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	<title>भगवान पारसनाथ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भगवान पारसनाथ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>भगवान पारसनाथ के दस भव का जीवन चरित्र उठाकर देखें : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दी देशना में संयम और धर्म की शिक्षा दी </title>
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		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 14:27:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। सागर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; सागर। कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दो तरह के लोग हुआ करते है एक वह जो जीवन की धारा में बहते है तथा शांति का अनुभव किया करते है,दूसरे वह लोग होते है जो जीवन की धारा से जूझते है,तथा अस्त व्यस्त होते हुये अपने जीवन नष्ट कर देते है उन्होंने कहा कि अपने अंदर उतर कर देखो कि जो कुछ भी चल रहा है उसमें आपआनंदित हो या मन ही मन आकुलता है। आपसे कोई पूछता है कि भैया कैसे हो? तो आपका जबाब होता है कि मजे में हूं! लेकिन जब वह आपके अंदर गहराई में उतरता है तो आपको ये कमी और वो कमी नजर आने लगती है कभी इसका अभाव तो कभी उसका अभाव खटकने लगता है तथा व्यथा कथा तथा परेशानियों की परतें खुलने लगती है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि&#8221;धर्मी के जीवन में सबसे ज्यादा दुःख, परेशानी पीड़ा,और कष्ट आते है लेकिन वह उन दुःखों को किसी से कहता नहीं उन्होंने कहा कि भगवान पारसनाथ के दस भव का जीवन चरित्र उठाकर देख लो, उन्होंने लगातार धर्म और धर्म ही किया कभी कोई अधर्म का कार्य किया ही नहीं, फिर भी उन्हें सबसे ज्यादा कष्ट सबसे ज्यादा उपसर्ग सहना पड़े,भगवान पारसनाथ ने कभी कोई सिकायत नहीं की वह उन कष्टों को तथा उन परेशानियों को सहते रहे लेकिन दुःखी नहीं हुये क्यों कि वह जानते थे कि धर्म में वह शक्ति है कि परेशानी मिटे या न मिटे कष्ट मिटे न मिटे लेकिन में कभी त्रस्त नही होऊंगा&#8221; मुनि श्री ने कहा कि &#8220;धर्म&#8221; करने से दुःख दूर नहीं होता,धर्म हमें निराकुलता तथा सहनशीलता प्रदान करता है मुनि श्री ने मेरी भावना की ये पक्तियाँ &#8220;होकर सुख में मग्न न फूंलू, दुँख में कभी न घवराऊ,इष्ट वियोग,अनिष्ट संयोग में शहनशीलता दिखलाऊँ&#8221; रोज रोज ये पक्तियाँ पढ़ते हो लेकिन कभी उसकी परीक्षा हो जाये तो फौरन अपना दुखडा़ रोने लग जाते हो।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि ये अनादि के पड़े संस्कार है, थोड़ा सा दुःख आया कि भिखारियों की तरह हाथ फैलाना नहीं छोड़ते। मुनि श्री ने कहा कि अपने आपको सदा बहार प्रसन्न रखना चाहते हो तो चार बातें ध्यान रखो विधि के विधान पर विश्वास रखो कैसा भी दुःख का प्रसंग बन जाए तो उसे कर्म का उदय मान कर छोड़ दो और ज्ञाता दृष्टा बन कर कर्म के उस खेल को देखो मुनि श्री ने कहा कि कर्म के खेल निराले है। पल में व्यक्ति को हंसाता है तो पल में व्यक्ति को रुला देता है,कभी राजा को रंक बना देता तो कभी रंक को राजा बना देता कर्म का खेल बड़ा विचित्र है।</p>
<p>कब किसकी लांटरी खुलवा दे तो कब किसकी लुटिया डुबा दे, मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति विधि के विधान पर विश्वास रखता है वह कभी दुःखी नहीं होता उन्होंने कहा कि महासति अंजना के जीवन चरित्र को देखो उन पर कितने कष्ट आये दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन, उन्होंने इसे कर्म जनित संयोग माना और उसे स्वीकार किया मुनि श्री ने कहा कि कर्म का उदय आये तो खुशी-खुशी सहन कर लोगे तो आने वाला समय कट जाएगा। उन्होंने एक सत्य घटना 2012 की घटना सुनाते हुए कहा कि एक युवक की सगाई हो गई तथा विवाह की तारीख तय हो गई संयोग से उसकी तबीयत बिगड़ी और जांच कराने पर किडनी में खराबी सामने आई। लड़का और उनके माता-पिता ने इसकी सूचना लड़की और उनके परिवार को स्वास्थ्य खराब की सूचना दी तो लड़की के परिवार सम्वंध तोड़ने को आतुर दिखे लेकिन, लड़की ने इसे कर्म जनित संयोग माना और उसने उस सगाई को तोड़ना उचित नहीं समझा और उसने णमोकार वृत को करने का निश्चय किया और इसकी सूचना लड़के को मिली तो उसने भी कह दिया कि जब तक में स्वस्थ नहीं हो जाता तब तक विवाह नहीं करूंगा दौनों ओर की विशुद्धि का प्रभाव पड़ा और वह लड़का ढेड़ साल में स्वस्थ होकर वैवाहिक जीवन के साथ दो बच्चों का पिता है, मुनि श्री ने कहा कि कर्म का उदय आये तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उन्होंने कहा कि आत्मश्रद्धानी बनोगे तो बड़ी से बड़ी विपत्तियां भी आपसे दूर भाग जाएंगी।</p>
