<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>प्रातःकालीन धर्मसभा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<atom:link href="https://www.shreephaljainnews.com/tag/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%83%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%AD%E0%A4%BE/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
	<lastBuildDate>Sat, 21 Feb 2026 05:41:13 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/09/cropped-shri-32x32.png</url>
	<title>प्रातःकालीन धर्मसभा &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
	<link>https://www.shreephaljainnews.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है: मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने धर्मसभा में मुनिदीक्षा की क्रियाओं को सूक्ष्मता से समझाया  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 05:41:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Gyansagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shantisagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shivsagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Samaysagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Veersagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Vidyasagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Arihant Vihar]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[jain samachar]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Morning Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[munidiksha]]></category>
		<category><![CDATA[Munishri Sambhavsagarji]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[अरिहंत विहार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य ज्ञानसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य विद्यासागर जी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य वीरसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शांतिसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य शिवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री समयसागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन मंदिर]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातःकालीन धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिदीक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनिश्री संभवसागरजी]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=100346</guid>

					<description><![CDATA[मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; विदिशा। मोक्ष [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए,राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मोक्ष मार्ग आपके परिणामों के बैलेंस का मार्ग है। यदि आपने अपने अंदर के परिणामों का बैलेंस बनाकर नहीं रखा तो आप कभी भी विचलित हो सकते हैं। यह उद्गार मुनिश्री संभवसागरजी महाराज ने अरिहंत विहार दिगंबर जैन मंदिर में प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने सर्कस का उदाहरण देते हुए कहा कि आप लोगों ने देखा होगा कि किस प्रकार से खिलाड़ी बैलेंस बनाते हुए खेल दिखाता है। जरा सी चूक उसकी जानलेवा सिद्ध हो सकती है। उसी प्रकार साधक को अपनी दैनिक क्रिया करते समय अपने 28 मूलगुणों तथा पंच महाव्रतों के पालन का पूर्ण ध्यान रखना पड़ता है। मुनि श्री ने कहा कि कल आप लोगों ने देखा होगा किस प्रकार से आचार्य श्री समयसागर महाराज ने मूल संघ के संस्थापक आचार्य कुंद-कुंद की वीतरागी निर्ग्रंथ परंपरा में आचार्य शांतिसागरजी, आचार्य वीरसागरजी, आचार्य शिवसागरजी, आचार्य ज्ञानसागरजी की परंपरा के आचार्य विद्यासागर जी की परंपरा का निर्वाहन करते हुए मुक्तागिरी में नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-100350" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg" alt="" width="300" height="99" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-300x99.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-1024x339.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-768x255.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010-990x328.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2026/02/IMG-20260221-WA0010.jpg 1080w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>दीक्षा से पहले क्षमायाचना करते हैं</strong></p>
