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	<title>प्रसन्न सागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>प्रसन्न सागर महाराज &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>बसंत भद्र व्रत साधना का महापारणा : आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने 40 दिन बाद खोली मौन साधना  </title>
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		<pubDate>Tue, 05 Dec 2023 14:57:02 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय &#8220;बसंत भद्र व्रत साधना&#8221; का आज महापारणा हुआ. महापारणा महोत्सव पर अन्तर्मना ने अपनी 40 दिन बाद मौन साधना खोलते हुए कहा कि आज की पीढ़ी इक्ट्ठा करने के लिये जी रही है और पुरानी पीढ़ी इक्ट्ठा रहने के लिए जी रही [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय &#8220;बसंत भद्र व्रत साधना&#8221; का आज महापारणा हुआ. महापारणा महोत्सव पर अन्तर्मना ने अपनी 40 दिन बाद मौन साधना खोलते हुए कहा कि आज की पीढ़ी इक्ट्ठा करने के लिये जी रही है और पुरानी पीढ़ी इक्ट्ठा रहने के लिए जी रही थी. इसके साथ ही महाराज श्री ने इस मौके पर नया व्रत भी ग्रहण किया जिसका नाम है &#8211; &#8221; वज्र मध्य व्रत. <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजकुमार अजमेरा की रिपोर्ट </span></strong></p>
<hr />
<p><strong>कोडरमा ।</strong> तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मती सागर जी महाराज की समाधी भूमि &#8221; कुंजवन उदगाँव &#8221; पर अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय &#8220;बसंत भद्र व्रत साधना&#8221; का आज महापारणा हुआ । 557 दिन के मौन साधक तपस्वी मौन पूर्वक सिंह निष्क्रीडित व्रत(उत्तम) की साधना करने वाले विश्व मे प्रथम आचार्य अन्तर्मना 108 श्री प्रसन्न सागर जी महामुनिराज का तीर्थराज के स्वर्णभद्र कूट पर सम्पन्न किया इसके बाद तपस्वी सम्राट के समाधि स्थली उदगाव में अन्तर्मना का भव्य चातुर्मास हुआ। इसी कड़ी में इस बार भक्तों के मध्य अडोल, अकंप साधना करते हुए गुरुदेव जो अनुपम,अनमोल,अद्भुत,अविस्मरणीय, अकल्पनीय तपस्या की कड़ी में एक अध्याय और जोड़ते हुए 40 दिन की मौन उपवास साधना प्रारंभ किया जिसका महापारणा आज उदगाव में सौम्य मूर्ति उपाध्याय मुनि 108 पीयूष सागर जी मुनिराज के निर्देशन में निरन्तराय आहार सम्पन्न हुआ ।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-52588" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033.jpg" alt="" width="1247" height="998" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033.jpg 1247w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033-300x240.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033-1024x820.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033-768x615.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/12/IMG-20231205-WA0033-990x792.jpg 990w" sizes="(max-width: 1247px) 100vw, 1247px" /></p>
<p><strong>सबसे बड़ा धन स्वस्थ शरीर </strong></p>
<p>इस महापारणा महोत्सव पर अन्तर्मना ने अपनी 40 दिन बाद मौन साधना खोलते हुए कहा कि आज की पीढ़ी इक्ट्ठा करने के लिये जी रही है और पुरानी पीढ़ी इक्ट्ठा रहने के लिए जी रही थी । दुनिया में सबसे बड़ा भ्रम है कि पैसा बढ़ने से हमारे घर परिवार और जीवन में सुख शान्ति बढ़ जायेगी, समझ नहीं आता कि आखिर क्यों ? भारत में जन्म लेकर कोई एक रोटी के लिए तरसता है और वही एक पड़ोसी का कुत्ता बेशकीमती गाड़ी में घूमता है। जिनके पास अपार धन राशि है, इसका मतलब यह तो नहीं कि वे बहुत सुख शान्ति और आनन्द का जीवन जी रहे हो ?</p>
<p>पैसा किसी के पास कुछ हो सकता है किसी के पास कुछ ज्यादा हो सकता है और किसी के पास बहुत ज्यादा हो सकता है। फिर समझ नहीं आता कि एक रोटी के लिए तरस रहा है और एक कुत्ता बड़ी बड़ी गाड़ियों में घूम रहा है। अरे भाई जिनके पास धन कम है, वे दुनिया के सबसे अधिक खुश, सन्तुष्ट व्यक्ति भी तो हो सकते हैं।</p>
<p><strong>दुनिया में 7 तरह का धन हैं </strong></p>
