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	<title>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन (रजि.) सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन (रजि.) सागर &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>नवागढ़ में प्राकृत भाषा त्रिदिवसीय प्रशिक्षण शिविर 12 से : प्राकृत भाषा के वरिष्ठ विद्वान देंगे शिक्षकों को प्रशिक्षण  </title>
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		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 09:54:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत सरकार की ओर से शास्त्रीय भाषा के रूप में घोषित प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। ललितपुर से पढ़िए, यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत सरकार की ओर से शास्त्रीय भाषा के रूप में घोषित प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। <span style="color: #ff0000">ललितपुर से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>ललितपुर</strong>। भारत सरकार की ओर से शास्त्रीय भाषा के रूप में घोषित प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं प्रागैतिहासिक तीर्थक्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर प्रागैतिहासिक एवं पवित्र तीर्थस्थल नवागढ़ में आयोजित होगा। जहाँ देशभर से विद्वान, शिक्षक एवं साधक सहभागिता करेंगे। प्राकृत भाषा विकास फाउण्डेशन के महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि 12 अप्रैल प्रातः 8 बजे उद्घाटन सत्र एवं 14 अप्रैल दोपहर 2 बजे समापन समारोह होगा। नवागढ़ तीर्थक्षेत्र के प्रचारमंत्री डॉ सुनील संचय ने बताया कि इस आयोजन में निदेशक ब्र. जयकुमार जैन निशांत, प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. ऋषभचंद फौजदार (दमोह), महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़) के साथश्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के अध्यक्ष एड. सनतकुमार जैन (ललितपुर) एवं महामंत्री वीरचंद जैन नैकोरा की विशेष भूमिका रहेगी।</p>
<p><strong>शिविर संचालन में इनकी भूमिका </strong></p>
<p>शिविर के संचालन के लिए प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शैलेष जैन (उदयपुर), डॉ आशीष दमोह, शिविर समन्वयक अरुण शास्त्री (जबलपुर), शिविर संयोजक सुनील शास्त्री (बड़गाँव) एवं क्षेत्र मैनेजर प्रवीण जैन (नवागढ़) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।</p>
<p>इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षक, विद्वान देशभर में ग्रीष्मकालीन समय में आयोजित होने जा रहे प्राकृत शिविरों में शिक्षण प्रदान करेंगे।</p>
<p>निदेशक ब्र. जयकुमार निशांत ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्राकृत भाषा केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। इस शिविर के माध्यम से हम नई पीढ़ी को इस अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।</p>
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		<title>नवागढ़ में प्राकृत साधना का महापर्व: त्रिदिवसीय प्रशिक्षण शिविर, संस्कृति, साधना और शिक्षा का संगम </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shree Phal News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 10:10:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निकटवर्ती जैन तीर्थ नवागढ़ मे प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हो रहा है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी और राकेश जैन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>निकटवर्ती जैन तीर्थ नवागढ़ मे प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हो रहा है। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी और राकेश जैन रागी की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong> बकस्वाहा।