<p>जीवन में सभी चीजें आपके अनुकूल नहीं हो सकती लेकिन हम अपने मन को चीजों के अनुकूल जरूर बना सकते है। मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आगामी 27 नवंबर से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव प्रारंभ होने जा रहा है सभी मुख्य पात्रों का चयन हो चुका है। मुनि श्री द्वारा प्रतिदिन प्रातः8:30 से प्रवचन एवं सांयकाल 6 बजे से शंकासमाधान कार्यक्रम संपन्न हो रहा है।</p>
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		<title>अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए : मुनि श्री प्रमाणसागर जी ने जीवन को बदलने की राह बताईं </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Sep 2025 16:36:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए। यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने जीवन को खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। <span style="color: #ff0000">भोपाल से पढ़िए, अविनाश जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भोपाल(अवधपुरी)</strong>। कमाई चवन्नी और खर्चा रुपैया और कर्जा लाख का बताओ उस आदमी का क्या होगा? प्रश्न करते हुए मुनि श्री से पूछा तो जबाव मिला- बंटाधार। उन्होंने कहा कि अब बताओ बंटाधार चाहते हो या बेड़ापार? महाराज हम सभी तो बेड़ापार ही चाहते है, लेकिन जो कसम खाए बैठे हैं कि हम अपने आपको हम बदलेंगे नहीं, ऐसे लोगों से क्या बात करें? जब तक रास्ता नहीं बदलोगे जीवन नहीं संभलेगा। अपने जीवन को संभालना चाहते हो रास्ता बदलिए।</p>
<p>यह उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने जीवन को खुशहाल बनाने का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहा कि ‘जीवन में बदलाव ही हमारे जीवन की शाश्वत उपलव्धि होगी’। मुनि श्री ने कहा कि जो लोग पुण्य के फल में मौजमस्ती और भोग विलास करते हैं। वह अपने पुण्य की पूंजी को गंवा रहे हैं। ऊपर से पाप का कर्जा बड़ा रहे हैं तो उनका बंटाधार तो होंना ही है। यदि बंटाधार से बचना चाहते हो ता ेअपनी पुण्य रूपी संपत्ति को बचाइए।</p>
<p><strong>पुण्य के फल से जीवन में अनुकूलताएं बनी रहती</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब खर्च अधिक होता है तो व्यक्ति अपनी आय बढ़ाने की कोशिश करता है। पुण्य के भोग में पुण्य खर्चा ज्यादा हो रहा है तो पुण्य को उपार्जित भी करो। मुनि श्री ने कहा कि कम से कम इतना तो करो कि जितना पुण्य संचित कर लाया था, उतना पुण्य बना रहे।। जिससे बेलेंस सीट ठीकठाक बनी रहे। उन्होंने कहा कि पुण्य के फल को चाहते हो तो पुण्य कमाने का जब भी मौका मिले पुण्य कमाते रहना। पुण्य के फल से आपके जीवन में सभी अनुकूलताएं बनी रहती हैं। मुनि श्री ने कहा कि पुण्य की क्रिआओं में लगे रहोगे तो पाप करने से बचोगे। मुनि श्री ने कहा कि अभी तक आप लोग करते क्या हो? सुबह उठने से लेकर रात्री में सोने तक सिर्फ षठकाय जीवों की हिंसा ही तो करते हो। प्रातः घर की साफ सफाई से लेकर स्नानादि नित्यक्रिया तक उसके पश्चात भोजन बनाने तथा वाहन आदि चलाने, व्यापार तथा नौकरी करने में षठकाय जीवों की हिंसा ही होती है और उस हिंसा से पाप ही हांसिल होता है। अब बताओ आपकी बेलेंस सीट किधर है।</p>
<p><strong>दुःख के समय में भगवान को याद करना अच्छी बात</strong></p>
<p>मुनि श्री ने पुण्य की कमाई के साधन बताते हुए कहा कि जिनमंदिर के दर्शन, णमोकार महामंत्र का जाप, व्रत, उपवास, पूजा पाठ गुरु के उपदेश सुनने सो थोड़ा सा पुण्य एकत्रित हो जाता है, लेकिन कितने लोग हैं, जो ब्रहम मुहूर्त में उठकर सुबह भगवान का नाम लेते हैं? हां जब थोड़ी बहुत प्रतिकूलता या मुसीबत आई तो आपके मुख से भगवान का नाम निकलने लगता है और आप लोग भजन भी गाते हो। दुःख के दिनों में वह मेरे काम आते हैं या भगवान पारसनाथ से गुहार लगाते हो मेटो मेटो जी संकट हमारा। मुनि श्री ने कहा कि दुःख के समय में भगवान को याद करना अच्छी बात है, करना भी चाहिए लेकिन, इस आशा से प्रभु की भक्ति करो कि हे प्रभु मेरे दुःख भले ही कम न हो लेकिन, इन दुःखों से में घबऱाऊ नहीं मेरे अंदर इतनी समता प्रदान कर देना। जिससे मैं उन कष्टों को सह सकूं। मुनि श्री ने कहा कि पुण्य करते समय पुण्य के फल की चाह मिट गई। उसी दिन से तुम्हारा जीवन पुण्यमयी हो जाएगा। भगवान पारसनाथ पर संकट आया तो उन्होंने उस उपसर्ग को समता पूर्वक सहा और वह पुण्यमयी हो गए।</p>