<p>पहला धन स्वस्थ शरीर &#8211; अधिक पैसा होना ही सब कुछ नहीं है, सेहत का ठीक होना भी बेहद ज़रूरी है। कुछ लोगों के पास धन तो बहुत है पर उनके सुख भोगने का खाने पीने का सुख नहीं है। भारत में धन से गरीब लोग कम है मन से गरीब लोग ज्यादा हैं। धन गरीब लोग स्वस्थ प्रसन्न मिलेंगे और मन गरीब लोग दुखी, परेशान, बीमार नजर आयेंगे।</p>
<p>दूसरा धन कामयाबी &#8211; बहुत से लोग अमीर घर में पैदा होने के बाद भी सफल नहीं हो पाते और वही एक गरीब चाय बेचकर सफलताओं के शिखर को छू लेता है।</p>
<p>तीसरा धन साहस-धैर्य ज़िन्दगी के हर कदम पर कांटे बिछे हैं स्वयं को ही देख भाल और सम्भल कर चलना होगा अन्यथा कांटा लग जाएगा।</p>
<p>चौथा धन मित्रता &#8211; निस्वार्थ भाव से एक दूसरे के सुख दुःख में सहयोगी बनना। मित्रता छल कपट और चाटुकारता से रहित हो ।</p>
<p>पांचवा धन कौशल प्रतिभा &#8211; किसी भी लक्ष्य को पाने के लिये केवल प्रयास ही पर्याप्त नहीं है उसके लिये कार्य कौशल की क्षमता भी होना चाहिए ।</p>
<p>छठवां धन इज्जत या प्रतिष्ठा- आपके पास अपार धन राशि है लेकिन घर परिवार और समाज में आपकी कोई इज्जत-प्रतिष्ठा नहीं है, तो वह अपार धन बेकार है।</p>
<p>सातवां धन सन्तोष जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है- जो प्राप्त है, उसे पसंद करो और जो पसंद है, उसे प्राप्त करो। सन्तोष का अर्थ है प्रभु इतना दीजिए जा में कुटुम्ब समाय, मैं भी भूखा ना रहूं, साधू ना भूखा जाये ।</p>
<p><strong>गुरुदेव ने नया व्रत ग्रहण किया</strong></p>
<p>अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज द्वारा की जा रही 40 दिवसीय &#8220;बसंत भद्र व्रत साधना&#8221; के महापारणा के साथ ही नये व्रत की घोषणा करते हुए संकल्प भी लिया। गुरुदेव ने नया व्रत ग्रहण किया जिसका नाम है &#8220;वज्र मध्य व्रत” यह व्रत 38 दिवसीय होगा जिसमे 29 उपवास एवं 9 पारणाये होंगी। इस अवसर पर गुरुभक्त परिवार शामिल हुए ।</p>
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		<title>अंतर्मना आचार्य प्रसन्नसागर महाराज ने पखारे आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के चरण : आजीवन शक्कर एवं चटाई का किया त्याग </title>
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		<pubDate>Wed, 03 May 2023 12:06:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अन्तर्मना प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने आचार्य विद्या सागर महाराज से पहले भी कई नियम ग्रहण किए थे, उसी कड़ी में आज आजीवन शक्कर और चटाई का नियम ग्रहण कर त्याग, तप और साधना को आगे बढ़ाते हुए मोक्ष मार्ग को प्रशस्त किया। पढ़िए राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट&#8230; डोंगरगढ़। जैन धर्म के सबसे कम [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>अन्तर्मना प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने आचार्य विद्या सागर महाराज से पहले भी कई नियम ग्रहण किए थे, उसी कड़ी में आज आजीवन शक्कर और चटाई का नियम ग्रहण कर त्याग, तप और साधना को आगे बढ़ाते हुए मोक्ष मार्ग को प्रशस्त किया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राज कुमार अजमेरा की रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डोंगरगढ़।</strong> जैन धर्म के सबसे कम उम्र के तपस्वी सिंह निष्क्रिय व्रत करने वाले पूज्य अन्तर्मना महाराज का महा साधना 551वां दिन के पूर्ण हुआ। अन्तर्मना मुनि श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने 8 महीने पर्वत राज सम्मेद शिखरजी पर एकांत में मौन साधना की थी। महासाधना के बाद तीर्थराज पर पंचकल्याणक करते हुए अब वह उदगांव, महाराष्ट्र की ओर सतत मंगल विहार कर रहे हैं। इसी कड़ी में इस सदी के महातपस्वी संत शिरोमणि गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महामुनिराज का दर्शन कर अन्तर्मना ने अपनी साधना को ओर मजबूत किया। अन्तर्मना ने आचार्य भगवन से पहले भी कई नियम ग्रहण किए थे, उसी कड़ी में आज आजीवन शक्कर और चटाई का नियम ग्रहण कर त्याग, तप और साधना को आगे बढ़ाते हुए मोक्ष मार्ग को प्रशस्त किया। जब त्याग तपस्या की जीवंत मूर्तियों का एक साथ समागम होता है तो एक नया इतिहास लिख दिया जाता है और समाज और राष्ट्र को नई एक प्रेरणा देता है।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-43383" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/05/IMG-20230503-WA0066-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p><strong>विनय भाव के साथ पाद प्रक्षालन</strong></p>
