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	<title>बुंदेलखंड &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>बुंदेलखंड &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्यश्री विराग सागर जी का 64वां अवतरण दिवस मनाया : आचार्यश्री चैत्य सागरजी एवं उपाध्याय श्री विशोक सागर जी का सानिध्य में हुआ आयोजन  </title>
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		<pubDate>Sat, 02 May 2026 12:44:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री चैत्य सागरजी महाराज ससंघ एवं उपाध्याय श्री विशोक सागर जी महाराज के सानिध्य में मोती कटरा स्थित श्री संभवनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुंदेलखंड को आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 64वां पावन अवतरण दिवस शनिवार को मनाया गया। आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230; आगरा। आचार्य श्री चैत्य सागरजी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री चैत्य सागरजी महाराज ससंघ एवं उपाध्याय श्री विशोक सागर जी महाराज के सानिध्य में मोती कटरा स्थित श्री संभवनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुंदेलखंड को आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 64वां पावन अवतरण दिवस शनिवार को मनाया गया। <span style="color: #ff0000">आगरा से पढ़िए, शुभम जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>आगरा।</strong> आचार्य श्री चैत्य सागरजी महाराज ससंघ एवं उपाध्याय श्री विशोक सागर जी महाराज के सानिध्य में मोती कटरा स्थित श्री संभवनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में बुंदेलखंड को आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का 64वां पावन अवतरण दिवस शनिवार को मनाया गया। पूरे मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। इसके पश्चात भक्तों ने अष्ट द्रव्यों की भव्य थाल सजाकर आचार्यश्री विमल सागर जी महाराज एवं आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज का मनाया पूजन-अर्चन किया। जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर हो गया और जयघोषों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर पूजा में भाग लिया। इस अवसर पर आचार्य श्री चैत्यसागर जी महाराज का विधिवत पाद प्रक्षालन संपन्न हुआ। जिसमें समाज के प्रमुख श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। इसके बाद अपने मंगल प्रवचनों में साधु-संतों ने आचार्यश्री विराग सागर जी महाराज के त्याग तप, साधना एवं आध्यात्मिक जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए धर्म मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश जैन पर्देवाले ने किया। इस अवसर पर अनिल जैन, अनंत जैन, मनोज जैन, अनंत कुमार जैन, सत्येंद्र जैन, शुभम जैन सहित मोती कटरा जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर आयोजन को भव्य एवं सफल बनाया।</p>
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		<title>महावीर जयंती पर दीक्षा और महावीर निर्वाण पर देह-निर्वाण : तप, त्याग और राष्ट्र चेतना के प्रेरक संत आचार्य श्री ज्ञानसागर जी </title>
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		<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 08:51:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान भारत की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर हजारों श्रद्धालुओं में राष्ट्रीय गौरव और धर्म चेतना का संचार किया। <span style="color: #ff0000">पढ़िए जयेन्द्र जैन ‘निप्पू चन्देरी’ का विशेष आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और संतों का योगदान</strong></p>
<p>भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव महान संतों और तपस्वियों की तपस्या से आलोकित रही है। जब-जब समाज को दिशा की आवश्यकता हुई, तब-तब संतों ने अपने त्याग, तप और ज्ञान से जनमानस को प्रेरित किया। दिगंबर जैन परंपरा के महान तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का जीवन भी ऐसी ही प्रेरणादायक गाथा है, जिसमें धर्म, तपस्या, समाज जागरण और राष्ट्र चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।</p>
<p><strong>महावीर जयंती पर दीक्षा &#8211; एक अद्भुत संयोग</strong></p>
