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	<title>बावनगजा सिद्ध क्षेत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>बावनगजा सिद्ध क्षेत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>अर्हम योग प्रणेता मुनि प्रणम्य सागर जी को वर्षायोग चातुर्मास हेतु चढ़ाया श्रीफल : बावनगजा ट्रस्ट ने कुशलगढ़ पहुंचकर किया आमंत्रण </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jul 2026 10:36:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ने कुशलगढ़ पहुंचकर अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ को बावनगजा में वर्षायोग चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट कर आमंत्रित किया। इस दौरान क्षेत्र के विकास कार्यों एवं आगामी महामस्तकाभिषेक पर भी चर्चा हुई। पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट धामनोद। दिगंबर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा ट्रस्ट कमेटी ने कुशलगढ़ पहुंचकर अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ को बावनगजा में वर्षायोग चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट कर आमंत्रित किया। इस दौरान क्षेत्र के विकास कार्यों एवं आगामी महामस्तकाभिषेक पर भी चर्चा हुई। <span style="color: #ff0000">पढ़िए श्रीफल साथी दीपक प्रधान की यह रिपोर्ट</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी &#8220;बिन्नू भैया&#8221; के नेतृत्व में ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्यों ने राजस्थान के कुशलगढ़ पहुंचकर अर्हम योग प्रणेता मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ को श्री सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में आगामी वर्षायोग चातुर्मास के लिए श्रीफल भेंट कर सादर आमंत्रण दिया।</p>
<p><strong>वर्षायोग के लिए किया आमंत्रित</strong></p>
<p>ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी ने बताया कि ट्रस्ट कमेटी की ओर से मुनिसंघ को श्री सिद्ध क्षेत्र बावनगजा में वर्षायोग चातुर्मास करने का आग्रह किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र में संचालित विकास कार्यों की जानकारी भी मुनि श्री के समक्ष प्रस्तुत की गई।</p>
<p><strong>महामस्तकाभिषेक और विकास योजनाओं पर चर्चा</strong></p>
<p>प्रतिनिधिमंडल ने आने वाले वर्षों में प्रस्तावित महामस्तकाभिषेक एवं विशाल मेले की तैयारियों सहित क्षेत्र की भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही यह भी निवेदन किया गया कि गुरुदेव के अभी तक बावनगजा क्षेत्र के दर्शन नहीं हुए हैं, इसलिए उनके मंगल आगमन की समाज को प्रतीक्षा है।</p>
<p><strong>मुनि श्री ने दिए मार्गदर्शन</strong></p>
<p>मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने ट्रस्ट पदाधिकारियों को क्षेत्र के विकास, धार्मिक गतिविधियों एवं सेवा कार्यों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए तथा धर्मप्रभावना के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संदेश दिया।</p>
<p><strong>ट्रस्ट के पदाधिकारी रहे उपस्थित</strong></p>
<p>इस अवसर पर ट्रस्ट के प्रमुख ट्रस्टी जुगल किशोर पाटनी, मनोज गोधा (अंजड़), जितेंद्र जैन (बड़वानी), निलेश रावका (मानावर), सुरेश गंगवाल (सिंघाना) सहित ट्रस्ट के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।</p>
<p><strong>धर्मप्रभावना की दिशा में महत्वपूर्ण पहल</strong></p>
<p>बावनगजा ट्रस्ट की इस पहल को क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों को सशक्त बनाने तथा वर्षायोग चातुर्मास की तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
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		<title>भगवान को पूजना सरल है, लेकिन भगवान की मानना कठिन है : मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज ने दी मंगल देशना  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 30 Dec 2025 13:49:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">धामनोद से पढ़िए, दीपक प्रधान की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धामनोद।</strong> भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के शिष्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज जी ने दिगंबर जैन मंदिर में धर्म सभा में व्यक्त किए। मुनिश्री ने आगे बताया कि हम भगवान की पूजा करते हैं लेकिन, हम भगवान पर और हमारी पूजा पर भरोसा नहीं करते हैं। अगर हमने भगवान की पूजा, अर्चना पूर्ण विश्वास, विवेक, श्रद्धा के साथ की है तो हमारे जीवन में कष्ट आ ही नहीं सकता। हमे कष्ट इसलिए आते है कि हम भगवान पर विश्वास ही नहीं करते। मुनिराज ने बताया कि हमें बड़े पुण्य योग से जैन कुल मिला है जो कि बहुत दुर्लभ है हमें पंच परमेष्ठि मिले हैं। उनका सम्मान करो। यथोचित सेवा, पूजा अर्चना करो।</p>
