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	<title>बड़वानी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>बड़वानी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बड़वानी में भक्ति भावना से मनाया विश्व नमोकर मंत्र दिवस : एक घंटे तक समाजजनों ने किया नमोकार मंत्र का पाठ </title>
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		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 08:49:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय संस्था जीतो के आह्वान पर पूरे विश्व में गुरुवार को नमोकार मंत्र का जाप किया गया। बड़वानी नगर में सकल जैन समाज श्वेताम्बर और दिगंबर जैन समाज की ओर से दिगंबर जैन मंदिर में सभी समाज जनों ने भक्ति और उल्लास के साथ एक घंटे का नमोकार मंत्र का जाप किया। धामनोद से पढ़िए, [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अंतरराष्ट्रीय संस्था जीतो के आह्वान पर पूरे विश्व में गुरुवार को नमोकार मंत्र का जाप किया गया। बड़वानी नगर में सकल जैन समाज श्वेताम्बर और दिगंबर जैन समाज की ओर से दिगंबर जैन मंदिर में सभी समाज जनों ने भक्ति और उल्लास के साथ एक घंटे का नमोकार मंत्र का जाप किया। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> अंतरराष्ट्रीय संस्था जीतो के आह्वान पर पूरे विश्व में गुरुवार को नमोकार मंत्र का जाप किया गया। बड़वानी नगर में सकल जैन समाज श्वेताम्बर और दिगंबर जैन समाज की ओर से दिगंबर जैन मंदिर में सभी समाज जनों ने भक्ति और उल्लास के साथ एक घंटे का नमोकार मंत्र का जाप किया। जिसमें दोनों समाज के महिला, पुरुष, युवा बच्चे उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि नमोकार मंत्र 84 लाख मंत्रों का राजा है और विश्व का एक मात्र मंत्र है, जिसे कहीं भी जपा जा सकता है। इस मंत्र के जाप से कई लोगों ने अपनी आदि, व्याधि और संकटों से मुक्ति पाई है और भगवान ने और मुनियों ने इसी मंत्र के सहारे उपसर्गों से विजय प्राप्त कर मोक्ष और उच्च गति को प्राप्त किया है। कहा जाता है कि इस मंत्र के जपने से सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्यता और ख्याति मिलती है और जीतो संस्था द्वारा 9 अप्रैल का दिवस विश्व नमोकार दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। जिसको की बड़ी बड़ी हस्तियों, उद्योग पतियों, फिल्म कलाकार, खिलाड़ियों, भारत और प्रादेशिक सरकार आदि ने भी समर्थन किया है। इस कार्य के लिए समाज जनों ने सभी सहयोगियों का आभार जताया गया।</p>
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		<title>जैन प्रबुद्ध मंच के लिए बड़वानी में हुई नियुक्तियां : मनीष जैन, जिला अध्यक्ष, राजेश काला जिला सचिव बनाए गए </title>
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		<pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:24:39 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में बड़वानी जिले में जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का गठन किया गया है। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; धामनोद। सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में बड़वानी जिले में जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का गठन किया गया है। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद</strong>। सकल जैन समाज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने की परिकल्पना अब साकार होती दिखाई दे रही है। इसी दिशा में बड़वानी जिले में जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट का गठन किया गया है। जैन प्रबुद्ध मंच ट्रस्ट मध्यप्रदेश राज्य संघ अध्यक्ष विजयपाल जैन (टोंग्या) एवं महिला संघ राज्य अध्यक्ष डॉ. प्रगति जैन ने जैन प्रबुद्ध मंच जिला बड़वानी का गठन कर नियुक्तियां प्रदान की। जिसमें मनीष जैन जिला अध्यक्ष, राजेश जैन (काला) जिला सचिव, सोनम जैन (सेंधवा) जिला महिला अध्यक्ष , बड़वानी शहर महिला संघ अध्यक्ष सपना जैन</p>