<p><strong>पुण्य की क्रिया उपादेय है</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि दुःख के दिनों में तुम भगवान को याद करते हो और सुख के दिनों में भूल जाते हो जो सुख के दिनों में भगवान को याद रखता है। वह कभी दुःखी नहीं होता। मुनि श्री ने कहा कि जब भी पुण्य का निमित्त आए तो सबसे पहले मैं और जब पाप का निमित्त मिले तो अपने आपको सबके पीछे कर लेना संत कहते है कि पुण्य का फल हेय है। पुण्य की क्रिया उपादेय है। पुण्य को चाहो अच्छी बात है लेकिन, पुण्य के फल को नहीं चाहना। पुण्य के फल में कभी बुद्धि उल्टी भी चल सकती है और वह उस पुण्य को भोगों में लगाकर दुर्गति का पात्र बन सकता है, इसलिये पुण्य के फल की चाह मत करो। पुण्य के फल को हेय मानोगे और पुण्य की क्रिया को उपादेय मानोगे तो आप सच्चे सम्यक् दृष्टि बनकर अपने जीवन पुण्यमयी बनालोगे।</p>
<p><strong>श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान 4 अक्टूबर से</strong></p>
<p>आगामी 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मुनिसंघ के सान्निध्य में श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान जो कि संस्कृत में मुनि श्री के मुखारविंद से होगा यह पुण्य कमाने का श्रेष्ठ अवसर है। जिसको भी इसमें भाग लेना है। वह अपने परिवार के साथ एक मंडल की बुकिंग करा सकता है। स्थान सीमित है, पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इस चातुर्मास में पुण्य कमाने का यह अंतिम अवसर सभी के सामने है। रविवार को मुनिसंघ के सानिध्य में दोपहर1.30 बजे से भोपाल जैन समाज द्वारा श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में वृहद क्षमावाणी पर्व का आयोजन है। कार्यक्रम उपरांत सभी की भोजन व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम में सभी जैन समाज बंधुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।</p>
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		<title>दिगंबर जैन पाठशाला में बच्चों ने किया भगवान का अभिषेक: बच्चों को दी पंच कल्याणकों की समग्र जानकारी  </title>
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		<pubDate>Sun, 03 Aug 2025 12:47:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत पूजा एवं भगवान महावीर जिन पूजन में हिस्सा लिया। डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230; डडूका। दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत पूजा एवं भगवान महावीर जिन पूजन में हिस्सा लिया। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> दिगंबर जैन पाठशाला में रविवारीय पूजा क्रम में इस रविवार प्रातः बच्चों ने भगवान पारसनाथ के जलाभिषेक के बाद रविव्रत पूजा एवं भगवान महावीर जिन पूजन में हिस्सा लिया। पाठशाला प्रेरक अजीत कोठिया ने बच्चों को पूजा के दौरान अष्ट द्रव्य, स्थापना, विधान, रविव्रत कथा, जयमाला, शांति पाठ, वृंदावन दास की जीवनी, शांति पाठ, महाअर्घ्य, तीर्थ क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, पंच तीर्थ, विसर्जन पाठ एवं भगवान के पंच कल्याणकों पर विस्तृत जानकारियों को साझा किया। पूजन में रियल जैन, सांची जैन, मानवी जैन, कल्प जैन, कथनी जैन, हर्षल जैन, भाग्य जैन , मिष्ठी जैन, माही जैन, सिद्धम जैन, भाग्य भराड़ा, संचित जैन तथा दीक्षिता जैन ने हिस्सा लिया।</p>
<p>इससे पूर्व पाठशाला की पूर्व छात्राओं गुणाक्षी जैन और जीनी जैन ने बच्चों को अपनी सफलता की कहानियां सुनाई और बच्चों खेलकूद और अध्ययन में बराबर रुचि रखने का आह्वान किया। सांगानेर परीक्षा बोर्ड संबंधी समस्त सूचनाएं बच्चों और अभिभावकों के लिए शेयर की गई। संचालन अजीत कोठिया ने किया। आभार मानवी जैन ने व्यक्त किया। आयोजन मंे 24 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।</p>
