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	<title>बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>धार्मिक दृष्टिकोण में प्रीति और प्रेम धोखा है: आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज </title>
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		<pubDate>Sun, 10 Dec 2023 07:48:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[साबला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज से आशीर्वाद लेने के लिए दूर दराज से श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है। यहां शनिवार को मदनगंज, किशनगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां पहुंचने पर स्थानीय जैन समाज ने इनकी अगवानी की। इसके बाद हुई धर्म सभा में आचार्य ने संबोधित करते हुए कहा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>साबला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज से आशीर्वाद लेने के लिए दूर दराज से श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है। यहां शनिवार को मदनगंज, किशनगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां पहुंचने पर स्थानीय जैन समाज ने इनकी अगवानी की। इसके बाद हुई धर्म सभा में आचार्य ने संबोधित करते हुए कहा कि संसारी प्राणी व सारा जगत प्रीति और प्रेम में डूबा हुआ है। जगत के प्राणियों का विश्वास भी इसी में है। किंतु धार्मिक दृष्टिकोण में प्रीति और प्रेम धोखा है। </strong></p>
<hr />
<p><strong>साबला।</strong> साबला में विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज से आशीर्वाद लेने के लिए दूर दराज से श्रद्धालुओं की भीड़ आ रही है। यहां शनिवार को मदनगंज, किशनगढ़ से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। यहां पहुंचने पर स्थानीय जैन समाज ने इनकी अगवानी की। इसके बाद हुई धर्म सभा में आचार्य ने संबोधित करते हुए कहा कि संसारी प्राणी व सारा जगत प्रीति और प्रेम में डूबा हुआ है। जगत के प्राणियों का विश्वास भी इसी में है। किंतु धार्मिक दृष्टिकोण में प्रीति और प्रेम धोखा है। यदि प्रीति और प्रेम संसार मार्ग में चलते है तो मानव जीवन सार्थकता को प्राप्त नहीं होता है। प्रीति और प्रेम देव शास्त्र, गुरु, धर्म, धर्मात्माओं, धर्म तीर्थ और वीतराग भगवान के प्रति की जाती है तो हमारे जीवन में वीतरागता की वृद्धि होती है। इसी से हमारे जीवन में भी वीतरागता आती है। हमें जीवन के अमूल्य क्षण धर्म में लगाने चाहिए। हमारे वीतरागी तीर्थंकर भगवान ने दिव्य देशना से मुक्ति का मार्ग बताया है। जिस प्रकार त्रिवेणी का संगम होता है,उसी प्रकार धर्म में रत्न त्रय रूपी त्रिवेणी सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र की मोक्ष मार्ग पर चलने की राह है। इस त्रिवेणी से हम मुक्ति को प्राप्त कर सकते हैं। वस्तुत संसारी प्राणियों का अनुराग धन दौलत परिवार से प्रीति और प्रेम होता है। संसारी प्राणी रागी और मोही होते हैं और राग और मोह के कारण आत्मा में कमों का बंधन होता है। ऐसे दुर्गम वातावरण में संयम के बिना आप आत्मा का उत्थान नहींकर सकते हैं। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने यह मंगल देशना साबला नगर में आयोजित धर्मशाला में किशनगढ़ से आए तीर्थ यात्रियों के समक्ष प्रकट की।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52731" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231210-WA0007.jpg" alt="" width="523" height="265" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231210-WA0007.jpg 523w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231210-WA0007-300x152.jpg 300w" sizes="(max-width: 523px) 100vw, 523px" /></p>
<p><strong>बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे साबला, दिनभर आयोजन </strong></p>
