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	<title>पुष्य नक्षत्र &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र बाजार रहेगा गुलजार : दो दिन बाजार में जमकर होगी खरीदारी, उम्मीदें उफान पर  </title>
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		<pubDate>Sat, 11 Oct 2025 13:02:07 +0000</pubDate>
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<p><strong>देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
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<p><strong>मुरैना।</strong> देश में दीपावली का विशेष महत्व है। इस सबसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खूब खरीदारी होती है। इस बार दीपावली से पूर्व दो दिन पुष्य नक्षत्र होने के कारण जमकर खरीदारी होगी। कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनमें किया गया कार्य शुभ, आनंद देनेवाला होता हैं और जीवन की वृद्धि कराता है। उन्हीं 27 नक्षत्रों में एक पुष्य नक्षत्र है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि दीपावली से पहले आने वाला पुष्य नक्षत्र इस साल मंगलवार 14 और बुधवार 15 अक्टूबर को आ रहा है। यह नक्षत्र खरीदारी के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है, खासकर सोना, चांदी, वाहन और संपत्ति खरीदने के लिए।</p>
<p>जैन ने बताया इस नक्षत्र में की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। डॉ. जैन ने पुष्य नक्षत्र का महत्व बताते हुए कहा कि पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और यह धन और समृद्धि का प्रतीक भी। इस नक्षत्र में की गई खरीदारी लंबे समय तक उपयोग में रहती है और इससे घर में बरकत आती है। पुष्य नक्षत्र का संबंध देवी लक्ष्मी से है, जो धन और समृद्धि की देवी हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजन से पहले वाला पुष्य नक्षत्र विशेष महत्व रखता है।</p>
<p><strong>खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त</strong></p>
<p>पुष्य नक्षत्र के दौरान खरीदारी के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं। 14 अक्टूबर मंगलवार को प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत की चौघड़िया) सुबह 9.15 से दोपहर 1.33 बजे तक। अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 3 से शाम 4.26 बजे तक, सायाह्न मुहूर्त (लाभ) शाम 7.26 से रात 9 बजे तक। रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)। रात 10.33 से सुबह 3.14 बजे तक, 15 अक्टूबर बुधवार को शुभ की चौघड़िया प्रातः 10.41 बजे से 12.07 बजे तक। चार एवं लाभ की चौघड़िया दोपहर 2.58 बजे से 5.50 बजे शाम तक रात्रि में शुभ, अमृत एवं चर की चौघड़िया शाम 7.24 से 12.07 बजे रात्रि तक।</p>
<p><strong>पुष्य नक्षत्र में खरीदने योग्य वस्तुएं</strong></p>
<p>जैन ने कहा इस नक्षत्र में आप निम्नलिखित वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं ’सोना और चांदी’। धन और समृद्धि का प्रतीक वाहन। नए वाहन की खरीदारी के लिए शुभ संपत्तिः जमीन या मकान खरीदने के लिए उत्तम। बहीखाता। नए बहीखाते शुरू करने के लिए शुभ, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक आइटमः घर के लिए आवश्यक वस्तुएं पुष्य नक्षत्र में खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य का वास होता है। इसलिए, दीपावली से पहले आने वाले इस नक्षत्र का लाभ उठाएं और अपनी जरूरत की चीजें खरीदें।</p>
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		<title>रविपुष्य, सर्वार्थ सिद्धि योग में 6 अप्रैल को मनेगी रामनवमी: रामनवमी पर दान और पूजा का बहुत फल मिलेगा </title>