<p>विशेषकर दिगंबर जैन संतों का महा समागम ऐसे ही पावन क्षण देखने को मिला। चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ की धरा पर पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की चरण वंदना हेतु इस सदी के उत्कृष्ट तप साधक अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ससंघ चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ पर आए। यह क्षण इतना दुर्लभ था कि जिन्होंने भी इन दृश्यों को देखा और जो श्रद्धालू वहां मौजूद रहे, वह अपने आपको भाव विभोर होने से नहीं रोक पाए, इन पावन क्षणों में अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर महाराज ने विनय संपन्नता की भावना का एक उदाहरण दिया। पूज्य महाराज श्री ने आचार्य श्री के चरणों का विनय भाव के साथ पाद प्रक्षालन किया। जब गुरु चरणों में उन्होंने नमोस्तु निवेदित किया तो वह भी एक अलौकिक प्रस्तुत कर रहा था।</p>
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		<title>उदगांव अहिंसा संस्कार पदयात्रा : जैन संतों का रांची में भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Sun, 05 Mar 2023 16:29:38 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[परम पूज्य अंतर्मना आचार्य 108श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ के चरण रांची में पड़े। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का संघ सहित भव्याती भव्य महाजुलूस के रूप में स्वागत हुआ, सेकड़ों की संख्या में पुरुष, महिलाएं , बच्चे आचार्य श्री की अगवानी हेतु करमटोली चौक में उपस्थित थे। रांची। झारखण्ड की राजधानी रांची [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>परम पूज्य अंतर्मना आचार्य 108श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ के चरण रांची में पड़े। आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का संघ सहित भव्याती भव्य महाजुलूस के रूप में स्वागत हुआ, सेकड़ों की संख्या में पुरुष, महिलाएं , बच्चे आचार्य श्री की अगवानी हेतु करमटोली चौक में उपस्थित थे।</strong></p>
<hr />
<p><strong>रांची।</strong> झारखण्ड की राजधानी रांची का सौभाग्य है कि परम पूज्य अंतर्मना आचार्य 108श्री प्रसन्न सागर जी महाराज ससंघ के चरण रांची में पड़े। उनकी तप साधना सम्पूर्ण विश्व के लिए मंगलकारी व सम्पूर्ण समाज के लिए प्रेरणादायक है। साधना महोदधि उभयमासोपवासी अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज का संघ सहित भव्याती भव्य महाजुलूस के रूप में स्वागत हुआ, सेकड़ों की संख्या में पुरुष, महिलाएं , बच्चे आचार्य श्री की अगवानी हेतु करमटोली चौक में उपस्थित थे।</p>
<p>रंग -बिरंगे झंडे, महिलाओं की स्कूटर रैली, भजन मंडली , शोभा यात्रा में चार चांद लगा रही थी। हेमंत सेठी, आकाश सेठी एवं उदित सेठी ने आचार्य श्री के स्वागत में अपने मधुर भजनों से उपस्थित गुरुभक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। गुरुभक्तों के द्वारा जगह -जगह पर आरती उतार कर एवं पाद प्रक्षालन करअगवानी की गई। यात्रा प्रातः 7.00 बजे मेंडिका हॉस्पिटल से प्रारम्भ होकर करमटोली चौक, कचहरी चौक, फिरायालाल होते हुए जैन मंदिर अपर बाजारसे रातु रोड वासुपूज्य जिनालय में प्रवचन सभा में परिवर्तित हुई, आचार्य श्री के शिष्य द्वारा विनयांजलि हुई।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-39376" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023.jpg" alt="" width="1280" height="853" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-300x200.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-1024x682.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-768x512.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-414x276.jpg 414w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-470x313.jpg 470w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-640x426.jpg 640w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-130x86.jpg 130w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-187x124.jpg 187w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2023/03/IMG-20230305-WA0023-990x660.