</strong> निकटवर्ती जैन तीर्थ नवागढ़ मे प्राकृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन एवं श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के संयुक्त तत्वावधान में 12 से 14 अप्रैल तक त्रिदिवसीय प्राकृत भाषा प्रशिक्षण शिविर का आयोजन हो रहा है। यह शिविर प्रागैतिहासिक एवं पवित्र तीर्थस्थल नवागढ़ में होगा, जहाँ देशभर से विद्वान, शिक्षक एवं साधक सहभागिता करेंगे। इस आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक आयोजन को चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज की प्रेरणा प्राप्त है। साथ ही आचार्य श्री समयसागरजी महाराज, आचार्य श्री वसुनंदीजी महाराज, आचार्य श्री विशुद्धसागरजी महाराज एवं आचार्य श्री उदारसागरजी महाराज का मंगल आशीर्वाद भी इस शिविर को प्राप्त होगा। प्राकृत भाषा, जो भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम अभिव्यक्तियों में से एक है, केवल संवाद का माध्यम नहीं बल्कि सरलता, अहिंसा, करुणा और आध्यात्मिक चेतना का सशक्त आधार है। यही वह भाषा है जिसमें जैन आगमों की दिव्य वाणी निहित है, जो मानव जीवन को संयम, शांति और आत्मबोध की दिशा प्रदान करती है। वर्तमान समय में इस भाषा का पुनर्जागरण अत्यंत आवश्यक है, और इसी उद्देश्य से यह शिविर एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। शिविर में प्रतिभागियों को प्राकृत भाषा के विविध आयामों से परिचित कराया जाएगा, जिसमें प्राकृत व्याकरण, साहित्य का इतिहास, ब्राह्मी लिपि, शिक्षक उत्तरदायित्व, तथा प्राकृत विज्ञान, समय विज्ञान, लेश्या विज्ञान एवं सल्लेखना विज्ञान जैसे गूढ़ विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। दैनिक कार्यक्रम के अंतर्गत प्रातःकालीन योग, पूजन, विभिन्न प्रशिक्षण सत्र, परिचर्चा एवं आध्यात्मिक संवाद शामिल रहेंगे।</p>
<p><strong>नैतिकता, शांति और मानवीय मूल्यों का विकास संभव</strong></p>
<p>इस अवसर पर प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य ने कहा कि “प्राकृत भाषा हमारी आत्मा की भाषा है, यह हमें हमारे मूल से जोड़ती है और जीवन में सरलता, संयम तथा आध्यात्मिकता का संचार करती है। इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविर प्राकृत के पुनर्जागरण में मील का पत्थर सिद्ध होंगे।, वहीं प्रशिक्षण शिविर के ’निदेशक ब्र. जयकुमार जैन निशांत’ (टीकमगढ़) ने</p>
<p>कहा कि प्राकृत भाषा केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि इसे व्यवहार में उतारा जाए तो समाज में नैतिकता, शांति और मानवीय मूल्यों का विकास संभव है। इस शिविर के माध्यम से हम नई पीढ़ी को इस अमूल्य धरोहर से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।</p>
<p><strong>गरिमापूर्ण भारतीय वेशभूषा धारण करना अनिवार्य</strong></p>
<p>आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों से अनुरोध किया गया है कि वे 11 अप्रैल की रात्रि तक अथवा 12 अप्रैल प्रातः 7.30 बजे तक अनिवार्य रूप से पहुँचकर शिविर को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें। साथ ही गरिमापूर्ण भारतीय वेशभूषा धारण करना अनिवार्य रहेगा। त्यागी एवं व्रतधारी अतिथियों के लिए शुद्ध एवं पृथक भोजन व्यवस्था उपलब्ध रहेगी, वहीं आमंत्रित शिक्षकों को द्वितीय श्रेणी रेल या बस का वास्तविक यात्रा व्यय भी प्रदान किया जाएगा।</p>
<p><strong>इनकी भूमिका सराहनीय रहेगी </strong></p>
<p>12 अप्रैल प्रातः 8 बजे उद्घाटन सत्र एवं 14 अप्रैल दोपहर 2 बजे समापन समारोह आयोजित होगा। आयोजन स्थल तक पहुँचने के लिए सागर, टीकमगढ़, बड़ागाँव एवं ललितपुर से सुगम मार्ग उपलब्ध हैं तथा बड़ागाँव से नवागढ़ तक वाहन व्यवस्था भी आयोजकों द्वारा की गई है। आयोजन में प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. ऋषभचंद जैन फौजदार (दमोह), महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़) एवं निदेशक ब्र. जयकुमार जैन निशांत (टीकमगढ़) के साथ-साथ श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र नवागढ़ के अध्यक्ष एड. सनतकुमार जैन (ललितपुर) एवं महामंत्री वीरचन्द जैन नैकोरा की विशेष भूमिका रहेगी। शिविर के सफल संचालन हेतु प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शैलेष जैन (उदयपुर), शिविर समन्वयक अरुण जैन शास्त्री (जबलपुर), शिविर संयोजक सुनील जैन शास्त्री (बड़गाँव) एवं क्षेत्र मैनेजर प्रवीण जैन (नवागढ़) सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। प्राकृत केवल भाषा नहीं, बल्कि जीवन की सरलता और आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति है। आइए, इस साधना से जुड़ें।</p>
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		<title>कार्यशाला में प्रतिभागियों का द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण: प्राकृत भाषा की जीवंत परंपरा, भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता जानी  </title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/the_participants_of_the_workshop_went_on_their_second_educational_field_trip/</link>
