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	<title>प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>ऐतिहासिक जुलूस में उमड़े बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु : प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव में 1008 कलशों से किया भगवान का अभिषेक </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 13:19:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[दिगंबर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर सुमेर पर्वत हेतु जुलूस निकाला गया। हाथी, घोड़ों और बग्गियों के शाही लवाजमे के साथ विभिन्न मार्गों से निकले जुलूस में लोगों का सैलाब उमड़ा। जगह-जगह जुलूस का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>दिगंबर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर सुमेर पर्वत हेतु जुलूस निकाला गया। हाथी, घोड़ों और बग्गियों के शाही लवाजमे के साथ विभिन्न मार्गों से निकले जुलूस में लोगों का सैलाब उमड़ा। जगह-जगह जुलूस का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक।</strong> दिगंबर जैन समाज की ओर से आयोजित श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर सुमेर पर्वत हेतु जुलूस निकाला गया। हाथी, घोड़ों और बग्गियों के शाही लवाजमे के साथ विभिन्न मार्गों से निकले जुलूस में लोगों का सैलाब उमड़ा। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। जुलूस के वर्धमान सभागार पहुंचने पर आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ की मौजूदगी में 1008 कलशों से भगवान का जन्माभिषेक मनाया गया। 1008 श्री पार्श्वनाथ भगवान के श्रीमद जिनेद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के दूसरे दिन नगर में ऐतिहासिक जुलूस वर्धमान सभागार से जुलूस रवाना हुआ। यात्रा में 23 हाथी व 25 बग्गियों में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र इन्द्रगण को शामिल होने का सौभाग्य मिला। 5 बैंड की मधुर ध्वनियों के बीच निकली। यात्रा का जगह-जगह विभिन्न समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। यात्रा में विभिन्न क्षेत्र से जैन समाज के पुरुष और महिलाएं शामिल हुईं।</p>
<p>जुलूस प्रमुख चौराहे होते हुए पुनः वर्धमान सभागार पहुंचा। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में पांडुक शिला पर तीर्थंकर जिन बालक को विराजमान कर सौधर्म इंद्र के अभिषेक करने के बाद पुण्यशाली चयनित परिवार वालों की ओर से स्वर्ण कलश से जिन तीर्थंकर बालक का अभिषेक किया गया। बाद में महा महोत्सव के पात्रों द्वारा 1008 कलशों से भगवान का जन्माभिषेक किया गया।</p>
<p><strong>संचित पुण्यों से मिलता तीर्थंकररूपी कर्म का फलः आचार्यश्री</strong></p>
<p>आचार्यश्री वर्धमान सागरजी ने कहा कि लौकिक व्यक्ति के जन्म पर आप खुशी मनाते हैं उसी प्रकार तीर्थंकर के जन्म पर देवता खुशी उत्सव मनाते हैं। कई जन्मों के संचित सातिशय पुण्य से भगवान अवतरित होते हैं। आत्मा कई भव में भ्रमण करती हैं तब पूर्व वर्षों के संचित पुण्य से तीर्थंकर नाम कर्म का फल मिलता है। तीर्थंकर बालक के गर्भ के 6 माह पहले से 14 करोड़ रत्न प्रतिदिन की वृष्टि होती है। तीर्थंकर बालक के गर्भ के 6 माह पहले और जन्म के 9 माह पूर्व अर्थात 15 माह तक कुबेर द्वारा रत्नों की वृष्टि की जाती है। तीर्थंकर भगवान द्वारा रत्नत्रय धर्म की वृष्टि की जाती है एवं देवताओं द्वारा रत्नों की वृष्टि की जाती है। श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महा महोत्सव के तीसरे दिन वर्धमान सभागार में प्रवचन सभा में आचार्य श्री ने कहा कि जब भगवान का जन्म होता है तो उनका जन्म कल्याणक मनाया जाता है किंतु, लौकिक जीवन में आप बर्थडे मनाया जाता है। तीर्थंकर का जन्मदिन अंतिम जन्म होता है क्योंकि उनके जन्म के बाद वह दोबारा जन्म नहीं लेते हैं। यह उनका अंतिम जन्म होता है।</p>
<p><strong>शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए</strong></p>
<p>ब्रह्मचारी गजू भैंया ने बताया कि श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के तीसरे दिन विभिन्न कार्यक्रम हुए। प्रवक्ता रमेशचंद काला और गजराज लोकेश ने बताया कि जन्म कल्याणक के तहत प्रतिष्ठाचार्य हंसमुख जैन, ,प्रतिष्ठाचार्य मनोज के निर्देशन में प्रातः जिनाभिषेक एवं नित्यार्जन, तीर्थंकर जिन बालक जन्म जन्मोत्सव मनाया गया। वर्धमान सभागार में आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ के मंचासीन होने के बाद पुण्यर्जाक परिवारों ने चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को शास्त्र भेंट कर पाद प्रक्षालन किया। महिला मंडल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान स्वागत अभिनंदन किया। सांयकाल पांडाल में श्रीजी की महाआरती की गई। शास्त्र सभा के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।</p>
