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	<title>बर्राे वाले बड़े बाबा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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		<title>शीतलधाम में नए जिनबिम्बों का पंचकल्याणक अगले माह संभव: आचार्य गुरुदेव की जयजयकार के साथ घोषणा का स्वागत </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 13:38:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> आचार्य श्री विद्यासागरजी एवं आचार्य श्री समयसागरजी महाराज के आशीर्वाद से शीतलधाम में विराजमान बर्राे वाले बड़े बाबा को उच्चस्थान पर विराजमान कराने एवं नवीन जिनबिम्बों का पंचकल्याणक कराने के लिए मार्च माह की संभावना है। सकल दि. जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया नगर में विराजमान मुनिश्री संभव सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में श्री सकल दि. जैन समाज एवं श्री शीतलविहार न्यास के समस्त ट्रस्टियों एवं विभिन्न जिनालयों के पदाधिकारियों तथा मुनिसेवक संघ एवं समस्त महिला मंडलों की बैठक में जैसे ही मुक्तागिरी से पधारे प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया ने यह घोषणा की कि अगले माह मार्च में पंचकल्याणक एवं नवीन बेदी पर बर्राे बाले बाबा विराजमान हो सकते हैं। हर्ष ध्वनि के साथ आचार्य गुरुदेव की जयजयकार के साथ घोषणा का स्वागत किया गया गुरुदेव से आशीर्वाद लेने हेतु तुरंत मुक्तागिरी जाने का निर्णय लिया गया। इस अवसर पर मुनि श्री सम्भवसागर महाराज एवं मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज, मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज के सानिध्य में हुई इस बैठक में सभी पदाधिकारियों ने नवीन जिनबिंब के पंचकल्याणक हेतु आचार्य श्री एवं विराजमान मुनिसंध से निवेदन किया तथा समाज ने संयुक्त रूप से इस कार्य को वृहद रूप से कराने का संकल्प लिया।</p>
<p><strong>आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद तो आपके पर बरस ही रहा</strong></p>
<p>मुनि श्री सम्भवसागर महाराज ने कहा कि जिस प्रतिमा की स्वयं गुरुदेव ने आकर मंगल अगवानी की है। वह प्रतिमा कोई साधारण प्रतिमा नहीं है। भगवान श्री आदिनाथ बर्राे वाले बाबा आपके नगर के इष्ट देवता है और उनको अपने नये आसन पर विराजमान करने के लिये पूरे विदिशा जिले को कमर कसकर तैयार हो जाना चाहिए। उन्होंने स्मरण कराते हुए कहा कि जैसे विदिशा वालों ने 2006 में कुंडलपुर में जाकर जिस प्रकार से बड़े बाबा को नये आसन पर विराजमान कराने में प्रमुख भूमिका निभाई थी तो यह तो आपके अपने विदिशा नगर के ही बर्राे वाले बड़े बाबा की बात है। अतः सभी को तन मन और धन से अपने आपको तैयार करना है। आचार्य गुरुदेव का आशीर्वाद तो आपके पर बरस ही रहा है।</p>
<p><strong>पंचकल्याणक हेतु निवेदन हेतु भक्तगण मुक्तागिरी के लिये रवाना हुए</strong></p>
<p>साथ ही साथ मुक्तागिरी में विराजमान वर्तमान आचार्यश्री समयसागर जी महाराज ने भी विदिशा वालों पर अपनी करुणा को बरसाई है। इस अवसर पर प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया ने कहा कि बर्राे वाले बाबा का जो रूप हम सभी के सामने है। वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। आचार्य गुरुदेव के सामने जब 2008 में नये मंदिर में बड़े बाबा को विराजमान करने के लिये मुक्तागिरी में विराजमान आचार्य श्री समयसागर महाराज से आशीर्वाद के लिए यह निश्चय किया गया कि श्री शीतलविहार न्यास कमेटी तथा श्री सकल दि. जैन समाज आचार्य गुरुदेव से पंचकल्याणक हेतु निवेदन हेतु भक्तगण मुक्तागिरी के लिये रवाना हुए।</p>
<p><strong>जितने संसाधन बढे़ है वह दुःख को बढाने वाले हैं</strong></p>
<p>प्रातः प्रवचन सभा में मुनि श्री ने कहा कि संसार के मकरजाल से ऊपर उठोगे तभी आप अपने जीवन का उद्धार कर सकते है। उन्होंने कहा कि काम भोग में क्षणिक सुख है, लेकिन बहु काल तक दुःख ही दुःख है। जिसको संसार अच्छा लगता है वह परिग्रह को बढाने में ही लगा रहता है। उन्होंने कहा कि कितनी भी धन संपत्ति बढ़ा लो वह आपके काम आने वाली नहीं है और जिनके लिये आप बड़ा रहे हो वह भी उसका उपभोग कर पायेंगे यह भी पक्का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह मशीनी युग है। हमारा वैभव हमारा दिखावा ही दूसरों को चोरी करने के लिये उकसा रहे हैं। सभी अनर्थों का मूल्य यह परिग्रह ही है। जितने संसाधन बढे़ है वह दुःख को बढाने वाले हैं।</p>
<p><strong>हम रील लाइफ में अपनी रियल लाइफ को ही भूल चुके</strong></p>
<p>उन्होंने कहा कि हम रील लाइफ में अपनी रियल लाइफ को ही भूल चुके हैं। आजकल तो यह पता ही नहीं चलता कि कौन का किससे क्या संबंध है? मुनि श्री ने एक सत्य घटना बताते हुए कहा कि मेरे संपर्क में एक लड़का था। उसकी सगाई हो गई वह लड़का परेशान था। उसने आकर अपनी परेशानी बताई और कहा है कि जिससे हमारी सगाई हुई वह मेरा फोन नहीं उठाती। उसका फोन हमेशा बिजी आता है। हमने उसको समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन, उसके मन में जो संदेह का जन्म हुआ। उससे उनकी सगाई टूट गई। मुनि श्री ने कहा कि जितने संसाधन बढ़े हैं। उनकी भौतिक चकाचौंध में दुःख के कारण इतने अधिक हो गए है कि सुख कहीं दिखाई ही नहीं देता।</p>
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