<p>उनके जीवन का एक अत्यंत विलक्षण संयोग यह रहा कि उन्होंने भगवान महावीर जयंती के पावन दिवस पर दिगंबर मुनि दीक्षा ग्रहण की। जैन धर्म में यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर का जन्म हुआ था, जिन्होंने संसार को अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और आत्मसंयम का महान संदेश दिया। ऐसे पावन दिवस पर दीक्षा लेना मानो भगवान महावीर के आदर्शों को अपने जीवन में पूर्ण रूप से आत्मसात करने का संकल्प था।</p>
<p><strong>तप, त्याग और सादगीपूर्ण जीवन</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी ने दीक्षा के बाद अपने जीवन को पूर्णतः तप और साधना के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वैराग्य, संयम और त्याग का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जो आज भी साधकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था, परंतु उनकी आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिक प्रभाव असाधारण था।</p>
<p><strong>खंदार क्षेत्र &#8211; निर्जन वन से पावन तीर्थ तक की यात्रा</strong></p>
<p>उनकी साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र बुंदेलखंड की ऐतिहासिक नगरी चंदेरी के समीप स्थित पावन तीर्थ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खंदार जी रहा। आज यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ है, परंतु एक समय ऐसा भी था जब यह क्षेत्र घने जंगलों और निर्जन वातावरण से घिरा हुआ था। चारों ओर ऊँचे वृक्ष, झाड़ियाँ और पथरीली भूमि थी। वहाँ सर्प, बिच्छू, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर विचरण करते थे। मधुमक्खियों के विशाल छत्ते भी भय का कारण बने रहते थे। सामान्य व्यक्ति के लिए वहाँ पहुँचना भी अत्यंत कठिन था, परंतु आचार्य ज्ञानसागर जी ने उसी निर्जन स्थान को अपनी साधना का केंद्र बना लिया।</p>
<p><strong>कठोर साधना और अडिग संकल्प</strong></p>
<p>उन्होंने वहाँ चातुर्मास कर उस क्षेत्र को धर्म साधना का केंद्र बना दिया। वर्षा ऋतु में उस क्षेत्र की स्थिति और भी विकट हो जाती थी। आसपास के डूब क्षेत्र जलमग्न हो जाते थे और पूरा स्थान पानी से भर जाता था। किन्तु गुरुदेव का संकल्प अडिग था। जब चारों ओर जलभराव हो जाता था, तब भी वे एक छोटे से ऊँचे स्थान पर बैठकर ध्यान और तप में लीन रहते थे। वही स्थान उनका तपस्थल बन जाता था और उसी सीमित स्थान पर वे रात्रि विश्राम भी करते थे।</p>
<p><strong>प्रकृति भी हुई तपस्या से प्रभावित</strong></p>
<p>श्रद्धालुओं के अनुसार, जब गुरुदेव ध्यान में लीन होते थे, तब आसपास के जंगलों से तेंदुआ, सर्प और अन्य वन्य जीव भी उनके समीप आकर शांत भाव से बैठ जाते थे। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत होता था। ऐसा प्रतीत होता था मानो प्रकृति भी उस महान तपस्वी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रही हो।</p>
<p><strong>धार्मिक केंद्र के रूप में खंदार का विकास</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी की तपस्या और प्रेरणा के परिणामस्वरूप धीरे-धीरे उस निर्जन क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियाँ प्रारंभ हुईं। लोगों का भय दूर हुआ और श्रद्धालुओं का आगमन बढ़ने लगा। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद से वहाँ मंदिरों के निर्माण की आधारशिला रखी गई और धीरे-धीरे वह स्थान एक प्रसिद्ध जैन तीर्थ के रूप में विकसित हो गया। आज खंदार क्षेत्र की प्रतिष्ठा का मुख्य श्रेय आचार्य ज्ञानसागर जी को ही दिया जाता है।</p>
<p><strong>राष्ट्र चेतना और सामाजिक समर्पण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था। उनके भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति भी गहरा समर्पण था। इसी कारण उनकी वाणी को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक मंचों पर अत्यंत सम्मान के साथ सुना जाता था।</p>
<p><strong>दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना</strong></p>
<p>विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित सर्वधर्म यात्रा के दौरान चंदेरी के ऐतिहासिक दिल्ली दरवाजा पर आचार्य ज्ञानसागर जी महाराज का ऐतिहासिक प्रवचन हुआ। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु, नागरिक और विभिन्न समाजों के लोग उपस्थित थे। उनकी देशना में केवल धार्मिक उपदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और नैतिक जीवन का प्रेरक संदेश भी समाहित था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-अनुष्ठान नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सत्य, अहिंसा, नैतिकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करना है।</p>