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		<pubDate>Fri, 04 Apr 2025 13:06:07 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था। भारतीय संस्कृति में इस दिन का अपूर्व पुण्य माना जाता है। इस दिन सरयू नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत, दान और पूजा करने से पुण्य लाभ मिलेगा। इस दिन विशेष संयोग भी बन रहा है। मुरैना से पढ़िए [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान राम का जन्म हुआ था। भारतीय संस्कृति में इस दिन का अपूर्व पुण्य माना जाता है। इस दिन सरयू नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत, दान और पूजा करने से पुण्य लाभ मिलेगा। इस दिन विशेष संयोग भी बन रहा है। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए मनोज जैन की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना</strong>। चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को कौशल्या की कोख से पुरुषोत्तम भगवान राम का जन्म हुआ था। भारतीय जीवन में यह दिन पुण्य पर्व माना जाता है। इस दिन पुण्य सलिला सरयू नदी में स्नान करके लोग पुण्य लाभ कमाते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ.हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस साल रामनवमी 6 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी और इस दिन सुकर्मा योग, रवि योग, रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि और पुष्य नक्षत्र का संयोग है। रविवार और रविपुष्य नक्षत्र के कारण इस बार रविपुष्य योग बन रहा है। इसलिए इस बार राम नवमी खास है। साथ ही दान और पूजा का बहुत फल मिलेगा। इस साल अष्टमी तिथि 5 अप्रैल शनिवार शाम को 7.26 मिनट तक रहेगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए उदया तिथि को नवमी तिथि होने के कारण 6 अप्रैल राम नवमी मनाई जाएगी। जैन ने कहा नवमी के इस व्रत को करने से हमें मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र के आदर्शों को पहचाने का अवसर मिलता है। हमें उन आदर्शों को अपनाना चाहिए। भगवान की गुरु सेवा, जाति, पाति का भेदभाव मिटाना, शरणागत की रक्षा करना, भाइयों का प्रेम, मातृ-पितृ भक्त, एक पत्नी व्रत, पवनसुत हनुमान तथा अंगद की स्वामी भक्ति, गिद्धराज की कर्तव्यनिष्ठता तथा केवट आदि के चरित्रों की महानता को हमें पढ़ना चाहिए और उसका अनुसरण करना चाहिए।</p>
<p><strong> रामनवमी पूजन मुहूर्त</strong></p>
<p>रामनवमी पूजा अनुष्ठान आदि करने हेतु मध्यान्ह का समय सर्वाधिक शुभ होता है। मध्यान्ह काल 6 घटी अर्थात लगभग 2 घंटे 24 मिनट तक रहता है। मध्यान्ह के मध्य का समय श्रीराम जी के जन्म के क्षण को दर्शाता है तथा मंदिरों में इस क्षण को भगवान श्रीराम के जन्म काल के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान भगवान श्रीराम के नाम का जाप और जन्मोत्सव अपने चरम पर होता है। पूजन मुहूर्त रामनवमी मध्यान्ह समय में 11.08 बजे से दोपहर 1.36 बजे तक इसका कुल समय 2 घंटे 28 मिनट। रामनवमी मध्यान्ह का क्षण दोपहर 12.22बजे रहेगा।</p>
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		<title>जीवन में बढ़ेगी धन-समृद्धि : दीपावली से पहले लगातार दो दिन पुष्य नक्षत्र खरीदारी के विशेष योग </title>
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		<pubDate>Mon, 30 Oct 2023 13:52:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि धनतेरस और दिवाली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना जाता है इस का बेसब्री से इंतजार रहता है। इसे कार्तिक पुष्य नक्षत्र कहते हैं। इस नक्षत्र में धनतेरस और दिवाली की अधिकांश खरीदारी कर ली जाती है। पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230; [&#8230;]]]></description>
