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	<title>भगवान अरनाथ जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भगवान अरनाथ जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>18वें तीर्थंकर भगवान अरनाथ जी का जन्म कल्याणक 3 दिसंबर को: तिथि अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल चतुर्दशी को है  </title>
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		<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 14:17:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरनाथ जी का जन्म कल्याणक 3 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका जन्म कल्याणक मार्गशीर्ष चतुर्दशी को है। यह इस बार बुधवार को आ रही है। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230; इंदौर। जैन धर्म के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरनाथ जी का जन्म कल्याणक 3 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका जन्म कल्याणक मार्गशीर्ष चतुर्दशी को है। यह इस बार बुधवार को आ रही है। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्र्ंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की यह संकलित और संपादित प्रस्तुति&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के 18वें तीर्थंकर भगवान अरनाथ जी का जन्म कल्याणक 3 दिसंबर को है। तिथि के अनुसार उनका जन्म कल्याणक मार्गशीर्ष चतुर्दशी को है। यह इस बार बुधवार को आ रही है। भगवान अरनाथ जी के जन्म कल्याणक पर दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष पूजन और आराधना का दौर रहेगा। जैन धर्म के अनुसार अरनाथ (अरहनाथ) वर्तमान समय के आधे चक्र (अवसर्पिणी) के 18वें जैन तीर्थंकर थे। वे 8वें चक्रवर्ती और 13 वें कामदेव भी थे। जैन मान्यताओं के अनुसार उनका जन्म 1 करोड़ 65 लाख 85 हजार ईसा पूर्व हुआ था। वे एक सिद्ध अर्थात एक मुक्त आत्मा बन गए। जिसने अपने सभी कर्मों को नष्ट कर दिया है। अरनाथ का जन्म इक्ष्वाकु वंश में हस्तिनापुर में राजा सुदर्शन और रानी देवी (मित्रा) के घर हुआ था। उनकी जन्म तिथि भारतीय कैलेंडर के मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को आती है। जैन धर्मग्रंथों में अरनाथ की ऊंचाई 30 धनुष बताई गई है। अन्य सभी चक्रवर्ती राजाओं की तरह उन्होंने भी सभी भूमियों पर विजय प्राप्त की और पहाड़ों की तलहटी में अपना नाम लिखने चले गए। वहां पहले से ही अन्य चक्रवर्ती राजाओं के नाम देखकर उन्हें अपनी महत्वाकांक्षाएं बौनी लगने लगीं। फिर उन्होंने अपना सिंहासन त्याग दिया और तपस्वी बन गए। 84 हजार वर्ष से अधिक की आयु में उन्होंने शिखरजी पर्वत पर मोक्ष प्राप्त किया। किंवदंती है कि अरनाथ का जन्म उनके पूर्ववर्ती कुंथुनाथ से 1/4 पल्य कम यानी 6 हजार करोड़ वर्ष बाद हुआ था। यह भी कहा जाता है कि उनके उत्तराधिकारी भगवान मल्लिनाथ का जन्म उनसे 1 हजार करोड़ कम यानी 65 लाख 84 हजार वर्ष बाद हुआ था।</p>
<p><strong>स्वयंभू स्तोत्र में 20 श्लोक समर्पित </strong></p>
<p>आचार्य सामंतभद्र द्वारा रचित स्वयंभूस्तोत्र चौबीस तीर्थंकरों की आराधना है। स्वयंभूस्तोत्र के बीस श्लोक तीर्थंकर अरनाथ को समर्पित हैं। ऐसा ही एक श्लोक है-हे निर्विकार भगवान अरनाथ! आपका यह भौतिक रूप, जो आभूषणों, वस्त्रों और शस्त्रों के सभी चिह्नों से रहित है, तथा शुद्ध ज्ञान, इन्द्रिय संयम और परोपकार का प्रतीक है, इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आपने सभी दोषों को परास्त कर दिया है।</p>
