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	<title>भगवान पार्श्वनाथ जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भगवान पार्श्वनाथ जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 7 मार्च को :  तिथि के अनुसार चैत्र कृष्ण चतुर्थी को मनाया जा रहा है </title>
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		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 06:54:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर के दिगंबर जैन मन्दिर, चैत्यालय में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उप संपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230; इंदौर। भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर के दिगंबर जैन मन्दिर, चैत्यालय में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उप संपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान पार्श्वनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) 7 मार्च शनिवार को देश भर के दिगंबर जैन मन्दिर, चैत्यालय में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है। तिथि के अनुसार चैत्र कृष्ण चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। भगवान पार्श्वनाथ जी को कैवल्य ज्ञान चैत्र कृष्ण चतुर्थी को वाराणसी के समीप अहिच्छत्र में हुआ था। 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग के बाद 83 दिनों की कठोर तपस्या के बाद 84 वें दिन उन्हें लोकालोकप्रकाशी केवलज्ञान प्राप्त हुआ। यह दिव्य ज्ञान उन्हें धात्री नामक वृक्ष के नीचे प्राप्त हुआ। भगवान के ज्ञान कल्याणक पर समूचे भारत वर्ष में शनिवार को भक्ति का अनुपम अनुष्ठान किए जा रहे हैं। इस दिन भगवान के अभिषेक, शांतिधारा, विधान पूजन आदि धार्मिक कार्य किए जा रहे। हैं। ज्ञान प्राप्ति के बाद आपने सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर इंद्रों ने समवसरण की रचना की और केवलज्ञान की पूजा की। यह दिन आत्म-ज्ञान और साधना की सर्वोच्चता का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p><strong>ज्ञान कल्याणक की मुख्य बातें:</strong></p>
<p>अहिच्छत्र (कुछ मान्यतानुसार काशी/वाराणसी के समीप  चैत्र कृष्णा चतुर्थी (विशाखा नक्षत्र)। तपस्या के बाद कमठ के उपसर्गों को शांत कर वे &#8216;केवलज्ञानी&#8217; बने।प्रभु ने चतुर्र्विध संघ (श्रमण, श्रमणी, श्रावक, श्राविका) की स्थापना की। ज्ञान प्राप्ति के बाद आपने सत्य, अहिंसा, अस्तेय, और अपरिग्रह का संदेश दिया। इस पावन अवसर पर इंद्रों ने समवसरण की रचना की और केवलज्ञान की पूजा की। यह दिन आत्म-ज्ञान और साधना की सर्वोच्चता का प्रतीक माना जाता है</p>
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		<title>जीवदया पशु संवर्धन केंद्र ने गायों को खिलाया गुड़ चारा : 100 परिवारों ने श्रद्धा-भक्ति से अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान किया  </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 09:38:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से स्थापित जीवदया पशु संवर्धन केंद्र दयोदय गौशाला प्रतिभा स्थली रेवती रेंज सांवेर रोड स्थित मंदिर भगवान पार्श्वनाथ जी की भक्ति एवं विधान किया गया। रविवार को प्रतिभा स्थली रेवती रेंज इंदौर पर पशु संवर्धन केंद्र गौशाला में गायों की सेवा की गई। इंदौर से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से स्थापित जीवदया पशु संवर्धन केंद्र दयोदय गौशाला प्रतिभा स्थली रेवती रेंज सांवेर रोड स्थित मंदिर भगवान पार्श्वनाथ जी की भक्ति एवं विधान किया गया। रविवार को प्रतिभा स्थली रेवती रेंज इंदौर पर पशु संवर्धन केंद्र गौशाला में गायों की सेवा की गई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से स्थापित जीवदया पशु संवर्धन केंद्र दयोदय गौशाला प्रतिभा स्थली रेवती रेंज सांवेर रोड स्थित मंदिर भगवान पार्श्वनाथ जी की भक्ति एवं विधान किया गया। रविवार को प्रतिभा स्थली रेवती रेंज इंदौर पर पशु संवर्धन केंद्र गौशाला में गायों की सेवा की गई। इससे पूर्व 100 परिवारों ने बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव से अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान किया।</p>
