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	<title>प्रतापगढ़ चातुर्मास &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>प्रतापगढ़ चातुर्मास &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<item>
		<title>चातुर्मास निष्ठापन और निर्वाण महोत्सव सम्पन्न</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 Oct 2022 12:18:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
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					<description><![CDATA[मुरैना (मनोज नायक)। जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव, चातुर्मास निष्ठापन एवं कलश वितरण कार्यक्रम भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुए। क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र भण्डारी एवं महामंत्री ओमप्रकाश जैन ने बताया कि भगवान श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में परम् पूज्य मुनिश्री अजीतसागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है। [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मुरैना (मनोज नायक)।</strong> जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में भगवान महावीर निर्वाण महोत्सव, चातुर्मास निष्ठापन एवं कलश वितरण कार्यक्रम भव्यतापूर्वक सम्पन्न हुए। क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र भण्डारी एवं महामंत्री ओमप्रकाश जैन ने बताया कि भगवान श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र टिकटोली में परम् पूज्य मुनिश्री अजीतसागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है।</p>
<p>मुनिश्री के पावन सान्निध्य में जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव हर्षोल्लास पूर्वक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। निर्वाण दिवस पर अभिषेक, शांतिधारा, पूजन के पश्चात निर्वाण लाडू चढ़ाया गया। इसके साथ ही चातुर्मास का समापन भी हो गया।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-28762 size-full" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012.jpg" alt="" width="1280" height="625" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012.jpg 1280w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-300x146.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-1024x500.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-768x375.jpg 768w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/10/IMG-20221026-WA0012-990x483.jpg 990w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p>मुनिश्री ने अपने शिष्यों के साथ चातुर्मास निष्ठापन की क्रियाएं सम्पन्न कीं। इसके बाद मुनिश्री ने प्रवचनों के माध्यम से सभी भक्तों को धर्मवृद्धि का आशीर्वाद प्रदान किया मुरैना में गढ़ी वाले नायक परिवार द्वारा आयोजित होने जा रहे श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान के आयोजन के लिए मुनिश्री ने नायक परिवार को आशीर्वाद प्रदान किया। विधान की पत्रिका एवं पोस्टर आदि का मुनिश्री ने अवलोकन भी किया। इस अवसर पर विधान की पत्रिका का विमोचन किया गया और क्षेत्र कमेटी की ओर से नायक परिवार को सम्मानित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर चातुर्मास स्थापना पर स्थापित किये गए मंगल कलशों का वितरण किया गया। मंगल कलश प्राप्त करने वालों में जगदीशचंद जैन भैयाजी, अभिषेक जैन टीटू (आलोक प्रेस), विनोद जैन (तार वाले), सोनू जैन (वरहाना), सुरेशचंद बाबूजी, सुमेदीलाल जैन (ख़बरोली), विवेक जैन विक्की, वीरेंद्र जैन (वावा), अनिल जैन (प्रिंसिपल), राजेन्द्र भण्डारी, प्रेमचंद जैन ( वन्दना साड़ी), वीरेंद्र जैन ठेकेदार, प्रेमचंद जैन (गढ़ी), पंकज जैन (मेडिकल), पारस जैन, डॉ. अभिषेक जैन, आशीष जैन पत्रकार सहित सभी