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		<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 12:52:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। नैनागिरि/बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230; नैनागिरि/बकस्वाहा। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। <span style="color: #ff0000">नैनागिरि/बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>नैनागिरि/बकस्वाहा।</strong> केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बकस्वाहा तहसील अंतर्गत जैन तीर्थ नैनागिरि में आयोजित 21 दिवसीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला (25 दिसंबर से 14 जनवरी) के अंतर्गत द्वितीय शैक्षणिक भ्रमण अत्यंत सफलतापूर्वक हुआ। यह शैक्षणिक यात्रा नैनागिरि से प्रारंभ होकर श्री नेमगिरि, पजनारी, ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी धामोनी, मदनपुर, गिरार जी तथा अवार माता तक हुई। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को प्राकृत भाषा की जीवंत परंपरा, भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्टता, धार्मिक आस्था के केंद्रों तथा सांस्कृतिक-पुरातात्विक धरोहरों से प्रत्यक्ष रूप में परिचित कराना रहा।</p>
<p><strong>प्रतिभागियों का बौद्धिक क्षितिज विस्तृत हुआ</strong></p>
<p>कार्यशाला के मीडिया प्रभारी राजेश रागी ने बताया कि भ्रमण के दौरान प्रत्येक स्थल पर उसके ऐतिहासिक, भाषिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विद्वानों ने सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। जिससे प्रतिभागियों का बौद्धिक क्षितिज विस्तृत हुआ। दल का मार्गदर्शन प्रो. कमलेश जैन (जयपुर), डॉ. धर्मेंद्र जैन एवं डॉ. प्रभातकुमार दास ने किया। कार्यशाला के संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य (शाहगढ़, सागर) के सुव्यवस्थित संयोजन एवं नेतृत्व में यह शैक्षणिक यात्रा अत्यंत अनुशासित, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुई। इस भ्रमण ने प्रतिभागियों में प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा के प्रति नई चेतना, उत्साह और शोधाभिमुख दृष्टि का सशक्त संचार किया।</p>
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		<title>प्राकृत भाषा भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल धारा : नैनागिरि में राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन </title>
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		<pubDate>Fri, 26 Dec 2025 12:37:46 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) तथा प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन सत्र गुरुवार को हुआ। यह सत्र केवल एक औपचारिक उद्घाटन नहीं, बल्कि प्राकृत भाषा के पुनर्जागरण का सशक्त उद्घोष सिद्ध हुआ। नैनागिरि से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) तथा प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन सत्र गुरुवार को हुआ। यह सत्र केवल एक औपचारिक उद्घाटन नहीं, बल्कि प्राकृत भाषा के पुनर्जागरण का सशक्त उद्घोष सिद्ध हुआ। <span style="color: #ff0000">नैनागिरि से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नैनागिरि।</strong> केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) तथा प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन सत्र गुरुवार को हुआ। यह सत्र केवल एक औपचारिक उद्घाटन नहीं, बल्कि प्राकृत भाषा के पुनर्जागरण का सशक्त उद्घोष सिद्ध हुआ। प्रातः प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न 14 प्रांतों से आए विद्वान, शोधार्थी, शिक्षक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे। जैन तीर्थ नैनागिरि ट्रस्ट कमेटी के मंत्री तथा कार्यशाला के मीडिया प्रभारी राजेश रागी ने बताया कि उद्घाटन की मंगलवेला में आचार्यश्री वसुनंदीजी महाराज द्वारा विरचित प्राकृत स्तुति के सामूहिक उच्चारण से संपूर्ण सभागार आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। इसके पश्चात् राष्ट्रगीत एवं केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगीत के गायन ने राष्ट्रीय चेतना और अकादमिक एकात्मता का भाव जाग्रत किया। अतिथियों ने चित्रानावरण एवं दीप प्रज्वलन कर ज्ञान दीप प्रज्वलित किया।</p>
