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	<title>बर्राे बाले बाबा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>बर्राे बाले बाबा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>घर से ऊब होने लगे तो समझना आपका संसार बहुत छोटा: मुनि श्री संभवसागर जी ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में दी मंगल देशना  </title>
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		<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 08:23:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[संसारी प्राणी का मन बहुत जल्दी किसी भी अच्छे स्थान से ऊब जाता है और उसे अपने उस घर की चार दीवारी याद आने लगती है। भले ही वह झोंपड़ी में ही क्यों न रहता हो। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>संसारी प्राणी का मन बहुत जल्दी किसी भी अच्छे स्थान से ऊब जाता है और उसे अपने उस घर की चार दीवारी याद आने लगती है। भले ही वह झोंपड़ी में ही क्यों न रहता हो। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> संसारी प्राणी का मन बहुत जल्दी किसी भी अच्छे स्थान से ऊब जाता है और उसे अपने उस घर की चार दीवारी याद आने लगती है। भले ही वह झोंपड़ी में ही क्यों न रहता हो। यह उद्गार मुनि श्री संभवसागर जी ने प्रातःकालीन प्रवचन सभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यदि आपको अपने घर की याद सताने लगे तो अभी आपका संसार बहुत बड़ा है और घर से ऊब होने लगे तो समझना कि आपका संसार बहुत छोटा बचा है। मुनि श्री ने कहा कि जिसको अपना घर ही अच्छा लगता है। वह कभी अपने घर को नहीं छोड़ सकता। उन्होंने संसार चक्र की बात करते हुए कहा कि संसार शाश्वत नहीं है। जिन-जिन का नाम इस घर पर लिखा था। वह कोई भी जीवित नहीं है। उन सभी को यह संसार छोड़कर जाना पड़ा और आपको भी एक दिन यह घर छोड़ना पडे़गा। जिस दिन मौत की सहजादी आएगी तो जो आपके सबसे प्रिय थे, वही कह देंगे कि जल्दी उठाओ, जल्दी उठाओ वरना बदबू आ आएगी।</p>
<p><strong>22 युवाओं ने आचार्यश्री समयसागर जी से मुनि दीक्षा ली</strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि जब यह संसार और घर शाश्वत नहीं है, फिर भी हम कहते हैं कि यह मेरा और यह तेरा यह कहते-कहते कई पीढ़ियां गुजर जाती है और कोर्ट में केश चलते रहता है और एक क्षण ऐसा भी आता है कि व्यक्ति ही इस संसार से अलविदा कह देता है। मुनि श्री ने कहा कि जिसको वैराग्य हो जाता है, वह उम्र के बंधन को नहीं देखता। अभी-अभी आप सभी लोगों ने देखा कि मुक्तागिरी में 22 युवाओं ने आचार्यश्री समयसागर जी से मुनि दीक्षा ली। उसमें आपके नगर के भी दो युवा थे।</p>
<p><strong>1976 कुंडलपुर चातुर्मास का प्रसंग सुनाया </strong></p>
<p>मुनि श्री केवल्यसागर और मुनि श्री गरिष्ठ सागर मुनि श्री ने कहा कि जिनको संसार से अरुचि हो जाती है, उनको कितना भी रोको वह घर में रुक ही नहीं सकते। उनके मन में ही वैराग्य उभर जाता है। उन्होंने 1976 कुंडलपुर चातुर्मास का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उस समय आचार्य श्री विद्यासागरजी की उम्र बहुत छोटी थी। लगभग तीस वर्ष के थे। संघ बहुत छोटा था। चार क्षुल्लकों में वर्तमान आचार्यश्री समय सागर जी, मुनिश्री योगसागर जी, मुनिश्री नियमसागरजी तथा मुनिश्री प्रवचन सागर जी ही थे। उस समय के चातुर्मास में जैन जगत के विद्वान जो कि शास्त्रों के ज्ञाता थे। वह जगमोहन लाल शास्त्री बड़े पंडित जी के नाम से मशहूर थे। उन्होंने आचार्य श्री के सामने अपनी जिज्ञासा रखी कि आपने अभी संसार को कहां देखा? जो इतनी छोटी उम्र में वैराग्य हो गया तो आचार्य श्री ने जबाब दिया कि आप लोगों के उतरे हुए चेहरों को देखकर हमें समझआ गया था कि संसार में कुछ भी नहीं दुःख ही दुःख है।</p>