तीर्थरक्षक सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम के समापन पर सभी के लिए सामूहिक भोज की व्यवस्था रखी गई थी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>साधन चर्या में विश्व में दिगम्बर साधु ही श्रेष्ठ साधकः आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Aug 2022 12:13:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[न्यूज़ जैन]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[मजबूरी में किए गए कार्य का फल भी मजबूरी जैसा ही न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि आपके इस राग-द्वेष के परिसर में भी हमें भगवान वीतराग की वाणी सुनने को मिल रही है, सौभाग्यशाली हैं आप। सभी सम्प्रदाय में [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li><strong>मजबूरी में किए गए कार्य का फल भी मजबूरी जैसा ही</strong></li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि आपके इस राग-द्वेष के परिसर में भी हमें भगवान वीतराग की वाणी सुनने को मिल रही है, सौभाग्यशाली हैं आप। सभी सम्प्रदाय में साधु हैं, पर साधन चर्या में विश्व में दिगम्बर साधु ही श्रेष्ठ साधक हैं, निःस्पृहीग्रही हैं, राग-द्वेष से रहित हैं। यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं, निरोगी रहना चाहते हैं तो जिन शासन चाहिए। विज्ञान आज इन कुछ वर्षों में इन बातों को बता रहा है, पर जिन वाणी, जैन साधु, जैन धर्म काफी पहले यह लिख चुके हैं। डॉक्टर कहता हं कि घास पर नंग पैर चलो, पर घास पर जीव का ह्वास किया, पाप कमाया, जीव की तरफ बिना देखे दौड़े। डॉक्टर कहता है कि रात्रि को भोजन नहीं करना है, तो नहीं करोगे, पर जिन वाणी में दिगम्बार जैन गुरु यही बात कब से कह रहे हैं। डॉक्टर कहता है कि गर्म पानी पानी है, तभी पियोगे। धार्मिक कार्य में ऐसा नहीं चलता।</p>
<p>जैन धर्म मजबूरी का नहीं, मजबूती का शासन<br />
आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज ने अपने सम्बोधन में यह भी कहा कि जैन धर्म मजबूरी का नहीं, मजबूती का शासन है। मजबूती से धर्म करिए, मजबूरी में किए गए कार्य का फल भी मजबूरी जैसा ही मिलेगा। लालच सबसे खतरनाक है। जो व्यक्ति लालच से धर्म करेगा, यह मानकर चलना कि दुर्गति तो पक्की है। कोशिश करिए कि अंतिम समय तक धर्म साथ में रहे। दुनिया भीड़ जमा करने के लिए लालच देता है, ताकि नाम हो। ललाच में किया गया कार्य व्यर्थ ही होता है। दुनिया लालच देती है, जानते हुए कि यह मजबूरी है। किसी को जबर्दसी मंदिर ला सकते हौ, जबर्दस्ती अभिषेक, स्वाध्याय चर्या करा सकते हो, पर जबर्दस्ती से कर्म नहीं करा सकते हो। जैन शासन लालचियों का नहीं है। जैन शासन तो शूरवीरों का शासन है। लालच में किया गया कार्य गर्त की ओर ही ले जाएगा।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>समर्पण की भावना बनाइए, समर्पण से शब्द भी अपने लगते हैंः आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/samarpan-kee-bhaavana-banaie-samarpan-se-shabd-bhee-apane-lagate-hainh-aachaary-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 16 Aug 2022 14:28:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुंदर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[समर्पण कीजिए, बदले में क्या मिलेगा, यह मत सोचिए न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि यदि कोई भारत का निवासी है तो देश उसका है। सम्पत्ति में उसने अपना अधिकार मांगा है तो दायित्व भी उसका ही है। समर्पण की भावना [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<ul>
<li>समर्पण कीजिए, बदले में क्या मिलेगा, यह मत सोचिए</li>
</ul>