<p>सौरभ जैन (सेंधवा) सेंधवा शहर अध्यक्ष मनोनीत किए गए है। संघ ने समाज की डिजिटल पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल करते हुए “जैनत्व एप” को लॉन्च किया है। नवनियुक्त जिला अध्यक्ष मनीष जैन एवं महिला जिला अध्यक्ष सोनम जैन ने बताया कि यह एप समाजजनों को एक ही मंच पर लाने का सशक्त माध्यम बनेगा। इसके माध्यम से धार्मिक, सामाजिक और सेवाकार्यों की नवीनतम जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। साथ ही जैन श्रावक कार्ड जैसी विशेष सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे प्रत्येक श्रावक को अलग डिजिटल पहचान मिलेगी। जिला सचिव राजेश काला ने बताया कि एप में सामाजिक मंच व्यवस्था भी की गई है। जिसके माध्यम से छोटे-बड़े विवादों का निपटारा समाज स्तर पर सौहार्दपूर्ण ढंग से किया जा सकेगा। सेंधवा शहर अध्यक्ष सौरभ जैन एवं बड़वानी शहर महिला संघ अध्यक्ष सपना जैन का कहना है कि डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ने से जैन समाज की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एकता और भी मजबूत होगी। समाजजनों से आह्वान किया है कि वे जैनत्व ऐप को डाउनलोड कर इस डिजिटल क्रांति में सहभागी बनें।</p>
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		<title>मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ससंघ का हुआ मंगल प्रवेश : समाज जन ने की भक्तिपूर्वक अगवानी, लगाए जयकारे </title>
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		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 05:16:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज और संघस्थ क्षुल्लक जी महाराज का सोमवार को धार जिले के गणपुर से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने महाराज श्री ससंघ की मंगल अगवानी बड़ी धूमधाम और भक्तिपूर्वक की। धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230; धामनोद। पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>ट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज और संघस्थ क्षुल्लक जी महाराज का सोमवार को धार जिले के गणपुर से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने महाराज श्री ससंघ की मंगल अगवानी बड़ी धूमधाम और भक्तिपूर्वक की। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज और संघस्थ क्षुल्लक जी महाराज का सोमवार को धार जिले के गणपुर से बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। समाजजनों ने महाराज श्री ससंघ की मंगल अगवानी बड़ी धूमधाम और भक्तिपूर्वक की। समाज के श्रावकों द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन कर श्रीफल चढ़ाकर आरती उतारी गई और बड़वानी नगर में बैंडबाजों के साथ जैन धर्म के और मुनि संघ के जयकारो के साथ कसरावद रोड़, नवलपुरा, आनंद कारज भवन, कोर्ट चौराहा, कचहरी रोड, रणजीत चौक होते हुए जैन मंदिर पहुंचे। जहां मंदिर में विराजित सभी वेदियों के भगवान के दर्शन कर सभी श्रावकों को आशीर्वाद प्रदान किया। यहां ये उल्लेखनीय है कि मुनि श्री का चातुर्मास उज्जैन में हुआ था। जहां से पद विहार करते हुए बड़नगर, धार, कागदीपुरा, नालछा, मांडव, धरमपुरी, बाकानेर, मानवर, सिंघाना, लोहारी, गणपुर होते हुए सोमवार को बड़वानी में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि श्री के सान्निध्य में सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में पुराने वर्ष की विदाई भजन संध्या के साथ और नए वर्ष का आगमन 84 फीट उत्तुंग भगवान आदिनाथ जी के चरणाभिषेक धार्मिक कार्यक्रमों के साथ होगा।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : भगवान की पूजा-अर्चना पूर्ण विवेक और विशुद्ध भाव से करें &#8211; उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी </title>
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		<pubDate>Mon, 22 Dec 2025 10:21:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट बड़वानी। दिगंबर जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में विराजित परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य श्री विराग सागर जी महामुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी मुनिराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए श्रावकों को पूजा, क्रिया और भावों की शुद्धता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।</p>
<p><strong>दैनिक क्रियाओं में होने वाली सूक्ष्म त्रुटियों पर प्रकाश</strong></p>