<p>राजेश जैन दद्दू ने बताया कि विधान के बाद गौशाला में गौवंश को गुड़ और हरा चारा सभी वरिष्ठ समाजसेवी सदस्यों ने अपने परिवार सहित खिलाया। इसमें बच्चों को बड़ा आनंद आया। संस्था के प्रमुख मनोज बाकलीवाल, एनके जैन रोडवेज, अनिल रावत, आजाद जैन, डॉ. अशोक जैन डॉ. दीपक जैन, राजीव जैन, अमित जैन एवं बाहर से पधारे सभी समाजजनों ने गौशाला के सभी कर्मचारियों का बहुमान किया।</p>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म एवं तप कल्याणक 15 दिसंबर को: पौष मास के कृष्ण एकादशी का पुण्य दिवस को मनाया जाता है  </title>
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		<pubDate>Sun, 14 Dec 2025 13:56:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म एवं कल्याणक 15 दिसंबर को पौष कृष्ण एकादशी को मनाया जाएगा। भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म वाराणसी के भेलूपुर में हुआ था। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230; इंदौर। जैन धर्म के 23वें [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म एवं कल्याणक 15 दिसंबर को पौष कृष्ण एकादशी को मनाया जाएगा। भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म वाराणसी के भेलूपुर में हुआ था। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म एवं कल्याणक 15 दिसंबर को पौष कृष्ण एकादशी को मनाया जाएगा। भगवान पार्श्वनाथ जी का जन्म वाराणसी के भेलूपुर में हुआ था। जैन ग्रंथों के अनुसार वर्तमान में काल चक्र का अवरोही भाग, अवसर्पिणी गतिशील है और इसके चौथे युग में 24 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का जन्म आज से लगभग 2 हजार 9 सौ वर्ष पूर्व वाराणासी में अश्वसेन नाम के इक्ष्वाकुवंशीय क्षत्रिय राजा और उनकी रानी वामा के यहां पौष कृष्&#x200d;ण एकादशी के दिन महा तेजस्वी पुत्र का जन्म हुआ। इनके शरीर पर सर्पचिह्म था। वामा देवी ने गर्भकाल में एक बार स्वप्न में एक सर्प देखा था, इसलिए पुत्र का नाम पार्श्व रखा गया। उनका प्रारंभिक जीवन राजकुमार के रूप में व्यतीत हुआ। एक दिन पार्श्व ने अपने महल से देखा कि पुरवासी पूजा की सामग्री लिए एक ओर जा रहे हैं। वहां जाकर उन्होंने देखा कि एक तपस्वी जहां पंचाग्नि जला रहा है और अग्नि में एक सर्प का जोड़ा मर रहा है, तब पार्श्व ने कहा कि ‘दयाहीन धर्म किसी काम का नहीं’। तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने 30 वर्ष की आयु में घर त्याग दिया था और जैन दीक्षा ली। काशी में 83 दिन की कठोर तपस्या करने के बाद 84वें दिन उन्हें केवल ज्ञान प्राप्त हुआ था। पुंड़्र, ताम्रलिप्त आदि अनेक देशों में उन्होंने भ्रमण किया। ताम्रलिप्त में उनके शिष्य हुए। पार्श्वनाथ ने चतुर्विध संघ की स्थापना की।</p>
<p>इसमें श्रमण, श्रमणी, श्रावक, श्राविका होते हैं और आज भी जैन समाज इसी स्वरुप में है। प्रत्येक गण एक गणधर के तहत कार्य करता था। सभी अनुयायियों, स्त्री हो या पुरुष सभी को समान माना जाता था। सारनाथ जैन-आगम ग्रंथों में सिंहपुर के नाम से प्रसिद्ध है। यहीं पर जैन धर्म के 11वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ जी ने जन्म लिया था और अपने अहिंसा धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। केवल ज्ञान के बाद तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने जैन धर्म के चार मुख्य व्रत सत्य, अहिंसा, अस्तेय और अपरिग्रह की शिक्षा दी थी।</p>
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		<title>भगवान पार्श्वनाथ जी का अभिषेक किया: तीन लोक विधान के छठे दिन हुए कई कार्यक्रम  </title>
