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	<title>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का उपनगरों में विहार जारी है : शनिवार को प्रतापनगर में आहारचर्या होगी </title>
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		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 16:29:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जयपुर के उपनगरों में विहार चल रहा है। 6 मार्च को आहार के बाद श्री शांतिनाथ जिनालय नांगलिया बिलवा से 5 किमी विहार कर जेडी टीटी कॉलेज गोनेर पुलिया के पास सीतापुरा में रात्रि [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जयपुर के उपनगरों में विहार चल रहा है। 6 मार्च को आहार के बाद श्री शांतिनाथ जिनालय नांगलिया बिलवा से 5 किमी विहार कर जेडी टीटी कॉलेज गोनेर पुलिया के पास सीतापुरा में रात्रि विश्राम हुआ। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का जयपुर के उपनगरों में विहार चल रहा है। 6 मार्च को आहार के बाद श्री शांतिनाथ जिनालय नांगलिया बिलवा से 5 किमी विहार कर जेडी टीटी कॉलेज गोनेर पुलिया के पास सीतापुरा में रात्रि विश्राम हुआ। 7 मार्च को प्रातः 5 किमी विहार कर धनवंतरि आर के संत भवन सेक्टर 10 प्रतापनगर में आहारचर्या होगी। प्रवचनसार गाथा की विवेचना में आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने बताया कि यह संसारी जीव अनेक गतियो में परिभ्रमण कर अलग-अलग पर्याय में नूतन शरीर को धारण करता है। शरीर के प्रति अंतरंग मोह के कारण जीव शरीर धारण करता है। संसारी आत्मा के कर्मों के उदय में आने से एक गति से दूसरी गति एक इंद्रीय से पांच इंद्रीय पर्याय प्राप्त होती है। राजेश पंचोलिया और लोकेश गजराज के अनुसार इन गतियो में विषय भोग की अधिकता के कारण शरीर भी रागी हो जाता है, मोह और ममता भाव के कारण अनंतकाल तक यह जीव भ्रमण करता है। संसारी जीव को जब सम्यक गुरु का उपदेश मिलता है। तब संसार शरीर भोगों को वह असार समझ संयम धारण कर मोह ,ममता को त्याग़ने ममता की डोरी टूटते ही कर्मों का नष्ट होना प्रारंभ हो जाता है।</p>
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		<title>गुरु के उपकारों को कभी न भूलें- आचार्य श्री वर्धमान सागर जी : सालभर मनाया जाएगा आचार्य पद शताब्दी महोत्सव  </title>
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		<pubDate>Mon, 21 Jul 2025 07:50:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[इस वर्षायोग में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव भी वर्ष भर मनाया जाएगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जैन मंदिर अमीरगंज नसिया में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन व्यर्थ है ,गुरु के उपकार को [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>इस वर्षायोग में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव भी वर्ष भर मनाया जाएगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जैन मंदिर अमीरगंज नसिया में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन व्यर्थ है ,गुरु के उपकार को भूलना नहीं चाहिए। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, उदयभान जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> इस वर्षायोग में प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद शताब्दी महोत्सव भी वर्ष भर मनाया जाएगा। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जैन मंदिर अमीरगंज नसिया में आयोजित धर्म सभा में प्रकट की। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन व्यर्थ है ,गुरु के उपकार को भूलना नहीं चाहिए। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज दिगंबर समाज के प्रथम आचार्य रहे हैं। वह चरित्र के भी चक्रवर्ती रहे हैं। उनके पिछले जीवन में रत्नत्रय का चक्र रहा। उन्होंने माता-पिता के आज्ञा का सम्मान कर उनके समाधि होने तक घर में रहकर धर्म की आराधना की। उनकी समाधि के बाद ही उन्होंने संन्यास लिया। राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने कहा कि बहुत सौभाग्य से अच्छी वस्तु मिलती है और मनवांछित सामग्री मिलने पर बहुत खुशी होती है और भक्ति देखकर साधु को भी अच्छा लगता है। इस चातुर्मास में अनेक पर्व आएंगे।</p>
