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	<title>भगवान अजितनाथ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>भगवान अजितनाथ &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>महावीर जिनालय में हुआ भव्य आयोजन, सैकड़ों श्रद्धालु रहे उपस्थित : भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा-भक्ति से सम्पन्न </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 15:54:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नगर के चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय में भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। पढ़िए मनोज जैन नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; मुरैना/अम्बाह। नगर के चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नगर के चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय में भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/अम्बाह।</strong> नगर के चुंगी नाका स्थित श्री महावीर जिनालय में भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। महोत्सव के दौरान भगवान की प्रतिमा का रजत एवं स्वर्ण कलशों से महामस्तकाभिषेक किया गया। साथ ही, विश्व शांति की कामना से शांतिधारा का वाचन किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।</p>
<p><strong>शांतिनाथ विधान एवं प्रवचन</strong></p>
<p>शांतिनाथ विधान पंडित अंकित जैन (सिहोनिया) के सान्निध्य में संपन्न हुआ। अपने प्रवचन में उन्होंने मोक्ष का महत्व बताते हुए कहा कि जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मा की शुद्ध अवस्था को प्राप्त करना ही मोक्ष है। उन्होंने अहिंसा, सत्य और संयम को मोक्ष प्राप्ति का सच्चा मार्ग बताया।</p>
<p><strong>निर्वाण महोत्सव एवं लाडू अर्पण</strong></p>
<p>विधान के उपरांत निर्वाण महोत्सव मनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से निर्वाण लाडू अर्पित किए। इस दौरान भक्ति और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। कार्यक्रम का समापन सौरभ एंड पार्टी द्वारा संगीतमय पूजन के साथ हुआ, जिसमें श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।</p>
<p><strong>सैकड़ों श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति</strong></p>
<p>इस आयोजन में मुरारी लाल जैन (वरेह बाले), अजय जैन (पत्रकार), संतोष जैन, श्री कृष्णा जैन, अजय जैन (बबलू), विकास जैन (पांडे), राहुल जैन, पप्पू जैन (परिक्षतपुरा बाले), सौरभ जैन (वरेह बाले), पिंकी जैन (पुजारी), कपिल जैन (केपी), बोबी जैन, आशू जैन (बरेह वाले) सहित सैकड़ों की संख्या में साधर्मी बंधु एवं महिलाएं उपस्थित रहीं।</p>
<p><strong>आयोजन में रहा विशेष योगदान</strong></p>
<p>कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रवीण कुमार जैन (सेवानिवृत्त शिक्षक) एवं अश्वनी कुमार जैन का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए स्वल्पाहार की व्यवस्था भी की गई।</p>
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		<title>जैन तीर्थ नैनागिरि में 23 मार्च से होंगे विविध कार्यक्रम : भगवान अजितनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा </title>
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		<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 14:11:24 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ नैनागिरि में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में 23 एवं 24 मार्च को आचार्य चरण प्रतिष्ठा, वरदत्त विश्राम भवन का लोकार्पण, विशुद्ध सागर ज्ञान केंद्र का शुभारंभ सहित अनेक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; बकस्वाहा। तहसील अंतर्गत स्थित देश के सुविख्यात जैन [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ नैनागिरि में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में 23 एवं 24 मार्च को आचार्य चरण प्रतिष्ठा, वरदत्त विश्राम भवन का लोकार्पण, विशुद्ध सागर ज्ञान केंद्र का शुभारंभ सहित अनेक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। <span style="color: #ff0000">रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> तहसील अंतर्गत स्थित देश के सुविख्यात जैन तीर्थ नैनागिरि में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सान्निध्य में 23 एवं 24 मार्च को आचार्य चरण प्रतिष्ठा, वरदत्त विश्राम भवन का लोकार्पण, विशुद्ध सागर ज्ञान केंद्र का शुभारंभ सहित अनेक कार्यक्रम किए जा रहे हैं। श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री राजेश रागी एवं प्रबंध समिति के प्रचार मंत्री सुरेश सिंघई ने बताया कि 23 मार्च को प्रातः 7 बजे से तीन मूर्ति मंदिर पारस देशना स्थल एवं पारसनाथ चौबीसी मंदिर में महा मस्तकाभिषेक तथा भगवान अजितनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-102310" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1-300x107.jpg" alt="" width="300" height="107" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1-300x107.