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		<pubDate>Mon, 07 Jul 2025 14:25:03 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आगरा में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर राजा मंडी में चल रहे तीन लोक विधान के छठे दिन श्री पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230; आगरा। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर राजा मंडी में चल रहे तीन लोक [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आगरा में श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर राजा मंडी में चल रहे तीन लोक विधान के छठे दिन श्री पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, राहुल जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा</strong>। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर राजा मंडी में चल रहे तीन लोक विधान के छठे दिन श्री पार्श्वनाथ भगवान का अभिषेक किया गया। प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य संजीव जैन और दीपक जैन को मिला। शांति धारा करने का सौभाग्य तरुण जैन को मिला। नित्य नियम की पूजा के बाद तीन लोक विधान में सोमवार को मध्य लोक के उत्तराद्व के दूसरे अध्याय का वर्णन किया गया। पंडित अरुण शास्त्री ने पूजन के दौरान मध्य लोक के उत्तराद्व भाग के सभी अर्घ्य चढ़वाए और श्रीजी की क्रियाओं के बारे में बताया। नंदीश्वर द्वीप व पंचमैरू का विश्लेषण पूजा के माध्यम से किया। हेमलता जैन एंड पार्टी ने भजन से भक्ति करवाई। कार्यक्रम का संचालन निशांत जैन ने किया।</p>
<p>कार्यक्रम में मंदिर समिति के अनिल जैन, दिलीप बडजात्या, ललित जैन, सुभाषचंद्र जैन, निर्मल जैन, ज्ञानकुमार जैन, निशांत जैन, सुनील जैन, सम्यक जैन, रजनीश जैन, राहुल जैन, रोहित जैन, जैना जैन, मधु जैन, शोभा बडजात्या, सोनिया जैन, पूजा जैन, संजना जैन आदि मुख्य पात्रों के साथ विराजमान थे। सातवें दिन पंडित अरुण शास्त्री सुबह 7 बजे से अभिषेक, तीन लोक विधान करवाएंगे।</p>
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		<title>मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक गया मनाया जैसलमेर के पाषाण से तैयार होगा लघु तीर्थ </title>
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		<pubDate>Fri, 03 May 2024 16:00:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव , दिनाँक &#8211; 03 मई 2024 तिथि वैशाख कृष्ण दशमी, 2550 दिन ,शुक्रवार को राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समाज के धर्मप्रेमी बंधुओ द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव , दिनाँक &#8211; 03 मई 2024 तिथि वैशाख कृष्ण दशमी, 2550 दिन ,शुक्रवार को राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समाज के धर्मप्रेमी बंधुओ द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के जिनालयों में श्रद्धा की झलक देखने को मिली।<span style="color: #ff0000">पढि़ए प्रणीत जैन की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
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<p><strong> रायपुर ।</strong>जैन धर्म के 20 वे तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथ भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक महोत्सव दिनाँक &#8211; 03 मई 2024 तिथि वैशाख कृष्ण दशमी, 2550 दिन ,शुक्रवार को राजधानी रायपुर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर मालवीय रोड में समाज के धर्मप्रेमी बंधुओ द्वारा उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के जिनालयों में श्रद्धा की झलक देखने को मिली। पूरा जिनालय परिसर 20 वे तीर्थंकर भगवान मुनिसुव्रत नाथ भगवान के जयकारों से गुंजायमान हो गया। भक्तों ने पूजा-अर्चना के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने बताया की आज प्रातःकाल सुबह 8.30 बजे मंदिर की भगवान पार्श्वनाथ जी की बेदी के समक्ष पांडुक्षिला में श्री पुष्पदंत भगवान को विराजमान करके रजत कलशों से प्रासुक जल से अभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जयकारों से गूंज उठा जिनालय</strong></p>