<p><strong>श्री धर्मसागर पाठशाला के बच्चों ने किया अभिषेक पूजन </strong></p>
<p>आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व आर्यिका श्री महायश मति माता जी ने प्रवचन में कहा कि रविवार को आचार्य श्री धर्मसागर पाठशाला के बच्चे अभिषेक पूजन करने के लिए आए और यह परंपरा सन 1970 से वर्तमान तक लगातार चल रही है। बचपन के संस्कार लाभदायक होते हैं। माताजी ने प्रवचन में सात सारभूत बातों की विवेचना में बताया कि सभी को सत संगति, प्रभु भक्ति ,सेवा, दया ,ध्यान, दान और उपकार करना चाहिए। संगति अनुसार गुण और अवगुण दोनों प्राप्त होते हैं। प्रभु की भक्ति से संसार समुद्र से पार हो सकते हैं। आचार्य, साधु और परमेष्ठी की सेवा श्रद्धा पूर्वक करने से तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध होता है। धर्म का मूल दया है। आपको खाद्य सामग्री में शाकाहारी मांसाहारी पदार्थ का ध्यान रखना जरूरी है। ध्यान से कर्मों की निर्जरा होती है। दान चार प्रकार के होते हैं। भारतीय संस्कृति ने हमें देना सिखाया है, परोपकार से पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए सभी को कृतज्ञता का भाव रखना चाहिए। गुरु चलते फिरते पावर हाउस हैं। उनसे ज्ञान रूपी ऊर्जा मिलती है, इसलिए गुरु का उपकार सेवा कर जीवन को अच्छा बनाना चाहिए।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-85554" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/07/IMG-20250721-WA0003-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी की भेंट </strong></p>
<p>समाज के धर्म प्रचारक प्रवक्ता पवन कंटान एवं विकास जागीरदार अनुसार धर्म सभा में श्रीजी और पूर्वाचार्य का चित्र का अनावरण दीप प्रवज्जलन समस्त टोंक की पाठशालाओं के बालक एवं बालिकाएं, टोंक के पाठशाला के अध्यापक गण, टोंक के पाठशाला के संचालक गण, शांतिनाथ शांति धारा परिवार समिति, बड़ा तख्ता जैन मंदिर टोंक ने किया। आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। इस मौके पर झाड़ोल से पधारे, कलाकार भाई गोरधन एवं सुनील सर्राफ के भक्तिमय भजनों पर बड़े भक्ति भाव से भक्ति नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं ने अष्टद्रव्य समर्पित किया। इस मौके पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने सभी श्रावकों को रात में पानी के अलावा सभी पेय एवं खाद्य पदार्थ का त्याग देकर नियम दिलाया।</p>
<p><strong>संगोष्ठी के लिए आचार्यश्री से चर्चा </strong></p>
<p>जैन पत्रकार महासंघ कार्यकारिणी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया (जयपुर), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेंद्र जैन महावीरश्(सनावद), राष्ट्रीय महामंत्री उदयभान जैन (जयपुर), राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुनील जैन ‘संचय’ (ललितपुर), राष्ट्रीय मंत्री राकेश चपलमन (कोटा), अरुण जैन (जयपुर), निर्मल जैन (जयपुर) पधारे एवं आचार्य श्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद लेकर 27 जुलाई होने वाली शांति समागम राष्ट्रीय पत्रकार संगोष्ठी पर चर्चा की। रविवार को अनेक नगरों से श्रद्धालु दर्शन हेतु पधारे जिसमें गंगापुर सिटी, किशनगढ़, दौसा, केकड़ी, डिग्गी, जयपुर, सनावद, ललितपुर के श्रद्धालु भी शामिल रहे।</p>
<p><strong>शताब्दी महोत्सव के लिए कलश स्थापित </strong></p>