<p>वर्तमान के संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज जब 22 साधकों को निर्ग्रन्थ मुनि दीक्षा प्रदान कर रहे थे तो ऐसा लगा कि समय मानो थम सा गया है, विदिशा से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने यह दृश्य प्रत्यक्ष देखा और बड़ी संख्या में सभी लोग अपने घरों पर बड़ी टीवी पर विद्याकुल में वृद्धि के दृश्यों को देख रहे थे। मुनिश्री ने दीक्षा विधि को बताते हुए कहा कि दीक्षा देने के पूर्व सभी साधक संसार में रहते हुए राग द्वेष के निमित्त जो भी परिणाम उनके विचलित होते हैं। वह सभी सांसारिक संबंधों जैसे अपने गृहस्थ जीवन के माता-पिता, भाई बंधु एवं सभी परिवारी जन एवं इष्टमित्रों एवं समस्त जीवों से क्षमायाचना करते हैं तथा सभी को क्षमा प्रदान करते हैं। इसके पश्चात ही दीक्षा निधि को प्रारंभ होती है। इसके बाद आचार्य गुरुदेव गंधोदक, केसर और कपूर मिश्रित उबटन लगाकर जैसे भगवान की प्रतिष्ठा की जाती है कि उस अनुसार केशलोच विधि संपन्न कर मस्तक पर श्री कार तथा अंकलेखन कर वस्त्र विमोचन का आदेश देते हैं। प्रत्येक साधक को दो, तीन और चार माह में उपवास के साथ अपने हाथों से कैशलोच करना अनिवार्य होता है।</p>
<p><strong>फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी</strong></p>
<p>धर्मसभा में मुनि श्री संभवसागरजी महाराज ने सकल दिगंबर जैन समाज समिति के सभी पदाधिकारियों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि आप लोगों न ेजो मुक्तागिरी पहुंचने की व्यवस्थित व्यवस्था की। उससे कई लोग प्रत्यक्ष दर्शन का लाभ उठा पाए। उन्होंने कहा कि गुरुवार का दिन बहुत शुभ था। फाल्गुन माह दूज तिथि थी। ऐसे शुभ संयोग के साथ मुक्तागिरी में हमारे संघ नायक आचार्य श्री समयसागरजी महाराज ने आचार्य बनने के बाद जिस प्रकार से 22 निर्ग्रंथ मुनि महाराज को दीक्षा देकर आचार्य श्री गुरुदेव विद्यासागरजी की वंश बेल को आगे बढ़ाया है। यह हम सभी के लिए गौरव की बात है। उससे आज समूचे जैन समाज गौरान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी स्थान से आचार्य गुरुदेव ने फरवरी 1998 में 9 मुनि दीक्षा प्रदान की थी और पुनः 28 साल बाद यह इतिहास दोहराया गया। यह पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद का ही प्रतिफल है।</p>
<p><strong>वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा अभिभूत हो गया</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि जैसे ही सभी 22 साधकों ने एक साथ अपने अपने वस्त्रों को उतारा तो ऐसा लगा कि जैसे कालचक्र रुक गया है। सभी साधक समयसार की अनुभूति करते हुए सिद्धत्व के भावों की अनूभूति कर रहे थे। उनकी खड़गासन निर्ग्रंथ वीतराग मुद्रा को जिसने भी देखा वह उस दृश्य को देखता ही रह गया। अपार जनसमूह के साथ गगनभेदी नारे गुंजायमान हो रहे थे। आचार्य गुरुदेव ने आगे दीक्षा विधि की क्रियाएं संपन्न कराते हुए उनको बैठने का संकेत दिया और उनके हाथों में श्रीफल देकर 28 मूलगुणों को आरोपित करते हुए उसके महत्व को समझाया तथा सभी साधकों को आगे की चर्या समझाते हुए पिच्छी एवं कमंडल मंत्रोच्चारण के साथ प्रदान किए तथा पांच महाव्रत एवं सभी समितियों के पालन करने का निर्देश दिया।</p>
<p><strong>बेहतर आवागमन की व्यवस्था की </strong></p>
<p>मुक्तागिरी तीर्थ पर बड़ी संख्या में चार पहिया वाहन एवं सैकड़ों बसों का प्रबंध के लिए निश्चित करके मुक्तागिरी तीर्थ क्षेत्र कमेटी धन्यवाद की पात्र है। दोनों पांडाल ठसाठस भरे हुए थे एवं हजारों की संख्या में लोग पांडाल के बाहर धूप में खड़े हुए थे। 40 से 50 हजार की उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज, आचार्यश्री समय सागरजी महाराज के रूप में आज भी विद्यमान हैं। लाखों की संख्या में जिनवाणी एवं पारस चैनल के माध्यम से देश तथा विदेश के विभिन्न हिस्सों से इस अदभुत दृश्य को देखकर अभिभूत हुए।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/the_path_to_salvation_is_the_path_to_balance_your_results/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छा पूरी करना धर्म: मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में दिए मंगल आशीर्वचन  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 14:34:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Acharya Shri Vidyasagar Ji]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[jain monk]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Nun]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Morning Religious Assembly]]></category>