<p>विश्व में सुख-समृद्धि की कामना के साथ मंत्रोच्चारों के बीच शांतिधारा का उच्चारण कर जिनेन्द्र देव के चरणों में धारा प्रभावित की गई। साथ ही धर्म प्रेमी बंधुओ द्वारा आरती की गई । तत्पश्चात श्रावक-श्राविकाओं ने देव-शास्त्र-गुरू की पूजन के साथ अपनी निर्मल भक्ति समर्पित करते हुए मंदिर के 20 वे तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ भगवान की अष्टद्रव्यों से पूजा की गई। सभी ने हाथों में अर्घ्य, दीपक, श्रीफल लेकर भाव-भीनी भक्ति करते हुए प्रभु चरणों में अर्पण कर श्रावकों के मन मुदित हो उठे और जिनालय परिसर भगवान मुनिसुव्रतनाथ के जयकारों से गूंज उठा ।भक्तों ने जन्म-मरण के चक्र से निकलकर मोक्ष को प्राप्त करने की भावना प्रकट की और भगवान मुनिसुव्रतनाथ जी का गुणगान कर पुण्य का संचय किया। कार्यक्रम के दौरान श्रेयश जैन बालू उपाध्यक्ष ,महेंद्र कुमार जैन ,राकेश जैन, प्रवीण जैन, कुमुद जैन,प्रणीत जैन सहित समाज के गणमान्य महिला-पुरूष मौजूद थे।</p>
<p><strong> 150 वर्ष पुराने मंदिर का होगा पुनर्निर्माण</strong></p>
<p>श्री दिगंबर जैन मंदिर मालवीय रोड में लगभग 150 वर्ष पुराने मंदिर का पुनर्निर्माण एवं भूमि पूजन का कार्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में उनके छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दिसंबर 2023 को प्राप्त हुआ था। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने बताया कि मालवीय रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में जैसलमेर के पीले पत्थरों से 171 फुट ऊंचे शिखर का 3 मंजिला मंदिर, त्रिकाल चौबीसी सस्त्रकुट जिनालय बनाना तय हुआ है।साथ ही संत निवास ,सर्व सुविधा युक्त धर्मशाला, पार्किंग एवं सुन्दर गार्डन का निर्माण कार्य भी किया जायेगा। लघु तीर्थ बनाने की भावना आचार्य श्री के समक्ष ट्रस्ट कमेटी ने रखी थी। आचार्य श्री के मंगल आशीर्वाद से कई जगहों पर जैन तीर्थ स्थलों का पुनर्निर्माण एवं नए मंदिरों का निर्माण व पुराने मंदिरों का नवीनीकरण वर्तमान में किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में चंद्रगिरी तीर्थ का निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है। एवं तिल्दा में कुछ माह पूर्व आचार्यश्री के सानिध्य एवं मार्गदर्शन पर पीले पत्थरो से निर्मित मंदिर का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ है।</p>
<p><strong>अखंड ज्योति की गई स्थापना </strong></p>
<p>बड़े सौभाग्य की बात है की आचार्य श्री का विहार तिल्दा से सीधे बड़े मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में हुआ था। और आचार्य श्री की उत्कृष्ठ यम समाधि छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में हुई। आचार्य श्री अंतिम समय में नवीन जिनालय लघु तीर्थ के निर्माण का मंगल आशीर्वाद मिलना परम सौभाग्य की बात है। इसी संदर्भ में दिनाँक 25/01/2024 तिथि पौष कृष्ण पूर्णिमा, वीर निर्माण संवत 2250 गुरुवार को गुरु पुष्प नक्षत्र के पुण्य सुअवसर पर अखंड ज्योति स्थापना की गई है। परम पूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महा मुनिराज ने नवीन जिनालय लघु तीर्थ के लिए दिशा निर्देश देते हुए अखंड ज्योति प्रज्वलित करने हेतु कहा था। इस पर अमल करते हुए अखंड ज्योति की स्थापना मूल नायक 1008 श्री आदिनाथ भगवान की वेदी के समक्ष की गई है। यह अखंड ज्योत नवीन जिनालय लघु तीर्थ का कार्य जब तक प्रारंभ होकर पूर्ण नही होता तब तक प्रज्वलित रहेगी। अध्यक्ष संजय जैन नायक एवं उपाध्यक्ष श्रेयश जैन बालू ने समस्त समाज के धर्म प्रेमी बंधुओ एवं सदस्यों को कहा है कि संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज द्वारा बड़ा मंदिर के जिनालय का पुनःनिर्माण कर नवीन जिनालय बना कर राजधानी रायपुर में एक लघु तीर्थ स्थल बनाने का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। उनके समक्ष सभी सदस्यों ने जल्द से जल्द निर्माण शुरू करने का संकल्प लिया था। संकल्प को सभी एक साथ मिलकर शीघ्र अति शीघ्र पूरा करें ।</p>
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