<p><strong>पालना महोत्सव और वात्सल्य मय जीवन दर्शन प्रदर्शनी </strong></p>
<p>तीर्थंकर बालक का पालना कार्यक्रम में इंद्र परिवार के बाद समाज ने पालना झूला कर पुण्य लाभ लिया। श्रीमद जिनेन्द्र पंचकल्याणक महा महोत्सव के अवसर पर कार्यक्रम परिसर में आचार्य श्री शांति सागर एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के वात्सल्यमय जीवन दर्शन प्रदर्शनी लगाई गई हैं। जिसमे आचार्यश्री के बाल्यकाल से आचार्यश्री के सफर को दर्शाने के अलावा 57वर्ष के संयम जीवन के अविस्मरणीय वात्सल्यमय पलों का सुंदर चित्रांकन किया गया।</p>
<p><strong>तप कल्याणक महोत्सव 10 नवंबर को </strong></p>
<p>दिगंबर जैन पार्श्वनाथ मंदिर के श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महा महोत्सव के चौथे दिन को तप कल्याणक महोत्सव किया जाएगा। प्रातः 5.30 बजे ध्यान और आशीर्वाद सभा, प्रातः 6.30 बजे श्रीजिनाभिषेक, नित्यार्जन, प्रातः 8.15 बजे बाल क्रीडा और 9 बजे प्रवचन सभा होगी। पंच कल्याणक समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा प्रातः 9.15 बजे वर्धमान सभागार से रवाना होगी। वहां से जुलूस मुख्य चौराहों रोड होते हुए पुनः वर्धमान सभागार पहुंचेगा। दोपहर 1 बजे राज्याभिषेक, वैराग्य दर्शन, तीर्थंकर महाराजा गृह त्याग, दीक्षा विधि संस्कार, तपकल्याणक पूजा और हवन होगा। शाम को 6.30 बजे आरती, 7.30 बजे शास्त्र सभा और रात्रि 8 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
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		<title>अनुशासन से धर्म श्रवण करे तभी मिलेगा पुण्य का लाभ : 16 सपने देखना भी विज्ञान है।  </title>
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		<pubDate>Sun, 09 Nov 2025 09:21:14 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के दूसरे दिन गर्भ उत्तरार्द्ध पर विभिन्न कार्यक्रम हुए। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यक्रम में शामिल होकर आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230; टोंक। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ने कहा कि आदि पुराण में गर्भ संस्कारों का वर्णन है। माता [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा प्राण महामहोत्सव के दूसरे दिन गर्भ उत्तरार्द्ध पर विभिन्न कार्यक्रम हुए। लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यक्रम में शामिल होकर आचार्य श्री से आशीर्वाद लिया। <span style="color: #ff0000">टोंक से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>टोंक</strong>। आचार्यश्री वर्धमान सागरजी महाराज ने कहा कि आदि पुराण में गर्भ संस्कारों का वर्णन है। माता भी गर्भ में ही बच्चों को संस्कारित कर सकती है। आजकल की गर्भवती माता टीवी के सामने बैठकर आमोद-प्रमोद की वस्तुएं देखती हैं। गर्भस्थ शिशु को भी अच्छे संस्कारों से संस्कारित करना चाहिए। तभी वह बालक संस्कारवान बनता है। गर्भ कल्याणक के माध्यम से संस्कारों के कारण मोक्ष प्राप्त होता है अर्थात जन्म कल्याणक में जो बीजारोपण होता है। पंच कल्याणक में जो नाटक दिखाए जाते हैं, वह धर्म में संस्कार देने का प्रयास होता है। आचार्य श्री ने कहा कि जो भव्य प्राणी दर्शन और विशुद्धि का चिंतन करते हैं। वह जीव तीर्थंकर नाम प्रकृति का बंध करते हैं। तीर्थंकर की माता का पुत्र प्रथम ओर अंतिम होते है। इसके बाद अन्य संतान का जन्म नहीं होता। सभी तीर्थंकर आदिनाथ भगवान से लेकर महावीर स्वामी तक 24 तीर्थंकर ने 16 कारण भावना का चिंतन मनन कर तीर्थंकर प्रकृति का बंध किया। आचार्य श्री ने गर्भ के भी कल्याणक होने के बारे में बताते हुए कहा कि बालक ने महापुण्य प्रकृति का बंध कर गर्भ में प्रवेश किया हैं।</p>
<p>उस जीव की जन्म से 6 माह पूर्व से अष्ट कुमारी, 56 कुमारी माता की सेवा करती है। आचार्य श्री ने कहा कि आज कितनी माताएं परिणामों की शुद्धिपूर्वक गर्भधारण करती है। गर्भधारण कर जन्म देना आसान बात है किंतु गर्भस्थ शिशु आत्मा के जीव में संस्कारों को परिपूर्ण करना बहुत कठिन कार्य है। वह माता धन्य है, जिसने तीर्थंकर बालक को अपने गर्भ में धारण किया हैं। 16 सपने देखना भी विज्ञान है। आचार्य श्री ने बचपन की घटना बताई कि उनकी माता पंच कल्याण्यक से एक शास्त्र लाई। उसका स्वाध्याय हम सभी करते थे। माता के संस्कार से जीवन का निर्माण होता हैं। आचार्य श्री ने बताया कि धर्मसभा में आपस में बातें नहीं कर धर्म श्रवण करना चाहिए। तभी पुण्य प्राप्त होगा। इन 5 दिनों में संयम धैर्य धारण करना चाहिए। मन को नियंत्रित रखना चाहिए।</p>