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1-1024x365.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1-768x274.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1-990x353.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260312-WA0023-1.jpg 1034w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>पहले दिन के यह हैं कार्यक्रम</strong></p>
<p>अपराह्न पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ससंघ का नैनागिरि में मंगल प्रवेश होगा। शाम 4 बजे जल मंदिर के मानस्तंभ का महामस्तकाभिषेक एवं शाम 7 बजे से विद्वत सम्मेलन होगा। नैनागिरि सहस्त्राब्दि समारोह (1050 &#8211; 2050) ,षटखण्डागम का 1940 वर्षीय समारोह, रचना तिथि श्रुत पंचमी सन 0087, षटखण्डागम धवला टीका का 1210 वर्षीय समारोह रचना तिथि 8 अक्टूबर 816 दिन बुधवार, बाबा दौलतराम वर्णी द्वारा विचरित छंदोदय का 124 वर्षीय समारोह रचना तिथि अश्विन चतुर्थी बिक्रम संवत 1959 तदनुसार 6 सितम्बर 1902 शनिवार, पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी द्वारा विरचित वस्तुत्व महाकाव्य समारोह, नैनागिरि पुरातत्व संग्रहालय का संस्थापन कार्यक्रम कराया जाएगा।</p>
<p><strong>दूसरे दिन यह कार्यक्रम होंगे</strong></p>
<p>24 मार्च को प्रात 7 बजे पारसनाथ चौबीसी जिनालय में महा मस्तकाभिषेक तथा भगवान संभवनाथ का मोक्ष कल्याणक निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। आचार्य श्री विद्यासागर जी ,गढाचार्य श्री विरागसागर जी तथा स्वेत पिच्छिकाचार्य विद्यानंद जी के चरण प्रतिष्ठा समारोह एवं पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मंगल उद्बोधन होगा। अपराह्न वरदत्त विश्राम भवन एवं 10 केवीए सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण, जैन विद्यालय परिसर में निर्माणाधीन नैनागिरि पुरातत्व संग्रहालय के समीप विशुद्ध सागर ज्ञान केंद्र का शुभारंभ समारोह होगा। जिसमें जैन आगम ग्रंथों तथा आधुनिक आगम स्वरूप वस्तुत्व महाकाव्य के वृहद संस्करण का संस्थापन, डा. लक्ष्मी चन्द्र जैन जबलपुर द्वारा विरचित जैन दर्शन : एक वैज्ञानिक अनुशीलन का लोकार्पण तथा 4 बजे से सिद्धचक्र महामण्डल विधान का ध्वजारोहण किया जाएगा।</p>
<p><strong> इनको अतिथि आमंत्रित किया</strong></p>
<p>इस समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति उमेशचंद्र माहेश्वरी , न्यायमूर्ति एनके जैन जयपुर, न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल, न्यायमूर्ति जरदकुमार जैन इंदौर के साथ ही देश के ख्यातिलब्ध विद्वान प्रतिष्ठाचार्य , संरक्षक के रूप में दिलीप अहिरवार राज्य मंत्री मध्य प्रदेश शासन , राहुलसिंह लोधी सांसद , जयंत मलैया पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक दमोह, शैलेन्द्र जैन वरिष्ठ विधायक सागर, एड शैलेंद्र जैन अलीगढ़ अध्यक्ष उत्तरांचल जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी सहित अनेक जनप्रतिनिधि समाजसेवियों को आमंत्रित किया गया है। जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष सुरेश जैन आईएएस, प्रबंध समिति अध्यक्ष डॉ. पूर्णचंद्र, मंत्री देवेंद्र लुहारी सहित ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति के पदाधिकारी और सदस्यों ने सभी से पधार कर लाभ प्राप्त करने आग्रह किया है।</p>
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		<title>आदिनाथ मिलन महिला मंडल की एक दिवसीय धार्मिक यात्रा: बनेडियाजी में भगवान अजितनाथ विधान में लिया हिस्सा  </title>
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		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 14:18:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा एक दिवसीय तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का आरंभ प्रातः मिलन हाईट्स स्थित आदिनाथ मंदिर से हुआ। बनेडियाजी पहुंचने पर पंडितजी के सान्निध्य में अजितनाथ विधान अत्यंत विधि एवं भावपूर्ण रूप से संपन्न कराया गया। इंदौर से पढ़िए, रुचि चौविश्या की खबर&#8230; इंदौर। आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा एक दिवसीय तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का आरंभ प्रातः मिलन हाईट्स स्थित आदिनाथ मंदिर से हुआ। बनेडियाजी पहुंचने पर पंडितजी के सान्निध्य में अजितनाथ विधान अत्यंत विधि एवं भावपूर्ण रूप से संपन्न कराया गया। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, रुचि चौविश्या की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। आदिनाथ मिलन महिला मंडल द्वारा एक दिवसीय तीर्थ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का आरंभ प्रातः मिलन हाईट्स स्थित आदिनाथ मंदिर से हुआ। बनेडियाजी पहुंचने पर पंडितजी के सान्निध्य में अजितनाथ विधान अत्यंत विधि एवं भावपूर्ण रूप से संपन्न कराया गया। इसके पश्चात भोजन का कार्यक्रम हुआ। सभी सदस्य गुलावट पहुंची, जहां तालाब भ्रमण किया गया तथा नौका विहार का आनंद लिया गया। वहां से आगे कल्पतरु एवं समर्थ सिटी स्थित जैन मंदिरों में भक्ति की गई। क्रमशः ढाई द्वीप में दर्शन एवं भक्ति की गई तथा इसके उपरांत सुमति धाम और मलयगिरि मंदिर में आराधना की गई। इस तीर्थ यात्रा में निहारिका जैन, रीता जैन, मिल्की जैन, संध्या जैन, रागिनी जैन, रजनी जैन, सुनीता पड़लिया, विद्या जैन, कुमुद जैन, अनीता जैन, रेणु जैन, किरण दोषी, अंजू जैन, कविता जैन, भारती लुहाडिया, राजकुमारी जैन, रजनी समैया, शकुन जैन, सोनू जैन, अल्पना जैन एवं रुचि चोविश्या जैन ने भाग लिया। यह यात्रा धार्मिक आस्था, अनुशासन एवं सामूहिक एकता का प्रेरक उदाहरण बनी।</p>
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		<title>बड़े मंदिर में भगवान अजितनाथ का महामस्तकाभिषेक: नववर्ष पर भक्तिभाव से की भगवान की आराधना  </title>
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		<pubDate>Fri, 02 Jan 2026 12:47:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नववर्ष के पावन अवसर पर नगर के बड़े जैन मंदिर में मूलनायक भगवान अजितनाथ का महामस्तकाभिषेक अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। प्रतिवर्ष की भांति यह कार्यक्रम मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से किया गया। महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230; महरौनी। नववर्ष के पावन अवसर पर नगर के बड़े जैन मंदिर में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>नववर्ष के पावन अवसर पर नगर के बड़े जैन मंदिर में मूलनायक भगवान अजितनाथ का महामस्तकाभिषेक अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। प्रतिवर्ष की भांति यह कार्यक्रम मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से किया गया। <span style="color: #ff0000">महरौनी से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>महरौनी।</strong> नववर्ष के पावन अवसर पर नगर के बड़े जैन मंदिर में मूलनायक भगवान अजितनाथ का महामस्तकाभिषेक अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। प्रतिवर्ष की भांति यह कार्यक्रम मुनिश्री सुधासागर जी महाराज की प्रेरणा से किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया। प्रातःकालीन वेला में भगवान जिनेंद्र का विधिवत अभिषेक एवं पूजन किया गया। प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य विजय सिंघई बाबा परिवार को प्राप्त हुआ। वहीं प्रथम शांतिधारा अजित खजांची सबाई सिंघई परिवार द्वारा तथा द्वितीय शांतिधारा सुनील बड़कुल परिवार ने कराई। श्रद्धालु श्रावकांे ने भगवान का अभिषेक कर विश्व शांति एवं सर्वमंगल की कामना की। मुनिश्री सुधासागर जी महाराज द्वारा सृजित श्रीयशोदय तीर्थ में नववर्ष की बेला पर दो दिवसीय श्री भक्तामर पाठ किया गया। यह आयोजन भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक-पूजन के बाद हुआ, जिसका समापन 1 जनवरी को सुबह हुआ। समापन अवसर पर भगवान जिनेंद्र का अभिषेक-पूजन एवं हवन कराया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल जैन समाज का सराहनीय सहयोग रहा। आयोजन के दौरान संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना रहा और नगर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला।</p>
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		<title>भगवान अजितनाथ जी का ज्ञान कल्याणक 30 दिसंबर को: पौष शुक्ल एकादशी को हुआ था आत्म साक्षात्कार  </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 06:31:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) इस बार 30 दिसंबर को आ रहा है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष आराधना और अन्य धार्मिक विधियों से भक्ति की जाती है। पौष शुक्ल एकादशी को भगवान अजितनाथ जी ने 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) प्राप्त किया। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) इस बार 30 दिसंबर को आ रहा है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष आराधना और अन्य धार्मिक विधियों से भक्ति की जाती है। पौष शुक्ल एकादशी को भगवान अजितनाथ जी ने 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) प्राप्त किया। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला में आज पढ़िए, उपसंपादक प्रीतम लखवाल की संकलित और संपादित रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर</strong>। जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक (केवलज्ञान) इस बार 30 दिसंबर को आ रहा है। इस दिन दिगंबर जैन मंदिरों में विशेष आराधना और अन्य धार्मिक विधियों से भक्ति की जाती है। पौष शुक्ल एकादशी को भगवान अजितनाथ जी ने 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) प्राप्त किया। यह घटना पौष शुक्ल एकादशी को रोहिणी नक्षत्र में सहेतुक वन में सप्तपर्णी वृक्ष के नीचे घटित हुई थी और भगवान आत्म साक्षात्कार को पहुंचे। इस अवसर पर देवताओं ने एक दिव्य पवित्र समवशरण का निर्माण किया और अजितनाथ ने अपना पहला उपदेश दिया। उनके शिष्यों में 90 गणधर (जिनमें सिंहसेन प्रमुख थे) और लाखों मुनि तथा आर्यिका उपस्थित थे। ज्ञान कल्याणक का महत्व इस बात में है कि इस दिन से अजितनाथ ने जगत को अहिंसा, सत्य और वैराग्य का मार्ग दिखाया और जैन धर्म के पुनर्स्थापना की शुरुआत हुई। यदि आप इस कल्याणक को मनाना चाहते हैं तो पौष शुक्ल एकादशी को शुद्ध शाकाहारी भोजन, पवित्र पाठ और अजितनाथ के उपदेशों का स्मरण करना चाहिए। भगवान अजितनाथ का जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकु वंश में हुआ था। उनके पिता राजा जितशत्रु राजा और मां रानी विजया थीं। उनके जन्म से पहले रानी विजया देवी ने चौदह शुभ सपने देखे थे। शकुन शास्त्रियों से सलाह ली गई और उन्होंने बताया कि विजया देवी एक तीर्थंकर को जन्म देंगी। रानी ने माघ महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को एक बेटे को जन्म दिया और राजा ने नए जन्मे बच्चे का नाम अजित रखा। जब राजा जितशत्रु बूढ़े हो गए तो उन्होंने अजित को बुलाया और उसे गद्दी संभालने के लिए कहा, लेकिन अजितनाथ बचपन से ही स्वभाव से अलग-थलग रहने वाले थे, इसलिए उन्होंने राजा द्वारा दी गई गद्दी को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया।</p>
<p>वे अपनी युवावस्था में ही तपस्वी बन गए और ध्यान और तपस्या के लिए दूर-दराज और घने जंगलों में चले गए। उनके व्यक्तित्व और उनकी कठोर साधनाओं की तीव्रता ने चारों ओर शांति का असर डाला। जानवरों के साम्राज्य में शेर और गाय, भेड़िया और हिरण, सांप और नेवले जैसे प्राकृतिक दुश्मन शांति से उनके आस-पास आकर बैठते थे। बारह साल तक गहरी साधना और दूसरी आध्यात्मिक साधनाओं के बाद पौष महीने के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तारीख को उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। देवताओं ने दिव्य मंडप बनाया और भगवान अजितनाथ ने अपने शानदार और आकर्षक प्रवचन दिए। हज़ारों लोगों ने त्याग का रास्ता अपनाया।</p>
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		<title>द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याण: तिथि के अनुसार इस बार 2 अप्रैल को मनाया जाएगा  </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Apr 2025 07:10:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं और भगवान अजितनाथ जी का मोक्ष कल्याणक चैत्र शुक्ल पंचमी को है। यह तिथि इस बार 2 अप्रैल को आ रही है। इस दिन नगर सहित देश के विभिन्न जिनालयों में शांति धारा और अभिषेक के कार्यक्रम होंगे। निर्वाण लाडू चढ़ाए जाएंगे। श्रीफल जैन न्यूज की ओर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं और भगवान अजितनाथ जी का मोक्ष कल्याणक चैत्र शुक्ल पंचमी को है। यह तिथि इस बार 2 अप्रैल को आ रही है। इस दिन नगर सहित देश के विभिन्न जिनालयों में शांति धारा और अभिषेक के कार्यक्रम होंगे। निर्वाण लाडू चढ़ाए जाएंगे। <span style="color: #ff0000">श्रीफल जैन न्यूज की ओर से यह स्पेशल रिपोर्ट उपसंपादक प्रीतम लखवाल के संयोजन से।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं। इनक मोक्ष कल्याणक चैत्र शुक्ल पंचमी के दिन हुआ था। उन्होंने बाह्य और अभ्यंतर के सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। जब उनके अंतिम क्षण निकट आ रहे थे तब भगवान अजितनाथ सम्मेद शिखर पर चले गए। एक हजार अन्य तपस्वियों के साथ उन्होंने अपना अंतिम ध्यान किया। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था। प्रातःकाल के समय प्रतिमा योग धारण करने वाले भगवान अजितनाथ ने मुक्ति पद प्राप्त किया। भगवान अजितनाथ का जन्म माघ शुक्ल 10 को अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय राज परिवार में हुआ था।</p>
<p>अयोध्या नगरी के सेहतुक वन में भगवान का तप कल्याणक हुआ। भगवान के मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा सहित महामस्तकाभिषेक के धार्मिक आयोजन पूरी भक्ति भावना से किए जाते हैं। जैन धर्म ग्रंथों में वर्णित संदर्भों के अनुसार भगवान अजितनाथ ने जैन धर्म को आगे बढ़ाते हुए अपने संदेशों और उपदेशों के माध्यम से देशनाएं दी। ज्ञात स्रोतों के अनुसार भगवान अजितनाथ के पिता जितशत्रु थे और माता विजया देवी थीं। इनका चिन्ह हाथी है।</p>