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		<title>भगवान पारसनाथ निर्वाण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया : 23 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ाया  </title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 14:32:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[23 वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान का निर्वाण दिवस गुरुवार को प्रातः विमलनाथ दिगंबर जैन मंदिर पुनर्वास कॉलानी में स्थानीय सकल दिगंबर जैन समाज ने मनाया। चातुर्मास आराधनारत आर्यिका विकाम्याश्री माताजी ससंघ का इस मौके पर सानिध्य मिला। सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230; सागवाड़ा। 23 वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान का निर्वाण दिवस गुरुवार को प्रातः विमलनाथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>23 वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान का निर्वाण दिवस गुरुवार को प्रातः विमलनाथ दिगंबर जैन मंदिर पुनर्वास कॉलानी में स्थानीय सकल दिगंबर जैन समाज ने मनाया। चातुर्मास आराधनारत आर्यिका विकाम्याश्री माताजी ससंघ का इस मौके पर सानिध्य मिला। <span style="color: #ff0000">सागवाड़ा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागवाड़ा।</strong> 23 वें तीर्थंकर पारसनाथ भगवान का निर्वाण दिवस गुरुवार को प्रातः विमलनाथ दिगंबर जैन मंदिर पुनर्वास कॉलानी में स्थानीय सकल दिगंबर जैन समाज ने मनाया। चातुर्मास आराधनारत आर्यिका विकाम्याश्री माताजी ससंघ का इस मौके पर सानिध्य मिला। प्रतिष्ठचार्य पंडित विनोद पगारिया विरल के तत्वावधान में श्रद्धा और उमंग के साथ उत्सव मनाया गया। गुरुवार को प्रातः मंदिर के समीप सभागार में नवानिर्मित भगवान पारसनाथ की मोक्ष स्थली तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की प्रतिकृति का अनावरण जय प्रकाश अमीचंद गोवाड़िया परिवार ने किया। इसके बाद इंद्र इंद्राणी समूह द्वारा पाण्डूक शिला में विराजित पारसनाथ भगवान की प्रतिमा का विविध द्रव्य पूरित कलशों से अभिषेक किया गया तथा आर्यिका विकाम्याश्रीमाताजी के मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिमा पर विश्व शांति कामनार्थ शांतिधारा सौधर्म इंद्र दर्पण जीतमल दोसी परिवार द्वारा की गई। साथ ही समाधिस्थ आचार्य विमल सागरजी महाराज की प्रतिमा पर शांतिधारा सुमतिलाल सरिया परिवार ने की। इसके बाद प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया द्वारा मुख्य विधान मंडप सहित कुल 44 कल्याण मंदिर पारसनाथ विधान मंडप पर मंडप प्रतिष्ठा, दिक बंधन, दिग्पाल स्थापना दीप स्थापना तथा पंच मंगल कलश स्थापना विधि कराई गई।</p>
<p>इस अवसर पर कल्याण मंदिर विधान मंडप पर आचार्य कुमुदचंद्र सूरि रचित कल्याण मंदिर स्रोत के 44 श्लोकों का उच्चारण करते हुए प्रत्येक विधान मंडप पर इंद्र इन्द्राणी समूह द्वारा अष्ट द्रव्य युक्त अर्घ्य समर्पित किए गए। पारसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक अवसर पर निर्वाण का प्रतीक 23 किलो का निर्वाण लाडू मंच पर नवनिर्मित सम्मेद शिखर सिद्ध क्षेत्र की प्रतिकृति पर स्थित सुर्वण भद्र टोंक पर निर्वाण कांड पाठ उच्चारण के साथ रुशाली यमन नीरज संघवी सागवाड़ा परिवार ने भक्ति के साथ चढ़ाया। साथ ही भगवान पारसनाथ के जीवन चरित्र पर आर्यिका विकाम्याश्री माताजी का प्रवचन हुआ। शांतिपाठ आरती विसर्जन विधि के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।</p>
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		<title>नैनागिरि तीर्थ में मुख्य द्वार का हुआ भव्य उद्घाटन : विद्वत परिषद की संगोष्ठी में ब्र. जिनेश मलैया मनोनीत </title>