<p>आचार्य श्री ने बताया कि देव शास्त्र गुरु की भक्ति हमारे जीवन में मुक्ति के साधन उपलब्ध कराती है। इन रत्नत्रय धर्म के रुपया साधन से जीवन का उत्थान कर सकते हैं। विगत दिनों हमारे परम आराध्य परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज के बिम्ब की प्रतिष्ठा और स्मारक का लोकार्पण हुआ। साबला समाज ने समाधि स्थल का विकास कर इस तीर्थ का रूप दिया है। भगवान बोलते नहीं है किंतु आचार्य साधु परमेष्ठि गुरुजन बोलते हैं। गुरुजनों का जीवन चलता फिरता तीर्थ है। इसलिए गुरुजनों की समाधि भूमि तीर्थ है, यहां आकर दर्शन, भक्ति कर संयम की प्रेरणा लेकर मानव जीवन सार्थक करना चाहिए</p>
<p><strong>पंचामृत द्रव्यों से चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की</strong></p>
<p>आचार्य श्री मंगल देशना के पूर्व मदनगंज किशनगढ़ से 250 से अधिक गुरु भक्त महावीर, विनोद, कैलाश पाटनी आदि आए है। ब्रह्मचारी गजू भैया, राजेश पंचोलिया किशनगढ़ के प्रचार मंत्री गौरव पाटनी के अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व पुरावचार्यों के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया। सभी यात्रियों ने भक्ति भाव से आचार्य श्री का पूजन कर पंचामृत द्रव्यों से चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेट की। आचार्य श्री लगभग 21 वर्षों के बाद वागड़ में आए है। इस दौरान कई शहरों से श्रद्धालु इनका आशीर्वाद लेने के लिए पहुंच रहे हैं।</p>
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		<title>3 दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा महोत्सव आ. श्री वर्धमान सागर जी ने सुनाए संस्मरण </title>
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		<pubDate>Fri, 08 Dec 2023 08:05:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है । महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है।महोत्सव में [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है । महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है।महोत्सव में प्रवचन के दौरान आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने समाधिस्थ आचार्य श्री अजित सागर जी के जीवन के अनेक संस्मरण भाव विभोर होकर सुनाएं। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जन्म, जरा, मरण रूपी रोग रतनत्रय रूपी औषधि से होते हैं दूर </strong></p>
<p><strong>साबला (डूंगरपुर)</strong> संसारी प्राणी संसार में राग द्वेष के कारण परिभ्रमण कर रहा है, इस कारण कर्मों का आश्रव होता है और कर्म का बंधन होता है। यद्यपि आत्मा अजर अमर है जन्म लेना आसान है जन्म सभी का होता है किंतु जन्म का महत्व सार्थकता को समझना जरूरी है, श्री राजमल जी ने संसार में अनादि काल से जन्म जरा रूपी रोग को समझा । आप सभी लोग रोग का इलाज चिकित्सक से कराते हैं । जन्म ,जरा ,मरण रूपी रोग की औषधि रत्नत्रय रूपी सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आप डॉक्टर के पास जाते हैं किंतु आध्यात्मिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए गुरु चरण में आना होगा। आज श्रावक और महिलाएं श्रावक धर्म भूल रहे हैं यह भूल रहे हैं कि हम किस कुल में जन्मे हैं । अरिहंत भगवान हमारे भगवान है । देव शास्त्र गुरु के समक्ष कैसे दर्शन करना चाहिए ,भक्ति करना चाहिए क्योंकि गुरुओं के आशीर्वाद से पुण्य का अर्जन होता है। गुरुओं देव स्थानों पर मर्यादित कपड़े पहनना चाहिए।</p>
<p>जन्म सभी लेते हैं जन्म की खुशी मनाते हैं मृत्यु की कोई खुशी नहीं मनाता है ,जबकि संयमी व्यक्ति संलेखना धारण करता है और उनकी समाधि होने पर मृत्यु महोत्सव मनाते हैं। आचार्य श्री ने बताया कि सभी को मरण सुधारना जरूरी है घर से आड़े होकर नहीं ,खड़े होकर निकलना चाहिए। आचार्य श्री शिव सागर जी प्रवचन में कहते थे कि व्यक्ति की मृत्यु होने पर वह अर्थी के रूप में आड़ा होकर निकलता है, जबकि दीक्षा लेने वाला श्रावक खड़े-खड़े घर से बाहर निकलता है। जीवन में संयम की साधना में परिवार, धन के प्रति मोह, आसक्ति मनुष्य जीवन में बाधक होती है इसलिए संलेखना को धारण कर आध्यात्मिक उन्नति करके जीवन की चरम सीमा को प्राप्त करना चाहिए जीवन की चरम सीमा अर्थात संसार परिभ्रमण से छुटकारा पाना होता है। यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणी वात्सल्य वारिघि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने साबला श्री अजित कीर्ति गिरी परिसर में आयोजित विशाल धर्म सभा में प्रगट की।