<p>मुनि श्री ने अपने प्रवचन में अनेक बारीक एवं छोटी-छोटी बातों को समझाते हुए बताया कि श्रावक अपनी दैनिक दिनचर्या में अनजाने में कई त्रुटियां कर बैठते हैं, जिसके कारण उन्हें अपेक्षित धार्मिक परिणाम प्राप्त नहीं होते। उन्होंने कहा कि अपनी प्रत्येक क्रिया में विनय और विशुद्धि लाना आवश्यक है।</p>
<p><strong>आगम सम्मत विधि अपनाने का आह्वान</strong></p>
<p>उपाध्याय श्री ने कहा कि आगम में निहित विधि एवं क्रियाओं को अपनाना चाहिए, न कि केवल परंपराओं या रूढ़िवादी तरीकों का अनुसरण कर अपनी धार्मिक क्रियाएं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बातों को जीवन में उतारना अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><strong>अभिषेक विधि पर विशेष उदाहरण</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि कई श्रावक भगवान के अभिषेक के समय एक हाथ से कलश पकड़ते हैं और दूसरा हाथ कोहनी पर टिकाते हैं, जो पूर्ण रूप से गलत है। अभिषेक हमेशा दोनों हाथों से किया जाना चाहिए। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि जब उससे इस प्रकार अभिषेक करने का कारण पूछा गया तो उसने सहज भाव से कहा कि हमारे दादाजी और सभी ऐसे ही करते हैं, इसलिए हम भी ऐसा करते हैं। जब उसे सही विधि समझाई गई तो उसने तुरंत दोनों हाथों से अभिषेक किया।</p>
<p><strong>बुजुर्गों को कुतर्क से बचने की सीख</strong></p>
<p>मुनि श्री ने बताया कि जब यही बात एक बुजुर्ग को समझाई गई तो वे कुतर्क करने लगे। इस पर गुरुदेव ने कहा कि कच्चे आम को पकाया जाए तो वह पक जाता है, लेकिन पके हुए आम को पकाया जाए तो वह सड़ जाता है। अतः बच्चों में बचपन से ही आगम सम्मत धर्म संस्कार डालना आवश्यक है।</p>
<p><strong>भावों के अनुसार मिलता है फल</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जैसी भावना होगी, वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा। कोई भी क्रिया करने पर कृत, कारित और अनुमोदना का पुण्य मिलता है। जो स्वयं क्रिया करता है उसे अधिक पुण्य, जो सहयोग करता है उसे कुछ पुण्य और जो अनुमोदना करता है उसे भी पुण्य प्राप्त होता है। जो क्रिया करने में असमर्थ है, उसे भी पूर्ण क्रिया का पुण्य प्राप्त हो सकता है।</p>
<p><strong>मेंढक और सेठ का प्रसंग</strong></p>
<p>उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक सेठ पूर्व भव में नियमपूर्वक ध्यान और तप कर रहा था, किंतु अंत समय में पानी की प्यास से विचलित होकर उसकी मृत्यु हो गई और वह कुएं में मेंढक के रूप में जन्मा। बाद में जब भगवान महावीर का समवशरण राजगृह नगरी में आया, तो वह पूर्व भव के पुण्य के कारण कमल की पंखुड़ी मुख में लेकर समवशरण की ओर जा रहा था। मार्ग में हाथी के पैर के नीचे दबने से उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन पुण्य भावों के कारण वह तत्काल स्वर्ग में गया और वहां से विमान द्वारा भगवान के समवशरण में देवों के कोठे में विराजमान हुआ। इससे सिद्ध होता है कि भावों की विशुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>
<p><strong>अंत समय की भावना पर जोर</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि अपने भावों को सदैव विशुद्ध रखें। आज नहीं तो कल, भावों का फल निश्चित रूप से प्राप्त होता है। अंत समय में पंच परमेष्ठी का आलंबन और आश्रय होना चाहिए, जिससे अगला भव भी सुधर सके।</p>
<p><strong>अन्य धार्मिक गतिविधियां</strong></p>
<p>प्रवचन से पूर्व मुनि श्री ने मंदिर में दर्शन किए। श्रावकों द्वारा भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। प्रवचन के पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में सामायिक के बाद धर्म कक्षा आयोजित की गई। इसके पश्चात मुनि संघ का पार्श्वगिरी एवं सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी की ओर मंगल विहार हुआ। उपरोक्त जानकारी मनीष जैन द्वारा प्रदान की गई।</p>
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		<title>धर्म सभा में दिए प्रवचन : भगवान के सामने हाथ मत फैलाइए, भावपूर्वक की गई क्रिया फल प्रदान करती है- उपाध्याय मुनि श्री विभंजन सागर जी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/do_not_extend_your_hands_before_god_upadhyay_muni_shri_vibhanjan_sagar_ji/</link>