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		<title>भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाण महोत्सव मनाया : नवागढ़ में भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाने उमड़े श्रद्धालु </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 22 Oct 2025 04:56:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जयकुमार निशांत ने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारें। नवागढ़ प्रागैतिहासिकअतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाण महोत्सव मंगलवार को मनाया। ललितपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230; ललितपुर। नवागढ़ प्रागैतिहासिकअतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाण महोत्सव मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जयकुमार निशांत ने कहा कि भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारें। नवागढ़ प्रागैतिहासिकअतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाण महोत्सव मंगलवार को मनाया। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, राजीव सिंघई की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर।</strong> नवागढ़ प्रागैतिहासिकअतिशय क्षेत्र में भगवान महावीर स्वामी का 2552वां निर्वाण महोत्सव मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ क्षेत्र के निर्देशक जय निशांत भैया जी के सानिध्य में क्षेत्र कमेटी एवं स्थानीय समाज जनों के सहयोग से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान अरनाथ जी का अभिषेक, शांतिधारा एवं विधान पूजन अत्यंत भावपूर्ण वातावरण में संगीत के साथ संपन्न हुआ। तत्पश्चात सभी श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को निर्वाण लाडू चढ़ाकर पूजा-अर्चना की गई।</p>
<p>नवागढ़ तीर्थक्षेत्र कमेटी के प्रचारमंत्री डॉ.सुनील संचय ने बताया कि भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव पर मुख्य लाडू का सौभाग्य पुष्प परिवार टीकमगढ़, आनंदीलाल जैन, राकेश कुमार जैन, प्रशांत कुमार बच्चू, कपूरचंद जैन ढूंढा, तेजाराम पठया, अशोक कुमार कपासिया मड़ावरा को प्राप्त हुआ। इस मौके पर क्षेत्र निर्देशक जय निशांत ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जी का जीवन मानवता, करुणा और आत्मसंयम का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि यदि हम भगवान महावीर जी के सिद्धांतों अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह को अपने जीवन में अपनाएं तो समाज में शांति, सद्भाव और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि भगवान महावीर जी के आदर्शों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारें ताकि जीवन सार्थक बन सके। क्षेत्र महामंत्री वीरचंद्र जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का जीवन केवल एक धार्मिक प्रेरणा नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन की दिशा है। उन्होंने कहा कि आज के युग में जब मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में उलझ गया है, तब महावीर स्वामी के त्याग, तप और संयम का मार्ग ही सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति करा सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे धर्म, अहिंसा और सत्य के मार्ग पर दृढ़ता से चलें और समाज में सदाचार का प्रसार करें।</p>
<p>कार्यक्रम के अंत में क्षेत्र कोषाध्यक्ष इंद्रकुमार जैम ने सभी आगंतुकों, समाजजनों एवं सहयोगियों का हृदयपूर्वक आभार व्यक्त किया।</p>
<p><strong>यह समाजजन उपस्थित रहे </strong></p>
<p>इस अवसर पर अध्यक्ष सनत कुमार जैम एडवोकेट ललितपुर, महामंत्री वीरचंद्र जैन , कोषाध्यक्ष इंद्रकुमार जैम, मंत्री अशोककुमार जैन,उपाध्यक्ष कपूरचंद्र ढूंढा, राकेशकुमार जैन ककरवाहा, आनंदीलाल जैन लुहर्रा, सुरेंद्र जैन आदि के साथ पंडित मनीष जैन संजू टीकमगढ़, पंडित अजीत शास्त्री बड़ागांव, सोमचंद शास्त्री मैनवार, पंडित कैलाश चंद्र जैन, अंकित जैन सोजना, विकास जैन नेकोरा, पंडित रवि जैन शास्त्री आदि उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>निर्वाण कल्याणक से ही दीपावली पर्व की शुरुआत</strong></p>
<p>जैन दर्शन के अध्येता डॉ सुनील संचय ने जानकारी देते हुए बताया कि जैन परम्परा में तीर्थंकर महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक से ही दीपावली पर्व की शुरुआत मानी जाती है। इसी दिन से वीर निर्वाण संवत् की शुरुआत हुई थी जो कि सभी संवतों में सबसे प्राचीन संवत् है। जैन परंपरा में नए वर्ष की शुरुआत इसी दिन से होती है। 21 अक्टूबर को भगवान महावीर का 2552 वां निर्वाण महोत्सव अगाध श्रद्धा से मनाया गया।</p>
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