		<category><![CDATA[Muni Shri Sambhav Sagar Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[Second Samadhi Day]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal jain news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[द्वितीय समाधि दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातःकालीन धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[मुनि श्री संभव सागर महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=97716</guid>

					<description><![CDATA[मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230; विदिशा। मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">विदिशा से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>विदिशा।</strong> मां बाप की सेवा करना तथा उनकी इच्छाओं की पूर्ति करना संतान का पहला कर्तव्य होता है। समग्र पाठशालाओं से आए हुए सभी बच्चों तथा बड़े बच्चों को संबोधित करते हुए मुनि श्री संभव सागर महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। मुनि श्री ने उन सभी बच्चों के साथ उनके माता पिता को समझाते हुये कहा कि आप लोगों को भी यह ख्वाब नहीं देखना चाहिये कि मेरा बच्चा किस कंपनी में कितने बड़े पैकेज पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि सब कुछ धन ही नहीं होता धन से भी बढ़कर बच्चों में अंदर के संस्कार होते है। बचपन में जो संस्कार पड़ जाते है वह ही उनका भविष्य बनाते है। मुनि श्री ने कहा कि धन की चिंता मत करो जिसने चोंच दी है वह दाना भी देगा उन्होंने कहा कि आपने अपने बच्चे को पढ़ाई करने विदेश भेज दिया अथवा इंजीनियर बनाकर विदेश में अथवा महानगरों में पहुंचा दिया। बच्चे में यदि संस्कार होंगे तो वह मां बाप की परवाह करेगा अन्यथा जिन कागज के नोटों के लिये आपने उसे विदेश भेजा था उस धन को कमाने में वह इतना व्यस्त हो जाता है कि फिर उसके पास इतना समय ही नहीं होता कि वह भारत आकर अपने बूढे मां बाप की सेवा कर सके।</p>
<p><strong>बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में है! </strong></p>
<p>उन्होंने बच्चों को एक सच्ची घटना सुनाते हुए कहा कि मध्यमवर्गीय जैन परिवार में दो बेटों का जन्म होता है। मां बाप दोनों बच्चों को उच्च शिक्षा के लिये विदेश भेजते हैं। बच्चे शिक्षा के साथ साथ वहीं सेटिल हो जाते हैं। कुछ दिनों तक उनकी मोबाइल पर बातचीत होती रहती है और वह भी बड़े शान से कहते है कि मेरे दोनों बेटे विदेश में उच्च पदों पर हैं। बच्चे थोड़े संस्कारित थे तो वह अपने माता-पिता को धन भी भेजते रहते थे। उनका विवाह हो गया और वह वहीं सैटल हो गए। इधर, बूढे मां-बाप अकेले थे और अपने बच्चों की याद करते करते उसकी मां बीमार पड़ जाती है तो पिता बच्चों को संदेश भेजते हैं कि तुम्हारी मां बीमार है और अपने बच्चे बहु नाती पोतों से मिलना चाहती है तो उधर से संदेश आता है कि आप उनका अच्छे से अच्छा अस्पताल में इलाज कराओ हमारे पास अभी समय नहीं है और मां का देहांत हो जाता है। इसकी सूचना पिता अपने दोनों बेटों को देता है तो उनके अंतिम संस्कार में छोटा बेटा अकेले पहुंचता है। पिता उससे पूछता है कि बड़का नहीं आया तो छोटा जबाब देता है कि भैया ने कहा है कि इस बार तुम चले जाओ अगली बार मैं चला जाऊंगा। जब पिता अपने यह संदेश सुनता है तो वह दुःखी होकर सुसाइड कर लेता है।</p>
<p><strong>सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा है</strong></p>