<p><span style="color: #ff0000">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि यदि कोई भारत का निवासी है तो देश उसका है। सम्पत्ति में उसने अपना अधिकार मांगा है तो दायित्व भी उसका ही है। समर्पण की भावना बनाइए, समर्पण से शब्द भी अपने लगते हैं। आप भारतीय हैं तो ये धरती आपकी मां है। मां एक जन्म देने वाली, दूसरी धरती मां। इंडिया शब्द हमारा नहीं है, यह ब्रिटिश इंडिया की देन है। हमारी संस्कृति तो भारत है और मातृभाषा हिन्दी है। हिन्दी आपकी अपनी भाषा है। यदि आप भारतीय हैं और यहां की सम्पत्ति में अपना हक जताते हैं तो इसकी भाषा भी अपनाइए। हिन्दी, भारत शब्द दिल को सुकून देता है।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि तीर्थंकर आदिनाथ के पुत्र भरत के नाम से भारत देश पड़ा। भारत की धरा पर राम ने जन्म लिया। भगवान आदिनाथ ने रहना सिखाया। कृषि कैसे करते हैं, यह बताया। पहले पेड़-पौधे इतने थे। फल-फूल थे, कि ऑक्सीजन की कमी नहीं थी। आज ऑक्सीजन की कमी है। सिलेंडर का जमाना आ गया है। सामने वाला क्या सोचता है, यह भी आप ही सोचोगे तो फिर सामने वाला क्या सोचेगा। आप समर्पण कीजिए, बदले में क्या मिलेगा, यह मत सोचिए। पहले दूध की नदियां बहती थीं, आज दूध टंकियों में आ गया। स्वदेशी अपनाने का नारा लगाना काफी नहीं, नारा लगाने से पहले देखो कि क्या आपने स्वदेशी को अपनाया है।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने यह भी कहा कि खाना विदेशी, कपड़ा विदेशी, रहन-सहन विदेशी तो फिर कहते हो-मेरा भारत महान। क्या सिर्फ बोलने से भारत महान सकता है क्या? इंडिया नहीं, भारत बोलो, शाकाहार अपनाओ, स्वदेशी अपनाओ, देश में विकास लाओ।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भगवान महावीर ने वाणी से भी जीतकर दिखायाः आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/bhagavaan-mahaaveer-ne-vaanee-se-bhee-jeetakar-dikhaayaah-aachaary-shree-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 11 Aug 2022 14:25:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि रक्षाबंधन का पावन पर्व, 1008 श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर भगवान महावीर की वाणी बिखर रही है। आपने देखा होगा, सुना होगा, तलवार के दम पर तो सब जीतते हैं पर भगवान [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि रक्षाबंधन का पावन पर्व, 1008 श्रेयांसनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर भगवान महावीर की वाणी बिखर रही है। आपने देखा होगा, सुना होगा, तलवार के दम पर तो सब जीतते हैं पर भगवान महावीर ने वाणी से भी जीतकर दिखाया है। साधु कोई नियम देते हैं तो समझना कि यह दवाई है। जब नियम लेकर पालन करते हो तो आनन्द आता है। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि आज लव-कुश का भी जन्म हुआ है। और आज के ही दिन एक महामुनि विष्णुकुमार ने सात सौ मुनियों की रक्षा की थी। इस कारण रक्षाबंधन पर्व मुनियों की रक्षा का पर्व है। आज के दिन ही आचार्य शांतिसागर ने आपके मंदिरों की रक्षा करी थी। उन्होंने 1100 दिनों तक अन्न का त्याग कर दिया। दुनिया का काम बोलने का है। इनकी सुनोगे तो ये नरक का मार्ग ही प्रशस्त करेंगे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अपने अंदर की वीतरागत देखने का प्रयास कीजिएः आचार्य  श्री सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/apane-andar-kee-veetaraagat-dekhane-ka-prayaas-keejieh-aachaary-shree-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 09 Aug 2022 12:31:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर के सान्निध्य में बैठकर उनकी वीतराग मुद्रा को देखकर अपने अंदर की वीतरागत देखने का प्रयास कीजिए। भगवान महावीर ती देशना सुनने के बाद भी खुद का नहीं नापा-तोला तो फिर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन</p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर के सान्निध्य में बैठकर उनकी वीतराग मुद्रा को देखकर अपने अंदर की वीतरागत देखने का प्रयास कीजिए। भगवान महावीर ती देशना सुनने के बाद भी खुद का नहीं नापा-तोला तो फिर देशना सुनना व्यर्थ है। बहुत पुरुषार्थ करके आप यहां आए हो। आप अपने जीवन की वास्तविकता जानते हैं। आप अपने अथक प्रयास से, पुरुषार्थ से यहां तक आ गए हैं। नरक लोक से मध्य लोक में आ गए हैं। आप स्वर्ग, मोक्ष के पथ पर जा सकते हौ। संकल्प भाव बड़ी चीज है।