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<p><span style="color: #000000;">वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि धनतेरस और दिवाली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना जाता है इस का बेसब्री से इंतजार रहता है। इसे कार्तिक पुष्य नक्षत्र कहते हैं। इस नक्षत्र में धनतेरस और दिवाली की अधिकांश खरीदारी कर ली जाती है। <span style="color: #ff0000;">पढ़िए मनोज नायक की विशेष रिपोर्ट&#8230;</span></span></p>
<hr />
<p>मुरैना। धनतेरस और दिवाली के पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना जाता है। इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। इसे कार्तिक पुष्य नक्षत्र कहते हैं। इस नक्षत्र में धनतेरस और दिवाली की अधिकांश खरीदारी कर ली जाती है। वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि 27 नक्षत्रों में पुष्&#x200d;य नक्षत्र को ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ कहा है। यह नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा है जैसे जंगल के जानवरों में शेर। पुष्&#x200d;य नक्षत्र में ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कपड़े, जमीन, भूमि, मकान, वाहन खरीदारी, गृह प्रवेश करना, निवेश करना लंबे समय तक सुख, लाभ देता है । जीवन में धन-समृद्धि बढ़ती है। शनि और रवि पुष्&#x200d;य नक्षत्र का योग बनना तो बेहद ही शुभ होता है। इसमें खरीदारी के अलावा रविपुष्य नक्षत्र यंत्र, मंत्र, तंत्र और जड़ी बूटी ग्रहण करने के लिए भी विशेष फलदायी होता है। इस बार दीपावली से पहले लगातार शनि और रविवार को यह नक्षत्र रहेगा जो इस बार दुर्लभ संयोग बनाने जा रहा है।</p>
<p>निवेश रहेगा शुभ</p>
<p>4 नवम्बर शनिवार को शनि पुष्य, 5 नंवबर रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र बन रहा है। दिवाली से पहले बन रहा यह शनि, रवि पुष्&#x200d;य योग धन-समृद्धि पाने का सुनहरा मौका है। इस दिन खरीदारी और निवेश करना बहुत शुभ रहेगा। साथ ही रवि पुष्&#x200d;य योग में किए गए कुछ उपाय बहुत लाभकारी साबित होते हैं। जैन के अनुसार खास बात ये है कि इस दिन एक साथ कई अन्य शुभ योग भी बन रहे हैं। 4 नवंबर शनिवार के दिन शनि पुष्य के साथ बुधादित्य योग, पराक्रमी योग और साध्य योग वहीं 5 नवंबर रविवार को रवि पुष्य के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, पराक्रमी योग, बुधादित्य योग और शुभ योग बन रहा है। इस शुभ संयोग पर महालक्ष्मी के साथ अपने कुलदेव या आराध्य की पूजा करने से महालक्ष्मी का वास घर में बना रहता है।</p>
<p>कब से कब तक पुष्य नक्षत्र रहेगा<br />
4 नवंबर शनिवार को सुबह 7:57 मिनट से शुरु होकर पुष्य नक्षत्र 5 नंवबर रविवार सुबह 10:30 मिनट तक रहेगा।<br />
दीपावली से पहले शुभ कार्य करने और खरीददारी के अन्य योग<br />
धन त्रियोदशी:- 10 नवम्बर को<br />
सर्वार्थ सिद्धि योग :- 1,3,5,11 नवम्बर को।<br />
रवि योग :- 3 को<br />
त्रिपुष्कर योग:- 4 को</p>
<p>सुख, समृद्धि प्राप्त करने और जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के उपाय</p>
<p>-जैन ने ज्योतिष के अनुसार इस नक्षत्र में जीवन को उन्नति के कुछ कारगार उपाय बताए हैं।<br />
-अगर शनि के प्रकोप से आप परेशान हैं या शनि की ढैय्या, शनि की साढ़ेसाती और शनि की महादशा से जो लोग पीड़ित हैं, तो इस दिन सरसों का तेल रोटी पर लगाकर कुत्ते को खिलाएं।<br />
-इस नक्षत्र में दूध का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है<br />
-पुष्य नक्षत्र के दिन अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर उनके बीच में कुमकुम से बिंदी लगाएं।<br />
-इस दिन दक्षिणावर्ती शंख और श्रीयंत्र की विधि के अनुसार पूजा करने और घर में धन-धान्य, सुखों के लिए एकाक्षी नारियल को एक लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या मंदिर में रखें।<br />
-अगर किसी के विवाह होने में बाधा आ रही है तो कच्ची हल्दी की गांठ पीले कपड़े में बांध कर अपने हाथ की भुजा में बांधें।</p>
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