तृत कर सामाजिक जीवन में प्रवेश दिया, जो अभूतपूर्व क्रांति थी। उनका कहना था कि हर व्यक्ति के प्रति सहज करुणा और कल्याण की भावना रखें। उनके सिद्धांत व्यावहारिक थे, इसलिए उनके व्यक्तित्व और उपदेशों का प्रभाव जनमानस पर पड़ा। आज भी बंगाल, बिहार, झाारखंड और उड़ीसा में फैले हुए लाखों सराकों, बंगाल के मेदिनीपुर जिले के सदगोवा ओर उडीसा के रंगिया जाति के लोग पार्श्वनाथ को अपना कुल देवता मानते हैं। पार्श्वनाथ के सिद्धांत और संस्कार इनके जीवन में गहरी जड़ें जमा चुके हैं। इसके अलावा सम्मेदशिखर के निकट रहने वाली भील जाति पार्श्वनाथ की अनन्य भक्त है।<br />
भगवान पार्श्वनाथ की जीवन-घटनाओं में हमें राज्य और व्यक्ति, समाज और व्यक्ति तथा व्यक्ति और व्यक्ति के बीच के संबंधों के निर्धारण के रचनात्मक सूत्र भी मिलते हैं। इन सूत्रों की प्रासंगिकता आज भी यथापूर्व है। हिंसा और अहिंसा का द्वन्द भी हमें इन घटनाओं में अभिगुम्फित दिखाई देता है। ध्यान से देखने पर भगवान पार्श्वनाथ तथा भगवान महावीर का समवेत् रूप एक सार्वभौम धर्म के प्रवर्तन का सुदृढ़ सरंजाम है।</p>
<p>तीर्थंकर पार्श्वनाथ तथा उनके लोकव्यापी चिंतन ने लम्बे समय तक धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक क्षेत्र को प्रभावित किया। उनका धर्म व्यवहार की दृष्टि से सहज था, जिसमें जीवन शैली का प्रतिपादन था। राजकुमार अवस्था में कमठ द्वारा काशी के गंगाघाट पर पंचाग्नि तप तथा यज्ञाग्नि की लकड़ी में जलते नाग-नागिनी का णमोकार मंत्र द्वार उद्धार कार्य की प्रसिद्ध घटना यह सब उनके द्वारा धार्मिक क्षेत्रों में हिंसा और अज्ञान विरोध और अहिंसा तथा विवेक की स्थापना का प्रतीक है।<br />
तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने मालव, अवंती, गौर्जर, महाराष्ट्, सौराष्ट्, अंग-नल, कलिंग, कर्नाटक, कोंकण, मेवाड़, द्रविड, कश्मीर, मगध, कच्छ, विदर्भ, पंचाल, पल्लव आदि आर्यखंड के देशों में विहार किया। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिला में सुप्रसिद्ध जैन सिद्धक्षेत्र नैनागरी स्थित है जहाँ भगवान पार्श्वनाथ का समवशरण आया था। उनकी ध्यानयोग की साधना वास्तव में आत्मसाधना थी। भय, प्रलोभन, राग-द्वेष से परे। उनका कहना था कि सताने वाले के प्रति भी सहज करूणा और कल्याण की भावना रखें।<br />
तीर्थंकर पार्श्वनाथ की भारतवर्ष में सर्वाधिक प्रतिमाएं और मंदिर हैं। उनके जन्म स्थान भेलूपुर वाराणसी में बहुत ही भव्य और विशाल दिगम्बर और श्वेताम्बर जैन मंदिर बना हुआ है। यह स्थान विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र है। पार्श्वनाथ की जयंती पर जहां वाराणसी सहित पूरे देश में जन्मोत्सव धूमधाम से श्रीजी की शोभायात्रा के साथ मनाया जाता है ।</p>