<p><strong>सर्वधर्म समभाव का अद्भुत उदाहरण</strong></p>
<p>चंदेरी नगर में उनके अनेक भक्त और शिष्य थे। प्रमुख श्रद्धालुओं में विनोद कठरया, कु. पद्म सिंह, कमलेश, हाथीशाह, मुनालाल और सुमन आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। जैनेतर समाज से भी मजीद खान पठान और बाबू मुजाबर जैसे श्रद्धालुओं ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दर्शाता है कि उनका व्यक्तित्व किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं था। उनकी करुणा और समत्व से सभी धर्मों के लोग प्रभावित होते थे।</p>
<p><strong>महावीर निर्वाण दिवस पर देह-निर्वाण</strong></p>
<p>आचार्य ज्ञानसागर जी के जीवन का एक और अद्भुत संयोग यह रहा कि जिस पावन पर्व महावीर जयंती पर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की थी, उसी परंपरा से जुड़े महावीर निर्वाण दिवस पर उन्होंने देह-निर्वाण प्राप्त किया। यह संयोग उनके जीवन को और भी अधिक आध्यात्मिक और प्रेरणादायक बना देता है।</p>
<p><strong>प्रेरणादायक जीवन संदेश</strong></p>
<p>उनका जीवन यह संदेश देता है कि तप, संयम और आत्मबल से मनुष्य न केवल आत्मकल्याण कर सकता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। आज जब श्रद्धालु खंदार क्षेत्र के दर्शन करते हैं, तो उन्हें यह स्मरण अवश्य करना चाहिए कि इस पावन तीर्थ के पीछे एक महान तपस्वी की कठिन साधना, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का योगदान है। आचार्य ज्ञानसागर जी का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और आत्मबल प्रबल हो, तो निर्जन वन भी धर्म और आस्था के महान केंद्र बन सकते हैं।</p>
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		<title>पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज का मिलेगा मंगल सान्निध्य : नैनागिरि में भव्य धार्मिक समारोह 23-24 मार्च को </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 07:31:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230; नैनागिरि। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनागिरि।</strong> वरदत्तादि ऋषियों की पावन निर्वाण स्थली एवं तेईसवें तीर्थंकर भगवान पारसनाथ स्वामी की समवशरण/देशना स्थली, श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि, तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर (बुंदेलखंड, मप्र) की पावन भूमि पर सोमवार 23 एवं मंगलवार 24 मार्च 2026 को विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर परम पूज्य पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ का मंगल सान्निध्य प्राप्त होगा, जिससे कार्यक्रम की आध्यात्मिक गरिमा और अधिक बढ़ेगी।</p>
<p><strong>विशेष कार्यक्रम</strong></p>
<p>कार्यक्रम के अंतर्गत 23 मार्च की रात्रि विश्राम, 24 मार्च की आहारचर्या श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि में संपन्न होगी।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं से पधारने का आह्वान</strong></p>
<p>श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र रेशंदीगिरि नैनागिरि ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति ने इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया गया है कि वे सपरिवार एवं इष्ट-मित्रों सहित नैनागिरि जी पधारकर इस पावन अवसर का लाभ प्राप्त करें।</p>
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		<title>पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन की होड़: दूर-दूर से पैदल आ रहे हैं बाबा के भक्त  </title>