<p><strong>176 मुनि दीक्षा तथा 250 से अधिक आर्यिका दीक्षा दी </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री की यात्रा सदलगा से 1966 में शुरु हुई और 1968 में मात्र 22 वर्ष की उम्र में उनकी मुनि दीक्षा हो गई। 1972 में तो आचार्य दीक्षा ही हो गई थी। छोटी उम्र से ही उन्होंने शास्त्रों का अध्ययन अध्यापन प्रारंभ किया। चारों क्षुल्लकों के साथ उन्होंने बड़े-बड़े ग्रंथों को पढ़ना शुरु किया। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य श्री ने जब घर छोड़ा तो उनकी उम्र मात्र 18 वर्ष की उम्र थी। मुनि श्री ने कहा कि आचार्य गुरुदेव ने अपने जीवन काल में 176 मुनि दीक्षा तथा 250 से अधिक आर्यिका दीक्षा दी तथा हजारों की संख्या में ब्रह्मचारी भाई एवं बहन आज संयम के पथ पर चल रही हैं। इतने बड़े संघ का संचालन करना भी किसी आश्चर्य से कम नहीं था।</p>
<p><strong>बैठक में पदाधिकारियों को किया आमंत्रित </strong></p>
<p>जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि शीतलधाम में विराजमान बर्राे बाले बाबा श्री आदिनाथ भगवान का नवीन मंदिर बनकर तैयार हो चुका है। इस नवीन मंदिर जी में नई बेदी पर बर्राे बाले बाबा भगवान श्री आदिनाथ स्वामी को नए आसन पर विराजमान करने तथा नवीन जिनबिंब के पंचकल्याणक महामहोत्सव की तिथि निश्चित करने के लिए सोमवार को नगर में विराजमान मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य तथा प्रतिष्ठा सम्राट विनय भैया के निर्देशन में संयोजना के लिए मीटिंग श्री शांतिनाथ जिनालय स्टेशन जैन मंदिर में रखी गई। इस मीटिंग में श्री शीतलविहार न्यास के सभी पदाधिकारी एवं न्यासी गण,सकल दिगंबर जैन समाज समिति के सभी पदाधिकारियों के साथ सभी जिनालयों के पदाधिकारियों, मुनि सेवक संघ, महिलामंडल, समग्र पाठशाला समिति से निवेदन है कि बैठक में उपस्थित रहंे। सभी पाठशालाओं के शिक्षक शिक्षिकाओं से निवेदन है कि दोपहर 1.30 बजे पधारने की कृपा करें। जिससे हम सभी मिलकर नगर के इस उत्सव को ऐतिहासिक उत्सव बना सकें।</p>
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		<title>भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाती है : मुनिश्री संभवसागरजी ने विदिशा के वाशिंदों को भक्ति से जुट जाने को कहा  </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 11:17:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;  विदिशा। बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> विदिशा।</strong> बर्राे वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है। पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किए। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से समग्र पाठशाला समिति एवं नगर के महिला मंडलों के आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज का संगीतमय पूजन के साथ धर्मसभा प्रारंभ होती है। रविवार को भक्ति की इस गंगा में गुरु नाम, आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज पर लिखा विधान, जिसे मुनि श्री निस्सीम सागरजी महाराज ने लिखा है को 7.30 बजे से किया जा रहा है। जिसमें सभी महिला मंडलों तथा पुरुषों को शामिल होना है। मुनि श्री संभवसागरजी ने कहा कि पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ति की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आपके नगर के शीतलधाम में आपके इष्टदेव बर्राे वाले बाबा का नया मंदिर लगभग तैयार है। जैसे कुंडलपुर में जब बड़े बाबा को उच्चाशन पर विराजमान किया गया था तो कुंडलपुर महोत्सव मनाया गया था उसी तर्ज पर विदिशा वालों आप लोग भी कमर कसके तैयार हो जाओ। आप सभी को बर्राे बाले बाबा को पुराने स्थान से नए मंदिर जी में विराजमान करना है तो शीतलधाम महोत्सव मनाने के लिए विदिशा ही नहीं बल्कि समूचे भारत के श्रद्धालुओं को आमंत्रित करना होगा। जिससे हम सभी मिलकर आचार्य गुरुदेव के सानिध्य में यह महा महोत्सव मना सकें।</p>