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं से आगे कहा कि आपने धर्म के लिए समय निकाला तो है, पर वो भी समय घर के व्यवसाय के समय से निकाला है। ऐसे में घर के व्यवसाय की याद तो आएगी ही। मजबूरी में किए गए धर्म के परिणाम राग के होंगे या द्वेष के। आचार्यों के वचन, वाणी में कहीं ऊंचा-नीचा नहीं होता है। उनके वचन सबके लिए समान होते हैं। अमीर-गरीब सबके प्रति समान-भाव होते हैं। मैं जीव-द्रव्य हूं, मैं अविनाशी हूं, इसे कोई नहीं जानता। आप स्वयं ही जान सकते हो। आप उन वस्तुओं के लिए चिन्ता करते हैं, जो आपकी नहीं है। आप अपनी खोज कीजिए। इतनी स्वाद्वाद वाणी सुनकर भी अगर आपके भीतर वैराग्य के भाव नहीं आए तो समझना कि मटका नीचे से फूटा है, कभी भरेगा नहीं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शांति के लिए सभी प्रपंचों को छोड़ना होगाः आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/shaanti-ke-lie-sabhee-prapanchon-ko-chhodana-hogaah-aachaary-shree-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 08 Aug 2022 10:30:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर के शासन की विशेषता यही है कि हे आत्मन, सबको जान, पर सबको जानने के साथ ही स्वयं को भी जान। तू वास्तव में शांति चाहता है तो सारे प्रपंचों को [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">न्यूज सौजन्य &#8211; कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर के शासन की विशेषता यही है कि हे आत्मन, सबको जान, पर सबको जानने के साथ ही स्वयं को भी जान। तू वास्तव में शांति चाहता है तो सारे प्रपंचों को छोड़कर अपनी आत्मा का ज्ञान लेने में लग जा। जिसने स्वयं के प्रपंचों में पड़कर आत्मा को निखारा है, वही शासन लायक बन सकता है। आचार्य नेमीचंद्र जी कहते हैं कि एकसमय के लिए किया गया गलत काम कई-कई दोष लगा देगा।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि जिस अचेतन के पीछे अपनी आत्मा को क्षलित करते हो, क्या वह अचेतन वस्तु आपको क्या सुफल देगी। आपको राग-द्वेषी की आवाज ही सुनाई देती है। आप जन्म-जन्म से आत्मा-परमात्मा के बारे में सुन रहे हैं, पर सच्चे अर्थ में सुनाई ही नहीं देता। राग-द्वेष की बात क्षण भर में सुनाई दे जाती है। क्या कभी भाव बने हैं कि मैं मेरी आत्मा का ध्यान करूं। इसके लिए प्रायस तो करना ही होगा। मैं जानता हूं, मानता हूं, इससे कुछ नहीं होने वाला है। बुखार की दवाई के बारे में जानते हैं, इससे बुखार ठीक नहीं होगा। बुखार ठीक करने के लिए दवाई तो खानी ही पड़ेगी।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आपकी आत्मा निर्मल है, पर आपने कषाय बना दियाः आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/aapakee-aatma-nirmal-hai-par-aapane-kashaay-bana-diyaah-aachaary-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 07 Aug 2022 13:38:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ सौजन्य -कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर शासन के वीतराग शासन में बैठकर वीतराग साधुओं की वाणी सुनने और देखने का अवसर मिल रहा है। वीतराग मुद्रा देखकर दृष्टि बदल जाएगी। यह वाणी सुनकर आपने अपना दृष्टिकोण नहीं बदला [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">न्यूज़ सौजन्य -कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महावीर शासन के वीतराग शासन में बैठकर वीतराग साधुओं की वाणी सुनने