<p>भगवान अजितनाथ की आयु 72 लाख पूर्व की वर्णित है। जेठ महीने की अमावस पर जब रोहिणी नक्षत्र का कला मात्र से अवशिष्ट चंद्रमा के साथ संयोग था। तब ब्रह्म मुहूर्त के पहले महारानी विजयसेना ने चौदह स्वप्न देखे थे। महारानी विजया ने देखा कि हमारे मुख कमल में एक मदोन्मत्त हाथी प्रवेश कर रहा है।</p>
<p>सुबह महारानी ने जित शत्रु महाराज से स्वप्नों का फल पूछा उन्होंने उनका फल बतलाया कि तुम्हारे स्फटिक समान निर्मल गर्भ में विजय विमान से तीर्थंकर पुत्र अवतीर्ण हुआ है। वह पुत्र, निर्मल तथा पूर्वभव से साथ आने वाले मति-श्रुत-अवधिज्ञान रूपी तीन नेत्रों से देदीप्यमान है। भगवान् आदिनाथ के मोक्ष चले जाने के बाद जब 50 लाख करोड़ सागर वर्ष बीत चुके तब द्वितीय तीर्थंकर का जन्म हुआ था।</p>
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		<title>द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ का 6 को तप और 7 फरवरी को जन्म कल्याणकः तप और जन्म कल्याणक पर जिनालयों में होंगे विविध धार्मिक आयोजन </title>
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		<pubDate>Thu, 06 Feb 2025 14:22:30 +0000</pubDate>
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<p><strong>भगवान अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं और भगवान अजितनाथ जी का तप कल्याणक माघ शुक्ल नवमीं को है। यह तिथि इस बार 6 फरवरी गुरुवार को आ रही है। इसके ठीक एक दिन बाद भगवान का जन्म कल्याणक भी आ रहा है। यानि 7 फरवरी शुक्रवार को माघ शुक्ल 10 को भगवान का जन्म कल्याणक मनाया जाएगा। बता दें कि विगत 10 जनवरी को ही भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक मनाया गया है। <span style="color: #ff0000">इस बार भी श्रीफल जैन न्यूज की ओर से यह स्पेशल रिपोर्ट उपसंपादक प्रीतम लखवाल के संयोजन से। </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरों की दिव्य श्रृंखला के द्वितीय सौपान के रूप में पूजित, वंदित और अभिनंदित हैं। दूसरे तीर्थंकर के रूप में भगवान अजितनाथ का जन्म माघ शुक्ल 10 को अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय राज परिवार में हुआ था। भगवान का दीक्षा कल्याणक यानि तप कल्याणक माघ शुक्ल 9 को हुआ। अयोध्या नगरी के सेहतुक वन में भगवान का तप कल्याणक हुआ। भगवान के मंदिरों में अभिषेक और शांतिधारा सहित महामस्तकाभिषेक के धार्मिक आयोजन पूरी भक्ति भावना से किए जाते हैं। देश के विभिन्न प्रांतों में विद्यमान दिगंबर जैन मंदिरों में भगवान के तप और जन्म कल्याणक पर धार्मिक विधान होंगे। जैन धर्म ग्रंथों में वर्णित संदर्भों के अनुसार भगवान अजितनाथ ने जैन धर्म को आगे बढ़ाते हुए अपने संदेशों और उपदेशों के माध्यम से देशनाएं दी। ज्ञात स्रोतों के अनुसार भगवान अजितनाथ के पिता जितशत्रु थे और माता विजया देवी थीं। इनका चिन्ह हाथी है। भगवान अजितनाथ की आयु 72 लाख पूर्व की वर्णित है।</p>
<p><strong>देवों ने किया जन्माभिषेक कल्याणक</strong></p>
<p>जेठ महीने की अमावस पर जब रोहिणी नक्षत्र का कला मात्र से अवशिष्ट चंद्रमा के साथ संयोग था तब ब्रह्म मुहूर्त के पहले महारानी विजयसेना ने चौदह स्वप्न देखे थे। महा रानी विजया ने देखा कि हमारे मुख कमल में एक मदोन्मत्त हाथी प्रवेश कर रहा है। सुबह महारानी ने जित शत्रु महाराज से स्वप्नों का फल पूछा उन्होंने उनका फल बतलाया कि तुम्हारे स्फटिक समान निर्मल गर्भ में विजय विमान से तीर्थंकर पुत्र अवतीर्ण हुआ है। वह पुत्र, निर्मल तथा पूर्वभव से साथ आने वाले मति-श्रुत-अवधिज्ञान रूपी तीन नेत्रों से देदीप्यमान है। भगवान् आदिनाथ के मोक्ष चले जाने के बाद जब 50 लाख करोड़ सागर वर्ष बीत चुके तब द्वितीय तीर्थंकर का जन्म हुआ था। जन्म होते ही सुंदर शरीर धारक तीर्थंकर भगवान् का देवों ने मैरू पर्वत पर जन्माभिषेक कल्याणक किया और इनका नाम अजितनाथ नाम रखा।</p>
<p><strong>एक हजार तपस्वियों के साथ अंतिम ध्यान किया</strong></p>
<p>उन्होंने बाह्य और अभ्यंतर के सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। जब उनके अंतिम क्षण निकट आ रहे थे। भगवान अजितनाथ सम्मेद शिखर पर चले गए। एक हजार अन्य तपस्वियों के साथ उन्होंने अपना अंतिम ध्यान आरंभ किया। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था, प्रातःकाल के समय प्रतिमा योग धारण करने वाले भगवान अजितनाथ ने मुक्ति पद प्राप्त किया।</p>
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		<title>पौष शुक्ल पक्ष एकादशी पर द्वितीय तीर्थंकर भगवान अजितनाथ को हुआ केवल ज्ञानः अयोध्या में जन्मे भगवान अजितनाथ </title>
