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	<title>बदनावर वर्द्धमानपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<title>बदनावर वर्द्धमानपुर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पीएम मित्र पार्क के जरिये इतिहास दोहराएगा बदनावर वर्द्धमानपुर : ऐतिहासिकता के सहारे वैश्विक बनने की तैयारी  </title>
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		<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:46:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कहते हैं कि समय बीतता है और इतिहास पुनः अपने आप को दोहराता है। हम यहां बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा धार जिले के ऐतिहासिक नगर वर्द्धमानपुर बदनावर के भैंसोला ग्राम में पीएम मित्र पार्क के उद्घाटन अवसर की। बुधवार को लिखा जाएगा इतिहास। इसके दुबारा हम सब बनेंगे साक्षी। इंदौर से [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>कहते हैं कि समय बीतता है और इतिहास पुनः अपने आप को दोहराता है। हम यहां बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा धार जिले के ऐतिहासिक नगर वर्द्धमानपुर बदनावर के भैंसोला ग्राम में पीएम मित्र पार्क के उद्घाटन अवसर की। बुधवार को लिखा जाएगा इतिहास। इसके दुबारा हम सब बनेंगे साक्षी। <span style="color: #ff0000">इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर/बदनावर।</strong> कहते हैं कि समय बीतता है और इतिहास पुनः अपने आप को दोहराता है। हम यहां बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा धार जिले के ऐतिहासिक नगर वर्द्धमानपुर बदनावर के भैंसोला ग्राम में पीएम मित्र पार्क के उद्घाटन अवसर की। बुधवार को लिखा जाएगा इतिहास। इसके दुबारा हम सब बनेंगे साक्षी। संयोगवश बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी का जन्म दिवस भी है। एक समय था जब मध्य प्रदेश में बदनावर नगर का नाम कपास उत्पादन क्षेत्र में गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराता रहा था। इस नगर के नाम से बदनावर नंबर वन कपास का बीज इजाद किया गया था। यहां की फर्म नंदराम जवाहर लाल जिनिंग फेक्ट्री प्रदेश में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। लगभग 80-90 वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका में रही नंदराम जवहरीलाल जीनिगं फैक्ट्री के साथ ही लालचंद वल्लभराज अग्रवाल जीनिगं फैक्ट्री, मार्केटिंग सोसायटी, गोपाल कॉटन, सिंगोली वाली जीनिगं फैक्ट्री और तिरुपति जीनिगं फैक्ट्री ने बदनावर में कपास व्यवसाय में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बदनावर में कपास अनुसंधान केंद्र में कार्यरत वैज्ञानिक परमार साहब ने बदनावर नंबर वन बीज पर अनुसंधान करके इसे विश्वव्यापी बनाया। वरिष्ठ समाजसेवी पवन भड़तक्या बताते हैं कि नगर में तैयार किए गए बीज को शासन द्वारा खरीदा जाता था। वहीं बदनावर की ख्याति यहां पर कपास की गाड़ियां लेकर आने वाले किसानों को किए जाने वाले नगदी पेमेंट के रूप में थी। इसी वजह से महाराष्ट्र और गुजरात तक का माल बदनावर मंडी में आता था। वही यहां की मंडी में तोल की गारंटी हुआ करती थी यह विश्वास ही दूर-दूर से किसानों को यहा तक खींचकर लाता था।</p>
<p><strong>काटन किंग सर सेठ हुकुमचंद की धाक लंदन तक थी </strong></p>
<p>यूं देखा जाए तो मध्य प्रदेश कपास उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में गिना जाता रहा है। प्रदेश में लगभग 18 जिलों की भूमि पर कपास उत्पादन किया जाता है। जानकारी के अनुसार करीब 6 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में हर साल लगभग 24 लाख टन कपास पैदा होता है। वहीं देश में जितना ऑर्गेनिक कॉटन पैदा होता है। उसका बहुत बड़ा हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत अकेले मध्य प्रदेश से आता है। यही वजह है कि वस्त्र उद्योग के लिए मध्य प्रदेश सबसे उपयुक्त क्षेत्र साबित हुआ है। जिसका एक सशक्त उदाहरण अंग्रेजों के जमाने की इंदौर की कपड़ा मिले थी जो एक समय में काटन किंग सर सेठ हुकुमचंद के माध्यम से संपूर्ण भारत ही नहीं लंदन तक अपनी धाक जमाए हुए थी। इन सभी ऐतिहासिक तथ्यों पर दृष्टिपात किया जाए तो हम पाएंगे कि धार जिले का पीएम मित्र पार्क उस गौरवमई इतिहास का सुपरिणाम है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक से वैश्विक की ओर बढ़ते कदम </strong></p>