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		<pubDate>Thu, 31 Jul 2025 04:48:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पारसनाथ निर्वाण पर्व पूर्व नैनागिरि तीर्थ में भव्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन एवं विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जिनेश मलैया को महामंत्री पद पर मनोनीत किया गया। पढ़िए राजेश जैन रही की विस्तृत खबर…   बकस्वाहा / सागर। देश के प्रसिद्ध जैन तीर्थ नैनागिरि में भगवान पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव से पूर्व [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पारसनाथ निर्वाण पर्व पूर्व नैनागिरि तीर्थ में भव्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन एवं विद्वत संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान जिनेश मलैया को महामंत्री पद पर मनोनीत किया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजेश जैन रही की विस्तृत खबर…</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>  बकस्वाहा /</strong> सागर। देश के प्रसिद्ध जैन तीर्थ नैनागिरि में भगवान पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव से पूर्व भव्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन किया गया एवं विद्वत परिषद की कार्यकारिणी बैठक तथा विद्वानों की संगोष्ठी संपन्न हुई। उद्घाटन समारोह ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष सुरेश जैन (IAS) की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति विमला जैन (भोपाल) तथा विशिष्ट अतिथि पद्म जैन (आरटीओ, सागर) एवं पुण्यार्जक सीता देवी विमल चंद जैन के साथ, यह उद्घाटन समारोह भव्य वर्षा के बीच मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ।</p>
<p><strong>मलैया को महामंत्री पद पर सर्वसम्मति से मनोनीत </strong></p>
<p>अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद की बैठक में ब्र. जिनेश मलैया (इंदौर) को महामंत्री पद पर सर्वसम्मति से मनोनीत किया गया। इसके बाद आयोजित विद्वत संगोष्ठी में सिद्धक्षेत्र नैनागिरि का वैशिष्ट्य और भगवान पारसनाथ विषय पर अनेक पंडितों ने अपने आलेख प्रस्तुत किए, जिनमें पं. उदयचंद सागर, पं. नरेंद्र (टीकमगढ़), डॉ. सनत (जयपुर), पं. दयाचंद (सतना), पं. जयकुमार (दुर्ग), पं. दिनेश (भिलाई) समेत अन्य कई प्रमुख विद्वान शामिल हुए।</p>
<p><strong>विद्वानों को किया सम्मानित</strong></p>
<p>कार्यक्रम का संचालन पं. उदयचंद्र शास्त्री ने किया, और अध्यक्षीय उद्बोधन सुरेश जैन (IAS) द्वारा दिया गया। इस अवसर पर सभी विद्वानों को श्रीफल, शास्त्र, वस्त्र, भगवान पारसनाथ का चित्र एवं माला भेंट कर सम्मानित किया गया, जिसमें ट्रस्ट मंत्री राजेश रागी, प्रबंध मंत्री देवेंद्र लुहारी, प्रचार मंत्री सुरेश सिंघई विशेष रूप से सक्रिय रहे।</p>
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		<title>गोकुलनगर में 23 वां सामूहिक अभिषेक पूजन कार्यक्रम: 12 जनवरी को 12 वां श्री भक्तामर पाठ होगा </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Jan 2025 15:26:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैसवाल जैन समाज इंदौर का सामूहिक अभिषेक पूजन का कार्यक्रम धार्मिक उल्लास के साथ जैन मंदिर गोकुल नगर में हुआ। इसमें समाजजन मौजूद रहे। कर्यक्रम के बाद समाजजन की मीटिंग हुई। इंदौर से पढ़िए मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; इंदौर। जैसवाल जैन समाज इंदौर का सामूहिक अभिषेक पूजन का कार्यक्रम धार्मिक उल्लास के साथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैसवाल जैन समाज इंदौर का सामूहिक अभिषेक पूजन का कार्यक्रम धार्मिक उल्लास के साथ जैन मंदिर गोकुल नगर में हुआ। इसमें समाजजन मौजूद रहे। कर्यक्रम के बाद समाजजन की मीटिंग हुई। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैसवाल जैन समाज इंदौर का सामूहिक अभिषेक पूजन का कार्यक्रम धार्मिक उल्लास के साथ जैन मंदिर गोकुल नगर में हुआ। सकल दिगंबर जैसवाल जैन (उप.) समाज इंदौर के तत्वावधान में 23वां सामूहिक अभिषेक एवं शांतिधारा नववर्ष के प्रथम रविवार के अवसर पर नवनिर्मित जिनालय श्री 1008 पारसनाथ जिनालय दिगंबर जैन मंदिर गोकुल नगर, कनाडिया रोड पर किया गया।</p>
<p><strong>अभिषेक के बाद स्वल्पाहार कराया</strong></p>
<p>जैसवाल जैन समाज के सदस्य एवं 1008 पारसनाथ जिनालय के ट्रस्टी विनय जैन के सानिध्य में सभी ने जिनेन्द्र भगवान का भक्ति भाव से अभिषेक एवं शांति धारा कर पुण्य अर्जित किया। इसके बाद विनय जैन, डॉली जैन के निवास पर स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई।</p>
<p><strong>साधारण सदस्यता के लिए अभियान शुरू होगा</strong></p>