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		<pubDate>Thu, 09 Jan 2025 12:11:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से दूसरे तीर्थंकर हैं और इनके भव्य मंदिर देश के विभिन्न प्रांतों, शहरों और कस्बों में हैं। 10 जनवरी को पौष शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन भगवान अजितनाथ को केवल ज्ञान हुआ था। इस दिन यानि 10 जनवरी शुक्रवार को भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक मनाया जाएगा। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>भगवान अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से दूसरे तीर्थंकर हैं और इनके भव्य मंदिर देश के विभिन्न प्रांतों, शहरों और कस्बों में हैं। 10 जनवरी को पौष शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन भगवान अजितनाथ को केवल ज्ञान हुआ था। इस दिन यानि 10 जनवरी शुक्रवार को भगवान अजितनाथ का ज्ञान कल्याणक मनाया जाएगा। मंदिरजी में विविध धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। भगवान अजितनाथ के बारे में जैन धर्मशास्त्रों में जो वर्णित है उसके आधार पर उनके जीवन से जुड़ी कहानी को यहां श्रीफल जैन न्यूज संजोकर लाया है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए प्रीतम लखवाल उप संपादक श्रीफल जैन न्यूज की यह स्पेशल रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> भगवान अजितनाथ जैन धर्म के 24 तीर्थकरों में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर हैं। भगवान अजितनाथ का जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रिय राज परिवार में माघ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में हुआ था। इनके पिता जितशत्रु थे और माता विजया थीं। इनका चिह्न हाथी है। जैन धर्मग्रंथों में दी गई जानकारी के आधार पर भगवान अजितनाथ की कुल आयु 72 लाख पूर्व की थी। जेठ महीने की अमावस पर जब रोहिणी नक्षत्र का कला मात्र से अवशिष्ट चंद्रमा के साथ संयोग था तब ब्रह्ममुहूर्त के पहले महारानी विजयसेना ने चौदह स्वप्न देखे। उस समय उनके नेत्र बाकी बची हुई अल्प निंद्रा से कलुषित हो रहे थे। महारानी विजया ने चौदह स्वप्न देखने के बाद देखा कि हमारे मुख कमल में एक मदोन्मत्त हाथी प्रवेश कर रहा है। जब प्रातःकाल हुआ तो महारानी ने जितशत्रु महाराज से स्वप्नों का फल पूछा और देशावधि ज्ञानरूपी नेत्र को धारण करने वाले महाराज जितशत्रु ने उनका फल बतलाया कि तुम्हारे स्फटिक के समान निर्मल गर्भ में विजय विमान से तीर्थंकर पुत्र अवतीर्ण हुआ है। वह पुत्र, निर्मल तथा पूर्वभव से साथ आने वाले मति-श्रुत-अवधिज्ञान रूपी तीन नेत्रों से देदीप्यमान है। भगवान् आदिनाथ के मोक्ष चले जाने के बाद जब 50 लाख करोड़ सागर वर्ष बीत चुके तब द्वितीय तीर्थंकर का जन्म हुआ था। इनकी आयु भी इसी अंतराल में सम्मिलित थी।</p>
<p><strong>देवों ने मैरू पर्वत पर जन्माभिषेक कल्याणक किया </strong></p>
<p>जन्म होते ही सुंदर शरीर धारक तीर्थंकर भगवान् का देवों ने मैरू पर्वत पर जन्माभिषेक कल्याणक किया और इनका नाम अजितनाथ नाम रखा। 4 सौ पचास धनुष शरीर की ऊंचाई थी। अजितनाथ स्वामी के शरीर का रंग स्वर्ण के समान पीला था। उन्होंने बाह्य और आभ्यंतर के समस्त शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली थी। जब उनकी आयु का चतुर्थांश बीत चुका, तब उन्हें राज्य प्राप्त हुआ। उस समय उन्होंने अपने तेज से सूर्य का तेज भी जीत लिया था। एक लाख पूर्व कम अपनी आयु के तीन भाग तथा एक पूर्वांग तक उन्होंने राज्य किया।</p>
<p><strong>भगवान अजितनाथ की 12 सभाओं की संख्&#x200d;या है</strong></p>
<p>उनके सिंहसेन आदि नब्&#x200d;बे गणधर थे। 3 हजार 750 पूर्वधारी, 21 हजार 600 शिक्षक, 9 हजार 400 अवधि ज्ञानी, 20 हजार केवल ज्ञानी, 20 हजार 400 सौ विकिया-ऋद्धिवाले, 12 हजार 450 मनरूपर्ययज्ञानी और 12 हजार 400 अनुत्&#x200d;तरवादी थे। इस प्रकार सब मिलाकर एक लाख तपस्&#x200d;वी थे। प्रकुब्&#x200d;जा आदि 3 लाख 20 हजार आर्यिकाएं थीं, 3 लाख श्राव&#x200d;क थे। 5 लाख श्राविकाएं थीं और असंख्&#x200d;यात देव-देवियां थीं। इस तरह उनकी 12 सभाओं की संख्&#x200d;या थी।</p>
<p><strong>चैत्र शुक्ल पंचमी को पाया मुक्ति पद</strong></p>
<p>चैत्र शुक्ल पंचमी के दिन जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में था, प्रातःकाल के समय प्रतिमा योग धारण करनेवाले भगवान् अजितनाथ ने मुक्तिपद प्राप्&#x200d;त किया।</p>
<p><strong>बचपन से ही विरक्त थे भगवान अजितनाथ</strong></p>
<p>द्वितीय तीर्थंकर अजितनाथ के तीर्थ में सगर नाम का दूसरा चक्रवर्ती हुआ। जब राजा जितशत्रु वृद्ध हो गए और अपने जीवन का अंतिम भाग आध्यात्मिक कार्यों में लगाना चाहते थे। उन्होंने अपने छोटे भाई को बुलाया और उसे राजगद्दी संभालने के लिए कहा। सुमित्रा को राज्य की कोई इच्छा नहीं थी। वह भी तपस्वी बनना चाहता था। दोनों राजकुमारों को बुलाया गया और उन्हें राज्य देने की पेशकश की गई। अजित कुमार बचपन से ही स्वभाव से विरक्त व्यक्ति थे। इसलिए उन्होंने भी मना कर दिया। राजकुमार सगर राजगद्दी पर बैठे। राजा सगर ने इस काल में छह महाद्वीपों पर विजय प्राप्त की और चक्रवर्ती बन गए।</p>