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		<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 12:09:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230; कुंडलपुर दमोह। जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। <span style="color: #ff0000">कुंडलपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कुंडलपुर दमोह</strong>। जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में निरंतर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भक्त पूज्य बड़े बाबा के दर्शन अभिषेक पूजन के लिए बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में पूज्य बड़े बाबा के उच्चासन पर विराजमान होने के 20 वर्ष पूर्ण होने पर उपकाशी हटा नगरी से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त पदयात्रा करते हुए कुंडलपुर पहुंचे। जहां सभी श्रद्धालु भक्तों का कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के महामंत्री इंजीनियर आरके जैन, विपुल जैन एडवोकेट आदि ने कुंडलपुर प्रवेशद्वार पर स्वागत अभिनंदन किया। सभी पदयात्री पूज्य बड़े बाबा के चरणों में जाकर दर्शन कर नतमस्तक हुए।</p>
<p>पद यात्रियों में नरेंद्र जैन बाकल, पदम, प्रदीप, पारस बरौदा, प्रदीप जैन शिक्षक, मालती बहन, मीना जमुनिया, बंटी बरौदा, ममता पंडित, सुषमा, संगीता, दीप्ति, निभा, अर्चना, शालू, रिंकू, डब्बू ,राहुल, पुष्पा वाकल, वंदना जैन आदि के साथ 81 वर्षीय वयोवृद्ध गुलाबचंद जैन बरौदा वाले रास्ते में पदयात्रियों का उत्साहवर्धन करते हुए बीच-बीच में पैदल चल रहे थे।</p>
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		<title>मडदेवरा गांव की बेटी अदिति जैन बनी डिप्टी कलेक्टर: फास्ट आईएएस एकेडमी के छात्रों ने लहराया परमच  </title>
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		<pubDate>Mon, 10 Nov 2025 10:24:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। बकस्वाहा से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> जैन तीर्थ नैनागिरि की पावन भूमि और पारसनाथ भगवान की समवशरण परिधि के मड़देवरा गांव की अर्चना जैन तथा अशोककुमार जैन की सुपुत्री अदिति जैन का मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ है। इससे समूचे गांव और बकस्वाहा क्षेत्र में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि ने संपूर्ण बुंदेलखंड को गौरवान्वित किया है। इस गौरवशाली उपलब्धि पर अनेक जनप्रतिनिधि, संगठन संस्थाओं के पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं प्रेषित कर अदिति के उज्जवल भविष्य की कामना की है। अदिति जैन ने प्राथमिक शिक्षा मड़देवरा से माध्यमिक, हायर सेकंडरी स्कूल की शिक्षा नवोदय विद्यालय, बीकाम की डिग्री डॉ.हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर से प्रथम श्रेणी में उतीर्ण कर सफलता प्राप्त की है। स्मरण रहे कि अदिति ने इसके पूर्व में असिस्टेंट ट्रेजरी ऑफिसर, असिस्टेंट डायरेक्टर वित्त विभाग में सफलता प्राप्त की है। उल्लेखनीय है कि ग्राम मडदेवरा निवासी भागचंद्र जैन के सुपुत्र आयुष जैन (सागर) का भी डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था, जो वर्तमान में बड़ामलहरा एसडीएम है।</p>
<p><strong>फास्ट आईएएस एकेडमी के अनेक छात्रों को मिली सफलता</strong></p>
<p>दिगंबर जैन महासमिति के एक प्रकल्प फास्ट आईएएस एकेडमी के छात्रों को भारी सफलता मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग 2023 के परिणाम में प्राप्त हुई है। इन छात्रों का सफल एवं धमाकेदार प्रदर्शन हर बार के परिणामों के अनुरुप इस बार भी रिकॉर्ड तोड़ रहा। जिसमें अदिति जैन डिप्टी कलेक्टर, पूजा जैन डीएसपी, आकाश जैन जनपद सीईओ (डीएसपी 1फस्ट वेटिंग), अर्पित जैन जनपद सीईओ, पंकज जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर, अनामिका जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर, विपुल जैन कॉपरेटिव एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर चयनित हुए है।</p>
<p><strong>इन समाजजनों और पदाधिकारियों ने दी बधाई </strong></p>
<p>दिगंबर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और फास्ट आईएएस एकेडमी के चेयरमेन डॉ. अशोक जैन बड़जात्या के महत्वपूर्ण संदेश लक्ष्य तो हर हाल में पाना है को सार्थक करने वाले इन सभी विद्यार्थी और प्रशासनिक अधिकारियों को बधाइयां मिल रही है। फास्ट परिवार, महासमिति के राष्ट्रीय संगठन मंत्री और भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के प्रांतीय अध्यक्ष डीके जैन इंदौर, मध्यांचल कमेटी के संरक्षक तथा जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष सुरेश जैन आईएएस, न्यायमूर्ति विमला जैन भोपाल, मध्यांचल कमेटी के महामंत्री राजकुमार घाटे, मध्यांचल कमेटी के प्रचार प्रमुख, महावीर ट्रस्ट, जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री और द्रोणगिरि कमेटी के उपाध्यक्ष राजेश जैन रागी बकस्वाहा, बड़ामलहरा विधायक रामसिया भारती, जनपद अध्यक्ष रजनी मोती यादव बकस्वाहा, पूर्व जनपद अध्यक्ष अभय फट्टा, मडदेवरा सरपंच, प्राचार्य सुमतिप्रकाश जैन, सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बड़कुल पत्रकार ने शुभकामनाएं दी।</p>