<p><strong>कार्यशालाएं नई पीढ़ी को अपनी भाषायी जड़ों से जोड़ने का माध्यम </strong></p>
<p>उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. यशवंतसिंह ठाकुर ने उद्बोधन में कहा कि प्राकृत भाषा भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल धारा है, जिसके बिना दर्शन, साहित्य और संस्कृति की सम्यक् समझ अधूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं नई पीढ़ी को अपनी भाषायी जड़ों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. ऋषभचंद जैन फौजदार ने प्राकृत भाषा को लोक और शास्त्र के सेतु के रूप में निरूपित करते हुए कहा कि 21 दिवसीय यह कार्यशाला अध्ययन, चिंतन और शोध की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगी।मुख्य वक्तव्य में डी. ब्र. राकेश जैन ने प्राकृत भाषा के व्याकरणिक, दार्शनिक एवं साहित्यिक पक्षों की वैज्ञानिकता को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि प्राकृत केवल अतीत की भाषा नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की शोधदृभाषा भी है।</p>
<p><strong>कार्यशाला के उद्देश्यों को किया रेखांकित </strong></p>
<p>उद्घाटन सत्र में अतिथियों एवं प्रशिक्षकों का स्वागत-सम्मान जैन तीर्थ नैनागिरि कमेटी एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन ने परंपरागत विधि से किया। स्वागत भाषण में डॉ. कैलाशचन्द सैनी ने कार्यशाला के उद्देश्यों, संरचना और अपेक्षित उपलब्धियों को रेखांकित किया जबकि, नैनागिरि तीर्थक्षेत्र प्रतिनिधि देवेन्द्र जैन लुहारी ने तीर्थक्षेत्र की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक गरिमा पर प्रकाश डाला।</p>
<p><strong>प्राकृत भाषा भारतीय संस्कृति की प्राण </strong></p>
<p>प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन का परिचय देते हुए डॉ. आशीष जैन ने प्राकृत भाषा के संरक्षण, प्रशिक्षण और शोध के लिए किए जा रहे सतत् प्रयासों की जानकारी दी। कार्यशाला की रूपरेखा एवं अध्यापकों का परिचय डॉ. धर्मेन्द्र जैन ने प्रस्तुत किया तथा डॉ. सतेंद्र जैन ने कार्यशाला के शैक्षिक, अकादमिक एवं व्यावहारिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए वैचारिक समृद्धि का अवसर बनेगा। कुलगुरु अभिभाषण में प्रो. यशवंतसिंह ठाकुर ने प्राकृत अध्ययन को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रासंगिक बताया। वहीं अध्यक्षीय भाषण में प्रो. ऋषभचंद जैन फौजदार ने इसे भारतीय भाषायी चेतना के पुनर्संस्कार का सशक्त प्रयास बताया। मुनिश्री शाश्वतसागर जी महाराज ने अपने आशीष वचनों में कहा कि प्राकृत भाषा भारतीय संस्कृति की प्राण है। इस पुनर्जीवित करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।</p>
<p>संचालन डॉ. आशीष जैन आचार्य ने किया। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ तथा राजेश जैन रागी बकस्वाहा एवं डॉ. प्रभातकुमार दास ने आभार जताया। प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज द्वारा विरचित प्राकृत स्तुति पूर्वक कार्यक्रम को सार्थक पूर्णता प्रदान की। उद्घाटन सत्र ने यह स्पष्ट कर दिया कि 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला भारतीय ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।</p>
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		<title>कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृत भाषा के अध्ययन, शोध एवं संरक्षण को नई दिशा देना : राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन कल </title>
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		<pubDate>Wed, 24 Dec 2025 12:27:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन समारोह 25 दिसम्बर को प्रातः 10 बजे श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि), नैनागिरि तहसील बकस्वाहा में आयोजित किया जाएगा। पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230; नैनागिरि। केन्द्रीय [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन समारोह 25 दिसम्बर को प्रातः 10 बजे श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि), नैनागिरि तहसील बकस्वाहा में आयोजित किया जाएगा। <span style="color: #ff0000">पढ़िए रत्नेश जैन रागी की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>नैनागिरि।</strong> केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत भाषा अध्ययन कार्यशाला का उद्घाटन समारोह 25 दिसम्बर को प्रातः 10 बजे श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि), नैनागिरि तहसील बकस्वाहा में आयोजित किया जाएगा।</p>