और देखने का अवसर मिल रहा है। वीतराग मुद्रा देखकर दृष्टि बदल जाएगी। यह वाणी सुनकर आपने अपना दृष्टिकोण नहीं बदला तो समझ लेना कि आपके लिए यह वाणी बंजर भूमि में बीज डालने के बराबर ही है। जिस तरह फिल्म देखने के लिए आपको अपना ध्यान केंद्रित करना पड़ता है, उसी तरह वीतराग वाणी सुनने के लिए अपनी आत्मा की ओर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। गलत ध्यान लगाया तो गलत ही आएगा। आपकी आत्मा निर्मल है, पर आपने उसी आत्मा को कषाय बना दिया। यह कुछ वैसा ही है जैसे शक्कर की मिठास निकाल देने से शक्कर का हो जाता है। ध्यान तो आत्मा को निखारता है।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि ज्ञान का काम है जानना। ज्ञान किसी वस्तु के पास नहीं जाता और न ही कोई वस्तु ज्ञान के पास आती है। ज्ञान का कार्य है जानना और वस्तु का काम है झलकना। जो तुम्हारे अंदर बैठा है, वही तुम्हारा भगवान है। उसकी आराधना करनी है। मंदिर के भगवान को देखो और अपने अंदर के भगवान को जानो। अगर अपने अंदर के भगवान को जान गए तो जीवन सफल है। मंदिर गए, वहां किसी ने कुछ कह दिया तो मंदिर जाना बंद। ऐसा नहीं होना चाहिए। अच्छाई देखिए और उसे जीवन में अपनाइए।</p>
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		<title>समय शुभ है तो इस समय शुभ कर्म करिए-आचार्य श्री  सुन्दर सागर जी महाराज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 06 Aug 2022 10:00:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि वीतराग शासन में वीतराग वाणी सुनने को मिल रही है तो यह मानना चाहिए कि पुण्य की चक्की चल रही है। रोज मंदिर जाते हो, क्योंकि -जाना है कैसे भी-, क्यों जाना है यह [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि वीतराग शासन में वीतराग वाणी सुनने को मिल रही है तो यह मानना चाहिए कि पुण्य की चक्की चल रही है। रोज मंदिर जाते हो, क्योंकि -जाना है कैसे भी-, क्यों जाना है यह पता नहीं है। समय शुभ है तो इस समय शुभ कर्म करिए। उन्होंने उदाहरण दिया कि कुन्दकुन्द स्वामी को तो कोई प्रेरणा देने वाला नहीं था। न कोई कलम थी और न ही किताब। फिर भी उन्होंने हमसब के लिए जिनवाणी शास्त्र लिखे। उन्होंने अपना शुभउपयोग लगाया। फिर शास्त्र लिख डाले। आत्मा में रमे। आपमें भी कैवल्यज्ञान उत्पन्न करने की सामर्थ्य है। आपने अपना मूल्य नहीं समझा। जिनसे आपका कोई सम्बंध नहीं, जो आपके कोई नहीं, फिर भी आप उसे अपना कहते हैं। और जो आपकी निज आत्मा है, आपके साथ है, फिर भी आपने उससे सम्बंध नहीं बनाया। अपना नहीं कहा।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने आगे कहा कि आप इस भव में आत्मा को परमात्मा से मिला सकते हो। सबका भला करते हो। अपनी आत्मा का तो सोचो। उसकी भलाई का सोचो। भगवान यदि मंदिर में ही होते तो सारे मुनि मंदिर में ही रहते। आपने हमेशा पर को देखा है, पर स्वयं को नहीं देखा। आपको बोध नहीं कि मेरा भगवान है कौन।</p>
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		<title>समयसार पढ़ें, पर पहले यह समझें कि समयसार की जरूरत हैः आचार्य श्री सुन्दर सागर जी महाराज</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/samayasaar-padhen-par-pahale-yah-samajhen-ki-samayasaar-kee-jaroorat-haih-aachaary-shree-sundar-saagar-jee-mahaaraaj/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Aug 2022 08:44:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[पात्रता ऐसी चीज है जो बाजार में नहीं मिलती न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि धन्य हैं वे लोग, जो जिनेंद्र की वाणी सुनने में सहायक हैं। समयसार पढ़िए। पर पहले यह समझिए कि समयसार की जरूरत है। क्योंकि मेरा [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><span style="color: #3366ff;">पात्रता ऐसी चीज है जो बाजार में नहीं मिलती</span></p></blockquote>