<p>जिससे कि आप के पाप कटेंगे और पुण्य मजबूत होगा। जो कि अगले भव भवांतर तक आपके साथ जाएगा। यदि यहां भी मायाचारी की तो वो कई जन्मों तक तुम्हे तुम्हारे कर्म नहीं छोड़ेंगे। धर्म क्षेत्र में कभी मायाचारी नहीं करना चाहिए। कर्म ने तीर्थंकरों को नहीं छोड़ा भगवान महावीर के जीव को भी नर्क भोगना पड़ा था कर्मों की वजह से। आप मंदिर में आते है तो पूजा अभिषेक आदि क्रियाएं करते हैं पर भाव नहीं होते हैं केवल एक दूसरे के देखने की वजह से करते हैं जिससे आपको आपकी क्रियाओं का लाभ नहीं मिलता। आप पुण्य करने आते है और यहां भी मायाचारी से पाप कर देते हो तो आपको पुण्य नहीं मिलता और कष्ट भोगते हो।</p>
<p>आपके नगर में साधु आते हैं तो पूरे नगर के पाप कटते हैं और आपके पुण्य करने के भाव होते हैं और यदि मेहमान आते हैं तो आप से अनजाने में भी पाप हो ही जाते हैं। अतः जब भी निर्ग्रन्थ साधु संत नगर में आए तो उनकी यथा योग्य आहार,बिहार,निहार, वैया वृत्ति करके पुण्य अर्जन करना साथ ही विनय ,विवेक और विशुद्धि का भी ध्यान रखना ताकि मुनिराज की चर्यानुकूल क्रिया करे। ताकि उनकी साधना में भी कोई दिक्कत ना हो।,प्रवचन पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। दोपहर को सामयिक धर्म की क्लास, प्रतिक्रमण हुआ एवं शाम को धर्म आधारित आनंद यात्रा संपन्न हुई। मुनि श्री संघ की आरती संपन्न हुई।</p>
<p><strong>अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या होगी </strong></p>
<p>मुनि संघ का 31 तारीख को बावनगजा सिद्ध क्षेत्र में प्रातः मंगल प्रवेश होगा। जहां मुनि श्री प्रणुत सागर जी ससंघ के सानिध्य में और वहां पूर्व से विराजित उपाध्याय श्री विभंजन सागर जी महाराज के सानिध्य में 31 दिसंबर 2025 की विदाई की रात में और नए वर्ष के आगमन में विश्व के सबसे पहले सबसे बड़े 84 फिट ऊंची भगवान ऋषभ नाथ के चरणों में अहिंसा कॉन्सेप्ट जैन भजन संध्या का भी किया गया है। इस भजन संध्या में देश की प्रसिद्ध भजन गायिका धन्य श्री जादू बिखेरेंगी।</p>
<p>1 जनवरी को प्रातः गुरु संघ सानिध्य में तीर्थ राज की वंदना की जाएगी। साथ ही 84 फिट उत्तुंग भगवान आदिनाथ के चरणाभिषेक और वृहद शांति धारा परम पूज्य मुनि श्री प्रणुत सागर जी महाराज के मुखारविंद से की जाएगी। इस अवसर पर लगभग चार राज्यों से गुरु भक्त आएंगे और धर्म लाभ लेंगे। शाम को मुनि संघ का प्रतिक्रमण गुरु भक्ति, भक्ति से परी पूर्ण आनंद यात्रा भी आयोजित की जाएगी। साथ ही मुनि संघ की और भगवान की आरती की जाएगी। यह जानकारी मनीष जैन द्वारा प्राप्त हुई ।</p>
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		<title>बावनगजा सिद्ध क्षेत्र में आदिश्वर महा अर्चना विधान हुआ : भक्तामर विधान में निमाड़-मालवा के भक्त जन हुए शामिल </title>
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		<pubDate>Sat, 15 Mar 2025 16:24:23 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर&#8230; बड़वानी। बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं। अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। <span style="color: #ff0000">बड़वानी से पढ़िए दीपक प्रधान की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बड़वानी।</strong> बावनगजा सिद्ध क्षेत्र पर विराजित आचार्यश्री विराग सागर जी के मूल संघ के मुनि श्री विवर्धन सागर जी और श्रमण श्री विश्वभद्र सागर जी महाराज के सानिध्य में आदिश्वर महा अर्चना भक्तामर विधान किया गया। इसमें बड़वानी और निमाड़,मालवा के अलावा पूरे देश से पधारे श्रावक और श्राविकाओं ने कमल जैन एंड पार्टी बड़वाह की मधुर धुन पर विधान संपन्न किया। ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष विनोद दोशी ने श्रावकों का आभार माना और अनुमोदना प्रकट की।</p>
<p><strong>11 हजार श्रीफल समर्पित किए</strong></p>
<p>इस अवसर पर सुबह बावनगजा के बड़े बाबा के चरणों में अभिषेक के बाद सहस्रनाम के पूजन के साथ 11 हजार श्रीफल समर्पित किए गए। इसके बाद आहार चर्या और सामयिक हुई। शाम को गुरु भक्ति प्रतिक्रमण हुआ। इस अवसर पर तीन संघ के लगभग 22 मुनि जिनमें एक आचार्य, आर्यिका, क्षुल्लक, क्षुल्लिका विराजमान हैं। यह जानकारी मनीष जैन ने दी।</p>
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