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		<pubDate>Sun, 21 Dec 2025 15:30:58 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। <span style="color: #ff0000">पढ़िए दीपक प्रधान की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>धामनोद/बड़वानी नगर।</strong> बड़वानी नगर में कल पधारे और विराजमान परम पूज्य उत्कृष्ट समाधि धारक राष्ट्र संत गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज के शिष्य उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने दिगंबर जैन मंदिर बड़वानी में धर्म सभा को संबोधित किया।</p>
<p><strong>भगवान के समक्ष क्रिया का भाव</strong></p>
<p>उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी ने कहा कि आप भगवान के सामने कभी हाथ मत फैलाइए, क्योंकि भगवान से कुछ मांगने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने समझाया कि भगवान हमें कुछ नहीं देते। हमारे आगम में बताया गया है कि निमित्त कुछ करता नहीं है और निमित्त के बिना कुछ नहीं होता। इसी कारण हम भगवान पर घटित करते हैं; भगवान कुछ करते नहीं हैं, पर भगवान के बिना कुछ संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि हम भगवान की भक्ति करते हैं, पूजा, अर्चना और आराधना करते हैं। हम मुनि आदि को आहार, बिहार, निहार कराते हैं, दान करते हैं, तीर्थ वंदना करते हैं और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इनसे पुण्य अर्जित होता है और वही पुण्य हमारे काम को सफल बनाता है। इस कारण हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं है।</p>
<p><strong>क्रिया में भाव का महत्व</strong></p>
<p>मुनि श्री ने रूढ़िवादिता से बचने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैन आगम हर बात का प्रमाण और कारण बताता है। यदि हमारे पास कारण है तो हम उसे करने को तैयार हैं। किसी भी क्रिया को केवल क्रिया समझकर नहीं करना चाहिए। यदि वह क्रिया आदत बन जाए तो उसका भाव समाप्त हो जाता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि पूजा, पाठ, स्वाध्याय, जप, तप आदि सभी क्रियाओं में भाव होना आवश्यक है। अन्यथा वह क्रिया व्यर्थ हो जाती है और केवल क्रिया-कांड बनकर रह जाती है। भावपूर्वक की गई क्रिया ही फल प्रदान करती है।</p>
<p><strong>सभा और अन्य कार्यक्रम</strong></p>
<p>मनीष जैन ने बताया कि सभा के पूर्व उपाध्याय श्री ने मंदिर में विराजित वेदियों पर भगवान के दर्शन किए। इसके साथ ही आचार्य श्री विराग सागर जी महा मुनिराज के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर चित्र अनावरण किया गया। इस अवसर पर समाज के युवा, बच्चे, महिला और पुरुष वर्ग उपस्थित रहे। सभा के पश्चात मुनि श्री की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर में सामयिक और धर्म संबंधित क्लास आयोजित हुई और शाम को आनंद यात्रा हुई।</p>
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		<title>सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में पर्वराज पर्युषण पर भक्ति भाव से हुए धार्मिक अनुष्ठान : आर्यिका आगममति जी का मिल रहा सानिध्य   </title>
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		<pubDate>Fri, 29 Aug 2025 13:12:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान धामनोद की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> जैन धर्म के पर्वराज दसलक्षण के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाते हैं। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी में निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र ,गुजरात से आए श्रावक बड़ी ही भक्ति से तप, त्याग, संयम पूर्वक साधना कर रहे हैं। शुक्रवार को प्रातः भगवान के अभिषेक शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन, दसलक्षण धर्म की पूजन, विधान किया गया। साथ ही क्षेत्र पर विराजित आर्यिका आगममति जी माताजी के मुखारबिंद से शांतिधारा और पूजन विधान हुआ। माताजी ने आर्जव धर्म के बारे में बताया और दोपहर में तत्व चर्चा, शाम को ध्यान, प्रतिक्रमण, आरती, प्रवचन और धार्मिक गतिविधियां हुई। माताजी ने बताया कि उत्तम मार्दव धर्म जैन धर्म के दस धर्मों में से एक प्रमुख धर्म है, जो आत्मा की शुद्धि और अहिंसक जीवनशैली का आधार है। मार्दव का अर्थ है कोमलता, विनम्रता और अहंकार का पूर्ण त्याग। यह धर्म व्यक्ति को मन, वचन और कर्म में नम्रता अपनाने की प्रेरणा देता है। जिससे वह स्वयं और दूसरों को श्रेष्ठ या हीन मानने की भावना से मुक्त हो जाता है। यह आत्मिक उन्नति और सामाजिक समरसता का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>