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		<title>विलक्षण सांस्कृतिक धरोहर है बुंदेलखंड में: टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने नवागढ़ आने की दी स्वीकृति </title>
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		<pubDate>Mon, 27 Oct 2025 14:41:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। मुरैना / नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। <span style="color: #ff0000">मुरैना / नवागढ़ से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना/नवागढ़।</strong> दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक अतिशय क्षेत्र के निदेशक ब्रह्मचारी जयकुमार निशांत ने टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय को वंदना के लिए आमंत्रित किया। इस अवसर पर निवाड़ी डिप्टी कलेक्टर विनीता के साथ नरेंद्र जैन बैंक, ज्ञानचंद जैन (ज्ञान मेडिको) ने नवागढ़ साहित्य कलेक्टर को भेंट किया। श्रोत्रिय ने नवागढ़ विरासत, नवागढ़ अभिलेख एवं इतिहास, थीसिस डॉक्टर अर्पित रंजन दिल्ली, यशोबर्मन गोलचार्य के साथ नवागढ़ एवं गुरुकुलम विवरणिका का अवलोकन कर आश्चर्य व्यक्त किया। आपने नवागढ़ में संग्रहित विरासत के चित्रों का दिग्दर्शन किया। ब्रह्मचारी निशांत भैया ने नवागढ़ उद्भव एवं अन्वेषण के साथ वहां के अतिशय तथा प्राचीनता के बारे में अवगत कराया। 5 किमी विस्तार वाले नवागढ़ के विध्वंस का कारण चंदेल शासक परमाल आल्हा ऊदल एवं पृथ्वीराज चौहान का युद्ध बना। बुंदेलखंड का संस्कृत उन्नयन चंदेल शासन काल में विशेष रूप से हुआ। देवगढ़, खजुराहो, महोबा, अहार, पपौरा, बानपुर, नवागढ़, सेरोंन, सोनागिर प्रमुख जैन तीर्थ हैं जहां सांस्कृतिक विरासत का भंडार है।</p>
<p>कलेक्टर श्रोत्रिय ने नवागढ़ की विशेष गुफाओं, शैल चित्रों एवं प्राचीन इतिहास को लेकर निशांत भैया से कहा आपके जैन क्षेत्र के बीच तालमेल कैसा है? क्या वह एक दूसरे संबंध नहीं है? भैया जी ने बताया कि सभी की स्वतंत्रता समितियां हैं पर सांस्कृतिक धार्मिक रूप से सभी एक दूसरे के सहयोगी हैं। कलेक्टर ने कहा कि इन क्षेत्र को यदि पर्यटक स्थलों से जोड़ा जाए तो इनका विकास शीघ्रता से होगा। तब भैया जी ने कहा खजुराहो से भीमकुंड, अहार, पपौरा, नवागढ़, उमरी, ललितपुर, देवगढ़, बानपुर, कुंडेश्वर, टीकमगढ़, ओरछा, झांसी को जोड़ा जा सकता है।</p>
<p><strong> नवागढ़ आगमन का आमंत्रण</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी निशांत भैया के साथ विनीता ने कलेक्टर को नवागढ़ आने का अनुरोध किया। तब आपने उत्सुकता एवं हर्षित भाव से आमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि अरनाथ स्वामी का आशीर्वाद तथा लाखों वर्ष प्राचीन धरोहर के दर्शन करने अवश्य आऊंगा।</p>
<p>नवागढ़ में जो अन्वेषण हुआ है अभी वहां और संभावनाएं हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग को चाहिए। यहां का विशेष रूप से गंभीरता पूर्वक अन्वेषण करने का कार्य संपादित हो। सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आप लोगों ने ऐसे प्राचीन सांस्कृतिक ऐतिहासिक विरासत वाले क्षेत्र को संरक्षित कर भारतीय संस्कृति का बहुमान एवं गौरव बढ़ाया है। मैं अवश्य आऊंगा।</p>
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		<title>नैनागिरि में होगा पार्श्वनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक : सिद्धक्षेत्र में 31 जुलाई को निर्वाण लाडू महोत्सव, संगोष्ठी, वृक्षारोपण सहित विविध आयोजन </title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jul 2025 15:39:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर 31 जुलाई को बुंदेलखंड स्थित सिद्धक्षेत्र नैनागिरि में भव्य महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू, सिद्धचक्र विधान, संगोष्ठी और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। देशभर से श्रद्धालु और विद्वान भाग लेंगे। पढ़िए रत्नेश जैन राही की विस्तृत खबर&#8230; बकस्वाहा। श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरि में 31 जुलाई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर 31 जुलाई को बुंदेलखंड स्थित सिद्धक्षेत्र नैनागिरि में भव्य महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू, सिद्धचक्र विधान, संगोष्ठी और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। देशभर से श्रद्धालु और विद्वान भाग लेंगे। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन राही की विस्तृत खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा</strong>। श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र नैनागिरि में 31 जुलाई 2025 को जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का 2802वां मोक्ष कल्याणक दिवस अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर महामस्तकाभिषेक, निर्वाण लाडू अर्पण, सिद्धचक्र महामंडल विधान, विद्वत संगोष्ठी, लाडू सजाओ प्रतियोगिता, इंद्रसभा, वृक्षारोपण और सम्मान समारोह जैसे विविध धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन संपन्न होंगे।</p>
<p><strong>*गजराज की स्वर्ग स्थली के रूप में प्रसिद्ध है*</strong></p>
<p>बुंदेलखंड की पर्वतमाला में स्थित यह तीर्थ समवशरण स्थली, ऋषियों की मोक्ष स्थली और वज्रघोष गजराज की स्वर्ग स्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यहाँ 31 जुलाई को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक हजारों श्रद्धालु महामस्तकाभिषेक और निर्वाण लाडू महोत्सव में भाग लेंगे। इस अवसर पर सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत पहले ही श्रीमती सरला पदम जैन (आरटीओ परिवार, सागर) द्वारा की जा चुकी है और जो 31 जुलाई को विश्वशांति यज्ञ के साथ संपन्न होगा।</p>
<p><strong>*देशभर के विद्वान होंगे शामिल*</strong></p>
<p>इस महोत्सव में देशभर के कई विद्वान भी भाग लेंगे। श्री अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन विद्वत परिषद द्वारा 30 और 31 जुलाई को &#8220;नैनागिरि वैशिष्ट्य और भगवान पार्श्वनाथ&#8221; विषय पर संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें परिषद के अध्यक्ष डॉ. भागचन्द्र भास्कर (नागपुर), निर्देशक डॉ. सनत कुमार (जयपुर), महामंत्री डॉ. महेंद्र मनुज (इंदौर) और संयोजक पं. उदय चंद्र शास्त्री (सागर) सहित अनेक विद्वानों की सहभागिता होगी।</p>
<p><strong>*निर्वाण लाडू सजाओ प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण*</strong></p>
<p>तीर्थ में निर्मित भव्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन भी 30 जुलाई को दोपहर 2 बजे सीता देवी &#8211; विमल चंद्र जैन (कटंगी, पटेरा) के सौजन्य से होगा। वहीं 31 जुलाई को आकर्षक निर्वाण लाडू सजाओ प्रतियोगिता भी श्रद्धालुओं के लिए आयोजन का मुख्य आकर्षण होगी। महोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष सुरेश जैन (IAS), मंत्री राजेश जैन रागी और प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. पूर्णचंद्र जैन, मंत्री देवेंद्र लुहारी ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर अधिकाधिक संख्या में पधारकर पुण्यार्जन करें और जैन धर्म की भक्ति भावना से ओतप्रोत इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएँ।</p>
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		<title>नवागढ़ में 2 मार्च को तीर्थ संरक्षण संवर्धन पर मंथन : महामस्तकाभिषेक समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे शामिल </title>
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		<pubDate>Sat, 01 Mar 2025 17:29:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य नयसागर जी के सानिध्य में विविध कार्यक्रम होंगे। बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन होगा। पढ़िए नवागढ़ से राकेश जैन रागी की खबर&#8230; नवागढ़। श्री दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong> दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य नयसागर जी के सानिध्य में विविध कार्यक्रम होंगे। बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन होगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए नवागढ़ से राकेश जैन रागी की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नवागढ़।</strong> श्री दिगंबर जैन प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र में चल रहे महा महोत्सव समारोह में आचार्य श्री विद्यासागर जी के शिष्य मुनि श्री नयसागर जी के सानिध्य में रविवार 2 मार्च को सुबह महामस्तकाभिषेक, दोपहर 1 बजे वर्णी संस्थान विकास सभा का शपथग्रहण समारोह, दोपहर 2 बजे से बुंदेलखंड के तीर्थों संरक्षण और संवर्धन के लिए मंथन सम्मेलन सहित विविध कार्यक्रम किए जाएंगे।</p>