<p>वर्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी, राजेश जैन और स्वप्निल जैन आदि सदस्य बताते हैं कि बदनावर पुरातन नाम वर्द्धमानपुर एक समय धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से सम्पूर्ण भारत वर्ष में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती थी। उस वर्द्धमानपुर नगरी में समृद्धि (लक्ष्मी) अपनी सखी सरस्वती के साथ सदियों तक निवास करती थी। जैसा कि यहां रचे गए धर्म ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। जैसा कि हम जानते हैं कि हर समय एक सा नहीं होता। उसमें परिवर्तन होना स्वाभाविक है और यही युक्ति प्राचीन वर्द्धमानपुर के साथ भी चरितार्थ हुई समय बदला। आक्रांताओं ने संपूर्ण धार्मिक सामाजिक सांस्कृतिक और व्यापारिक वैभवशाली इतिहास को धराशायी कर दिया। यहां तक कि नाम भी गुमनामी की गर्त में खो गया। एक समय ऐसा भी था जब यह समृद्ध नगर एक छोटे-से गांव टप्पे जैसी स्थिति में भी नहीं रहा।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक वर्द्धमानपुर अपनी वैश्विक पहचान बनाने की ओर अग्रसर</strong></p>
<p>यह हजार वर्ष की गुमनामी का दाग़ स्वतंत्रता प्राप्ति के महज तीन-चार साल बाद ही मिटना शुरू हुआ। जब वर्ष 1950 में पत्थरों पर लिखा गया इतिहास धरती मां के गर्भ से बाहर मूर्तियों के रूप में बाहर आना शुरू हुआ। एक नकारात्मक बद नाम (बदनावर) उसका वास्तविक नाम वर्द्धमानपुर प्रकाश में आया। यहां से प्राप्त मूर्ति लेखों और प्रचलन में आना शुरू हुआ। जैसे-जैसे वर्द्धमानपुर नाम का प्रयोग बढ़ा। वैसे-वैसे यह नगर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होता गया और इसका वैभव वृद्धिगत होने लगा। आज जब हम उस ऐतिहासिक पल का अमृत काल (1950-2025) मना रहे हैं तब यह ऐतिहासिक नगर वर्द्धमानपुर अपनी वैश्विक पहचान बनाने की ओर अग्रसर इस पीएम मित्र पार्क के जरिए होने जा रहा है। विश्व के लिए भले ही नाम का कोई महत्व नहीं होता हो परन्तु, भारत और भारतीय संस्कृति में नामों से ही संस्कृति की परिभाषा लिखीं जाती रही है। यह सिर्फ काल्पनिक तथ्य नहीं है। यह आधारभूत सत्य है।</p>
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		<title>विश्व संग्रहालय दिवस के पूर्व जैन संग्रहालय का अवलोकन: वर्धमानपुर शोध संस्थान के पदाधिकारियों ने किया दौरा </title>
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		<pubDate>Tue, 20 May 2025 05:50:22 +0000</pubDate>
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<p><strong>नगर में पुरातत्व मामले की जानकारी रखने वाली संस्था वर्धमानपुर शोध संस्थान के पदाधिकारियों ने विश्व संग्रहालय दिवस के एक दिन पूर्व उज्जैन नगर के प्रसिद्ध जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय का दौरा किया। उन्होंने वहां पर प्रदर्शित ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया। साथ ही बदनावर वर्द्धमानपुर नगर से प्राप्त मूर्तियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। <span style="color: #ff0000">बदनावर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बदनावर (वर्द्धमानपुर)</strong>। नगर में पुरातत्व मामले की जानकारी रखने वाली संस्था वर्धमानपुर शोध संस्थान के पदाधिकारियों ने विश्व संग्रहालय दिवस के एक दिन पूर्व उज्जैन नगर के प्रसिद्ध जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय का दौरा किया। उन्होंने वहां पर प्रदर्शित ऐतिहासिक धरोहरों का अवलोकन किया। साथ ही बदनावर वर्द्धमानपुर नगर से प्राप्त मूर्तियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के पवन पाटोदी ने बताया कि नगर की ऐतिहासिक धरोहर को मालवा प्रांतीय सभा की ओर से संचालित संग्रहालय में सहेज कर रखा हुआ है, जो प्रशंसनीय है। नगर में वर्तमान में भी बड़ी संख्या में पुरातत्व महत्व की सामग्री इधर-उधर बिखरी हुई हैं। नगरवासियों को यहां संग्रहालय की कमी खलती है। संस्थान के राजेश जैन फुलजी बा, ओम पाटोदी और स्वप्निल जैन ने उज्जैन संग्रहालय में बदनावर की लेख युक्त प्रतिमाओं के बारे में संस्थान के अन्य सदस्यों को जानकारी दी।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-81192" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005.jpg" alt="" width="1600" height="1501" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-300x281.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-1024x961.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-768x720.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-1536x1441.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-990x929.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0005-1320x1238.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />जिनमें बदनावर के प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर का उल्लेख है। साथ ही अपने नगर की विरासत को जानने के लिए एक बार जयसिंहपुरा संग्रहालय के अवलोकन की बात कही। विश्व संग्रहालय दिवस मनाने कि एक मात्र उद्देश्य भी यही है कि हम हमारे नगर, क्षेत्र, प्रदेश और देश की प्राचीन धरोहर की जानकारी रखते हुए उन्हें सहेजने का समुचित प्रयास करें।