<p><span style="color: #ff0000;">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि धन्य हैं वे लोग, जो जिनेंद्र की वाणी सुनने में सहायक हैं। समयसार पढ़िए। पर पहले यह समझिए कि समयसार की जरूरत है। क्योंकि मेरा लक्ष्य यही है। जरा सोचो, लक्ष्य तय करो। फिर आगे कार्य में निष्पादित करिए। यह कहना कि समयसार पढ़ना तो है लेकिन वापस घर में ही रहना है तो ऐसा समयसार पढ़ना आवश्यक नहीं है। अगर समयसार पढ़कर भी आपने कुछ समझा नहीं, क्रोध, माया, लोभ किया तो फिर भटकना पड़ेगा।<br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने कहा कि पात्रता ऐसी चीज है जो बाजार में नहीं मिलती। आपकी आत्मा अविनाशी है, न तो कई इसे काट सकता है और न ही कोई इसको मार सकता है। यह अपने स्व-स्थान पर ही शुद्ध है। जो शुद्ध हो गया, वह शुद्ध होकर सिद्ध हो गया। आप यह मानकर चलें कि आपके अंदर शुद्ध होने की शक्ति है। सत्य तो यही है कि यदि आप में योग्यता है तो आप शुद्धतम बन सकते हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>धर्म भी योग्यता, पात्रतानुसारः आचार्य श्री  सुन्दर सागर जी</title>
		<link>https://www.shreephaljainnews.com/dharm-bhee-yogyata-paatrataanusaarah-aachaary-shree-sundar-saagar-jee/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shreephal Jain News]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Aug 2022 08:19:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[समाचार]]></category>
		<category><![CDATA[shreephal news]]></category>
		<category><![CDATA[आचार्य सुन्दर सागर]]></category>
		<category><![CDATA[प्रतापगढ़ चातुर्मास]]></category>
		<category><![CDATA[श्रीफल न्यूज]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन प्रतापगढ़। आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महीवार के पावन-पवित्र शासन में हम सब जीवनयापन कर रहे हैं। बगवान महावीर ने पथ दिखाया था, हम सब अपनी सुविधानुसार उस पथ को अपने हिसाब से मोड़-तोड़ दिया। विचार करिए, भगवान महावीर [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #ff0000">न्यूज़ सौजन्य- कुणाल जैन</span></p>
<p><strong>प्रतापगढ़।</strong> आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा है कि भगवान महीवार के पावन-पवित्र शासन में हम सब जीवनयापन कर रहे हैं। बगवान महावीर ने पथ दिखाया था, हम सब अपनी सुविधानुसार उस पथ को अपने हिसाब से मोड़-तोड़ दिया। विचार करिए, भगवान महावीर ने णमोकार दिया। इसे आपने समुदायों में बांट दिया। आचार्य कुन्दकुन्द देव कहते हैं कि धर्म भी योग्यता, पात्रतानुसार होता है। अपनी योग्यता, पात्रता बढाइए। यदि पात्रता है, तभी जिनवाणी का श्रवण करिए। कहीं जिनवाणी श्रवण करने से बंध न हो जाए।</p>
<p><img decoding="async" class="aligncenter wp-image-26086" src="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/08/IMG-20220802-WA0151-300x225.jpg" alt="" width="450" height="338" srcset="https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/08/IMG-20220802-WA0151-300x225.jpg 300w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/08/IMG-20220802-WA0151-1024x768.jpg 1024w, https://www.shreephaljainnews.com/wp-content/uploads/2022/08/IMG-20220802-WA0151.jpg 1280w" sizes="(max-width: 450px) 100vw, 450px" /><br />
आचार्य सुन्दर सागर जी महाराज ने भक्तजनों को अपने संबोधन में आगे कहा कि मुमुक्षु वह होता हैस जो हर क्षण आत्मा में रमण करने का भाव रखता है। मोक्ष में जाने की प्यास रखने वाला मुमुक्षु है। जो अरिहंत है, वह पथ हमारा है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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