<p><strong>जो स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी</strong></p>
<p>माताजी ने कहा कि मार्दव धर्म का पालन करने वाला व्यक्ति अभिमान, क्रोध, ईर्ष्या और घमंड जैसे मानसिक दोषों को नियंत्रित करता है। वह सभी प्राणियों के प्रति करुणा, समानता और दया का भाव रखता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति दूसरों की भूलों को क्षमा करता है और स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नहीं मानता, तो वह मार्दव धर्म का सच्चा अनुयायी है। उन्होंने कहा कि यह धर्म सिखाता है कि अहंकार आत्मा को बंधन में डालता है, जबकि विनम्रता उसे मुक्ति की ओर ले जाती है। मार्दव धर्म का अभ्यास आत्म-निरीक्षण, ध्यान और दूसरों के प्रति सहानुभूति के माध्यम से किया जा सकता है। यह व्यक्ति को न केवल आंतरिक शांति प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक संबंधों में भी प्रेम और विश्वास को बढ़ावा देता है। जैन ग्रंथों में इसे आत्मा की शुद्धि का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। इस प्रकार, उत्तम मार्दव धर्म व्यक्ति को नम्र, दयालु और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है, जो आत्मिक और सामाजिक उन्नति का आधार है। यह जानकारी मनीष जैन ने प्रदान की।</p>
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		<title>बड़वानी के निकट होगा पहली बार मंगल चातुर्मास : 3 जुलाई को होगा आर्यिका माताजी क्षमा श्री का मंगल प्रवेश      </title>
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		<pubDate>Wed, 02 Jul 2025 17:02:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; बड़वानी। पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> पार्श्वगिरी अतिशय क्षेत्र पर इस बार पहली बार किसी साधु-संत का मंगल वर्षायोग चातुर्मास होगा। आचार्य कुंथु सागर जी की शिष्या गणिनी आर्यिका क्षमा श्री माताजी ससंघ का इस वर्ष का वर्षा योग मंगल चातुर्मास बड़वानी के निकट अतिशय क्षेत्र पार्श्व गिरीआमलियापानी ग्वाल बेड़ा पर होगा। पार्श्वगिरी कमेटी के अध्यक्ष कमल गोधा और क्षेत्र कमेटी ने बताया कि इस क्षेत्र के पुनीत पुण्य योग से पहली बार किसी श्रमण का वर्षा योग चातुर्मास होगा। उसके लिए कमेटी ने सारी तैयारियां कर ली है और संपूर्ण कार्यकर्ताओं और निमाड़ के श्रावकों में अपूर्व उत्साह का वातावरण है। इस चातुर्मास के लिए माताजी का भव्य मंगल प्रवेश 3 जुलाई गुरुवार को क्षेत्र पर होगा। इस के लिए क्षेत्र कमेटी ने भव्य अगवानी की तैयारी कर रखी है।</p>
<p>ट्रस्ट के मंत्री गौरव पहाड़िया ने बताया कि 7 जुलाई को भव्य कार्यक्रम में क्षेत्र पर प्रथम वर्षायोग मंगल कलश चातुर्मास स्थापना की जाएगी। जिसमें संपूर्ण निमाड़, मालवा, महाराष्ट्र, गुजरात से गुरु भक्तों की आने की संभावना है। कमेटी सदस्यों ने निमाड़ मालवा और आसपास के क्षेत्र के समाज जन से इस कार्यक्रम में शामिल हो कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है। साथ ही पूरे चातुर्मास में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, अभिषेक, विधान, प्रवचन और धर्म चर्चा आदि होगी। श्रावकों के भोजन की व्यवस्था क्षेत्र पर रखी गई है।</p>
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		<title>मंडवाड़ा गांव में खुदाई में प्राप्त हुई जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं: मंडवाड़ा गांव डेढ़ हजार वर्ष से अधिक प्राचीन </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 03:55:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है। <span style="color: #ff0000">बदनावर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर इंदौर।</strong> हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। यह जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इस बारे में जानकारी निकालने पर अंजड निवासी समाजसेवी धर्मेंद्र जैन एवं अभय बोहरा ने बताया कि यहां आसपास के गांवों से आए दिन जैन प्रतिमाएं निकलती रहती है।