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-81190" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007.jpg" alt="" width="1600" height="1599" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-300x300.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-1024x1024.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-150x150.jpg 150w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-768x768.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-1536x1536.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-65x65.jpg 65w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-990x989.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/05/IMG-20250520-WA0007-1320x1319.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></p>
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		<title>यक्ष-यक्षिका के मध्य नवग्रहो के चित्रण दुर्लभ हैं : बदनावर वर्द्धमानपुर की भगवान श्री पार्श्वनाथ जी महत्वपूर्ण 7 प्रतिमाएं </title>
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		<pubDate>Mon, 05 Aug 2024 15:09:10 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 2801वां निर्वाण कल्याणक महोत्सव आगामी 11 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। देश में भगवान पार्श्वनाथ की कई प्राचीन प्रतिमाएं भूगर्भ से प्राप्त हुई हैं और कई प्राचीन गुफा मंदिरों में भी भगवान पारसनाथ की अति प्राचीन एवं दुर्लभ प्रतिमाएं विराजमान हैं। पढ़िए ओम पाटोदी की [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 2801वां निर्वाण कल्याणक महोत्सव आगामी 11 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। देश में भगवान पार्श्वनाथ की कई प्राचीन प्रतिमाएं भूगर्भ से प्राप्त हुई हैं और कई प्राचीन गुफा मंदिरों में भी भगवान पारसनाथ की अति प्राचीन एवं दुर्लभ प्रतिमाएं विराजमान हैं। <span style="color: #ff0000">पढ़िए ओम पाटोदी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>इंदौर।</strong> जैन धर्म के तेईसवें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ जी का 2801वां निर्वाण कल्याणक महोत्सव आगामी 11 अगस्त रविवार को मनाया जाएगा। देश में भगवान पार्श्वनाथ की कई प्राचीन प्रतिमाएं भूगर्भ से प्राप्त हुई हैं और कई प्राचीन गुफा मंदिरों में भी भगवान पारसनाथ की अति प्राचीन एवं दुर्लभ प्रतिमाएं विराजमान हैं। भगवान पारसनाथ की प्रतिमाओं में अद्भुत शिल्प सौरभ भी देखने को मिलता है। सर्प फणावली से अच्छादित प्रतिमाएं और पार्श्वनाथ जी के साथ यक्ष-यक्षिका धरणेद्र पद्मावती का अंकन भी प्रचुर मात्रा में प्राप्त होता है। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि इंदौर महानगर से 95 किलोमीटर रतलाम से 40 किलोमीटर एवं धार जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक नगर बदनावर जिसका प्राचीन नाम वर्द्धमानपुर रहा है, के भूगर्भ से लगभग 75 वर्ष पहले कई जिनेन्द्र प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं, जिसमें भगवान पारसनाथ की सात प्राचीन प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थी। ये प्रतिमाएं 12-13वीं से लेकर 17-18 सदी की हैं, जो कि वर्तमान में उज्जैन के जयसिंहपुरा जैन संग्रहालय में संग्रहित हैं। ये प्रतिमाएं अलग-अलग और पाषाण प्रस्तर की बनाई हुई हैं।</p>
<p>पाटोदी ने बताया कि इसमें एक दुर्लभ प्राचीन प्रतिमा है, जो हरे बेसाल्ट प्रस्तर से निर्मित है एवं लगभग 12-13 शताब्दी की है इसमें भगवान श्री पार्श्वनाथ जी के साथ चार तीर्थंकर प्रतिमाएं उत्किर्ण है। सप्त फणो के साथ शीर्ष पर त्रिछत्रावली और दोनों ओर अभिषेक करते हुए गज बनें है। इसी तरह निचे दायीं ओर यक्षिका पद्मावती एवं बायीं ओर यक्ष धरणेन्द्र और मध्य में नवग्रह बनये गये है। इस प्रतिमा में जो यक्ष-यक्षिका के मध्य नवग्रहों के चित्रण के साथ ही तीर्थंकर भगवान का भावाकंन प्रस्तुत किया गया है वह इस प्रतिमा की महत्वपूर्ण विशेषता है जो इसे दुर्लभ बनाता है। इनके अलावा जो पांच प्रतिमाएं हैं उनमें एक-एक पंक्ति का लेख अंकित है, जिसमें इनकी प्रतिष्ठा का समय विक्रम संवत 1548 (ई.सन् 1491) उत्कीर्ण है। वहीं एक प्रतिमा 17-18 शताब्दी की है। ये सभी छह प्रतिमाएं थोड़े से रंग के हेरफेर के साथ सफेद संगमरमर की हैं। सभी पर सर्प फणावली बनी हुई हैं।</p>
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