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>इसके बाद क्षुल्लक श्री सहज सागर जी द्वारा गुरु महिमा का रसपान मिला। उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी ने जीवन के पांच तत्व की चर्चा हुई। आचार्य श्री ने अपने उद्बबोधन में धर्म और नियम की चर्चा कथा के माध्यम से की और शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर की वन्दना का महत्त्व बताया। प्रवचन सभा का संचालन समाज के सह मंत्री जैन पंकज पांड्या ने किया, बाहर से भी कई अतिथि पधारे, उनका स्वागत किया गया और जशपुर (छत्तीसगढ़) समाज के लोगों द्वारा आचार्य संघ के समक्ष श्रीफल भेंटकर जशपुर आने का आग्रह किया।</p>
<p>इस अवसर पर समाज के गणमान्य अध्यक्ष जैन पदम छाबडा,मंत्री जैन सुभाष विनायका, संजय छाबडा, मनोज काला, पूर्व मंत्री अध्यक्ष तथा करीब 800 से 1000 की संख्या में लोगों की उपस्थिति देखी गई। यह जानकारी जैन सुरेश काशलीवाल /जैन राकेश कासलीवाल/कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा द्वारा दी गई।</p>
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		<title>उदगांव अहिंसा संस्कार पदयात्रा :  जैन संतों का होगा रांची में भव्य मंगल प्रवेश </title>
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		<pubDate>Sat, 04 Mar 2023 16:26:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत गौरव अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज का रांची में मंगल प्रवेश पांच मार्च को होगा। इसकी तैयारी समाज के द्वारा किया जा रही है। पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विस्तृत रिपोर्ट&#8230; रांची। वर्ष 2004 से असम से लगातार चल रही अहिंसा संस्कार पदयात्रा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>भारत गौरव अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज का रांची में मंगल प्रवेश पांच मार्च को होगा। इसकी तैयारी समाज के द्वारा किया जा रही है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>रांची।</strong> वर्ष 2004 से असम से लगातार चल रही अहिंसा संस्कार पदयात्रा का रांची में भव्य मंगल प्रवेश भारत गौरव अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज के साथ पांच मार्च को होगा। इसकी तैयारी समाज के द्वारा किया जा रही है। शहर के रास्ते में कई तोरण द्वार बनाये जा रहे हैं। सभी अपने घरों में बैनर और रंगोली की तैयारी कर रहे हैं। पूरा शहर को पंचरंगे झंडे से पाटा जा रहा है।</p>
<p>इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष पदम जैन छाबडा ने बताया कि पांच और छह मार्च को कई संघ अन्तर्मना 108 प्रसन्न सागर जी ससंघ, आचार्य श्री गुणधर नंदी जी महाराज, श्री 108 सुवेश सागर जी महाराज का मंगल मिलन रांची की धरती पर हो रहा है। समाज के सभी वर्गों में एक अलग उत्साह दिख रहा है। लोग शहर प्रवेश के कई दिनों से पैदल साथ चल रहे हैं और कई दिनों से अन्तर्मना आचार्य श्री के रांची शहर में आगमन को लेकर प्रयासरत थे। रांची वालों के पुण्य उदय से गुरुदेव की स्वीकृति प्राप्त हुई। स्वीकृति मिलने के बाद रांची वालों के खुशी का ठिकाना नहीं है।</p>
<p>रामगढ़ की ओर से लगभग 20 किलोमीटर पद विहार करते हुए रात्रि विश्राम शहर से दूर 5 किलोमीटर पहले महावीर भवन में होगा, जहां झारखंड वनवासी मण्डल के भाई-बहनों द्वारा गुरु देव का पारम्परिक और आदिवासी तरीके से स्वागत वंदन और अभिन्दन किया गयाl इस अवसर पर अन्तर्मना ने सभी को बहुत-बहुत आशीर्वाद दिया और कहा कि झारखंड के आदिवासी समाज में जैन साधु के प्रति गुरु भक्ति कूट-कूट कर भरी हुई है। सभी का जैन मुनियों के प्रति श्रद्धा और भक्ति अपरंपार है। पांच मार्च को अंतर्मना संघ का रांची में भव्य प्रवेश होगा।</p>
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		<title>पंचकल्याणक महोत्सव : चौथे दिन आयोजित हुआ 1008 पारस नाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक </title>