<p>इसके बाद सामूहिक विचार-विमर्श करके यह निर्णय भी किया गया कि मार्च में होली पर एक तीर्थ यात्रा की भी योजना बनाई जाए। जिसे शीघ्र ही सभी समाज जन के बीच में रखकर सभी की सहमति से अंतिम रूप दिया जा सके और मार्च माह से अखिल भारतीय श्री दिगंबर जैन जैस उप सेवा न्यास की साधारण सदस्यता के लिए अभियान शुरू होगा।</p>
<p><strong>परिवारों की जानकारी एकत्र होगी</strong></p>
<p>सभी समाज जन से साधारण सदस्यता ग्रहण करने के लिए निवेदन किया गया। जिसकी सभी ने सराहना करते हुए अनुमोदना की और इंदौर के आसपास शहरों से समाज के परिवारों की जानकारी एकत्रित कर उन्हें भी समाज से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।</p>
<p><strong>भक्तामर पाठ 12 जनवरी को</strong></p>
<p>12 जनवरी को 12 वां श्री भक्तामर पाठ मीनाक्षी जैन पीयूष जी जैन (मूल निवासी ग्वालियर) इंदौर के निज निवास पर किया जाएगा।</p>
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		<title>दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन मनाया उत्तम त्याग धर्म : सौभाग्यशाली भक्तों ने की प्रभु पारसनाथ की शांतिधारा </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Sep 2024 08:48:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संयम और आत्म शुद्धि के पर्व दशलक्षण महापर्व देशभर के सभी जिनालियों में बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आगरा के पश्चिमपुरी स्थित श्री 1008 चिंतामणि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महापर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म रुप में मनाया गया। महापर्व के आठवें दिन सर्वप्रथम भक्तों [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संयम और आत्म शुद्धि के पर्व दशलक्षण महापर्व देशभर के सभी जिनालियों में बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आगरा के पश्चिमपुरी स्थित श्री 1008 चिंतामणि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महापर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म रुप में मनाया गया। महापर्व के आठवें दिन सर्वप्रथम भक्तों ने स्वर्ण कलशों से मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा एवं श्रीजी की सभा प्रतिमाओं का अभिषेक एवं वृहत शांतिधारा की। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> संयम और आत्म शुद्धि के पर्व दशलक्षण महापर्व देशभर के सभी जिनालियों में बड़े ही हर्ष उल्लास के साथ मनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में आगरा के पश्चिमपुरी स्थित श्री 1008 चिंतामणि पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में महापर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग धर्म रुप में मनाया गया। महापर्व के आठवें दिन सर्वप्रथम भक्तों ने स्वर्ण कलशों से मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा एवं श्रीजी की सभा प्रतिमाओं का अभिषेक एवं वृहत शांतिधारा की।</p>
<p>प्रभु के अभिषेक के बाद पंडित रितेश जैन शास्त्री के कुशल निर्देशन में भक्तों ने अष्ट द्रव्यों के साथ संगीतमय उत्तम त्याग धर्म का पूजन किया। पर्व पर दस दिनों तक चलने वाले पूजा अर्चना के लिए भक्तों की मंदिंरों में भरी भीड़ देखी जाती है। वहीं श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर जी में पधारे राज्यसभा सांसद नवीन जैन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रेनू जैन जी का श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन ट्रस्ट एवं समिति के सदस्यों ने मुकुट और माला पहनाकर स्वागत किया। इस मौके पर राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने मंदिर जी में पूजा अर्चना कर प्रभु की आराधना की।</p>
<p>उत्तम त्याग धर्म के अवसर पर भगवान पार्श्वनाथ भगवान का प्रथम व द्वितीय अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त करने वाले अनुभव जैन एवं अजय जैन का मंदिर समिति ने स्वागत किया। सांय 7:00 बजे भक्तों ने प्रभु की मंगल आरती की, साथ ही रात्रि 8:00 बजे से पश्चिमपुरी महिला मंडलों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर राजेश जैन अध्यक्ष,मंत्री राहुल जैन,संजय जैन,अनुराग जैन, पंकज जैन,अमित जैन,अमर जैन, विपिन जैन,विशाल जैन,रवि जैन, पंकज जैन जीएसटी, शैलेन्द्र जैन, चक्रेश जैन आदि उपस्थित रहे।</p>