<p>एक और सच्ची घटना सुनाते हुये मुनि श्री ने कहा कि दो भाई थे। एक तो पढ़-लिखकर आईएएस अफसर बन गया और किसी महानगर में पहुंच गया। छोटा थोड़ा पढ़ने में कमजोर था सो उसने पढ़ाई की और अपनी पुस्तैनी दुकान संभाल ली और अपने माता-पिता की सेवा करता और साथ में रहता था लेकिन उसके माता-पिता तो बड़े बेटे बहू की ही तारीफ किया करते थे। इस बात से छोटे बेटे बहू को बहूत तकलीफ होती थी। वह कहता पिताजी सेवा तो आपकी हम ही करते हैं लेकिन, तारीफ आप हमेशा बड़े की करते हैं। ऐसी घटनाएं आजकल हर परिवार में आम हो गई है। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि सबसे पहला धर्म अपने माता-पिता की सेवा करने का ही होना चाहिए। जिन्होंने कितने कष्टों के साथ हमारा लालन-पालन किया और काबिल बनाया।</p>
<p><strong>50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी</strong></p>
<p>प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि आचार्य श्री विद्यासागरजी के द्वितीय समाधि दिवस 27 जनवरी को आ रहा है। उसके पूर्व 8 जनवरी गुरुवार को विदिशा नगर के सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों तथा समस्त आंगनवाड़ियों के माध्यम से श्री सकल दि. जैन समाज के महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उन स्कूलों में जाकर 50 हजार बच्चों को स्वर्णप्राशन दवा दी जाएगी। आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद से पूर्णायु जबलपुर एवं दयोदय गौशाला बीना वारह के सहयोग से तैयार की गई है। इसके लिए रविवार दोपहर तीन बजे कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई। जिसमें उन सभी कार्यकर्ताओं को दवा पिलाने का प्रशिक्षण दिया गया।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/serving_ones_parents_and_fulfilling_their_wishes_is_a_religious_duty/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान पारसनाथ के दस भव का जीवन चरित्र उठाकर देखें : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दी देशना में संयम और धर्म की शिक्षा दी </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/take_a_look_at_the_life_story_of_lord_parasnath_in_his_ten_births/</link>
					<comments>https://www.shreephaljainnews.com/take_a_look_at_the_life_story_of_lord_parasnath_in_his_ten_births/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Nov 2025 14:27:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Jain]]></category>
		<category><![CDATA[Digambar Sadhu]]></category>
		<category><![CDATA[jain community]]></category>
		<category><![CDATA[Jain muni]]></category>
		<category><![CDATA[jain news]]></category>
		<category><![CDATA[jain sadhvi]]></category>
		<category><![CDATA[Jain Society]]></category>
		<category><![CDATA[Lord Parasnath]]></category>
		<category><![CDATA[Morning Religious Assembly श्रीफल जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[Shriphal Jain News]]></category>
		<category><![CDATA[Udgar Muni Shri Praman Sagarji Maharaj]]></category>
		<category><![CDATA[उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन न्यूज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन मुनि]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समाज]]></category>
		<category><![CDATA[जैन समुदाय]]></category>
		<category><![CDATA[जैन साध्वी]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर जैन]]></category>
		<category><![CDATA[दिगंबर साधु]]></category>
		<category><![CDATA[प्रातःकालीन धर्मसभा]]></category>
		<category><![CDATA[भगवान पारसनाथ]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://www.shreephaljainnews.com/?p=95284</guid>

					<description><![CDATA[कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। सागर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230; सागर। कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। <span style="color: #ff0000">सागर से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सागर।</strong> कर्म का उदय आए तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागरजी महाराज ने प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दो तरह के लोग हुआ करते है एक वह जो जीवन की धारा में बहते है तथा शांति का अनुभव किया करते है,दूसरे वह लोग होते है जो जीवन की धारा से जूझते है,तथा अस्त व्यस्त होते हुये अपने जीवन नष्ट कर देते है उन्होंने कहा कि अपने अंदर उतर कर देखो कि जो कुछ भी चल रहा है उसमें आपआनंदित हो या मन ही मन आकुलता है। आपसे कोई पूछता है कि भैया कैसे हो? तो आपका जबाब होता है कि मजे में हूं! लेकिन जब वह आपके अंदर गहराई में उतरता है तो आपको ये कमी और वो कमी नजर आने लगती है कभी इसका अभाव तो कभी उसका अभाव खटकने लगता है तथा व्यथा कथा तथा परेशानियों की परतें खुलने लगती है।