<p>आचार्य शांतिसागर शताब्दी महोत्सव के तहत महेश कुमार, सानिध्य कुमार माधोपुरिया, महावीर कुमार, संतकुमार गोधा विजय नगर, निर्मल कुमार, योगेन्द्र कुमार फूलेता, महेंद्र कुमार, सुरेन्द्र कुमार सर्राफ परिवार, ज्ञानचंद राजेंद्र कुमार खुरेडा परिवार ने कलश स्थापित किए। इस मौके पर मीडिया प्रकोष्ठ रमेश काला, कमल सर्राफ, नरेंद्र दाखिया, नीटू छामुनिया, पंकज फूलेता, ओम ककोड़, वीरेंद्र संघी, पंकज छामुनिया, राजेश शिवाड़िया, सुमित दाखिया, अम्मू छामुनिया, उमेश संघी, सुरेंद्र अजमेरा, ज्ञान संघी, पुनीत जागीरदार, सोनू पासरोटियां, नरेंद्र अतार, मनोज बहड, राहुल पासरोटियां, मनीष अतार, अंकुर पाटनी, विकास अतार, अनिल सर्राफ, अनिल कंटान, प्रदीप बगड़ी आदि समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।</p>
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		<title>दीक्षार्थी सुरेश शाह की अश्रुपूरित की विदाई : वहीं परिजनों का बिछड़ने का दुःख नेत्रों से झलक रहा था </title>
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		<pubDate>Wed, 16 Apr 2025 03:48:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[बोली के मूल निवासी 75 वर्षीय ब्रह्मचारी सुरेश शाह 20 अप्रैल को दीक्षा ग्रहण करेंगे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी दीक्षा प्रदान करेंगे। समाजजनों और परिजनों ने मंदसौर जाने से पूर्व दीक्षार्थी शाह को विदाई दी। जयपुर से पढ़िए यह खबर&#8230; जयपुर। धार्मिक नगरी और धर्म राजधानी का सौभाग्य है कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>बोली के मूल निवासी 75 वर्षीय ब्रह्मचारी सुरेश शाह 20 अप्रैल को दीक्षा ग्रहण करेंगे। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी दीक्षा प्रदान करेंगे। समाजजनों और परिजनों ने मंदसौर जाने से पूर्व दीक्षार्थी शाह को विदाई दी। <span style="color: #ff0000">जयपुर से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>जयपुर</strong>। धार्मिक नगरी और धर्म राजधानी का सौभाग्य है कि प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी से लेकर परपंरा के वर्तमान पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सहित अनेक आचार्यों और साधुओं से अनेक भव्य प्राणियों ने जैनेश्वरी दीक्षा लेकर मानव जीवन सार्थक किया। बोली के मूल निवासी 75 वर्षीय ब्रह्मचारी सुरेश शाह अपने गृहस्थ अवस्था के पुत्र वर्तमान मुनि श्री हितेंद्र सागर जी का अनुसरण कर 20 अप्रैल को मध्यप्रदेश के अतिशय क्षेत्र बही पार्श्वनाथ मंदसौर में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा लेने के लिए मालवीय नगर समाज एवं परिजनों से विदाई लेकर प्रस्थान किया राजस्थान जैन सभा के उपाध्यक्ष विनोद कोटखावदा के अनुसार जहां संयमी होने की खुशी थी। वहीं परिजनों को बिछड़ने का दुःख नेत्रों से झलक रहा था। जो सभी को भावुक कर रहा था</p>
<p><strong>परिजनों ने दी भावभीनी विदाई</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने इसके पूर्व जयपुर के मुनि श्री हितेंद्र सागर जी, मुनि श्री विवर्जित सागर जी को दीक्षा दी है। 75 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 56 वर्ष के संयमी जीवन में 35 वर्ष के आचार्य अवधि में अभी तक इसके पूर्व 114 दीक्षा दी हैं। आचार्य श्री शांति सागर जी श्रमण परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी पंचम पट्टाधीश पद को सुशोभित कर रहे हैं। दीक्षार्थी सुरेश को पत्नी सुनीता, पुत्र गजेंद्र, मनोज पुत्री कमलश्री सहित परिजनों हरकचंद लुहाड़िया, शिखरचंद जैन, रामपाल,नीरज लुहाड़िया, मुकेश कासलीवाल, सुमित्रा छाबड़ा आदि समाज ने जुलूस माध्यम से विदाई दी।</p>
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		<title>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन के लिए सपरिवार आए भामाशाह : समाजजनों ने किया भावभीना स्वागत </title>