<p><strong>राजा मेघवाहन को सगर ने सौंपा राज्य</strong></p>
<p>राजा मेघ वाहन और राक्षस द्वीप के शासक विद्याधर भीम, सम्राट सगर के समकालीन थे। एक बार वे भगवान अजितनाथ के प्रवचन में गए। वहां विद्याधर भीम आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित हुए। वह इतने विरक्त हो गए कि उन्होंने अपना राज्य लंका और पाताल लंका के प्रसिद्ध शहरों सहित राजा मेघवाहन को दे दिया। उन्होंने अपना सारा ज्ञान और चमत्कारी शक्तियां भी मेघवाहन को दीं। उन्होंने 9 बड़े और चमकीले मोतियों की एक दिव्य माला भी दी। मेघवाहन राक्षस कुल का पहला राजा था। जिसमें प्रसिद्ध राजा रावण का जन्म हुआ था।</p>
<p><strong>सगर के 60 हजार पुत्रों की मृत्यु</strong></p>
<p>सम्राट सगर की हज़ारों रानियां और 60 हज़ार पुत्र थे। उनमें सबसे बड़े थे जन्हु कुमार। एक बार सभी राजकुमार सैर पर गए। जब वे अस्तपद पहाड़ियों की तलहटी में पहंुचे, तो उन्होंने बड़ी-बड़ी खाइयां और नहरें खोदीं। अपनी युवावस्था में इन नहरों को गंगा के पानी से भर दिया। इस बाढ़ ने निचले देवताओं के घरों और गांवों को जलमग्न कर दिया। जिन्हें नाग कुमार कहा जाता है। इन देवताओं के राजा ज्वालाप्रभ आए और उन्होंने उन्हें रोकने की व्यर्थ कोशिश की। उपद्रवी राजकुमार राजसी शक्ति के नशे में चूर थे। अंत में ज्वालाप्रभ ने अपना आपा खो दिया और सभी 60 हज़ार राजकुमारों को राख में बदल दिया। अपने सभी पुत्रों की अचानक मृत्यु से सम्राट सगर को बहुत दुःख हुआ। उन्होंने साम्राज्य की बागडोर अपने सबसे बड़े पौत्र भगीरथ को सौंप दी और भगवान अजितनाथ से दीक्षा ले ली।</p>
<p><strong>शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को निर्वाण </strong></p>
<p>जब उनके अंतिम क्षण निकट आ रहे थे। भगवान अजितनाथ सम्मेद शिखर पर चले गए। एक हजार अन्य तपस्वियों के साथ उन्होंने अपना अंतिम ध्यान आरंभ किया। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। दूसरे जैन तीर्थंकर अजितनाथ का जन्म अयोध्या में हुआ था। यजुर्वेद में अजितनाथ का नाम तो है, लेकिन इसका अर्थ स्पष्ट नहीं है। जैन परंपराओं के अनुसार उनके छोटे भाई सगर थे जो दूसरे चक्रवर्ती बने। उन्हें हिंदू धर्म और जैन धर्म दोनों की परंपराओं से जाना जाता है। जैसा कि उनके संबंधित हिंदू धर्मग्रंथों पुराणों में पाया जाता है।</p>
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		<title>11 जून को अयोध्या में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र का अधिवेशन  जुटेंगे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं तीर्थक्षेत्रों के पदाधिकारी </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Jun 2024 07:07:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अयोध्या में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखण्ड का अधिवेशन 11 जून को विविध आयोजनों के साथ होगा।इसमें उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी एवं तीर्थक्षेत्रों के पदाधिकारी शामिल होंगे। आयोजन बड़े मूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज अयोध्या में होगा।नवीन अध्यक्ष का निर्वाचन भी होगा। पढि़ए डॉ सुनील जैन संचय की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अयोध्या में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखण्ड का अधिवेशन 11 जून को विविध आयोजनों के साथ होगा।इसमें उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी एवं तीर्थक्षेत्रों के पदाधिकारी शामिल होंगे। आयोजन बड़े मूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज अयोध्या में होगा।नवीन अध्यक्ष का निर्वाचन भी होगा। <span style="color: #ff0000">पढि़ए डॉ सुनील जैन संचय की रिपोर्ट ……</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अयोध्या।</strong> उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड अंचल के समस्त पदाधिकारीगण की एक महत्वपूर्ण मीटिंग अंचल के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन सिकंदराबाद की अध्यक्षता में भगवान आदिनाथ, भगवान अजितनाथ, भगवान अभिनन्दननाथ, भगवान सुमतिनाथ, भगवान अनन्तनाथ एवं भगवान भरत एवं बाहुबली की शाश्वत जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या में 11 जून 2024 को होने जा रही है। हमारा सौभाग्य है कि गणिनी प्रमुख आर्यिकारत्न ज्ञानमती माता जी ससंघ क्षेत्र पर विराजमान हैं ,उनका आर्शीवाद भी सबको प्राप्त होगा एवं स्वस्ति श्री स्वामी रविन्द्रकीर्ति जी की &#8220;हीरक अवतरण दिवस समारोह&#8221; में भी सहभागिता का सौभाग्य भी प्राप्त होगा।उत्तर प्रदेश उत्तराखण्ड तीर्थक्षेत्र कमेटी के मंत्री डॉ सुनील जैन संचय ललितपुर ने जानकारी देते हुए बताया कि आयोजन बड़े मूर्ति दिगम्बर जैन मंदिर, रायगंज अयोध्या में 11 जून को होगा। गणिनी प्रमुख आर्यिकारत्न ज्ञानमती माता जी ससंघ का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा।अंचल के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन के अनुसार 11 जून का कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा।</p>