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52691" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231208-WA0003-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>भाव विभोर हो कई संस्मरण सुनाए </strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि मध्यप्रदेश आष्टा नगर समीप ग्राम भोरा में सन 1926 में जन्मे श्री राजमल जी ने संसार के वास्तविक रोगों को दूरदर्शिता से परख कर सन 1944 मात्र 18 वर्ष की उम्र में आचार्य श्री वीर सागर जी के संघ में शामिल हुए। अगले 2 वर्षो में 7 प्रतिमा के नियम धारण किए। 35 वर्ष की उम्र में आपने सीकर में आचार्य श्री शिव सागर जी से मुनि दीक्षा लेकर मानव जीवन सार्थक किया। आचार्य श्री ने बताया कि आपको स्वाध्याय में बहुत ही ज्यादा रुचि रही। आपने अनेक ग्रंथो के साथ संस्कृत के 4000 से श्लोकों की सर्वोपयोगी श्लोक संग्रह अनुपम रचना की जिसका सभी साधु और श्रावक अध्ययन करते हैं। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी की परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि के बाद आप परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश 7 जून 1987 को मनोनीत हुए।</p>
<p>29 वर्ष के संयमी जीवन में आपने अनेक दीक्षा दी। जिनमे वर्तमान में 4 शिष्यों में 2 शिष्य मुनि श्री चिन्मय सागर जी और आर्यिका श्री चेत्य मती माताजी संघ के साथ साबला उपस्थित है आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने समाधिस्थ आचार्य श्री अजित सागर जी के जीवन के अनेक संस्मरण भाव विभोर होकर सुनाएं । संहिता सूरी पंडित हँसमुख जी शास्त्री अनुसार आचार्य श्री अजित सागर जी ने समाधि के पूर्व बसंत पंचमी 31 जनवरी 1990 को मुनि श्री वर्धमान सागर जी को परंपरा का पंचम पट्टाधीश का लिखित आदेश संघ और समाज को दिया आचार्य श्री अजित सागर जी की समाधि वैशाख शुक्ला पूर्णिमा सन 1990 को साबला में हुई। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को 24 जून 1990 को आचार्य पद पर विभूषित किया गया ।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52693" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231207-WA0010-1-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>प्रचार संयोजक बहादुर मल जैन अनुसार आचार्य श्री अजित सागर जी की समाधि की इस पुण्य स्मृति स्वरूप साबला में श्री दिगंबर जैन अजित कीर्ति गिरी ट्रस्ट द्वारा आचार्य श्री अजित सागर जी महाराज जिन बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवम् भव्य स्मारक प्रतिष्ठा का 3 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया है। प्रातः श्री जी के पंचामृत अभिषेक के बाद महा मंडल की पूजन हुई आचार्य श्री के प्रवचन एवम् संघ की आहार चर्या, सामायिक के बाद दोपहर को विमान शुद्धि जुलूस , बेदी संस्कार, वास्तु पूजन एवम् हवन पुण्यार्जक सोधर्म इंद्र बसंतलाल सराफ , कुबेर सुमति लाल, पंकज बेड़ा यज्ञ नायक , तथा ईशान इंद्र महावीर सेठ एवम् अन्य इंद्र परिवार द्वारा की गई। इस अवसर पर आचार्य श्री अजित सागर जी की गृहस्थ अवस्था के नगर से सैकड़ो परिजन एवम् समाज जन पधारे। साबला समाज ने उनका भी स्वागत अभिनंदन किया । इंदौर से पंडित श्री सुरेश जी मरोरा एवम् राजस्थान के अनेक नगरों से भक्तो ने उपस्थित होकर भक्ति प्रदर्शित की। 8 दिसंबर को अभिषेक पूजन आचार्य श्री के प्रवचन के बाद विश्व शांति महायज्ञ पूर्णाहुति, रथ प्रवर्तन, पश्चात आचार्य श्री अजित सागर जी की प्रतिमा विराजित की जाएगी ।</p>