<p><strong>ये रहेंगे कार्यक्रम में अतिथि</strong></p>
<p>तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा एवं तीर्थक्षेत्र मध्यांचल कमेटी के प्रचार प्रमुख राजेश रागी ने बताया कि इस विचार गोष्ठी मंथन कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बूप्रसाद जैन गाजियाबाद, मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंडारी नागपुर, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र मध्यांचल कमेटी के कार्याध्यक्ष एवं बुंदेलखंड प्रभारी संतोषकुमार जैन घड़ी सागर के विशिष्ट आतिथ्य में किया जाएगा।</p>
<p><strong>पदाधिकारी संबोधित करेंगे</strong></p>
<p>इस विचार गोष्ठी मंथन में तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय एवं मध्यांचल के अनेक पदाधिकारी और प्रतिनिधियों के साथ ही बुंदेलखंड के दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र एवं अतिशय क्षेत्र के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होकर अपने विचार व्यक्त करेंगे।</p>
<p><strong>विद्वानों का मिलेगा मार्गदर्शन</strong></p>
<p>इस अवसर पर देश के ख्यातिप्राप्त विद्वान, प्रतिष्ठाचार्य, बालब्रह्मचारी पं. जय निशांत भैया जी सहित अनेक विद्वान पंडितों का उद्बोधन तथा मार्गदर्शन प्राप्त होगा। नवागढ़ तीर्थक्षेत्र के महामंत्री वीरचंद्र नैकोरा सहित कमेटी के पदाधिकारियों ने इस अवसर पर सम्मिलित होने की अपील की है।</p>
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		<title>श्रीफल किया अर्पित : बुंदेलखंड की धर्म नगरी ललितपुर में होगा 2024 का भव्य पावन वर्षायोग  </title>
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		<pubDate>Sat, 13 Jul 2024 08:56:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[ललितपुर (राजीव सिंघई मोनू)। आचार्य श्रेष्ठ परम पूज्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य परम पूज्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य परम पूज्य गुरुवर मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज का 2024 का पावन वर्षा योग ललितपुर में होगा। दिगंबर.जैन पंचायत समिति ललितपुर के तत्वाधान में ललितपुर समाज ने [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ललितपुर (राजीव सिंघई मोनू)।</strong> आचार्य श्रेष्ठ परम पूज्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य परम पूज्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के परम प्रभावी शिष्य परम पूज्य गुरुवर मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज का 2024 का पावन वर्षा योग ललितपुर में होगा।</p>
<p>दिगंबर.जैन पंचायत समिति ललितपुर के तत्वाधान में ललितपुर समाज ने श्री फल समर्पित किया। शुक्रवार दोपहर 3.00 बजे पृथ्वीपुर से ललितपुर की ओर मंगल विहार हुआ।</p>
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		<title>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ससंघ की हटा में हुई भव्य अगवानी : हटा में रहो, धर्म को छोड़ो नहीं- आचार्य श्री समयसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Tue, 09 Jul 2024 06:00:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ का बुंदेलखंड की काशी हटा नगरी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री ससंघ की गाजे बाजे के साथ भव्य अगवानी की गई। मुख्य मार्ग से होते हुए आचार्य संघ श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचा। इस अवसर पर आचार्य श्री के प्रवचन भी [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ का बुंदेलखंड की काशी हटा नगरी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री ससंघ की गाजे बाजे के साथ भव्य अगवानी की गई। मुख्य मार्ग से होते हुए आचार्य संघ श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचा। इस अवसर पर आचार्य श्री के प्रवचन भी हुए। <span style="color: #ff0000">पढ़िए राजीव सिंघाई विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>हटा।