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	<title>प्रवचन श्रृंखला &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>प्रवचन श्रृंखला &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>पारिवारिक एकता कुरु कुरु मंत्रों से डडूका में मांगलिक शांतिधारा : अंजन से निरंजन कथा से माताजी ने किया श्रद्धा का महत्व प्रतिपादित </title>
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		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 10:55:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद यात्रा द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की जा रही है। डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230; डडूका। धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद यात्रा द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की जा रही है। <span style="color: #ff0000">डडूका से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>डडूका।</strong> धर्मनगरी में आचार्य श्री विराग सागरजी महाराज जी की सुशिष्या आर्यिका श्री विश्वासश्री माताजी द्वारा शांतिधारा, प्रवचन श्रृंखला और आनंद यात्रा द्वारा अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की जा रही है। प्रातःकालीन शांतिधारा में माताजी जब आतंकवाद छिंद छिंद भिंद भिंद और पारिवारिक एकता कुरु कुरु जैसे मंत्रों के मांगलिक और मुखरित स्वरों से उच्चारण करती हैं तो भक्त भावविभोर होकर इसका लाभ उठाते हैं। शुक्रवार को प्रातः मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के जलाभिषेक के बाद विश्वास श्री माताजी के सान्निध्य में 11वें तीर्थंकर भगवान श्रेयांसनाथ के जन्म तप कल्याणक पर्व पर और प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कैवल्य ज्ञान दिवस पर अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रातःकालीन प्रवचन श्रृंखला में आज माताजी ने भक्तों को अंजन से निरंजन कथा द्वारा श्रद्धा के महत्व को प्रतिपादित किया। उन्होंने कहा कि णमोकार महामंत्र पर अटूट विश्वास और श्रद्धा से अंजन चोर जिनदत्त भक्त बन मोक्ष पथ प्रशस्त कर सकता है तो हमारे लिए क्या मुश्किल है।</p>
<p><strong>यह समाजजन मौजूद रहे</strong></p>
<p>इस अवसर पर समाजजनों ने दीप प्रज्वलन कर सभा का शुभारंभ किया। राजेंद्र कोठिया ने ईश वंदना कर जिनवाणी स्तुति की। सभा में राजेश शाह, धनपाल सेठ, धनपाल शाह, अजीत कोठिया, अजीत शाह, सूरजमल शाह, वस्तुपाल शाह, केसरीमल भरड़ा, भरत जैन, योगेश शाह, अशोक शाह, मुकेश शाह सहित कई भक्त जन एवं महिला मंडल की बहने उपस्थित थी। आशीर्वाद क्षुल्लिका श्री विकंठश्री माताजी ने दिया सभी का आभार समाज अध्यक्ष राजेश के शाह ने व्यक्त किया।</p>
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		<title>णमोकार मंत्र में पंच परमेष्ठी निहित है : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने णमोकार को कल्पवृक्ष समान बताया </title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Jul 2025 13:46:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधुओं सहित इस धर्म नगरी के श्री आदिनाथ जिनालय नसिया जी में विराजित हैं। आचार्य श्री की णमोकार मंत्र के महत्व पर प्रवचन श्रृंखला चल रही है। टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230; टोंक। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधुओं सहित इस धर्म नगरी के श्री आदिनाथ [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<hr />
<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधुओं सहित इस धर्म नगरी के श्री आदिनाथ जिनालय नसिया जी में विराजित हैं। आचार्य श्री की णमोकार मंत्र के महत्व पर प्रवचन श्रृंखला चल रही है। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 36 साधुओं सहित इस धर्म नगरी के श्री आदिनाथ जिनालय नसिया जी में विराजित हैं। आचार्य श्री की णमोकार मंत्र के महत्व पर प्रवचन श्रृंखला चल रही है। आचार्य श्री ने बताया कि णमोकार मंत्र में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सर्व साधु पांचों परमेष्ठि निहित हैं। णमोकार मंत्र सुख और दुख दोनों में स्मरण करना चाहिए। हमने प्रवचन में पूर्व में भी बताया था कि णमोकार मंत्र कल्पवृक्ष, कामधेनु और चिंतामणि रत्न के समान मनोरथ पूर्ण करता है। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्मसभा में प्रकट की। राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने प्रवचन में कहा कि णमोकार मंत्र में अनेक शक्तियां विद्यमान हैं। कैंसर रोग सहित अन्य गंभीर रोगी भी णमोकार मंत्र की श्रद्धा भक्ति से ठीक हो गए हैं। कार्यों में अवरोध कारण कष्ट, दुख होता हैं। णमोकार मंत्र की साधना और शक्ति से विपदा और रोग ठीक होते हैं।</p>