<p>शांतिधारा एवं अभिषेक प्रातः 06:00 बजे। प्रातः 07:15 से 09:30 बजे स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी का हीरक अवतरण दिवस समारोह। 9.30 बजे जलपान, 10 बजे से मीटिंग, 1 बजे से भोजन,आयोजन में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड अंचल के पदाधिकारियों एवं अंचल के तीर्थक्षेत्रों के अध्यक्ष, मंत्रियों से अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की गई है। आमंत्रण पत्र भी भेजे गए हैं।</p>
<p><strong>महामंत्री मनोज जैन मेरठ ने बताया कि मिटिंग का एजेंडा निम्न प्रकार है</strong></p>
<p>1. मंगलाचरण</p>
<p>2. अंचल के तीर्थक्षेत्रों का सर्वेक्षण</p>
<p>3. अंचल के प्रत्येक क्षेत्र की डॉक्यूमेन्ट्री फिल्म बनाने के सम्बन्ध में</p>
<p>4. अंचल एवं केन्द्र की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के सम्बन्ध में</p>
<p>5. अंचल से तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अधिक से अधिक सदस्य बनाने के सम्बन्ध में</p>
<p>6. अंचल के अन्तर्गत महिला एवं युवा प्रकोष्ठ की स्थापना करना</p>
<p>7. प्रत्येक जैन मन्दिर में तीर्थ क्षेत्र कमेटी की गोलक स्थापित कराना</p>
<p>8. अंचल के नवीन अध्यक्ष का निर्वाचन</p>
<p>9. अन्य अध्यक्ष की अनुमति से</p>
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		<title>वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर हैं :  भगवान अजितनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस मनाकर निर्वाण लाडू चढ़ाया </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Apr 2024 09:42:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री 1008 भगवान अजितनाथ स्वामी निर्वाण मोक्ष कल्याणक शनिवार सुबह 7 बजे महावीर जिनालय चुंगी नाका अम्बाह में मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह सात बजे से भगवान अजितनाथ स्वामी जी के पंडित विमल शास्त्री द्वारा मंत्र उच्चारण से अभिषेक, शांतिधारा,विशेष पूजन के पश्चात निर्माण लाडू चढ़ाया गया। पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री 1008 भगवान अजितनाथ स्वामी निर्वाण मोक्ष कल्याणक शनिवार सुबह 7 बजे महावीर जिनालय चुंगी नाका अम्बाह में मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह सात बजे से भगवान अजितनाथ स्वामी जी के पंडित विमल शास्त्री द्वारा मंत्र उच्चारण से अभिषेक, शांतिधारा,विशेष पूजन के पश्चात निर्माण लाडू चढ़ाया गया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए मनोज जैन नायक की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>अम्बाह/मुरैना।</strong> श्री 1008 भगवान अजितनाथ स्वामी निर्वाण मोक्ष कल्याणक शनिवार सुबह 7 बजे महावीर जिनालय चुंगी नाका अम्बाह में मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह सात बजे से भगवान अजितनाथ स्वामी जी के पंडित विमल शास्त्री द्वारा मंत्र उच्चारण से अभिषेक, शांतिधारा,विशेष पूजन के पश्चात निर्माण लाडू चढ़ाया गया। प्रवीण कुमार अश्वनी कुमार जैन (पुणे) की तरफ से मंदिर में उपस्थित समाजजन की स्वल्पआहर की व्यवस्था की गई। सुबह से ही भक्तों का मंदिर में दर्शन और लाडू चढ़ाने के लिए तांता लगा रहा। महावीर जैन, विमल शास्त्री, राकेश बर्फ वाले, पिंकी जैन, पवन जैन, मुरारी लाल जैन, अजय पत्रकार, शिवदयाल जैन, अंतराम जैन, डॉ लाला जैन, श्रीकृष्ण जैन, पप्पू जैन, मुन्ना लाल जैन, आशु जैन, कपिल जैन, सौरभ जैन, जिनवाणी मंडल और सैकड़ो समाजजन के वरिष्ठ लोग शामिल हुए।</p>
<p>विमल शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान अजितनाथ जैनधर्म के 24 तीर्थकरो में से वर्तमान अवसर्पिणी काल के द्वितीय तीर्थंकर हैं। अजितनाथ का जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय राजपरिवार में माघ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी में हुआ था। इनके पिता का नाम जितशत्रु और माता का नाम विजया था। अजितनाथ का चिह्न हाथी था। भगवान अजिताथ की कुल आयु 72 लाख पूर्व की थी। भगवान अजितनाथ जी का मोक्ष कल्याणक चैत्र सुदी पंचमी के दिन सम्मेद शिखरजी में हुआ था। प्रभु खडगासन की मुद्रा में ध्यान लगाये मासखमण का उपवास कर अपने अष्टकर्मों का क्षय कर सिद्ध कहलाये और निर्वाण पा गये।</p>
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