<p><strong>आचार्यश्री समयसागर जी से निवेदन के लिए जबलपुर जाएंगे समाजजन</strong></p>
<p>आचार्य श्री समयसागर जी महाराज तिलवारा घाट जबलपुर में विराजमान हैं। उनसे निवेदन करने समाज तथा शीतलधाम के प्रतिनिधि जबलपुर जा रहे हैं। मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि जैसे पूर्व में बर्रों वाले बाबा जब विदिशा आए थे तो उनकी मंगल अगवानी आचार्य श्री विद्यासागरजी ने की थी तो आपके नगर के इष्टदेव बर्राे वाले बाबा नए मंदिर जी में विराजमान हो रहे हैं। आचार्य श्री समयसागरजी महाराज उनकी अगवानी करें। ऐसा निवेदन आप लोगों को जाकर करना है। उन्होंने कहा कि अभी एक-डेढ़ माह का समय है, ऐसी भक्ति करो कि भक्ति की गर्मी से पूष की सर्दी भी घट जाए और आचार्यश्री जबलपुर से सीधे विदिशा चले आएं। मुनिश्री ने श्रमण श्रुतं ग्रंथ की वाचना प्रारंभ करते हुए कहा कि यह एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जैन धर्म और दर्शन के सभी महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित हैं। जिसे आचार्य विनोबा भावे ने जैन धर्म का सार मानते हुए अन्य धर्म के धार्मिक ग्रंथों के साथ सन 1974 में सम्मिलित किया था। जिसमें 756 गाथाएं हैं। जिसका पद्यानुवाद आचार्य श्री विद्यासागर जी ने जैन गीता के रूप में करके बहुत ही सरल और सुग्राह्य कर दिया है।</p>
<p><strong>प्रश्नमंच के माध्यम से सही जबाव देने वाले पुरस्कृत </strong></p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि शीतलधाम में भगवान आदिनाथ स्वामी (बर्राे बाले बाबा) की प्रतिमा, जो हजारों वर्ष पुरानी है। उन्होंने इस प्रतिमा में खुद इतनी अधिक एनर्जी महसूस की है। उन्होंने कहा कि उसमें आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है और वह आप सभी के इष्टदेव हैं। उनको जब नए मंदिर जी में विराजमान किया जाए तो पूरा विदिशा ही नहीं बल्कि समूचा बुंदेलखंड इसमें शामिल हो। ऐसी तैयारियां आप सभी लोगों को अभी से करना होगी। तभी आप इसे वृहद रूप प्रदान कर पाओगे। इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रश्नों के माध्यम से प्रश्नमंच कार्यक्रम को संचालित किया एवं सही उत्तर देने वालों को समाज बंधुओं ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर मुनि श्री संस्कार सागरजी महाराज भी मंचासीन थे। संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया।</p>
<p><strong>प्रतिदिन पूजन में भाग ले रहे श्रद्धालु और महिला मंडल </strong></p>
<p>प्रतिदिन प्रातः 8.30 बजे से आचार्य श्री का संगीतमय पूजन विदिशा नगर के विभिन्न महिला मंडलों द्वारा किया जा रहा है। सकल दि. जैन समाज का आग्रह है कि सभी महानुभाव समय पर पधारें एवं भक्ति की इस गंगा में पुण्य लाभ अर्जित करें। शंका समाधान प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज की प्रेरणा से पंचकल्याणक कमेटी राहतगढ़ के द्वारा दयोदय महासंघ, मध्यभारत गुणायतन, तथा मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी का तिलक, पगड़ी एवं अंगवस्त्र पहनाकर सम्मान किया गया।</p>
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