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		<pubDate>Wed, 19 Mar 2025 08:32:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे। धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। धरियावद से पढ़िए यह खबर&#8230; धरियावद। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे। धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने अभिनंदन किया। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा के आचार्य श्री वर्धमान सागर जी, मुनि श्री पुण्यसागर जी संघ सहित 52 साधु यहां विराजित हैं। चमत्कारी 1008 श्री चंद्र प्रभु एवं आचार्य श्री शांति सागर जी, आचार्य श्री कुंथु सागर जी की पवित्र चरण रज से पवित्र नगरी वास्तव में धर्म नगरी हैं क्योंकि, अनेक आचार्य संघ का सहज आगमन होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी और मुनि श्री पुण्य सागर जी के दर्शन करने के लिए राजस्थान किशनगढ़ के भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी परिवार सहित 18 मार्च को धरियावद पधारे।</p>
<p><strong>हेलीपैड पर किया स्वागत</strong></p>
<p>राजेश पंचोलिया ने बताया कि इसके पूर्व नगर के हैलीपेड पर दिगंबर जैन समाज के सेठ एवं पंडित हंसमुख शास्त्री, ब्रह्मचारी गज्जू भैया, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी सहित अनेक गणमान्य धार्मिक सामाजिक, प्रशासनिक प्रतिनिधियों ने बैंडबाजे,पुष्पहार गुलदस्ते से अतिथियों का भावभीना स्वागत अभिनंदन किया।</p>
<p><strong>सामाजिक पहलू पर मार्गदर्शन प्राप्त लिया</strong></p>
<p>अशोक पाटनी किशनगढ़ ने आचार्य श्री के दर्शन कर चरण वंदना की। आचार्य श्री से अनेक धार्मिक सामाजिक पहलू पर मार्गदर्शन प्राप्त किया। अशोक पाटनी ने आचार्य श्री को बताया कि मुनि श्री प्रशम सागर जी हमेशा हमें स्वाध्याय की प्रेरणा देते थे। पिछली बार गामड़ी में दर्शन किए थे।</p>
<p><strong>धार्मिक मंडल ने किया अभिनंदन</strong></p>
<p>आचार्य श्री संघ के दर्शन बाद मुनि श्री पुण्य सागर जी एवं समाधि साधना कर रहे मुनि श्री पूर्ण सागर जी के दर्शन किए। धार्मिक मंडल द्वारा अशोक, सुशीला एवं शांता पाटनी किशनगढ़ का अभिनंदन किया। पंडित हंसमुख के निवेदन पर आचार्य श्री एवं संघ के दर्शन कर अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी, शांता पाटनी सपरिवार नंदन वन एवं हिमवन भी गए। दोनों क्षेत्र के दर्शन कर प्रसन्नता प्रकट की।</p>
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		<title>आचार्य साधु परमेष्ठी चलते-फिरते तीर्थ : 22 वर्षों के बाद पदार्पण पर हुई धर्मसभा </title>
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		<pubDate>Sun, 23 Feb 2025 10:14:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की। आचार्यश्री ने धर्म सभा को संबोधित किया। धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230; धरियावद। धैर्य, धीरज का फल मीठा होता है। आप काफी वर्षों से प्रतीक्षा कर [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश हुआ। कर जिनवाणी भेंट की। आचार्यश्री ने धर्म सभा को संबोधित किया। <span style="color: #ff0000">धरियावद से पढ़िए राजेश पंचोलिया की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>धरियावद।</strong> धैर्य, धीरज का फल मीठा होता है। आप काफी वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं। तीर्थंकरों की वाणी साक्षात में सुनने को नहीं मिलती है किंतु, उनके द्वारा प्रतिपादित उपदेश जिनवाणी ओर गुरुओं के माध्यम से मिलता है। मनुष्य जन्म बहुत ही दुर्लभता से मिला है। मनुष्य जीवन में देव ,शास्त्र गुरुओं के प्रति श्रद्धा,भक्ति विनय से भगवान भी झुक जाते हैं। वश में हो जाते हैं। नगर में काफी भौतिक प्रगति हो रही है। लगभग 21 वर्षों पूर्व नगर में आए थे। श्री चंद्रप्रभु जिनालय और यहां के मैदान में परिवर्तन हो गया है। भगवान का जिनालय अब नवीन जिनालय हो गया है। समय के साथ प्रगति हुई है। प्रगति निरंतर बनी रहना चाहिए देव अर्थात आचार्य साधु परमेष्ठी चलते-फिरते तीर्थ हैं। उनके प्रति श्रद्धा भक्ति और विनय रखना चाहिए। यह धर्म देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी महाराज ने नगर में 22 वर्षों के बाद पदार्पण के अवसर पर आयोजित धर्मसभा में प्रकट की।</p>