</strong> युग श्रेष्ठ संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ससंघ का बुंदेलखंड की काशी हटा नगरी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर आचार्य श्री ससंघ की गाजे बाजे के साथ भव्य अगवानी की गई। मुख्य मार्ग से होते हुए आचार्य संघ श्री पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचा। आचार्य संघ( 24 पिच्छी )के साथ आर्यिकारत्न श्री तपोमति माताजी ससंघ (6 पिच्छी) का भी मंगल आगमन हुआ ।धर्म सभा आयोजित हुई जिसमें चारों जिनालय के प्रतिनिधि एवं विभिन्न नगरों से आए हुए श्रावकों ने श्रीफल अर्पित कर आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर आचार्य श्री समय सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि सनं 76&#8211;77 में आचार्य महाराज के साथ हम यहां आए हटा कई बार आए हैं।</p>
<p>हटा कहते ही तालियां बजती हैं इसका मतलब हटा के प्रति आप लोगों का बहुत लगाव है। इससे भी ज्यादा लगाव प्रभु के प्रति होना चाहिए। कोई बाधा नहीं हटा में रहो धर्म को छोड़ो नहीं।और हटा पटेरा कुंडलपुर जहां आचार्य महाराज का बार-बार विहार होता था अनेक बार प्रवास यहां हुआ। अनेक ग्रंथों का यहां बैठकर के अनुवाद गुरुवर ने किया ।आज वर्तमान में वही वातावरण देखने को मिल रहा।40&#8211;45 साल पूर्व में जो हटा की स्थिति थी वह स्थिती हट गई एक नया देखने को मिल रहा।</p>
<p>गुरुदेव का प्रभाव है उन्होंने यहां धर्म का सिंचन किया और सारे सारे वातावरण में धर्म को यहां तक ले आए ।प्रभु के सामने आत्म तत्व का चिंतन करने के लिए मनन करने के लिए मिला है ।धर्म का जो स्वरूप है वह इतना विराट है गणधर परमेष्ठी भी उसका कथन नहीं कर पाएंगे ऐसी प्रकृति है । आचार्य श्री ने प्रवचन देते हुए आगे कहा आत्मिक विकास के लिए आत्मगत परिणाम को निर्मल बनाने के लिए बहुत सारे साधन है और पुण्य के उदय में उन साधनों की उपलब्धि भी होती है ।किंतु उन साधनों का कौन कितना सदुपयोग कर रहा है इसको सोचने की बात है ।ऐसे भी जीव है संसार में जिनके लिए पुण्य का उदय नहीं है उच्च कुल नहीं मिला है ।अहिंसा धर्म का क्या स्वरूप है यह ज्ञात नहीं है।</p>
<p>कर्मों का फल भोगने के लिए वह यत्र तत्र विचरण कर रहा है ।विषयों की आकांक्षा के कारण ही उस जीव का पतन हो रहा है किंतु जिन्होंने पुरुषार्थ किया है जीवन में उसके लिए मोक्ष मार्ग की ओर साधन सामग्री उपलब्ध है। किंतु उस उपलब्ध साधन सामग्री का सदुपयोग यदि नहीं करता है तो उसका निश्चित रूप से पुनः पतन होना है।इस प्रकार कभी उत्थान होता है अपने निर्मल परिणामों के द्वारा किंतु तब पुण्य का उदय आ जाता है वैभव भी मिलता है किंतु वह वैभव से आकर्षित होकर के प्रभावित होकर के देव गुरु शास्त्र को ही भूल जाता है ।</p>
<p>विडंबना है भूलना तो नहीं चाहिए किंतु भूलने वाला कौन सा तत्व है वह एकमात्र मोह है केंद्र में आठ कर्म है मोह प्रवृत्ति से भिन्न-भिन्न स्वभाव हैं आठ कर्मों में कोई राजा है तो मोहिनी कर्म है ।मोहिनी कर्म के उदय के कारण संसारी प्राणी अपने स्वरूप से वंचित है वैभव साधन सामग्री इसकी सार्थकता तब सिद्ध होती है जब इसका निरंतर उपयोग करें सदुपयोग करें। किंतु धार्मिक साधनों का जो दुरुपयोग करता है उसका जो पतन होता है उसका हम कथन नहीं कर पाएंगे ।क्योंकि युक्ति सुनने को पढ़ने को मिलती है अर्थ यह है अन्य क्षेत्र में संसारी प्राणी पाप करता है अज्ञान के कारण प्रमाद के कारण कर्म के उदय के कारण पाप का अर्जन करता है ।</p>
<p>ज्यों ही धर्म का आलंबन लेता है देव गुरु शास्त्र के शरण में चला जाता है उसका अतीत का सारा का सारा अर्जित पाप धुल जाता है प्रक्षालित हो जाता है ।देव शास्त्र गुरु के आलंबन से और देवगुरु शास्त्र का समागम मिलने के उपरांत भी जिसकी मति काम नहीं करती वह उसका सदुपयोग नहीं करता उस ज्ञान का भी दुरुपयोग करना प्रारंभ करता है क्यों होता है ऐसा गुरुदेव ने भी एक दोहा लिखा है। दोहा रख रहा हूं। ज्ञान दुख का मूल है और ज्ञान ही भव का फूल ।राग सहित प्रतिकूल है और राग रहित अनुकूल। रागान्वित जो ज्ञान है वह दुख के लिए कारण है। गर्त तक पहुंचाने में कारण पतन का कारण है ।राग रहित जो वीतराग विज्ञान है वह मोक्ष तक पहुंचने में समर्थ है ऐसा कहा है।</p>
<p>कितने बार चतुर्थ काल मिला कितने बार साधुओं का समागम मिला कितने बार मनुष्य जीवन मिला कितने बार आर्यखंड में पैदा हुए जिसका कोई हिसाब नहीं ना किताब है। किंतु वर्तमान में मोह का जो चक्र है वह बहुत भयानक है उस चक्र की चपेट में अच्छे-अच्छे व्यक्ति आते हैं।</p>
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