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		<title>पश्चिमपुरी जैन मंदिर में मनाया उत्तम तप धर्म : भक्तों ने किया प्रभु पारसनाथ का अभिषेक </title>
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		<pubDate>Sun, 15 Sep 2024 09:28:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण पर्व पर सातवें दिन 1008 चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में बड़े ही धूमधाम के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा अर्चना की गई। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में भगवान पार्श्वनाथ के साथ वेदी पर विराजमान सभी भगवान [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण पर्व पर सातवें दिन 1008 चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में बड़े ही धूमधाम के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा अर्चना की गई। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में भगवान पार्श्वनाथ के साथ वेदी पर विराजमान सभी भगवान की प्रतिमाओं के अभिषेक एवं शांतिधारा की मांगलिक क्रियाओं को दमोह मध्य प्रदेश से आये पंडित रितेश शास्त्री ने विधि विधान के साथ कराया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए चक्रेश जैन की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>आगरा।</strong> जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व दशलक्षण पर्व पर सातवें दिन 1008 चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में बड़े ही धूमधाम के साथ उत्तम तप धर्म की पूजा अर्चना की गई। दशलक्षण पर्व के सातवें दिन चिंतामणि श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पश्चिमपुरी में भगवान पार्श्वनाथ के साथ वेदी पर विराजमान सभी भगवान की प्रतिमाओं के अभिषेक एवं शांतिधारा की मांगलिक क्रियाओं को दमोह मध्य प्रदेश से आये पंडित रितेश शास्त्री ने विधि विधान के साथ कराया। मूलनायक श्री पार्श्वनाथ भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य अक्षय कुमार जैन और द्वितीय अभिषेक करने का सौभाग्य राजीव जैन को प्राप्त हुआ।</p>
<p>वहीं भगवान श्री आदिनाथ के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य गौरव जैन और भगवान श्री महावीर के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य रवींद्र जैन को प्राप्त हुआ। पाण्डुक शिला पर विराजमान श्री शांतिनाथ और भगवान श्री पार्श्वनाथ के मस्तक पर अभिषेक करने का सौभाग्य मणि कुमार जैन, मृगांक जैन, संजीव जैन, शैलेंद्र जैन प्राप्त हुआ। चार कलश करने का सौभाग्य क्रमशः अभिषेक, अनुज जैन, सुजय जैन, राहुल जैन ने प्राप्त किया। शाम को मंदिर जी में संगीतमय मंगल आरती का आयोजन हुआ जिसमें सभी भक्तों ने हाथों में दीपकों लेकर भगवान की मंगल आरती उतरी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-66340" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017.jpg" alt="" width="899" height="1599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017.jpg 899w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017-169x300.jpg 169w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017-576x1024.jpg 576w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017-768x1366.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2024/09/IMG-20240915-WA0017-864x1536.jpg 864w" sizes="(max-width: 899px) 100vw, 899px" />आरती के उपरांत दमोह मध्य प्रदेश से आये पंडित रितेश शास्त्री ने उत्तम धर्म पर शास्त्रों का वाचन कराया। शास्त्री जी ने बताया कि शास्त्रों में वर्णित बारह प्रकार के तप से जो मानव अपने तन मन जीवन को परमार्जित या शुद्ध करता है, उसके समस्त जन्मों के कर्म नष्ट हो जाते हैं। वाचन के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम किये गए जिसमें पार्श्व उपासक मंडल द्वारा मुक्ति सोपान नाटक का मंचन किया गया। इस कार्यक्रम में राजेश जैन, मंत्री राहुल जैन, कोषाध्यक्ष संजय जैन, अनुराग जैन, पंकज जैन, अमित जैन, अमर जैन, विपिन जैन, विशाल जैन, रवि जैन, मीडिया प्रभारी चक्रेश जैन, पंकज जैन जीएसटी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।</p>