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		<title>श्री अजित कीर्ति गिरि अब तीर्थ का रूप लेगा : बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा  </title>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है। आज सुबह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है। आज सुबह आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का साबला नगर से श्री अजीतकीर्ति गिरी पर मंगल प्रदार्पण हुआ। आचार्य श्री के आगमन के बाद श्री जी का पंचामृत अभिषेक , नित्य नियम पूजन हुई। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश पंचोलिया की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है। आज सुबह आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का साबला नगर से श्री अजीतकीर्ति गिरी पर मंगल प्रदार्पण हुआ। आचार्य श्री के आगमन के बाद श्री जी का पंचामृत अभिषेक , नित्य नियम पूजन हुई। नंदी विधान किया गया इसके पश्चात ध्वजारोहण श्री दिनेश श्रीमती हेमलता बेड़ा परिवार के द्वारा, विजय द्वार का लोकार्पण श्री भंवरलाल भोरावत परिवार के द्वारा तथा आचार्य श्री अजित सागर पंडाल उद्घाटन श्री महेंद्र कुमार,ओमप्रकाश ,नरेंद्र भोरावत परिवार द्वारा किया गया । इसी परिवार द्वारा आचार्य श्री शांति सागर जी एवम आचार्य श्री अजित सागर जी के चित्र का अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया गया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन एवम् जिनवाणी भेट का सौभाग्य श्री गणेश लाल सराफ परिवार को प्राप्त हुआ। कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा आचार्य श्री को अध्र्य समर्पित कर प्रतिष्ठाचार्य पंडित हँसमुख शास्त्री,विनोद शास्त्री,पंडित भागचंद शास्त्री ब्रह्मचारी गजू भैय्या का स्वागत किया। दोपहर को सभी इंद्र का सकलीकरण कर दिग्बंधन किया गया दोपहर को याग मंडल विधान की पूजन हुई। शाम को श्री जी की आरती पश्चात आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की आरती हुई रात्रि में शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52627" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016.jpg" alt="" width="1280" height="590" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016-300x138.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016-1024x472.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016-768x354.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0016-990x456.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>श्री अजित कीर्ति गिरि अब तीर्थ का रूप लेगा</strong></p>
<p>इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज जी ने कहा की हम सब का सौभाग्य है कि श्री ऋषभ देव भगवान से लेकर अंतिम तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी तक 24 तीर्थंकरों की भारत भूमि पर दिव्य देशना गणघरो के माध्यम से प्रगट हुई इस दिव्य देशना शास्त्रों से हम सभी को मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा ।अरिहंत देव पंच परमेष्ठी में प्रथम स्थान पर है, वही आचार्य परमेष्ठी तृतीय स्थान पर होते हैं। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने आचार्य पद पर प्रतिष्ठित होकर समाज को संयम का उपहार दिया उन्होने संयम पथ का परिपालन किया। श्री आदिनाथ भगवान के समान वह भी सर्वप्रथम आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए ।आचार्य श्री शांति सागर जी ,आचार्य श्री वीर सागर जी, आचार्य श्री शिव सागर जी, आचार्य श्री धर्म सागर जी, आचार्य श्री अजीत सागर जी परंपरा के सभी बाल ब्रह्मचारी आचार्य हैं। साबला आने के बाद चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का स्वास्थ्य खराब हुआ ,जैसे-जैसे आचार्य श्री का स्वास्थ्य गिर रहा था उनमें आध्यात्मिक स्वास्थ्य में आत्म बल तेज की वृद्धि हो रही थी। दीक्षा गुरु आचार्य धर्म सागर जी की समाधि के बाद हमें गुरु की कमी महसूस हो रही थी, पंडित हसमुख जी हमारे पास आचार्य अजीत सागर जी का एक पत्र लेकर आए। उस पत्र का आशय यही था कि मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा हूं, एक आचार्य के लिखे पत्र शिष्य मुनियों के लिए आदेश होता है उसका परिपालन कर सभी साधु आचार्य अजीत सागर जी के दर्शन सेवा हेतु पधार गए ,हमें आचार्य धर्म सागर जी महाराज की तरह आचार्य श्री अजित सागर जी की सेवा करने का अवसर मिला । आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज का स्वास्थ्य ठीक नहीं था ,उनकी भी सेवा करने का एक पुण्य अवसर हमें प्राप्त हुआ।