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	<title>पुण्योदय &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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	<description>ताज़ा खबरे हिन्दी में</description>
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	<title>पुण्योदय &#8211; श्रीफल जैन न्यूज़</title>
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		<title>हम ऐसे कर्म करें जिससे मनुष्य जन्म लेना सार्थक हो : सिद्ध परमेष्ठियों की भक्ति मय पूजन के साथ समर्पित होंगे 256 अर्घ्य  </title>
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		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 11:54:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति उपासना के अनुष्ठान के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पुण्योदय से ही हम सभी को मनुष्य पर्याय में जन्म मिला है। जब हमें मनुष्य पर्याय मिली है तो हमें ऐसे कर्म करना चाहिए, जिससे हमारा मनुष्य जन्म लेना सार्थक हो जाए। [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति उपासना के अनुष्ठान के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पुण्योदय से ही हम सभी को मनुष्य पर्याय में जन्म मिला है। जब हमें मनुष्य पर्याय मिली है तो हमें ऐसे कर्म करना चाहिए, जिससे हमारा मनुष्य जन्म लेना सार्थक हो जाए। <span style="color: #ff0000">मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>मुरैना।</strong> सिद्धों की आराधना पूजा भक्ति उपासना के अनुष्ठान के अवसर पर बड़े जैन मंदिर में मुनिश्री विलोकसागरजी महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पुण्योदय से ही हम सभी को मनुष्य पर्याय में जन्म मिला है। जब हमें मनुष्य पर्याय मिली है तो हमें ऐसे कर्म करना चाहिए, जिससे हमारा मनुष्य जन्म लेना सार्थक हो जाए। अच्छे कर्म करोगे तो सुखद परिणाम मिलेगे, बुरे कर्म करोगे तो दुखद परिणाम मिलेंगे। जैन दर्शन के अनुसार मनुष्य के तीन मित्र उसके कर्म, परिवार और धन हैं। कर्म सबसे सच्चा और स्थायी मित्र है। जीवन भर किए गए कर्म ही मृत्यु के बाद आत्मा के साथ जाते हैं। परिवार और प्रियजन केवल जीवन भर साथ देते हैं और मृत्यु के बाद, श्मशान तक ही मित्र बने रहते हैं। मृत्यु के साथ उनकी मित्रता का अंत हो जाता है। धन भी एक क्षणिक मित्र है। श्वासों की लय समाप्त होते ही धन से बनी मित्रता समाप्त हो जाती है। व्यक्ति के कर्म जीवन के हर मोड़ पर उसका साथ देते हैं। अच्छे कर्म व्यक्ति को अच्छे परिणाम देते हैं, जबकि बुरे कर्म उसकी दुर्गति का कारण बनते हैं। इसीलिए धर्म को, मनुष्य के कर्मों को ही सच्चा मित्र कहा गया है। वे हर समय जन्मजन्मांतर तक उसके साथ रहते हैं।</p>
<p><strong>जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं</strong></p>
<p>प्रतिष्ठाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक, शांतिधारा के पश्चात विधानकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धाभक्ति के साथ विधि विधान एवं शुद्धि सहित सिद्धों की अर्चना करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। विधान के पांचवें दिन मंगलवार को 256 अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। पुण्य कर्मों के कारण ही हम सभी धार्मिक अनुष्ठान करने का पावन अवसर प्राप्त होता है। इस पवित्र मौके का हमें पूरा लाभ लेना चाहिए। विधान के चतुर्थ दिन संगीत की मधुर धुन पर पूजा भक्ति करते हुए सभी इंद्र-इंद्राणियों ने अष्टदृव्य अर्घ्य के साथ 128 श्रीफल समर्पित किए। सिद्धों की आराधना करते हुए कुबेर इंद्र ने भक्तिमय भजनों पर भक्ति नृत्य प्रस्तुत करते हुए रत्नों की वर्षा की। विधान की पूजन से पूर्व सौधर्म इंद्र के साथ अन्य सभी इन्द्रो ने श्री जी की प्रतिमा का अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन कर संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। विधानाचार्य पंडित राजेंद्र शास्त्री मंगरोनी ने मंत्रोच्चारण करते हुए सभी क्रियाओं को सम्पन्न कराया।</p>