<p><strong><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-75216" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-scaled.jpg" alt="" width="2560" height="1920" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-scaled.jpg 2560w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-2048x1536.jpg 2048w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/02/IMG-20250223-WA0012-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 2560px) 100vw, 2560px" />धर्म के माध्यम से रत्नत्रय को धारण करें</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गज्जू भैया ने बताया कि आचार्यश्री ने आगे उपदेश में कहा कि अरिहंत भगवान से जो धर्म प्राप्त हुआ है। उस धर्म से जीवन को उन्नत बनाने का पुरुषार्थ करना चाहिए क्योंकि, विनय श्रद्धा और भक्ति मोक्ष के द्वार की चाबी है। इस धर्म रूपी चाबी को भूलना या खोना नहीं चाहिए। इसे संभाल कर रखें तथा धर्म के माध्यम से रत्नत्रय को धारण करें। इसी में मनुष्य जीवन की सार्थकता है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व पंडित हंसमुख शास्त्री ने आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज से वर्ष 2025 का चातुर्मास एवं प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव का समापन धरियावद में संघ सहित करने का निवेदन किया</p>
<p>मुनिश्री पुण्य सागर जी ने अपने उद्बोधन में समाज को बताया कि जो सोता है वह खोता है। इसलिए आचार्य श्री के पदार्पण से होली के साथ दीपावली पर्व भी प्रारंभ हो गया है।,अब बारिश के समाप्त होने पर धर्म की बारिश होगी। उसमें भीगने से लाभ होगा। सूखे रहोगे तो कोरे रह जाओगे क्योंकि, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी में आचार्य शांति सागर जी से लेकर दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी के गुण समाहित है।</p>
<p><strong>सभी 53 साधुओं ने जिनालयों के दर्शन किए</strong></p>
<p>आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी की अंतराष्ट्रीय स्तर पर धर्म प्रभावना की है। दशा हमड़ सेठ करणमल, दशा नरसिंहपुरा सेठ दिनेश जेकनावत तथा बीसा नरसिंहपुरा, सेठ गुणवंत डुगावत ने बताया कि आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज अपने 9 मुनिराजों, 22 आर्यिकाओं तथा 2 क्षुल्लकों कुल 34 साधुओं का 22 वर्षों के बाद धरियावाद प्रवेश पर धरियावाद में विराजित मुनिश्री पुण्यसागर जी महाराज ने अपने 18 साधुओं सहित परिक्रमा और चरणवंदना की। पंडित हंसमुख, ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी, सम्पूर्ण समाज ने 75 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की 23 फरवरी को आगवानी की। सभी 53 साधुओं ने जिनालयों के दर्शन किए। घरों के सामने रंगोली बनाई गई।</p>
<p><strong>चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की</strong></p>
<p>नगर के पुरुष महिलाएं धार्मिक मंडल निर्धारित वेषभूषा में अगवानी भक्ति नृत्य पूर्वक जयकारों के साथ की। संपूर्ण नगर के हम भक्तों की हैं अभिलाषा धरियावद में हो चौमासा, देखो देखो कौन पधारे भक्तों के भगवान पधारे, भगवान महावीर और आचार्य श्री वर्धमान सागर के जय जयकार से गूंज रहा था। धर्म सभा में प्रवचन के पूर्व मंगलाचरण हुआ। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी एवं पूर्वाचार्यों के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन आमंत्रित अतिथियों तथा स्थानीय समाज के पदाधिकारी द्वारा किया गया। सौभाग्यशाली परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट की। सभा का संचालन पंडित विशाल ने किया।</p>
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