<p>चौबीस तीर्थंकरों में भगवान पार्श्वनाथ लोकजीवन में सर्वाधिक प्रतिष्ठित हैं। इस आर्यखंड-भारतदेश के प्रत्येक राज्य में भगवान पार्श्वनाथ विभिन्न विशेषणों के साथ पूजे जाते हैं। कहीें वे ‘‘अंतरिक्ष पार्श्वनाथ’’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं तो कहीं देवालय ‘‘चिन्तामणि पार्श्वनाथ’’ की जय से गुंजित होता है, कहीं वे ‘‘तिखाल वाले बाबा’’ के रूप में विराजमान हैं।</p>
<p><strong>तीर्थंकर पार्श्वनाथ की भक्ति में अनेक स्तोत्र का आचार्यों ने सृजन किया है,</strong> जैसे- श्रीपुर पाश्र्वनाथ स्तोत्र, कल्याण मंदिर स्तोत्र, इन्द्रनंदि कृत पार्श्वनाथ स्तोत्र, राजसेनकृत पाश्र्वनाथाष्टक, पद्मप्रभमलधारीदेव कृत पाश्र्वनाथ स्तोत्र, विद्यानंदिकृत पाश्र्वनाथ स्तोत्र आदि। स्तोत्र रचना आराध्यदेव के प्रति बहुमान प्रदर्शन एवं आराध्य के अतिशय का प्रतिफल है। अतः इन स्तोत्रों की बहुलता भगवान पार्श्वनाथ के अतिशय प्रभावकता का सूचक है। भारतीय संस्कृति की प्रमुख धारा श्रमण परम्परा में भगवान पार्श्वनाथ का ऐतिहासिक एवं गौरवशाली महत्व रहा है। भगवान पार्श्वनाथ हमारी अविच्छिन्न तीर्थंकर परम्परा के दिव्य आभावान योगी ऐतिहासिक पुरूष हैं। सर्वप्रथम डाॅ. हर्मन याकोबी ने ‘स्टडीज इन जैनिज्म’ के माध्यम से उन्हें ऐतिहासिक पुरूष माना।<br />
वर्तमान वैज्ञानिक युग में भी उनके द्वारा प्रतिपादित जीने की कला और संदेश नितान्त प्रासंगिक है।<br />
जीवन के अंत में श्रावण शुक्ला सप्तमी के दिन झारखंड स्थित सुप्रसिद्ध शाश्वत जैन तीर्थ श्री संवेदशिखर के स्वर्णभद्रकूट नामक पर्वत से निर्वाण प्राप्त किया। इन्हीं की स्मृति में इस तीर्थ क्षेत्र के समीपस्थ स्टेशन का नाम पारसनाथ प्रसिद्ध है। सम्पूर्ण देश के लाखों जैन धर्मानुयायी इस तीर्थ के दर्शन-पूजन हेतु निरंतर आते रहते हैं।<br />
<strong>गंगा नदी के तट पर बना हुआ चंद्रप्रभ जिनालय स्थापत्य कला को सुशोभित कर रहा :</strong></p>
<p>आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभ का जन्म भी पौष कृष्ण एकादशी को ही राजघराने में हुआ था। इनके माता पिता बनने का सौभाग्य चंद्रावती के महाराजा महासेन और लक्ष्मणा देवी को मिला। भगवान चन्द्रप्रभु के जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक स्थली क्षेत्र सुरम्य गंगातट पर चन्द्रावती गढ़ के भग्नावशेषों के बीच स्थित है। क्षेत्र पर चैत्र कृष्णा 5 को वार्षिक मेला लगता है। गंगा किनारे चंद्रावती में आठवें तीर्थंकर चंद्राप्रभु स्वामी ने जन्म लिया था। वहां चंद्राप्रभु का भव्य मंदिर आस्था का केंद्र है लेकिन गंगा की कटान की वजह से यह तीर्थ बदहाल पड़ा है। वर्तमान मंदिर की वेदी में मूलनायक तीर्थंकर चंद्रप्रभ की श्वेत पाषाण की पद्मासन प्रतिमा है। मंदिर का शिखर बहुत ही सुंदर बना हुआ है। यहां से गंगा का मनोहारी दृश्य बहुत ही आकर्षक लगता है जो अवलोकनीय है। गंगा नदी के तट पर बना हुआ जिनालय स्थापत्य कला को सुशोभित कर रहा है । मंदिर का निर्माण प्रभुदास जैन ने किया था। इनके परिवारजन श्री अजय जैन, प्रशांत जैन आरा आदि आज भी इस क्षेत्र की देख-रेख में संलग्न हैं। चंद्रावती में आगामी फरवरी 2022 में आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के सान्निध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भी प्रस्तावित है।<br />