<p>उद्घाटन समारोह में डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर के कुलगुरु प्रो. यशवंत सिंह ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह की अध्यक्षता सुरेन्द्र जैन सिंघई, सेवानिवृत्त कार्यकारी निदेशक, हुडको करेंगे, जबकि डॉ. राकेश जैन, सागर, अधिष्ठाता सिद्धायतन मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करेंगे।</p>
<p>कार्यक्रम संयोजक डॉ. आशीष जैन आचार्य, शाहगढ़ (सागर), राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एवं प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के महामंत्री ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य प्राकृत भाषा के अध्ययन, शोध एवं संरक्षण को नई दिशा देना है। यह कार्यशाला प्राकृत भाषा के विद्वानों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए अध्ययन एवं अनुसंधान का एक सशक्त मंच सिद्ध होगी।</p>
<p>कार्यशाला के दौरान प्राकृत व्याकरण, संधि, कारक, वचन, काल, प्राकृत साहित्य, भाषा विज्ञान, शौरसेनी, मागधी, अर्धमागधी एवं अपभ्रंश जैसी विषयवस्तुओं पर विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा गहन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।</p>
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		<title>नैनागिरि में 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला 25 दिसंबर से: प्राकृत भाषा के गंभीर अध्ययन, शोध एवं नई पीढ़ी को जोड़ने की दिशा में है महत्वपूर्ण प्रयास  </title>
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		<pubDate>Fri, 12 Dec 2025 11:13:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश रागी और [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। <span style="color: #ff0000">बकस्वाहा से पढ़िए, राजेश रागी और रत्नेश जैन की यह रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>बकस्वाहा।</strong> प्राकृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस वर्ष 21 दिवसीय राष्ट्रीय प्राकृत शिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 25 दिसंबर से 14 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक नगरी श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र (रेशंदीगिरि) नैनागिरि तहसील बकस्वाहा, जिला छतरपुर, (मप्र) में होगी। इस का संचालन पाली-प्राकृत विकास योजना के अंतर्गत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली (प्राकृत अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, जयपुर परिसर) तथा प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन (रजि.) सागर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। यह कार्यशाला कुलपति प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के मार्गदर्शन में होगी। निर्देशक रमाकांत पांडेय का मार्गदर्शन मिल रहा है। पाली प्राकृत योजना अधिकारी डॉ. चक्रधर मेहुर ने कार्यशाला के विधिवत संचालन के लिए मार्गदर्शन दिया। कार्यशाला में डॉ. धर्मेंद्रकुमार जैन जयपुर प्राकृत भाषा विकास अधिकारी केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर और डॉ. सतेंद्र कुमार जैन, प्रभातकुमार दास की मॉनिटरिंग में कार्य प्रारंभ हो गया है। इस राष्ट्रीय कार्यशाला में प्राकृत भाषा के व्याकरण, साहित्य, पठनीय सामग्री और बोलचाल के विभिन्न स्तरों का गहन अध्ययन विशेषज्ञ विद्वानों द्वारा कराया जाएगा।</p>
<p>कार्यशाला में 21 दिन की अनिवार्य उपस्थिति, निःशुल्क आवास-भोजन, तथा चयनित प्रतिभागियों को थर्ड एसी का आवागमन मार्गव्यय प्रदान किया जाएगा। किसी भी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं रखा गया है। प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन के महामंत्री डॉ. आशीष जैन आचार्य ने बताया कि यह कार्यशाला प्राकृत भाषा के गंभीर अध्ययन, शोध एवं नई पीढ़ी को इसके साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।</p>
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