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83184" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0004.jpg" alt="" width="459" height="1090" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0004.jpg 459w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0004-126x300.jpg 126w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0004-431x1024.jpg 431w" sizes="(max-width: 459px) 100vw, 459px" />अभी कुछ महीने पहले ही यहां से भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी की एवं पास के ही धनौरा ग्राम से ग्यारहवें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांसनाथ स्वामी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। बाकानेर निवासी बरखा बड़जात्या ने बताया कि तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83182" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0005.jpg" alt="" width="963" height="1242" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0005.jpg 963w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0005-233x300.jpg 233w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0005-794x1024.jpg 794w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0005-768x991.jpg 768w" sizes="(max-width: 963px) 100vw, 963px" />शासन के भय से मूर्तियां नदी में कर देते हैं प्रवाहित </strong></p>
<p>यहां के लोग बताते हैं कि मंडवाड़ा गांव से सैकड़ों प्रतिमाएं निकल चुकीं हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थानीय मंदिरों में रख देते हैं और अन्य प्रतिमाएं वे नदी में प्रवाहित कर देते उनका कहना है कि यदि मूर्तियां निकलने की बात पुरातत्व विभाग को लगेगी तो उनके निर्माण कार्यों में बाधा आ सकती है। यह ग़लत धारणा के चलते हजारों वर्षों के इतिहास की जानकारी प्रकाश में आने की बजाय पुनः भूमिगत हो जाती है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83178" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0006.jpg" alt="" width="720" height="1600" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0006.jpg 720w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0006-135x300.jpg 135w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0006-461x1024.jpg 461w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0006-691x1536.jpg 691w" sizes="(max-width: 720px) 100vw, 720px" />शासन के द्वारा जनसाधारण को जागरूक करते रहना चाहिए जिससे इतिहास की परतें खुल सके और जनता में व्याप्त अनावश्यक भय समाप्त हो सकें। पाटोदी ने बताया कि हाल ही में जो आठ प्रतिमाएं प्राप्त हुई। उनमें भगवान पार्श्वनाथ जी के अलावा तीर्थंकर यक्ष रक्षिणी एवं अन्य तीर्थंकर प्रतिमाएं हैं। इनमें एक बड़ी प्रतिमा जो लगभग 8-10 फ़ीट की है वह पंचबालयति तीर्थंकर प्रतिमा है।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-83177" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0003.jpg" alt="" width="505" height="504" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0003.jpg 505w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0003-300x300.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0003-150x150.jpg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/06/IMG-20250617-WA0003-65x65.jpg 65w" sizes="auto, (max-width: 505px) 100vw, 505px" />धर्मेंद्र जैन के अनुसार यहां पर अधिकतर पंचबालयति प्रतिमाएं प्राप्त होती है। मंडवाड़ा से प्राप्त 1000 वर्ष पूर्व के शिलालेख अनुसार इस नगर का प्राचीन नाम मदनपुर रहा है। जहां पूर्व में हजारों की जैन बस्ती होने का अनुमान है क्योंकि, वर्तमान में भू-गर्भ से यहां पर सैकड़ो प्रतिमाएं प्राप्त होती है, जो लगभग 1500 से 1700 वर्ष प्राचीन होती हैं। वहीं कुछ प्रतिमा परमार कालीन भी प्राप्त होती है।</p>
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		<title>मंडवाड़ा गांव में खुदाई में प्राप्त हुई जैन तीर्थंकर प्रतिमाएं: मंडवाड़ा गांव डेढ़ हजार वर्ष से अधिक प्राचीन </title>