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		<title>24 घंटे में एक कार्य स्वार्थ रहित होकर अवश्य करें : आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने कहा-जीवन संवर जाएगा </title>
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		<pubDate>Sun, 02 Nov 2025 15:48:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान पधारे। सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की खबर&#8230; सहारनपुर। जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) [&#8230;]]]></description>
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<p><strong>जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान पधारे। <span style="color: #ff0000">सहारनपुर से पढ़िए, सोनल जैन की खबर&#8230;</span></strong></p>
<hr />
<p><strong>सहारनपुर।</strong> जीवन है पानी की बूंद महाकाव्य के मूल रचनाकार आचार्य श्री विमर्शसागर जी अपने विशाल चतुर्विध संघ (30 पिच्छी) के साथ प्रथम बार प्राचीन धर्मनगरी रामपुर मनिहारान पधारे। 27 अक्टूबर को धर्मनगरी सहारनपुर से चातुर्मास के बाद पद‌विहार करते हुए 31 अक्टूबर को आचार्य गुरुवर चतुर्विध संघ सहित रामपुर मनिहारान में आए। प्रातः बेला में सकल जैन समाज के साथ संपूर्ण नगरवासी जनों ने आचार्य संघ की भव्य मंगल अगवानी करते हुए जैन मंदिर के दर्शन कराते हुए कन्या विद्यालय के प्रांगण में पदार्पण कराया।</p>
<p>स्थानीय जैन समाज एवं आगन्तुक भक्तों से भरी धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आचार्य भगवन ने कहा आज आपको मन,वचन और यह देह प्राप्त हुई है। यह आपके ही पूर्वोपार्जित पुण्योदय का फल है। आपको आज धन-वैभव प्राप्त हुआ। वह भी पुण्य का फल है। याद रखो-पुण्य के फल से आपको सांसारिक धन संपदा प्राप्त हो सकती है किन्तु यदि आपको धर्म चाहिए तो वह मात्र पुण्य से प्राप्त नहीं होगा।</p>
<p><strong>मानव धर्म की खोज कर रहा</strong></p>
<p>धर्म यदि चाहिए तो वह पुष्य के साथ-साथ पुरुषार्य से प्राप्त होगा।1 नवम्बर को आचार्यश्री ने अपने मंगल उपदेश में कहा कि आज हर मानव धर्म की खोज कर रहा है, धर्म के लिए मंदिर-मंदिर घूम रहा है किन्तु प्रभु तीर्थंकर महावीर स्वामी कहते हैं कि धर्म कहीं बाहर नहीं मिलेगा। धर्म अपनी ही आत्मा में सम्यग्दर्शन-ज्ञान-चारित्र के रूप में मिलता है लेकिन, ध्यान रहे वह धर्म सच्चे देव-शास्त्र गुरु के आश्रय के बिना भी कभी प्राप्त नहीं होता। इसीलिए सच्चे धर्माभिलाषी मानव को सच्चे देव-शास्त्र गुरु की शरण में रहकर समीचीन रत्नत्रय धर्म की प्राप्ति करना चाहिए।</p>
<p><strong>जन्म और जीवन सफल</strong></p>
<p>आचार्य श्री विमर्शसागर जी का विशाल चतुर्विध संघ तीन दिन तक रामपुर मनिहारान के श्री दिगम्बर जैन मंदिर में प्रवास करते हुए नगरवासियों को धर्मलाभ प्रदान कर रहे हैं। नगर के इतिहास में प्रथम बार इतना विशाल चतु‌र्विध का पदार्पण हुआ है। जैन-अजैन सभी श्रद्धालु गण प्रातः मध्याह्न, संध्या और रात्रि बेला में संघ की सेवा करते हुए अपने जन्म और जीवन को सफल कर रहे हैं।</p>
<p><strong>3 नवंबर को ननौता में होगा ससंघ का प्रवेश</strong></p>
<p>2 नवम्बर, रविवार को धर्मसभा में आचार्य श्री ने कहा कि अपना सम्पूर्ण जीवन स्वार्थ में ही बिता देता है। कोई बिरला ही स्वार्य मुक्त जीवन जी पाता है, संत जीवन स्वार्थ से रहित होता है। स्वार्थ में मनुष्य अकरणीय कार्य भी कर बैठता है। यदि आप जीवन में आनंद चाहते हैं, धर्म को प्राप्त करना चाहते है तो 24 घंटे में एक कार्य ऐसा अवश्य करें जो स्वार्थ से रहित हो, आपका यह एक कार्य ही आपके पूरे जीवन को संवार लेगा। मानव</p>
<p>3 नवम्बर सोमवार की प्रातः बेला में आचार्य श्री ससंघ रामपुर मनिहारान से पद विहार करते हुए ननौता नगर में प्रवेश करेंगे। 3 नवंबर को ननौता, 6 नवंबर को जलालबाद और 9 नवंबर को शामली पहुंचेंगे।</p>
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