<p>धर्मसभा में अनुशासन जरूरी है तभी पुण्य मिलेगा। तीर्थंकर माता की गोद भरना पुण्य का कार्य है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि धर्मसभा में देव शास्त्र और गुरु पर श्रद्धा नहीं रखने वाला व्यक्ति जीवित होकर भी मृत समान है। गर्भ में आने के 6 माह पूर्व से जन्म होने तक 15 माह में प्रतिदिन 4 समय साढ़े तीन करोड़ रोज 14 करोड़ रत्नों की वृष्टि होती हैं।</p>
<p><strong><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-93964" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005.jpg" alt="" width="1600" height="1200" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005.jpg 1600w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-768x576.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-1536x1152.jpg 1536w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-74x55.jpg 74w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-111x83.jpg 111w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-215x161.jpg 215w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-990x743.jpg 990w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2025/11/IMG-20251109-WA0005-1320x990.jpg 1320w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" />संस्कार गोद भराई उत्सव</strong></p>
<p>श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर के श्रीमद जिनेंद्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिन तहत आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में विभिन्न कार्यक्रम हुए। प्रवक्ता रमेश काला ने बताया कि गर्भ कल्याणक उत्तरार्द्ध के तहत सुबह ध्यान और आशीर्वाद सभा के बाद श्री जिनाभिषेक एवं विधान की पूजन हुई। वर्धमान सभागार में आचार्यश्री ससंघ के मंचासीन होने के बाद आचार्यश्री के पाद-प्रक्षालन का सौभाग्य महावीर प्रसाद, शेषराज इचलकरंजी ने प्राप्त किया। वहीं शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चंद्रकला अशोक सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के दौरान वात्सल्य भोज पुर्ण्याजक परिवार का स्वागत अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिरिक्त कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार का स्वागत किया। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पदाधिकारी ने बताया कि दोपहर में प्रतिष्ठाचार्य संहितासूरी हंसमुख जैन, पंडित मनोज के निर्देशन में महा महोत्सव के पात्रों द्वारा गर्भ कल्याणक संस्कार विधि, गर्भ कल्याणक पूजा और हवन किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम की स्वर्ण सौभाग्यवती को मुख्य मंच पर चौक पूरण करने का सौभाग्य पुण्यार्जक परिवार के रूप में प्राप्त हुआ। आपके साथ सौधर्म इंद्राणी ने सहभागिता की। भगवान के माता-पिता के परिजन, महा महोत्सव के पात्र एवं सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से सीमांतन संस्कार गोद भराई उत्सव का आयोजन किया गया। शकुंतला नीरज, नितेश सोगानी को सांयकालीन आरती करने का सौभाग्य को प्राप्त हुआ। शास्त्र सभा के बाद और अष्टकुमारी और छप्पनकुमारी द्वारा गर्भ कल्याणक नाटकीय उत्तर रूप का आयोजन किया गया।</p>
<p><strong>आज ये कार्यक्रम होंगे</strong></p>
<p>श्रीमद् जिनेंद्र पंचकल्याणक प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तीसरे दिन को जन्म कल्याणक महोत्सव आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में होगा। तीसरे दिन का मुख्य आकर्षण सुमेर पर्वत के लिए जुलूस पंडाल से रवाना होगा। प्रवक्ता रमेशचंद काला ने बताया कि जुलूस मुख्य चौराहे, प्रमुख मार्ग होते हुए पुनः वर्धमान सभागार पहुंचेगा। बाद में 1008 कलशों से जलाभिषेक किया जाएगा। दोपहर 2.30 बजे जन्म कल्याणक पूजा व हवन होगा। सांय 6.30 बजे आरती, 7 बजे शास्त्र सभा और रात्रि 8 बजे पालना महोत्सव होगा। रात्रि 8.30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।</p>
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