<p>अकाल मृत्यु के बारे में विवेचना कर बताया कि संकलेश भाव परिणाम के कारण अकाल मृत्यु होती है क्योंकि परिणाम के कारण आयु का क्षरण होता है। अभी आपने प्रवचन में वक्ता और श्रोता कितने प्रकार के होते हैं, श्रोता के कितने गुण होते हैं, की विवेचना सुनी है। इसलिए श्रोता और सरोता के गुण दोष को समझ कर अच्छे हंस समान श्रोता बन कर धर्म की वाणी ग्रहण करे। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व शिष्या आर्यिका श्री पद्मयश मति माताजी ने उपदेश में वक्ता और श्रोता के गुण ओर भेद बताए। 36 मूलगुण धारी आचार्य गणी होते हैं। वह आगम वाणी, शास्त्रों के जानकार, मन को समझ कर धर्मवाणी से दुख दूर करते हैं। जिनसेन स्वामी ने आदि पुराण में 14 प्रकार के श्रोता की विवेचना की हैं जिस अनुसार श्रोता फूटे मटके,मिट्टी,चलनी,बकरा, सांप, बिलाव, तोता, हंस, गाय, भैंस, जोक, मच्छर, बगुला और पाषाण पत्थर समान होते हैं, जिनसे सर्वश्रेष्ठ श्रोता हंस समान होते हैं। उन्होंने श्रोता के 8 गुण भी बताए।</p>
<p><strong>एक बाल्टी पानी से स्नान करने का त्याग देकर नियम दिलाया</strong></p>
<p>समाज के धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार ने बताया कि धर्मसभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रज्वलन अमीरगंज नसिया महिला मंडल द्वारा किया जाकर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस मौके पर झाड़ोल से पधारे कलाकार भाई गोरधन के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं अष्टद्रव्य समर्पित किया। सुनील सर्राफ ने पूजन व्यवस्था में सहयोग किया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को एक बाल्टी पानी से स्नान करने का त्याग देकर नियम दिलाया। आचार्य श्री संघ के आहार के चौके लगाने के लिए बाहर के नगरों से काफी भक्त पधार रहे हैं। टोंक सहित इंदौर पारसोला निवाई के चौके लगे हैं। बाबूलाल जैन परिवार जयपुर को बुधवार को आचार्य श्री का आहार कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।</p>
<p><strong>समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी की तैयारियां</strong></p>
<p>समाज के मीडिया प्रकोष्ठ मंत्री रमेश काला एवं विमल जोला ने बताया कि 27 जुलाई को होने वाली शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही है। जिसमें देश के सभी पत्रकार आयेंगे। जिसमें पत्रकारों का सामाजिक समरसता में चरित्र चक्रवर्ती का योगदान, प्रथमाचार्य और उनके जीवन मूल्यों की वर्तमान में प्रासंगिता, प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का जैन दर्शन को अवदान आदि विषयों पर संगोष्ठी होगी। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत सम्मान होगा एवं वात्सल्य भोज होगा ।आज अनेक नगरों से श्रद्धालु दर्शन हेतु पधारे। जिसमें जयपुर, सनावद, पारसोला, निवाई, इंदौर के श्रद्धालुओं की दिनभर भीड़ रही।</p>
<p><strong>कलश स्थापित किए</strong></p>
<p>आचार्य शांतिसागर शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत हनुमान प्रसाद, मनीष कुमार अनाज वाला परिवार, सत्यप्रकाश, मनोज कुमार दाखिया परिवार, बाबूलाल, पदमचंद, पवन, अनिल कंटान परिवार, दिनेश कुमार अमित कुमार छामुनिया परिवार, नेमीचंद जितेंद्र कुमार बनेठा परिवार ने कलश स्थापित किए।</p>
<p><strong>कार्यक्रम में यह समाज श्रेष्ठी उपस्थित रहे</strong></p>
<p>इस मौके पर कमल सर्राफ, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, एंजे दाखिया, प्रदीप बगड़ी, सोनू पासरोटियां, मनीष अतार, मनोज बहड, आशु दाखिया, अनिल सर्राफ, विकास अतार एवं अमीरगंज नसिया महिला मंडल की सदस्याएं अंजना मंडावर, अंशु अतार, हेमा कंटान, अनीता बोरदा, सुनीता बोरदा, निर्मीश, अनीता श्यामपुरा, संतोष नमक, पुष्पा लुहाड़िया, उषा बिलासपुरिया, मंजू बोरखंडी, सुनीता कंटान, अनिल मंडावर, रीना आंडरा, सुनीता आंडरा, नीलम कंटान, पदमा छामुनिया, स्नेहलता रानोली, सुनीता सेठी, कांता आंडरा, माया रोहतक, ज्ञानमाला, इंदू, रिंकी फुलेता, पूर्व सभापति लक्ष्मी देवी, अनीता सराफ, त्रिशला बोरदा, निहारिका निवाई, शीलू बिलासपुरिया आदि उपस्थित रहे।</p>
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