जैन तीर्थंकरों के दर्शन के लिए वर्ष भर देश के कोने-कोने से लाखों की तादाद में जैन धर्मावलंबी काशी आते हैं।<br />
भगवान चंद्रप्रभ हमारे जीवन दर्शन के स्रोत हैं, प्रेरक आदर्श हैं। उन्होंने जैसा जीवन जीया, उसका हर अनुभव हमारे लिए साधना का प्रयोग बन गया।<br />
भगवान चंद्रप्रभ को इतिहास का स्वरूप धारण कराने में आचार्य समन्तभद्र स्वामी का बड़ा हाथ है। जब उन्हें भस्मक व्याधि हो गयी थी उस समय काशी में उनके साथ जो घटनाक्रम हुआ वह ऐतिहासिक था। इस ऐतिहासिक घटना ने जनमानस पर गहरा प्रभाव छोड़ा और कलाकार चंद्रप्रभु की कलाकृतियां गढ़ने में तत्पर हो गए और श्रावक जन भगवान चंद्रप्रभु के चमत्कार के प्रति अधिक आस्थावान और विश्वस्त हो गए। चंद्रावती के अलावा देवगढ़ , खजुराहो, सोनागिर, तिजारा, ग्वालियर, श्रवणबेलगोला , बरनावा, मांगीतुंगी आदि में चंद्रप्रभु भगवान की प्राचीन व चमत्कारी प्रतिमाएं विराजमान हैं।<br />
तीर्थंकर चंद्रप्रभु अपनी अद्वितीय धवल रूप गरिमा में वीतरागता का वैभव बिखेरने के साथ अपने अद्वितीय अतिशय और चमत्कारों के कारण भी लोकप्रिय संकट मोचन रहे हैं। तीर्थंकर चन्द्रप्रभु का आदर्श मानव को सावधान करता है, उसे जगाता है और कहता है कि हमारी तरफ देख, हमने राजा का वैभव को ठुकराया और आकिंचन व्रत अंगीकार किया और तू इस नाशवान माया की ममता में पागल हुए जा रहा है।<br />
<span style="color: #008000">वाराणसी देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी का संसदीय क्षेत्र है। पिछले दिनों उन्होंने काशी विश्वनाथ कॉरिडॉर देश को समर्पित कर ऐतिहासिक कार्य किया है। वाराणसी में ही राजघराने में जन्में तीर्थंकर चंद्रप्रभु एवं पार्श्वनाथ भगवान के जन्मकल्याणक दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री से निवेदन है कि काशी के चार तीर्थंकरों की जन्मभूमि के विकास , संरक्षण और संवर्द्धन की ओर भी अपना ध्यान आकृष्ट करने का कष्ट करें। चंद्रप्रभु भगवान की जन्म भूमि पर गंगा घाट के तट पर चंद्रावती में जो मंदिर बना है उस पर तो तुरंत ध्यान देने की जरूरत है , समय जीर्णोद्धार बहुत जरूरी है। आशा है प्रधानमंत्री इस ओर जरूर ध्यान देंगे ताकि संस्कृति की यह महान धरोहर संरक्षित और सुरक्षित हो सके।</span></p>
<p><strong>श्री चंद्रप्रभ विधेयं, स्मर्ता सद्य फलप्रदाः।</strong><br />
<strong>भवाब्धि व्याधि विध्वंस, दायिनी मेव राक्षदा।।</strong></p>
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