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		<title>जैन तीर्थ नैनागिरि में पारस निर्वाण महोत्सव पर मस्तकाभिषेक : निर्वाण लाडू के साथ होगा वृक्षारोपण और शपथ समारोह  </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Aug 2024 17:38:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[तहसील क्षेत्र अंतर्गत सुविख्यात पारसनाथ भगवान की समवशरण व दिव्य देशना से पवित्र जैन तीर्थ श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का 2801वां निर्वाण महोत्सव पर महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू समर्पण, शपथ समारोह, वृक्षारोपण सहित विविध कार्यक्रमों का आयोजन मोक्ष सप्तमी 11 अगस्त 2024 रविवार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>तहसील क्षेत्र अंतर्गत सुविख्यात पारसनाथ भगवान की समवशरण व दिव्य देशना से पवित्र जैन तीर्थ श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का 2801वां निर्वाण महोत्सव पर महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू समर्पण, शपथ समारोह, वृक्षारोपण सहित विविध कार्यक्रमों का आयोजन मोक्ष सप्तमी 11 अगस्त 2024 रविवार को किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>बकस्वाहा।</strong> तहसील क्षेत्र अंतर्गत सुविख्यात पारसनाथ भगवान की समवशरण व दिव्य देशना से पवित्र जैन तीर्थ श्री 1008 दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ का 2801वां निर्वाण महोत्सव पर महामस्तकाभिषेक एवं निर्वाण लाडू समर्पण, शपथ समारोह, वृक्षारोपण सहित विविध कार्यक्रमों का आयोजन मोक्ष सप्तमी 11 अगस्त 2024 रविवार को किया जा रहा है। जैन तीर्थ नैनागिरि की ट्रस्ट कमेटी के मंत्री राजेश जैन &#8220;रागी&#8221; ने बताया कि प्रातःकाल 7 से 10 बजे तक भगवान पारसनाथ का महामस्तकाभिषेक, शांतिधारा, 10.30 बजे निर्वाणकांड पाठ व निर्वाण लाडू समर्पण जिसमें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के 23 विशेष निर्वाण लाडू तथा 2801 सामान्य लाडू एवं दीपक समर्पित किये जायेंगे।</p>
<p>विशेष व सामान्य लाडू समर्पित करने बालों को स्मृति स्वरूप आकर्षक अष्टधातु का दीपक प्रदान किया जायेगा। इस मौके पर आयोजित लाडू सजाओं प्रतिभागियों को कमेटी द्वारा सम्मानित किया जाएगा। भोजन उपरांत दोपहर 1 बजे वृहद वृक्षारोपण समारोह और मध्यान्ह 2.30 बजे न्यास/ट्रस्ट द्वारा मनोनीत प्रबंध समिति के पदाधिकारी व सदस्यों का शपथ समारोह सम्पन्न होगा।</p>
<p><strong>न्यायायिक, प्रशासनिक, विद्वान व जनप्रतिनिधियों को किया आमंत्रित </strong></p>
<p>इस पावन अवसर पर जयंत मलैया विधायक दमोह व पूर्व वित्त मंत्री मप्र शासन, सांसद राहुल सिंह, शैलेंद्र जैन विधायक सागर, रामसिया भारती विधायक बड़ामलहरा, वीरेन्द्र सिंह लंबरदार विधायक बण्डा, अनिल जैन विधायक निवाड़ी, न्यायमूर्ति राकेश मिश्रा, नमिता मिश्रा वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली, न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल, जिला एवं सत्र न्यायाधीशों में सुबोध जैन, ममता, सुनील जैन खण्डवा, सुनील ममता जैन मंडलेश्वर, सुनील पारुल जैन ग्वालियर, अनिल भरतेश सुहाने रायसेन, डा. कुलदीप जैन नीमच, अरविंद जैन छतरपुर, अतिरिक्त न्यायाधीश राकेश जैन इंदौर, न्यायाधीश अभिषेक दीक्षित बकस्वाहा, मृदुल जैन बीना, ऋषभ सिंघई अध्यक्ष जिला उपभोक्ता आयोग दमोह, पवन जैन डिप्टी कमिश्नर सागर, महेंद्र जैन शिवपुरी डिप्टी कमिश्नर, संदीप जीआर कलेक्टर छतरपुर, टी के विद्यार्थी डीआईजी जबलपुर, श्री आगम जैन एसपी छतरपुर, संयुक्त कलेक्टर श्रीमती आयुषी जैन, डिप्टी कलेक्टर सुश्री विनीता जैन, सुश्री समीक्षा जैन,आयुष जैन,एटीओ संदीप जैन, एसडीओपी शशांक जैन सहित प्रशासनिक अधिकारियों एवं आनंद जैन लक्ष्मी एंपोरियम जबलपुर , निर्मल चंद्र जैन लोहा वाले जबलपुर ,सेठ गुलाबचंद जैन सुभाष ट्रांसपोर्ट सागर, अशोक जैन मुख्य महाप्रबंधक मध्य प्रदेश जल निगम भोपाल, प्रकाश जैन सानोधा वाले सागर सहित अनेक विद्वानों, समाजसेवी व जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। जैन तीर्थ नैनागिरि की कमेटी ने सभी से आह्वान किया है कि इस मौके पर सपरिवार पधारकर पुण्यार्जन करें ।</p>
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