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि&#8221;धर्मी के जीवन में सबसे ज्यादा दुःख, परेशानी पीड़ा,और कष्ट आते है लेकिन वह उन दुःखों को किसी से कहता नहीं उन्होंने कहा कि भगवान पारसनाथ के दस भव का जीवन चरित्र उठाकर देख लो, उन्होंने लगातार धर्म और धर्म ही किया कभी कोई अधर्म का कार्य किया ही नहीं, फिर भी उन्हें सबसे ज्यादा कष्ट सबसे ज्यादा उपसर्ग सहना पड़े,भगवान पारसनाथ ने कभी कोई सिकायत नहीं की वह उन कष्टों को तथा उन परेशानियों को सहते रहे लेकिन दुःखी नहीं हुये क्यों कि वह जानते थे कि धर्म में वह शक्ति है कि परेशानी मिटे या न मिटे कष्ट मिटे न मिटे लेकिन में कभी त्रस्त नही होऊंगा&#8221; मुनि श्री ने कहा कि &#8220;धर्म&#8221; करने से दुःख दूर नहीं होता,धर्म हमें निराकुलता तथा सहनशीलता प्रदान करता है मुनि श्री ने मेरी भावना की ये पक्तियाँ &#8220;होकर सुख में मग्न न फूंलू, दुँख में कभी न घवराऊ,इष्ट वियोग,अनिष्ट संयोग में शहनशीलता दिखलाऊँ&#8221; रोज रोज ये पक्तियाँ पढ़ते हो लेकिन कभी उसकी परीक्षा हो जाये तो फौरन अपना दुखडा़ रोने लग जाते हो।</p>
<p>मुनि श्री ने कहा कि ये अनादि के पड़े संस्कार है, थोड़ा सा दुःख आया कि भिखारियों की तरह हाथ फैलाना नहीं छोड़ते। मुनि श्री ने कहा कि अपने आपको सदा बहार प्रसन्न रखना चाहते हो तो चार बातें ध्यान रखो विधि के विधान पर विश्वास रखो कैसा भी दुःख का प्रसंग बन जाए तो उसे कर्म का उदय मान कर छोड़ दो और ज्ञाता दृष्टा बन कर कर्म के उस खेल को देखो मुनि श्री ने कहा कि कर्म के खेल निराले है। पल में व्यक्ति को हंसाता है तो पल में व्यक्ति को रुला देता है,कभी राजा को रंक बना देता तो कभी रंक को राजा बना देता कर्म का खेल बड़ा विचित्र है।</p>
<p>कब किसकी लांटरी खुलवा दे तो कब किसकी लुटिया डुबा दे, मुनि श्री ने कहा कि जो व्यक्ति विधि के विधान पर विश्वास रखता है वह कभी दुःखी नहीं होता उन्होंने कहा कि महासति अंजना के जीवन चरित्र को देखो उन पर कितने कष्ट आये दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन, उन्होंने इसे कर्म जनित संयोग माना और उसे स्वीकार किया मुनि श्री ने कहा कि कर्म का उदय आये तो खुशी-खुशी सहन कर लोगे तो आने वाला समय कट जाएगा। उन्होंने एक सत्य घटना 2012 की घटना सुनाते हुए कहा कि एक युवक की सगाई हो गई तथा विवाह की तारीख तय हो गई संयोग से उसकी तबीयत बिगड़ी और जांच कराने पर किडनी में खराबी सामने आई। लड़का और उनके माता-पिता ने इसकी सूचना लड़की और उनके परिवार को स्वास्थ्य खराब की सूचना दी तो लड़की के परिवार सम्वंध तोड़ने को आतुर दिखे लेकिन, लड़की ने इसे कर्म जनित संयोग माना और उसने उस सगाई को तोड़ना उचित नहीं समझा और उसने णमोकार वृत को करने का निश्चय किया और इसकी सूचना लड़के को मिली तो उसने भी कह दिया कि जब तक में स्वस्थ नहीं हो जाता तब तक विवाह नहीं करूंगा दौनों ओर की विशुद्धि का प्रभाव पड़ा और वह लड़का ढेड़ साल में स्वस्थ होकर वैवाहिक जीवन के साथ दो बच्चों का पिता है, मुनि श्री ने कहा कि कर्म का उदय आये तो विधि के विधान पर विश्वास रखो मन कभी विचलित नहीं होगा उन्होंने कहा कि आत्मश्रद्धानी बनोगे तो बड़ी से बड़ी विपत्तियां भी आपसे दूर भाग जाएंगी।</p>
<p>जीवन में सभी चीजें आपके अनुकूल नहीं हो सकती लेकिन हम अपने मन को चीजों के अनुकूल जरूर बना सकते है। मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आगामी 27 नवंबर से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव प्रारंभ होने जा रहा है सभी मुख्य पात्रों का चयन हो चुका है। मुनि श्री द्वारा प्रतिदिन प्रातः8:30 से प्रवचन एवं सांयकाल 6 बजे से शंकासमाधान कार्यक्रम संपन्न हो रहा है।</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://www.shreephaljainnews.com/take_a_look_at_the_life_story_of_lord_parasnath_in_his_ten_births/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