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		<pubDate>Mon, 16 Jun 2025 14:53:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है। <span style="color: #ff0000">बदनावर से पढ़िए, यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर इंदौर।</strong> हाल ही में पिछले सप्ताह बड़वानी जिले की ठीकरी तहसील के ग्राम मंडवाड़ा से 8 जैन प्रतिमाएं प्राप्त हुई थी जिन्हें समाज जन व ग्रामीणों ने प्रसिद्ध दिगम्बर जैन तीर्थ बावनगजा स्थित जैन संग्रहालय में भिजवा दिया है। यह जानकारी देते हुए वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इस बारे में जानकारी निकालने पर अंजड निवासी समाजसेवी धर्मेंद्र जैन एवं अभय बोहरा ने बताया कि यहां आसपास के गांवों से आए दिन जैन प्रतिमाएं निकलती रहती है। अभी कुछ महीने पहले ही यहां से भगवान श्री नेमीनाथ स्वामी की एवं पास के ही धनौरा ग्राम से ग्यारहवें तीर्थंकर भगवान श्री श्रेयांसनाथ स्वामी की प्रतिमा प्राप्त हुई थी। बाकानेर निवासी बरखा बड़जात्या ने बताया कि तारापुर घाट में भी अति प्राचीन जैन मंदिर है वहां भी तीर्थंकर प्रतिमाएं प्राप्त होने की पूरी संभावना है।</p>
<p><strong>शासन के भय से मूर्तियां नदी में कर देते हैं प्रवाहित </strong></p>
<p>यहां के लोग बताते हैं कि मंडवाड़ा गांव से सैकड़ों प्रतिमाएं निकल चुकीं हैं। देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थानीय मंदिरों में रख देते हैं और अन्य प्रतिमाएं वे नदी में प्रवाहित कर देते उनका कहना है कि यदि मूर्तियां निकलने की बात पुरातत्व विभाग को लगेगी तो उनके निर्माण कार्यों में बाधा आ सकती है। यह ग़लत धारणा के चलते हजारों वर्षों के इतिहास की जानकारी प्रकाश में आने की बजाय पुनः भूमिगत हो जाती है। शासन के द्वारा जनसाधारण को जागरूक करते रहना चाहिए जिससे इतिहास की परतें खुल सके और जनता में व्याप्त अनावश्यक भय समाप्त हो सकें। पाटोदी ने बताया कि हाल ही में जो आठ प्रतिमाएं प्राप्त हुई। उनमें भगवान पार्श्वनाथ जी के अलावा तीर्थंकर यक्ष रक्षिणी एवं अन्य तीर्थंकर प्रतिमाएं हैं। इनमें एक बड़ी प्रतिमा जो लगभग 8-10 फ़ीट की है वह पंचबालयति तीर्थंकर प्रतिमा है। धर्मेंद्र जैन के अनुसार यहां पर अधिकतर पंचबालयति प्रतिमाएं प्राप्त होती है। मंडवाड़ा से प्राप्त 1000 वर्ष पूर्व के शिलालेख अनुसार इस नगर का प्राचीन नाम मदनपुर रहा है। जहां पूर्व में हजारों की जैन बस्ती होने का अनुमान है क्योंकि, वर्तमान में भू-गर्भ से यहां पर सैकड़ो प्रतिमाएं प्राप्त होती है, जो लगभग 1500 से 1700 वर्ष प्राचीन होती हैं। वहीं कुछ प्रतिमा परमार कालीन भी प्राप्त होती है।</p>
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		<title>चातुर्मास के लिए श्रीफल किया अर्पित :  बड़वानी में चातुर्मास के लिए किया निवेदन </title>
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		<pubDate>Wed, 21 May 2025 05:04:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बावनगजा क्षेत्र पर विराजित मुनि श्री रत्नत्रय सागरजी और मुनि श्री प्रक्षाल सागरजी महाराज ससंघ को वर्ष 2025 का चातुर्मास बड़वानी नगर में करवाने के लिए श्रीफल भेंट किया गया। बड़वानी से दीपक प्रधान की यह खबर&#8230; बड़वानी। बावनगजा क्षेत्र पर विराजित मुनि श्री रत्नत्रय सागरजी और मुनि श्री प्रक्षाल सागरजी महाराज ससंघ को वर्ष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>बावनगजा क्षेत्र पर विराजित मुनि श्री रत्नत्रय सागरजी और मुनि श्री प्रक्षाल सागरजी महाराज ससंघ को वर्ष 2025 का चातुर्मास बड़वानी नगर में करवाने के लिए श्रीफल भेंट किया गया।<span style="color: #ff0000"> बड़वानी से दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> बावनगजा क्षेत्र पर विराजित मुनि श्री रत्नत्रय सागरजी और मुनि श्री प्रक्षाल सागरजी महाराज ससंघ को वर्ष 2025 का चातुर्मास बड़वानी नगर में करवाने के लिए श्रीफल भेंट किया गया। सकल दिगम्बर जैन समाज अध्यक्ष महेंद्र पहाड़िया और महामंत्री मुन्नालाल जैन और महिला मण्डल बड़वानी एवं युवा संघ बड़वानी ने श्रीफल भेंट कर मुनि संघ से चातुर्मास करने का निवेदन किया। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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