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52626" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015.jpg" alt="" width="1280" height="590" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015-300x138.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015-1024x472.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015-768x354.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231206-WA0015-990x456.jpg 990w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>आचार्य श्री अजित सागर महाराज महाज्ञानी थे , गुरुओं से अज्ञान का अंधकार दूर होकर प्रकाश ही प्रकाश रूपी ज्ञान मिलता है । आचार्य श्री आध्यात्मिक साधना की और बढ़ चले और साबला में उनकी समाधि हुई ।आचार्य श्री अजीत सागर जी महाराज हमारे निर्बल कंधो पर बंद लिफाफे में परंपरा के आचार्य पद का भार सोप गए । यह आचार्य श्री का आशीर्वाद है ,कि हम उस भार को सम्हाल सके । हमारा यह पुण्य है कि आचार्य के दीक्षित शिष्य मुनि श्री चिन्मय सागर जी और आर्यिका श्री शीतल मति की प्रेरणा से नवोदित समाधि स्थल पर हमको उनके बिम्ब की प्रतिष्ठा का अवसर मिला । अब श्री अजित कीर्ति गिरि तीर्थ का रूप लेगा</p>
<p>आप सभी को प्रतिष्ठा महोत्सव में आने का पुण्य अवसर प्राप्त हुआ है । इस तीर्थ से आचार्य श्री अजीत सागर जी की कीर्ति को आप हृदय में बसा कर रखें और जीवन को कीर्तिमय बनाये, आपकी देव शास्त्र गुरुओ के प्रति श्रद्धा वृद्धि को प्राप्त हो । जो दुर्लभ मनुष्य जीवन असीम पुण्य से प्राप्त हुआ उसमें गुरुओं का सानिध्य प्राप्त कर आप मनुष्य जीवन को सार्थक करे।</p>
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		<title>जैन तीर्थ क्षेत्र मंदारगिरि पर्वत पर कब्जे का प्रयास : प्राचीन धरोहर को बचाओ  </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Dec 2023 10:03:13 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बिहार में मंदारगिरि पर्वत पर स्तिथ वासुपूज्य भगवान की तपस्थली पर चरणों के पास और मुख्य द्वार पर असामाजिक तत्वों के द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही है। जैन समाज के बंधुओं से अपील की जा रही है कि वे अपनी प्राचीन धरोहर को बचाने हेतु वहां पहुंचे और प्रशासन पर दबाव बनाए । [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बिहार में मंदारगिरि पर्वत पर स्तिथ वासुपूज्य भगवान की तपस्थली पर चरणों के पास और मुख्य द्वार पर असामाजिक तत्वों के द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही है। जैन समाज के बंधुओं से अपील की जा रही है कि वे अपनी प्राचीन धरोहर को बचाने हेतु वहां पहुंचे और प्रशासन पर दबाव बनाए । <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजेश जैन दद्दू और मयंक जैन की रिपोर्ट ।</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बिहार ।</strong> मंदारगिरि पर्वत पर स्तिथ वासुपूज्य भगवान की तपस्थली पर चरणों के पास और मुख्य द्वार पर असामाजिक तत्वों के द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही है. विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन ने बताया की कुछ लोगों ने वासुपूज्य भगवान की तपस्थली पर चरणों के पास और मुख्य द्वार पर लिखे गए शिला लेख पर रंग लगाकर रामझरोखा लिख दिया है. इस घटना पर तुरंत कार्रवाई हो इसके लिए तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सदस्य, भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों के जैन समाज के निवासी बंधु मंदारगिरि जल्द पहुंचे और अपनी प्राचीन प्राचीन धरोहर को बचाने हेतु प्रयास करें और प्रशासन पर पुरजोर दवाब बनाए.</p>