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		<pubDate>Tue, 21 Feb 2023 14:18:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[1008 श्री मज्जिनेन्द्र चिंतामणि पार्श्वनाथ तीर्थंकर दिगंबर जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में ज्ञान कल्याणक मनाया गया। पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विस्तृत रिपोर्ट&#8230; निमियाघाट (गिरिडीह)। पारसनाथ की तलहटी पर निमियाघाट में स्थित जैन तीर्थस्थल पुरुषार्थ आश्रम में श्री 1008 श्री मज्जिनेन्द्र चिंतामणि पार्श्वनाथ तीर्थंकर दिगंबर जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>1008 श्री मज्जिनेन्द्र चिंतामणि पार्श्वनाथ तीर्थंकर दिगंबर जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में अंतर्मना प्रसन्न सागर जी महाराज के सानिध्य में ज्ञान कल्याणक मनाया गया। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए राजकुमार अजमेरा की विस्तृत रिपोर्ट&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>निमियाघाट (गिरिडीह)।</strong> पारसनाथ की तलहटी पर निमियाघाट में स्थित जैन तीर्थस्थल पुरुषार्थ आश्रम में श्री 1008 श्री मज्जिनेन्द्र चिंतामणि पार्श्वनाथ तीर्थंकर दिगंबर जिनविंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 18 फरवरी से 22 फरवरी तक सिंहनिष्क्रिय व्रत धारी अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में हो रहा है। महोत्सव में चौथे दिन 1008 पारस नाथ भगवान का ज्ञान कल्याणक धूमधाम से आयोजित हुआ। मनोज-वंदना गंगवाल धनबाद ने बताया कि महोत्सव में झारखंड सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचे जैन श्रद्धालु शामिल हुए। पूरा तीर्थ क्षेत्र भगवान पार्श्वनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मंदिर निर्माण विजय-राजू देवी कासलीवाल, कोलकाता ने किया है।</p>
<p><strong>हुए कई कार्यक्रम </strong></p>
<p>सुबह अन्तर्मना की नित्य भक्ति, अभिषेक व शांतिधारा के बाद पंचकल्याणक की पूजा की गई। पूजा में आचार्य श्री ने आहार की क्रिया के बारे में बताया कि एक भगवान को आहार देना सैकड़ों मुनिराज को आहार कराने से ज्यादा पुण्य का काम है। इस संसार में अपनी नजरिया ठीक करने से सब जगह अच्छा और सकारात्मक दिखेगा और जिसका नजरिया अच्छा नहीं है, उसे सब जगह बुराई दिखेगी। इस संसार में बुरा कुछ भी नहीं है, नजरिया ही सब कुछ है। गांधी जी ने कहा था कि बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो मगर हम कहते हैं इससे पहले बुरा सोचना बंद करो तो सब कुछ अपने सही हो जाएगा। इसके बाद आज पारसनाथ कुमार को तरुण भैया लेकर आहार के लिए निकले। सैकड़ों लोग आहार देने के लिए लाइन में थे, जिन्हें आहार देने का सौभाग्य मिला। इस क्रिया के बाद सभी साधु गण की आहार चर्या हुई। दिन में समवशरण लगाया गया, जिसका उद्घाटन मनोज जैन धनबाद ने किया। इसके बाद अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने सभी भक्तों की जिज्ञासा का समाधान किया।</p>
<p><strong>मनुष्य अंधा,बहरा, गूंगा क्यों होता है ?</strong></p>
<p>सौधर्म इंद्र ने जब यह पूछा कि मनुष्य अंधा, बहरा, गूंगा क्यों होता है तो समवशरण में बैठे अन्तर्मना आचार्य श्री ने बताया कि जो जीव धर्म की बातें सुन करके मुख मोड़ लेता है, धर्म की वाणी को सुनकर के अनसुना करता है और धर्म का लाभ लेता है, ऐसा मनुष्य अंधा, बहरा और गूंगा होता है। एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया कि मनुष्य त्रियंच क्यों होता है? तो अन्तर्मना ने बताया कि जो धर्म का पैसा को अपने जीवनोपयोग में लगता है, वो नियम से त्रियंच बनता है</p>
<p>देव गति के मनुष्य ने प्रश्न किया कि मनुष्य निर्धन क्यों होता है? अन्तर्मना आचार्य श्री ने बताया कि जो मनुष्य दान देता है, उसकी हंसी उड़ाना, उससे जलना ये करने से मनुष्य नियम से निर्धन होता है। संध्या में सैकड़ों भक्तों ने गुरु भक्ति की।</p>
<p><strong>ज्ञान कल्याणक मनाया</strong></p>
<p>पुरुषार्थ आश्रम में नवनिर्मित मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा की ज्ञान कल्याणक मनाया गया। भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा। सभी कार्यक्रम उपाध्याय सौम्य मूर्ति 108 पीयूष सागर जी महाराज के निर्देशन में हो रहा है।</p>
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