<p><strong>कब्जे का प्रयास </strong></p>
<p>ये सिर्फ पहाड़ों पर स्थित प्राचीन जैन तीर्थों पर पहले छोटे-छोटे मंदिर बनाने और उसके साथ चमत्कारिक कहानियां बनाकर लोगों को प्रभावित करने का मामूला तरीका बताया जा रहा है। साथ ही सरकारी पैसों का उपयोग करके रोपवे लगाकर और अन्य सुविधाएं बढ़ाकर कोशिश की जा रही है यहां लोगों का ज्यादा आना जाना बढ़ जाए, ताकि आसानी से कब्जा किया जा सके. जबकि शांतिप्रिय जैन समुदाय को डरा कर या राजनीतिक दबाव में चुप कराया जा रहा है। इसका एक उदाहरण मान सकते हैं जैसे गिरनार जी, पावागढ़, मंदारगिरि, राजगिरि जैन तीर्थ हैं।</p>
<p>इस परिस्थिति में मंदारगिरि पहुंचकर जैन समाज के बंधुओं से अपील की जा रही है कि वे अपने प्राचीन धरोहर को बचाने हेतु प्रशासन पर दबाव बनाए और विश्व जैन संगठन के साथ मिलकर इस मुद्दे पर कार्रवाई के लिए प्रयास करें।</p>
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		<title>बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा : चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य अजितसागर जी महाराज </title>
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		<pubDate>Wed, 06 Dec 2023 07:19:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है कौन हैं [&#8230;]]]></description>
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<p dir="ltr"><strong>श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है कौन हैं आचार्य श्री अजित सागर जी महाराज आइए जानते हैं ।<span style="color: #ff0000;">पढ़िए डॉ. अल्पना मारौरा “शुभि” इन्दौर का ये आलेख</span></strong></p>
<hr />
<p dir="ltr">प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का जन्म वि. सं. 1982 में मध्यप्रदेश के भोपाल नगर के पास भौंरा ग्राम में हुआ था। जबरचंद्र जी पिता एवं माता का नाम रूपाबाई था। उन्होंने आपका नाम राजमल रखा आपने कक्षा चौथी तक ही पढाई की, वि.सं. 200 में वीरसागरजी के प्रथम दर्शन करते ही आप 17 वर्ष की आयु में ही संघ में शामिल हो गए।</p>
<p dir="ltr">वि.सं. 2002 आपने झालरापाटन में आचार्य वीरसागरजी से सातवीं प्रतिमा के व्रत लिए। जैन धर्म की शिक्षा आर्यिका ज्ञानमती जी से ली, माता जी की प्रेरणा से आचार्य शिवसागरजी महाराज से वि. सं. 2018 को आपने मुनिदीक्षा ग्रहण की और आपका नाम रखा अजितसागर। आपने संस्कृत के पाँच हजार श्लोकों का संग्रह किया जो “सर्वोपयोगी श्लोक संग्रह&#8221; के नाम से प्रकाशित हैं । आचार्य धर्मसागर जी के समाधि के बाद 7 जून 1987 को उदयपुर में विशाल जनसमूह के सामने संघ के सानिध्य में आपको आचार्य शांतिसागर जी की परंपरा का चतुर्थ पट्टाधीश घोषित किया गया। आचार्य धर्मसागरजी के पश्चात् आप इस पद पर प्रतिष्ठित हुए और इस परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश कहलाये।</p>
<p dir="ltr">30 वर्ष के संयमी जीवन में आपने 10 मुनि, 7 आर्यिका, एक ऐलक, 3 क्षुल्लक तथा एक क्षुल्लिका दीक्षा दी, एवं अंत में वि.सं. 2047 पूर्णिमा के दिन ग्राम साबला में देह का त्याग किया। आपने अपने बाद मुनि वर्धमान सागरजी को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित करने का लिखित आदेश दिया और वर्धमानसागर जी को पंचम पट्टाधीश घोषित किया गया।</p>
<p dir="ltr">आचार्य श्री अजित सागर जी के  दीक्षित 4 शिष्य वर्तमान में हैं जिनमें मुनि श्री चिन्मय सागर जी और आर्यिका श्री चैत्यमती जी आचार्य वर्धमानसागर जी के संघ के साथ तथा दो शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी एवम आर्यिका श्री सौरभ मति जी सोनागिर जी में विराजमान हैं ।</p>
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